तमिलनाडु में TVK सरकार पर विपक्ष का हमला, हॉर्स-ट्रेडिंग और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप

चेन्नई
तमिलनाडु में विपक्षी दलों DMK, AIADMK और बीजेपी ने विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार पर विधायकों की खरीद-फरोख्त, पुलिस मशीनरी के दुरुपयोग और कैबिनेट बैठकों में अधिकृत व्यक्तियों के दखल देने का आरोप लगाया है. इस संबंध में विपक्षी नेताओं ने शनिवार को चेन्नई स्थित राजभवन में  राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से अलग-अलग मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा है.

DMK की ओर से संगठन महासचिव आरएस भारती के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात की. उन्होंने ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार के निर्देश पर पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग कर विधायकों को तोड़ने, धमकाने और प्रलोभन देने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ऐसी अप्रिय स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई.

‘दो बाहरी लोग चला रहे हैं सरकार’
भारती ने कहा, ‘जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी नाम के दो व्यक्ति, जो सरकारी पद पर नहीं हैं, मंत्रियों से भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं. वो सभी उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं.’

DMK ने तिरुचेन्दूर विधायक अनीता आर राधाकृष्णन को निशाना बनाकर प्रताड़ित कर कानूनी दबाव और आर्थिक प्रलोभन देने का भी आरोप लगाया. पार्टी ने राज्यपाल से संवैधानिक हस्तक्षेप, स्वतंत्र जांच और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा की अपील की.

DMK ने की थी FIR की मांग
उन्होंने आगे दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में विधायक की गिरफ्तारी सत्ता के राजनीतिक दुरुपयोग का एक उदाहरण थी.

इससे पहले DMK ने विधायकों को तोड़ने की कथित कोशिशों को लेकर TVK प्रमुख विजय के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए गवर्नर अर्लेकर से संपर्क किया था.

उनकी ये शिकायत MDMK महासचिव वाइको के सार्वजनिक बयानों पर काफी हद तक आधारित थी, जिन्होंने दावा किया था कि विजय ने व्यक्तिगत रूप से DMK के दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी. शिकायत के अनुसार, वाइको ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विधायकों को भरोसा दिलाया था कि अगर वो अपनी सीटें छोड़ते हैं तो उन्हें होने वाले उपचुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी.

देश छोड़ कर भागने जैसी है घबराहट की स्थिति
AIADMK ने भी हॉर्स-ट्रेडिंग, विधायकों से जबरन इस्तीफा दिलाने और निजी व्यक्तियों के कैबिनेट बैठकों में शामिल होने का मुद्दा उठाया है. पार्टी के राज्यसभा सांसद आई.एस. इनबादुरै और विधायक एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति ने भी राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की.

इनबदुरई ने कहा कि तमिलनाडु में इस वक्त भय का माहौल है और खुलेआम हॉर्स-ट्रेडिंग चल रही है. अन्नाद्रमुक ने राज्यपाल से संविधान के अनुच्छेद 167 का इस्तेमाल कर सरकार से स्पष्टीकरण मांगने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यदि कुछ गलत पाया जाता है तो राज्यपाल भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं.

BJP ने भी सौंपा ज्ञापन
वहीं, डीएमके और एआईएडीएमके के अलावा BJP प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है. बीजेपी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए हाल ही में कैबिनेट की बैठक में हिस्सा लिया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की. पार्टी ने एक नाबालिग लड़की के साथ गलत व्यवहार के आरोपों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री पी विश्वनाथन की जांच की भी मांग की.

इन सभी गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ टीवीके सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है. सरकार ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जॉन आरोग्यासामी और विष्णु रेड्डी को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है. इस नियुक्ति के बाद वो अब निजी व्यक्ति नहीं रह गए हैं, इसलिए कैबिनेट की बैठकों और सरकारी कार्यवाही में उनकी भागीदारी पूरी तरह से वैध है.

