एमपी में कांग्रेस को भारी पड़ेगी भीतरघात, कैलाश विजयवर्गीय बोले- तीसरी राज्यसभा सीट भी BJP के खाते में जाएगी

भोपाल 
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राज्यसभा चुनावों के कारण राजधानी भोपाल में नेताओं की चहलपहल बढ़ गई है। भाजपा के राज्यसभा चुनाव के दोनों प्रत्याशी आज शनिवार को विधिवत नामांकन दाखिल कर रहे हैं। इसको लेकर शुक्रवार शाम ही पार्टी ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। भाजपा द्वारा दोनों प्रत्याशियों के लिए नामांकन फॉर्म के 4-4 सेट तैयार करवाए गए हैं। एक सेट में 10 विधायकों को प्रस्तावक बनाया गया है। इस प्रकार कुल आठ सेट में 80 विधायकों को प्रस्तावक बनाया गया है। इधर कांग्रेस में राज्यसभा उम्मीदवार बनाई गईं मीनाक्षी नटराजन का कई नेता विरोध कर रहे हैं। इसे देखते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने तो अपनी मंशा भी स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि पार्टी हमें उम्मीदवार दे तो तीसरी सीट भी जीतेंगे।

बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में नामांकन की कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है। दोनों प्रत्याशी तरुण चुघ व रजनीश अग्रवाल शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय से नामांकन दाखिल करने जाएंगे। इसके लिए सभी विधायकों को प्रदेश कार्यालय में सुबह 8 बजे उपस्थित होने को कहा गया है। 

कैलाश के बड़े बोले- कहा तीसरी सीट भी जिताएंगे
राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन के बाद अब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि पार्टी अगर तीसरा उम्मीदवार देगी तो उसे भी जिता लेंगे। इंदौर में भाजपा कार्यालय के भूमिपूजन के दौरान ये बड़े बोले मंत्री कैलाश के थे।

उन्होंने पार्टी का आभार जताते हुए कहा, पार्टी ने बड़े नेताओं को टिकट दिया है। दोनों हमेशा पर्दे के पीछे रहते हुए काम करते रहे हैं। ये मप्र के लिए सौभाग्य है कि दिल्ली के बड़े नेता को यहां से टिकट मिला है। उन्होंने कहा, ये दोनों सीटें तो हम जीतेंगे ही।

कांग्रेस ने राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया

गौरतलब है कि कांग्रेस ने राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम पर एमपी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता सहमत नहीं हैं। ऐसे में पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। कांग्रेस की इस भीतरघात का बीजेपी फायदा उठाने की जुगत में है। एमपी में पार्टी में मचे इस घमासान से विधायकों में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ते जा रहा है।

DMK OUT, TVK IN? इंडिया गठबंधन में विजय की बढ़ती भूमिका से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल

चेन्नई 

द्रविड़ मुनेत्र कषगम(DMK) के इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने और 08 जून की बैठक का बहिष्कार करने के फैसले के बाद तमिलगा वेट्टरी कषगम(TVK) गठबंधन में डीएमके की पार्टी की जगह ले सकती है और उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय इस अवसर का लाभ उठाकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखें। टीवीके का कांग्रेस के साथ गठबंधन और मजबूत हो गया है, क्योंकि विजय ने अपने मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट देकर इसे और पुख्ता किया है जबकि वह(यह सीट अपनी पार्टी के लिए भी रख सकते थे)। अब उनकी रुचि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने में है।

इससे पहले  कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने सचिवालय में विजय से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि विजय का इंडिया गठबंधन में प्रवेश और संभवतः द्रमुक के जाने से पैदा हुए खाली स्थान को भरना इस चर्चा का मुख्य विषय था। श्री विजय की उपस्थिति उनके विशाल जनाधार को देखते हुए गठबंधन को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकती है, क्योंकि कांग्रेस और टीवीके दोनों का एक साझा लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना है।

विजय से राहुल गांधी को भी मिलेगी ताकत
लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 08 सांसदों वाले द्रमुक का गठबंधन से अलग होना एक अस्थायी झटका हो सकता है, लेकिन विजय का इंडिया गठबंधन में शामिल होना इसे ‘स्टार पावर’ और एक नया आकर्षण प्रदान करेगा। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार इससे राहुल गांधी के हाथों को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा श्री गांधी और श्री विजय के बीच का विशेष बंधन आने वाले लोकसभा चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में सहायक सिद्ध होगा।

