जून से महंगी होंगी Maruti Suzuki की कारें, कीमतों में 30 हजार तक बढ़ोतरी

नई दिल्ली
 भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India ने गुरुवार को अपनी कारों की कीमतों में जून 2026 से 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है. स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में, घरेलू कार बनाने वाली कंपनी ने कहा कि Maruti ने अपने पोर्टफोलियो में अपने सभी मॉडलों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। 

कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि, “इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, कंपनी ने जून 2026 से अपने पोर्टफोलियो में मॉडल्स की कीमतें 30,000 रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया है। 

एक ऑफिशियल बयान में, कंपनी ने इस फैसले के लिए रॉ मटेरियल और ऑपरेशनल कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया, जिसका ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर असर पड़ रहा है। 

कार बनाने वाली कंपनी ने आगे कहा कि, “पिछले कुछ महीनों से, कंपनी कॉस्ट कम करने के तरीकों से कॉस्ट पर पड़ने वाले असर को जितना हो सके कम करने की लगातार कोशिश कर रही है। 

Maruti Suzuki India ने कहा कि उसने कॉस्ट का कुछ बोझ उठाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कॉस्ट कम करने के कई कदम उठाए हैं, लेकिन कॉस्ट के खराब माहौल की वजह से कुछ हद तक असर पड़ना ज़रूरी हो गया है। 

कंपनी ने आगे कहा कि उसने कस्टमर्स पर असर को जितना हो सके कम करने की कोशिश की है. अपनी फाइलिंग में उसने आगे कहा कि, “हालांकि, महंगाई का दबाव अब ऊंचे लेवल पर है और खर्च का खराब माहौल बना हुआ है, इसलिए कंपनी को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा मार्केट पर डालना होगा, साथ ही यह भी पक्का करना होगा कि कस्टमर्स पर असर जितना हो सके कम से कम हो। 

इसमें आगे कहा गया कि, “बदलाव की सही मात्रा हर मॉडल में अलग-अलग होगी.” यह नई घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत में कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने कमोडिटी की ज़्यादा कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और सप्लाई चेन में महंगाई के दबाव को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की है। 

इससे पहले, Mahindra & Mahindra ने 6 अप्रैल से अपने SUV और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कंपनी ने कहा कि बढ़ती इनपुट और ऑपरेशनल लागत का हवाला देते हुए, कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी, जिसमें सभी मॉडलों में औसतन लगभग 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 

पेट्रोल-डीजल और LPG पर बढ़ सकती है महंगाई, गीता गोपीनाथ की चेतावनी से बढ़ी चिंता

मुंबई 

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जून तक यह संघर्ष जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसा हुआ तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकते हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ऐसे में ईरान युद्ध और हार्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में सप्लाई रुकावट का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह सिर्फ महंगे तेल का मामला नहीं है, बल्कि अब सप्लाई शॉक की स्थिति बन रही है, यानी तेल, LPG, LNG और खाद की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। अगर सप्लाई चेन टूटती है, तो उसे सामान्य होने में 2 से 3 महीने तक लग सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में कच्चा तेल 110 डॉलर से बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, ट्रक किराया बढ़ेगा और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी।

गीता गोपीनाथ का मानना है कि सरकार हमेशा लोगों को पूरी तरह राहत नहीं दे पाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ बोझ सरकार उठाएगी, लेकिन कुछ कीमतों का असर जनता और कंपनियों को भी झेलना पड़ेगा, यानी आने वाले समय में पेट्रोल पंप पर कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां महंगाई लगातार बढ़ सकती है।

रुपये की कमजोरी पर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। हाल के महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 91 से गिरकर करीब 97 तक पहुंच गया है और बाजार में चर्चा है कि यह 100 के स्तर तक जा सकता है। लेकिन, गीता गोपीनाथ ने कहा कि असली चिंता सिर्फ रुपये का आंकड़ा नहीं है। उनके मुताबिक, कमजोर रुपया आयात कम करने में मदद करता है और यह आर्थिक संतुलन बनाने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार और RBI जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करेंगे, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, उन्होंने लोगों से घबराने की अपील नहीं की। उनका कहना है कि भारत की घरेलू मांग मजबूत है, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार भी अभी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल 140 डॉलर पर टिक जाता है, तो यह सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है।

एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार को गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज, कैश ट्रांसफर और लोन सपोर्ट जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पश्चिम एशिया का तनाव जल्द खत्म होगा या दुनिया को एक नए आर्थिक झटके का सामना करना पड़ेगा।

नई Honda City Facelift 2026 भारत में लॉन्च, दमदार फीचर्स और हाइब्रिड ऑप्शन से बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली
 Honda Cars India ने भारतीय बाजार में अपनी 2026 सिटी कार को लॉन्च कर दिया है। इस सेडार कार के अपडेटेड वर्जन की शुरुआती कीमत 11,99,900 (एक्स-शोरूम) रखी गई है। साल 2023 के बाद इस कार में किया गया यह दूसरा बड़ा अपडेट है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी नई ZR-V SUV को भी पहली बार पेश किया है।

डिजाइन और फीचर्स
यह कार पेट्रोल और e:HEV स्ट्रॉंग हाइब्रिड दोनों विकल्पों में उपल्बध होगी। इस सेगमेंट में यह 4594mm की लंबाई के साथ सबसे लंबी सेडार कार है। इसके सामने के हिस्से में नई ब्लेड आई सिग्नेचर LED लाइटिंग, Bi-LED प्रोजेक्टर हेडलैंप्स, फ्रंट ग्रिल से जुड़ा सेंटर लाइट बार और नए डिजाइन का बंपर दिया गया है।

पीछे की तरफ Z-शेप वाली वाली LED टेल लैंप्स और स्पोर्टी ट्रंक लिप स्पॉइलर मिलता है। इसमें नए 16-इंच के ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। कार में नया रंग क्रिस्टल ब्लैक पर्ल भी जोड़ा गया है।

कैसा है इंटीरियर और सेफ्टी?
कार के अंदर आइवरी और ब्लैक टू-टोन इंटीरियर दिया गया है। इसमें 25.6 सेमी (10.1 इंच) की फ्लोटिंग टचस्क्रीन, 360-डिग्री मल्टी व्यू कैमरा, वेंटिलेटेड सीट्स, वेलकम एंबिएंट लाइट और आगे-पीछे USB-C चार्जिंग पोर्ट्स दिए गए हैं। इसमें Honda SENSING इंटेलिजेंट ADAS तकनीक दी गई है जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकगिं, एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।

इंजन विकल्प और माइलेज
पहला है स्ट्रॉंग हाइब्रिड (e:HEV), यह दो मोटरों वाला हाइब्रिड सिस्टम है। यह 126PS की पावर और 0 से 3000 rpm 253nm का टॉर्क देता है और इसका माइलेज 27.26kmpl है। यह कार चलाने समय अपने आप ही EV, Hybrid, और इंजन ड्राइव मोट्स के बीच बदलता रहता है।

प्योर पेट्रोल इंजन ऑप्शन
इसमें 1.5 लीटर का i-VTEC पेट्रोल इंजन दिया गया है। इसके साथ 6-स्पीड मैनुअल (MT) या 7-स्पीड CVT गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। यह स्पोर्टी परफॉर्मेंस और अच्छे माइलेज का संतुलन देता है। यह 6600 rpm पर 121 PS का पावर और 4300 rpm पर 145 nm का टॉर्क देता है। MT के साथ इसका माइलेज 17.77kmpl तो वहीं CVT के साथ इसका माइलेज 17.97kmpl है।

क्या है वेरिएंट ऑप्शन?
City Petrol, यह कार MT में चार वेरिएंट्स SV, V, ZX और ZX+ में उपलब्ध है। वहीं CVT ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में यह तीन वेरिएंट्स V, ZX और ZX+ में मिलेगी। दूसरा है City e:HEV, यह स्ट्रॉंग हाइब्रिड मॉडल एक टॉप वेरिंट ZX+ में आता है। इस पर कई सारे वॉरंटी ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं।

वारंटी की जानकारी
पहली है स्टैंडर्ड वारंटी जिसमें कार पर 3 साल कि अनलिमिटेड किमी की स्टैंडर्ड वारंटी दी जा रही है। अगला है एक्सटेंडेड वारंटी जिसे ग्राहक 7 साल तक बढ़वा सकते हैं। इसके बाद है एनीटाइम वारंटी जिसमें कार खरीदने की तारीख से इसे 10 साल या 1,20,000 किमी तक के लिए भी किया जा सकता है।

e:HEV वेरिएंट में लिथियम-आयन बैटरी पर 8 साल या 1,60,000 किमी की स्टैंडर्ड वारंटी मिलती है। इसके अलावा, हाइब्रिड सिस्टम के पार्ट्स पर नई 5 साल या 1 लाख किमी की वारंटी दी जा रही है। इसकी बिक्री और ग्राहकों को डिलीवरी शुरू कर दी गई है।

नई होंडा सिटी की कीमत (Price – Ex-Showroom, Delhi)

 

वेरिएंट (Grade) मैनुअल (MT) ऑटोमैटिक (CVT) हाइब्रिड (e:HEV)
SV ₹11,99,900
V ₹13,29,900 ₹14,29,900
ZX ₹15,25,900 ₹16,25,900
ZX+ ₹16,14,900 ₹17,14,900 ₹20,99,900

सूर्यास्त्र रॉकेट टेस्टिंग की खबर से इस शेयर में जोरदार उछाल, 14% तक चढ़ा भाव

बेंगलुरु

 डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी निबे लिमिटड (Nibe Limited) के शेयर शुक्रवार को भारी डिमांड में थे। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन इस शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शेयर में यह उछाल इजरायल की डिफेंस कंपनी Elbit सिस्टम्स के साथ मिलकर बनाए और विकसित किए गए लंबी दूरी के सूर्यास्त्र (Suryastra) रॉकेट सिस्टम के सफल फ्लाइट-टेस्ट के बाद आया। इस नए रॉकेट सिस्टम का टेस्ट-फायर ओडिशा के तट के पास स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया।

शेयर का परफॉर्मेंस
इस खबर की वजह से शुक्रवार को शेयर 1,293.65 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 14 पर्सेंट से ज्यादा उछलकर 1,469 रुपये तक जा पहुंचा। पिछले एक हफ्ते में शेयर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ चुका है। शेयर का 52 वीक हाई 2000 रुपये और 52 वीक लो 810 रुपये है।

निवेशकों में उत्साह की वजह
बाजार विश्लेषकों ने शेयर को लेकर निवेशकों के उत्साह की मुख्य वजह ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम के सफल परीक्षण और ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन के पहले ट्रायल की वजह से था। इसके अलावा, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत के रणनीतिक रक्षा निर्माण क्षेत्र में कंपनी की भविष्य की भूमिका को लेकर बढ़ती उम्मीदें भी इस तेजी की एक वजह थीं। बाजार विश्लेषकों ने कहा-हाल के वर्षों में किसी डिफेंस स्टॉक में देखी गई यह सबसे तेज उछालों में से एक हो सकती है।

खासकर तब जब यह किसी उभरती हुई निजी क्षेत्र की कंपनी का स्टॉक हो। विश्लेषकों ने इस तेजी का श्रेय हथियारों के सफल परीक्षणों को लेकर निवेशकों के जबरदस्त उत्साह और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र में बढ़ते अवसरों की उम्मीदों को दिया।

सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का सफल टेस्ट
रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट सेंटर से दो दिनों में सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम के कई राउंड का सफल टेस्ट किया गया। इनमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले वेरिएंट भी शामिल थे।

18 और 19 मई को लगातार हुए इन ट्रायल्स में मिशन के सभी लक्ष्य असाधारण सटीकता के साथ हासिल किए गए। इससे इस सिस्टम की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता साबित हुई और भारत का स्वदेशी प्रिसिजन-गाइडेड रॉकेट आर्टिलरी प्रोग्राम और मजबूत हुआ।

बता दें कि सूर्यास्त्र रॉकेट, एलबिट सिस्टम्स द्वारा विकसित ‘प्रेसिज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम’ (PULS) टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं और इनका निर्माण भारत में निबे ग्रुप के सहयोग से किया जा रहा है। इस सिस्टम को पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के बीच की खाई को पाटने के लिए डिजाइन किया गया है।

जनवरी में सेना के साथ समझौता

जनवरी में भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत निबे लिमिटेड के साथ ₹292.69 करोड़ ($31 मिलियन) का एक कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता वाले एक उन्नत लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की आपूर्ति के लिए किया गया था। इस आपूर्ति को एक वर्ष के भीतर किस्तों में पूरा किया जाएगा।

सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में बड़ी गिरावट

मुंबई 

सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलते ही धड़ाम हो गए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को BSE में करीब 6 पर्सेंट लुढ़ककर 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। केंद्र सरकार इस बड़े सरकारी बैंक में अपना हिस्सा बेच रही है। सरकार ने शुक्रवार को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। केंद्र सरकार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8 पर्सेंट तक हिस्सेदारी बेच रही है। सरकार, इस सरकारी बैंक में अपनी हिस्सेदारी गुरुवार को बैंक के शेयरों के बंद स्तर से 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते में बेच रही है।

31 रुपये प्रति शेयर के दाम पर सरकार बेच रही अपना हिस्सा
सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी 31 रुपये के फ्लोर प्राइस पर बेच रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर गुरुवार को BSE में 33.91 रुपये पर बंद हुए थे। सरकार 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते (डिस्काउंट) पर अपना हिस्सा बेच रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सरकारी बैंक में अपनी 4 पर्सेंट इक्विटी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचेगी। इसके अलावा, सरकार के पास ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए 4 पर्सेंट और हिस्सेदारी बेचने का विकल्प है। नॉन- रिटेल निवेशक शुक्रवार 22 मई से ऑफर फॉर सेल के लिए बोली लगा सकेंगे। वहीं, आम निवेशक सोमवार 25 मई से बोली लगा सकेंगे।

अभी 89.27 पर्सेंट है बैंक में सरकार की हिस्सेदारी
31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में केंद्र सरकार की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.27 पर्सेंट हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंजों पर उपलब्ध डेटा में यह बात कही गई है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 10.73 पर्सेंट है। मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स का पालन करने के लिए केंद्र सरकार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में और 14.27 पर्सेंट हिस्सेदारी बेचनी होगी। केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए गोल्डमैन सैक्स को ट्रांजैक्शन एडवायजर नियुक्त किया था।

5 साल में 72% उछले हैं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर
सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर पिछले पांच साल में सिर्फ 72 पर्सेंट चढ़े हैं। सरकारी बैंक के शेयर 21 मई 2021 को 18.50 रुपये पर थे। बैंक के शेयर 22 मई 2026 को 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। पिछले एक साल में बैंक के शेयरों में करीब 12 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिली है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों का 52 हफ्ते का हाई लेवल 41.18 रुपये है। वहीं, बैंक के शेयरों का 52 हफ्ते का निचला स्तर 31.29 रुपये है।

Apple का बड़ा खुलासा, 2.2 बिलियन डॉलर के फर्जी ट्रांजैक्शन किए ब्लॉक

 नई दिल्ली
ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है। 

ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है। 

हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं 

ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं।  

2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन 
ऐपल ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं। 

रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम 
कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है। 

कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर 
ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया। 

लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद 
अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है। 

बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए
Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं। 

ग्लोबल बाजारों में गदर, सेंसेक्स-निफ्टी में ताबड़तोड़ रैली; ये 10 शेयर बने सुपरहिट

मुंबई 
अमेरिका से लेकर एशियाई शेयर बाजारों तक में जोरदार तेजी से भारतीय शेयर बाजार का मूड भी सुधरा है और सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही 500 अंक से ज्यादा की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ खुला. इस तेजी के बीच बीईएल, इंडिगो से लेकर जोमैटो की पेरेंट कंपनी एटरनल और टाटा स्टील जैसे शेयक खुलते ही दौड़ लगाते नजर आए। 

सेंसेक्स-निफ्टी में तेज उछाल 
गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 75,318 की तुलना में तेजी लेकर 75,732 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ये 75,945 पर कारोबार करता हुआ नजर आया. BSE Sensex की तरह एनएसई का निफ्टी इंडेक्स भी बुधवार के अपने बंद 23,659 के मुकाबले तेजी लेकर 23,830 पर ओपन हुआ। 

ये 10 शेयर खुलने के साथ ही भागे
Share Market की तेज शुरुआत के बीच अगर सबसे ज्यादा उछलने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल IndiGo Share (2.60%), BEL (2.20%), Eternal Share (1.80%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था। 

इसके अलावा मिडकैप में शामिल TI India Share (2.10%), Godrej Properties Share (1.80%), Bharat Forge Share (1.50%)और Suzlon Share (1.40%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. वहीं स्मॉलकैप कंपनियों में देखें, तो Samman Cap Share (7%), AIIL Share (4%), Angel One Share (3.60%) की तेजी में नजर आया। 

विदेशों से मिले थे ग्रीन सिग्नल
भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से भी ग्रीन सिग्नल मिल रहे थे, एक ओऱ जहां अमेरिकी शेयर बाजारों में बीते कारोबारी दिन तूफानी उछाल देखने को मिला था और Dow Jones 645 अंक की धुआंधार तेजी के साथ क्लोज हुआ था, तो वहीं खुलने के साथ ही गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में धमाल मचा था. जापान का निक्केई 2000 अंक से ज्यादा उछलकर कारोबार कर रहा था, तो साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में 7.70 फीसदी या 560 अंक की तेजी देखने को मिली। 

(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

भारत में लॉन्च हुई MINI Cooper S JCW GP Inspired Edition, 58.90 लाख में मिलेगा दमदार स्पोर्टी लुक

मुंबई 

प्रीमियम हैचबैक निर्माता कंपनी MINI India ने इस महीने की शुरुआत में अपनी MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन की बुकिंग शुरू की थी, और अब कंपनी ने इस कार को भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस स्पेशल ए़डिशन को 58.90 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है। 

भारतीय बाज़ार के लिए इस कार की सिर्फ़ 30 यूनिट्स ही सीमित रखी गई हैं. यह स्पेशल एडिशन MINI GP से इंस्पायर्ड है और विक्ट्री एडिशन के बाद MINI Cooper S पर बेस्ड दूसरा स्पेशल एडिशन है, जिसे भारतीय बाजार में पेश किया गया है। 

MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का डिजाइन
GP इंस्पायर्ड एडिशन को एक्सक्लूसिव लेजेंड ग्रे एक्सटीरियर शेड में फिनिश किया गया है, जिसके कंट्रास्ट में चिली रेड रूफ और मिरर कैप्स हैं. इसमें GP-इंस्पायर्ड बोनट और साइड स्ट्राइप्स भी हैं, जो रेड और ग्रे कलर में फिनिश किए गए हैं, और कार के C-पिलर पर ‘1/30’ बैजिंग है। 

MINI ने John Cooper Works के लिए कई खास कॉस्मेटिक चीज़ें भी जोड़ी हैं, जिसमें स्पॉइलर एक्सटेंशन, फ्रंट और रियर विंगलेट, साइड स्कर्ट और रियर डिफ्यूज़र शामिल हैं. इसके अलावा, हैचबैक में 17-इंच के JCW स्प्रिंट स्पोक अलॉय व्हील हैं, जिन्हें चिली रेड कलर में फिनिश किए गए GP-इंस्पायर्ड व्हील हब कैप के साथ जोड़ा गया है। 

MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंटीरियर
कार के इंटीरियर की बात करें तो, केबिन में इस एडिशन के लिए कई खास एलिमेंट्स दिए गए हैं. इनमें इल्यूमिनेटेड GP-इंस्पायर्ड डोर सिल्स, ‘1/30’ फ्लोर मैट और JCW-स्पेसिफिक डोर लॉक पिन दिए गए हैं। 

कंपनी ने इस हैचबैक में वेस्किन और कॉर्ड अपहोल्स्ट्री कॉम्बिनेशन में फिनिश की गई JCW स्पोर्ट सीट्स, JCW डैशबोर्ड ट्रिम और पैडल शिफ्टर्स के साथ एक नया JCW स्टीयरिंग व्हील दिए गए हैं। 

MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन के फीचर्स
फीचर्स की बात करें तो, स्पेशल एडिशन में 9.4-इंच का सर्कुलर OLED टचस्क्रीन, एक हेड-अप डिस्प्ले, एक हारमन कार्डन साउंड सिस्टम, वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो और कनेक्टेड कार टेक जैसे फीचर्स मिलते हैं. वहीं, सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कार में कई एयरबैग, ABS, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग और एक रियर-व्यू कैमरा मिलते हैं। 

MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंजन
Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन में 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 204 hp का पावर और 300 Nm का टॉर्क देता है. इसे 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है. इस इंजन की बदौलत यह हैचबैक 6.6 सेकंड में 0-100 kmph की स्पीड पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 242 kmph बताई गई है। 

पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही 10 मिनट डिलीवरी पर असर, अब बढ़ सकती है फास्ट सर्विस की कीमत

मुंबई 

देश में 10 मिनट वाले क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सर्विस का यूज लगभग अब हर घर में होने लगा है, लेकिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर अब इन कंपनियों के ऊपर भी पड़ने वाला है. हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स को लागत बढ़ानी पड़ सकती है। 

फ्यूल बढ़ोतरी का डिलीवरी पर असर
क्विक कॉमर्स में ऐवरेज डिलीवरी लागत 35-50 रुपये प्रति ऑर्डर है, जबकि फूड डिलीवरी में यह 55-60 रुपये के आसपास होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal (Zomato) के लिए ऐवरेज डिलीवरी लागत करीब 45 रुपये और Swiggy के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है. डिलीवरी लागत में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, यानी एक ऑर्डर पर 9-10 रुपये फ्यूल का खर्च आता है। 

फिलहाल 4 प्रतिशत बढ़ोतरी से प्रति ऑर्डर 0.44 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर फ्यूल के दाम और बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर हो गए तो यह प्रभाव 1-1.2 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच सकता है. इससे कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर 4-12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है, अगर लागत ग्राहकों पर नहीं डाली गई। 

Eternal और Swiggy पर क्या असर?
Eternal (जिसमें Blinkit शामिल है) और Swiggy दोनों ही फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर निर्भर हैं. FY27 में Eternal के करीब 2.7 अरब और Swiggy के 1.4 अरब ऑर्डर आने का अनुमान है. Swiggy पर असर ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह अभी क्विक कॉमर्स में ब्रेकईवन यानी नो प्रॉफिट, नो लॉस की राह पर है। 

दूसरी ओर, Eternal की स्थिति बेहतर मानी जा रही है. उसका बड़ा स्केल, ज्यादा एड आय और प्रीमियम ग्राहक आधार इसे लागत बढ़ाने में मदद करेगा. कंपनियां अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक चार्ज बढ़ाकर, कुछ खुद उठाएंगी और कुछ डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव डालकर संभालने की कोशिश करेंगी। 

ग्राहकों और डिलीवरी वर्कर्स पर प्रभाव
बढ़ती लागत से 10 मिनट डिलीवरी का कन्वीनियंस महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियां डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज बढ़ा सकती हैं. डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कमाई प्रभावित होने से वे ज्यादा पेमेंट की मांग कर सकते हैं, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा। 

हालांकि, एलारा कैपिटल का कहना है कि थोड़े समय बाद यह कंट्रोल में रहेगा. लंबे समय में कंपनियां दक्षता बढ़ाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाकर और बेहतर प्लानिंग से इस चुनौती से निपट सकती हैं. फ्यूल दामों में बढ़ोतरी अब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती बनकर आ रही है। 

सुबह उठते ही मिला नौकरी जाने का मेल, Meta ने 8000 कर्मचारियों की छंटनी से मचाई हलचल

 नई दिल्ली

मेटा ने बड़े स्तर पर छंटनी की शुरुआत कर दी है, जिसके लिए कंपनी ने 20 मई की सुबह 4 बजे कई लोगों को ईमेल नौकरी से निकालने का ईमेल किया. इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स मिली है. पुरानी रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा चुका था कि 20 मई को कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी करेगी। 

मेटा अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स में से 10 परसेंट यानी करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ते दिखाएगी. कंपनी ने इसकी शुरुआत सिंगापुर बेस्ड टीम के साथ की है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि सिंगापुर के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे लोगों को ईमेल आया है। 

मार्क जकरबर्ग का प्लान आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) में बड़ी इनवेस्टमेंट का है और इस साल भी वह अरबों डॉलर्स की रकम इनवेस्ट करने जा रहे हैं. मेटा ने बताया है कि दुनियाभर में उसके करीब 78 हजार कर्मचारी हैं। 

7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है
मेटा के चीफ पीपुल ऑफिसर जेनेला गाले ने एक इनहाउस मेमो में कहा है कि 8 हजार नौकरी खत्म करने के अलावा कंपनी करीब 7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है. कंपनी का फोकस अब छोटी टीम्स तैयार करना है। 

छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या 16,000 तक पहुंच सकती है
इन प्रस्तावित छंटनियों से अकेले शुरुआती चरण में ही मेटा के वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग 10 प्रतिशत कमचारियों के प्रभावित होने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने छंटनी की पूरी सीमा की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 2026 में बाद में और भी नौकरियां कम होने की संभावना है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 16,000 तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के अधिकारी अभी भी कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी और AI में हुई प्रोग्रेस के आधार पर छंटनी से जुड़ी जानकारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

हालांकि, ये छंटनी अचानक नहीं की जा रही है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पिछले एक साल में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में लीडर बनना चाहती है, जेनरेटिव टूल्स से लेकर उस इंफ्रास्ट्रक्चर तक, जो बड़े पैमाने पर मशीन लर्निंग सिस्टम को चलाता है। इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, मेटा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा खर्च की योजना बना रही है, जिसका अनुमान इस साल के लिए लगभग $135 बिलियन है; इसमें से ज्यादातर हिस्सा AI से जुड़े निवेशों, जैसे डेटा सेंटर, चिप और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, के लिए रखा गया है।

मेटा ने महामारी के दौर में 21,000 लोगों को निकाला था
अगर Meta छंटनी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो यह पिछले कुछ सालों में कंपनी में हुई नौकरियों की कटौती की एक और कड़ी होगी। यह मेटा में 2022 और 2023 में हुई छंटनी के पिछले दौर जैसा ही है, जब कंपनी ने धीमी ग्रोथ और महामारी के दौर में हुए जरूरत से ज्यादा विस्तार के नतीजों के चलते लगभग 21,000 नौकरियां खत्म कर दी थीं। उस दौर को, जिसे जकरबर्ग नें year of efficiency नाम दिया था, ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने, मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने के लिए किए गए ठोस प्रयासों के लिए जाना जाता है।

हालांकि, अब होने वाली छंटनी एक ज्यादा सुगठित संगठन बनाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि कंपनी अधिकारी मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और AI-बेस्ड प्रोसेस पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। अंदरूनी तौर पर, मेटा ने अपनी AI प्राथमिकताओं के हिसाब से टीमों को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। इंजीनियरों को ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए फिर से नियुक्त किया गया है जो कोड लिखने और मुश्किल कामों को संभालने में सक्षम ऑटोनॉमस सिस्टम बनाने पर केंद्रित हैं, जबकि AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स को तेजी से बाजार में लाने के लिए नई यूनिट्स बनाई गई हैं।

2026 में बड़े पैमाने पर छंटनी, अब तक 73,000 की नौकरी गई
इस बदलाव में Meta अकेली नहीं है। इन बदलावों का असर पूरी टेक इंडस्ट्री में महसूस किया जा रहा है, जहां बड़ी कंपनियां एक तरफ नौकरियों में कटौती कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ AI में अपना निवेश बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Amazon ने हाल के महीनों में कथित तौर पर लगभग 30,000 कॉर्पोरेट पदों को खत्म कर दिया है, जो उसके व्हाइट-कॉलर वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। इसी तरह, फिनटेक कंपनी Block ने भी अपने वर्कफोर्स में काफी कटौती की है।

Layoffs.fyi के आंकड़ों से इस बदलाव के पैमाने का पता चलता है। इस प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस साल अब तक दुनिया भर की 95 कंपनियों में 73,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है।

मेटा ने बीते महीने कर दिया था कंफर्म
छंटनी की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद बीते महीने ही मेटा ने कंफर्म कर दिया था कि वह करीब 8 हजार लोगों की छंटनी करने जा रहे हैं. इसके बाद कर्मचारियों को मनोबल गिर गया। 
मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने AI को कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता पर ला दिया है. दरअसल, Meta, Google और OpenAI जैसी कंपनियों की बराबरी करने के लिए AI लेवल पर नए इनोवेशन करना जरूरी है. मेटा बीते महीने ही कह चुका है कि वह इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच AI पर इनवेस्टमेंट का प्लान बना रहे हैं। 

दूसरी कंपनियां भी छंटनी की तैयारी में
बीते सप्ताह Cisco ने पिछले हफ्ते 4 हजार लोगों को बाहर निकालने की जानकारी दी थी. वहीं माइक्रोसॉफ्ट, ऐमेजॉन और अन्य कंपनियां भी हाल ही में छंटनी की जानकारी दे चुकी हैं। 

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