Tata की सबसे सस्ती EV लॉन्च! Tiago EV पर ₹1 लाख तक की कटौती और लाइफटाइम वारंटी

 नई दिल्ली

Tata ने अपनी एंट्री लेवल कार Tiago का अपडेट जारी किया कर दिया है. कंपनी ने इस कार को पेट्रोल, सीएनजी और ईवी तीनों ही अवतार में लॉन्च किया है. टाटा टियागो ईवी (Tata Tiago EV) की कीमतें 6.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत इस लिए खास है क्योंकि कंपनी ने कार की कीमत को पहले से कम किया है।

पहले ये कार 7.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर आती थी. इतना ही नहीं टाटा ने इस कार को BaaS (बैटरी एज सर्विस) के तहत भी लॉन्च किया है, जिसके बाद ये कार और भी सस्ती हो जाती है।

अगर आप इस कार को बैटरी एज सर्विस के तहत खरीदते हैं, तो कीमत पेट्रोल वेरिएंट के बराबर पहुंच जाती है. यानी Tata Tiago EV BaaS की कीमतें 4.69 लाख रुपये से शुरू होती है. टियागो ईवी में कंपनी ने कई बदलाव किए हैं. कार डुअल टोन इंटीरियर, बेहतर सेफ्टी और अपडेटेड चार्जिंग क्षमता के साथ आती है।

रेंज और चार्जिंग
टाटा टियागो ईवी दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है. कार में 19.2kWh और 24kWh की बैटरी मिलती है. छोटी बैटरी वाला वर्जन 62 एचपी की पावर और 110 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. वहीं बड़ी बैटरी पैक के साथ 75 एचपी की पावर और 114 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।

24kWh की क्लेम्ड रेंज 285 किलोमीटर की है. पहले इस बैटरी पैक के साथ कंपनी 293 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती थी. वहीं 19.2kWh बैटरी पैक वाले वेरिएंट की रेंज 226 किलोमीटर है. कंपनी की मानें तो रियल वर्ल्ड में छोटी बैटरी पैक में 160 से 170 किलोमीटर की रेंज मिलेगी, जबकि बड़े बैटरी पैक के साथ 200 से ज्यादा किलोमीटर की रेंज मिलेगी।

टाटा की मानें, तो ये कार 40 परसेंट तेजी से चार्ज होगी. सिर्फ 18 मिनट चार्ज करने पर कार 100 किलोमीटर तक चल सकेगी. इसमें डीसी फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा. कार 3.3kW और 7.2kW के एसी चार्जर के साथ आएगी. इसमें जनरेटिव ब्रेकिंग मिलेगी।

कंपनी का दावा है कि कार सिर्फ 5.7 सेकंड में 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. 24kWh वाले वेरिएंट पर कंपनी लाइफटाइम वारंटी दे रही है, जबकि 19.2kWh वाले वेरिएंट पर 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक वारंटी मिलेगी।

एक्सटीरियर में क्या है नया?
कार अब नए लुक के साथ आती है. इसमें आपको नया फ्रंट और रियर फेस मिलता है. हालांकि, साइड से कार अभी भी पहले की तरह ही लगती है. इसमें पतले एलईडी हेडलैम्प्स दिए गए हैं. कार में आई-ब्रो जैसे डीआरएल्स मिलते हैं, जो एलईडी हैं. इसमें 15 इंच के व्हील्स मिलते हैं।

रियर में कंपनी ने एलईडी कनेक्टेड टेललैम्प्स दिए हैं. कार डुअल टोन ब्लैक रूफ के साथ आती है. टियागो में शार्क फिन एंटीना और डोर हैंडल पर क्रोम फिनिश दी गई है. कार में सेफ्टी को भी बेहतर किया गया है. अब टियागो ईवी में 6 एयरबैग स्टैंडर्ड मिलते हैं।

टाटा टियागो ईवी 2026 में नया डैशबोर्ड मिलेगा. इसमें 10.25 इंच का फ्रीस्टैंड टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. इसका टीएफटी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर ब्लूटूथ सपोर्ट के साथ आता है. कार में वायरलेस चार्जिंग, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कारप्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, रियर एसी वेंट समेत कई फीचर्स मिलते हैं।

जापान में बैन के बाद सिंगापुर में भारतीय आमों की भारी डिमांड, सुपरमार्केट से मिनटों में हो रहे गायब

नई दिल्ली
भारत को दुनिया में आमों का राजा माना जाता है, और उत्पादन से लेकर निर्यात तक में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। लेकिन हाल ही में भारतीय आमों को लेकर एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। दरअसल, जापान के प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन (कीटाणुशोधन) और सुरक्षा उपायों में कमियों का हवाला देते हुए भारत की प्रीमियम आम किस्मों के आयात पर रोक लगा दी थी।

इस रोक में केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी टॉप क्लास किस्में शामिल थीं। जापान की इस रोक के बावजूद भारतीय आमों की वैश्विक साख पर कोई असर नहीं पड़ा। अब यही आम सिंगापुर के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं।

सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी दी कि वहां भारतीय आमों का जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे ये प्रीमियम आम सुपरमार्केट्स में आते ही फटाफट बिक हो रहे हैं।

भारत है दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। पीआईबी (PIB) के अनुसार, साल 2024-25 के दौरान देश में रिकॉर्ड 228.37 लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। भारत से अल्फांसो, तोतापुरी, केसर, नीलम और मल्लिका जैसी किस्में विदेशों में खूब निर्यात की जाती हैं।

खासतौर पर खाड़ी देशों और अमेरिका-ब्रिटेन में भारतीय आमों की भारी डिमांड है। APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, केवल साल 2024 में भारत ने अकेले यूएई (UAE) को 20 मिलियन डॉलर मूल्य के 12,897 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए थे।

इसके अलावा नेपाल, कतर और कुवैत में भी इसकी भारी मांग है। भारत में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश मुख्य आम उत्पादक राज्य हैं, जिनके स्वाद का जादू आज पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है।

1 जून से रेलवे स्टेशनों पर महंगा होगा खाना, सेंट्रल रेलवे ने बढ़ाए रेट

नई दिल्ली
ट्रेन से सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका है, जहां रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाला खान-पान अब और महंगा होने जा रहा है। सेंट्रल रेलवे ने 1 जून 2026 से खान-पान की विभिन्न वस्तुओं की दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह बढ़ोतरी तेल और गैस की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे के कारण की गई है।

इन चीजों के बढ़े दाम
नई दरों के मुताबिक, सबसे लोकप्रिय स्नैक वड़ा पाव की कीमत में लगभग 54% की भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले 13 रुपये में मिलने वाला वड़ा पाव अब 20 रुपये में मिलेगा, जिसमें 50 ग्राम आलू वड़ा 15 रुपये और पाव 5 रुपये प्रति पीस तय किया गया है। इसके अलावा वेज समोसा, वेज पफ और साबूदाना वड़ा भी अब 20 रुपये प्रति पीस की दर से मिलेंगे। वहीं, पाव भाजी और वेज पिज्जा के शौकीनों को अब 50 रुपये प्रति पीस चुकाने होंगे।

कौन-कौन सी चीजें कितने में मिलेगी, पूरी लिस्ट?

क्रमांक खाद्य पदार्थ कीमत
1 आलू वड़ा 15 रुपये
2 रगड़ा/उसल प्लेट + 1 पाव 25 रुपये
3 वेज समोसा 20 रुपये
4 पाव 5 रुपये
5 वेज सैंडविच + सॉस 35 रुपये
6 वेज चीज सैंडविच + सॉस 45 रुपये
7 वेज पफ/पेटिस 20 रुपये
8 साबूदाना वड़ा 20 रुपये
9 ढोकला 25 रुपये
10 सभी प्रकार के लड्डू 20 रुपये
11 वेज फ्रेंकी 30 रुपये
12 वेज चीज फ्रेंकी 45 रुपये
13 सूखा भेल 25 रुपये
14 चटनी भेल 30 रुपये
15 पोहा नमकीन 20 रुपये
16 सादा डोसा + चटनी + सांभर 25 रुपये
17 मसाला डोसा + चटनी + सांभर 35 रुपये
18 प्याज डोसा/उत्तपम + चटनी/सांभर 30 रुपये
19 रवा डोसा/मसाला उत्तपम + चटनी + सांभर 35 रुपये
20 रवा इडली + चटनी + सांभर (2 नग) 35 रुपये
21 पाव भाजी (2 पाव) 50 रुपये
22 दही वड़ा (2 नग) 35 रुपये
23 वेज कटलेट (2 नग) + सॉस/चटनी 35 रुपये
24 छोले पूरी (5 पूरी + छोले) 40 रुपये
25 मेदु वड़ा + चटनी/सांभर (2 नग) 35 रुपये
26 इडली सांभर/चटनी (2 नग) 30 रुपये
27 चना दाल वड़ा + चटनी (2 नग) 35 रुपये
28 ब्रेड पकोड़ा 25 रुपये
29 प्याज के पकोड़े/मिली-जुली भजिया 25 रुपये
30 मूंग भजिया 30 रुपये
31 वेज Roll 30 रुपये
32 वेज पिज्जा 50 रुपये
33 टमाटर का सूप 20 रुपये

गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश
मूल्य वृद्धि को मंजूरी देने के साथ ही रेलवे ने सभी लाइसेंसधारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि दरों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुधार के रूप में दिखना चाहिए। इसके अलावा, नए टैरिफ लागू होने के 6 महीने बाद बिक्री का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर लाइसेंस शुल्क की समीक्षा होगी।

राहत की बात यह है कि कचौड़ी, गुलाब जामुन, ताजे जूस, मिसल पाव और वेज नूडल्स समेत 16 लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, जूस और सोडा उत्पादों के दाम भी पहले की तरह ही बने रहेंगे।

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, 2 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम, चांदी भी टूटी

मुंबई 
इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को सोने की कीमतों में 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और स्पॉट गोल्ड 4,406.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह दो महीने का सबसे निचला स्तर है। स्पॉट सिल्वर भी 1.7% टूटकर 73.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इसकी वजह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए हमले हैं, जिससे क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर अनिश्चितता और गहरा गई है।

अमेरिकी हमलों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर नए हमले किए हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बताया गया था। यह घटना तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए समझौता हो गया है।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की एक वजह डॉलर भी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है, जिससे डॉलर में मूल्यवान सोना अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो गया है। अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो प्लैटिनम: 0.5% गिरकर 1,909.15 डॉलर और पैलेडियम 0.7% कमजोर होकर 1,381.64 डॉलर पर आ गया।

फेड अधिकारियों के बयान से बढ़ी बेचैनी
फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक ने कहा कि केंद्रीय बैंक को फिलहाल कम अवधि के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ, ईरान संघर्ष और एआई से जुड़े निवेश से दबाव बढ़ रहा है, और जरूरत पड़ने पर दरों में बढ़ोतरी संभव है। वहीं, फेड के फिलिप जेफर्सन ने कहा कि महंगाई के जोखिमों को देखते हुए मौजूदा मौद्रिक नीति उपयुक्त है। बाजार अब आज देर शाम जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा का इंतजार कर रहा है, जो Fed की आगे की नीति दिशा का संकेत देगा।

गोल्ड की रेंज और अहम सपोर्ट
कमोडिटी एक्सपर्ट और एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फिलहाल 4,500–4,540 डॉलर के दायरे में सिमट रहा है। उन्होंने बताया गोल्ड के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 4,560–4,600 डॉलर है। इसके ऊपर सस्टेन होने पर तेजी आ सकती है और कीमतें 4,660–4,700 डॉलर तक जा सकती हैं। दूसरी ओर गोल्ड पर तत्काल सपोर्ट 4,500–4,460 डॉलर प्रति औंस है और इस स्तर के नीचे जाने पर गिरावट बढ़कर 4,400–4,350 डॉलर तक आ सकती है। 

Gift Nifty में भारी गिरावट से बढ़ी टेंशन, क्या कल शेयर बाजार में मचेगी बड़ी हलचल?

नई दिल्ली 
भारत का शेयर बाजार शुक्रवार 29 मई को भारी दबाव के साथ खुल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स करीब 2% टूटकर 23,580 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। गुरुवार को बकरीद के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक बाजारों में आई तेज हलचल का असर अब शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखाई देने की संभावना है।

दरअसल, हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों के आसपास तनाव काफी बढ़ गया है। कुवैत में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% गिरा, दक्षिण कोरिया का KOSPI 1% टूटा और जापान का निक्केई भी लाल निशान में बंद हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, भारतीय बाजार ने बुधवार को अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 142 अंक गिरकर 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली 7 अंक टूटकर 23,907 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि India VIX यानी बाजार का डर सूचकांक 6% गिरा, जिससे यह संकेत मिला कि अभी घबराहट पूरी तरह हावी नहीं हुई है। लेकिन अब ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद बाजार का मूड बदल सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,835–23,922 का स्तर बेहद अहम रहेगा। अगर बाजार इस दायरे के नीचे फिसलता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिकता है, तो आने वाले दिनों में 24,200–24,300 तक की तेजी भी संभव है।

अब निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल-ईस्ट (Middle East) के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेंगी। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।

PF का 100% पैसा अब UPI से निकाल सकेंगे? जानिए EPFO 3.0 के नए नियम

नई दिल्ली 
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO जल्द ही एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत PF निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाली है। अब तक PF का पैसा निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य सीधे UPI के जरिए अपने बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे न केवल पेपरवर्क कम होगा, बल्कि PF निकालने में लगने वाला समय भी काफी घट जाएगा। आइए इसके बारे में जरा विस्तार से समझते हैं।

सरकार और EPFO का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर न लगाने पड़ें। खास बात यह है कि इस सुविधा की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसे जल्द शुरू किया जा सकता है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट घोषित नहीं की गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर EPFO सदस्य अपने खाते से कितना पैसा निकाल पाएंगे? नई व्यवस्था के अनुसार सदस्य अपने कुल EPF बैलेंस का लगभग 50% से 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे। हालांकि, पूरा पैसा निकालने की अनुमति हर स्थिति में नहीं होगी। EPFO के नियमों के मुताबिक कम से कम 25% राशि खाते में बनी रहना जरूरी होगा, ताकि भविष्य के लिए एक सुरक्षा फंड बचा रहे, यानी अगर किसी सदस्य के खाते में 4 लाख रुपये हैं, तो वह अधिकतम करीब 3 लाख रुपये तक निकाल सकता है, जबकि कम से कम 1 लाख रुपये खाते में रहने होंगे।

इसके अलावा EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा भी बढ़ा दी है। पहले जहां केवल 1 लाख रुपये तक का क्लेम जल्दी सेटल होता था, अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने और बनाने जैसी जरूरतों के लिए सदस्य अब ज्यादा रकम कम समय में निकाल पाएंगे। कई मामलों में पैसा सिर्फ 3 दिनों के भीतर खाते में पहुंच सकता है।

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में बताया कि UPI आधारित PF निकासी सिस्टम का परीक्षण पूरा हो चुका है। नई सुविधा के तहत सदस्य अपने खाते में उपलब्ध निकासी योग्य राशि को देख पाएंगे और UPI PIN की मदद से तुरंत ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा, जिसके बाद सदस्य चाहे तो ऑनलाइन पेमेंट करें या ATM से कैश निकाल लें।

EPFO 3.0 का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को छोटे-छोटे खर्चों या आपातकालीन जरूरतों के लिए लंबे इंतजार का सामना नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में PF क्लेम प्रोसेस में कई बार हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन नई व्यवस्था इसे डिजिटल बैंकिंग जितना आसान बना सकती है।

देश में EPFO के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और यह बदलाव करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आ सकता है। खासकर युवाओं और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आने वाले समय में PF निकालना उतना ही आसान हो सकता है, जितना आज UPI से किसी को पैसे भेजना है।

Parle नाम पर बड़ा खेल! PM मोदी के ‘मेलोडी’ ट्विस्ट से इस छोटे शेयर ने कराया तगड़ा मुनाफा

 नई दिल्ली
शेयर बाजार में कब कौन सा शेयर गदर मचाने लगे भविष्यवाणी करना मुश्किल है. एक छोटी सी खबर भी किसी स्टॉक को रॉकेट बनाने के लिए काफी होती है. कुछ ऐसा ही हुआ एक 5 रुपये वाले छुटकू शेयर के साथ, जिसमें बीते कुछ दिनों से लगातार अपर सर्किट लग रहा है. हम बात कर रहे हैं पारले इंडस्ट्रीज के शेयर की, जो सिर्फ 5 दिन में ही 33% तक उछल गया है और निवेशकों ने मोटी रकम छाप डाली है। 

कंपनी का नाम भले ही Parle है, लेकिन इसका पारले-जी से कोई नाता नहीं है. बल्कि ये रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी है. लेकिन पारले नाम ने पीएम नरेंद्र मोदी के मेलोडी ट्विस्ट के बाद इस धराशायी शेयर में अचानक जान फूंक दी और इसने निवेशकों की बल्ले-बल्ले हो गई। 

PM ने ऐसा क्या किया, जो शेयर बना रॉकेट
यहां सबसे पहले बता दें कि बीते दिनों इटली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी (PM Narendra Modi) ने वहां की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को पारले कंपनी की टॉफी मेलोडी (Parle Melody) का पैकेट गिफ्ट किया था. बस पीएम मोदी का ये मेलोडी ट्विस्ट इस पारले इंडस्ट्रीज कंपनी के शेयर में जान फूंकने वाला साबित हुआ। 

सोशल मीडिया पर Italy PM द्वारा शेयर किया गया वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हो गया और ‘मेलोडी’ ट्रेंड चल पड़ा. इसके बाद निवेशकों में पारले नाम के इस शेयर को खरीदने की होड़ मच गई और शेयर रॉकेट की रफ्तार से लगातार भागते हुए अपर सर्किट हिट (Parle Industries Share Upper Circuit) कर रहा है. जबकि दूसरी ओर मेलोडी टॉफी को बनाने वाली पारले प्रोडक्ट शेयर बाजार में लिस्ट ही नहीं है। 

सालभर से सोया था शेयर, अब तूफानी तेजी
पीएम मोदी (PM Modi) ने मेलोनी को मेलोडी गिफ्ट क्या की, इस सालभार से सोए पड़े शेयर ने तूफानी रफ्तार पकड़ ली. Parle Share की परफॉर्मेंस पर नजर डालें, तो ये Parle Stock बीते एक साल से लगातार टूटता जा रहा था और 70 फीसदी के आसपास फिसल गया था. लेकिन, मेलोडी ट्रेंड की शुरुआत होते ही, इस शेयर में जान आ गई और बीते पांच दिन से ये गदर मचा रहा है। 

बीते 19 मई को Parle Industries Share की कीमत महज 5 रुपये थी, लेकिन 20 मई को इटली की पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी के मेलोडी गिफ्ट पर थैंक्यू बोलने हुए एक वीडियो पोस्ट किया और इस स्टॉक में अपर सर्किट लग गया, जिसका सिलसिला अब तक जारी है. दनादन अपर सर्किट के साथ पांच कारोबारी दिनों में ये 33 फीसदी चढ़ गया है और इसका दाम 6.67 रुपये हो गया है. शेयर में तेजी के चलते इस कंपनी का मार्केट कैपिटल भी बढ़कर 32.58 करोड़ रुपये हो गया। 

जब Melody लॉन्च, तभी बनी ये कंपनी
पारले इंडस्ट्रीज के काम पर नजर डालें, तो इस कंपनी की स्थापना भी उसी 80 के दशक में हुई थी, जबकि पारले प्रोडक्ट ने मेलोडी टॉफी को लॉन्च किया था. Parle Industries इंफ्रा और रियल एस्टेट डेवलपमेंट सेक्टर की कंपनी है. जबकि Parle Products एक अलग प्राइवेट FMCG कंपनी है, जो Parle-G, Melody, Monaco, Hide & Seek जैसे ब्रांड बनाती है। 

₹45 करोड़ पेमेंट केस में फंसा HDFC Bank! जांच की खबर आते ही शेयर में बड़ी गिरावट

मुंबई

भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, HDFC बैंक ने पेमेंट संबंधित गड़बड़ी की आशंकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जरा विस्तार से इस मामले की गहराई को समझते हैं।

 रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया।

बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया।

इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई।

बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, इस मामले बैंक ने खारिज कर दिया है।

मामले पर बैंक का आधिकारिक बयान
HDFC बैंक ने बुधवार को ₹45 करोड़ पेमेंट मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैंक ने कहा कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जो सभी प्रक्रियाओं को तय नियमों के तहत संचालित करते हैं। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, “हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संभाला जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।”

बैंक की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने ₹45 करोड़ के भुगतान की औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू की है।

शेयर परफॉर्मेंस
हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ।

इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

ईरान युद्ध का Air India पर बड़ा असर, एयरलाइन को अचानक लेना पड़ा बड़ा फैसला

 नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran War) के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने से गहराए तेल संकट का बुरा असर तमाम देशों में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की किल्लत देखने को मिली. हालांकि, मोदी सरकार ने तत्काल उठाए गए बड़े कदमों के जरिए इस संकट को कम करने का प्रयास किया।  

ईरान युद्ध और ईंधन की ऊंची कीमत का असर भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी एअर इंडिया (Air India) पर भी पड़ा है और उसे बड़ा फैसला लेना पड़ा है. इसके तहत एयरलाइंस अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में 22 फीसदी कटौती करेगी।

जून-जुलाई में पड़ेगा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम में आए उछाल ने जेट फ्यूल महंगा किया है और इसने एयरलाइन कंपनियों का गणित बिगाड़ा है. इसकी वजह से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए एअर इंडिया ने अचानक जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती करने का फैसला किया है।

Air India ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जबकि वेस्ट एशिया टेंशन के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावट जारी है और एविएशन सेक्टर को लागत में भारी बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है. जून-जुलाई के लिए कंपनी ने फैसला ले लिया है, जबकि अगस्त के लिए अभी बाकी है।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर ₹1 लाख प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है. वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹26,800 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है. ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।

उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है, जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं. 22 प्रतिशत की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।

कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है. विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है. मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।

प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा. इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

    वैकल्पिक उड़ान: यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी.
    तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी.
    पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं.

एअर इंडिया ने दिया ये बयान
एअर इंडिया की ओर से पुष्टि करते हुए एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा है कि जेट फ्यूल प्राइस में उछाल के परिचालन पर दबाव जारी है, इसे देखते हुए उड़ानों में कटौती का कदम उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थितियों के स्थिर होते ही उड़ानों की संख्या बहाल की जा सकती है. इससे घरेलू उड़ानों में करीब 10% तक कटौती हो सकती है।

न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo भी जून और अगस्त के बीच घरेलू उड़ानों में 7% तक कटौती कर सकती है. हालांकि, इंडिगो ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।  

ऊंचे रह सकते हैं टिकट के दाम
Iran War के चलते बीते कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और ये एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में से एक है, जो आमतौर पर परिचालन लागत का लगभग एक चौथाई होता है।

इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर खर्च में इजाफा हुआ है और वैश्विक स्तर पर एयरलाइनों को टिकटों की कीमतें बढ़ाने, घाटे वाले रूट्स को बंद करने और उड़ानों की संख्या कम करने के लिए मजबूर हो पड़ा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Jet Fuel की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू हवाई किराया भी ऊंचा रह सकता है. इसके पीछे वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे एयरलाइंस भी प्रभावित होती हैं।

मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एअर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।

Gold-Silver Price Crash: अचानक धड़ाम हुए चांदी के दाम, सोना भी हुआ सस्ता… जानिए आज का नया रेट

नई दिल्ली
सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया।

सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है।

MCX पर सोना-चांदी में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया।

चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है।

अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।    

दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल?
एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली।

सोने-चांदी में गिरावट की वजह
सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।

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