विजय पहले ही तमिलनाडु के राजनीतिक नक्शे को बदल चुके हैं, और उनकी पार्टी टीवीके का लक्ष्य उस धर्मनिरपेक्ष स्थान पर कब्जा करना है, जिस पर कभी डीएमके का दावा हुआ करता था। कांग्रेस का साथ होने से उनके पास भाजपा का मुकाबला करने के लिए आवश्यक धर्मनिरपेक्ष साख मौजूद है। द्रमुक के लिए अब तक कांग्रेस ही वह पार्टी थी जिसने उसे धर्मनिरपेक्षता का आवरण प्रदान किया था। इसके अलावा श्री विजय का फिल्मी करिश्मा तमिलनाडु की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। पड़ोसी राज्य केरल में उनके प्रशंसकों की विशाल संख्या है और कुछ हद तक आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक में भी उनके प्रशंसक मौजूद हैं। चुनावों के समय कांग्रेस के लिए यह स्थिति अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

अन्नामलाई का बड़ा ऐलान: तमिलनाडु में बनाएंगे नई पार्टी, बोले- ‘BJP या तमिलियन, इसी दुविधा में था’

नई दिल्ली
 तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद राज्य में अपनी एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए। अन्नामलाई ने कहा कि, उनकी राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी. भाजपा से इस्तीफा देने का बाद उन्होंने कहा कि, वे एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद के अन्नामलाई ने कहा कि, उनके लिए पहले यह दुविधा वाली बात थी कि, वह बीजेपी के आदमी हैं या तमिलियन. पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि, उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बताया कि वह इस्तीफा देने जा रहे हैं. पार्टी ने उन्हें चुनाव खत्म करने और फिर जाने को कहा। 

बता दें कि, तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया जिसे भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्वीकार कर लिया. ऐसा बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने हाल में दिल्ली यात्रा के दौरान अपना इस्तीफा सौंपा था। 

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अन्नामलाई इस्तीफे की संभावना और नयी राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व से मुलाकात के लिए दिल्ली आए थे. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मंगलवार को मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की थी। 

ऐसा बताया जा रहा है कि नैनार नागेंद्रन को उनकी जगह भाजपा की तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष पद नियुक्त किए जाने और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के साथ चुनावी गठबंधन फिर से बहाल किए जाने के बाद से अन्नामलाई नाराज थे। 

अन्नामलाई ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह पांच जून को यानी आज सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान अपने विचार साझा करेंगे. वह राष्ट्रीय राजधानी की अपनी यात्रा के बारे में संभवतः स्पष्टीकरण देंगे तथा राष्ट्रीय राजधानी की अपनी यात्रा, इस्तीफे और नयी राजनीतिक पार्टी शुरू करने की संभावित योजना के बारे में भी स्थिति स्पष्ट करेंगे. आज उन्होंने नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। 

क्या पवन खेड़ा की तपस्या रंग लाई? कांग्रेस की मुखर आवाज को मिला राज्यसभा का टिकट

 नई दिल्ली

सियासत में संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता, बशर्ते आप सही वक्त पर सही पिच पर बैटिंग कर रहे हों. राजनीति में ये कदम आपके लिए बंद पड़े दरवाजों को खोल देता है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 7 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें पवन खेड़ा का नाम शामिल हैं. इस तरह पार्टी उन्हें कर्नाटक से संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेज रही है। 

बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के तेज तर्रार प्रवक्ता पवन खेड़ा फ्रंटफुट पर लगातार मोर्चा खोला रखे थे. बीजेपी के ‘एक्शन’ पर आक्रामक तरीके से पवन खेडा के ‘रिएक्शन’ और कांग्रेस का ‘पॉलिटिकल कैलकुलेशन’ ने क्या राज्यसभा का टिकट कंफर्म करा दिया है? 

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने गुरुवार को अपने सात उम्मीदावरों के नाम का ऐलान किया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ पवन खेड़ा और मंसूर खान को कर्नाटक से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या के आधार पर पवन खेड़ा का राज्यसभा जाना तय है।  

पवन खेड़ा की तपस्या पूरी हुई?
यह वही पवन खेड़ा हैं, जिन्हें साल 2022 में राजस्थान से राज्यसभा टिकट न मिलने पर मायूसी हाथ लगी थी. तब पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था. ‘शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई.’ लेकिन तब और अब के राजनीतिक हालात में जमीन-आसमान का अंतर है. पवन खेडा कल टीवी डिबेट्स का चेहरा थे, वो अब बीजेपी के खिलाफ ‘लड़ाई के प्रतीक’ बन चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला लिया। 

