टॉम हॉलैंड ताज होटल के टाटा सुइट में ठहरे, किराया जानकर चौंकेंगे

 नई दिल्ली
हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता टॉम हॉलैंड इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। वह अपनी अपकमिंग फिल्म ‘द ओडिसी’ के प्रमोशन के लिए यहां आए हैं। अपने दौरे के दौरान वह मुंबई के मशहूर ताज महल पैलेस होटल में रुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिनेता होटल की सबसे आलीशान जगहों में से एक टाटा सुइट में ठहरे हैं। इसका 24 घंटे का किराया काफी ज्यादा है।

टाटा सुइट में क्या है खास?
टाटा सुइट बेहद लग्जरी जगह है। यह किसी होटल रूम जैसा नहीं है, बल्कि यह किसी अपार्टमेंट जैसा लगता है। इसमें कई सुविधाएं मौजूद हैं। यह सुइट अपनी अलग शैली, एंटीक फर्नीचर और अलग तरह की विरासत के लिए जाना जाता है।
बताया जाता है कि इसका किराया सीजन और उपलब्धता के हिसाब से लगभग 7 से 12 लाख रुपये तक होता है।

क्या हैं सुविधाएं?
टाटा सुइट में दो बेडरूम, बड़ा लिविंग एरिया, डाइनिंग रूम, 15 लोगों के साथ मीटिंग करने का कमरा, एक निजी ऑफिस, लाउंज, स्पा, निजी जिम, बटलर पैंट्री और अलग से बेडरूम जोड़ने की सुविधा है।

पहले भी भारत आ चुके टॉम हॉलैंड
टॉम हॉलैंड की अपकमिंग फिल्म ‘द ओडिसी’ रिलीज होने वाली है। अभिनेता इसकी स्क्रीनिंग के लिए शुक्रवार को भारत पहुंचे। उन्हें मुंबई के कालिना एयरपोर्ट से निकलते और ताज महल पैलेस जाते हुए देखा गया। टॉम हॉलैंड दूसरी बार भारत आए हैं। इससे पहले वह साल 2023 में भारत आए थे।

ग्लोबल प्रमोशनल टूर में शामिल मुंबई
टॉम हॉलैंड के साथ फिल्म ‘द ओडिसी’ के निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन और निर्माता एम्मा थॉमस भारत पहुंचे हैं। ये सभी फिल्म के ग्लोबल प्रमोशनल टूर पर निकले हैं। इनके टूर में लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क के साथ मुंबई भी शामिल है।
यह पहला मौका है जब क्रिस्टोफर नोलन की किसी फिल्म का भारत में खास प्रीमियर हो रहा है।

कब रिलीज होगी ‘द ओडिसी’?
‘द ओडिसी’ क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म है, जो होमर की क्लासिक कहानी पर आधारित है। इसमें ओडीसियस की ट्रोजन वॉर के बाद घर लौटने की 10 साल लंबी यात्रा को दिखाया गया है।
फिल्म में ऐनी हैथवे, टॉम हॉलैंड और मैट डेमन के अलावा जेंडाया, रॉबर्ट पैटिंसन, शार्लीज थेरॉन, लुपिता न्योंगो, इलियट पेज, मिया गोथ, जॉन लेगुइजामो और ट्रैविस स्कॉट भी नजर आएंगे। यह फिल्म 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

 

‘नो बिकिनी, नो इंटीमेट सीन्स’ पर अड़ीं काजल अग्रवाल, प्रोड्यूसर्स से कहा- माफ करें; बताई वजह

मुंबई 

साउथ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरने वाली मशहूर एक्ट्रेस काजल अग्रवाल इन दिनों अपने एक बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं. अक्सर फिल्मी दुनिया में देखा जाता है कि एक्टर्स बड़े बैनर या बड़े स्टार्स के साथ काम करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन काजल अग्रवाल का सोचना इससे बिल्कुल अलग है। 

हाल ही में Zoom को दिए इंटरव्यू में काजल ने फिल्मों और किरदारों के सिलेक्शन को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने साफ किया कि वह किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनती हैं. अगर उन्हें किसी रोल में थोड़ी सी भी हिचक या असहजता महसूस होती है, तो वह बिना किसी झिझक के उस बड़े प्रोजेक्ट को छोड़ देती हैं. काजल का मानना है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए अपनी मर्यादा और सीमाओं से समझौता करना बिल्कुल सही नहीं है। 

अंतरात्मा की आवाज सुनना सबसे जरूरी
काजल अग्रवाल ने अपने प्रोजेक्ट्स चुनने के तरीके को लेकर बताया कि वह हमेशा अपने दिल की बात मानती हैं. उनका कहना है कि इंसान को खुद के प्रति ईमानदार होना बहुत जरूरी है. काजल ने कहा, ‘मैंने अपने पूरे करियर में इसी बात को फॉलो किया है. मैं हमेशा वही काम करती थी जो मुझे स्वाभाविक और सही लगता था. अगर किसी रोल या सीन को लेकर मेरे मन में जरा सा भी संकोच होता था, तो मैं सीधे निर्माताओं से कह देती थी कि मुझे माफ करें, मैं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन सकती. मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि फिल्म कितनी बड़ी है या रोल कितना महत्वपूर्ण है, अपनी सीमाएं तय करना सबसे जरूरी है। 

