30 साल बाद रूस का ‘समुद्री दैत्य’ सक्रिय, Admiral Nakhimov की ताकत से बढ़ी अमेरिका की चिंता

मॉस्को 
समंदर के रास्ते एक ऐसी खौफनाक खबर आ रही है, जिसने अमेरिकी जैसे सुपरपावर की रातों की नींद उड़ा दी है. रूस ने करीब 30 साल बाद अपने एक ‘दैत्य’ को समंदर में उतार दिया है, जो अकेले ही अमेरिकी नेवी के पूरे बेड़े को पलक झपकते ही तबाह कर सकता है. रूस ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जंगी जहाज ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अपने फाइनल सी-ट्रायल के लिए रवाना कर दिया है. समंदर का ये सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकेंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा!

समंदर में लौटा पुतिन का 28,000 टन का महादानव!
रूस का ये कीरोव-क्लास क्रूजर (Kirov-class cruiser) कोई आम जहाज नहीं है. ये दुनिया का इकलौता और सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड कॉम्बैट शिप है. इसका वजन करीब 28,000 टन है. आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न ‘अर्ली बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ (Arleigh Burke-class destroyers) जहाजों से भी बड़ा और भारी है। 

सोवियत संघ के जमाने का ये दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका हुआ था लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में ये अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। 

रूस की 176 मिसाइलों का जाल, जिरकॉन काल!
इस महाविनाशक जहाज के अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता. इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का नेवल वर्जन तैनात है, जो जमीन पर मौजूद S-400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है। 

इसके अलावा, बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ‘जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें’ (Zircon Hypersonic Cruise Missile) भरी गई हैं. ये मिसाइल साउंड की रफ्तार से 9 गुना तेजी (Mach 9) से उड़ती है और 1,000 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को संभलने का एक सेकेंड का मौका भी नहीं देती। 

रूस का ‘तख्त’ और बदलती कूटनीति का दांव
सेवेर्नोए डिजाइन ब्यूरो के सीईओ आंद्रेई द्याचकोव के मुताबिक, इस जहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि ये आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है. हालांकि, रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था। 

यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वां जहाज ‘प्योत्र वेलिकी’ को समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा, क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था. सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया है, इसलिए अपनी धाक जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमोव को चमकाने में झोंक दी। 

रूस धोएगा पुराने घाव
साल 2022 में यूक्रेन के मामूली मिसाइल हमले में रूस का ‘मोस्कवा’ जहाज डूब गया था, जिससे रूसी नौसेना की साख पर बट्टा लगा था. इसके बाद रूस ने अपना पूरा ध्यान गुपचुप तरीके से हमला करने वाली यासेन-एम क्लास पनडुब्बियों पर लगा दिया था. अब एडमिरल नाखिमोव को सीधे रूस के आर्कटिक बेड़े में शामिल किया जा रहा है। 

दरअसल, अमेरिका और नाटो (NATO) देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में रूस का ये न्यूक्लियर पावर्ड दैत्य समंदर के उस बेहद ठंडे रास्ते की पहरेदारी करेगा और अमेरिका को उसकी हद में रहने की सख्त चेतावनी देगा। 

क्या पाकिस्तान चीन के कंट्रोल में है? पुतिन ने दुनिया के सामने दिया साफ जवाब

मॉस्को 
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान और चीन के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान को पूरी तरह चीन के नियंत्रण में बताना सही नहीं होगा. साथ ही उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद पर किसी भी बाहरी दखल को उचित नहीं बताया और कहा कि दोनों देशों के नेता बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। 

दक्षिण एशिया की जटिल भू-राजनीति और चीन-पाकिस्तान संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि रूस क्षेत्र की सभी संवेदनशीलताओं और चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ है. हालांकि, उनका मानना है कि पाकिस्तान को सिर्फ चीन के प्रभाव के दायरे में रखकर देखना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। 

पुतिन ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान ऐसा देश है जो पूरी तरह चीन के नियंत्रण में है. पाकिस्तान एक बड़ा देश है और उसके कई देशों के साथ बहुआयामी संबंध हैं. निश्चित रूप से उसे चीन के साथ अपने सहयोग को ध्यान में रखना पड़ता है, लेकिन आज लगभग सभी देश चीन के साथ अपने रिश्ते विकसित कर रहे हैं। 