पिछले कुछ समय में जिस तरह से पवन खेड़ा ने खुद को पार्टी के संकटमोचक और सबसे मुखर चेहरे के रूप में स्थापित किया, उसने कांग्रेस आलाकमान को अपना मुरीद बना लिया. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व पर यह नैतिक दबाव था कि जो नेता फ्रंटफुट पर रहकर गांधी परिवार और पार्टी के लिए तमाम मुकदमे झेल रहा है, उसे तरजीह दी जाए. इस तरह उनकी ‘तपस्या’ न सिर्फ पूरी हुई, बल्कि राहुल गांधी की कोर टीम ने उनके नाम पर सबसे पहले मुहर लगाई। 

फ्रंटफुट पर ‘लड़ाई लड़ने’ का इनाम
कांग्रेस आलाकमान ने अपने प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को एक साफ संदेश दिया है कि जो नेता पार्टी के लिए जमीन और कानूनी मोर्चों पर लाठियां या मुकदमे झेलेगा, संगठन उसके साथ खड़ा रहेगा. पवन खेड़ा लगातार बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए एक बयान के बाद जिस तरह असम पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ड्रामाई अंदाज में पवन खेड़ा को फ्लाइट से उतारा था और गिरफ्तार किया, उसने रातों-रात उन्हें कांग्रेस का ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया था। 

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर अघोषित विदेशी संपत्ति और फर्जी पासपोर्ट के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ असम में कई एफआईआर दर्ज हुईं. असम पुलिस ने उनके घर पर दबिश तक दी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जाकर राहत मिली. इस कानूनी लड़ाई में डटे रहने के कारण पार्टी ने उन्हें यह बड़ा इनाम दिया है. इस ‘बदले वाली कार्रवाई’ ने पवन खेड़ा के लिए राज्यसभा का रास्ता साफ कर दिया है। 

संसद में मुखर ‘वक्ता’ की जरूरत
पवन खेड़ा कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन हैं. वे टीवी डिबेट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तार्किक और तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं. कांग्रेस को राज्यसभा में एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश के साथ मिलकर सदन के भीतर मोदी सरकार को पुरजोर तरीके से घेर सके.  इसीलिए कांग्रेस ने पवन खेड़ा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। 

राहुल और खड़गे के ‘गुड बुक्स’ में
 पवन खेड़ा को गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों का बेहद करीबी और वफादार माना जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय से राजनीति के केंद्र में रहे पवन खेड़ा ने मुश्किल वक्त में भी कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा.  दिल्ली में शीला दीक्षित के सीएम रहते हुए पवन खेड़ा उनके निजि सचिव के तौर पर काम कर रहे थे, उसके बाद से कांग्रेस के राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह इस मामले को हाथों-हाथ लिया, उससे साफ है कि खेड़ा अब गांधी परिवार के गुड बुक्स में टॉप पर हैं।

कर्नाटक से उनके साथ खुद मल्लिकार्जुन खड़गे भी राज्यसभा जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि उन्हें सबसे सुरक्षित सीट से संसद भेजने का फैसला शीर्ष नेतृत्व की मर्जी से हुआ है. साल 2022 के राज्यसभा चुनावों के दौरान जब कांग्रेस ने बाहरी या अन्य नेताओं (जैसे इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी) को तरजीह दी थी, तब पवन खेड़ा के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी कई आवाजें उठी थीं. इस बार खेड़ा को टिकट देकर आलाकमान ने उस पुराने असंतोष और ‘तपस्या’ वाले नैरेटिव को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। 

TMC में बड़े बगावत के संकेत! 23 सांसदों के संपर्क में बागी गुट, ममता बनर्जी ने बुलाई अहम बैठक

 कोलकाता
पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी को 15 साल बाद सत्ता गंवानी पड़ी थी. हालिया चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 80 सीटों पर जीत मिली थी. टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी से निकाले जा चुके संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बगावत कर दी. बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता घोषित कर दिया, जिन्हें स्पीकर ने भी मान्यता दे दी है। 

विधायकों के बाद अब सांसदों के भी बगावत करने की चर्चा जोरों पर है. चर्चा है कि टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं. चर्चा 20 सांसदों के केंद्र और सूबे की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में जाने की भी थी. टीएमसी में बगावत के बीच बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के एक बयान ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि थोड़ा धैर्य रखिए, बहुत कुछ हो सकता है। 