बिकिनी और बोल्ड सीन्स से बनाई दूरी
इंटरव्यू के दौरान काजल ने उन व्यक्तिगत सीमाओं का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद से हमेशा बनाए रखा. बोल्ड और इंटीमेट सीन्स पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने साफ कहा कि वह स्क्रीन पर बिकिनी पहनने में कभी सहज नहीं रहीं. काजल के मुताबिक, ‘यह पूरी तरह से मेरा पर्सनल फैसला है और मैं इसे पर्दे पर नहीं दिखाना चाहती थी. इसके साथ ही बहुत ज्यादा इंटीमेट यानी अंतरंग सीन करने से भी मुझे हमेशा परहेज रहा है, क्योंकि यहीं पर मैं अपनी पर्सनल बाउंड्री तय करती हूं. मैंने हमेशा अपनी इन सीमाओं का सम्मान किया और कभी इन्हें पार नहीं किया. आखिरकार, सबसे ज्यादा यही मायने रखता है कि आप खुद के प्रति कितने सच्चे हैं। 

बॉलीवुड-साउथ में किया काम
अपनी इस मजबूत और बेबाक सोच के दम पर ही काजल अग्रवाल ने भारतीय सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया है. उन्होंने न सिर्फ तेलुगु और तमिल फिल्मों में अपनी धाक जमाई, बल्कि हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। 

पिछले कुछ सालों में उन्होंने ‘मगधीरा’, ‘सिंघम’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर और कमर्शियल हिट फिल्में देकर खुद को इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेसेस की कतार में खड़ा किया है. उनका यह सफर दिखाता है कि बिना किसी समझौते के भी इंडस्ट्री में कामयाबी हासिल की जा सकती है। 

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ के टिकट 47 हजार तक पहुंचे, फैंस में जबरदस्त क्रेज

 

हॉलीवुड फिल्म ‘द ओडिसी’ दुनिया भर में इस साल की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है। क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म हमेशा चर्चा का विषय बनती है। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती हैं। यही वजह है कि ‘द ओडिसी’ को लेकर काफी क्रेज है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टिकट बेचने वाले (स्केल्पर्स) पहले दिन के टिकट 500 डॉलर (लगभग 47500 रुपये) तक में बेच रहे हैं।

फिल्म के लिए दीवाने हैं फैंस
क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ के लिए फैंस की दीवानगी चरम पर है। पिछले महीने जब इसके टिकट की बिक्री शुरू हुई, तो कई टिकटिंग साइट्स क्रैश हो गईं। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक न्यूयॉर्क में एएमसी लिंकन स्क्वायर और लॉस एंजिल्स में एएमसी सिटीवॉक जैसी मशहूर जगहों पर हफ्तों तक के टिकट लगभग बिक चुके हैं। इसके बावजूद लोग इन मशहूर जगहों पर सीट पाने की कोशिश कर रहे हैं। एपी के मुताबिक ईबे पर टिकट बेचने वाले 500 डॉलर (47500 रुपये) से ज्यादा कीमत पर टिकट बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
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भारत में कितनी है टिकटों की कीमत?
भारत में, ‘द ओडिसी’ के आइमैक्स टिकटों की बिक्री रिलीज से एक महीने पहले ही शुरू हो गई थी। फिल्म की रिलीज में एक हफ्ता बाकी है। मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में प्रीमियम टिकट की कीमत 3300 रुपये तक है। ज्यादातर थिएटरों में टिकट बिक चुके हैं

महाकाव्य पर आधारित है फिल्म
आपको बता दें कि फिल्म ‘द ओडिसी’ होमर की ग्रीक महाकाव्य पर आधारित है, जिसे 2500 साल से भी पहले लिखा गया था। बताया जाता है कि यह साहित्य की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली रचनाओं में से एक पर आधारित है।

कब रिलीज होगी फिल्म?
‘द ओडिसी’ में मैट डेमन, इथाका के पौराणिक राजा ओडिसियस की भूमिका में हैं। यह फिल्म ट्रोजन युद्ध के बाद उनके घर लौटने की खतरनाक यात्रा को दिखाती है। फिल्म में ऐनी हैथवे, टॉम हॉलैंड, जेंडया, रॉबर्ट पैटिनसन और चार्लीज थेरॉन भी अहम भूमिकाओं में हैं। ‘द ओडिसी’ 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

 

CBFC कैसे देता है फिल्मों को सर्टिफिकेट, जानिए पूरी प्रक्रिया और नियम

इंडिया में सेंसर बोर्ड (CBFC) को लेकर सबके मन में कुछ सवाल घूमते रहते हैं- किस बेसिस पर ये फिल्मों को सर्टिफिकेट देते हैं? आखिर सेंसर बोर्ड फिल्म में इतने कट्स क्यों लगा देता है? क्यों किसी डायलॉग को यूं ही बदल दिया जाता है? सबसे महत्वपूर्ण सवाल- क्यों किसी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर देते हैं? ये आखिरी सवाल इन दिनों काफी चर्चा में बना हुआ है.

दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज, जो पहले पंजाब 95 थी उसे सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया था. वो इसमें करीब 120 कट्स लगाने की मांग कर रहे थे, जिसे मेकर्स ने नहीं स्वीकार किया. उन्होंने बिना सेंसर सर्टिफिकेट इसे सीधा ओटीटी पर चुपचाप रिलीज किया. इसके बाद से विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया. दिलजीत की फिल्म के अलावा सेंसर बोर्ड में तमिलनाडु के सीएम थलपति विजय की फिल्म जन नायगन भी अटकी हुई थी, जिसे अब करीब 7 महीने बाद जाकर सेंसर बोर्ड से A सर्टिफिकेट मिला.