रूसी राष्ट्रपति ने भारत और चीन के संबंधों को “संवेदनशील और बहुआयामी” बताया. उन्होंने कहा कि रूस का इन मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है. उनके मुताबिक, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ही लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद समेत आपसी मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के पक्षधर हैं। 

पुतिन ने कहा, “भारत और चीन के बीच संबंध बेहद नाजुक और बहुआयामी हैं. इनमें हस्तक्षेप करना अच्छा विचार नहीं है. हम भारत और चीन दोनों के साथ दोस्ताना संबंध रखते हैं. राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी सीमा से जुड़े मुद्दों सहित सभी महत्वपूर्ण विषयों पर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 

राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी जोर देकर कहा कि रूस के भारत और चीन दोनों के साथ मजबूत रिश्ते हैं और इनमें कोई टकराव नहीं है. पुतिन के मुताबिक, रूस-भारत संबंध चीन को परेशान नहीं करते और रूस-चीन संबंध भारत के लिए भी समस्या नहीं हैं। 

 

कुवैत एयरपोर्ट पर बड़ा ड्रोन-मिसाइल हमला, एक भारतीय की मौत

कुवैत

 कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। कुवैत स्थित भारत के दूतावास ने इसकी पुष्टि कर दी है। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हमले में 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें हवाई अड्डे के कर्मचारी और यात्री शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले में हवाई अड्डे की सुविधाओं और राजनयिक मिशनों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।

इंडियन एंबेसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘कुवैत स्थित भारतीय दूतावास आज कुवैत के हवाई अड्डे पर हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर मृतक के परिवार और घटना में घायल हुए लोगों को हर संभव सहायता देने के लिए समन्वय स्थापित किए हुए है।’

कुवैत ने जताई कड़ी नाराजगी
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से उनकी जमीन पर क्रूर हमले किए हैं। ईरान के इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। बयान के अनुसार, इन हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई नागरिक और महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

कुवैती विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान के इन हमलों को पूरी तरह खारिज करता है। इस तरह की घटनाएं ना केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 2026 के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का भी उल्लंघन हैं। कुवैत की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा रेड लाइन है, जिसे किसी भी हालत में पार नहीं किया जा सकता।

कुवैत देगा ईरान को जवाब!
कुवैत सरकार ने इन हमलों का जवाब देने के लिए संभावित उपायों पर विचार करने की बात कही है। कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति पर ध्यान देने और तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की है। कुवैती रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल-1 (टी1) को कई ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया।

कुवैत पर हमलों के समय ही बुधवार सुबह को बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी चेतावनी सायरन बजाए जाने की जानकारी दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को एक चेतावनी सायरन बजाया गया जिसमें नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और सुरक्षा संबंधी आधिकारिक निर्देशों को पालन करते हुए करीब सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई।

मलेशिया में बड़ा फैसला: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर Facebook, Instagram और TikTok बैन

कुआलालंपुर 

मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने वाले नए नियम लागू करना शुरू कर दिया है. यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की ग्लोबल कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि इस फैसले को लेकर सभी लोग सहमत नहीं हैं और कुछ लोगों ने डेटा सुरक्षा तथा संभावित निगरानी को लेकर चिंता भी जताई है.

नए नियमों के तहत मलेशिया में कम से कम 80 लाख यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उम्र की जांच करने वाली व्यवस्था लागू करनी होगी. इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे नया अकाउंट न बना सकें। 

मलेशिया सरकार ने जारी किए निर्देश
मलेशिया के कम्युनिकेशन और मल्टीमीडिया कमीशन के अनुसार
मौजूदा यूजर्स की उम्र का सत्यापन अगले 6 महीनों के भीतर शुरू किया जाएगा. जिन यूजर्स की उम्र 16 साल से कम है, उन्हें अपने फोटो, वीडियो और अन्य डेटा डाउनलोड या ट्रांसफर करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद उनके अकाउंट पर प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई लागू की जा सकती है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 1 करोड़ रिंगिट यानी लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं यदि कोई बच्चा नियमों को दरकिनार कर अकाउंट बनाने में सफल हो जाता है, तो उसके माता-पिता के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी। 

