अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, 140 ठिकानों पर हमले से मिडिल ईस्ट दहला

 तेहरान
 मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार तड़के अमेरिका ने ईरान पर हमले का नया दौर शुरू किया। अमेरिका ने ईरान में 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइल हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला होर्मुज में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में किया गया।

CENTCOM ने एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में लिखा कि आज शाम 7:15 बजे (ET), U.S. सेंट्रल कमांड की फोर्स ने ईरान के खिलाफ इस हफ़्ते हमले का तीसरा दौर शुरू किया। यह कार्रवाई तब की गई जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की फोर्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज़ ‘M/V GFS Galaxy’ पर खुलेआम हमला किया।

इस हमले में जहाज के क्रू का एक सदस्य लापता है और जहाज पर आग लगने तथा इंजन रूम को काफी नुकसान पहुंचने के कारण वह अपनी यात्रा जारी नहीं रख पा रहा है।

व्यावसायिक जहाजों पर पहले हुए हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद, ईरान को ‘मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (समझौता ज्ञापन) का पालन करने का एक और मौका दिया गया था, लेकिन वह फिर से ऐसा करने में नाकाम रहा।

इसके जवाब में, अमेरिका ईरान की उस क्षमता को कम करके उसे भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है, जिसके जरिए वह स्ट्रेट से गुजरने वाले आम नाविकों और व्यावसायिक जहाजों पर आसानी से हमले करता है। ये हमले कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर किए जा रहे हैं।

वहीं CENTCOM की X पोस्ट का जवाब देते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने गलत फैसला किया, अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।

CENTCOM के मुताबिक, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, उनमें ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटें, नौसैनिक क्षमताएं, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्र शामिल है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि इन हमलों से ईरान की स्ट्रेट से गुजरने वाले नागरिकों और जहाजों पर आसानी से हमला करने की क्षमता में कमी आएगी।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद डिपो और रडार साइट को निशाना बनाया। जबकि बहरीन में अमेरिकी कम्युनिकेशन सिस्टम और रडार साइट को निशाना बनाया गया।

दोनों देशों के बीच तनाव के बीच ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अब एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हमने पहले ही कहा था-वादा निभाओ, नहीं तो कीमच चुकाओ। उन्होंने आगे लिखा, अब हकीकत सामने है।

ओमान तट जहाज हमले में 10 भारतीय सुरक्षित, एक की तलाश जारी

नई दिल्ली
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी लापता है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ को निशाना बनाकर किए गए इस हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था. जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 को तो बचा लिया गया, लेकिन एक लापता भारतीय की तलाश अभी-भी जारी है. ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और चल रहे सर्च-रेस्क्यू ऑपरेशन में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है. भारत ने संकट के इस समय में सहयोग देने के लिए ओमान के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है.

मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो बेहद चिंताजनक हैं. भारत सरकार ने वैश्विक मंच से एक बार फिर दोहराया है कि क्षेत्र में तनाव को तुरंत कम (डी-escalate) किया जाना चाहिए. इसके साथ ही जारी राजनयिक वार्ताओं को किसी तार्किक और शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि पूरे क्षेत्र में फिर से शांति और स्थिरता लौट सके.

भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का ये सिलसिला अब हर हाल में बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांतों के अनुरूप, क्षेत्र के सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त और बेरोकटोक नौवहन तथा वाणिज्यिक गतिविधियों को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक व्यापार सुरक्षित तरीके से चल सके.

अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट अनिश्चितकाल के लिए बंद हुआ।

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की जंग एक बार फिर से जोर पकड़ रही है। शनिवार देर रात अमेरिका ने ईरान के ऊपर आरोप लगाया कि उसने साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज पर हमला किया है। इसके बाद अमेरिका की तरफ से ईरान के करीब 140 ठिकानों पर हमला किया गया। इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और कुवैत, बहरीन समेत मिडिल ईस्ट में मौजूद तमाम यूएस ठिकानों और लॉजिस्टिक्स बेसों को निशाना बनाया।’इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका आगे हमला करता है, तो वह तगड़ा पलटवार करेगा।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज के ऊपर क्रज मिसाइल से हमला कर दिया। साइप्रस के झंडे वाले इस जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और एक क्रू मेम्बर लापता हो गया। इसके बाद सेंटकॉम ने कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुशहर, जस्क जैसे तमाम शहरों में धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं। अमेरिका ने इस हमले के बाद खुले तौर पर कहा कि ईरान ने होर्मुज से निकलने वाले जहाज पर हमला करके गलत किया है। इसका उन्हें जवाब दिया गया है।