विजय की जन नायगन के साथ भी कुछ मुद्दे थे जो सुलझ नहीं रहे थे. इसमें कुछ आपत्तिजनक सीन्स थे, जिससे कई लोगों की भावनाएं आहत हो सकती थी. इसलिए सर्टिफिकेट रोका गया था. अब थलपति तो सेंसर बोर्ड की परीक्षा में पास हो गए, मगर दिलजीत अभी तक अटके हुए हैं. अब किसी फिल्म को किस तरह सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट देती है, जान‍िए.

कैसे काम करता है CBFC?
CBFC का सदस्य राज मिश्रा ने एक इंटरव्यू में सेंसर बोर्ड की पूरी प्रक्रिया पर कहा- CBFC से सर्टिफिकेट लिए बिना किसी फिल्म को सार्वजनिक तौर पर दिखाना कानूनी अपराध है. ऐसा करने पर सजा हो सकती है. CBFC के चेयरमैन की नियुक्ति सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है. फिलहाल प्रसून जोशी CBFC के चेयरमैन हैं. हर फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले CBFC की 5 सदस्यों वाली एक कमेटी फिल्म देखती है. अगर इन 5 में से कम से कम 3 सदस्य फिल्म के पक्ष में फैसला देते हैं, तो फिल्म को सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है.

राज मिश्रा ने आगे तीन तरह के सर्टिफिकेट (A, U, U/A) की पूरी प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि अगर कोई फिल्म पूरी तरह क्राइम और वॉइलेंस से भरी है, तो उसे A सर्टिफिकेट दिया जाता है जिसमें 18 साल से ऊपर के लोग ही वो फिल्म देख सकते हैं. वहीं अगर किसी फिल्म में थोड़ी बहुत मार-धाड़ और क्राइम है तो उसे U/A सर्टिफिकेट मिलता है जिसमें छोटे बच्चे भी माता-पिता की गाइडेंस में पिक्चर देख सकते हैं. U सर्टिफिकेट आमतौर पर उस फिल्म को दिया जाता है, जिसे हर उम्र का व्यक्ति देख सकता है. राज मिश्रा के मुताबिक, सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया सुरक्षा प्रावधान के कारण होती है.

फिल्म पास नहीं हुई, तो क्या होता है?
राज मिश्रा ने आगे ये भी बताया कि अगर कोई फिल्म पहली कमेटी की तरफ से पास नहीं होती है, तब फिल्ममेकर्स फिर से अपनी फिल्म को री-एग्जामिन करने की अर्जी डालते हैं. इसमें एक दूसरी कमेटी इसमें शामिल होती है जिसमें 11 सदस्य मौजूद रहते हैं. अगर इसमें भी फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट नहीं मिलता है, तब मेकर्स दिल्ली में द ट्रिब्यूनल को अप्रोच करते हैं. हालांकि उनके मुताबिक, ऐसे बड़े कम केस ही हुए हैं.

कैसे पास होती है पिक्चर?
राज मिश्रा ने एक फिल्म को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने की प्रक्रिया भी बताई. उन्होंने कहा- फिल्म की कहानी और उसे दिखाने का तरीका आज के दौर के हिसाब से होना चाहिए. समय के साथ नियम भी बदलते रहते हैं. आज हल्के-फुल्के वॉइलेंस को लोग आम तौर पर स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन अगर किसी फिल्म में बहुत ही डरावने और खौफनाक हिंसक सीन हों, जैसे किसी का जबड़ा उखाड़ देना, तो हमें ये देखना पड़ता है कि ऐसे सीन्स दर्शकों पर बुरा असर ना डालें.

‘कोई भी फिल्म देश-विरोधी सोच को बढ़ावा नहीं देनी चाहिए और ना ही देश या उसकी नीतियों का अपमान करना चाहिए. फिल्म का मकसद सिर्फ एंटरटेन करना हो सकता है, लेकिन उसे लोगों को भड़काने या अशांति फैलाने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए. फिल्म बनाने वालों को अपनी बात कहने की पूरी आजादी है, लेकिन इस आजादी की कुछ सीमाएं भी होती हैं.’

राज मिश्रा से आगे एक और अहम सवाल पूछा गया कि क्या कभी सेंसर बोर्ड किसी नेता के बातों में आकर फिल्म के सर्टिफिकेशन में बदलाव करती है? तो इसपर उन्होंने सफाई देते हुए कहा- मैं अभी भी CBFC का सदस्य हूं. आज तक मुझे किसी भी फिल्म को लेकर किसी तरह का दबाव डालने वाला फोन नहीं आया है. हमें पहले से ये नहीं बताया जाता कि किस फिल्म की सेंसर स्क्रीनिंग करनी है या वो फिल्म किसकी है. ये जानकारी हमें स्क्रीनिंग के समय ही दी जाती है.

‘शायद हो सकता है किसी फिल्म को राजनीतिक समर्थन मिला हो, लेकिन उसकी जानकारी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंचती. CBFC का काम सिर्फ ये देखना होता है कि फिल्म से किसी की भावनाएं एक तय सीमा से ज्यादा आहत ना हों. बोर्ड का काम इसी जिम्मेदारी तक सीमित रहता है.’