मलेशिया के अलावा अन्य देशों में बैन
मलेशियाई सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य मकसद बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाना है. सरकार का मानना है कि कुछ प्लेटफॉर्म फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ सकता है. दुनिया के कई अन्य देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र आधारित नियम लागू किए हैं या उनकी घोषणा की है. वहीं ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह की नीतियों पर विचार कर रहे हैं। 

सोशल मीडिया को बैन करने का खास मकसद क्या है?
मलेशिया के रेगुलेटरी बोर्ड ने कहा है कि इन नियमों का मकसद बच्चों को डिजिटल तकनीक से दूर करना नहीं है. बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर सुरक्षा बढ़ाने, अत्यधिक उपयोग को रोकने और कम उम्र के यूजर्स व नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए बाध्य करना है. हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वे इन नियमों का पालन किस तरह करेंगी. इस बीच, क्लारा कोह ने चेतावनी दी है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पूरी तरह रोक लगाने से उल्टा असर भी हो सकता है. उनके अनुसार इससे किशोर सुरक्षित और नियंत्रित प्लेटफॉर्म छोड़कर इंटरनेट के ऐसे हिस्सों की ओर जा सकते हैं, जहां निगरानी और सुरक्षा के उपाय कम होते हैं। 

ऑस्ट्रेलिया समेत इंडोनेशिया में सोशल मीडिया पर बैन
ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है. यह नियम 10 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुआ. इसके बाद इंडोनेशिया ने 28 मार्च 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कानूनी रोक लागू की. फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का विधेयक निचले सदन से पारित हो चुका है, हालांकि इसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है. डेनमार्क भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की योजना पर काम कर रहा है। 

दुनिया के कई देशों में बैन
ग्रीस ने जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीं स्पेन, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, स्लोवेनिया, तुर्की और ब्रिटेन जैसे देश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए नए नियमों और संभावित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं. इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है. फ्रांस में पहले से लागू नियमों के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है. जर्मनी में भी 13 से 16 साल की उम्र के बीच के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है। 

 

‘तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है…’, ट्रंप-नेतन्याहू कथित बात से मचा बवाल

यरुशलम

तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है, अगर मैं न होता, तो तुम अब तक जेल में होते. ये मैं हूं जो तुम्हारी जान बचा रहा हूं. अब हर कोई तुमसे नफरत करता है. इसी वजह से हर कोई इजरायल से भी नफ़रत करता है। ये दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष की भाषा तो कतई नहीं है. तो फिर क्या हुआ कि ट्रंप अपने सबसे करीबी साथी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर इस तरह बिफर गए। 

हैरान करने वाले ये जुमले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की है. जो उन्होंने फोन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद गुस्से में कहे. इस टकराव का खुलासा अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में की है। 

ये झगड़ा नहीं स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है
तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति सचुमच इजरायली प्रधानमंत्री से नाराज है. ट्रंप और नेतन्याहू के बीच टकराव मुख्य रूप से ईरान डील और लेबनान/हेजबुल्लाह पर है. यह कोई पुराना व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि ईरान-इजराइल-यूएस टेंशन के बीच का स्ट्रैटेजिक डिफरेंस है। 

दरअसल ट्रंप की प्राथमिकता अब एक ऐसी डील है जिसे वह अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें. ट्रंप ईरान के साथ डील में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से बड़ी लकीर खींचना चाहते हैं। 

उन्होंने हाल ही में दावा किया कि ईरान के साथ समझौता निकट हो सकता है और बातचीत तेज गति से चल रही है. लेकिन ये वार्ता बार बार डिरेल हो रही है.  दूसरी ओर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों और लेबनान में बढ़ते संघर्ष ने इन वार्ताओं को बार-बार बाधित किया है. ईरान ने भी आरोप लगाया है कि इजरायली हमले कूटनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं। 