कांग्रेस में अनुशासन पर सख्ती: पार्टी की मुसीबत बढ़ाने वाले नेताओं की बनेगी लिस्ट, नहीं सुधरे तो होंगे बाहर

भोपाल 
मध्य प्रदेश कांग्रेस में अक्सर अपने ही नेताओं के कारण पार्टी की मुसीबतें बढ़ती रहती हैं। कई नेता सीधे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तक को निशाने पर ले लेते हैं।

अब पार्टी लाइन से हटकर अक्सर विवादित बयान देने वाले कांग्रेसियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। एमपी कांग्रेस अब ऐसे विवादित नेताओं की लिस्ट तैयार करने जा रही है जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं।

जिला अध्यक्ष बनाएंगे विवादित बयानवीरों की लिस्ट
एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी फोरम पर सीनियर लीडर्स ने कई बार यह विषय उठाया है कि कई कार्यकर्ता ऐसे हैं जो अक्सर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते हैं। ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए अब पार्टी कड़ा फैसला लेने जा रही है।

सोशल मीडिया पर भी पार्टी के खिलाफ लिखने वाले होंगे चिन्हित कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने सभी जिला अध्यक्षों को भेजे पत्र में लिखा है कि पार्टी को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और फैसलों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं। इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।

चिन्हित करें नोटिस दें न मानें तो एक्शन लें पत्र में कहा गया है कि प्रदेश प्रभारी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तय किया है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पहले नोटिस जारी करें।

यदि इसके बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं होता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें और इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजें।

जिले में कार्रवाई नहीं हो सकती तो सबूतों के साथ प्रदेश को रिपोर्ट भेजें पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन नेताओं के खिलाफ जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं है, उनके मामलों की पूरी जानकारी और साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए, ताकि उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

संगठन ने जिला इकाइयों से इस काम को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

MP कांग्रेस में बगावत! राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी-जीतू पटवारी पर साधा निशाना, इस्तीफा देकर मचाई हलचल

इंदौर
 मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने कहा कि पार्टी में अब कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय सवाल पूछने वालों को नोटिस देकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

राकेश सिंह यादव ने कहा कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से कांग्रेस में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करते रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग पदों पर संगठन की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन पहली बार उन्हें ऐसा माहौल देखने को मिला जहां अपनी बात रखने पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा की जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने के योग्य नहीं हैं और उनके नेतृत्व में संगठन लगातार कमजोर हुआ है।

टीवी डिबेट में जाने पर मिला नोटिस
यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें नेताओं को टीवी डिबेट में शामिल नहीं होने और मीडिया के सामने बयान देने से मना किया गया था। साथ ही तीन दिन के मौन सत्याग्रह का निर्देश भी दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी ने मुख्यमंत्री और वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था तब उसके समर्थन में क्या सबूत पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से सिर्फ इतना पूछा था कि जिन आरोपों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई उनके दस्तावेज कहां हैं। लेकिन जवाब देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया कि उन्होंने टीवी डिबेट में हिस्सा क्यों लिया। यादव का कहना है कि अपनी बात रखना और सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है और कांग्रेस के संविधान में मीडिया के बहिष्कार जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

वीर भूमि न्यास मामले में उठाए सवाल
राकेश सिंह यादव ने कहा कि वीर भूमि न्यास को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह सरकारी ट्रस्ट है और सरकार की जमीन एक विभाग से दूसरे विभाग को दी गई है। कांग्रेस सरकारों के समय भी कई अस्पतालों, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक ट्रस्टों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की गई थी। ऐसे मामलों को भ्रष्टाचार या घोटाला बताना उचित नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना दस्तावेजों के इतने बड़े आरोप लगाने से पार्टी खुद सवालों के घेरे में आ गई है। यदि वास्तव में सबूत होते तो उन्हें दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक किया जाता।

जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर लगाए गंभीर आरोप
राकेश सिंह यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर संगठन में मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान के दौरान पैसों के आधार पर नियुक्तियां की गईं जिससे संगठन को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए भी जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी जिम्मेदार हैं। यादव ने हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में टिकट बेचे और जीतू पटवारी ने उनका बचाव किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चौधरी एक डिफेंडर वाहन लेकर आए और उसके बदले कई पदों का बंटवारा किया गया।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में गलत लोगों को संरक्षण मिल रहा है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी वजह से कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं की भी बात नहीं सुनी जा रही है।

