दिल्ली से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन का मेगाप्लान, पटना समेत कई शहरों को मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी

कोलकाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में बुलेट ट्रेन लाने का वादा किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक के दौरान यह जानकारी दी. रेल मंत्री ने बताया कि 42 वर्षों में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क का केवल 28 किलोमीटर हिस्सा ही पूरा हो पाया था, जबकि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से 45 किलोमीटर मेट्रो लाइनें जोड़ी गई हैं। 

रेल मंत्री ने शनिवार को कहा कि राज्य के लिए बुलेट ट्रेन शुरू करने का फैसला किया गया है. यह ट्रेन दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी को जोड़ेगी. इस सफर में सिर्फ छह घंटे लगेंगे और यह आरामदायक होगा. अगले पांच सालों में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें शुरू की जाएंगी और उम्मीद है कि ‘डबल-इंजन’ सरकार के तहत पश्चिम बंगाल में रेलवे प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलेगी। 

अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘अगले पाँच सालों में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें शुरू की जाएंगी. आज मैंने कोलकाता मेट्रो में सफर किया. हम कोलकाता मेट्रो को नया रूप देंगे.’ मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन सेवाओं का उद्देश्य यात्रा के समय को तेजी से कम करना है. उन्होंने कहा, ‘ये हाई-स्पीड कॉरिडोर छह घंटे में सिलीगुड़ी को नई दिल्ली से जोड़ देंगे। 

बैठक में शामिल होने के लिए वह शनिवार को  दमदम हवाईअड्डे पर पहुंचे. हवाईअड्डे से निकलने के तुरंत बाद रेल मंत्री मेट्रो में चढ़े और यात्रियों से बातचीत की. उन्होंने ऑटो रिक्शा में भी सवारी की. उनके साथ राज्य के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय और पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो भी थे। 

इसके बाद मुख्यमंत्री और रेल मंत्री ने मीडिया को संबोधित किया और राज्य के लिए कई रेल परियोजनाओं को शुरू करने की घोषणा की. बुलेट ट्रेन के बारे में बात करते हुए रेल मंत्री ने कहा, ‘इस पर काम जल्द ही शुरू होगा. रेल परियोजना का रास्ता साफ हो गया है और सभी विधायकों ने सहयोग का भरोसा दिया है.’ उन्होंने नए स्टेशनों और अतिरिक्त ट्रेनों को शुरू करने का भी वादा किया. साथ ही, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय मंत्री से राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह किया। 

एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अंतर्गत राज्यभर में पहले ही दिन 6 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा

अहमदाबाद

विश्व पर्यावरण दिवस’ पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी से प्रेरित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ होगया। गांधीनगर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के करकमलों से राज्यव्यापी अभियान का आरंभ किया गया । गांधीनगर के ‘ज’ रोड पर लोकभवन स्टाफ क्वार्टर्स के पास 0.5 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘वन कवच’ पद्धति से लगभग 5,000 पौधों का रोपण कर यह राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया ।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2024 में नई दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया गया था।
वन विभाग के अनुसार वन एवं पर्यावरण मंत्री  अर्जुन मोढवाडिया तथा राज्य मंत्री  प्रवीण माळी के मार्गदर्शन में समग्र राज्य में इस अभियान को गतिमान बनाया जाएगा।

पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता बायोडायवर्सिटी के संरक्षण के लिए गांधीनगर में 57 स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। जो कि त्रि- स्तरीय होगा। जिसमें 16 प्रजातियों के 20 प्रतिशत उच्च स्तरीय पौधें, 25 प्रजातियों के 50 प्रतिशत मध्यम स्तरीय तथा विभिन्न 16 प्रजातियों के 30 प्रतिशत निम्न स्तरीय पौधों का समावेश होगा। इस वन कवच माइक्रो फॉरेस्ट की विशेषता यह है कि यह बहुत कम स्थान में अत्यंत सघन तथा तेजी से विकसित होने वाला शहरी जंगल तैयार करता है।

