वियतनाम बोट हादसे में 15 भारतीयों की मौत, कंपनी ट्रिप बनी दर्दनाक

नई दिल्ली
वियतनाम के फू कुओक द्वीप पर शनिवार को भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक टूरिस्ट बोट समुद्र में पलट गई. इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई. अब खुलासा हुआ है कि ये सभी लोग कंपनी ट्रिप पर गए थे. ये लोग एक स्मार्टफोन बनाने वाली भारतीय कंपनी के कर्मचारी और चैनल पार्टनर्स थे.

दरअसल कंपनी ने अपने डीलर्स और वितरकों के लिए इस ‘रिवॉर्ड ट्रिप’ का आयोजन किया था. कंपनी ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि जान गंवाने वालों में 14 चैनल पार्टनर्स और एक कंपनी का कर्मचारी शामिल है. ये सभी लोग तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरलम के रहने वाले थे.

मोबाइल कंपनी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. कंपनी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पीड़ित परिवारों की मदद करना और शवों को जल्द से जल्द भारत लाना है.

आखिरी वीडियो कॉल और वो दर्दनाक मंजर
इस हादसे में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के रहने वाले शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद (54) की भी मौत हो गई. वो मोबाइल कंपनी के चैनल पार्टनर थे. उनके परिजनों ने बताया कि नाव पर सवार होने से कुछ समय पहले ही अब्दुल्ला ने अपनी पत्नी, बेटे और पोती से वीडियो कॉल पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि वो एक ऐसे द्वीप पर जा रहे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं रहेगा और लौटकर दोबारा फोन करेंगे. लेकिन वो उनकी आखिरी बात बन गई.

हादसे में बचे तमिलनाडु के पलानी निवासी निर्मल कुमार ने बताया कि समुद्र की ऊंची लहरों और ओवरलोडिंग के कारण स्पीडबोट महज कुछ सेकेंड में पलट गई. वहीं, आंध्र प्रदेश के गुंटूर के मोबाइल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर आशीष कुमार ने बताया, ‘दोपहर करीब 1:30 बजे नाव होन मे रुत नगोई द्वीप से कुछ ही मीटर आगे बढ़ी थी. हम सब तस्वीरें ले रहे थे कि अचानक नाव एक तरफ झुक गई और पलट गई. हर तरफ चीख-पुकार मच गई.’

शवों को भारत लाने की कोशिश में जुटी सरकार
इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कई मुख्यमंत्रियों ने शोक जताया है. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल की सरकारें केंद्र सरकार के साथ मिलकर शवों को वापस लाने की कोशिशों में जुटी हैं. वहीं वियतनाम प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है.

हैनोई में भारतीय दूतावास के मुताबिक, नाव पर कुल 36 लोग सवार थे. इनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार स्थानीय क्रू मेंबर शामिल थे. हादसे के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 15 भारतीयों की जान चली गई. मृतकों में 10 लोग तमिलनाडु के, 3 आंध्र प्रदेश के और 2 केरलम के रहने वाले हैं.

नए वोटर बनने के नियम बदले, माता-पिता की वोटर जानकारी भी देनी होगी।

 नई दिल्ली
देश के कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद नए वोटर बनने के नियमों में भी परिवर्तन किया गया है। चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इसके मुताबिक अब नए वोटर्स को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बताना होगा कि पिछले एसआईआर में उनके माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम दर्ज था या नहीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह बदलाव अभी केवल ऑनलाइन फॉर्म में ही दिखाई दे रहा है। वहीं वेबसाइट से फॉर्म की हार्ड कॉपी डाउनलोड करने में यह ऑप्शन नहीं दिखाई देता है।

बता दें कि 10 राज्यों में एसआईआर के बाद कम से कम 5.58 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। ऐसे में उन परिवारों के नए मतदाताओं के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि यह बात स्पष्ट नहीं की गई है कि अगर किसी के माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में नहीं है तो उनके बच्चों या फिर पोते पोतियों का नाम शामिल किया जाएगा या नहीं ।

बंगाल में एसआईआर को लेकर खूब हुआ विवाद
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी। इसको लेकर खूब विवाद भी हुआ। अकेले पश्चिम बंगा में 27 लाख वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया और वे विधानसभा चुनाव में वोट भी नहीं कर पाए।

चुनाव आयोग के ECINRT पोर्टल पर उपलब्ध डिक्लेरेशन फॉर्म 6 में ‘J’ और ‘K’ सेक्शन को जोड़ा गया है। इसी में आवेदक के माता पिता या फिर दादा दादी की डीटेल मांगी गई है। इसमें तीन ऑप्शन दिए गए हैं।

पहला विकल्प- मेरा नाम पिछळी एसआईआर मतदाता सूची में है
दूसरा विकल्प- मेरे माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में है

तीसरा विकल्प- ना तो मेरा और ना ही मेरे पाता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर मतदाता सूची में था

तीसरा विकल्प चुनने पर क्या होगा?
अब अगर आवेदक पहला और दूसरा विकल्प चुनता है तो उससे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची का सीरियल नंबर भी भरना होगा। अगर तीसरा विकल्प चुनता है तो आगे कोई डीटेल नहीं मांगी जाएगी। हालांकि इस कॉलम को अनिवार्य नहीं बताया गया है। यह भी नहीं बताया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने पर आगे क्या होगा।