दरअसल, शुक्रवार को कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी से टीएमसी के 20 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को लेकर सवाल पूछा गया था. इस सवाल के जवाब में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पिछले सात दिन से मेरी किसी भी सांसद से कोई बात नहीं हुई है. उन्होंने किसी भी सांसद से कोई बात नहीं होने को आधार बनाते हुए कहा कि इसलिए यह नहीं कह सकता कि सांसद क्या कदम उठाएंगे। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी गुट की ओर से नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वर्तमान में जीता हूं. कल क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता. हालांकि, सूत्रों की मानें तो टीएमसी में अगले हफ्ते टूट हो सकती है. 23 सांसद भी बागी गुट के साथ जा सकते हैं. टीएमसी सूत्रों की मानें, तो ये सांसद अभिषेक बनर्जी से नाराज बताए जा रहे हैं. यह सांसद भी विधायकों की तरह अलग गुट बना सकते हैं। 

टीएमसी के लोकसभा में 28 सांसद हैं. ऐसे में दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए अलग गुट को 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. कहा जा रहा है कि सांसदों की बगावत का नेतृत्व पार्टी के एक बहुत ही वरिष्ठ सांसद कर रहे हैं. राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं. राज्यसभा में अलग गुट की मान्यता के लिए नौ सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। 

दूसरी तरफ, टीएमसी में बगावत के बाद अब ममता बनर्जी भी एक्टिव मोड में आ गई हैं. ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर बड़ी बैठक बुला ली है. यह बैठक 5 जून की शाम चार बजे से शुरू होनी है. ममता बनर्जी के घर इस बैठक में टीएमसी के करीब-करीब सभी बड़े नेताओं को बुलाया गया है। 

टीएमसी में सांसदों के भी बगावत करने की सुगबुगाहट और बागी विधायकों के दावे को मान्यता देते हुए स्पीकर की ओर से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी सौंपे जाने के बाद ममता बनर्जी की यह पहली बड़ी बैठक है. टीएमसी के नाम-निशान को लेकर भी अब कयासों का दौर तेज हो गया है। 

ममता बनर्जी के सामने 28 साल पहले बनाई गई अपनी ही पार्टी का नाम और निशान अपने पास बनाए रखने की चुनौती आ खड़ी हुई है. ममता की अगुवाई में होने जा रही इस बैठक में आगे की रणनीति तय पर चर्चा होनी है। 

 

BJP के ‘बूथ के भूत’ रजनीश अग्रवाल राज्यसभा पहुंचेंगे, संगठन में मानी जाती है मजबूत पकड़

भोपाल 

राज्यसभा में मध्य प्रदेश कोटे की तीन सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होने हैं। बीजेपी ने अपने कब्जे वाली दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है।रजनीश अग्रवाल को पार्टी में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। वे साल 2021 से मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश के 65 हजार बूथों का डिजिटाइजेशन किया गया। बूथों को A, B, C और D कैटेगराइज करने का काम भी उन्होंने कराया।

इसके अलावा 30 मतदाताओं पर अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने की रणनीति से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने की योजना बनाने में भी उनकी भूमिका रही है।

एमपी से राज्यसभा में सवर्ण सांसद नहीं
एमपी के 11 राज्यसभा सांसदों में बीजेपी के 8 सांसद हैं। इनमें ओबीसी और एससी वर्ग के तीन-तीन सांसद हैं। एक एसटी और एक ईसाई यानी अल्पसंख्यक वर्ग से भी एक सांसद रहे। लेकिन प्रदेश से सामान्य वर्ग का एक भी सांसद राज्यसभा में नहीं था।

ऐसे में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया कि एमपी से किसी सवर्ण नेता को इस बार राज्यसभा भेजा जाएगा।

कैसे रेस से बाहर हुए दिग्गज नेता
मध्य प्रदेश बीजेपी की तरफ से केंद्रीय नेतृत्व को राज्यसभा के लिए ब्राह्मण वर्ग से डॉ. नरोत्तम मिश्रा, क्षत्रिय वर्ग से डॉ. अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह, वैश्य वर्ग से कैलाश विजयवर्गीय, रजनीश अग्रवाल और मुन्ना लाल गोयल के नाम भेजे गए थे।

कैलाश विजयवर्गीय राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के चलते रेस से बाहर कर दिए गए। पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और डॉ. अरविंद भदौरिया ढाई साल पहले विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे। पार्टी में यह राय बनी कि राज्यसभा का अवसर ऐसे कार्यकर्ता को दिया जाए, जिसे हाल के चुनावों में मौका नहीं मिला हो।

ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल भी चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने लंबे समय से संगठन में सक्रिय और पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल के नाम पर मुहर लगा दी।

ABVP के बाद बीजेपी में आए
सागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे के रहने वाले रजनीश अग्रवाल पैरों से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद काम के मामले में पार्टी के दूसरे नेताओं को पीछे छोड़ देते हैं। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में लंबे समय तक काम करने के बाद भाजपा में आए।