इसके अतिरिक्त; वन विभाग के अनुसार इस अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री तथा गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श् अमित शाह के लोकसभा क्षेत्र को ‘हरियाली लोकसभा’ बनाने के लिए वन विभाग द्वारा लगभग 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 50 लाख से अधिक पौधे लगाकर ‘वन कवच – माइक्रो फॉरेस्ट’ तैयार किया जाएगा।

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ से शुरू कर आगामी सप्ताह तक वन विभाग द्वारा पूरे गुजरात को कवर करने वाले विभिन्न जन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जो कि इस प्रकार हैं :

राज्यभर में ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर कुल 50 हजार ‘समूह स्तर’ निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक समूह द्वारा 12 पौधों का रोपण किया जाएगा और एक ही दिन में पूरे राज्य में 6 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।

इस सप्ताह के दौरान प्रत्येक जिला स्तर पर मुख्य चार कार्यक्रम तथा सभी 265 तहसीलों को विधानसभा क्षेत्र में महानुभावों की अध्यक्षता में सघन पौधो का रोपण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सप्ताह के दौरान 265 तहसील स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से 1.53 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा तथा 1.87 लाख से अधिक पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। साथ ही तहसीलों में 861 निर्धारित स्थलों पर वन विभाग के मार्गदर्शन में अतिरिक्त 4.15 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
वन विभाग ने राज्य के प्रत्येक नागरिक, सामाजिक संस्थाओं तथा युवाओं से अपनी माता के नाम पर कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण करने के लिए अनुरोध किया है।

शाला प्रवेशोत्सव से पहले प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकें पहुँचाने के लिए प्रशासन सजग: पावरा

अहमदाबाद

 गुजरात राज्य शाला पाठ्यपुस्तक मंडल के कार्यवाहक अध्यक्ष  मनुभाई पावरा ने कहा है कि मुख्यमंत्री  भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन औरे शिक्षा मंत्री  प्रद्युमन वाजा तथा शिक्षा राज्य मंत्री मती रिवाबा जाडेजा के नेतृत्व में पाठ्यपुस्तक वितरण का कार्य चल रहा है। गुजरात बोर्ड से संबद्ध प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक के सभी माध्यमों की पाठ्यपुस्तकों को निर्धारित समयसीमा में विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए मंडल द्वारा युद्धस्तर पर एवं सुदृढ़ आयोजन के साथ कार्य शुरू किया गया है।

 मनुभाई ने अधिक विस्तार से जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि चालू शैक्षणिक वर्ष में विद्यार्थियों के हित में कुछ नूतन विषयों को जोड़कर पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया समय पर प्रारंभ कर दी गई थी, लेकिन कुछ अनिवार्य न्यायिक प्रक्रियाओं – कोर्ट केस तथा ईरान सहित अन्य देशों के बीच उत्पन्न हुई वैश्विक युद्ध की विषम स्थिति के कारण कागज के आयात में लगभग ढाई से तीन महीनों का आकस्मिक विलंब हुआ था। हालाँकि; मंडल की समग्र टीम सभी अंतरराष्ट्रीय एवं कानूनी अवरोधों को पार कर विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य जरा भी प्रभावित न हो; इसके लिए हाल में दिन-रात पुरजोर तरीके से प्रिंटिंग कार्य कर रही है। अध्यक्ष  पावरा ने राज्य के नागरिकों तथा अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि इन सभी आकस्मिक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पुस्तकों के मूल्य में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है और अभिभावकों पर एक भी रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने नहीं दिया जाएगा।

पुस्तक वितरण की वर्तमान स्थिति तथा आगामी सुदृढ़ आयोजन की रूपरेखा देते हुए अध्यक्ष  मनुभाई ने जोड़ा कि राज्य के निजी एवं नॉन-ग्रांटेड विद्यालयों के लिए शुल्कयुक्त पुस्तकें वितरकों तक समय पर पहुँचा दी गई हैं, जो वर्तमान में विद्यार्थियों को उपलब्ध भी हो चुकी हैं, जबकि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को आगामी ‘शाला प्रवेशोत्सव’ से पूर्व ही सभी पाठ्यपुस्तकें तहसील स्तर तक पूर्ण रूप से निःशुल्क मिल जाएँ; ऐसी माइक्रो-प्लानिंग प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त; सरकारी तथा ग्रांटेड माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भी पुस्तकें अत्यंत तेजी से पहुँचाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियाँ तत्परता से कार्य कर रही हैं।