बिना सेंसर सर्टिफिकेट क्या है फिल्म रिलीज करने की सजा?
राज मिश्रा के मुताबिक, अगर कोई फिल्म बिना सेंसर से पास हुए रिलीज की जाती है, तो उसे कानूनी अपराध माना जाता है. दिलजीत की फिल्म सतलुज बिना सेंसर सर्टिफिकेट के रिलीज हुई. वैसे सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 7 के तहत ऐसा करना दंडनीय प्रावधान हैं जिसमें अपराधियों को तीन साल तक की कैद, भारी जुर्माना और फिल्म-स्क्रीनिंग से जुड़ी सभी चीजों को जब्त किए जाने का सामना करना पड़ सकता है. ये जुर्माना 1 लाख रुपये तक भी हो सकता है.

देखा जाए तो दिलजीत की फिल्म सतलुज सीधा ओटीटी पर रिलीज हुई, जहां कोई सेंसरशिप नहीं है. ऐसे में क्या इस फिल्म के खिलाफ कोई एक्शन लिया जाएगा? ये देखने वाली बात होने वाली है.

राजपाल यादव को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, चेक बाउंस केस में जेल का रास्ता साफ; जुर्माना भी लगा

नई दिल्ली/ मुंबई 

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस केस में उन्‍हें 3 महीने जेल की सजा सुनाई है। शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए एक्‍टर पर जुर्माना भी लगाया है। साथ ही सजा बरकरार रखते हुए राजपाल यादव के व्यवहार को ‘संदिग्ध’ बताया और अधिकारियों से उन्हें वापस जेल भेजने को कहा। बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को अदालत ने चेक बाउंस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें फिर से जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में एक्टर का रवैया संदिग्ध रहा है।

मामला साल 2010 का है, जब 5 करोड़ का कर्ज लिया था
यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और इसके बाद वह तय समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। इसी वजह से मामला अदालत तक पहुंच गया।

2018 में छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी
अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को सही माना। फिर एक्टर ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां बता दें कि साल 2025 के आखिर तक, सात अलग-अलग मामलों में करीब 9 करोड़ रुपये का कर्ज़ बकाया था, जिसमें यादव को हर मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये चुकाने थे।

कोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे
जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाई थी और बकाया करीब 9 करोड़ रुपये चुकाने के लिए उन्हें ईमानदारी से प्रयास करने का मौका दिया था। लेकिन अदालत के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे। इसी वजह से इस साल 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और अब उनकी सजा को भी बरकरार रखा गया है।

कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास पाया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक मौके पर कहा था, ‘मेरे सवालों के जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। अंडरटेकिंग में जो बात कही गई थी, अब उससे अलग बातें सामने रखी जा रही हैं।’ कोर्ट के इस कॉमेंट से साफ था कि उसे राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास नजर आया।

जस्टिस ने कहा- राजपाल यादव को कई बार मौके मिले
 जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने अभिनेता राजपाल यादव द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए दोषसिद्धि को कायम रखा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव को अदालत में दिए गए अपने अंडरटेकिंग  का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बार-बार अवसर मिलने के बावजूद उसका पालन नहीं किया। 

कोर्ट ने कितना जुर्माना लगाया
अदालत ने हर मामले में 1.05 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है.  इस तरह सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ बनता है. अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार शिकायतकर्ता  को और 25 हजार राज्य  को अदा किए जाएंगे। 

चेक बाउंस मामला क्या है?
 राजपाल यादव ने 2010 में एक फिल्म बनाई थी. इसका नाम था अता पता लापता. फिल्म के लिए राजपाल यादव ने 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था. हालांकि, राजपाल यादव का कहना था कि ये एक इंवेस्टमेंट था. राजपाल यादव ये लोन चुका नहीं पाए और ये बढ़कर 9 करोड़ हो गया. इसी केस में उन्होंने 5 फरवरी 2026 में तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था. उस मुश्किल दौर में सोनू सूद सहित कई एक्टर्स ने उनकी मदद की थी। 

राजपाल यादव ने कहा था- मेरे पास 1200 करोड़ का काम है
राजपाल यादव ने ये भी कहा था कि  ‘अगले साल सालों में मेरे पास ब्रांडिंग के लिए 1200 करोड़ रुपये का काम है. मेरे पास 4 एग्रीमेंट हैं, इसमें फिल्में शामिल नहीं हैं. कोई प्रोजेक्ट 200 करोड़ रुपये का है, कोई 2000 करोड़ रुपये का. इसमें से कुछ फीस है और कुछ प्रोजेक्ट्स में शेयर हैं. मेरी 10 फिल्में लाइन में हैं। 

मैं चलती फिरती चेकबुक हूं- राजपाल यादव
तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने कहा था, ‘मैं कहना चाहता हूं कि मैं पैसों से घिरा हुआ हूं, राजपाल चलती फिरती चेक बुक है. मैं पैसा कमाता हूं, मैं लोगों को पैसा कमाने में मदद करता हूं, और कई घर इस पर डिपेंड करते हैं। 

आपको बता दें कि हाल ही में राजपाल यादव फिल्म ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टु द जंगल’ में नजर आए थे. दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। 

