सहारा मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनेगा SEBI की चुनौती याचिका

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के उस फैसले के एक हिस्से को चुनौती दी गई है, जिसमें सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल) के प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। सेबी की याचिका के अलावा, शीर्ष अदालत ने सहारा समूह से जुड़े सभी लंबित मामलों, जिनमें निवेशकों के धन की वापसी का मामला भी शामिल है, को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

निदेशकों की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को को इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए सहारा समूह के चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया था और इस याचिका को कंपनी से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया था। अदालत ने अधिकारियों को 13 जुलाई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।
इससे पहले, नौ मार्च को सैट ने एसआईसीसीएल के खिलाफ सेबी की नियामकीय कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?
मामला 1998 से 2008 के बीच कथित रूप से वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के अवैध निर्गम से जुड़ा है। सैट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि इस अवधि में एसआईसीसीएल द्वारा जारी ओएफसीडी सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक ऑफर) की श्रेणी में आते हैं, इसलिए वे सेबी के नियामकीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत हैं।

न्यायाधिकरण के अनुसार, कंपनी ने इन डिबेंचर के माध्यम से लगभग 1.98 करोड़ निवेशकों से करीब 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे। इतने बड़े पैमाने पर इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाने को निजी नियोजन नहीं माना जा सकता, जैसा कि कंपनी का दावा था। हालांकि, सैट ने कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज करते हुए चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग अपील स्वीकार कर ली थी।

सेबी ने सैट को उच्चतम न्यायालय में दी चुनौती
न्यायाधिकरण ने कहा था कि कर्मचारी होने के नाते उन्हें कंपनी के कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। सैट ने यह भी कहा था कि कंपनी सचिव ने निदेशकों द्वारा दी गई ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के आधार पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे और इस कारण अंतिम जिम्मेदारी निदेशकों की ही बनती है।
सेबी ने अब सैट के इसी हिस्से को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। यह मामला सेबी के अक्टूबर, 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एसआईसीसीएल को ओएफसीडी के जरिये जुटाई गई राशि निवेशकों को लौटाने, अपनी परिसंपत्तियों का ब्योरा देने और कुछ अधिकारियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया था।

 

उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर

राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री  चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मंत्री  चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष  अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।

सचिव  आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव  राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।

बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

चिरायु’ की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

​रायपुर
  
कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित ‘चिरायु योजना’ धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

​स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत
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धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease – CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

​जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन
     
​चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
    
​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

पहचान से लेकर घर वापसी तक

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इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘चिरायु टीम’ की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।”

लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां
    

​त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

​सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है ‘आरबीएसके’
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धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

बदली बिलाईगढ़ के तिहारूराम की तकदीर: 4 लाख रूपए के अनुदान से मिला ट्रैक्टर

रायपुर
     
आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।
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ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री  टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा।

​’वन स्टॉप सेंटर’ से मिला किसानों को तत्काल लाभ   ​

सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा ‘वन स्टॉप सेंटर’ के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।
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शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।

​उन्नत कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
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ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।
     
​उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से ​प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,​सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,​प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,​दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।
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जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में जल संरक्षण बना जनआंदोलन

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण एवं ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक  श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा VB-G RAM-G के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

नारायणपुर के वनांचल गांवों में ‘नियद नेल्लानार योजना’ से लौटी विकास की रोशनी, दशकों बाद बदली तस्वीर

​रायपुर.

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे नारायणपुर जिले के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों के लिए साल 2026 की यह गर्मियां एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आईं। दशकों से लालटेन और ढिबरी की मद्धम रोशनी में जिंदगी गुजार रहे इन आदिवासी बाहुल्य गांवों में जब पहली बार बिजली का बल्ब जला, तो ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना’ ने इन दुर्गम इलाकों में विकास का नया सवेरा ला दिया है।

​दुर्गम राहें, दृढ़ संकल्प और सफलता
घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा व बीचपारा और ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई। कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की टीम और निर्माण एजेंसी एम/एस माँ शारदा ने युद्धस्तर पर काम करते हुए समय-सीमा के भीतर इस चुनौतीपूर्ण विद्युत लाइन विस्तार कार्य को सफलता पूर्वक पूरा किया।

लाखों का निवेश, परिवारों के जीवन में उजाला
वनांचल के इन गांवों को रोशन करने के लिए सरकार ने दिल खोलकर बजट स्वीकृत किया। जिसमें ​ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रूपए की लागत से तीनों पाराओं में बिजली का विस्तार किया गया, जिससे सीधे 40 परिवारों को पहली बार बिजली मिली। ​ग्राम मसपुर गुडरापारा 22.42 लाख रूपए की लागत से कार्य पूर्ण कर 5 परिवारों के घरों को विद्युत कनेक्शन से जोड़ा गया।

​बदलेगी गांवों की तस्वीर: शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को नई उड़ान
बिजली पहुंचने से वनांचल के इन गांवों में अब विकास की रफ्तार तेज होने वाली है। अब रात के अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग से ग्रामीणों की दैनिक जीवनशैली बेहद सुगम हो गई है। बिजली की उपलब्धता से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों का संचालन अब बेहतर ढंग से हो सकेगा। ग्रामीणों में अब स्वरोजगार को लेकर नया उत्साह है। सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों के शुरू होने से गांवों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।

​सपना हुआ साकार, ग्रामीणों ने जताया आभार
वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देख ग्रामीणों के चेहरों पर आत्मसंतुष्टि और खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए राज्य शासन, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

‘नियद नेल्लानार योजना’ सिर्फ गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक सशक्त मुहीम बन चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य अब जिले के अन्य वंचित गांवों में भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से विकास की रोशनी पहुंचाना है।

जनता की सेवा और दीन-दुखियों की सहायता ही जनप्रतिनिधि का वास्तविक धर्म : राज्यमंत्री गौर

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा है कि जनकल्याण और जनसेवा से बढ़कर संसार में कोई दूसरा पुण्य कार्य नहीं है। समाज के निर्धन और वंचित वर्ग की नि:स्वार्थ सहायता करना, उनके सुख-दुख में सहभागिता निभाना तथा उनकी समस्याओं का त्वरित एवं संवेदनशील निवारण करना ही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान और उसका परम कर्तव्य है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार चहुंमुखी विकास के साथ लोक-कल्याण के संकल्प को निरंतर चरितार्थ कर रही है। राज्यमंत्री  गौर प्रधानमंत्री  मोदी सरकार के गौरवमयी 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों को संबोधित कर रही थीं।

राज्यमंत्री  गौर ने बावड़ियाकला स्थित इंडस गार्डन फेस-1 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौध-रोपण किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक औपचारिकता नहीं, अपितु पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त और जीवंत माध्यम है। तीव्र शहरीकरण के इस दौर में भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए वृक्षारोपण की आवश्यकता अपरिहार्य हो गई है। राज्यमंत्री  गौर ने युवा पीढ़ी से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए सचेत किया कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए हरियाली का विनाश प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर विभीषिकाओं को आमंत्रण दे रहा है।

राज्यमंत्री  गौर ने वार्ड-68 के किरण नगर और निजामुद्दीन कॉलोनी में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का अवलोकन किया। उन्होंने समाज के जरूरतमंद और निर्धन परिवारों की महिलाओं को सम्मानपूर्वक साड़ियां वितरित कीं। स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति (अंत्योदय) तक विकास की मुख्यधारा और लोक-कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना ही प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में सु मोनिका ठाकुर, पार्षद  शीला पाटीदार,  अर्चना परमार,  प्रताप वारे,  धर्मेंद्र परिहार, पार्षद  उर्मिला मोर्य,  लवकुश यादव,  भीकम सिंह बघेल,  देवेंद्र योगी,  जे.पी. पाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय मातृशक्ति, प्रबुद्ध जन और नागरिक उपस्थित रहे।

 

छिंदवाड़ा में विवाहिता ने मेहंदी से संदेश लिखने के बाद जहर खाया, मामले की जांच शुरू

छिंदवाड़ा.

जिले से आत्महत्या का एक अलग मामला सामने आया है। चौरई थाना क्षेत्र के चन्हियाखुर्द गांव में 32 वर्षीय विवाहिता प्रीति वर्मा ने जहरीला पदार्थ खाने से पहले अपने दोनों हाथों और पैरों पर मेहंदी से एक लंबा दर्दनाक संदेश लिखा, जिसमें कथित प्रताड़ना का जिक्र है।

दरअसल शुक्रवार को जहर खाने के बाद प्रीति को गंभीर हालत में जिला अस्पताल और फिर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार शाम उसने दम तोड़ दिया।

मेहंदी ही सबसे बड़ा कानूनी सबूत
अस्पताल में हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टर उसके मृत्यु पूर्व कथन दर्ज नहीं करा सके, जिसके चलते अब शरीर पर लिखी यह मेहंदी ही सबसे बड़ा कानूनी सबूत बन गई है। मोहन मर्सकोले, थाना प्रभारी, चौरई ने बताया कि महिला बयान देने की स्थिति में नहीं थी, इसलिए उसके हाथ और पैरों पर मेहंदी से लिखे गए संदेश इस पूरे मामले में सबसे अहम साक्ष्य हैं।

शब्दों की फोटो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा
त्वचा पर लिखे हर एक शब्द की फोटो और वीडियोग्राफी कराकर सुरक्षित कर ली गई है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। पुलिस जांच में पता चला है कि प्रीति की शादी साल 2013 में लखन वर्मा से हुई थी। उनकी एक 10 साल की बेटी है, लेकिन कुछ समय पहले बीमारी के कारण उनके बड़े बेटे की मौत हो गई थी। पुलिस अब मायके पक्ष के बयान दर्ज करने के साथ पति के मोबाइल फोन और डिजिटल चैट खंगाल रही है ताकि आत्महत्या के लिए उकसाने के कारणों का पता लगाया जा सके।

प्राण वायु का स्थाई प्रबंध है एक पेड़ मां के नाम अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हमें जीवन दें, सद्मार्ग पर ले जाए, वह सदैव वंदनीय है। हमारे लिए प्रकृति ही परमेश्वर के स्वरूप है, क्योंकि यह हमें जीवन देती है, हमारा उदर-पोषण करती है। इसलिए हम सबको प्रकृतिपूजक बनकर इसकी वंदना करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी। वृक्ष ऋषि मुनियों के समान एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। यह हमारी नकारात्मक ऊर्जा को स्वयं ग्रहण कर हमें सकारात्मक ऊर्जा (प्राण वायु) देने वाले उदार साधक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर भूमि को हरियाली की चादर ओढ़ाना प्रकृति माता को हरी चुनरी ओढ़ाने जैसा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर चलाया जा रहा है ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान कोई शासकीय कार्यक्रम नहीं, ये जीवन के लिए सांसों का स्थायी प्रबंध करने का अभियान है। जल, जंगल, जमीन और जानवर जिनसे हमारा पारिस्थितिकीय-तंत्र तैयार होता है, यह अभियान इनकी सुरक्षा का मिशन है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर जिले के ग्राम बुढ़ानिया स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) परिसर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां अपनी पूजनीय माता स्व. मती लीला बाई यादव की स्मृति में संतरे का फलदार पौधा लगाकर इन्दौर में 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना (निर्माण) कार्य के महाभियान का दीप प्रज्ज्‍वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पंच महाभूतों का मान्यता मिली है। इसमें सबसे प्रमुख है जल। जल से ही हमारा जीवन है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान तथा जल, जंगल एवं पर्यावरण बचाने के पुनीत महाभियान में पूरे समाज की सहभागिता बेहद सराहनीय है। हम सबको मिलकर इस दिशा में आगे आना ही चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधरोपण एवं जल संचयन में सरकार और समाज की सहयोगी सामाजिक संस्था पृथ्वी को प्रोत्साहन स्वरूप 2 लाख रुपये और प्रदेश में चलाए गए नक्सल उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले बीएसएफ के दो जवानों को मंच से सम्मानित कर 2-2 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

इंदौर ने दिखाई जल संरक्षण में बेहतर करने की दिशा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां अहिल्या की नगरी इंदौर अतीत के उस गौरवशाली पृष्ठ के रूप में जानी जाती है, जिसने सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित किया। देवी अहिल्या माता ने अपने शासनकाल में अपने मूल उत्तरदायित्व के साथ-साथ प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर कुंए और बावड़ियां बनाई। उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में नदी, तालाब, कुंए, बावड़ियों की सफ़ाई और इनके पुनर्निर्माण का अभियान चलाया है। इंदौर में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण का काम हुआ। इंदौर ने देश को जल संरक्षण की दिशा दिखाई है। इससे देश में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अलनीनो जैसी जलवायु से जुड़ी चुनौती हमारे सामने हैं। ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण ही सबसे प्रभावी उपाय है। ‘एक पेड़ – मां के नाम’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर जब भी कुछ करता है, रिकार्ड ही बनाता है। जल हो या जंगल, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इन्दौर में बहुत अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण अभियान में 8 से 10 फिट के पौधे लगाए जा रहे हैं, जो जल्दी ही बड़े होकर फल देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह इस अभियान तीसरा साल है और हर साल इसमें समाज की सहभागिता बढ़ती ही जा रही है। अगले तीन दिनों में यहां 1 लाख से अधिक वन प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस अमृत हरित महोत्सव-2026 में इन्दौर जिले में 21 लाख पौधे लगाने का संकल्प लेने के लिए जिलेवासियों को बधाई दी।

वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष  हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि इन्दौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय कर रहा है। ‘एक पेड़ – मां के नाम’ के तहत 21 लाख पौधे लगाने के संकल्प का महाभियान नि:संदेह बेहद सराहनीय है।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि धरती माता ने हमें जल, जंगल, जैव संपदा और खनिजों का अमूल्य आर्शीवाद दिया है। हमारा मध्यप्रदेश प्रकृति पुत्र है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए पूरा इंदौर जुट गया है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आहृवान पर यह अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है।

इंदौर महापौर  पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि हम राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान को और गति दे रहे हैं। हम 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयां बनाने के लक्ष्य की दिशा में अब तक 8 हजार 500 जल इकाइयां बना चुके हैं। इंदौर में जल संवर्धन को हमने जन क्रांति का रूप दे दिया है।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद  शंकर लालवानी, वरिष्ठ समाजसेवी  अजय जामवाल, वरिष्ठ नेता  कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व मंत्री एवं विधायक  महेन्द्र हार्डिया, विधायक  मधु वर्मा, विधायक  रमेश मेंदोला, विधायक  गोलू शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष मती नीना सतीश मालवीय,  श्रवण चावड़ा,  विशाल पटेल,  सुमित मिश्रा, पूर्व विधायक  आकाश विजयवर्गीय सहित बीएसएफ के आईजी  सिंधु, पौधारोपण और जलसंरक्षण को जन आंदोलन बनाने वाली सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्वंयसेवी संस्थाओं के स्वंयसेवक तथा बड़ी संख्या में बीएसएफ के जवान उपस्थित थे।

 

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