अभिभावकों और विद्यार्थियों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करते हुए अध्यक्ष  मनुभाई ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों अथवा सुदूरवर्ती-रिमोट क्षेत्रों में आकस्मिक परिस्थितिवश यदि भौतिक रूप से (फिजिकली) पुस्तक पहुँचने में थोड़ा भी विलंब हो, तो भी विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य कहीं अवरुद्ध न हो; इसके लिए मंडल ने अत्याधुनिक ‘डिजिटल बैकअप’ की अग्रिम व्यवस्था की है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट 
https://gsstb.gujarat.gov.in/gsstb/Textbook पर सभी माध्यमों की पाठ्यपुस्तकें डिजिटल रूप में – ई-पुस्तकों (e-Books) के रूप में अपलोड कर दी गई हैं।

शैक्षणिक सत्र के प्रारंभिक चरण में शिक्षक तथा विद्यार्थी बिना किसी कठिनाई के वेबसाइट से सीधे ही प्रकरणों को डाउनलोड कर सकेंगे। इसके साथ ही; शिक्षक भी इनका संदर्भ के रूप में उपयोग कर बच्चों को पढ़ा सकेंगे। पाठ्यपुस्तक मंडल के अध्यक्ष  मनुभाई पावरा ने कहा कि राज्य सरकार तथा पाठ्यपुस्तक मंडल हर विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक हित के प्रति अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर है और किसी भी विषम स्थिति में भी अंतिम छोर के बच्चे तक शिक्षा की सुविधा पहुँचाने के लिए हम कटिबद्ध हैं।

मोरबी में दर्दनाक सड़क हादसा, चराडवा गांव के पास 5 लोगों की मौत, बाइक सवार घायल

 मोरबी

मोरबी में हलवद क्षेत्र के चराडवा गांव के पास एक दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना उस समय हुई, जब एक कार वाहन से टकरा गई. हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। जानकारी के अनुसार, कार में कुल सात लोग सवार थे, जो सभी हलवद के रणछोड़गढ़ गांव के रहने वाले थे. यह सभी किसी काम से जा रहे थे, तभी चराडवा गांव के पास उनकी कार आगे चल रही एक अज्ञात गाड़ी के पिछले हिस्से से जा टकराई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। 

इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. बाकी घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है. सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जायजा लिया. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं. वहीं मामले की जांच शुरू कर दी है। 

इसी बीच एक और दर्दनाक घटना भी सामने आई, जिसमें परेश नाम का एक युवक बाइक से हलवद की ओर जा रहा था. मानसर गांव के पास उसकी बाइक फिसल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल हालत में उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी वही कार, जो पहले से हादसे में शामिल थी, एक अज्ञात वाहन के पीछे से टकरा गई।

लगातार हुए इन हादसों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनता है. पुलिस ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. गांव में मातम का माहौल है और हर तरफ गम का सन्नाटा पसरा हुआ है। 

RTI में बड़ा खुलासा: अटल पेंशन योजना से 1.49 करोड़ लोगों ने छोड़ा साथ

नई दिल्ली
सरकारी पेंशन स्कीम ‘अटल पेंशन योजना’ की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। 

 सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। 

RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है। 

साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ
योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है। 

जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत ‘डिसकंटिन्यूएशन’ जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है। 

क्या है अटल पेंशन योजना?
अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

राफेल डील पर बड़ा दांव: भारत की नई रणनीति से फ्रांस पर बढ़ा दबाव, पुराने सहयोगी की एंट्री