‘राजपाल यादव अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते’
शिकायतकर्ता कंपनी की तरफ से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने कोर्ट में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में अब वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की
मामले को खत्म करने के लिए हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की। कोर्ट के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर मामले का पूरा और अंतिम निपटारा करने के लिए भी तैयार हो गई थी लेकिन पिछली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके
राजपाल यादव ने कोर्ट में कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी रकम चुका चुके हैं। इसके बाद अदालत ने 3 करोड़ रुपये तय समय के भीतर चुकाने का एक तरीका भी सुझाया। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक न्यायिक सुझाव है, कोई अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

‘काला हिरण’ विवाद के बीच मेकर्स का ऐलान, 17 जुलाई को टीजर

फिल्म ‘काला हिरण’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है. फिल्म को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन इसके बावजूद मेकर्स के हौसले पस्त नहीं हुए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कानूनी सुनवाई के बीच मेकर्स ने अब इस फिल्म का दूसरा पोस्टर जारी कर दिया है. इस नए पोस्टर के सामने आने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है.

इसके अलावा मेकर्स ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और इसी सिलसिले में अब आने वाली 17 जुलाई को फिल्म का धमाकेदार वीडियो टीजर भी रिलीज किया जाएगा. फिल्म के फर्स्ट लुक को लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है.

मेकर्स पीछे हटने को तैयार नहीं
फिल्म ‘काला हिरण’ को बनाने वाले मेकर्स के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. फिल्म के प्रोड्यूसर ने अपनी बात खुलकर सामने रखते हुए कहा कि इस वक्त वे एक बेहद अजीब और मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. उन्हें एक तरफ जहां दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टर्स की ओर से लगातार धमकियां भी मिल रही हैं. प्रोड्यूसर का कहना है कि वे इस समय कानून और अपराधियों, दोनों के निशाने पर हैं, लेकिन इसके बावजूद वे कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हैं.

दबाव में झुकने से इनकार
प्रोड्यूसर ने इस बात का भी खुलासा किया कि फिल्म का पहला लुक जारी होने के बाद से ही उन पर इसे हटाने का भारी दबाव बनाया जा रहा था. कई तरह की कोशिशें की गईं ताकि फिल्म को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए. लेकिन मेकर्स ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. उन्होंने साफ कहा कि पहले लुक को हटाने के दबाव का जवाब वे अब चुप रहकर नहीं, बल्कि आने वाली 17 जुलाई को फिल्म का दूसरा वीडियो टीजर रिलीज करके देंगे.

समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
फिल्म के भविष्य और इस पूरे विवाद पर अपना स्टैंड पूरी तरह साफ करते हुए प्रोड्यूसर ने कहा कि ‘काला हिरण’ के मुद्दे पर किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. वे अपनी फिल्म की कहानी और इसके कॉन्सेप्ट के साथ खड़े हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे अदालत के भीतर पूरी मजबूती और सम्मान के साथ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और मिल रही धमकियों का भी डटकर मुकाबला करेंगे. मेकर्स के इस बेबाक अंदाज ने साफ कर दिया है कि ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अभी और लंबा चलने वाला है.

राजपाल यादव को बड़ा झटका, चेक बाउंस मामले में फिर जेल भेजने का आदेश

एक्टर राजपाल यादव पर चेक-बाउंस का केस कुछ महीने पहले बहुत चर्चा में था. बॉलीवुड सेलेब्रिटीज से राजपाल को इस मामले से निकालने के लिए काफी फाइनेंशियल मदद मिली थी और फरवरी में वो जेल से जमानत पर बाहर भी आ गए थे. लेकिन अब राजपाल को बड़ा झटका लगा है और उनके एक्शंस को ‘संदिग्ध’ बताते हुए प्रशासन से उन्हें फिर जेल भेजने को कहा है.

हाई कोर्ट ने राजपाल को फिर भेजा जेल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने राजपाल को दोषी मानते हुए सेशंस कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा में संशोधन किया. अदालत ने राजपाल यादव को सातों मामलों में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये की पेमेंट करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा शिकायतकर्ता को 1.04 लाख रुपये और 75 हजार रुपये, जबकि राज्य को 25 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया.

हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी हर मामले में शिकायतकर्ता को 5,51,380 रुपये की पेमेंट करने को कहा है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजपाल की ओर से पहले ही जमा किए जा चुके 2.25 करोड़ रुपये फाइनल पेमेंट में एडजस्ट कर दिए जाएंगे.

चेक बाउंस मामले में पहले भी जेल जा चुके हैं राजपाल
2010 में राजपाल ने अपने प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए 5 करोड़ का उधार लिया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और राजपाल समय पर उधार चुकता नहीं कर पाए थे. बार-बार पेमेंट्स के लिए दिए चेक बाउंस होने के बाद ये मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई बन गया.

इस मामले में हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को पहली बार 2013 में, 10 दिन के लिए जेल भेजा था. लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील के बाद वो 4 दिन में जेल से बाहर आ गए थे. नवंबर 2018 में वो फिर से तीन महीनों के लिए जेल गए और फरवरी 2019 में बाहर आए थे.

फरवरी 2026 में राजपाल एक बार फिर इस मामले में कुछ दिनों के लिए जेल में रहे थे. बाहर आने के बाद उन्होंने अथॉरिटीज के सामने एक इमोशनल अपील में कहा था कि उनके पास न पैसा है और न ऐसे दोस्त जो इस क्राइसिस में उनकी मदद कर सकें. इस अपील के बाद फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें बहुत सपोर्ट मिला था और कई लोग उनकी आर्थिक मदद के लिए भी आगे आए थे.