वीडी ने आगे बढ़ाया नाम, शिवराज ने दी सहमति
रजनीश अग्रवाल को वीडी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष रहते बूथ प्रबंधन का काम सौंपा गया था। वे वीडी की टीम में प्रदेश मंत्री भी बने। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर रजनीश को भेजने की चर्चा हुई थी। लेकिन, उस समय दिल्ली से जॉर्ज कुरियन का नाम तय हो गया था।

इस बार राज्यसभा के लिए जैसे ही सवर्ण नेता को भेजने का फॉर्मूला तय किया गया, वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम आगे बढ़ा दिया। शिवराज सिंह चौहान ने भी रजनीश को सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के तौर पर सहमति दी।

रजनीश बोले- संकोच में सीएम से टिकट मांगने नहीं गया

रजनीश अग्रवाल ने कहा- यह केवल हमारी पार्टी में ही संभव हो सकता है कि एक सामान्य से कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन में भेजा जाए।

मैं तो संकोचवश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से यह कहने तक नहीं जा पाया कि मेरा ध्यान रखिए। पिछले कई दिन से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात नहीं कर पाया। मैं आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह अवसर दिया।

नितिन नबीन की युवा मोर्चा टीम में कर चुके काम

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और रजनीश अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा में साथ काम कर चुके हैं। रजनीश अग्रवाल ने बताया- नितिन नबीन 2010 में एमपी बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश प्रभारी बनाए गए थे। उस दौरान जीतू जिराती प्रदेश अध्यक्ष थे। मैं उनकी टीम में प्रदेश महामंत्री था।

15 दिसंबर 2011 को मेरी शादी थी। मैंने नितिन जी को निमंत्रण दिया और मजाकिया लहजे में कहा, ‘शादी में आप ही मुझे घोड़ी चढ़ाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘मैं शादी में आऊंगा।’

पंजाब में संतुलन बनाने तरुण चुग जाएंगे एमपी से राज्यसभा
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद बनने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। सिंधिया वाली सीट पर केरल के ईसाई नेता जॉर्ज कुरियन को एमपी से राज्यसभा भेजा गया।

कुरियन केंद्र सरकार में मत्स्य पालन और डेयरी राज्यमंत्री हैं। वे हाल ही में केरल से विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए थे। इस बार बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया है।

कुरियन की जगह अब पंजाब में बीजेपी ने राजनीतिक संतुलन बनाने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को एमपी से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी बीजेपी ने राज्यसभा कैंडिडेट नहीं बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, जॉर्ज कुरियन अब संगठन में काम करेंगे और रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

BJP का बड़ा दांव: तमिलनाडु में अन्नामलाई का इस्तीफा मंजूर, आंध्र की राज्यसभा सीट भी छोड़ी

बेंगलुरु
तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका लग सकता है. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. अन्नामलाई को मनाने की सभी कोशिशें नाकाम क्या रहीं, बीजेपी ने आंध्र प्रदेश को लेकर बड़ा फैसला ले लिया. बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में खाली हो रही सभी चार सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दी हैं। 

आंध्र प्रदेश में राज्यसभा सीटों के बंटवारे के जिस फॉर्मूले की चर्चा थी, उसके मुताबिक सूबे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार की अगुवाई कर रही तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को दो, पवन कल्याण की अगुवाई वाली जन सेना पार्टी को एक सीट मिलनी थी. चौथी सीट बीजेपी के खाते में आनी थी. लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा। 

आंध्र प्रदेश की चार राज्यसभा सीटों के चुनाव में बीजेपी खाली हाथ रहती नजर आ रही है. इसे तमिलनाडु में तेजी से बदल रहे सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की चर्चा है और कहा जा रहा है कि इसी वजह से तमिलनाडु के पड़ोसी आंध्र प्रदेश की राज्यसभा सीटों के चुनाव में बीजेपी बैकफुट पर आ गई है। 

बीजेपी ने जिस सीट पर दावा छोड़ दिया है, उसे लेकर कहा जा रहा है कि पार्टी इसी सीट से अन्नामलाई को राज्यसभा भेजने की तैयारी में थी. अब, जब अन्नामलाई के इस्तीफे की चर्चा जोरों पर है, कहा जा रहा है कि बीजेपी ने यह सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ने का फैसला कर लिया है. सूत्रों की मानें तो राज्यसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग के इस नए फॉर्मूले पर अमरावती में एनडीए नेताओं की बैठक में मोहर भी लग गई। 