यह विकल्प उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर है जिनमें 2025-26 में एसआईआर किया गया है। हालांकि बिहार को इससे अलग रखा गया है। बिहार में सबसे पहले एसआईआर करवाया गया था। वहीं असम में एसआईआर नहीं करवाया गया है। बता दें कि पिछले साल जून में एसआईआर शुरू होने के बाद से फॉर्म- 6 में कोई सुधार नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग नहीं बदल सकता है फॉर्म-6
केंद्र सरकार के पास रिप्रजंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट 1950 सेक्शन 28 के तहत नियमों में बदलाव करने का अधिकार है। हालांकि संविधान के आर्टिकल 326 के मुताबिक भारत में रहने वाले वयस्क को वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने का अधिकार है, जब तक कि उसे किसी वजह से अयोग्य ना ठहराया गया हो। सेक्शन 28 में कहा गया है कि चुनाव आयोग से सलाह करने के बाद केंद्र सरकार ऑफिशल गजेट में नोटिफिकेशन जारी करके नियम बना सकती है।

एक अधिकारी ने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने से पहले कानून मंत्रालय का नोटिफिकेशन जारी करना जरूरी है। यह अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उन्होंने कहा चुनाव आयोग अपने मन से फॉर्म में एक कॉमा भी नहीं लगा सकता है। वहीं 2021 में संसद में कानून में संशोधन करके चुनाव आयोग को मतदाताओं के आधार कार्ड लेने का अधिकार दिया गया था। 17 फरवरी 2022 को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच बड़ा समझौता, ₹1.72 लाख करोड़ निवेश से UPI तक; 10 पॉइंट में जानें अहम बातें

 नई दिल्‍ली

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी न्‍यूजीलैंड दौरे पर हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच 10 खास समझौते और 18 बड़े फैसले हुए हैं. भारत और न्‍यूजीलैंड ने दोनों देशों के बीच कारोबार को 2030 तक 35,000 करोड़ रुपये करने का टारगेट रखा है. भारत न्‍यूजीलैंड को केमिकल्‍स, प्रोसेसिंग फूड, एग्री प्रोडक्‍ट्स और अन्‍य चीजों की सप्‍लाई करेगा. वहीं न्‍यूजीलैंड से किवी, अन्‍य फल और क्रिटिकल्‍स मिनिरल्‍स समेत कई चीजें सस्‍ती कीमतों पर भारत आएंगी। 

पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक में डील साइन की गई है. पीएम मोदी ने कहा कि रिकॉर्ड 9 महीने में दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किया गया है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मतलब है कि भारत से न्‍यूजीलैंड जाने वाली ज्‍यादातर चीजों पर शून्‍य टैक्‍स लगेगा. वहीं न्‍यूजीलैंड से आने वाली वस्‍तुओं पर भी कम या शून्‍य टैक्‍स लगाया जाएगा। 

इस डील के तहत न्‍यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत 1.72 लाख करोड़ (20 अरब डॉलर) निवेश करेगा. यह एक बड़ा निवेश है, जिससे भारत के विकसित होने में मदद मिलेगा.  आइए 10 पॉइंट में समझतें हैं भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच खास डील… 

10 पॉइंट में समझें भारत-न्‍यूजीलैंड समझौता

  •     2030 तक सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया जाएगा. दोनों देश मिलकर व्‍यापार, डिफेंस, एजुकेशन, एग्रीकल्‍चर, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चर और टुरिज्‍म पर फोकस करेंगे और व्‍यापार को 35,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाएंगे। 
  •     डिफेंस और समुद्री मार्ग में दोनों देश सहयोग बढ़ाएंगे. संयुक्‍त अभ्‍यास और आपदा में राहत सहयोग करेंगे. इससे समुद्री निगरानी मजबूत होगी. नौसैनिक चार्ट और डेटा भी शेयर किया जाएगा। 
  •     दोनों देश की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक दूसरे को लॉजिस्टिक सुविधा भी देंगी. इससे रक्षा सहयोग बढ़ेगा।
  •     आतंकवाद के खिलाफ संयुक्‍त कार्य समूह बनाया जाएगा, ताकि आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा शुरू किया जा सके. खुफिया जानकारी भी शेयर करने को लेकर समझौता किया गया है। 
  •     डेयरी और पशुपालन को लेकर नई टेक्‍नोलॉजी और विशेषज्ञता शेयर की जाएगी, जिससे किसानों और खाद्य सुरक्षा को लाभ मिलेगा। 
  •     दोनों देशों के बीच पर्यटन को लेकर भी समझौता हुआ है. दोनों देश आवागमन को आसान बनाएंगे, जिससे पर्यटन सेक्‍टर में नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। 
  •     हाई परफॉर्मेंश स्‍पोर्ट्स, स्‍पोर्ट्स साइंस और स्‍पोर्ट्स मेडिसिन में सहयोग . रग्‍बी, रोइंग, एथ‍लिट्स और गोल्‍फ जैसे स्‍पोर्ट्स को सपोर्ट मिलेगा। 
  •     रोजगार, कारोबार और निवेश को बढ़ाने के लिए 2030 तक 35,000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्‍य रखा गया है। 
  •     फूड टेक्‍नोलॉजी और सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा. कीवी को लेकर नया एक्‍शन प्‍लान तैयार किया जाएगा। 
  •     न्‍यूजीलैंड कई तरीके से अगले 15 साल में 1.72 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा और भारत-न्‍यूजीलैंड के बीच ज्‍यादातर चीजें ‘शून्‍य’ टैक्‍स पर आयात-निर्यात होंगी। 
  •     भारत के UPI को न्यूजीलैंड के फास्ट पेमेंट सिस्टम से जोड़ने पर सहमति बनी है, जिससे डिजिटल पेमेंट बेहद आसान हो जाएगा। 