मगर इसके बाद भी राजपाल अपना उधार नहीं चुकता पर पाए. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के रवैए को ‘संदिग्ध’ बताया और कहा कि उन्हें रकम चुकाने के कई मौके दिए गए, लेकिन वो अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव को अदालत में दिए गए अपने अंडरटेकिंग का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बार-बार अवसर मिलने के बावजूद उसका पालन नहीं किया.

बकाया रकम के भुगतान को लेकर किए गए समझौते के बार-बार उल्लंघन के कारण कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है. इसी कोर्ट ने राजपाल को राहत भी दी थी. लेकिन राजपाल इस दलील पर अड़े रहे कि जब कुछ दिन जेल काट ली तो अब कैसे पैसे? कौन सा बकाया और कैसी वापसी? कोर्ट ने उन्हें पहले भी चेतावनी दी थी.

खेसारी-अंजना विवाद में घमासान, भोजपुरी इंडस्ट्री की छवि पर उठे सवाल

भोजपुरी सिनेमा इन दिनों फिल्मों से ज्यादा सोशल मीडिया पर चल रही जुबानी जंग को लेकर सुर्खियों में है. एक तरफ हैं अंजना सिंह, तो दूसरी तरफ खेसारी लाल यादव और उनके समर्थक. मामला इतना बढ़ गया कि इसमें गाली-गलौज, निजी जिंदगी पर आरोप, ट्रोलिंग, परिवार को घसीटना और चप्पल दिखाने तक की नौबत आ गई. अब भोजपुरी इंडस्ट्री के कई कलाकार भी इस विवाद में कूद पड़े हैं.

पॉडकास्ट से शुरू हुआ बवाल
पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब अंजना सिंह एक पॉडकास्ट में पहुंचीं. वहां उनसे खेसारी लाल यादव के उस पुराने बयान पर सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने कास्टिंग काउच पर कहा था कि ‘हर हीरोइन कहती है कि इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच होता है, लेकिन मैंने तो नहीं किया. फिर हुआ किसके साथ?’

इस सवाल पर अंजना ने खेसारी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वो कुछ भी बोलते हैं, उनकी बातों का कोई मतलब नहीं होता. बस, यहीं से सोशल मीडिया पर बवाल शुरू हो गया.

खेसारी के फैंस हुए आगबबूला, चुप नहीं रहीं अंजना
अंजना का बयान सामने आते ही खेसारी लाल यादव के फैंस भड़क गए. सोशल मीडिया पर अंजना को जमकर ट्रोल किया गया. उन्हें लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. बात यहीं नहीं रुकी, कुछ ट्रोल्स ने उनकी बेटी को लेकर भी अभद्र टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं.

ट्रोलिंग से नाराज अंजना सिंह इंस्टाग्राम लाइव पर आईं. यहां उन्होंने खेसारी लाल यादव और उनकी टीम पर कई गंभीर आरोप लगाए.

लाइव के दौरान अंजना ने खेसारी की निजी जिंदगी का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि एक पुराने होटल विवाद में खेसारी लाल यादव को उनकी पत्नी चंदा यादव ने कथित तौर पर दूसरी एक्ट्रेस के साथ पकड़ लिया था. अंजना ने ये भी आरोप लगाया कि उस दौरान उनकी पिटाई हुई थी. इसके साथ ही उन्होंने खेसारी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. खबर है कि इसी दौरान उन्होंने पर आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया.

खेसारी ने बिना नाम लिए दिया जवाब
पूरे विवाद के दौरान खेसारी लाल यादव ने सीधे तौर पर अंजना सिंह का नाम नहीं लिया. हालांकि उन्होंने इंस्टाग्राम लाइव के जरिए अपने फैंस का समर्थन करने के लिए धन्यवाद कहा और कहा कि आप लोगों का शुक्रिया जो इतना प्यार जताया और मेरे लिए लड़े. इसे कई लोगों ने इस विवाद पर उनका अंजना को दिया जवाब माना.

खेसारी ने भले ही इतने पर चुप्पी साध ली लेकिन उनकी टीम और समर्थकों ने भी अंजना पर पलटवार शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर उन्हें ‘बूढ़ी चाची’ और ‘आंटी’ जैसे शब्द कहे गए. ट्रोलिंग लगातार बढ़ती गई और विवाद और ज्यादा गर्म हो गया.

चप्पल दिखाकर दी चेतावनी
इसके बाद अंजना सिंह एक बार फिर लाइव आईं. इस बार उन्होंने खेसारी की टीम से जुड़े लेखक अखिलेश कश्यप पर धमकी देने का आरोप लगाया. लाइव के दौरान उन्होंने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, खेसारी को अनपढ़-गंवार बताते हुए जातिसूचक शब्द कहे और कैमरे पर चप्पल दिखाते हुए मारने तक की बात कह दी. इसके बाद ये विवाद सोशल मीडिया पर और ज्यादा वायरल हो गया.