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जताई चिंता
यादव ने कहा कि यदि संगठन की कार्यशैली में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है। प्रदेश की 16 नगर निगमों में पार्टी किसी भी महापौर सीट पर मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रही है।

बीजेपी में जाने के सवाल पर क्या बोले?
बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर राकेश सिंह यादव ने साफ कहा कि फिलहाल उनकी किसी भी दल से कोई बातचीत नहीं हुई है। भविष्य में क्या होगा इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यादव ने यह भी कहा कि यदि राजनीति का उद्देश्य जनता के बीच काम करना है तो वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह न दलाली कर सकते हैं और न ही संगठन में पैसों के लेन-देन की राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

 

विजय सरकार की कैबिनेट बैठक पर विवाद, भाजपा ने राज्यपाल से की शिकायत; बाहरी लोगों की मौजूदगी पर उठाए सवाल

चेन्नई

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार एक नए राजनीतिक विवाद में घिर गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में दो अनाधिकृत व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जो सीधे तौर पर संवैधानिक ‘गोपनीयता की शपथ’ का उल्लंघन है। इस मामले को लेकर प्रदेश बीजेपी ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने विशेष रूप से जॉन आरोकियासामी और विष्णु रेड्डी का नाम लेते हुए दावा किया है कि ये दोनों अनाधिकृत व्यक्ति कैबिनेट की बैठक में मौजूद थे। नागेंद्रन का तर्क है कि ये व्यक्ति मंत्री पद से नहीं जुड़े हैं, इसलिए बैठक में उनकी उपस्थिति प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है।

इस मुद्दे पर नागेंद्रन ने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति और तमिलनाडु प्रभारी अरविंद मेनन के साथ राज्यपाल अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। लोक भवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ज्ञापन में कहा गया है कि मंत्रियों के अलावा दो निजी व्यक्तियों का बैठक में शामिल होना एक “अवैध कृत्य” है और यह भविष्य में दोबारा नहीं होना चाहिए।

सत्ताधारी TVK का स्पष्टीकरण
विपक्षी दल (BJP और DMK) लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता के केंद्र में कुछ खास लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है। हालांकि, सत्तारूढ़ टीवीके ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आरोकियासामी और रेड्डी अब निजी व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है।

बीजेपी द्वारा लगाए गए अन्य गंभीर आरोप
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। बीजेपी नेता ने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन पर बच्चियों के प्रति “अनुचित व्यवहार” का गंभीर आरोप उठाया है। नागेंद्रन ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि टीवीके के सत्ता संभालने के मात्र 54 दिनों के भीतर आपराधिक गतिविधियों में भारी वृद्धि हुई है। इसमें 151 यौन उत्पीड़न, 85 से अधिक हत्याएं और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं शामिल हैं।

राज्यपाल के अधिकारों का बचाव
एक सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता नागेंद्रन ने मदुरै में स्थानीय अधिकारियों के साथ राज्यपाल अर्लेकर द्वारा की गई समीक्षा बैठक का भी बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यपाल के पास सरकारी कार्यक्रमों के निरीक्षण और पारदर्शिता की मांग करने का पूरा अधिकार है।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बंगाल TMC चीफ समेत सभी पदों से दिया इस्तीफा

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शुरू हुए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बुरे दिन खत्म होते नहीं नजर आ रहे. पार्टी विधायक और सांसदों की बगावत के बाद अब बागी गुट ने कोलकाता में पार्टी के हेड ऑफिस पर भी कब्जा जमा लिया. अभी पार्टी दफ्तर पर कब्जे की रार मची ही है, इस बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है. बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर बताया कि वह 3 जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं. चंद्रिमा ने तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया. इसके अलावा, राज्य की पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की भूमिका से भी इस्तीफा दे दिया है। 

टीएमसी में मच रही उठापठक के बीच ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा का इस तरह अचानक जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। 

 जानकारी के मुताबिक, टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस पत्र में भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सांगठनिक पदों से मुक्त हो रही हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी ‘साइनिंग अथॉरिटी’ के पद से भी तत्काल प्रभाव से कदम पीछे खींच लिए हैं। 