नई दिल्ली

भारत फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को मेंटेन करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल जेट की डील पर बातचीत कर रहा है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील है. इसको लेकर इंडियन एयर फोर्स चीफ एपी सिंह एक दिन पहले तक फ्रांस में थे. लेकिन, अभी तक इस डील का सबसे बड़ा पेच नहीं सुलझा है. भारत चाहता है कि फ्रांस इस जेट का सोर्स कोड नहीं तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट साझा करे जिससे कि भारत इस जेट में देसी ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें लगा सके. लेकिन, फ्रांस इंटरफेस डॉक्यूमेंट भी नहीं देना चाहता है. उसकी चिंता है कि अगर वह भारत के साथ यह डॉक्यूमेंट साझा करेगा तो उसकी पूरी गोपनीयता भारत के हाथ लग जाएगी. फिर ये गोपनीय जानकारी भारत के जरिए उसके दुश्मन देश यानी रूस तक पहुंच जाएगी. इसी कारण वह फिलहाल राफेल का इंटरफेस डॉक्यूमेंट नहीं देना चाहता है। 

भारत के लिए सुखद ऑफर
इस बीच भारत के लिए एक सुखद खबर आई है. राफेल को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के बीच पुराने दोस्त रूस ने बड़ा ऑफर दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद एक बड़ी पेशकश कर दी है. उन्होंने इंटरनेशनल प्रेस मीट में कहा कि रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम तक हर स्तर पर भारत का सहयोग करने के लिए तैयार है. पुतिन का स्पष्ट रूप से यह कहना दुनिया खासकर फ्रांस के लिए एक बड़ा संदेश है. भारत रूस से एसयू-57 खरीदने की भी योजना पर काम कर रहा है. ऐसे में भारत कितनी संख्या में यह जेट खरीदेगा यह काफी हद तक राफेल डील पर निर्भर करेगा। 

दरअसल, एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. अभी तक दुनिया में केवल तीन देश ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें एक अमेरिका, दूसरा चीन और तीसरा देश रूस है. हालांकि रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट एसयू-57 को लेकर एक्सपर्ट कई सवाल भी उठाते रहे हैं लेकिन, रूस की ओर से पूरा सोर्स कोड़ साझा करने, भारत में इस जेट को बनाने और भारत की जरूरत के हिसाब से इस जेट में बदलाव करने जैसे ऑफर को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है. सामरिक मामलों के एक्सपर्ट यहां तक कह रहे हैं कि भारत की योजना राफेल के साथ-साथ सुखोई-57 के कम से कम तीन स्क्वाड्रन लेने की है. इससे भारत पांचवीं पीढ़ी की अपनी तात्कालिक जरूरत को पूरा कर लेगा. इसके बाद 2035 तक भारत का अपना 5+ पीढ़ी का जेट एम्का तैयार हो जाएगा. भारत एम्का प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। 

फ्रांस को संदेश
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ऑफर भारत के नजरिए से काफी अहम है. पुतिन इंटरनेशनल प्रेस के सामने यह बात कही है. ऐसे में पुतिन का यह बयान काफी कुछ कहता है. इसमें यह संदेश छिपा है कि अगर फ्रांस भारत के साथ इंटरफेर डॉक्यूमेंट नहीं साझा करता है तो भारत के विकल्प खुले हैं. भारत पहले ही से रूस का एक बड़ा सैन्य पार्टनर रहा है. इस वक्त भी भारतीय एयरफोर्स की रीढ़ सुखोई-30 एमके जेट हैं. ये चौथी पीढ़ी के जेट हैं और भारत के पास इसके 250 से अधिक यूनिट हैं. इनको भारत में ही असेंबल किया गया है. रूस ने सुखोई-30एमकेई के प्लांट में ही सुखोई-57 को असेंबल करने का ऑफर दिया है. इससे भारत के लिए खर्च में काफी कमी आ जाएगी. इसके साथ ही रूसी विमानों में किसी भी भारतीय मिसाइल को जोड़ना आसान रहेगा. ऐसे में पुतिन का संदेश केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि फ्रांस के लिए भी है। 

PF खाताधारकों के लिए बड़ा अपडेट: EPFO ब्याज जमा होने में क्यों हो रही देरी, जानिए ताजा स्थिति

 नई दिल्‍ली

देश के करोड़ों ईपीएफ सदस्‍य इन दिनों अपने अकाउंट में ब्‍याज आने का इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) ने मार्च 2026 में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी ब्‍याज का ऐलान किया था, लेकिन नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होने के 2 महीने से ज्‍यादा समय होने के बाद भी अभी तक सदस्‍यों के अकाउंट में ब्‍याज का पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ है। 