हालांकि खेसारी के सपोर्टर ने एक वीडियो जारी कर हंसी उड़ाते हुए कहा कि क्यों इतना बोल रही हो, लाइमलाइट में आने के लिए विवाद को खामखा तूल दिए जा रही हो. ये सुनकर अंजना फिर भड़क गई और कहा कि- मेरी साल में 20-20 फिल्में आ जाती हैं. 3 साल में 2 फिल्म करने वालों को जरूरत होगी विवाद पैदा करने की. ये तुम लोगों का हमेशा से है जब कोई गाना लाना होता है कॉन्ट्रोवर्सी करने लगते हो.

इंडस्ट्री भी बंट गई
अब ये मामला सिर्फ दो कलाकारों तक सीमित नहीं रहा. भोजपुरी इंडस्ट्री के कई कलाकार खुलकर सामने आए. कुछ ने कहा कि किसी भी महिला को इस तरह ट्रोल करना और उसके परिवार को निशाना बनाना गलत है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा और निजी आरोपों से पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री की छवि खराब हो रही है.

अंजना सिंह के सपोर्ट में उनके एक्स-हसबैंड यश कुमार मिश्रा भी सामने आए. इतना ही नहीं, यश की मौजूदा पत्नी निधि झा ने भी अंजना का समर्थन करते हुए कहा कि किसी महिला का इस तरह अपमान करना बिल्कुल सही नहीं है. वहीं पूनम दुबे और पाखा हेगड़े समेत कई एक्ट्रेसेस ने इस विवाद को तूल न देने और महिला का सम्मान करने की बात कही.

अब सबसे बड़ा सवाल…
इस पूरे विवाद ने भोजपुरी सिनेमा की पब्लिक इमेज पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या ये सिर्फ दो कलाकारों के बीच का निजी विवाद है, या फिर सोशल मीडिया की लड़ाई ने भोजपुरी इंडस्ट्री के स्तर को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है? फिलहाल आरोप, पलटवार और लाइव वीडियो का ये सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा और फैंस की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये विवाद आगे क्या नया मोड़ लेता है.

एमी अवॉर्ड्स 2026: ‘द पिट’ को मिले सबसे ज्यादा नामांकन, प्रियंका की फिल्म भी शामिल

एमी अवॉर्ड्स को टीवी की दुनिया में सबसे सम्मानित पुरस्कार माना जाता है। साल 2026 के लिए एमी अवॉर्ड के लिए नामांकनों का एलान हो चुका है। इस सूची में सबसे ज्यादा श्रेणियों में नॉमिनेशन के साथ मेडिकल ड्रामा सीरीज ‘द पिट’ सबसे आगे है। ‘द पिट’ को कुल 25 नामांकन हासिल हुए हैं। इसके अलावा प्रियंका चोपड़ा की ‘हेड्स ऑफ स्टेट’ ने भी जगह बना ली है। वहीं, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की लिस्ट में जेंडाया का नाम है। इसके अलावा और किस-किसको नॉमिनेशन में जगह मिली है? देखिए लिस्ट

किसने किया नॉमिनेशन का एलान?
बीते दिन बुधवार को अभिनेत्री लिजा कोलोन-जायस और अभिनेता जेफ हिलर ने 2026 प्राइमटाइम एमी अवॉर्ड्स के नॉमिनेशन की घोषणा की। इस लिस्ट में ‘द बियर’, ‘हैक्स’, ‘द पिट’ और ‘स्लो हॉर्सेस’ जैसे बड़े कॉमेडी, ड्रामा और एंथोलॉजी शो शामिल हैं। ‘एमी अवॉर्ड्स 2026’ की नॉमिनेशन लिस्ट में जेंडाया, जीन स्मार्ट और मैथ्यू रीस जैसे कई नामी चेहरों नें जगह बनाई है।

एंथोलॉजी सीरीज/फिल्म में बेस्ट लीड एक्ट्रेस
क्लेयर डेंस- ‘द बीस्ट इन मी’ सीरीज
सैली फील्ड – रिमार्केबली ब्राइट क्रिएचर्स फिल्म
कैरी मुलिगन – ‘बीफ’ सीरीज
सारा पिजिओन  – ‘लव स्टोरी’ सीरीज
सारा स्नूक – ‘ऑल हर फॉल्ट’ सीरीज

एंथोलॉजी सीरीज या फिल्म में बेहतरीन सहायक अभिनेता
जेसन बेटमैन -डीटीएफ सेंट लुईस
रिचर्ड गैड – ‘हाफ मैन’
डेविड हार्बर – ‘डीटीएफ सेंट लुईस’
रिचर्ड जेनकिंस – ‘डीटीएफ सेंट लुईस’
चार्ल्स मेल्टन – ‘बीफ’
निक ऑफरमैन – ‘मार्गोज गॉट मनी ट्रबल्स’

एंथोलॉजी सीरीज या फिल्म में बेहतरीन सहायक अभिनेत्री
लिंडा कार्डेलिनी- ‘डीटीएफ सेंट लुईस’
डकोटा फैनिंग- ‘ऑल हर फॉल्ट’
लॉरी मेटकाफ – ‘मॉन्स्टर-द एड गीन स्टोरी’
जॉय संडे – ‘डीटीएफ सेंट लुईस’
यॉन युह-जंग – ‘बीफ’
कॉन्स्टेंस जिमर – ‘लव स्टोरी’

बेस्ट लिमिटेड या एंथोलॉजी सीरीज
ऑल हर फॉल्ट
द बीस्ट इन मी
बीफ
डीटीएफ सेंट लुईस
लव स्टोरी