ईरान ने साइप्रस के जहाज पर हमले की बात स्वीकारी
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने उस जहाज को रोकने की कोशिश की थी। लेकिन वह ट्रांसपोंडर बंद करके लगातार आगे बढ़ता रहा। इसके बाद उसे रोकने के लिए गोलियां चलाई गईं, लेकिन जब वह नहीं रुका। तो उस पर क्रूज मिसाइल दागी गई। विशेषज्ञों के मुताबिक मामला यहीं बिगड़ गया। शुक्रवार को ही ट्रंप ने ऐलान कर दिया था कि सीजफायर खत्म हो चुका है। अब अगर ईरान कोई हरकत करता है, तो वह हजारों मिसाइलें पहले ही उनकी तरफ तानकर बैठे हैं।

अमेरिका का मानना है कि होर्मुज को पूरी तरह से सब के लिए खुला रहना चाहिए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। ईरान की तरफ से साफ किया जा चुका है कि होर्मुज से अगर किसी को निकलना है, तो उसे तेहरान की इजाजत लेनी होगी।

हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अनिश्चितकाल के लिए किया बंद
अमेरिका की तरफ से हुए हमले और फिर ईरान के पलटवार के बाद एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट पर संकट खड़ा हो गया है। IRGC की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट फिलहाल बंद है। यह तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करना बंद नहीं कर देता। ईरान ने इसके साथ ही बताया कि उनकी मंजूरी के बिना स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे एक और जहाज को निशाना बनाया गया है।

ईरान के इस ऐलान के बाद एक बार फिर से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा होना शुरू हो गया है। 60 दिनों का युद्धविराम समाप्त होने के बाद एक बार फिर से अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर हैं।

16 जून को हुई डील का सम्मान करे अमेरिका-ईरान
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच ईरान ने अमेरिका से 16 जून को हुई डील का सम्मान करने के लिए कहा है। ईरानी सेना की तरफ से कहा गया कि अमेरिका को 16 जून को हुई डील का सम्मान करना चाहिए। अगर अमेरिका इसे नहीं मानता है, तो ईरान को अपने हितों की रक्षा के लिए पश्चिम एशिया में मौजूद सभी यूएस ठिकानों को निशाना बनाना पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ ईरान की तरफ से अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने वाले गालिबेफ ने कहा कि अब एक तरफा डील करने का दौर खत्म हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “एक तरफा डील करने का दौर अब खत्म हो गया है। हमने कहा था कि या तो अपने शब्दों पर कायम रहना या फिर कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना। हकीकत अब आपके सामने है।”

इसके साथ ही गालिबेफ ने डील के आर्टिकल 5 का भी जिक्र किया। इसमें लिखा था कि ईरान होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के लिए रास्ता तैयार करेगा और सुरक्षा की व्यवस्था करेगा।

आपको बता दें, दोनों देशों के बीच में यह युद्ध ऐसे समय में बढ़ता दिख रहा है, जब दोनों देश शांति वार्ता में लगे हुए हैं। हालांकि, दोनों के बीच में अविश्वास की खाई काफी गहरी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पश्चिम एशिया से अपने ठिकाने हटाने होंगे, वहीं अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज को पूरी तरह से खुला रखने का दबाव बना रहा है।

हाल ही में खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के नारे लगाए गए थे। इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था कि अगर उनके ऊपर कोई हत्या का प्रयास किया जाता है, तो उन्होंने पहले ही आदेश दे दिए हैं। 1000 से ज्यादा मिसाइलें ईरान की तरफ रुख किए हुए हैं। कुछ गलत होने पर ईरान को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा।

नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, इजरायल में नई राजनीतिक बहस तेज हुई

 नई दिल्ली
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से जुड़ा एक और नया विवाद सामने आया है। नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर योनातन हुन कर लिया है। लीक हुए डेटा के मुताबिक, नेतन्याहू के बेटे ने यह काम पिछले दो सालों के दौरान ही किया है। क्योंकि 2024 में टैक्स भरने के दौरान उन्होंने अपने जन्म वाले नाम का ही प्रयोग किया था। लेकिन 2026 में जब उन्होंने टैक्स फाइलिंग की, तो अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है।

इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू परिवार टैक्स और भ्रष्टाचार के मामलों में फंसा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री के बड़े बेटे के इस कदम को भी शक की नजर से देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि 34 साल के एक्टिविस्ट और पीएम नेतन्याहू के बेटे ने किन वजहों से यह नाम बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने नाम में यह बदलाव रेगुलेटरी अपडेट उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किया गया है। इसमें उन्होंने अपना रेसिडेंशियल एड्रेस बस ‘बाल्फोर 0’ के नाम से दिया है। यह एड्रेस इजरायल के प्रधानमंत्री आवास की तरफ इशारा करता है।