ममता के लिए ये कितना बड़ा झटका?
चंद्रिमा को ममता का करीबी माना जाता है। वे सरकार से लेकर संगठन तक में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। पार्टी में जारी हालिया उथल-पुथल के बीच भी वे ममता के साथ खड़ी नजर आई थीं। हालांकि, उनके बेटे सौरव बसु को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक में देखा गया था। तबसे ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने ममता से दूरी बना ली है।    

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रही हैं और सरकार से लेक संगठन तक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 

सपा की 3 महिला सांसदों और अपने ही विधायकों के बीच बढ़ी तकरार, जानिए क्या है पूरा मामला

लखनऊ 

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी एक दशक से सत्ता का वनवास झेल रही है. अखिलेश यादव सूबे की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन पार्टी में अंदरूनी कलह और गुटबाजी कहीं उनकी उम्मीदों पर पानी न फेर दे. विधानसभा चुनावों से पहले जिस तरह सपा में सियासी रार छिड़ी हुई है, उसके चलते ही अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर को विधानसभा के मुख्य सचेतक पद से हटाना पड़ा है। 

मुरादाबाद की लोकसभा सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच छिड़ी सियासी अदावत के चलते ही अखिलेश यादव को एक्शन लेना पड़ा है. सपा के सांसद और विधायक के बीच पहला मामला नहीं बल्कि यूपी में तीन सपा के महिला सांसदों की अपने ही इलाके में अपनी ही पार्टी के विधायक के साथ छत्तीस के आंकड़े हैं। 

यूपी में चुनावी सरगर्मी के बीच अखिलेश यादव एक तरफ जहां सपा ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दम पर सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही है, लेकिन  जमीनी स्तर पर सपा सांसद और विधायकों की आपसी महत्वाकांक्षाएं और गुटबाजी पार्टी के बने-बनाए खेल को बिगाड़ सकती हैं। 

प्रिया सरोज और रागिनी सोनकर में शह-मात
जौनपुर की मछलीशहर सीट पर सपा की दो युवा और तेजतर्रार महिला नेताओं के बीच सियासी रार छिड़ी हुई है. मछली शहर की सपा सांसद प्रिया सरोज और स्थानीय विधायक डॉ. रागिनी सोनकर के बीच सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. ये दोनों महिला नेता सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करीबी मानी जाती हैं, लेकिन एक ही क्षेत्र से होने के चलते दोनों के बीच वर्चस्व की जंग को हवा दे दी है। 

प्रिया सरोज सपा के दिग्गज नेता तुफानी सरोज की बेटी हैं और 2024 में मछली शहर सीट से सांसद चुनी गई है. रागिनी सोनकर 2022 में मछलीशहर सीट से विधायक चुनी गई और 2024 में वो चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन पार्टी ने प्रिया सरोज को टिकट दे दिया था. इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते जगजाहिर हैं और एक दूसरे पर निशाना साधने का मौका नहीं गंवाती हैं. इतना ही नहीं एक दूसरे के साथ न मंच शेयर करती हैं और न ही अपने-अपने कार्यक्रम में एक दूसरे को बुलाती हैं। 

रागिनि सोनकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मौका मिला या पार्टी ने चाहा, तो वह भविष्य में मछलीशहर सीट से ही लोकसभा चुनाव लड़ना पसंद करेंगी. इस पर प्रिया सरोज ने पलटवार करते हुए कहा है कि मछलीशहर उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि है और वह इसे किसी के लिए नहीं छोड़ेंगी। 

यह लड़ाई सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात है.माना जा रहा है कि प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज चाहते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मछलीशहर सदर सीट से उनके बेटे धनंजय सरोज चुनाव लड़ें. रागिनी सोनकर इस बात को बाखूबी समझ रही हैं, जिसके चलते ही लोकसभा की दावेदारी ठोककर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रही हैं। 

रुचि वीरा और कमाल अख्तर की अदावत
मुरादाबाद की मौजूदा सपा सांसद रुचि वीरा और जिले की कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमल अख्तर के बीच 2024 से ही सियासी अदावत छिड़ी हुई है. रुचि वीरा को सपा नेता आजम खान का करीबी माना जाता है. आजम खान और कमाल अख्तर की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. इसके चलते रुचि वीरा और कमाल अख्तर की भी नहीं पटती है. कमाल अख्तर न ही अपने कार्यक्रम में रुचि वीरा को बुलाते हैं और न ही रुचि वीरा अपने कार्यक्रम में कमाल अख्तर को बुलाती हैं। 

25 जून को मुरादाबाद में कमाल अख्तर ने पीडीए चौपाल का कार्यक्रम रखा था, जिसमें रुचि वीरा को नहीं बुलाया गया. यही नहीं कार्यक्रम में लगे बैनर में रुचि वीरा तस्वीर भी नहीं थी, जिसको लेकर रुचि वीरा ने सियासी मुद्दा बना दिया. यह बात अखिलेश यादव तक पहुंची तो उन्होंने दोनों ही नेताओं को लखनऊ बुलाया. अखिलेश की मौजूदगी में दोनों ही नेताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई और एक दूसरे पर गुटबाजी का आरोप लगाया। 

आजम खान की करीबी होने के चलते अखिलेश यादव ने रुचि वीरा के साथ देते हुए कमाल अख्तर को विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया. कमल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन रुचि वीरा के साथ उनकी सियासी अदावत अभी भी जारी है. इसके पीछे मुरादाबाद की सियासत पर अपना-अपना अधिपत्य जमाने की है, जिसके चलते पार्टी दो गुटों में बंट गई है। 

बुंदेलखंड में सपा सांसद और विधायक में कलह
बुंदेलखंड में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर तीन सीटें जीतने वाली सपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अंदरूनी कलह में उलझती दिख रही है. गुटबाजी की चलते ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 मई को बांदा की जिला कार्यकारिणी को भंग दिया. अब बांदा-चित्रकूट की सपा सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू से सपा के विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच पिछले हफ्ते जमकर कहासुनी एक कार्यक्रम में हुई। 

सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधाक विशंबर सिंह यादव के बीच  ‘तू-तू मैं-मैं’ का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. वायरल वीडियो में सांसद कृष्णा पटेल विधायक पर असहयोग और बेइज्जती करने का आरोप लगाती दिख रही है. इसके जवाब में विधायक विशंभर सिंह यादव उन्हें तमीज में रहने की नसीहत देते नजर आ. सांसद कृष्णा पटेल ने मंच से ही यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत वह पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से कर चुकी हैं। 

कृष्णा पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद समेत पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता शामिल हुए. सांसद के पति ने पार्टी के ही लोगों पर उन्हें बदनाम करने व अवैध खनन में संलिप्त होने के मिथ्या आरोप लगाने की बात कही थी. तब से सांसद-विधायक के बीच जंग जारी है. चित्रकूट में जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह पटेल और सदर विधायक अनिल प्रधान के बीच अंदरखाने मनमुटाव है. पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज पटेल का गुट भी अलग है. इसके चलते सियासी वर्चस्व की जंग चल रही है। 
 

3 घंटे की बैठक, नई रणनीति तैयार! UP दौरे से पहले अमित शाह संग नितिन नवीन का मंथन

 नई दिल्ली

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नवीन की औपचारिक रूप से ताजपोशी 20 जनवरी के हुई थी. अब छह महीने के बाद टीम नवीन की स्क्रिप्ट तैयार हो गई है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष के साथ गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की तीन घंटे तक मैराथन बैठक चली, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ‘टीम नवीन’ का ऐलान हो सकता है? 

नितिन नवीन ने गुरुवार को अमित शाह से मुलाकात की. अमित शाह के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली बैठक में बीएल संतोष भी शामिल थे. हालांकि, इस मुलाकात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन मुद्दों पर चर्चा हुई. खासकर बीजेपी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम के गठन को लेकर मंथन किया गया। 

अमित शाह के आवास पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच हुई बैठक को सिर्फ संगठनात्मक समीक्षा तक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बीजेपी के भविष्य के राजनीतिक रोडमैप, नई नेतृत्व टीम और आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। 

नितिन नवीन की टीम गठन की स्क्रिप्ट तैयार
बीजेपी अध्यक्ष बने हुए नितिन नवीन को छह महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक उनकी टीम का ऐलान नहीं हुआ है. गुरुवार शाम अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच हुई बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन को फाइनल रूप देने पर मंथन किया गया. हालांकि, बैठक को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इस दौरान बीजेपी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम के गठन का विषय ही अहम था। 