 बीजेपी ने मंजूर किया इस्तीफा

भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. BJP के  राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आधिकारिक तौर पर अन्नामलाई के इस्तीफे को मंजूरी दे दी है। 

BJP की तरफ से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने उनके इस इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है। 

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह के हस्ताक्षर के साथ जारी इस प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया गया है कि के. अन्नामलाई अब भारतीय जनता पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं. पत्र में लिखा गया है, “भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, माननीय श्री नितिन नवीन ने तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। 

दिल्ली में बीजेपी नेताओं से की थी मुलाकात
अन्नामलाई ने दो जून को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात की थी. इसके तुरंत बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक अलग गोपनीय बैठक की. अमित शाह और नितिन नवीन समेत बीजेपी के तमाम शीर्ष नेताओं के साथ हुई इस बैठक में अन्नामलाई ने बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में पार्टी छोड़ने की इच्छा जता दी थी। 

पूरी बैठक के बाद अन्नामलाई को वापस तमिलनाडु लौटना था. वे दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हो चुके थे और फ्लाइट पकड़ने ही वाले थे कि तभी बीजेपी आलाकमान की तरफ से उन्हें अचानक वापस बुला लिया गया. बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने अन्नामलाई को रोकने और पार्टी छोड़ने के फैसले को बदलने के लिए मनाने की आखिरी कोशिश की, लेकिन अन्नामलाई अपने फैसले पर अडिग रहे और आखिरकार बीजेपी मुख्यालय से उनका इस्तीफा स्वीकार होने की प्रेस रिलीज जारी हो गई। 

आंध्र प्रदेश में एनडीए के घटक दलों के नेताओं की यह बैठक 4 जून को अमरावती में हुई थी. अब नए फॉर्मूले के मुताबिक सीएम एन चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली टीडीपी तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, एक सीट पर पवन कल्याण की पार्टी का उम्मीदवार होगा. आंध्र प्रदेश एनडीए में समन्वय बेहतर बनाने के लिए इस महीने के अंत तक तिरुपति, अमरावती और विशाखापत्तनम में तीन रैलियां करने का निर्णय भी इस बैठक में लिया गया। 

सीट बंटवारे के फॉर्मूले में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब अन्नामलाई की सियासी राह को लेकर अटकलें तेज हैं. अन्नामलाई ने 2 जून को अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, बीएल संतोष समेत बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कीं. अन्नामलाई ने भविष्य में साथ काम करने की राह खुली रखते हुए बीजेपी नेतृत्व को धन्यवाद दिया और यह जानकारी भी दी कि वह अब नई राह पर चलना चाहते हैं। 

जाने कौन हैं मीनाक्षी नटराजन? राहुल गांधी की करीबी नेता को कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की सीट से बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

भोपाल
 मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की खाली हो रही सीट पर पार्टी ने लंबे समय बाद किसी महिला चेहरे पर दांव खेला है। राहुल गांधी की बेहद करीबी और तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन आखिर कौन हैं और क्रॉस वोटिंग के डर के बीच कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें ही क्यों चुना?

आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश से दो प्रत्याशी घोषित करने के चंद घंटे बाद कांग्रेस पार्टी ने भी देश के 5 राज्यों में खाली हो रही 7 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए। इसमें एकमात्र महिला प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नाम शामिल है। उन्हें मध्य प्रदेश से खाली हो रही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके बाद उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया जिसमें अलग—अलग नेताओं के दावेदारी को लेकर दावे किए जा रहे थे।

    उज्जैन के नागदा में जन्म, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा।
    जैव रसायन में स्नातकोत्तर और कानून में स्नातक की डिग्री।
    एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष और युवा कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं।
    2009 में मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं।
    वर्तमान में तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं।

दिग्गजों को पछाड़कर महिला चेहरे पर दांव

मध्य प्रदेश से राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस के भीतर दिग्गजों की लंबी फेहरिस्त थी। दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और शोभा ओझा सहित करीब दर्जनभर बड़े नाम शुमार थे। लेकिन पार्टी आलाकमान ने गुटीय राजनीति से दूर रहते हुए एक कद्दावर और साफ-सुथरी छवि वाली महिला नेत्री पर भरोसा जताया है।

राहुल गांधी की करीबी और NSUI की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की एक बेहद सीनियर और जमीनी नेता मानी जाती हैं। उन्हें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘कोर टीम’ का हिस्सा और उनका बेहद करीबी माना जाता है। उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद शानदार रही है।