नाम बदलने के मकसद को लेकर लोगों में छिड़ी बहस
पिछले कई सालों से युद्ध में उलझे इजरायल के लोगों के बीच में प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर काफी चर्चा है। लोग इस फैसले के पीछे के मकसद को लेकर बंटे हुए हैं। क्योंकि एक तरफ जहां युद्ध के लिए सभी रिजर्व सैनिकों को बुलाया जा चुका है, वहीं 34 वर्षीय योनातन हुन 2023 से फ्लोरिडा में रह रहे हैं। विदेश में रहने की वजह से इजरायल में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई थी। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने युद्ध में लड़ने से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई है, वहीं कई लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं।

‘योनातन हुन’ नाम में है ऐतिहासिक संदर्भ
इजरायल के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार ने भले ही बेटे के नाम बदलने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक उनका पहला नाम ‘योनातन’ मुख्य रूप से उनके चाचा ;योनी नेतन्याहू’ को श्रद्धांजलि है। वह 1976 में एक युगांडा में एक मिशन को दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद वह इजरायल में एक हीरो के तौर पर देखे जाने लगे थे। बेंजामिन नेतन्याहू के शुरुआती करियर के दौरान उन्हें इसका काफी फायदा मिला था।

दूसरी ओर ‘हुन’ नाम नेतन्याहू परिवार की पुरानी जड़ों की पहचान करवाता है। नेतन्याहू परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल में आकर बसे थे, तब उनका नाम बेन नहीं था। यह नाम उन्होंने यहां इजरायल में आकर ही परिवर्तित किया था। आते समय उनका नाम सैमुअल हुन था। इन्हीं की याद में नेतन्याहू के बड़े बेटे ने अपना नाम के दूसरे शब्द में हुन शब्द का प्रयोग किया है। हालांकि, इससे पहले भी युवा नेतन्याहू अपने एक पॉडकॉस्ट के दौरान यायर हुन नाम का प्रयोग कर चुके हैं। लेकिन अब सरकारी काम में उपयोग करने से यह नाम पक्का हो चुका है।

इजरायल के प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नेतन्याहू या उनके ऑफिस की तरफ से भी इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ट्रंप की 1000 मिसाइलों वाली धमकी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली
ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को एक हवाई हमले से हुई थी जिसमें 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. ईरान ने इस सप्ताह खामेनेई को दफनाया. इससे पहले कई दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चला, जिसमें उनके शव को ईरान और इराक दोनों देशों के शहरों में ले जाया गया. खामेनेई की अंतिम यात्रा के बाद सुलह से ज्यादा संग्राम का जो डर लग रहा था, वो सही साबित होता दिख रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं.

वहीं सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अब बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटता, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं होगी.

बता दें, इस पूरे हफ्ते अमेरिका और ईरान में सिर्फ बयानों का वार-पलटवार ही नहीं हुआ, मिसाइलों का प्रहार भी जमकर हुआ. होर्मुज में जहाजों पर हमलों से शुरू हुई लड़ाई कुछ ही घंटों में ईरान के अलग-अलग शहरों में बमबारी तक पहुंच गई.

एक तरफ ईरान अली खामेनेई को दफनाने की तैयारियों में जुटा था तो दूसरी तरफ उसे अमेरिका के हमले का जवाब देने के लिए कतर और बहरीन तक सैन्य ठिकानों पर निशाने लगाने पड़े. दोनों इतने पर ही नहीं रुके. अमेरिका ने तेहरान के आसपास कई इलाकों में ताबड़तोड़ हमले किए, पुल उड़ा डाले और ऑयल रिफाइनरी तक को निशाना बनाया.

वहीं, ईरान ने तेल अवीव और कई इलाकों में इजरायल के मिलिट्री बेस को बर्बाद कर दिया. सीजफायर की धज्जियां उड़ाते इन हालातों ने ट्रंप का गुस्सा और बढ़ा दिया. पहले उन्होंने बयान दिया कि हमने अच्छे होने की वजह से ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है ताकि वो अपने नेता को अंतिम विदाई दे पाएं, फिर ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में हमारे हाथों पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. लेकिन अब ट्रंप का जो ताजा बयान आया है, उसने तो हड़कंप मचा दिया है.

एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखने को तैयार
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट में कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने अपनी उस धमकी पर अमल किया, जिसमें उसने अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति (यानी मुझपर) जानलेवा हमला करने या हत्या करने की बात कही है, तो ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं. इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी. इसके लिए आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार और सक्षम है कि वो एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखे और ईरान के हर इलाके को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर दे.

ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए एक तरफ जहां अमेरिकी सेना के महायुद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का संदेश दिया है, वहीं ये भी साफ कर दिया है कि फिलहाल जो हालात हैं, उनमें युद्ध किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है. वैसे भी वो बार बार दोहरा रहे हैं कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है.

ईरान भी अमेरिका पर ही आरोप लगा रहा है कि ये सब उसी का किया धरा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा, ईरान ने अब तक अपना वादा निभाया है, जबकि अमेरिका ने MoU के पैरा 9 का उल्लंघन किया. अमेरिका एक के बाद एक उल्लंघन कर रहा है. सीजफायर के स्थायी होने की सारी उम्मीदें फिलहाल टूट चुकी हैं. अब दोनों देशों की मिसाइलें तैयार हैं. गरजने के लिए भी, बरसने के लिए भी.

बिजली संकट से जूझते पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक का सहारा, पावर ग्रिड सुधार के लिए $375.9 मिलियन की डील

इस्लामाबाद

वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान के बिजली ग्रिड को मजबूत करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए 375.9 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है. यह रकम पाकिस्तान के ग्रिड स्टेबिलिटी एन्हांसमेंट प्रोजेक्ट के लिए दी गई है, जो ‘बेस्ट-पाक’ नाम के दस साल के बड़े कार्यक्रम का पहला चरण है. इस प्रोजेक्ट का मकसद बिजली कटौती को कम करना, ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक बनाना और घरों, दुकानों और उद्योगों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाना है। 

वर्ल्ड बैंक की पाकिस्तान कंट्री डायरेक्टर बोलोरमा अमगाबाजार ने कहा कि पाकिस्तान की एनर्जी समस्याएं देश की आर्थिक स्थिति से गहराई से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत ट्रांसमिशन ढांचे में निवेश से बिजली की लागत घटेगी और ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड में जुड़ सकेगी। 

पाकिस्तान का बिजली नेटवर्क लंबे समय से अस्थिर ग्रिड और ट्रांसमिशन में रुकावटों से जूझ रहा है, जिससे लाखों लोगों को रोजाना बिजली कटौती, महंगी बिजली और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। 

इस प्रोजेक्ट के तहत तीन बड़े 500 केवी सब स्टेशनों पर स्टेटिक सिंक्रोनस कंपेनसेटर यानी सेटकॉम लगाए जाएंगे. इसके अलावा 26 ग्रिड सब स्टेशनों पर रिएक्टर और कैपेसिटर बैंक भी लगाए जाएंगे। 

इससे दक्षिणी पाकिस्तान में 640 मेगावाट विंड एनर्जी को ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा और वहां की कुल 1,840 मेगावाट पवन क्षमता का पूरा इस्तेमाल हो सकेगा. साथ ही करीब 491 मेगावाट की निजी क्षेत्र की रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को भी ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी। 

इन सुधारों से पाकिस्तान साल 2030 तक अपनी बिजली में 60 फीसदी हिस्सेदारी रिन्यूएबल एनर्जी से पूरी करने के लक्ष्य के करीब पहुंच सकेगा, जो पेरिस समझौते के तहत तय किया गया है. इस प्रोजेक्ट से हर साल करीब 8 लाख 32 हजार 500 टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, यानी 25 साल में कुल 2 करोड़ 8 लाख टन से ज्यादा। 

‘बेस्ट पाक’ कार्यक्रम के लीड एनर्जी स्पेशलिस्ट वलीद सालेह अलसुरैह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर क्लीन एनर्जी लगाने, एनर्जी सुरक्षा मजबूत करने और आधुनिक ट्रांसमिशन क्षेत्र बनाने का रास्ता खोलेगा. यह प्रोजेक्ट नेशनल ट्रांसमिशन एंड डिस्पैच कंपनी यानी NTDC के पुनर्गठन में भी मदद करेगा। 

पाकिस्तान बाढ़ और भीषण गर्मी जैसे जलवायु खतरों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है. इसलिए नई सुविधाओं को ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा और 55 डिग्री सेल्सियस तापमान तक काम करने लायक बनाया जाएगा, ताकि मानसून और गर्मी के मौसम में भी बिजली आपूर्ति बनी रहे। 

पाकिस्तान 1950 से वर्ल्ड बैंक का सदस्य है और अब तक उसे 51.2 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता मिल चुकी है. मौजूदा समय में वर्ल्ड बैंक की 52 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 16.9 अरब डॉलर है। 

