U-18 एशिया कप में भारत को कांस्य, मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की चार बेटियों ने बढ़ाया मध्यप्रदेश का गौरव

भोपाल 

जापान के काकामिगाहारा शहर में आयोजित महिला U-18 एशिया कप 2026 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। कांस्य पदक मुकाबले में भारत ने कोरिया को 3-0 से शिकस्त देकर टूर्नामेंट का समापन जीत के साथ किया।

भारतीय टीम की इस उल्लेखनीय सफलता में मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की चार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों— महक परिहार, स्नेहा दावड़े, नम्मी गीता और नौशीन नाज़— ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को पदक दिलाने में अहम योगदान दिया।

नौशीन नाज़ बनीं टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर

इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश की होनहार खिलाड़ी नौशीन नाज़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम के लिए 12 गोल दागे और टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनने का गौरव हासिल किया। मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अपनी आक्रामक खेल शैली और गोल करने की क्षमता से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के बीच दिखाया दम

29 मई से 6 जून 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में एशिया की शीर्ष महिला अंडर-18 हॉकी टीमों ने भाग लिया। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। कांस्य पदक मुकाबले में कोरिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 3-0 की जीत ने भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और कौशल को दर्शाया।

प्रदेश के लिए गर्व का क्षण

मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की चार खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। वहीं नौशीन नाज़ का टूर्नामेंट की सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ी बनना इस उपलब्धि को और भी विशेष बनाता है। इन खिलाड़ियों की सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि मध्यप्रदेश खेल प्रतिभाओं को निखारने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने में अग्रणी राज्यों में शामिल है।

मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम को कांस्य पदक जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश और मध्यप्रदेश दोनों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की खिलाड़ियों महक परिहार, स्नेहा दावड़े, नम्मी गीता एवं नौशीन नाज़ को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन बेटियों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण से प्रदेश का मान बढ़ाया है।

 सारंग ने नौशीन नाज़ के टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनने पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये खिलाड़ी भविष्य में भी भारत और मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करती रहेंगी।

खेल विभाग ने दी शुभकामनाएं

खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश ने भारतीय टीम तथा सभी खिलाड़ियों को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मध्यप्रदेश की इन बेटियों की उपलब्धि न केवल प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि महिला हॉकी के विकास को भी नई दिशा देने वाली है। भारत के लिए जीता गया यह कांस्य पदक और नौशीन नाज़ का टॉप स्कोरर बनना प्रदेश के खेल इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

 

प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी की होगी अपनी विशिष्ट अपार आईडी

भोपाल 

प्रदेश के सभी विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित और एक ही जगह पर उपलब्ध हो, इस उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में अपार आईडी निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी की अपार आईडी बनाने का कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रदेश की समस्त स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को मेगा अपार दिवस का आयोजन किया जाएगा।

प्रदेश में 1 करोड 39 लाख से अधिक स्‍कूली विद्यार्थियों की बनेगी अपार आईडी

स्‍कूल शिक्षा के आंकडों के अनुसार प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 39 लाख 38 हजार स्कूली विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जाएगी। अब तक 93 लाख 97 हज़ार विद्यार्थियों की अपार आईडी का निर्माण हो चुका है। शेष 44 लाख 47 हज़ार विद्यार्थियों की अपार आईडी का निर्माण आगामी 30 जून तक पूरा जाएगा।

प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक लगभग 1 करोड़ 39 लाख 38 हजार विद्यार्थी नामांकिंत हैं। इनमें शासकीय स्‍कूलों के 70 लाख 09 हज़ार 516 विद्यार्थी तथा अशासकीय स्‍कूलों के 69 लाख 28 हज़ार 218 विद्यार्थी शामिल हैं।

प्रत्‍येक शनिवार स्‍कूलों में  मेगा अपार दिवस का आयोजन

प्रदेश की सभी स्कूलों में “मेगा अपार दिवस” का 30 जून तक आयोजन किया जाएगा। यह प्रत्येक शनिवार को होगा। इसी कडी में आज 6 जून को स्कूलों में पहले अपार दिवस का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों ने अपना अपार पंजीयन कराया।

अपार आईडी के लाभ

अपार आईडी किसी भी विद्यार्थी के लिए जीवन भर की डिजीटल शैक्षणिक पहचान होती है। इसमें विद्यार्थी के सभी शैक्षणिक रिकॉर्डस एक जगह सुरक्षित रहते हैं। यह एक डिजीटल और पेपरलेस रिकार्ड सिस्‍टम है। अपार आईडी, छात्रवृति, प्रवेश एवं सरकारी योजनाओं में सहायक होने के साथ ही कहीं भी कभी भी उपयोगी होगी है।

विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्मित करवाने के लिए आयुक्‍त लोक शिक्षण और संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र ने मई माह में संयुक्‍त हस्‍ताक्षर से सभी जिला कलेक्‍टर्स को पत्र प्रेषित किया था। जिसके अनुक्रम में इन शिविरों में अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यालय में आमंत्रित कर नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण कराई जा रही है।

स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिले एवं विकासखंड-वार “अपार” आईडी विहीन विद्यार्थियों” की विद्यालयवार सूची तैयार कर मैदानी अधिकारियों को उपलब्‍ध कराई गई है। जिन विद्यार्थियों के पास आधार नहीं है, उनके लिए स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला आधार नामांकन केंद्र/ बैंक/ डाकघर के माध्यम से आधार नामांकन का कार्य भी प्राथमिकता से करवाया जा रहा है। जिससे आधार के अभाव में इस अपार आईडी के निर्माण में कोई बाधा ना आए। विद्यार्थियों के आधार नामांकन में अथवा UDISE+ पोर्टल पर नाम की भिन्नता, आधार सीडिंग त्रुटि अथवा पालक/ अभिभावक की सहमति संग्रहण में विलंब जैसी बाधाओं को पहचान कर तत्काल दूर करने के निर्देश भी स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदान किए गए हैं।

जिला, विकासखंड एवं विद्यालय स्तर पर  विशेष व्यवस्था

विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी निर्माण की प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाने के लिए जिला, विकासखंड एवं विद्यालय स्तर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। विद्यार्थी निर्धारित मेगा दिवस इन स्थलों पर पहुंचकर अपनी आईडी बनवा सकते हैं।

अपार आईडी निर्माण के लिए स्कूल के प्रधानाध्‍यापक होंगे उत्‍तरदायी

विद्यार्थियों को अपार आईडी पंजीयन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए भारत सरकार द्वारा अपार पोर्टल पर विद्यार्थी के पंजीयन के अधिकार संबंधित शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रधानाध्यापकों को प्रदान किए गए हैं। विद्यार्थी अपनी शाला के प्राचार्य से संपर्क कर अपनी अपार आईडी तैयार करवा सकते हैं। स्‍कूल शिक्षा विभाग के द्वारा यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि  शालावार शत प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार करवाने के लिए स्कूल के प्राचार्य ही उत्‍तरदायी होंगे।

क्‍या है अपार आईडी

अपार आईडी 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या है। यह छात्र के शैक्षणिक जीवन का डिजिटल पहचान पत्र है। विद्यार्थी के जीवन भर के शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखती है। मार्कशीट, डिग्री, वैज, पुरस्कार, प्रमाणपत्र एवं उपलखियों का डिजिटल संग्रह करती है।

भारत सरकार के निर्देशानुसार देश भर के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की APAAR-ID (Automated Permanent Academic Account Registry- APAAR) का शत-प्रतिशत निर्माण 30 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। इस के लिये मध्‍यप्रदेश में स्‍कूल शिक्षा विभाग के द्वारा तेजी से कार्य करते हुए स्‍कूलों में अपार दिवस का आयोजन किया जा रहा है।

 

कृषि, उद्यानिकी और सहकारिता के संयुक्त प्रयासों से किसानों को दें बेहतर सुविधाएं

भोपाल 

कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने खरीफ की आगामी फसलों के संबंध में किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजार की मांग आधारित फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि, सहकारिता और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं को प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। इन सामूहिक प्रयासों से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के साथ अच्छी फसल मार्केट में उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और किसानों की आय भी बढ़गी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए।

 बर्णवाल शनिवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय उज्जैन के सभागार में आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता  डी पी आहूजा, सचिव किसान कल्याण  निशांत बरबडे, आयुक्त उज्जैन  आशीष सिंह, सचिव उद्यानिकी  जान किन्सली ए आर, आयुक्त सह संचालक उद्यानिकी  अरविंद कुमार दुबे, प्रबन्ध संचालक सहकारिता  अभिजित अग्रवाल, पंजीयक सहकारिता  मनोज पुष्प, प्रबन्ध संचालक मंडी बोर्ड  कुमार पुरुषोत्तम और संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के सीईओ के साथ ही सम्बन्धित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों के कारोबार को दोगुना करने के लक्ष्य पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि की उन्नत तकनीक, खेती के साथ नवाचार, उद्यम के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही बीज की उन्नत खेती के लिए भी प्रेरित करें। पूसा अरहर फसल की जानकारी देकर किसानों को बताएं कि पूसा अरहर का उत्पादन भी बहुत अधिक है। उन्हें उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करें।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि उद्यानकी विभाग और खाद्य प्रसंस्करण के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुँचाएं। उद्यानिकी फसलों से किसानों को नगद राशि प्राप्त होती है और उनकी आय भी बेहतर हो जाती है। सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि उद्यानिकी की एक दो फसलों को फोकस कर जिले में बेहतर तरीके से उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करे। साथ ही उन्हीं फसलों से संबंधित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और उनकी मार्केटिंग की व्यवस्था भी की जाए।

उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान उज्जैन कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को दृष्टिगत रखते हुए फूलों की खेती के लिए रकबा बढ़ाने और करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती कराने के लक्ष्य से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के पहले फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए रकबा बढ़ाने के साथ ही किसानों को प्रोत्साहित कर लाभ दिलाया जाएगा। संभाग के अन्य जिलों के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के नवाचार को लेकर जानकारी ली गई। जिलों के कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ ने उद्यानिकी फसलों को लेकर किए जा रहे नवाचार के साथ ही आलू, सतंरा, अश्वगंधा, शतावरी, धनिया, प्याज, ड्रेगन फ्रूट, खीरा, तरबूज, चिया सीड्स जैसे खाद्य फसलों रकबा बढ़ाने के साथ विक्रय के लिए मार्केट उपलब्ध कराने की योजना की जानकारी दी।

कृषि उत्पादन आयुक्त  बर्णवाल ने निर्देश दिए कि कोल्ड स्टोरेज, राइजनिंग चैंबर की क्षमताओं को बढ़ाएं। सभी जिलों में कम से कम एक राइजनिंग चैंबर आवश्यक रूप से हो जिससे फसलों को पकाने के लिए सही तरीके का उपयोग हो सके। फूड प्रोसेसिंग यूनिट को भी बढ़ाने के प्रयास करें। साथ ही किसानों को उद्यानकी योजनाओं की जानकारी देने के लिए जिलों मे शिविर भी लगाएं।

सहकारिता की समीक्षा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि सहकारिता से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में ऋण उपलब्ध कराने और समय पर खाद-बीज देने से उनकी आय बेहतर होगी। किसानो को खेती, उपकरण, के लिए पूंजी उपलब्ध कराना सहकारिता का प्रमुख काम है। प्रमुख सचिव  डी पी आहूजा ने सहकारिता से सम्बन्धित गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि जिलों में सहकारी समितियों से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जा रहा है। पैक्स के माध्यम से किसानों को जोड़कर उनको बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा जा रही है।

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध

समीक्षा बैठक मे कृषि कल्याण विभाग के सचिव  निशांत बरबडे ने बताया कि प्रदेश में यूरिया और एनपीके का पर्याप्त मात्रा में भंडारण है। किसी भी जिले में कोई कमी नही है। किसानों की मांग के अनुसार उन्हे खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किसानों के पंजीयन के साथ ही किसानों को खाद उपलब्ध होगी और लगातार किसान इससे खाद ले सकेंगे ।

 बर्णवाल ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि खाद्य वितरण केंद्रो पर व्यापक इंतजाम हो। किसानों के बैठने की व्यवस्था, पीने का पानी, छांव की व्यवस्था करना सुनिश्चित करें। इसके लिए कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए है कि व्हाट्सएप के माध्यम से किसानों को फसल अनुसार खाद की उपयोगिता की सूचना दें और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग कर किसानों को खाद उपलब्धता की सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि खाद भंडारण में किसी प्रकार की समस्या नहीं हो। इसके लिए अभी से व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लें। जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता रखने के निर्देश दिए। सहकारिता के माध्यम से ऋणी और अऋणी किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिए।  बर्णवाल ने कहा कि फसल बीमा से संबंधित किसानों की शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए। कोई भी जिले में शिकायतें पैंडिग नही रहे। साथ ही अवैधानिक रूप से खाद्य विक्रय कर रहे पेस्टिसाइड्स का निर्माण और बिक्री और गलत बीजों के विक्रय पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए हैं ।

 बरबड़े ने भी किसानों से संबंधित चल रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार से खाद-बीज की कमी नही होने दी जाएगी। खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

उद्यानिकी विभाग के आयुक्त सह संचालक  अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि उद्यानिकी फसलों का अलग से पंजीयन किया जाए और गिरदावरी के समय भी इन फसलों का अलग से उल्लेख हो जिससे की वास्तविक आंकड़े उपलब्ध रहे। साथ ही किसानों को उद्यानिकी फसलों से जोडऩे के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार करने के संबंध में भी कलेक्टर को निर्देशित किया गया।

फसलों को पकाने के लिए राइजिंग चैंबर हर जिले मे बनाया जाये जिससे जनता को केमिकल रहित फल उपलब्ध हो। जिले मे कोल्ड स्टोरेज और अन्य योजनाओं के लाभ दिलाने के लिए भी व्यापक दिशा निर्देश बैठक में दिए गए। इसके साथ ही उद्यानिकी फसलों को राजस्व रिकॉर्ड में जोडऩे के लिए भी कलेक्टरों को निर्देश देते हुए कहा कि गिरदावरी करते समय उद्यान की फसलों का रकबा अलग से जोड़ा जाए।

 

साइबर सुरक्षा एवं एआई-एमएल के क्षेत्र में युवाओं का हुआ कौशल संवर्धन

भोपाल 

मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा उद्योग साझेदार एवं एसएसआरजीएसपी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में 400 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान कर प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी,बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस और एआईएसईसीटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भोपाल के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर सुरक्षा और एआई एवं एमएल जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं के कौशल का विकास करना और उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना था।

समापन दिवस पर आयोजित तकनीकी सत्रों में डेटा सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग और  साइबर खतरों की पहचान और प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। “ डेटा सिक्योरिटी फंडामेंटल्स” सत्र में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, डेटा गवर्नेंस एवं नियामकीय अनुपालन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। वहीं “सिक्योर कोडिंग एंड डेवलपर सिक्योरिटी प्रैक्टिसेज” सत्र में सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

“सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (एसओसी), थ्रेट डिटेक्शन, मॉनिटरिंग एंड रिस्पॉन्स” विषयक सत्र में प्रतिभागियों को आधुनिक साइबर सुरक्षा तंत्र, एसआईईएम प्लेटफॉर्म, एंडपॉइंट डिटेक्शन सिस्टम तथा वल्नरेबिलिटी स्कैनिंग उपकरणों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर खतरों की पहचान और रोकथाम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर भी जानकारी साझा की गई।

उल्लेखनीय है कि 400 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में तकनीकी कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा मध्यप्रदेश को डिजिटल प्रतिभा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

म.प्र. बना निवेश एवं निर्यात का नया केंद्र, लैटिन अमेरिकी देशों में बढ़ रही ‘मेड इन एमपी’ उत्पादों की मांग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से भारत के नए वैश्विक निवेश एवं निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। हमारा मध्यप्रदेश अब वैश्विक व्यापार जगत में भी अपनी सशक्त पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच बढ़ती परस्पर आर्थिक साझेदारी में मध्यप्रदेश भी अपनी अधिकतम क्षमताओं के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश असीम अवसरों की धरती है। प्रदेश की स्थिर और पारदर्शी नीतियां निवेश और उद्योग फ्रेंडली हैं। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, फार्मा इंडस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, डिफेंस सेक्टर, और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में हम तेजी से प्रगति कर रहे हैं। हमारे पास 1.25 लाख एकड़ से अधिक का रेडी-टू-यूज़ लैंड बैंक उपलब्ध है। आज मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा हब बन चुका है। प्रदेश में 5 लाख किमी से अधिक के सुदृढ़ सड़क नेटवर्क और अत्याधुनिक रेल व हवाई कनेक्टिविटी ने यातायात को सुगम बना दिया है। अगले 5 सालों में हम 6 प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करेंगे, जो मालवा से बुंदेलखंड और निमाड़ से विंध्य तक रोड़ कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लैटिन-अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में निवेश, उत्पादन और नवाचार के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि हम आपके साथ एक ठोस और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण व्यापार-व्यवसाय के लिए सबसे अनुकूल स्थान है। राज्य में कानून- व्यवस्था की कोई परेशानी नहीं है। यहां औद्योगिक कुशल श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। मध्यप्रदेश सबको अपनाने वाला राज्य है, जो एक बार आता है, यहीं का होकर रह जाता है। मध्यप्रदेश में खुले दिल से निवेश करें, यहां निवेश करना बड़े लाभ का सौदा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश मंच – 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर इस ट्रेड फोरम के उद्घाटन सत्र का विधिवत् आरंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए डिजिटल प्लेटफार्म और वेबसाइट का रिमोट से शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन देशों के साझा व्यापार-व्यवसाय पर केन्द्रित स्पेशल मैगजीन ‘द बिजनेस टायकून्स’ का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों को निर्यात बढ़कर 3 हज़ार 835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र की विशेष भूमिका रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक उत्पाद एवं जंबो बैग, कृषि आधारित उत्पाद तथा विनिर्माण क्षेत्र प्रदेश की निर्यात क्षमता के प्रमुख आधार बनकर उभरे हैं। ब्राजील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया जैसे देशों के साथ मध्यप्रदेश का व्यापारिक विनिमय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों में ‘मेड इन इंडिया’ के साथ ‘मेड इन एमपी’ उत्पादों को मिल रहे स्नेह, अपनत्व, विश्वास और दिनों-दिन बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने सुशासन और नेतृत्व क्षमता के बल पर मालवा को नई पहचान दिलवाई थी। उन्होंने कहा कि इंदौर प्राचीन काल में भी उन्नत व्यापार और व्यवसाय की सुगमता के कारण बड़ा व्यावसायिक केन्द्र हुआ करता था। पहले यहां सिल्क मार्ग से दुनियाभर में व्यापार होता था। भारत और लैटिन अमेरिका की परंपराओं में नजदीकियां दिखाई पड़ती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज भारत के सबसे तेज़ी से विकसित होते औद्योगिक राज्यों में से एक है। हम सच्चे अर्थों में ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति अब ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रही है। अब हम वैश्विक मूल्य श्रृंखला का भी एक मजबूत हिस्सा बन चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस तरह लैटिन अमेरिका की प्राचीन संस्कृतियों ने मदर अर्थ (Pachamama – पचमामा) को पूजा, वैसे ही हम पंच तत्वों और प्रकृति के कण-कण को पूजते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उत्सवों का उल्लास, संगीत, अनुराग, पारिवारिक ताना-बाना और हमारी जनजातीय कलाओं की जीवंतता सबमें बड़ी समानताएं हैं। यह बताते हैं कि हमारे जीवन मूल्य और हमारे संस्कार मूलत: एक हैं, समान हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के अमृतकाल में हमारा भारत अपनी क्षमता, योग्यता और विशेषताओं के साथ दुनियाभर में व्यापार, व्यवसाय और सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए कटिबद्ध है।

    भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच सहयोग के इस महान मंच की मेजबानी का अवसर मध्यप्रदेश को मिला है। आज हम सिर्फ़ देशों को नहीं, महाद्वीपों को जोड़ने वाली दीर्घकालिक साझेदारियों की नींव रख रहे हैं। यह मंच भारत, लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच नई आर्थिक साझेदारी, नई संभावनाओं और नए विश्वास का सेतु है। भारत का हरेक राज्य अपनी क्षमताओं और विशेषताओं के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में तत्पर है। मध्यप्रदेश भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर और पीथमपुर का विशेष ज़िक्र करते हुए कहा कि ये दोनों ही क्षेत्र आज फार्मास्यूटिकल्स का ग्लोबल हब बन चुके हैं। यहां निर्मित दवाएं ब्राजील, पेरू और चिली जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही हैं, जिससे प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और गुणवत्ता को वैश्विक मान्यता मिल रही है। ब्राजील की औद्योगिक जरूरतों के लिए मध्यप्रदेश सबसे भरोसेमंद और सप्लाई चेन पार्टनर की भूमिका निभा सकता है। पेरू के साथ इंजीनियरिंग मशीनों की सप्लाई के लिए मध्यप्रदेश एक भरोसेमंद पार्टनर बन सकता है। हम क्यूबा के विश्व प्रसिद्ध बायोटेक एवं फार्मा अनुसंधान के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नए नवाचार करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। ब्राज़ील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया के साथ मध्यप्रदेश का निरंतर बढ़ता व्यापार हमारे अटूट भरोसे का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फोरम के सदस्य देशों के व्यापार प्रतिनिधियों से कहा कि आप सब आजादी के अमृतकाल में मध्यप्रदेश पधारे हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश “विकसित भारत-2047” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। संकल्प को साकार करने में वैश्विक व्यापार और रणनीतिक साझेदारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से लेकर उन्नत स्वास्थ्य सेवा, फार्मा, आईटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, हरित और स्वच्छ ऊर्जा, खनन और लॉजिस्टिक्स तक ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां हम मिलकर एक इतिहास रच सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें क्रेता-विक्रेता, आयातक-निर्यातक से बढ़कर साझेदार की भूमिका निभानी है। हम संयुक्त उद्यमों की स्थापना करें, उन्नत प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण करें और परस्पर कौशल विकास तथा निवेश सहयोग को एक नई गति प्रदान करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद और मजबूत इंडस्ट्रियल पैकेजिंग (जंबो बैग्स/एफआईबीसी) हमारे निर्यात की प्रमुख रीढ़ हैं। मैक्सिको में चल रहे ‘ऑटो नियरशोरिंग’ के इस दौर में और ब्राज़ील की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए मध्यप्रदेश सबसे भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन पार्टनर की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारा इंदौर आज देश के सबसे तेजी से बढ़ते आईटी और स्टार्ट-अप हब्स में से एक है। मैक्सिको के आईटी इको सिस्टम, डोमिनिकन गणराज्य के पर्यटन-टेक और इक्वाडोर के उभरते फिनटेक परिदृश्य के लिए हमारे पास कुशल और नवाचारी युवा उपलब्ध हैं, जो आपकी वैश्विक मांगों की पूर्ति करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेती-किसानी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और आपकी भी अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, भारत का फूड बास्केट बन रहा है। कृषि से संबंधित क्षेत्रों और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में मध्यप्रदेश, देश की ताकत बन रहा है। मध्यप्रदेश, अर्जेंटीना और ग्वाटेमाला की मजबूत कृषि और खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों के साथ समन्वय कर वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दिशा में हम वृहद स्तर पर एक प्रयास कर सकते हैं। हमारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र लैटिन-अमेरिकी-कैरेबियन देशों की आवश्यकताओं के अनुसार कस्टमाइज्ड उत्पाद और सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम है। मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा और खनिज संपदा में अग्रणी है। चिली और पेरू के खनिज भंडारों तथा वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र के लिए इंजीनियरिंग मशीनों की सप्लाई के लिए मध्यप्रदेश एक आदर्श और भरोसेमंद पार्टनर बन सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विद्युत सरप्लस राज्य है। हमारी 31 हज़ार मेगावाट से अधिक की उत्पादन क्षमता है, जिसमें 30 प्रतिशत हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। देश में सर्वाधिक हीरा, मैंगनीज और चूना पत्थर जैसी खनिज संपदा और उद्योगों के लिए आरक्षित जल हमारी औद्योगिक रीढ़ को और मज़बूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का स्टार्ट-अप इको सिस्टम देश में मिसाल है। हमारे 6 हजार से अधिक स्टार्ट-अप्स में से 45 प्रतिशत से अधिक का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है। हम महिलाओं को हर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे महिला कार्य बल को बढ़ावा मिल रहा है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई दिशा देते हुए हमने ‘जन विश्वास अधिनियम’ लागू किया है। इसमें 108 पुराने और जटिल नियमों को पूरी तरह समाप्त या पहले से सरल कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश मंच में हो रहा मंथन दोनों क्षेत्रों के आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा देगा। इस मंच से निकलने वाले सार्थक सुझावों और अमृत संदेशों को राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता, क्षमता और दक्षता के साथ आत्मसात कर धरातल पर उतारेगी, जिससे मध्यप्रदेश वैश्विक व्यापार और निवेश के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेगा।

भारत में उरुग्वे के राजदूत  एमरिला ने कहा कि ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ में मध्यप्रदेश ने हमें हमेशा से आकर्षित किया है। भारत सरकार ने अपनी इच्छा शक्ति के बल पर अपने लक्ष्यों को हासिल किया है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया है। उरुग्वे ने भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करते हुए व्यापार और निवेश गतिविधियों को बढ़ाया है। अब तेजी से गुड्स प्रोडेक्ट्स साउथ अमेरिका से भारत पहुंचाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो सिर्फ शुरूआत है, हमारे बीच व्यापारिक संबंधों का उत्कृष्ट परिणाम आना अभी शेष है। यह आयोजन निश्चित रूप से निवेश और व्यापार को प्रोत्साहन देगा।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन  राघवेंद्र कुमार सिंह ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और अपार निवेश संभावनाओं पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के लिए व्यापार एवं निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ सबसे अधिक है। मध्यप्रदेश को ‘हार्ट ऑफ इनक्रेडिबल इंडिया’ भी कहा जाता है। देश के मध्य में होने के कारण यहां से हवाई, रेल और सड़क परिवहन की सुगम व्यवस्था है। मध्यप्रदेश गेहूं उत्पादन में भारत में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में कुल 340 नोटिफाई इंडस्ट्रियल एरिया हैं। औद्योगिक गतिविधियों के लिए राज्य में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है। मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए कैबिनेट कमेटी गठित की है, जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 पॉलिसी लागू की हैं। उद्योग और निवेशकों के लिए राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था भी लागू है। देश-दुनिया के निवेशकों और बड़े औद्योगिक समूहों ने मध्यप्रदेश सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों पर भरोसा किया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में हर सेक्टर में निवेश में बड़ी तेजी आयी है।

स्वागत संबोधन में ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम के फाउंडर और ग्लोबल प्रेसीडेंट डॉ. जितेंद्र जोशी ने कहा कि भारत और लैटिन अमेरिका केवल समुद्री तौर पर अलग हैं, लेकिन एक साझा लक्ष्य के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फोरम-2026 का मूल उद्देश्य ग्लोबल साउथ को समृद्ध करना और इसकी सम्प्रभुता को भी मजबूत बनाना है। मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश के लिए सर्वाधिक गतिशील राज्य है, जहां फार्मास्युटिकल, मैन्यूफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, सर्विस इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल पार्ट्स सहित अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी विजन से ही मध्यप्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 और रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव सहित आज हो रहा यह आयोजन संभव हुए हैं। उन्होंने बताया कि आज भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फोरम में 15 देशों के व्यापार प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।

इस अवसर पर भारत में उरुग्वे के राजदूत  अल्बर्टो एंटोनियो गुआने एमरिला, पेरू के राजदूत  जेवियर मैनुअल पॉलिंच वेलाद्रे, पनामा रिपब्लिक के राजदूत  अलोंसो कोरिया मिगुएल, अल-सल्वाडोर के राजदूत  गुइलेर्मो रुबियो फुनेस, क्यूबा के राजदूत  जुआन कार्लोस मार्सन एगुइलेरा, ग्वाटेमाला के राजदूत  उमर लिसैंड्रो कास्टानेडा सोलारेस, गुयाना के हाई कमिश्नर (उच्चायुक्त)  धरमकुमार सीराज, इक्वाडोर के राजदूत   थियोडोरो माल्डोनाडो, मुंबई स्थित दूतावास में मेक्सिको के महावाणिज्य दूत  एडोल्फो गार्सिया एस्ट्राडा, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद  शंकर लालवानी सहित प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन  राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक, म.प्र. औद्योगिक विकास निगम  चंद्रमौली शुक्ला, अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में निवेशक, बिजनेस टायकून्स, उद्योगपति, फोरम के सदस्य एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

 

सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में नमामि गंगे मिशन की बड़ी चुनौती, विकास कार्यों के बीच समय पर पूरा करना लक्ष्य

उज्जैन
तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले ”नमामी गंगे मिशन” को केंद्र सरकार से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने इससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ को 81 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर होने के बाद, अब सबसे बड़ा संकट सिंहस्थ-2028 की समय-सीमा के भीतर इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने का है।

टेंडर की शर्तों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित है। लेकिन तकनीकी और वित्तीय उलझनों के कारण जो परियोजना दो साल पहले शुरू हो जानी थी, उसमें तीन साल की भारी देरी हो चुकी है। इस लेती-लतीफी के कारण अब प्रशासन के पास समय बहुत कम बचा है।

वर्तमान में उज्जैन शहर के भीतर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण, नए घाटों का निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दर्जनों विकास कार्य एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बैठाना और बिना किसी बाधा के समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इस बार भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण का मुख्य लक्ष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है।

एमआईसी कब करेगी मंजूर
केंद्र सरकार ने तो ठेकेदार तय करने को स्वीकृति दे दी मगर एमआइसी यानी महापौर परिषद से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ये स्वीकृति कब मिलेगी, स्वीकृति उपरांत कार्य आदेश कब जारी होगा, कब भूमि पूजन होगा, ये अभी तय नहीं हो सका है।
92.78 करोड़ की थी प्रशासनिक स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ टेंडर लॉक

शिप्रा नदी में मिलने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को ही 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। जून 2023 में महापौर परिषद (एमआइसी) से हरी झंडी मिलने के बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया, लेकिन कड़ी परीक्षण प्रक्रिया के चलते पूर्व के सभी प्रस्ताव निरस्त करने पड़े। इसके बाद इसी साल फरवरी में संशोधित दरों के साथ फिर से टेंडर बुलाए गए, जिसमें अब गाजियाबाद की कंपनी का चयन किया गया है।

पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग और 15 साल का मेंटेनेंस
इस हाईटेक परियोजना के तहत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। बता दे कि अभी भैरवगढ़ क्षेत्र में बाटिक प्रिंट इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे शिप्रा में मिलता है, प्लांट लगने के बाद नहीं मिलेगा। योजना अनुसार दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, 1420 मीटर राइजिंग मेन और 3500 मीटर एफ्लुएंट पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जल की शुद्धता की रियल-टाइम जांच के लिए अत्याधुनिक पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग सिस्टम लगेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं से लैस होगा। खास बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी ही अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रख-रखाव का पूरा जिम्मा संभालेगी।

सिंहस्थ-2028 के लिहाज से क्या बदलेगा

नालों पर रोक: भैरवगढ़ की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों और पीलियाखाल का गंदा पानी अब सीधे शिप्रा नदी में नहीं मिलेगा।

शुद्ध जल: सीवेज का पूर्ण उपचार होने से नदी की जल गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा।

आस्था का सम्मान: सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए स्वच्छ व अविरल शिप्रा जल मिल सकेगा।

NITI Aayog रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, MP में 10 साल में 33 लाख से ज्यादा बच्चों ने छोड़ा प्राइमरी स्कूल

भोपाल
 मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2024–25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।

30 फीसदी गिरा आंकड़ा
आंकड़े बताते हैं कि एक दशक पह
ले मध्य प्रदेश का प्राइमरी स्कूल एनरोलमेंट रेशियो करीब 109.3% हुआ करता था, जो अब लगभग 30 फीसदी गिरकर महज 76.3% पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है। इस मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति केवल बिहार (77.2%), गुजरात (79.6%), उत्तर प्रदेश (83.1%) और राजस्थान (88.3%) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है।

लाखों बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस स्तर की गिरावट का मतलब है कि लाखों बच्चे औपचारिक प्राथमिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो चुके हैं। इसके पीछे स्कूलों तक पहुंच की कमी, बीच में पढ़ाई छोड़ना, परिवारों का पलायन या फिर डेटा एंट्री में लापरवाही जैसे गंभीर कारण हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है, इसलिए यहां प्रतिशत में मामूली बदलाव का असर भी लाखों बच्चों पर पड़ता है। इस भारी गिरावट के असली कारणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे सच में स्कूल छोड़ रहे हैं, तो हमें मिड-डे मील को मजबूत करने, मुफ्त परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैश ट्रांसफर जैसी योजनाओं पर तुरंत काम करना होगा।

मेघालय ने बनाया इतिहास
इसके विपरीत, देश के छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर का मेघालय 180.7% के साथ देश में सबसे आगे है, जबकि मणिपुर, मिजोरम, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में नामांकन दर 100 प्रतिशत से भी ऊपर है, जो दिखाता है कि वहां तय उम्र से ज्यादा के बच्चे भी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। इस गंभीर गिरावट पर मध्य प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन ने नीतिगत दखल की मांग की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवेश प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवेश प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

हेलियन की पहली भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाई का पीथमपुर में 8 जून को होगा भूमि-पूजन
लगभग 2000 करोड़ रुपए का होगा निवेश

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेश संपर्क अभियानों, क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों तथा विदेश निवेश संवादों के माध्यम से प्रदेश में निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। इसी क्रम में विश्व की अग्रणी कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनी हेलियन द्वारा प्रदेश के पीथमपुर स्थित स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित की जाने वाली भारत की पहली मैन्युफैक्चरिंग इकाई का भूमि-पूजन 8 जून को मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया जाएगा।

यह परियोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव के यूनाइटेड किंगडम प्रवास और वहां आयोजित निवेश संवादों से सार्थक हुई है। निवेशकों के साथ हुई विस्तृत चर्चाओं और मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के बाद हेलियन ने प्रदेश में अपना निवेश विस्तार करने का निर्णय लिया। अब यह निवेश प्रस्ताव क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुका है, जो प्रदेश में निवेश परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

लगभग दो हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाली यह परियोजना प्रदेश में साकार हो रही महत्वपूर्ण विदेशी निवेश परियोजनाओं में शामिल है। पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाने वाली यह अत्याधुनिक इकाई मुख्य रूप से ओरल हेल्थ उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित होगी। यहां उत्पादित सामग्री घरेलू बाजार की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ एशिया-प्रशांत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अनेक देशों में निर्यात भी की जाएगी।

हेलियन वैश्विक स्तर पर कंज्यूमर हेल्थकेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों में शामिल है। सेंसोडाइन, क्रोसिन, ईनो, ओट्रिविन, आयोडेक्स, सेंट्रम तथा ऑस्टोकैल्शियम जैसे लोकप्रिय उत्पादों के माध्यम से कंपनी विश्वभर में अपनी मजबूत पहचान रखती है। लगभग 170 से अधिक देशों में उपस्थिति रखने वाली यह कंपनी स्वास्थ्य एवं स्व-देखभाल (Self-Care) क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर चुकी है।

कंपनी की वैश्विक उपस्थिति और मध्यप्रदेश में प्रस्तावित यह निवेश, प्रदेश के औद्योगिक वातावरण और निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

परियोजना से लगभग 500 प्रत्यक्ष और 500 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई इकाइयों, सप्लायर नेटवर्क, परिवहन, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य सहायक उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय प्रतिभाओं के कौशल विकास को बढावा देने के साथ कम से कम 30 प्रतिशत महिला कार्यबल की रोजगार में भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देगी। स्थानीय मानव संसाधन के उपयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने पिछले वर्षों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार द्वारा विकसित औद्योगिक अधोसंरचना, निवेशक-अनुकूल नीतियां, अनुमोदनों की सरलीकृत व्यवस्था, भूमि की उपलब्धता और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण ने मध्यप्रदेश को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। हाल के वर्षों में प्रदेश में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश इसी बढ़ते विश्वास का प्रमाण हैं।

हेलियन की यह परियोजना मध्यप्रदेश को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह निवेश प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात संवर्धन और वैश्विक निवेश आकर्षण के प्रयासों को नई मजबूती प्रदान करेगा और विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

MP में 65 साल बाद बदलेंगे सिविल सेवा नियम, 2 से ज्यादा बच्चों वालों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी

भोपाल
मध्यप्रदेश सरकार छह दशक बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था, लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। दरअसल, परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान यथावत रखा गया है।

24 साल पुराना नियम फिर बरकरार
मध्य प्रदेश सरकार अपने सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 का नया मसौदा जारी किया है।

इस ड्राफ्ट में सबसे चर्चित बात यह है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी की पाबंदी को हटाया नहीं गया है। यह नियम मूल रूप से 2001 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था। पिछले साल खुद जीएडी ने इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। साथ ही, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। वहीं, नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई है।

दो बच्चों का नियम क्या कहता है?
नए ड्राफ्ट के नियम पांच और छह के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी राहत नहीं है। यदि पहले से एक बच्चा हो और अगली डिलीवरी में दो या ज्यादा बच्चे हों, तो वह उम्मीदवार अपात्र माना जाएगा।

प्रोबेशन में बड़ा बदलाव
नए नियमों में प्रोबेशन (Probation – परिवीक्षा काल) को लेकर एक अहम प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का फायदा अब कर्मचारी को मिलेगा।

भर्ती दो माध्यमों से होगी। सीधी भर्ती और पदोन्नति (Promotion)। वयस्क होने पर नियुक्ति से पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहमति ली जाएगी। सीधी भर्ती से आए कर्मचारियों को प्रोबेशन पर रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।

नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार
प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए।

अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम
एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।

वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास
वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।

सीनियरिटी का नया फॉर्मूला
एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति से लोग आते हैं तो सीनियरिटी का क्रम इस तरह होगा। पहले सीधी भर्ती वाले, फिर अनुकंपा नियुक्ति वाले और आखिर में पदोन्नति वाले।

वहीं, यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकले, तो प्रमोटेड कर्मचारी सबसे सीनियर माना जाएगा। हर साल 01 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List – वरिष्ठता सूची) अपडेट की जाएगी।

इन 4 स्थितियों में भी नौकरी नहीं मिलेगी

नए ड्राफ्ट में चार और कारण जोड़े गए हैं जिनमें उम्मीदवार अयोग्य माना जाएगा।

पहला, एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर (विशेष मामलों में छूट संभव)।

दूसरा, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर।

तीसरा, नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों में दोषी होने पर।

चौथा, केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय निकाय से पहले बर्खास्त हो चुके कर्मचारी भी अपात्र होंगे।

इसके अलावा ड्राफ्ट में पांच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान है: उपयुक्त शासकीय सेवक न पाए जाने पर, जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर, विभागीय परीक्षा पास न करने पर और नियुक्ति के समय झूठी जानकारी देने पर।

FIR वाले नियम पर उठा सवाल
ड्राफ्ट के एक नियम पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रावधान है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित हो तो अंतिम फैसला आने तक जॉइनिंग रोक दी जाएगी। मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

उनके मुताबिक देश में झूठी एफआईआर दर्ज कराना आसान है। साथ ही, कोर्ट से फैसला आने में सालों लग जाते हैं। ऐसे में निर्दोष व्यक्ति भी लंबे समय तक नौकरी से वंचित रह सकता है।

15 जून तक दें सुझाव
जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि इस मसौदे पर कर्मचारी संगठनों और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। 15 जून तक जीएडी की वेबसाइट पर राय दी जा सकती है। सुझावों के बाद फाइनल ड्राफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा। इन नियमों के जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना है।

MP में मौसम का कहर, 60Km/घंटा की रफ्तार से चलेंगी आंधियां; 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-इंदौर में बारिश के आसार

भोपाल
 मध्य प्रदेश में प्री-मानसून की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है. शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश दर्ज की गई, जिससे तपते तापमान से लोगों को बड़ी राहत मिली है. जहां एक तरफ आंधी और बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए बिजली गिरने और तेज हवाओं का आरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार केरल पहुंच चुका मानसून इस बार मध्य प्रदेश में अपनी सामान्य तारीख से कुछ दिन की देरी से पहुंचेगा। 

​प्री-मानसून की दस्तक, कहीं बरसे बादल, कहीं उड़ी धूल
​प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं. शुक्रवार को मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और धूलभरी आंधी का असर देखने को मिला. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में रतलाम में 12 मिलीमीटर और धार में 8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. इसके अलावा श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर और रायसेन सहित दो दर्जन से अधिक जिलों में 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धूलभरी आंधी चली, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। 

एमपी में मानसून की एंट्री से पहले प्री-मानसून जमकर बरस रहा है। बीते 24 घंटे में 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी के साथ पानी गिरा। ऐसा ही मौसम शनिवार को भी बना रहेगा। IMD (मौसम केंद्र) ने प्रदेश के 52 जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलेगी। गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, देवास, हरदा और बैतूल में ऑरेंज अलर्ट है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया, प्रदेश के ऊपर 3 साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से तेज आंधी और बारिश का दौर है।

आज इन जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को भोपाल, रायसेन, राजगढ़, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश के आसार हैं। आलीराजपुर, झाबुआ और रतलाम में इससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

पचमढ़ी से ठंडा श्योपुर, 32 डिग्री रहा तापमान
आंधी और बारिश की वजह से प्रदेश में दिन का तापमान लुढ़क गया है। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री से नीचे रहा। प्रदेश के एकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ठंडा श्योपुर रहा। यहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में देर शाम कई इलाकों में तेज आंधी के साथ बारिश भी हुई।

मौसम विभाग के अनुसार, पचमढ़ी में तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस रहा। गुना में 35.4 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, रतलाम में 36.2 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री, बैतूल में 36.5 डिग्री, सतना में 36.6 डिग्री, धार और नर्मदापुरम में 36.9 डिग्री रहा। खरगोन, नरसिंहपुर, खजुराहो, खंडवा और छिंदवाड़ा में तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 35.1 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, भोपाल में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 37.9 डिग्री और जबलपुर में 37.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

केरल पहुंचा मानसून, एमपी में 20 जून तक आने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 5 से 7 दिन लेट हो सकती है। प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है। दक्षिणी हिस्से से मानसून एमपी में दस्तक देता है।

साल 2025 में 1 दिन बाद यानी 16 जून को मानसून एंटर हो गया था, जबकि विदाई 15 अक्टूबर तक हुई थी। सामान्यत: केरल में आने के 15 दिन बाद एमपी में भी मानसून दस्तक दे देता है। इस वजह से इस बार प्रदेश में मानसून आने की तारीख 20 से 22 जून बताई जा रही है। केरल में 4 जून को ही मानसून ने दस्तक दी है।

​पचमढ़ी से भी ठंडा रहा श्योपुर, तापमान में भारी गिरावट
बता दें कि ​गुरुवार रात और शुक्रवार को हुई बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दिया. प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में दिन और रात दोनों के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है. आंधी और बारिश की वजह से प्रदेश के अधिकांश शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया. खास बात यह रही कि प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी, जहां अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस रहा, उससे भी ठंडा श्योपुर दर्ज किया गया। 

श्योपुर में अधिकतम तापमान महज 32 डिग्री सेल्सियस रहा. वहीं ​बड़े शहरों की बात करें तो राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.3 डिग्री कम होकर 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 7.2 डिग्री नीचे गिरकर 20.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. वहीं इंदौर में 35.1 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, ग्वालियर में 37.9 डिग्री और जबलपुर में 37.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। 

​विदिशा, गुना और अशोकनगर में वज्रपात की चेतावनी
​मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के लिए कुछ जिलों में बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है. इसके अनुसार विदिशा, गुना और अशोकनगर जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है. इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी करते हुए आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

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