मीनाक्षी नटराजन का राजनीतिक सफर
उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत एनएसयूआई से की। वे 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं।
इसके बाद 2002 से 2005 तक उन्होंने मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। वे साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मंदसौर निर्वाचन क्षेत्र से 15वीं लोकसभा की सांसद चुनी गई थीं। हालांकि, 2014 और 2019 के चुनावों में उन्हें भाजपा के सुधीर गुप्ता से हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में वह तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं और ‘राजीव गांधी पंचायती राज संगठन’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

क्रॉस वोटिंग का डर, दिल्ली में नेताओं की ‘घेराबंदी’
मीनाक्षी नटराजन के नाम के एलान के साथ ही कांग्रेस के सामने अपनी सीट सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में क्रॉस वोटिंग का दंश झेल चुकी कांग्रेस इस बार मध्य प्रदेश में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

राज्यसभा उम्मीदवार, जानिए सागर से दिल्ली तक का सफर
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों में सेंधमारी रोकने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव को बीते दिनों दिल्ली तलब किया गया था, जबकि इससे पहले कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट सौंप चुके हैं। हालांकि भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है, कि वह खाली हुई तीसरी सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

BJP की राज्यसभा सूची में बड़ा उलटफेर: रवनीत बिट्टू-जार्ज कूरियन का टिकट कटा, तरुण चुग और सतीश पूनिया को मौका

भोपाल/जयपुर/अहमदाबाद/दिल्ली

भाजपा और कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और उद्योगपति रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है।

कांग्रेस ने भी सात उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए टिकट दिया गया है।

ओडिशा में 25 मई को देवाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (BJD) और राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस तरह ओडिशा की इस सीट पर उपचुनाव होगा।

इसके लिए भाजपा ने देवाशीष को ही उम्मीदवार बनाया है। 13 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। नामांकन भरने की लास्ट डेट 8 जून है।

तमिलनाडु, मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित
    तमिलनाडु: CM विजय की पार्टी TVK ने राज्य की एक राज्यसभा सीट कांग्रेस को दी है। पार्टी ने यहां से प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है।

    मेघालय: मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-II (MDA-II) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पीके संगमा को सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाया है।

    मिजोरम: राज्य की एक सीट के लिए सत्ताधारी दल जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा को प्रत्याशी घोषित किया है।

NDA के पास 18 सीट

राज्यसभा की जिन 27 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 (आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं)। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटे हैं। वहीं तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं। एक बीजेडी के पास थी।

इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है।

244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं।

केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कूरियन का कटा टिकट, मोदी कैबिनेट से विदाई तय

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इस सूची के सामने आते ही सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा दो केंद्रीय राज्य मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन के नामों के कटने को लेकर शुरू हो गई है. उम्मीदवारों की सूची में जगह न मिलने के कारण अब दोनों ही मंत्रियों की मोदी मंत्रिपरिषद से छुट्टी तय मानी जा रही है। 

BJP की इस 11 संसदीय उम्मीदवारों की सूची में सबसे चौंकाने वाला  नाम रवनीत सिंह बिट्टू का है. वह राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया है. पंजाब में सिखों के बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित बिट्टू का 21 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. संसद का सदस्य न रहने की स्थिति में उनका मंत्री पद जाना अब लगभग तय है। 

वहीं, मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन का नाम भी इस सूची से नदारद है. कूरियन का कार्यकाल भी आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है. उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजने के फैसले के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। 

सांगठनिक धुरंधरों को मिला ईनाम पार्टी ने इस बार मंत्रियों को ड्रॉप करके संगठन में रात-दिन काम करने वाले जमीनी रणनीतिकारों पर बड़ा दांव खेला है। 
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कई राज्यों के चुनावी प्रभारी तरुण चुघ को मध्य प्रदेश कोटे से उम्मीदवार बनाया गया है.चुघ को टिकट देकर पार्टी ने उनके संगठनात्मक कौशल को पुरस्कृत किया है. उनके साथ एमपी से प्रदेश मंत्री और लंबे समय से प्रदेश बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे रजनीश अग्रवाल को भी संसद भेजा जा रहा है। 

इसके अलावा, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में हरियाणा बीजेपी के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया को राजस्थान से टिकट मिला है. पूनिया की जमीनी और जाट समुदाय पर मजबूत पकड़ को देखते हुए इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। 

वहीं, बीजेपी की केंद्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर को भी राजस्थान कोटे से राज्यसभा का टिकट दिया गया है, जो महिला और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करेगा। 