ट्रंप के बेटे पर ₹5700 करोड़ के नुकसान का आरोप, हजारों निवेशकों को भी लगा बड़ा झटका

वाशिंगटन

कभी सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग के दम पर बड़ा मुनाफा कमाने का सपना दिखाने वाली अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प (American Bitcoin Corp.) अब खुद भारी मुश्किल में फंस गई है. यह कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बेटे एरिक ट्रंप (Eric Trump) की है. पिछले 10 महीनों में इसके शेयर 95 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं. इसका असर सीधे एरिक ट्रंप की दौलत पर पड़ा है. उनकी हिस्सेदारी की बाजार कीमत करीब 600 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5722 करोड़ रुपये कम हो गई है। 

हालात इतने खराब हो गए कि कंपनी को नैस्डैक (Nasdaq) स्टॉक एक्सचेंज में अपनी लिस्टिंग बचाए रखने के लिए रिवर्स स्टॉक स्प्लिट करना पड़ा. इसके तहत 15 पुराने शेयरों को मिलाकर 1 नया शेयर बनाया गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. यानी एरिक अपने साथ कंपनी के हजारों इन्वेस्टर्स की संपत्ति भी ले डूबे हैं। 

आखिर ऐसा क्या हुआ?
जब यह कंपनी शुरू हुई थी, तब इसकी पूरी रणनीति बिटकॉइन माइनिंग पर टिकी थी. कंपनी का मानना था कि ज्यादा से ज्यादा बिटकॉइन निकालकर और उसे जमा करके आगे बड़ा फायदा होगा. लेकिन पिछले कुछ महीनों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई. दूसरी तरफ AI का कारोबार तेजी से बढ़ने लगा. ऐसे में निवेशकों ने उन कंपनियों को पसंद करना शुरू कर दिया, जिन्होंने अपनी बिजली, जमीन और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल AI डेटा सेंटर बनाने में शुरू कर दिया. यहीं पर अमेरिकी बिटकॉइन पीछे रह गई। 

दूसरी कंपनियां बदल गईं, यह नहीं बदली
रायट प्लेटफॉर्म्स (Riot Platforms), मारा होल्डिंग्स (MARA Holdings), सिफर डिजिटल (Cipher Digital) और टेरावुल्फ (TeraWulf) जैसी कई अमेरिकी कंपनियों ने बिटकॉइन माइनिंग के साथ साथ AI डेटा सेंटर का कारोबार भी शुरू कर दिया. इसका फायदा उन्हें मिला और इस साल उनके शेयर औसतन 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए. इसके उलट अमेरिकी बिटकॉइन सिर्फ बिटकॉइन पर ही भरोसा करती रही. इसी वजह से कंपनी के शेयर लगातार टूटते गए। 

AI में क्यों नहीं उतर पाई कंपनी?
असल में कंपनी के पास सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग मशीनें और बिटकॉइन हैं. जबकि बिजली, जमीन, डेटा सेंटर और दूसरी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं उसकी साझेदार कंपनी हट 8 (Hut 8) के पास हैं. हट 8 ने अपनी रणनीति बदलते हुए AI डेटा सेंटर के कारोबार पर बड़ा दांव लगाया और उसके शेयर इस साल दोगुने से ज्यादा चढ़ गए. लेकिन अमेरिकी बिटकॉइन के पास ऐसा करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। 

फिर भी बिटकॉइन पर भरोसा कायम
इतनी गिरावट के बावजूद कंपनी पीछे हटने को तैयार नहीं है. एरिक ट्रंप का कहना है कि कंपनी अपने बिटकॉइन नहीं बेचेगी, जब तक कोई बेहद गंभीर स्थिति पैदा न हो जाए. इतना ही नहीं, कंपनी ने हाल ही में बाजार से 500 और बिटकॉइन खरीद लिए. उसका मानना है कि जब बाकी कंपनियां AI की तरफ जा रही हैं, तब बिटकॉइन नेटवर्क में प्रतिस्पर्धा कम होगी और भविष्य में ज्यादा बिटकॉइन कमाने का मौका मिलेगा। 

कंपनी को कितना नुकसान हुआ?
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 118.2 मिलियन डॉलर का ऑपरेटिंग लॉस हुआ. इसमें सबसे बड़ा कारण उसके पास मौजूद बिटकॉइन की कीमत घटने से हुआ करीब 117.2 मिलियन डॉलर का नुकसान रहा। 