कॉमेडी सीरीज श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री
क्विंटा ब्रुनसन – एबॉट एलीमेंट्री
आयो एडेबिरी – द बियर
एले फैनिंग – मार्गोज गॉट मनी ट्रबल्स
लिसा कुडरो – द कमबैक
जीन स्मार्ट – हैक्स

कॉमेडी सीरीज श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता
याह्या अब्दुल-मतीन II – वंडर मैन
स्टीव करेल – रूस्टर
मैथ्यू राइस – विडोज बे
जेसन सेगल – श्रिंकिंग
मार्टिन शॉर्ट – ओनली मर्डर्स इन द बिल्डिंग

कॉमेडी सीरीज में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर
कोलमैन डोमिंगो – फोर सीजंस
पॉल डब्ल्यू. डाउन्स – हैक्स
हैरिसन फोर्ड – श्रिंकिंग
निक ऑफरमैन – मार्गोज गॉट मनी ट्रबल्स
स्टीफन रूट – विडोज बे
माइकल यूरी – श्रिंकिंग
टायलर जेम्स विलियम्स – एबॉट एलीमेंट्री

कॉमेडी सीरीज में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस
डेल डिकी – विडोज बे
हन्ना आइनबाइंडर – हैक्स
जानेल जेम्स – एबॉट एलीमेंट्री
केट ओ’फ्लिन – विडोज बे
मिशेल फिफर – मार्गोज गॉट मनी ट्रबल्स
मेगन स्टाल्टर – हैक्स
जेसिका विलियम्स – श्रिंकिंग

ड्रामा सीरीज में बेस्ट एक्टर
स्टर्लिंग के. ब्राउन – पैराडाइज
गैरी ओल्डमैन – स्लो हॉर्सेज
मार्क रफ्फालो – टास्क
रुफस सिवेल – द डिप्लोमैट
नोआ वाइल – द पिट

ड्रामा सीरीज में बेस्ट एक्ट्रेस
कैरी कून – द गिल्डेड एज
चेज इन्फिनिटी – द टेस्टामेंट्स
केरी रसेल – द डिप्लोमैट
रिया सीहॉर्न – प्लुरिबस
जेंडाया – यूफोरिया

बेस्ट ड्रामा सीरीज
द डिप्लोमैट
द गिल्डेड एज
ए नाइट ऑफ द सेवन किंगडम्स
पैराडाइज
द पिट
प्लुरिबस
स्लो हॉर्सेज
योर फ्रेंड्स एंड नेबर्स

बेस्ट टीवी मूवी
हेड्स ऑफ स्टेट – प्रियंका चोपड़ा अभिनीत
मिस यू, लव यू
पीपल वी मीट ऑन वैकेशन
रिमार्केबली ब्राइट क्रिएचर्स
टॉम क्लैंसीज जैक रयान- घोस्ट वॉर

 

धमाल 4 की एडवांस बुकिंग शानदार, पहले दिन 16 करोड़ की उम्मीद

अजय देवगन की फिल्म धमाल 4 कल यानी 10 जुलाई को रिलीज होने वाली है. फिल्म रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छी पकड़ बनाती नजर आ रही है. धमाल 4 की एडवांस बुकिंग रिलीज से कुछ दिन पहले शुरू हुई थी. गुरुवार 12 बजे तक फिल्म ने करीब 3.33 करोड़ रुपये की कमाई कर ली. ये नंबर्स ब्लॉक सीट्स को मिलाकर दिया गया है. हालांकि ये आंकड़े अभी और बढ़ेंगे.

पहले दिन कितनी कमाई करेगी धमाल 4?
बॉक्स ऑफिस पर धमाल 4 को सबसे बड़ा फायदा इसकी फ्रेंचाइजी वैल्यू का मिल सकता है. इसके अलावा फिल्म के सामने फिलहाल कोई बड़ी रिलीज नहीं है. पिछले हफ्ते रिलीज हुई ‘अल्फा’ की कमाई भी अब धीमी पड़ चुकी है. ऐसे में धमाल 4 के पास बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाने के लिए अच्छा मौका है. ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म भारत में पहले दिन करीब 15 से 16 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन कर सकती है. वहीं कुछ अनुमान इसे 13 करोड़ रुपये के आसपास भी बता रहे हैं. अगर फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करती है तो यह अजय देवगन के करियर की टॉप 10 ओपनिंग फिल्मों में शामिल हो सकती है.

धमाल 4 तोड़ेगी अजय देवगन की बड़ी फिल्मों का रिकॉर्ड?
अगर धमाल 4 की ओपनिंग 15 करोड़ रुपये से ज्यादा रहती है, तो यह अजय देवगन की कई बड़ी फिल्मों के शुरुआती कलेक्शन को पीछे छोड़ सकती है. फिल्म तानाजी ने पहले दिन 15.10 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जबकि दृश्यम 2 ने 15.50 करोड़ रुपये का ओपनिंग कलेक्शन किया था. धमाल फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म टोटल धमाल का रिकॉर्ड तोड़ना आसान नहीं होगा. साल 2019 में रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले दिन 16.50 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

धमाल 4 की रिलीज डेट
इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी धमाल 4 में अजय देवगन के अलावा अरशद वारसी, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा, उपेन्द्र लिमये, अंजलि आनंद, संजीदा शेख, ईशा गुप्ता और विजय पाटकर नजर आएंगे. फिल्म 10 जुलाई को रिलीज हो रही है.

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