ऐसे में पीएफ अकाउंट होल्‍डर्स को इस बात की टेंशन हो रही है कि उनके पीएफ का पैसा कब खाते में भेजा जाएगा? हालांकि, ईपीएफओ ने कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है. जल्‍द ही पीएफ अकाउंट के तहत पैसा सदस्‍यों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। 

EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए मार्च 2026 में EPF पर 8.25% सालाना ब्याज दर की सिफारिश की थी. इसके बाद से सरकार की मंजूरी और नोटिफिकेशन जारी होने का इंतजार किया जा रहा है. यह अपडेट आने के बाद कर्मचारियों के खाते में ब्‍याज का पैसा जमा कर दिया जाएगा. फिलहाल, सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

क्‍यों हो रही है देरी?
फाइनेंशियल ईयर खत्म होते ही EPFO ब्याज कर्मचायों के पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर नहीं कर देता है, बल्कि इसके पीछे कई प्रॉसेस होते हैं. पहले सरकार की मंजूरी ली जाती है, फिर करोड़ों अकाउंट के आंकड़ों को चेक किया जाता है और रिकॉर्ड अपडेट किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीने लग जाते हैं. पिछले कुछ सालों में भी ब्याज जून और जुलाई के दौरान खातों में जमा किया गया था. इस कारण, इस बार भी ब्‍याज जमा होने में देरी हो रही है। 

देरी से क्‍या होगा नुकसान? 
ब्‍याज का पैसा लेट से आने का मतलब ये नहीं होता है कि सदस्‍यों को ब्‍याज में नुकसान होगा. EPFO के नियमों के अनुसार, अकाउंट होल्‍डर्स को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. ब्‍याज का कैलकुलेशन अकाउंट में मौजूदा बैलेंस के आधार पर की जाती है, यानी भले ही ब्‍याज की एंट्री बाद में दिखाई दे, लेकिन पूरे साल का ब्‍याज दर से जोड़ा जाएगा. EPFO कई बार यह कह चुका है कि ब्‍याज जमा होने में देरी का अस सदस्‍यों को मिलने वाले अमाउंट पर नहीं पड़ता है. पूरा ब्‍याज उनके अकाउंट में जमा किया जाता है। 

कैसे करें चेक अकाउंट में ब्‍याज आया कि नहीं? 

    EPF मेंबर अपने अकाउंट की जानकारी कई तरह से देख सकते हैं.
    UMANG ऐप पर लॉगिन कर View Passbook विकल्प चुन सकते हैं. 
    इसके साथ ही EPFO की Member Passbook सेवा के जरिए भी बैलेंस और ब्याज की जानकारी देखी जा सकती है. 
    सदस्य अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर या 7738299899 पर SMS भेजकर भी PF बैलेंस की जानकारी ले सकते हैं.
    अगर पासबुक में Int. Updated up to 31/03/2026 लिखा दिखाई देता है, तो समझिए कि ब्याज अपडेट किया जा चुका है. 

 

 

8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट: क्या केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा बेसिक सैलरी का एरियर?

नई दिल्ली

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग एक्शन मोड में आ चुका है। वेतन आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक भी कर रहा है। इस दौरान वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों की सुझाव और सिफारिशों पर मंथन भी कर रहा है। वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों को राहत देते हुए सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि को भी बढ़ा दिया है। आयोग ने अब यह समयसीमा 15 जून 2026 तक कर दी है। यह तीसरी बार है जब मेमोरेंडम जमा करने की तारीख बढ़ाई गई है। इस फैसले के बाद एक बार फिर से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने में देरी होगी। बता दें कि वेतन आयोग को उसके गठन के बाद सिफारिशों को सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है।

बैकडेट से लागू होने की उम्मीद
वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी का असर कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ सकता है। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशें बैकडेट यानी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। अगर सिफारिशों के लागू होने में देरी होती है तो कर्मचारियों का एरियर बढ़ जाएगा। वहीं, नई वेतन संरचना लागू होने पर सरकार को एकमुश्त भुगतान करना होगा। इससे सरकारी खजाने का बोझ बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों का बेसिक सैलरी का एरियर मिल सकता है लेकिन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसे कुछ भत्तों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। बता दें कि HRA का भुगतान आमतौर पर पूर्व प्रभाव से नहीं किया जाता। ऐसे में वेतन आयोग की रिपोर्ट जितनी देर से आएगी, कर्मचारियों की कुछ संभावित वित्तीय लाभों पर उतना ही असर पड़ सकता है।

वेतन आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया 5 मार्च 2026 को शुरू हुई थी। शुरुआत में इसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की गई थी, जिसे बाद में 31 मई तक बढ़ाया गया। अब इसे 15 जून तक बढ़ा दिया गया है। मेमोरेंडम केवल वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल, पीडीएफ या हार्ड कॉपी के रूप में भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

बता दें कि पिछले साल जनवरी महीने में सरकार ने पहली बार आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। हालांकि, इसकी घोषणा नवंबर महीने में की गई। वेतन आयोग के गठन के बाद फरवरी 2026 में वेबसाइट को लॉन्च किया गया। वेतन आयोग की इस वेबसाइट पर सुझाव दिए जा सकते हैं।

मॉनसून ने दी दस्तक: 16 राज्यों में बारिश का अलर्ट, यूपी से बंगाल तक झमाझम बरसेंगे बादल

तिरुवनन्तपुरम

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

केरल और कर्नाटक में भारी बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें।

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है।

दिल्ली का मौसम
राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी।

यूपी का मौसम
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार का मौसम
बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है।

पहाड़ी इलाकों का मौसम
हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

एनएमडीसी ने मनाया पर्यावरण दिवस 2026

हैदराबाद

 भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और एक जिम्मेदार खनन कंपनी एनएमडीसी ने हैदराबाद में अपने मुख्यालय और देश भर में स्थित अपनी परियोजनाओं में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया,  जो सतत खनन और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है ।

कंपनी ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जो पर्यावरण सुस्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम  “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर केंद्रित रहा । समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जो हरित भविष्य के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है । श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन), श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), और श्री सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने पर्यावरण की शपथ दिलवाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सुस्थिर प्रथाओं को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए प्रेरित किया । 

कार्यक्रम के भाग के रूप में, पर्यावरण के प्रति जागरूकता संबंधी अनेक वीडियो दिखाए गए और एनएमडीसी की पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और सुस्थिर खनन प्रथाओं के लिए चल रही पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वृत्तचित्र दिखाया गया ।
अपनी सभी परियोजनाओं में, एनएमडीसी ने वृक्षारोपण अभियान चलाए और कर्मचारियों तथा छात्रों के लिए पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और सुस्थिरता पर अभिनव सोच को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। कंपनी ने सुस्थिर विकल्पों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का वितरण भी किया ।

अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पृथ्वी अपने अस्तित्व के अधिकांश समय तक मनुष्यों के बिना जीवित रही है और अस्तित्व उल्लेखनीय रहा है । मुझे यकीन है कि अगर भविष्य में मनुष्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो भी पृथ्वी का अस्थित्व आराम से बना रहेगा । इसलिए, यह हमारे ही हित में है कि हम भूमंडल की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि यह यह हमारे रहने योग्य बना रहे। यह पृथ्वी के लिए नहीं बल्कि मानवता की उत्तरजीविता की रणनीति है । व्यावसायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार से हम जो भी कदम उठाते हैं, उसे उठाने से पहले हम उनपर जिम्मेवारीपूर्वक विचार अवश्य करें ।“ 

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संगठन के रूप में, एनएमडीसी जिम्मेदार खनन में विश्वास रखता है और उसका पालन करता है । आज हम जो करते हैं वह हमें गर्व महसूस कराता है, न केवल इसलिए कि हम व्यवसाय में निरंतर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम पर्यावरण और समुदायों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं ।“ 

इस अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर एनएमडीसी की आंतरिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रचनात्मकता और भागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना को बढावा देने का प्रयास किया । 

आज जब देश एक सुस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनएमडीसी यह प्रदर्शित करता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण प्रबंधन साथ-साथ चल सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पृथ्वी की सतह से नीचे जो पोषित होता है वह उसके ऊपर मौजूद जीवन में भी सार्थक योगदान देता है ।

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