क्या आगे रिकवरी हो सकती है?
बाजार के कई जानकारों का मानना है कि बिटकॉइन अपने इस चक्र के निचले स्तर के आसपास हो सकता है. अगर आने वाले महीनों में इसकी कीमत दोबारा तेजी से बढ़ती है तो अमेरिकी बिटकॉइन को भी फायदा मिल सकता है. हालांकि फिलहाल कंपनी का पूरा भविष्य लगभग एक ही चीज पर टिका है. अगर बिटकॉइन की कीमत बढ़ी तो कंपनी संभल सकती है. लेकिन अगर गिरावट जारी रही तो एरिक ट्रंप की इस बड़ी क्रिप्टो कंपनी के सामने मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट, बैंकों के ₹4.54 लाख करोड़ फंसे; NPA में दुनिया में दूसरे स्थान पर

ढाका 

 हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश की आर्थिक हालत बेहद नाजुक हो गई है. एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश का बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है. देश में बैंकों द्वारा बांटे गए कुल कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा (करीब 32.26%) डूब चुका है, यानी वह नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन गया है. एनपीए के मामले में बांग्लादेश अब यूक्रेन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है. दक्षिण एशियाई देशों (सार्क) में भी इसकी स्थिति सबसे बदतर है। 

दुनिया में सबसे ज्यादा डूबे कर्ज (37.35%) के साथ यूक्रेन पहले नंबर पर है. यूक्रेन पिछले कई सालों से युद्ध लड़ रहा है. बांग्‍लादेश में शेख हसीना के तख्‍तापलट के बाद से ही अर्थव्‍यवस्‍था पटरी से उतरी हुई है. इस बात का अंदाजा इस बाद से लगाया जा सकता है कि एनपीए के मामले में बांग्‍लादेश की स्थि‍ति अफ्रीकी देश चाड (31.51%) और गिनी (31.15%) से भी बदतर है। 

डूब गए ₹4.54 लाख करोड़
बांग्लादेश बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश का डूबा कर्ज बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका (₹4.54 लाख करोड़) हो गया. बड़ी बात यह है कि इसमें से 31,000 करोड़ टका तो सिर्फ पिछले तीन महीनों में डूबा है। 

नेताओं की यारी ने डूबोई लुटिया
बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट कहती है कि इसके पीछे कमजोर नियम और सबसे बढ़कर राजनीतिक रसूख है. बैंकों ने लोन बांटते समय यह नहीं देखा कि सामने वाला पैसा लौटा पाएगा या नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को तरजीह दी गई. नेताओं और रसूखदारों की सिफारिश पर बांटे गए. इन कर्जों ने देश के पूरे बैंकिंग सिस्‍टम को बेड़ा गर्क कर दिया. देश में कुल बकाया ऋण 18.25 लाख करोड़ टका है. हालात यह हैं कि अगर स्पेशल कैटेगरीज के संकटग्रस्त लोन को भी जोड़ लिया जाए, तो बांग्लादेश के बैंकों का 61 प्रतिशत पैसा अधर में लटका है। 

बैंकों की सेहत नापने वाले पैमाने ‘कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो’ (CRAR) के मामले में भी बांग्लादेश पाताल में चला गया है. यह घटकर माइनस 2.64% (-2.64%) हो गया है, जबकि नियम के मुताबिक इसे कम से कम 12.5% होना चाहिए था. इसके उलट, पड़ोसी देशों ने कड़े नियम अपनाकर खुद को बचा रखा है. इस मामले में पाकिस्तान 20.8%, श्रीलंका 19.4% और भारत 17.2% के साथ बेहद मजबूत स्थिति में हैं। 

अब आगे क्या होगा?
एनआरबीसी (NRBC) बैंक के एमडी और सीईओ तौहीदुल आलम खान का कहना है कि बांग्लादेश की स्थिति वाकई बहुत चिंताजनक है. एनआरबीसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमडी तौहीदुल आलम खान ने कहा कि क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है. उनके अनुसार, पड़ोसी देशों ने सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाकर अपने बैंकिंग क्षेत्र को सुरक्षित रखा, जबकि बांग्लादेश बार-बार कॉरपोरेट और ऋण संबंधी झटकों को झेलता रहा.
जब बैंकों का इतना बड़ा पैसा डूब जाता है, तो उनके पास अदालती मुकदमों का खर्च बढ़ जाता है और मुनाफा खत्म हो जाता है. सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि बैंकों के पास उन जरूरी सेक्टर्स जैसे फैक्ट्रियां, बिजनेस और आम जनता को नया लोन देने के लिए पैसे ही नहीं बचते, जो देश की अर्थव्यवस्था को चलाते हैं। 

भारी कर्ज में दबा है बांग्‍लादेश
बांग्लादेश का डेट-टू-जीडीपी अनुपात बढ़कर 39 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में करीब 34 प्रतिशत था. जाने-माने अर्थशास्त्री मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि पहले बांग्लादेश के बजट में वेतन और पेंशन के बाद शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्र प्रमुख खर्च हुआ करते थे. लेकिन अब उनकी जगह कर्ज भुगतान ने ले ली है.विश्व बैंक की ‘अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, बांग्लादेश का बाहरी कर्ज पिछले पांच वर्षों में 42 प्रतिशत बढ़कर करीब 105 अरब डॉलर हो गया है. यह रकम देश की निर्यात आय के मुकाबले 192 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 

ट्रंप की शर्तों पर बनी अमेरिका-कनाडा ब्रिज डील, दोनों देशों को होगा बड़ा फायदा

वाशिंगटन
अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बना गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज अब आखिरकार 27 जुलाई से खुलने जा रहा है. करीब 4.7 अरब डॉलर की लागत से बने इस पुल को लेकर दोनों देशों के बीच टोल राजस्व के बंटवारे पर समझौता हो गया है. इसके बाद पुल के उद्घाटन का रास्ता साफ हो गया है। 

यह पुल अमेरिका के डेट्रॉयट और कनाडा के विंडसर शहर को जोड़ेगा. पहले इसे जून में शुरू किया जाना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में वित्तीय शर्तों पर आपत्ति जताते हुए इसके उद्घाटन पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी. ट्रंप का कहना था कि अमेरिका के हितों की अनदेखी करते हुए पहले जो समझौता किया गया था, वह स्वीकार्य नहीं है। 

समझौते के तहत अब अमेरिका को इस पुल से होने वाले टोल रेवेन्यू का 50 फीसदी हिस्सा मिलेगा. इसके अलावा अगर भविष्य में टोल दरों में मौजूदा शुल्क से 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की जाती है तो अमेरिका को उस पर वीटो का अधिकार भी होगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्होंने अमेरिका के लिए पहले से कहीं बेहतर समझौता कराया है। 

हालांकि, 2023 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसने इस लंबित विवाद का समाधान किया और पुल के निर्माण को मंजूरी दी। इस समझौते से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को उम्मीद से बेहतर गति मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी मजबूत होगा।

यह नया पुल डिट्रॉइट-विंडसर सीमा पर स्थित होगा, जो रोज़ाना हजारों ट्रकों और अन्य वाहनों के आवागमन के लिए एक प्रभावी मार्ग प्रदान करेगा। इससे अमेरिकी और कनाडाई दोनों व्यवसायों को लाभ होगा और सीमा पर जाम जैसी समस्याएं कम होंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल उत्तरी अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है, जो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को अगले स्तर तक ले जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यापारिक गलियारा भविष्य में भी मजबूत बना रहेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगा।

इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न सिर्फ स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह वैश्विक व्यापार में भी सकारात्मक योगदान देगा। दोनों सरकारें इस पुल के संचालन और देखरेख के लिए नियमित बातचीत और सहयोग करना जारी रखेंगी।

यह पुल न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम करेगा, बल्कि यह अमेरिका- कनाडा के सामरिक और आर्थिक रिश्तों का एक नया अध्याय भी सिद्ध होगा।

अमेरिका-कनाडा में किन मुद्दों पर बनी बात?
कनाडा सरकार ने बताया कि दोनों देशों के बीच टोल प्रबंधन, पारदर्शिता और क्षेत्रीय विकास को लेकर कई सहयोगी कदमों पर सहमति बनी है. इसके तहत पुल के मुनाफे के एक हिस्से से 15 साल का आर्थिक विकास फंड भी बनाया जाएगा, जिससे सीमा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। 

2018 में शुरू हुआ था ब्रिज का निर्माण
गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था. इसकी पूरी फंडिंग कनाडा ने की क्योंकि अमेरिका ने निर्माण लागत में हिस्सा नहीं दिया था. मूल योजना के मुताबिक, निर्माण लागत की भरपाई अगले 30 वर्षों में टोल से की जानी थी. हालांकि, अब नई राजस्व साझेदारी का भुगतान व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। 

 

ईरान को ट्रंप की सबसे बड़ी चेतावनी, बोले- ‘1000 मिसाइलें लॉक्ड एंड लोडेड’

न्यूयॉर्क

अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक बयान दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका की 1000 मिसाइलें “लॉक्ड एंड लोडेड” हैं और सीधे ईरान की ओर निशाना साधे हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने उनकी हत्या की साजिश रची या ऐसी कोई कोशिश की, तो अमेरिकी सेना पूरे एक साल तक ईरान के हर हिस्से पर लगातार हमले करने के लिए तैयार है। 

ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा, “अगर ईरानी सरकार दुनिया के किसी भी हिस्से में मेरे खिलाफ हत्या की धमकी को अमल में लाने की कोशिश करती है, तो अमेरिका ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह तबाह कर देगा. आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, इच्छुक और सक्षम है। 

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. जून में दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों और तीखे बयानों के बाद हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं। 

क्यों भड़के ट्रंप?
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ संघर्षविराम समझौता टूटने के बाद से ही तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते सप्ताह ट्रंप ने खुद एक बयान में कहा कि सीजफायर खत्म हो चुका है। ताजा धमकियों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान में 90 से ज्यादा ठिकानों पर मिसाइलें बरसा दीं। इधर ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तब खत्म भी नहीं हुई थी। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन पर हमले तो किए ही, इस बीच तेहरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार में ट्रंप की मौत के भी खूब पोस्टर लहराए।

खामेनेई के जनाजे में ट्रंप के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखा गया। तेहरान में अंतिम यात्रा के दौरान ट्रंप की बनी तस्वीरों पर बंदूक के निशान बनाए गए। इस तरह की धमकियां भी लिखी गईं कि अमेरिका ने हमारे पिता को मारा है, हम उसे छोड़ेंगे नहीं!” इसके अलावा जब खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद के इमाम रजा दरगाह में दफनाया जा रहा था, तब कुछ महिलाओं के हाथ में किल ट्रंप के पोस्टर भी नजर आए।

कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चेहरे बंदूक के निशाने पर दिखाए गए थे। उन पोस्टरों पर लिखा था, “खून बहकर रहेगा।” इस तरह खुलेआम अपनी मौत के आह्वान को देख ट्रंप भड़क गए हैं।

ईरान-अमेरिका तनाव की वजह
ट्रंप के पहले कार्यकाल में 2020 में सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं. ईरान इसे बदला मानता है. हाल के वर्षों में भी ईरान समर्थित गुटों ने ट्रंप और अमेरिका के खिलाफ साजिशें रची हैं. ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बीच मजबूत रुख अपनाया है। 

ट्रंप का यह बयान दिखाता है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर कितने सतर्क हैं. उन्होंने कहा कि वे ईरान की लिस्ट पर हैं और सौभाग्य से अब तक बच गए, लेकिन यह हमेशा नहीं चल सकता. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी ईरान की धमकियों पर नजर रख रही हैं। 

प्रतिक्रियाएं और संभावित असर
यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है. ईरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ऐसे बयान क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं. अमेरिका और इजराइल पहले से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर चिंतित हैं। 

सुरक्षा उपाय
ट्रंप की सुरक्षा बढ़ाई गई है. हाल ही में NATO सम्मेलन के बाद वे पुराने और ज्यादा सुरक्षित एयर फोर्स वन से लौटे. अमेरिकी गुप्त सेवा (Secret Service) सुरक्षा पर खास ध्यान दे रही है। 

ट्रंप का यह बयान ईरान को साफ चेतावनी है कि कोई भी गलत कदम महंगा पड़ेगा. यह अमेरिका की “शांति के माध्यम से शक्ति” (Peace through Strength) नीति का हिस्सा लगता है. फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव जारी है, लेकिन पूर्ण युद्ध की स्थिति नहीं है. अमेरिका ईरान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। 

अगर मुझे कुछ हुआ, तो…
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान ने उन्हें मारने का प्लान बनाया है और ऐसी स्थिति में उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान को तबाह करने की धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान उनकी हत्या करने की साजिश में सफल हो जाता है, तो उन्होंने जवाबी हमले के निर्देश पहले से ही लिखकर छोड़ दिए हैं। ट्रंप ने कहा, “मैंने स्पष्ट निर्देश छोड़ दिए हैं, अगर मुझे कुछ भी होता है, तो ईरान पर ऐसी बमबारी की जाए जो उन्होंने इतिहास में कभी न देखी हो।”

ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप!
हाल ही में ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान भी कहा था कि वह ईरान की “हिट लिस्ट” में सबसे ऊपर हैं. उनका दावा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि ईरान उनके खिलाफ साजिश रच सकता है. इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अमेरिकी सेना को पहले से ही कड़े जवाबी सैन्य विकल्प तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। 

इजरायल ने ईरान की खुफिया जानकारी ट्रंप को दी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब इजरायल की तरफ से भी अमेरिका को ईरान की कथित साजिशों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा किए जाने की खबरें सामने आई हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। 

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