नेतन्याहू ‘हार्डलाइनर’ और ट्रंप ‘डीलमेकर’
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति दोहरी हो सकती है. पहला वह ईरान को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए गंभीर है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला पक्ष हमेशा वॉशिंगटन नहीं है. तेल अवीव भी ऐसा करता है. दूसरा वह नेतन्याहू पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाना चाहते हैं कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयां अमेरिकी कूटनीतिक लक्ष्यों को बाधित न करें। 

कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि ट्रंप को लगता है कि समझौता उनकी राजनीतिक जीत साबित हो सकता है, तो वह नेतन्याहू को “कठोर नेता” की छवि में दिखाकर खुद को “डीलमेकर” के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं. इसलिए वह ट्रंप को कथित रूप से कड़वे शब्द कह रहे हैं। 

एक्सियोस के अनुसार लेबनान में ऑपरेशन के लिए ट्रंप ने नेतन्याहू को खरी-खोटी सुनाई और अपशब्दों तक का प्रयोग कर डाला. ट्रंप इजरायल द्वारा लेबनान में शुरू की जा रही सैन्य कार्रवाई से बेहद खफा थे. खासकर बेरूत पर हमले की योजना से. इजरायल का ये कदम  ट्रंप की ईरान के साथ चल रही डिप्लोमेसी को बर्बाद कर सकती थी। 

इजरायल को सता रहा अलग डर
वहीं इजरायली पक्ष को डर है कि ट्रंप ईरान को कमजोर करने के बजाय अस्थायी डील पर राजी हो जाएंगे, जिससे तेहरान को सांस लेने का मौका मिलेगा और हेजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी मजबूत होंगे। 

ट्रंप ईरान के साथ अपनी डील को पूरा करने के लिए इजरायल की कार्रवाइयों को समस्या के रूप में पेश कर सकते हैं. इससे अमेरिकी जनता और गल्फ सहयोगियों में इजरायल पर दबाव बढ़ेगा। 

ट्रंप के लिए ईरान युद्ध जल्द खत्म करना राजनीतिक जरूरत है. अमेरिका की इकोनॉमी, तेल कीमतें और 2026 के मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रंप इसे किसी भी कीमत पर पूरा करने चाह रहे हैं। 

इजरायल को ‘प्रॉब्लम’ दिखाकर ट्रंप ईरान पर भी डील के लिए राजी होने का अप्रत्यक्ष दबाव डाल रहे हैं. इसके बाद ट्रंप के पास इजरायल को ये कहने का अधिकार होगा कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इजरायल को लेबनान पर हमला करने से रोक दिया अब ईरान की बारी है कि वो डील के शर्तों पर राजी हो। 

ईरान बातचीत तेज करने का दावा कर रहा है, लेकिन लेबनान में छोटे-मोटे हमले जारी हैं. ट्रंप की ‘आर्ट ऑफ डील’ फिर परीक्षा की कसौटी पर है. क्या वे इजरायल को काबू में रख ईरान को मना पाएंगे, या क्षेत्र फिर आग की चपेट में आ जाएगा? 

 

ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने पर अमेरिकी कोर्ट की रोक, ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका

वाशिंगट
 अमेरिकी फेडरल अपीलीय कोर्ट ने अमेरिकी सेना (पेंटागन) से ट्रांसजेंडर सैनिकों को हटाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने अपने फैसले में ट्रांसजेंडर सैनिकों पर लगाए गए प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया है और सरकार के इस कदम को भेदभावपूर्ण माना है।

जज ने ट्रंप प्रशासन को फटकार लगाते हुए साफ कहा कि यह फैसला किसी सेना के भले के लिए नहीं, बल्कि समाज के एक खास तबके को सिर्फ और सिर्फ नुकसान पहुंचाने के लिए लिया गया लगता है। अदालत ने यह फैसला 2-1 के बहुमत से सुनाया और ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसने रक्षा मंत्रालय के हाथ बांध दिए थे।

जेंडर के आधार पर नहीं जाएगी नौकरी
इस फैसले के बाद अब सरकार सेना में पहले से मौजूद किसी भी ट्रांसजेंडर सैनिक को उसकी जेंडर पहचान के आधार पर नौकरी से नहीं निकाल पाएगी।

डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना में ट्रांसजेंडरों की सेवा पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इससे सेना की युद्ध क्षमता पर असर पड़ता है। ट्रंप के इस फरमान के बाद सेना में हड़कंप मच गया था और नौकरी से निकाले जाने के डर से ट्रांसजेंडर सैनिकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

 

ईरान ने ड्रोन गिराया तो भड़का अमेरिका, जवाबी हमलों में कई रडार सिस्टम तबाह

तेहरान 
ईरान के अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराने के बाद यूएस ने ईरान में रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटर पर बड़ा हमला किया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार, ईरान के अर्द्धसैन्य बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने एक बयान में बताया कि अमेरिकी बलों ने एक द्वीप पर दूरसंचार टावर को निशाना बनाया। इससे पहले कुवैत ने बताया था कि ईरान की ओर से हमला किया गया है। अमेरिका ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए उसने गुरुक और ईरान के केश्म आइलैंड पर बमबारी की है।

होर्मुज वाले द्वीप पर भी हमला
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक रूप से युद्धविराम है। हालांकि कई बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका और ईरान दोनों की तरफ से युद्धविराम का उल्लंघन किया गया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका होर्मुज के सिरिक आइलैंड पर हमला करन के लिए कुवैत के एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था। इसीलिए इस एयरबेस को टारगेट किया गया है।

ईरान ने फिर खोल दिए मिसाइल अड्डे
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपेयरिंग का काम पूरा होने के बाद ईरान ने एक बार फिर अपने मिसाइल अड्डे खोल दिए हैं। सुरंगों में बनाए गए इन अड्डों को सुरक्षित बनाने के लिए एंट्री को सील कर दिया गया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सैटलाइट इमेजरी से पता चला है कि जिन 69 ठिकानों पर अमेरिका ने हमला किया था उनमें से करीब 50 को फिर से खोला जा चुका है और मेंटिनेंस का काम पूरा हो चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने बुलडोजर और ट्रक का इस्तेमाल करके सारा मलबा साफ कर दिया है और सड़कों को भी दुरुस्त कर दिया गया है। इसके बाद अब ईरान एक बार फिर लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक करने की स्थिति में है। बताया गया कि लगभग सात हफ्ते पहले हुए सीजफायर के बाद ही ईरान ने अपने मिसाइल ठिकानों को रिकवर करने का मिशन शुरू कर दिया था।

कहां अटकी है समझौते की बात
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संशोधित मसौदा कई बार मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की अगुवाई में मध्यस्थता की जा रही है। हालांकि अमेरिकी संशोधनों को “महत्वपूर्ण” बताया गया है, लेकिन उनके विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और ईरान ने भी अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

फारस की खाड़ी में तनाव के बावजूद ईरान ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में 28 वाणिज्यिक जहाज, जिनमें तेल टैंकर और मालवाहक पोत शामिल हैं, उसकी अनुमति से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। वहीं दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र के कुछ प्लेटफॉर्मों पर उत्पादन आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान दबाव में है। खबरों के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत में मजदूरों और पेंशनभोगियों ने वेतन, पेंशन और बढ़ती महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया।

ईरान में गिरा अमेरिकी F-15 जेट: चीनी MANPADS मिसाइल से हमले का दावा

 नई दिल्ली

 ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में पिछले महीने दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस लड़ाकू विमान को चीन निर्मित शोल्डर-फायर्ड मिसाइल (MANPADS) से निशाना बनाया गया हो सकता है।

NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने ईरान को संघर्ष के दौरान अतिरिक्त सैन्य सहायता भी दी हो सकती है। इसमें स्टेल्थ एयरक्राफ्ट तकनीक और लंबी दूरी की रडार प्रणालियां शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन प्रणालियों की मदद से ईरान को F-15E स्ट्राइक ईगल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को ट्रैक करने में मदद मिली होगी।

ट्रंप ने भी कहा था- मिसाइल से गिरा जेट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उस समय कहा था कि विमान को एक शोल्डर-लॉन्च्ड मिसाइल से मार गिराया गया। MANPADS छोटे पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम होते हैं, जिन्हें कंधे पर रखकर दागा जा सकता है और इनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