गौरतल है कि पीएम मोदी की मौजूदगी में ये डील साइन हुआ है. पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई तक अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड हैं. यह 40 साल बाद किसी भारतीय पीएम की न्यूजीलैंड यात्रा है. इससे पहले 1986 में राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए हुए थे। 

18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 70 किमी प्रति घंटा हवाओं की चेतावनी

 नई दिल्ली
देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है और कई इलाकों में लगातार हो रही बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 12 जुलाई के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत 18 राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 15 घंटे के अंदर कई स्थानों पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है

उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और मध्य भारत में भी मेघगर्जन और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। वहीं समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है और किसानों से खराब मौसम के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचने की अपील की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मध्य उत्तर प्रदेश के आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र और गंगा के मैदानी इलाकों के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण बारिश की गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है। आइए जानते हैं 12 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल-

देश के 18 राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है।

दिल्ली में कल मौसम कैसा रहेगा
दिल्ली (12 जुलाई-भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग के अनुसार राजधानी दिल्ली में रविवार को भी बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

यूपी में कल मौसम कैसा रहेगा
उत्तर प्रदेश (12 जुलाई-भारी बारिश और तूफान की चेतावनी): मेरठ, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, कानपुर, बहराइच, बलरामपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बाराबंकी, मिर्जापुर, सुल्तानपुर, हरदोई और रायबरेली सहित कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। लखनऊ का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

बिहार में कल मौसम कैसा रहेगा
बिहार (12 जुलाई-भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): पटना, गया, गोपालगंज, पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, नालंदा, लखीसराय, अरवल, रोहतास, नवादा, भोजपुर, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और खगड़िया में तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना है। हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। पटना में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

झारखंड में कल मौसम कैसा रहेगा
झारखंड (12 जुलाई-बारिश और आंधी की चेतावनी): दुमका, देवघर, जामताड़ा, बोकारो, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, खूंटी, लोहरदगा, गिरिडीह, सिमडेगा, पलामू, गुमला और पूर्वी-पश्चिमी सिंहभूम में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। तेज हवाएं 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। रांची का अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

उत्तराखंड में कल मौसम कैसा रहेगा
उत्तराखंड (12 जुलाई-भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): नैनीताल, हरिद्वार, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, बागेश्वर और आसपास के इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है। हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। देहरादून में अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल में कल मौसम कैसा रहेगा
पश्चिम बंगाल (12 जुलाई-भारी बारिश और तूफान की चेतावनी): कोलकाता, हावड़ा, बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, हुगली, नदिया, उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना, बीरभूम, दार्जिलिंग, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और कलिम्पोंग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कोलकाता
में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

शहर     अधिकतम तापमान (12 जुलाई)     न्यूनतम तापमान (12 जुलाई)
दिल्ली     38°C     27°C
मुंबई     33°C     29°C
चेन्नई     37°C     29°C
कोलकाता     34°C     28°C
मुंबई     32°C     29°C
पटना     33°C     27°C
रांची     27°C     24°C
भोपाल     32°C     26°C
जयपुर     36°C     28°C
शिमला     25°C     20°C
नैनीताल     25°C     21°C

हिमाचल में कल मौसम कैसा रहेगा
हिमाचल प्रदेश (12 जुलाई-भारी बारिश और तेज हवा का अलर्ट): कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, बिलासपुर और सोलन में भारी बारिश की संभावना है। कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मनाली का अधिकतम तापमान 16 डिग्री और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

पंजाब में कल मौसम कैसा रहेगा
पंजाब (12 जुलाई-बारिश और तूफान की संभावना): पटियाला, अमृतसर, बठिंडा, मोगा, रूपनगर, संगरूर, फाजिल्का, होशियारपुर, जालंधर और गुरदासपुर में तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना है। हवा की गति 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

राजस्थान (12 जुलाई-गर्मी और तेज हवा का असर): कोटा, करौली, अजमेर, जोधपुर, बूंदी, सवाई माधोपुर, सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, फालौदी, बारां और जैसलमेर में बारिश की संभावना कम रहेगी। कई इलाकों में गर्मी का असर बना रहेगा और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। जयपुर का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश में कल मौसम कैसा रहेगा
मध्य प्रदेश (12 जुलाई-भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): दमोह, मंडला, नरसिंहपुर, हर्दा, रायसेन, इंदौर, सीधी, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, भिंड और धार सहित कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है। हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। भोपाल में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

 

ऑपरेशन सिंदूर में बना भारत का सुरक्षा कवच, फिर तुर्की क्यों छोड़ना चाहता है S-400? ट्रंप बने वजह

नई दिल्ली

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो भारत की जमीन पर तैनात रूस के मिसाइल डिफेंस S-400 ने पाकिस्तानी अटैक की धज्जियां उड़ा दीं. पाकिस्तान की सारी मिसाइलों को S-400 ने आसमान में ही नेस्तानाबूद कर दिया, पाकिस्तान का एक वार भी भारत की धरती को छू नहीं सका. इस कामयाबी के लिए रूसी तकनीक और S-400 की खूब तारीफ हुई। 

भारतीय सेना और वायुसेना के लिए यह सिस्टम एक ऐसे सुरक्षा कवच की तरह साबित हुआ जिसने दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों के खिलाफ मजबूत ढाल का काम किया. लेकिन इसी S-400 को खरीदने वाला नाटो सदस्य तुर्की अब उससे छुटकारा पाने के रास्ते तलाश रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद बदलता रणनीतिक माहौल माना जा रहा है। 

तुर्की ने 2017 में रूस से लगभग 2.5 अरब डॉलर की लागत पर S-400 प्रणाली खरीदने का समझौता किया था. 2019 में इसकी डिलीवरी शुरू हुई, उस समय राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने इसे तुर्की की संप्रभु सुरक्षा जरूरत बताते हुए अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया था. लेकिन इस फैसले की कीमत भी चुकानी पड़ी। 

S-400 और F-35 साथ-साथ नहीं
अमेरिका का तर्क था कि S-400 और अमेरिकी F-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान एक साथ नहीं चल सकते. वाशिंगटन को डर था कि रूसी प्रणाली F-35 की संवेदनशील तकनीकी जानकारी हासिल कर सकती है. नतीजा यह हुआ कि अमेरिका ने तुर्की को F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया और CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) के तहत प्रतिबंध भी लगाए। 

अब हालात बदल रहे हैं. पश्चिम एशिया, यूक्रेन युद्ध और नाटो की नई सुरक्षा चुनौतियों के बीच तुर्की फिर से अमेरिका के साथ रिश्तों को सामान्य बनाना चाहता है. ट्रंप प्रशासन के दौर में अटके कई रक्षा समझौतों को आगे बढ़ाने की उम्मीद भी एर्दोआन सरकार को है. विशेष रूप से F-35 को तुर्की लालच भरी निगाहों से देख रहा है. हालांकि इसके पीछे उसकी भू-रणनीतिक जरूरतें हैं. इसलिए आधुनिक अमेरिकी हथियारों तक पहुंच तुर्की की प्राथमिकता बन गई है। 

हाल ही में ट्रंप जब तुर्की के दौरे पर गए तो इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच चर्चा का मुख्य मुद्दा S-400 का समाधान और F-35 प्रोग्राम में तुर्की की वापसी थी। अब 2026 में ट्रंप प्रशासन तुर्की को NATO का मजबूत सहयोगी मानते हुए प्रतिबंध हटाने और F-35 देने की तैयारी कर रहा है, लेकिन शर्त साफ है, तुर्की को S-400 को छोड़ना होगा। 

तुर्की के मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब अंकारा S-400 सिस्टम को खाड़ी देशों को बेच सकता है. इसमें UAE और कतर का नाम आगे चल रहा है। 

रॉयटर्स के अनुसार रूस ने भी इसकी पुष्टि की है. 
शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति के ऑफिस क्रेमलिन ने कहा कि रूस तुर्की के पास मौजूद S-400 मिसाइल सिस्टम के भविष्य को लेकर तुर्की के संपर्क में है। 

तुर्की के न्यूज़ आउटलेट ‘हुर्रियत’ ने शुक्रवार को रिपोर्ट दी थी कि रूस S-400 मिसाइलों को खाड़ी के किसी देश को फिर से बेचेगा, ताकि अमेरिका को तुर्की पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए मनाया जा सके। 

शुक्रवार को मीडिया रिपोर्ट और इस बारे में पूछे जाने पर कि क्या तुर्की ने कथित डील को आगे बढ़ाने के लिए रूस से मंज़ूरी मांगी थी. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “मैं यहां एक बात कह सकता हूं, यह बहुत संवेदनशील मामला है. हालांकि हम इस मामले पर तुर्की पक्ष के संपर्क में रहे हैं, और हम इस मुद्दे पर उनके साथ संपर्क बनाए रखेंगे। 

दबाव डालकर काम करवाने की ट्रंप की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दबाव डालकर अपना काम करवाने की रणनीति के लिए जाने जाते हैं. वे इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नाम देते हैं. NATO सम्मेलनों में सहयोगियों पर डिफेंस खर्च बढ़ाने के लिए, चीन पर व्यापार युद्ध, ईरान-तुर्की पर सैंक्शन और F-35 मुद्दे पर एर्दोआन के साथ सौदेबाजी. वे हर जगह ट्रंप खुलकर दबाव बनाते हैं। 

ट्रंप ने तुर्की को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स बेचने पर सहमति जताई है. अपने हर प्रोडक्ट को बेस्ट बताने वाले ट्रंप ने इसे ‘अबतक का सबसे अच्छा जेट’ बताया है. लेकिन वे इसके लिए तुर्की को रूसी डिफेंस सर्किल से पूरी तरह बाहर निकालना चाहते हैं। 

ट्रंप ने NATO सम्मेलन के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात में कहा, “हम दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते.” यह बयान तुर्की के लिए राहत भरा है, क्योंकि F-35 न केवल आधुनिक स्टेल्थ टेक्नोलॉजी देगा, बल्कि तुर्की की क्षेत्रीय ताकत को बढ़ाएगा. इजरायल और ग्रीस जैसे देश इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप की प्राथमिकता अपना मार्केट है, वे अमेरिकी हितों के पोषण के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं इसलिए वह तुर्की की रूस पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। 

भारत की नई स्पेस छलांग! SpaceX जैसी रॉकेट इंजन तकनीक पर स्टार्टअप का बड़ा दांव

बेंगलुरु

बेंगलुरु की स्पेस स्टार्टअप एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीस ने देश का पहला फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन (FFSC) रॉकेट इंजन बनाया है. कंपनी इस इंजन की आंध्र प्रदेश में टेस्टिंग कर रही है. उसका दावा है कि यह दुनिया की सबसे एडवांस रॉकेट इंजन तकनीकों में से एक है. इस इंजन की मदद से भविष्य में दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट बनाए जा सकेंगे और ज्यादा सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जा सकेंगे. कंपनी का लक्ष्य 2028 तक इस इंजन के साथ पहला रॉकेट लॉन्च करना है। 

भारत के पास इस समय करीब 55 ऑपरेशनल सैटेलाइट हैं, जबकि अमेरिका के पास 13 हजार से ज्यादा और चीन के पास करीब 1,500 सैटेलाइट हैं. ऐसे में आने वाले समय में ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए भारत को अपनी लॉन्च क्षमता बढ़ानी होगी. कंपनी का कहना है कि यह इंजन इसी दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। 

आंध्र प्रदेश में बने टेस्ट सेंटर में इंजन की लगातार हॉट फायर टेस्टिंग हो रही है. इसमें इंजन को पूरी ताकत से चलाकर देखा जाता है कि वह तेज गर्मी और दबाव में सही तरीके से काम करता है या नहीं. कंपनी के मुताबिक, इंजन की डिजाइन से लेकर 3D प्रिंटिंग, मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली तक का पूरा काम भारत में ही किया गया है। 

क्या है FFSC रॉकेट इंजन?
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका FFSC इंजन है. इसे दुनिया की सबसे एडवांस रॉकेट इंजन तकनीकों में गिना जाता है. आम रॉकेट इंजन में ईंधन का कुछ हिस्सा सिर्फ पंप चलाने में खर्च हो जाता है. लेकिन इस तकनीक में ईंधन और ऑक्सीजन का पूरा इस्तेमाल इंजन की ताकत बढ़ाने में होता है. इससे इंजन ज्यादा ताकतवर और ज्यादा असरदार बनता है। 

कंपनी का दावा है कि यह इंजन करीब 800 किलोन्यूटन तक ताकत पैदा करेगा. साथ ही इसकी क्षमता बढ़ने से रॉकेट ज्यादा वजन अंतरिक्ष में ले जा सकेगा. यही वजह है कि दुनिया में बहुत कम देश और कंपनियां इस तकनीक पर काम कर रही हैं। 

मीथेन से चलेगा इंजन
यह इंजन लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और मीथेन से चलेगा. मीथेन साफ तरीके से जलता है और इंजन में कालिख कम छोड़ता है. इससे इंजन को बार-बार इस्तेमाल करना आसान हो जाता है. इसलिए भविष्य के रीयूजेबल रॉकेट के लिए इसे अच्छा ईंधन माना जाता है। 

कंपनी का कहना है कि उसने भारत की पहली मीथेन आधारित रॉकेट इंजन टेस्ट फैसिलिटी भी बनाई है. सितंबर 2025 में इसके छोटे मॉडल का पहला हॉट फायर टेस्ट सफल रहा था। 

2028 तक पहला लॉन्च करने का लक्ष्य
एस्ट्रोबेस का लक्ष्य 2027 में बूस्टर का हॉप टेस्ट और 2028 में पहला रॉकेट लॉन्च करना है. कंपनी को जून 2026 में IN-SPACe के टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड के तहत 25 करोड़ रुपये की मदद भी मिली है। 

कंपनी का दावा है कि उसका रॉकेट लो-अर्थ ऑर्बिट में 3 टन तक का पेलोड ले जा सकेगा. इसके पहले स्टेज को वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल करने की योजना है. वहीं इंजन को 50 से ज्यादा बार इस्तेमाल करने लायक बनाया जा रहा है. अगर यह योजना सफल रही तो भारत के लिए ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करना और कम लागत में रीयूजेबल रॉकेट बनाना आसान हो सकता है। 

 

पोस्ट ऑफिस RD स्कीम से पाएं 16 लाख रुपये तक का फंड, बस करना होगा यह निवेश

नई दिल्ली

हर वर्ग के लिए सरकार कोई ना कोई स्‍कीम चलाती ही है. खासकर छोटी बचत योजनाएं सभी भारतीयों के लिए संचाल‍ित है. गरीब से लेकर मिडिल क्‍लास तक इन योजनाओं में निवेश कर सकता है और बिना रिस्‍क ज्‍यादा मुनाफा कमा सकता है. आज हम एक ऐसी ही स्‍कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पोस्‍ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं के तहत चलती है और मैच्‍योरिटी पर बड़ा मुनाफा कराती है। 

यह सरकारी योजना पोस्‍ट ऑफिस की पॉपुलर आवर्ती जमा (RD Scheme) है, जिसके तहत कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है. इस योजना में हर महीने निवेश किया जा सकता है. इस योजना में कम से कम 100 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है. अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है. आप जितना चाहें, उतना इस स्‍कीम में पैसा लगा सकते हैं। 

Post Office की आरडी स्‍कीम में निवेशकों को 6.7 फीसदी का ब्‍याज दिया जाता है. इस योजना की मच्‍योरिटी पीरयिड 5 साल की होती है, जिसे आप आगे भी बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, अगर आप चाहें तो आरडी स्‍कीम के तहत दो अकाउंट 5-5 साल की मैच्‍योरिटी के लिए खोल सकते हैं। 

लोन की सुविधा
Post Office Recurri
ng Deposit (RD) स्‍कीम के तहत लोन की भी सुविधा दी जाती है. कोई भी व्‍यक्ति अपने डिपॉजिट पर लोन ले सकता है. 1 साल तक इस स्‍कीम में पैसा डिपॉजिट करने के बाद कोई भी अपने जमा का 50 फीसदी रकम लोन के तौर पर ले सकता है। 

प्रीमैच्‍योर एग्जिट
अगर आप समय से पहले इस योजना से निकलना चाहते हैं तो आप 3 साल तक लगातार इस अकाउंट को चलाने के बाद निकल सकते हैं, लेकिन आपको इस योजना में आरडी स्‍कीम वाला ब्‍याज नहीं मिलेगा, बल्कि पोस्‍ट ऑफिस की सेविंग अकाउंट वाला ब्‍याज डिपॉजिट किया जाएगा। 

वहीं अगर आप इसे मैच्‍योरिटी पूरा होने के बाद भी आगे बढ़ाना चाहते हैं तो 5 साल तक जमा करने के बाद 5 साल और बढ़ा सकते हैं. यानी कि इस योजना के तहत आपक 10 साल तक लगातार डिपॉजिट कर सकते हैं. इसपर आपको 6.7 फीसदी का फिक्‍स्ड ब्‍याज दिया जाएगा. हालांकि यह ब्‍याज दर हर तिमाही में समीक्षा के बाद चेंज भी हो सकता है। 

नाबालिग भी कर सकते हैं निवेश
इस योजना के तहत कोई नाबालिग भी निवेश कर सकता है. उसके नाम पर माता-पिता या गार्जियन भी निवेश कर सकते हैं. इसके अलावा, इस योजना के तहत ज्‍वाइंट अकाउंट भी खोला जा सकता है। 

कैस इस योजना में मिलेंगे 16 लाख रुपये
अगर मान लीजिए कोई पोस्‍ट ऑफिस की आरडी स्‍कीम में हर महीने 9500 रुपये का निवेश कर रहा है, तो उसे सालाना आधार पर 6.7 फीसदी का ब्याज मिलेगा. यानी कि 5 साल बाद उसके पास इस योजना में 6,77,980 रुपये डिपॉजिट हो जाएंगे, जिसमें ब्‍याज से कमाई 1,07,980 रुपये की होगी। 

अब अगर आप 5 साल और के लिए इस योजना में निवेश जारी रखते हैं तो 10 साल में आपके पास कुल 16,23,123 रुपये हो जाएंगे, जिसमें सिर्फ ब्‍याज से कमाई 4,83,123 रुपये होगी. वहीं 10 साल में आप आरडी स्‍कीम में कुल 11,40,000 रुपये डिपॉजिट करेंगे। 

सरकार का बड़ा फैसला, 39 जरूरी दवाओं के दाम तय; मरीजों को मिलेगी महंगी दवाओं से राहत

 नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने दवाओं की कीमतों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी एनपीपीए ने 39 नई दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत तय कर दी है. यह आदेश ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के तहत जारी किया गया है। 

इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, इंफेक्शन, आंखों की बीमारी, सांस की तकलीफ और कैंसर जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। 

इसका उद्देश्य क्या है?
इन फॉर्मूलेशन में दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एचआईवी, हृदय रोग और आंखों के संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें रोगियों के लिए अधिक किफायती बनाना है। यह अधिसूचना 8 जुलाई को जारी की गई थी। यह डीपीसीओ, 2013 के तहत नई दवा निर्माणों के लिए खुदरा मूल्य निर्धारण आदेश है, न कि मूल्य कटौती आदेश।

     एमलोडिपाइन + बिसोप्रोलोल + टेल्मिसार्टन टैबलेट की कीमत 14.74 रुपये प्रति टैबलेट तय की गई है।
     आई ड्रॉप, नेपाफेनाक + मोक्सीफ्लोक्सासिन ऑप्थेल्मिक सॉल्यूशन का खुदरा मूल्य 68.64 रुपये प्रति मिलीलीटर तय किया गया है।
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     क्लोपिडोग्रेल + एस्पिरिन + एटोरवास्टेटिन कैप्सूल, की कीमत 6.37 रुपये प्रति कैप्सूल रखी गई है।

एनपीपीए ने यह भी दोहराया कि खुदरा विक्रेताओं और डीलरों को निर्माताओं द्वारा प्रदान की गई मूल्य सूचियों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना आवश्यक है। डीपीसीओ, 2013 का हवाला देते हुए प्राधिकरण ने कहा, ‘डीपीसीओ, 2013 के पैरा 24(4) के अनुसार, प्रत्येक खुदरा विक्रेता और डीलर निर्माता द्वारा प्रदान की गई मूल्य सूची और पूरक मूल्य सूची,  अगर कोई हो उसको अपने व्यवसाय स्थल के एक प्रमुख हिस्से पर इस प्रकार प्रदर्शित करेगा कि इसे देखने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए यह आसानी से सुलभ हो।’

यह नोटिफिकेशन जारी हुआ. इस लिस्ट में जिन दवाओं के दाम तय किए गए हैं उनमें टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन, विटामिन डी3 का ओरल सॉल्यूशन, इमैटिनिब ओरल सॉल्यूशन, एम्पाग्लिफ्लोजिन से जुड़ी कॉम्बिनेशन दवाएं, टेल्मिसार्टन कॉम्बिनेशन, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन वाले कैप्सूल तथा क्लोपिडोग्रेल कॉम्बिनेशन दवाएं शामिल हैं। 

नियम ना पालन करने में क्या होगा? 
अधिसूचना में आगे कहा गया है कि अगर कोई निर्माता या विपणन कंपनी अधिसूचित खुदरा कीमतों का पालन करने में विफल रहती है, तो वह अधिक वसूल की गई राशि को लागू ब्याज सहित जमा करने के लिए उत्तरदायी होगी।

अधिसूचना में कहा गया है, ‘अगर उपर्युक्त किसी भी उत्पाद का खुदरा मूल्य, इस मूल्य अधिसूचना और ऊपर निर्दिष्ट निर्देशों के अनुसार निर्धारित नहीं किया जाता है, तो संबंधित निर्माता/विपणन कंपनी, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के साथ पढ़े गए डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के तहत, अधिक वसूल की गई राशि और उस पर लगने वाले ब्याज को जमा करने के लिए उत्तरदायी होगी।’ 

दुकानदारों के लिए प्राइस लिस्ट दिखाना अनिवार्य 
एनपीपीए ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सभी रिटेलर और डीलरों के लिए निर्माता कंपनियों की तरफ से जारी की गई प्राइस लिस्ट अपने दुकान में साफ तौर पर लगाना अनिवार्य है. डीपीसीओ 2013 के पैरा 24 (4) का हवाला देते हुए अथॉरिटी ने कहा कि हर रिटेलर और डीलर को अपनी दुकान के ऐसे हिस्से में प्राइस लिस्ट और सप्लीमेंट्री प्राइस लिस्ट प्रदर्शित करनी होगी, जहां से इसे कोई भी ग्राहक आसानी से देख और जान सकेगा। 

एनपीपीए के इस आदेश के मुताबिक, अब कोई भी दवा कंपनी इन दवाओं को तय की गई अधिकतम कीमत से ज्यादा दाम पर नहीं बेच सकेगी. सभी कंपनियों को अपने डीलरों और राज्यों के ड्रग रेगुलेटर को नई कीमत की जानकारी देनी होगी और अपडेटेड प्राइस लिस्ट भेजनी होगी. यानी दुकानों और अस्पतालों तक भी यह जानकारी पहुंचानी जरूरी होगी ताकि मरीजों को सही दाम पर दवा मिल सके। 

आदेश में यह भी साफ किया गया है कि कंपनियां दवा की कीमत में जीएसटी सिर्फ तभी जोड़ सकती हैं जब वह जीएसटी सरकार को असल में चुकाया गया हो या चुकाया जाना तय हो. मनमाने ढंग से जीएसटी जोड़कर दाम बढ़ाने की छूट नहीं है। 

एनपीपीए ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी तय कीमत से ज्यादा दाम वसूलती है तो उसे वह अतिरिक्त रकम ब्याज सहित वापस करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत की जाएगी. सरकार का मकसद है कि जरूरी दवाएं आम लोगों को उचित दाम पर मिल सकें और कोई भी कंपनी मरीजों से मनमानी कीमत न वसूल सके। 

‘भारत और हमारा DNA एक जैसा’, अफगान मंत्री के बयान से पाकिस्तान में बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली

पाकिस्तान के साथ लगातार बिगड़ते रिश्तों के बीच अफगानिस्तान ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं. भारत के दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमरी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि “भारत और अफगानिस्तान का डीएनए एक है. भारत आकर ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही देश और अपने ही लोगों के बीच हूं। 

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से आयोजित इंडिया-अफगानिस्तान ट्रेड अपॉर्च्युनिटीज इंडस्ट्री इंटरैक्टिव सेशन को संबोधित करते हुए ओमारी ने कहा कि यह उनका पहला भारत दौरा है और यहां उन्हें जिस तरह का सम्मान और अपनापन मिला, उसने उनका दिल जीत लिया। 

अफगान मंत्री ने कहा, “भारत पहुंचने के पहले दिन से ही मुझे भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और जिन-जिन लोगों से मुलाकात हुई, सभी ने बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया. मुझे बिल्कुल ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं अपने ही देश में हूं. हमारे बीच का रिश्ता सिर्फ कूटनीति का नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का है. हमारा डीएनए एक है। 

अफगानी मंत्री को पसंद आई भारत की मेहमाननवाजी
अफगान मंत्री ने कहा कि भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है. उन्होंने कहा, “भारत में मिला यह सम्मान अफगानिस्तान के लोगों के बेहतर भविष्य की उम्मीद है. हमारा करीब 80 प्रतिशत समाज कृषि, सिंचाई और पशुपालन पर निर्भर है. अब समय आ गया है कि इन क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए और भारत इस दिशा में अहम साझेदार बन सकता है। 

ओमारी ने कहा कि अफगानिस्तान आर्थिक विकास के लिए दुनिया के विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से निवेश, कृषि तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, सिंचाई और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग की अपील भी की। 

भारत-अफगानिस्तान आपस में क्या-क्या कर रहे हैं?
अफगान मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब काबुल और इस्लामाबाद के बीच सीमा विवाद, सुरक्षा मुद्दों और राजनीतिक मतभेदों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे माहौल में भारत के साथ अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। 

इसी सप्ताह नई दिल्ली में भारत-अफगानिस्तान संयुक्त समिति (Joint Committee) की चौथी बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, खेल, व्यापार, क्षमता निर्माण और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। 

कपिल शर्मा कैफे पर फायरिंग का आरोपी ‘रॉकेट’ फ्रांस से गिरफ्तार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग को बड़ा झटका

मुंबई 

अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में (DoJ) में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप पत्र फाइल किया गया है। इसके बाद अलग-अलग गैंगों के 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। अब बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य गरिंदर देव को फ्रांस से अरेस्ट किया गया है। वह कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग में शामिल था। जानकारी के मुताबिक कनाडा ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इससे पहले एक अन्य आरोपी जशनदीप सिंह को कनाडा से डिपोर्ट करने का आदेश दिया जा चुका है।

अमेरिका की लिस्ट में भी था गरिंदर देव का नाम
कनाडा के रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के मुताबिक 40 साल के गरिंदर देव को फ्रांस से गिरफ्तार किया गया और अब उसे प्रत्यर्पण प्रक्रिया के तहत कनाडा लाया जाएगा। गरिंदर देव का नाम अमेरिका के डिपार्टमें ऑफ जस्टिस के आरोपपत्र में भी शामिल था। उसके कई उपनाम भी बताए जाते हैं। उसे रिट्ज कार्लटन, रॉकेट या डॉक्टर जैसे नामों से बुलाया जाता था। वह बिश्नोई गैंग की फंडिंग के लिए ड्रग्स की तस्करी करता था।

DoJ के मुताबिक गरिंदर देव कोकीन और हेरोइन की तस्करी करता था। उसने जून 2025 में ही 100 किलोग्राम कोकीन और एक किलो हेरोइन की खेप कैलिफोर्निया और पूर्वी अमेरिका तक पहुंचाने का प्लान बनाया ता। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों ने इस खेप को पहले ही पकड़ लिया। कपिल शर्मा कैफे पर फायरिंग मामले का दूसरा आरोपी जशनदीप सिंह को कनाडा से डिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। जशनदीप सिंह पर कैफे के बाहर फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार को छिपाने में मदद की थी।

जशनदीप 2022 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गाय था। बता दें कि अमेरिका की जांच में सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग डीसेंट्रलाइज मॉडल से गैंग चलाता है। इसके सदस्य एक ही देश में नहीं रहते बल्कि अलग-अलग देशों से शूटर्स को हैंडल करते हैं। इन शूटरों की भर्तियां हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के गांवों से की जाती है। पहले उन्हें छोटे-मोटे कार्य सौंपे जाते हैं और इसके बाद जब पुलिस की नजर में आ जाते हैं तो फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाकर या फिर डोंकी रूट से अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों को भेज दिया जाता है।

बता दें कि अमेरिका के न्याय विभाग ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अलावा दो अन्य भारतीय गैंगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इसके बाद इन गैंग्स के खिलाफ ऐक्शन तेज हो गया है। अमेरिका के आरोप पत्र में 36 नाम थे जिनमें से 25 की गिरफ्तारी हो चुकी है और 11 अन्य की तलाश जारी है।

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