सूत्रों की माने तो नितिन नवीन के नेतृत्व वाली बीजेपी की नई केंद्रीय टीम में ‘वरिष्ठ और युवा नेताओं’ को जगह मिलने की संभावना है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार में मंत्री का पद संभाल रहे कई नेताओं को भी पार्टी संगठन में शामिल किया जा सकता है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाने की प्लानिंग है। 

जानिए कैसी होगी नितिन नवीन की नई टीम
नितिन नवीन, अमित शाह और बीएल संतोष के साथ हुई बैठक से संकेत साफ हैं कि पार्टी अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच नया संतुलन बनाकर संगठन को अगले चुनावी दौर के लिए तैयार करना चाहती है. इसके अलावा महिला आरक्षण कानून के पास होने के बाद माना जा रहा है कि बीजेपी संगठन में आधी आबादी को अहमियत दे सकती है. यूपी की में बनी टीम पंकज में 13 महिलाओं को संगठन में शामिल किया गया है, जिसके चलते माना जा रहा है कि राष्ट्रीय टीम में महिलाओं को खास तवज्जे दी जाएगी। 

नितिन नवीन की उम्र 46 साल है, जो युवा पीढ़ी के नेता हैं. ऐसे में उनके नेतृत्व में एक युवा टीम गठन की बात कही जा रही है, जिसमें कुछ अनुभवी पार्टी नेताओं को उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी दक्षिणी राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहां उसका चुनावी प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है.ऐसे में इन राज्यों के नेताओं को कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां टीम नवीन में दी जा सकती हैं। 

बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों को उचित महत्व मिल सकता है. उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके चलते इन दोनों ही राज्यों की सियासत अहमियत संगठन में मिल सकती है। 

बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव की आहट
भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है. केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरे कार्यकाल के बीच पार्टी नेतृत्व अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है. इसी रणनीति के तहत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की लंबी बैठक को महज औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि संगठन के पुनर्गठन की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। 

माना जा रहा है कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव, 2029 की राजनीतिक तैयारी और संगठन में नई ऊर्जा भरने के लिए पार्टी जल्द ही केंद्रीय पदाधिकारियों की नई टीम का ऐलान कर सकती है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा चेहरों की सक्रिय भूमिका का संतुलित मिश्रण देखने को मिल सकता है.सूत्रों ने बताया कि बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी टीम में शामिल किए जाने वाले नेताओं के नामों की घोषणा जल्द कर दी जाएगी। 

संगठन में भेजे जाएंगे मोदी कैबिनेट से कई नेता
बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्षों, राष्ट्रीय महासचिवों, सचिवों और पार्टी मोर्चों के प्रमुखों की नई टीम को अंतिम रूप देने की कवायद लगातार हो रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार बीजेपी अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान जल्द कर देगी। 

मोदी कैबिनेट से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा हो चुका है और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया है, जिसके चलते उनकी भी कैबिनेट से छुट्टी तय है. पंकज चौधरी यूपी और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. इस तरह केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कुछ और सदस्यों को हटाया कर संगठन में भेजा जा सकता है.  केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर, 2026 को पूरा हो रहा है। 

मानसून सत्र से पहले NDA का मिशन दो-तिहाई बहुमत, शरद पवार के 8 सांसदों पर टिकी नजर

 नई दिल्ली

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है और इससे पहले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दो तिहाई बहुमत जुटाने की जुगत में जुटा हुआ है. पहले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के पाला बदल और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल होने के बाद अब एनडीए की नजर शिवसेना (यूबीटी) की गठबंधन सहयोगी शरद पवार की पार्टी के सांसदों पर है। 

सूत्रों की मानें तो एनसीपी (शरद पवार) के लोकसभा में आठ सांसद एनडीए के संपर्क में हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है कि इस सांसदों का ठिकाना कौन सी पार्टी होगी. एनडीए की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन सांसदों को लेने के लिए तैयार नहीं है. बीजेपी नेतृत्व ने इनमें से किसी को मंत्री पद देने के कयास भी खारिज कर दिए हैं। 

शरद पवार की पार्टी के सांसद भविष्य में सुनेत्रा परिवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में जा सकते हैं. एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाएं फिलहाल नकारी जा रही हैं. एनसीपी (शरद पवार) के सांसदों की बगावत के पीछे पार्टी के कांग्रेस में विलय के कयासों को वजह बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में विलय की अटकलों से शरद पवार की पार्टी के सांसदों में बेचैनी है। 

एनसीपी शरद गुट में बेचैनी 
दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों से भी इन सांसदों में बेचैनी की बात कही जा रही है. वे 2029 के लोक सभा चुनाव में अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं. इनमें से कई का मानना है कि कांग्रेस में विलय से शायद उनकी संसद में वापसी की संभावना प्रबल न रहे. इनमें से एक सांसद ने बताया कि वैसे भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव तीन साल दूर हैं. ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से दूरी बनाना और उनका विरोध करना उनके संसदीय क्षेत्रों में उन्हें कठिनाई पैदा कर रहा है। 
 
परिसीमन बिल पर सरकार का देंगे साथ?
सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर एनसीपी शरद पवार के इन सांसदों के समर्थन के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वे संविधान संशोधन विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं या फिर मतदान के दौरान अनुपस्थित रह कर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कम करने में सरकार की मदद कर सकते हैं. एक नेता के अनुसार महाराष्ट्र में शरद पवार ने मुख्यमंत्री रहते हुए ही सबसे पहले महिला आरक्षण का कदम उठाया गया था. स्थानीय स्वशासन निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. ऐसे में सैद्धांतिक तौर पर एनसीपी शरद पवार को इस बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए। 
 
शरद गुट में टूट की संभावना नहीं 
यह कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों की ही तरह एनसीपी शरद पवार के सांसदों के टूट कर विलय की संभावना फिलहाल नहीं है. बीजेपी नेतृत्व भी इसके पक्ष में नहीं बताया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व शरद पवार और सुप्रिया सुले से दूरी बना कर रखना चाहता है. ऐसे में उन अटकलों को खारिज कर दिया गया है कि एनडीए को समर्थन के बदले एनसीपी शरद पवार के नेताओं को केंद्र में मंत्री पद दिया जा सकता है। 

फिलहाल अजित गुट के साथ विलय नहीं 
दूसरी ओर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावना को फिलहाल नकार दिया गया है. एनसीपी अजित पवार के नेताओं के मुताबिक अजित पवार के निधन के बाद से ही इस बारे में बात आगे नहीं बढ़ी है. कांग्रेस में एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों ने इन संभावनाओं पर फिलहाल पूरी तरह से रोक भी लगा दी है. हालांकि, आगे चल कर एनसीपी शरद पवार के लोक सभा सांसदों के एनसीपी अजित पवार में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। 

शरद पवार की पार्टी के सांसद 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने टिकट को लेकर सशंकित हैं. एनसीपी (एसपी) के कुछ सांसदों का यह भी कहना है कि केंद्र में एनडीए की सरकार है ही, महाराष्ट्र में भी एनडीए ही सत्ता में है. ऐसे में उनको अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराने, विकास कार्य कराने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

इन सबके बीच चर्चा इस बात की है कि शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी के सांसदों का समर्थन किस तरह से एनडीए ले सकता है, इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इस पूरी कवायद के पीछे महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशें हैं। 

TMC चुनाव चिह्न पर संकट? आज चुनाव आयोग पहुंचेगा ऋतब्रत गुट, ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें!

कोलकत्ता 

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घासफूल’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। 

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनका प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा और यह बताएगा कि असली तृणमूल कांग्रेस उनका गुट है. उन्होंने बताया कि 22 जून को विधानसभा के विशेष सत्र के बाद आयोग को पूरी घटना की जानकारी और सभी जरूरी दस्तावेज भेज दिए गए थे. अब आयोग ने उनकी बात सुनने के लिए समय दिया है। 

यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच संगठन और राजनीतिक पहचान को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं। 

58 विधायकों के साथ टीएमसी के बागी हैं ऋतब्रत बनर्जी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद TMC में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 80 में से कमोबेश 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना ली और ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आ गए. इसके बाद बागी गुट ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना और 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी ऐलान किया। 

तब से दोनों गुट पार्टी संगठन, विधायी दल और चुनावी पहचान पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं. इसी विवाद के चलते चुनाव आयोग की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है. माना जा रहा है कि आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज और दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा। 

ऋतब्रत बनर्जी का टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा
इस सप्ताह की शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि उनके गुट को चुनाव चिह्न पर अलग से दावा करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि असली तृणमूल कांग्रेस वही हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के ज्यादातर निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं। 
अब सभी की नजर चुनाव आयोग की इस बैठक पर टिकी है. अगर विवाद गहराता है तो आयोग को यह तय करना पड़ सकता है कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घासफूल’ किस गुट के पास रहेगा. ऐसे में आज की बैठक पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 

दिग्विजय सिंह पर कांग्रेस महासचिव का बड़ा हमला, बोलीं- पुत्र मोह में संगठन को पहुंचा रहे नुकसान

भोपाल
उज्जैन के वीर भारत न्यास को कथित तौर पर एक रुपए में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन आवंटित किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस का अंदरूनी विवाद और गहरा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब संगठन के भीतर खुली नाराजगी में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक मंच से बयान देकर पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी तो उसे संगठन के भीतर उठाया जाना चाहिए था, न कि मीडिया के सामने।

पीसी में पटवारी के दावों को खारिज करने पर कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तक कर डाली।

निधि चतुर्वेदी पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी हैं। उन्होंने अपनी लिखा दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार…उन्होंने लिखा कि उज्जैन भूमि विवाद में कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें कटघरे में खड़ा करना किसी भी वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता।

उन्होंने कहा कि यदि जीतू पटवारी से कोई गलती हुई थी तो दिग्विजय सिंह उन्हें फोन पर, आमने-सामने या पार्टी के आंतरिक मंचों पर अपनी बात बता सकते थे। इसके बजाय उज्जैन जाकर मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना पार्टी अनुशासन के खिलाफ है।

मंत्री सारंग बोले- अगर कांग्रेसी ही आरोप लगा रहे तो पार्टी को ध्यान देना चाहिए
कांग्रेस में मची अंर्तकलह पर एमपी के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह को स्लीपर सेल कह रहे हैं। सही मायनों में कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की गुटबाजी और आंतरिक कलह अब पूरी तरह जमीन पर उतर आई है।

कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी के बयान पर मंत्री सारंग ने कहा- यदि कांग्रेस का कोई नेता ऐसा आरोप लगा रहा है तो कांग्रेस को इस पर ध्यान देना चाहिए।

‘पुत्र-मोह’ में उठाया कदम
निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का यह व्यवहार उनके “पुत्र-मोह” का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा में दिग्विजय सिंह पार्टी अनुशासन भूल चुके हैं।

‘भाजपा को ऑक्सीजन दे रहे’
पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा और संघ की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, तब पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कमजोर करना विपक्ष को राजनीतिक फायदा पहुंचाने जैसा है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान पर चोट बताया।

व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा संगठन पर भारी
निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पुत्र-मोह के कारण संगठन को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को आगे बढ़ाने की राजनीति में पार्टी अनुशासन की अनदेखी की जा रही है।

बीजेपी को मिल रहा राजनीतिक फायदा
फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब कांग्रेस भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रही है, तब अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करना विपक्ष को मजबूत करने जैसा है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।

2020 से राज्यसभा चुनाव तक का जिक्र
निधि ने अपनी पोस्ट में 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने, 2023 विधानसभा चुनाव, 2024 लोकसभा चुनाव और हालिया राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार अंदरूनी खींचतान से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने इसे संगठन के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

हाईकमान से कार्रवाई की मांग
पोस्ट के अंत में निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि संगठन की साख और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए।

बीजेपी ने भी साधा निशाना
कांग्रेस में बढ़ते विवाद पर प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह पर सवाल उठा रहे हैं तो पार्टी को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है। 

क्या है पूरा मामला
दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपए में आवंटित की गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इस आरोप से असहमति जताई। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए, जिन्हें अब निधि चतुर्वेदी की पोस्ट ने और हवा दे दी। 

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