36 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
विमान गिरने के बाद दोनों क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए 36 घंटे तक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दोनों ने हादसे से पहले इजेक्ट कर अपनी जान बचा ली थी। पेंटागन के मुताबिक, पायलट को करीब 7 घंटे में सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दूसरे अधिकारी वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर को बचाने में लगभग दो दिन लग गए। वह ईरान के ज़ाग्रोस पर्वतीय इलाके में छिपा रहा, जिसके बाद उसे सुरक्षित निकाला गया

अमेरिका कर रहा जांच
अमेरिकी अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं कि अप्रैल में यह लड़ाकू विमान आखिर कैसे गिराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह पुष्टि होती है कि अमेरिकी जेट दुश्मन की गोलीबारी से गिराया गया, तो यह दशकों में पहली ऐसी घटना होगी।

चीन-ईरान संबंधों पर बढ़ेगी चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चीन ने ईरान को यह सैन्य उपकरण कब उपलब्ध कराए। लेकिन यदि ईरान वास्तव में चीनी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, तो इससे अमेरिका-चीन संबंधों में और तनाव बढ़ सकता है।

अमेरिका पहले ही चीन पर ईरान को चीनी सैटेलाइट सेवाओं तक पहुंच देने का आरोप लगा चुका है। वॉशिंगटन का कहना है कि इससे ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इसी आरोप के बाद अमेरिका ने तीन चीनी सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए थे। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ट्रंप बोले- शी जिनपिंग ने दिया भरोसा
इसी महीने डोनल्ड ट्रंप ने Fox News से बातचीत में कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि चीन ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहा। यह एक खूबसूरत वादा है और मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूं।”

 

होर्मुज स्ट्रेट में माइन्स का दावा: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी समुद्री सुरक्षा चिंता

नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है.

इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है.

इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है.

वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स…
जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा.

माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है.

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है.

हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

इजरायल का बड़ा सैन्य कदम: 44 साल बाद ब्यूफोर्ट किले पर फहराया झंडा

लेबनान

इजरायली सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में रणनीतिक रूप से अहम पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है जिसके शीर्ष पर ब्यूफोर्ट किला स्थित है। इस फोर्ट पर लगभग 44 साल बाद इजरायली झंडा लहराया है। यह 26 वर्ष से अधिक समय में लेबनान में इजराइली सेना का सबसे भीतर किया गया कब्जा है। इजराइली सेना ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। बताया गया कि इजइराली सेना ने नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर आसपास के गांवों में कई दिन तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद कब्जा किया। इजराइली सैनिकों ने इन गांवों के दुर्गम इलाके में हिजबुल्ला सदस्यों से लड़ाई लड़ी

किले पर कब्जा करना मार्च की शुरुआत में इजराइल-हिजबुल्ला के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब 1948 में इजराइल के गठन के बाद से युद्ध की स्थिति में रहे दोनों देश वाशिंगटन में सीधी वार्ता कर रहे हैं। इजरायल की यह कार्रवाई 17 अप्रैल से लागू नाममात्र के संघर्षविराम के बावजूद हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अगले दौर की वार्ता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में होनी है।

इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अवीचाय अद्राई ने ‘एक्स’ पर एक तस्वीर साझा की जिसमें इजराइली सैनिक किले के बाहर चलते दिख रहे हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि सैनिकों ने किले पर इजरायल का ध्वज फहरा दिया है।

इससे पहले 1982 में इजराइली सैनिकों ने इस किले पर कब्जा किया था और 2000 में लेबनान से वापसी तक इस पर उनका कब्जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने कुछ दिन पहले ब्यूफोर्ट रिज और उससे आगे दक्षिण में सुलुकी घाटी में अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला के ढांचे को नष्ट करना और ‘इजराइली नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष खतरों’ को दूर करना था। बयान में कहा गया कि सेना जरूरत पड़ने पर अपने ‘अभियान का विस्तार करने’ के लिए तैयार है।

हाल के दिनों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियानों का दायरा बढ़ा दिया है। इसने वास्तविक सीमा रेखा की तरह काम करने वाली लितानी नदी के पार सैनिक भेजे हैं और दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से से निवासियों को हटने को कहा है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu