Gold-Silver Crash: अमेरिका के एक फैसले से धड़ाम हुए दाम, चांदी ₹16,500 टूटी; सोना भी फिसला

नई दिल्‍ली

सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट आई है. चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. शु्क्रवार को रात 11.30 बजे कमोडिटी मार्केट के बंद होने तक चांदी के भाव 16,000 से ज्‍यादा टूट चुके थे, जबकि सोने के दाम में भी करीब 4000 रुपये तक की गिरावट आई थी।  

सोने और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान इतनी भारी गिरावट सिर्फ अमेरिका की वजह से आई है. MCX पर दाम तेजी से गिरने के बाद सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी के भाव में गिरावट आई है. दिल्‍ली से लेकर मुंबई तक सोने-चांदी सस्‍ते हो चुके हैं। 

MCX पर सोने-चांदी की कीमत 
मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने के भाव में 3947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमत 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. सोने-चांदी के भाव में ये गिरावट अमेरकी-ईरान तनाव और फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका के बीच आया है। 

क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में आई ये गिरावट? 
इंटरनेशलन मार्केट में सोना 3.4 फीसदी तक गिर गया है. अमेरिका में जॉब डाटा अनुमान से बेहतर डेटा आया है. इसका असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर पड़ा है. दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिससे सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट रही है. 
वहीं अमेरिका फेडरल बैंक इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई से कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे मंहगाई बढ़ने का खतरा बन गया है. यह भी सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वज है। 

इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के भाव 
अमेरिका में 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 फीसदी गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं सिल्वर 7.1 फीसदी गिरकर 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. भारत में सोना 2 फीसदी और चांदी करीब 7 फीसदी टूटी है।  

आपके शहर में सोने की कीमत 

    दिल्‍ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये है. 
    चेन्‍नई में 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,45,525 रुपये है. 
    मुंबई में 22 कैरेट सोने के दाम  ₹1,42,752 है. 
    बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,43,22 रुपये है. 

17 जून को होगी फेड की बैठक 
जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिंसंबर ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है.अक्‍टूबर में यह बढ़ोतरी 60 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद दिख रही है. हालांकि, जॉबा डेटा आने से पहले उम्‍मीद थी कि कम से कम इस साल तो इंटरेस्‍ट नहीं बढ़ सकता है. फेड के अधिकारियों की बैठक 16-17 जून को होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे. इस बैठक के बाद फैसले का ऐलान किया जाएगा। 

(नोट- सोने-चांदी में किसी भी तरह की खरीदारी से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

RBI के फैसले से रुपये को मिली ताकत, डॉलर 50 पैसे फिसला; जानिए आम लोगों पर क्या होगा असर

नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था। 

निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा
रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है। 

बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। 

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख ‘न्यूट्रल’ यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें। 

महंगाई और विकास दर के नए अनुमान
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:

    विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। 

    महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है। 

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है। 

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट: सिल्वर 8,000 रुपये टूटा, गोल्ड के दाम भी धड़ाम

इंदौर 

सोना और चांदी की कीमतों में शु्क्रवार को बड़ी गिरावट आई है. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी की कीमत तेजी से गिरी है. सुबह के कारोबार के दौरान ही इन कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट आई थी, जो अभी भी जारी है. चांदी के दाम में आज करीब 8000 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली है। 

वहीं सोने के दाम में 1400 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है. एमसीएक्‍स पर 5 अगस्‍त फ्यूचर के लिए सोने की कीमत 1400 रुपये से ज्‍यादा टूटकर 1,57,651 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 3 जुलाई फ्यूचर के लिए चांदी की कीमत करीब 8000 रुपये टूटकर 2,57,900 रुपये प्रति किलो के नीचे पहुंच गई थी। 

सोने-चांदी में गिरावट ऐसे समय में देखी जा रही है, जब‍ ग्‍लोबल स्‍तर पर तनाव बना हुआ है और कीमती धातुओं में मुनाफावसूली जारी है. आइए जानते हैं किन-किन वजहों से सोने और चांदी के भाव में गिरावट आई है। 

बुलियन मार्केट में सोने और चांदी का भाव 
इंडियन बुलियन मार्केट की वेबसाइट के मुताबिक, 4 जून की सुबह की तुलना में आज 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1400 रुपये कम होकर 1,54,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,238 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं 18 कैरेट सोने का भाव 1,15,643 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं चांदी के भाव में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्‍यादा की गिरावट आई है और यह 2,54,950 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। 

क्‍यों आई सोने और चांदी के भाव में गिरावट? 

    अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर तनाव: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कुछ फेड अधिकारियों के बयानों के बाद यह आशंका बढ़ी है कि ब्‍याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं या आगे बढ़ भी सकती हैं. सोना और चांदी ब्‍याज नहीं देते, इस कारण ऊंची दरों की स्थिति में इसमें खरीदारी कम हो जाती है और तनाव की स्थिति में बिकवाली भी हावी हो जाती है। 

    मुनाफावसूली: सोना और चांदी पिछले महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गए थे. ऐसे में अब कई बड़े फंड मैनेजर और ट्रेडर्स ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दिया है, जिससे बिकवाली बढ़ गई है। 

    डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर: जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं तो निवेशकों का रुझान सुरक्षित धातुओं से हटकर डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है. इससे सोने-चांदी पर दबाव आता है। 

वैश्विक स्‍तर पर सोने-चांदी में कमजोरी 
सोने-चांदी की कीमतें COMEX और अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में भी गिरी हुई हैं. जिसका असर भारत के कमोडिटी मार्केट पर भी पड़ा है. इंटरनेशनल मार्केट में सोना 14 डॉलर प्रति औंस टूटकर 4,491.50  पर आ गया है. जबकि चांदी 1.2 डॉलर या 1.63 फीसदी टूटकर 72.745 डॉलर प्रति औंस पर है। 

30 हजार कर्मचारियों की छंटनी पर घिरी Amazon, AI पर 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश को लेकर बढ़ा विरोध

 नई दिल्ली

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है। 

अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है। 

रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है। 

इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है। 

दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। 

लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। 

हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा। 

Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है। 

यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है। 

आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है। 

 

80 अरब डॉलर की Googleई और उदय कोटक की चेतावनी, IPL खत्म होते ही भविष्य पर छिड़ी बड़ी बहस

मुंबई 

दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है। 

यहां सबसे अहम सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी और मजबूत कंपनी भी भविष्य को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है तो हम क्या कर रहे हैं. क्या हम भी उसी स्तर की तत्परता और दूरदृष्टि दिखा रहे हैं? हम अपनी स्थिति को देखें तो एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आता है. एक तरफ राजनीतिक स्थिरता और ताकत अपने चरम पर है. मजबूत नेतृत्व,लगातार चुनावी जीत और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसी स्थिति है. कुल मिलाकर मोदी सरकार बेहद स्थिर है. दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान वॉर ने चुनौतियां और बढ़ा दी है. विकास दर भले ही स्थिर दिखती हो लेकिन तीन चीजें चिंता पैदा कर रही है। 

कुछ लोगों को आर्थिक स्थिति गिरने की बात पचती नहीं है. वे तुरंत बताने लगते हैं कि भारत बड़ी इकॉनमी में सबसे तेज बढ़ने वाला देश है. हमारी जीडीपी 6 परसेंट के ऊपर है. लेकिन सच्चाई इतनी चमकीली नहीं है. अगर दुनिया के सभी देशों के देखें तो भारत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि दर नाइजर और इथियोपिया की है. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के मामले में भी हम आठवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश हमसे आगे है. हाल ही में पश्चिम एशिया जंग के कारण रुपया पिछले एक साल में लगभग 12% गिरा है और यह लगातार सातवां साल है जब इसमें गिरावट आई है. यह एक अजीब स्थिति है. महंगाई काबू में है. चालू खाता घाटा संतुलित है. विकास की गति भी ठीक है फिर भी मुद्रा कमजोर बनी हुई है। 

आर्थिक विकास का असली इंजन निवेश होता है. खासतौर पर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी निवेश (FDI). यही निवेश नई टेक्नोलॉजी लाता है,रोजगार पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है. लेकिन अपने देश में प्राइवेट सेक्टर का निवेश उतनी तेजी से बढ़ नहीं रहा है. सरकार ने बजट में विकास के काम के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन सिर्फ सरकारी निवेश से काम नहीं चलेगा. इस पूरी तस्वीर को अगर गूगल के उदाहरण के साथ जोड़कर देखें तो फर्क साफ दिखाई देता है. वहां कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि भविष्य अनिश्चित है, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी तेजी से बदलेगी. इसलिए अभी से निवेश बढ़ाना जरूरी है. वहीं भारत में कई बार यह धारणा दिखती है कि हमारा बाजार इतना बड़ा है कि निवेशक खुद ही आएंगे. लेकिन वास्तविकता यह है कि निवेशक भरोसे और रिटर्न की गारंटी मिलने पर ही आते हैं। 

सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में 7.7 लाख करोड़ निवेश किया है. ये अच्छा संकेत है. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो कॉरपोरेट निवेश जीडीपी के 12 प्रतिशत पर स्थिर है. इसे हर हाल में बढ़ाना होगा. हमारे पास एक विशाल बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अहमियत है. लेकिन इन फायदों को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की जरूरत है। 

शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव: 500 अंक लुढ़का सेंसेक्स, बाद में हुई जोरदार रिकवरी

मुंबई 

शेयर मार्केट में गुरुवार को एक बार गिरावट आई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स रेड जोन में खुले. लेकिन खास बात ये रही है कि तेज गिरावट लेकर खुलने के कुछ ही मिनटों में रिकवरी भी जोरदार देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ करीब 500 अंक फिसल गया, लेकिन कुछ देर में ही गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई. कुछ ऐसा ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स के साथ ही देखने को मिला है। 

सेंसेक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल 
गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346 की तुलना में गिरकर 73,935 पर खुला और फिर अचानक फिसलकर 73,807 के लेवल पर आ गया. हालांकि गिरावट की तेज रफ्तार कुछ ही देर बाद धीमी पड़ गई और ये 30 शेयरों वाला इंडेस्क 200 अंक के आसपास फिसलकर कारोबार करता हुआ नजर आया। 

NSE Nifty की बात करें, तो ये पिछले बंद 23,405 के मुकाबले गिरावट लेकर 23,282 पर ओपन हुआ और फिसलते हुए कुछ ही मिनटों में 23,247 तक चला गया. इसके बाद इसमें भी सुधार आया और खबर लिखे जाने तक 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स सिर्फ 80 अंक फिसलकर 23,322 पर ट्रेड कर रहा था। 

शुरुआती कारोबार में निफ्टी पर Coal India, Adani Enterprises, Grasim, ONGC, Adani Ports तेज बढ़त के साथ ओपन हुए, तो वहीं Infosys, HCL Tech, Cipla, Eicher Motors और M&M के शेयरों ने रेड जोन में कारोबार की शुरुआत की। 

बुधवार को ऐसा था बाजार का हाल 
बीते कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 74,649 की तुलना में गिरकर 74,507 पर खुला था और फिर देखते ही देखते क्रैश (Sensex Crash) होकर 73,492 के लेवल पर आ गया था. हालांकि, अंत में ये तेज रिकवरी के साथ 303 अंक फिसलकर 74,346 पर क्लोज हुआ था। 

पहले ही मिले थे गिरावट के संकेत 
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. जहां Gift Nifty 200 अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं तमाम एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया था. जापान का निक्केई इंडेक्स (Japan Nikkei) करीब 1500 अंक, हांगकांग का हैंगसेंग (HangSeng) करीब 400 अंक और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI) 170 अंक टूटकर कारोबार कर रहा था। 

इन शेयरों से बाजार को सपोर्ट 
शुरुआती तेज गिरावट से उबारने में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों का रोल रहा, जिन्होंने मार्केट को सपोर्ट दिया. इनमें बीएसई लार्जकैप में शामिल Eternal Share (2%), Titan Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप में Voltas Share (5%), Dixon Share (2%), Suzlon Share (1.90%) की तेजी में नजर आए। 

Trump फिर चलेंगे टैरिफ वाला दांव! भारत-चीन पर 12.5% शुल्क लगाने की तैयारी

 नई दिल्ली

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नया टैरिफ प्लान (Donald Trump Tariff Plan) तैयार कर लिया है और नए अमेरिकी टैरिफ रेट प्रस्तावित किए गए हैं. अमेरिका अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से किए जाने वाले आयात पर कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं और उनका ये प्रपोजल जबरन श्रम प्रथाओं की जांच के बाद आया है.  रिपोर्ट्स की मानें, भारत और चीन को लेकर भी नया टैरिफ तय कर लिया गया है, जो 12 फीसदी से ज्यादा हो सकता है। 

India-China समेत किन देशों पर कितना टैरिफ? 
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ रेट्स को देखें, तो भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाले सामानों पर ट्रंप 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने साफ किया है कि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय यूनियन, ताइवान और ब्रिटेन समेत अन्य देशों से आयात पर 10 फीसदी की टैरिफ दर लागू होगी। 

इधर डील पर बात, उधर टैरिफ प्लान
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. अब ट्रंप उन टैरिफ को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत को लेकर ये खास इसलिए भी है, क्योंकि Donald Trump Tariff Plan ऐसे समय में सामने आया है, जबकि US के मुख्य वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिनों की बातचीत कर रहे हैं। 

धारा 301, 60 जांचें, टैरिफ तैयारी
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि ने धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष जारी किए हैं, जिनमें भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन्होंने जबरन लेबर बेस्ड सामानों के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया है या प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है। 

अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) के एक नोटिस में कहा गया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध है, या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के माध्यम से प्रतिबद्धता जताई है, या जिनके पास कुछ जबरन श्रम से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने वाली सीमित व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अतिरिक्त 10% शुल्क का सामना करना पड़ेगा। 

भारत सहित अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए, अमेरिकी व्यापार मंत्रालय ने 12.5% ​​की हाई एक्स्ट्रा टैरिफ रेट प्रस्तावित किए हैं. ट्रंप प्रशासन के इस ने टैरिफ प्रपोजल में कपड़ों पर आयात का जिक्र भी किया गया है. जो कुछ अर्थव्यवस्थाओं से अमेरिका में एक निश्चित मात्रा में कपड़ा आयात को धारा 301 के तहत कम टैरिफ रेट पर करने की अनुमति देता है। 

Gold-Silver Rate: जानिए 20, 22 और 24 कैरेट सोने के ताजा भाव, चांदी हुई सस्ती

इंदौर 

सोना-चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं बुधवार को बाजार ओपन होने के साथ ही फिसल गईं. चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 2000 रुपये कम हो गया, तो वहीं सोने के भाव में भी कमी आई है. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 किलो चांदी अपने हाई लेवल से 1.92 लाख रुपये सस्ती हो गई है. आइए जानते हैं 20, 22 और 24 कैरेट सोने का क्या रेट है? 

चांदी का भाव तेजी से टूटा 
एमसीएक्स सिल्वर प्राइस पर नजर डालें, तो सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को वायदा कारोबार की शुरुआत रेड जोन में हुई. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव अपने पिछले बंद 2,66,707 रुपये प्रति किलो की तुलना में एक झटके में कम होकर 2,64,760 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 1 Kg Silver Price 1947 रुपये कम हो गया। 

चांदी ने इसी साल जनवरी महीने में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और लाइफ टाइम हाई लेवल 4,57,328 रुपये छुआ था. इसके बाद इस कीमती धातु का भाव लगातार क्रैश होता चला गया. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अब ताजा गिरावट के बाद वायदा चांदी हाई से 1,92,568 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है। 

सोना भी चांदी के साथ टूटा 
सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत में भी गिरावट आई है और ये कीमती धातु 1.60 लाख रुपये से नीचे आ गई है. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन ये कीमती पीली धातु 1,59,346 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी, जबकि बुधवार को खुलते ही 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold गिरकर 1,58,780 रुपये पर आ गया। 

सोने के हाई लेवल से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो अब ये और भी सस्ता मिल रहा है. एमसीएक्स पर इस एक्सपायरी वाले वायदा गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,04,375 रुपये है और यहां से अब सोना 45,595 रुपये सस्ता मिल रहा है। 

घरेलू मार्केट में सोना-चांदी का हाल
एमसीएक्स के अलावा अगर घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के रेट में आए चेंज की बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, तो 24 कैरेट सोने का दाम 1,56,294 रुपये से कम होकर 1,55,264 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं चांदी की कीमत 2,65,300 रुपये प्रति किलो की तुलना में 3,300 रुपये कम होकर 2,62,000 रुपये पर आ गया. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट की बात करें, तो…

गोल्ड क्वालिटी गोल्ड रेट/10 ग्राम
24 Karat Gold 1,55,264 रुपये/10 ग्राम
22 Karat Gold 1,54,642 रुपये/10 ग्राम
20 Karat Gold 1,42,222 रुपये/10 ग्राम
18 Karat Gold 1,16,448 रुपये/10 ग्राम
14 Karat Gold 90,829 रुपये/10 ग्राम

ध्यान रहे, घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को आईबीजेए रेट्स के साथ ही मेकिंग चार्ज और इस पर लागू जीएसटी भी देना होता है, जिसके जुड़ने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है। 

 

 

 

शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, IT शेयरों में भारी बिकवाली

मुंबई 

शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट (Stock Market Crash) देखने को मिली है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले बुरी तरह फिसलकर ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex देखते ही देखते 800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. इस दौरान आईटी शेयर, जो बीते कारोबारी दिन गदर मचाए हुए थे, भरभराकर क्रैश हो गए. इनमें टीसीएस से लेकर इंफोसिस तक शामिल हैं। 

सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही बिखरे 
शेयर मार्केट में शुरुआती कारोबार पर नजर डालें, तो पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार धड़ाम हो गया. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,649.84 के स्तर से बुरी तरह फिसलकर 74,507 पर खुला और फिर कुछ ही मिनटों में ये 890 अंकों की गिरावट लेकर 73,759 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया।  

एनएसई निफ्टी की चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही रही. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,483 के लेवल से फिसलकर 23,415 पर खुला और फिर देखते ही देखते ये इंडेक्स भी 200 अंकों से ज्यादा फिसलकर अचानक 23,244 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया। 

IT शेयर देखते ही देखते क्रैश 
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच आईटी कंपनियों के शेयर देखते ही देखते क्रैश हो गए. BSE की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल TCS Share (6.20%), Tech Mahindra Share (4.30%), Infosys Share (3.20%), HCL Tech Share (3%) तक बिखरकर कारोबार कर रहे थे। 

वहीं मिडकैप कंपनियों में नजर डालें, तो Persistent Share (5%), Mphasis Share (3%), Coforge Share (2.90%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. खास बात ये है कि बीते कारोबारी दिन इन शेयरों में तूफानी तेजी देखने को मिली थी, जिस पर अचानक से ब्रेक लग गया। 

गिरावट का ये बड़ा कारण!
शेयर बाजार में बुधवार को सेंसेक्स-निफ्टी में अचानक मचे कोहराम के पीछे के कारणों पर नजर डालें, तो इसके पीछे अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता सबसे अहम है. इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल नजर आ रही है. ये बीते कुछ दिन टूटने के बाद अब फिर से छलांग लगाती हुई नजर आ रही हैं, खबर लिखे जाने तक Crude Oil Price 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रहा था. दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली से भी भारतीय शेयर बाजार दबाव में बना हुआ है।  

Coca-Cola India IPO: 2027 में आ सकता है कोका-कोला का मेगा IPO, शेयर बाजार में बढ़ी हलचल

मुंबई 

दुनिया की जानी-मानी कोल्ड ड्रिंक कंपनी कोका-कोला ने भारत में एक बड़ा फैसला लिया है. कंपनी साल 2027 में अपनी भारतीय बॉटलिंग इकाई की मुख्य कंपनी ‘हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स’ (HCCH) का आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. इसका मतलब है कि 2027 में आम लोग भी शेयर बाजार के जरिए इस कंपनी के शेयर खरीद सकेंगे. कंपनी ने बताया कि वह भारत के प्रमुख शेयर बाजारों—बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने के लिए शुरुआती काम शुरू कर चुकी है. हालांकि, यह पूरी योजना बाजार के माहौल और सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगी। 

इस आईपीओ के जरिए कोका-कोला कंपनी भारतीय इकाई में अपनी कुछ हिस्सेदारी आम जनता और निवेशकों को बेचेगी. यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब एक साल पहले ही कोका-कोला ने अपनी इस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी भारत के ‘जुबिलेंट भारतीय ग्रुप’ को बेची थी. हालांकि, उस समय यह सौदा कितने रुपये में हुआ था, इसकी जानकारी कंपनी ने छिपाई थी। 

क्या है कंपनी की योजना?
HCCH भारत में कोका-कोला के बोतलों में ड्रिंक भरने (बॉटलिंग) का काम करने वाली सबसे बड़ी कंपनी ‘हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज’ (HCCB) की मालिक है. कोका-कोला का यह कदम उसकी दुनिया भर में चल रही ‘एसेट-लाइट’ रणनीति का हिस्सा है. इस रणनीति के तहत कंपनी फैक्ट्रियां चलाने और भारी मशीनें लगाने जैसे कामों में अपना पैसा और समय कम लगाना चाहती है. कंपनी का मुख्य ध्यान अब केवल अपने ब्रांड को मजबूत बनाने, विज्ञापन करने और कोल्ड ड्रिंक का मुख्य फॉर्मूला (कॉन्संट्रेट) तैयार करने पर रहेगा। 

भारत में कोका-कोला का बड़ा कारोबार
पूरी दुनिया में भारत कोका-कोला के लिए पांचवां सबसे बड़ा बाजार है. भारत में कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा है—पहला ‘कोका-कोला इंडिया’ और दूसरा ‘HCCB’. इस बॉटलिंग कंपनी (HCCB) की शुरुआत 14 फरवरी 1997 को हुई थी. आज यह कंपनी पूरे देश में 14 बड़े और आधुनिक प्लांट चलाती है, जहां कोल्ड ड्रिंक को बोतलों में भरा जाता है। 

भारतीय बाजारों और घरों में कोका-कोला के प्रोडक्ट्स बहुत पसंद किए जाते हैं. कंपनी भारत में 8 अलग-अलग कैटेगरी में 37 तरह के ड्रिंक्स बनाती और बेचती है. इनमें कोका-कोला के अलावा थम्स अप, स्प्राइट, मिनट मेड, माजा, किनले पानी, लिम्का और फैंटा जैसे मशहूर नाम शामिल हैं. बाजार के जानकारों का मानना है कि जब यह कंपनी शेयर बाजार में आएगी, तो यह भारत का सबसे बड़ा और सफल आईपीओ साबित हो सकता है। 

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