गुजरात के 4 ‘सरप्राइज’ नाम 
बीजेपी ने अपने अभेद्य किले गुजरात से चार ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा है जिन्होंने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है.इन नामों के पीछे RSS की पसंद और ओबीसी-आदिवासी सोशल इंजीनियरिंग साफ दिखाई देती है। 

राजूभाई शुक्ला: मेहसाणा के रहने वाले राजूभाई शुक्ला लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता और मजबूत ब्राह्मण चेहरा हैं. वर्तमान में वे सुरेंद्रनगर के जिला प्रभारी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से गहरा जुड़ाव रखते हैं. वे मेहसाणा जिला महामंत्री और कड़ी नगरपालिका के प्रमुख भी रह चुके हैं। 

मानसिंह परमार: युवा चेहरा मानसिंह परमार सोमनाथ जिले से आते हैं. वे ओबीसी मोर्चा के प्रमुख व पूर्व विधायक गोविंद परमार के भतीजे हैं और खुद भी पूर्व जिला अध्यक्ष के रूप में संगठन संभाल चुके हैं। 

जितेंद्र कंजारिया: देवभूमि द्वारका के खंभालिया से पूर्व विधायक मेघजी कंजारिया के बेटे जितेंद्र खुद भी ओबीसी समुदाय से आते हैं और क्षेत्र के बड़े जमीनी नेता हैं। 

मुकेशभाई राठवा: छोटा उदेपुर जिला महामंत्री मुकेश राठवा भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपनी राजनीति शुरू कर चुके हैं. RSS के कैडर रहे मुकेश राठवा की गुजरात के आदिवासी समुदाय पर बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है। 

नॉर्थ-ईस्ट पर विशेष फोकस 
मणिपुर में जारी संवेदनशील और सामाजिक हालात के बीच भाजपा ने मणिपुर बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष  ए. शारदा देवी को राज्यसभा का टिकट दिया है. एक महिला और सांगठनिक अध्यक्ष को उच्च सदन में भेजना राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। 

वहीं, अरुणाचल प्रदेश से पार्टी के वरिष्ठ और बेहद अनुभवी नेता ताई तगाक को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। 

ओडिशा उपचुनाव में देबाशीष सामंतराय को तोहफा
ओडिशा की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए बीजेपी ने देबाशीष सामंतराय को अपना प्रत्याशी बनाया है. दिलचस्प बात यह है कि देबाशीष सामंतराय बीजू जनता दल (BJD) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. यह उपचुनाव उन्हीं के इस्तीफे के कारण खाली हुई सीट पर हो रहा है, जिस पर बीजेपी ने दोबारा उन्हीं पर भरोसा जताया है।  

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं
राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं।

कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।

कर्नाटक कैबिनेट में बवाल: पसंदीदा विभाग न मिलने पर रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

 बेंगलुरु

कर्नाटक में नई सरकार के गठन और विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर का आंतरिक असंतोष एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 

रेड्डी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे कैबिनेट छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक (MLA) और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधा. रेड्डी ने दावा किया, “डीके शिवकुमार खुद मेरे घर आए थे और कहा था कि जब मैं सीएम बनूंगा, तो मैं इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूंगा और आप इसे संभाल लेना.” रेड्डी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले भी जब वे शिवकुमार से मिले, तो उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया था कि बेंगलुरु से जुड़ा पोर्टफोलियो उन्हीं को मिलेगा। 

रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने कभी इस विभाग की मांग खुद से नहीं की थी, लेकिन मुझे बार-बार इसका भरोसा दिया गया था. दो बार वादा करने के बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया. मैं इस फैसले से बेहद निराश हूं और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूं। 

समर्थक के हाथ भेजा इस्तीफा, पत्र में लिखी बड़ी बात
रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को सौंपने के बजाय अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया है. अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, “मैं कैबिनेट में मंत्री पद देने के लिए आपका और कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं. हालांकि, चूंकि मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम करने में असमर्थ हूं, इसलिए मैं मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं. कृपया इसे स्वीकार करें। 

राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि रामलिंगा रेड्डी ने अपने त्यागपत्र में ‘माननीय मुख्यमंत्री’ के रूप में डी. के. शिवकुमार को संबोधित किया है, जो राज्य के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है. हालांकि, रेड्डी ने मीडिया से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से न तो शिवकुमार से नाराज हैं और ना ही सिद्धारमैया से। 

दरअसल, रामलिंगा रेड्डी ‘बेंगलुरु शहरी विकास’  विभाग की मांग कर रहे थे. वे इस महत्वपूर्ण विभाग पर अपनी कमान चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यह जिम्मेदारी ब्याटरायनपुरा के विधायक कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दी। 

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