राज्यसभा में BJP का बड़ा गेमप्लान! 3 सीटों पर क्लीन स्वीप कैसे संभव, जानिए 2/3 बहुमत से NDA कितनी दूर

नई दिल्ली

राज्यसभा में NDA का कुनबा और बढ़ सकता है। पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत अब लगभग तय हो गई है। इसकी वजह यह है कि मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है। उनके मुताबिक टीएमसी किसी भी सीट को जीतने की स्थिति में नहीं है और इसीलिए पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। ऐसे में अब भाजपा का इन सीटों पर क्लीन स्वीप तय है।

गौरतलब कि चुनाव आयोग ने बीते सोमवार को बंगाल की 3 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इन सीटों पर 24 जुलाई को वोटिंग होगी। इससे पहले 14 जुलाई तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे और नाम वापसी की अंतिम तिथि 17 जुलाई है। इससे पहले बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच जून में तृणमूल कांग्रेस के 3 सांसदों, सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने उच्च सदन और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद ये तीनों सीटें खाली हुई थीं।

क्यों उम्मीदवार नहीं उतार रही टीएमसी?
पश्चिम बंगाल में चुनाव के समीकरणों की बात की जाए तो 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 208 विधायकों का समर्थन है। अगर उसके सभी विधायक पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसके पास तीन राज्यसभा सदस्यों को आसानी से चुनने के लिए पर्याप्त संख्या है। इसके अलावा विपक्ष की ओर से किसी भी तरह का क्रॉस-वोटिंग होने से भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी।

उधर, टीएमसी के दोनों गुटों को मिला भी दिया जाए तो उनके विधायकों की संख्या 80 है। लेकिन किसी भी गुट के पास अकेले राज्यसभा सांसद को चुनने के लिए जरूरी न्यूनतम संख्या नहीं है। इसका नतीजा यह है कि आंतरिक विद्रोह के बाद 2 गुटों में बंटी तृणमूल कांग्रेस के चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इसीलिए टीएमसी ने उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया है।

लगभग 65 विधायकों वाले बागी गुट का नेतृत्व कर रहे विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है। ऋतब्रत ने एक बयान में कहा, “ विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए तृणमूल इन तीनों में से कोई भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। हमारे पास उम्मीदवार उतारने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।”

राज्यसभा में कितनी बढ़ जाएगी ताकत?
वर्तमान में पश्चिम बंगाल की 13 राज्यसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी का कब्जा है। अगर भाजपा उम्मीद के मुताबिक उपचुनाव की तीनों सीटें भी जीत लेती है, तो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में उसकी ताकत 3 से बढ़कर 6 हो जाएगी। वहीं तीन सीटें जुड़ते ही उच्च सदन में भाजपा की संख्या 117 और NDA की संख्या 145 तक पहुंच जाएगी। बता दें कि 245 सीटों वाली राज्यसभा में 2 तिहाई बहुमत के लिए 162 वोट जरूरी हैं। NDA के पास खुद 150 से ज्यादा सांसदों का सीधा समर्थन माना जा रहा है। इसके अलावा बीजू जनता दल के पांच, चार निर्दलीय और 7 मनोनीत सांसदों के समर्थन से NDA 2-तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से छू सकती है।

‘राम मंदिर की जगह अस्पताल’ वाले बयान पर BJP का हमला, ढिल्लों बोले- केजरीवाल का मंदिर प्रेम सिर्फ चुनावी दिखावा

चंडीगढ़
  भारतीय जनता पार्टी पंजाब के अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले और उसकी जगह अस्पताल बनाने की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल के मुंह से आज मंदिरों की बात शोभा नहीं देती। यह केवल उनका ‘चुनावी हिंदू प्रेम’ दिखाने का प्रयास है।

केजरीवाल का मंदिर प्रेम महज़ चुनावी हिंदुत्व है : ढिल्लों
उन्होंने कहा कि पंजाब दौरे के दौरान केजरीवाल द्वारा हिंदू धर्म और मंदिरों का बार-बार उल्लेख करना महज़ चुनावी राजनीति है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक का पूरा राजनीतिक रिकॉर्ड इस बात का गवाह है कि सनातन धर्म और मंदिर उनके लिए केवल वोट हासिल करने का माध्यम रहे हैं। पंजाब के जागरूक लोग अब इस राजनीतिक पाखंड को भली-भांति समझ चुके हैं। ढिल्लों ने कहा कि जो व्यक्ति अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक और पवित्र समारोह में शामिल होने से बचता रहा, वही आज पंजाब आकर हिंदू समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जब पूरा देश श्रद्धा में डूबा हुआ था, तब केजरीवाल दिल्ली में सुंदरकांड पाठ का राजनीतिक प्रदर्शन कर रहे थे।

पंजाब को नुकसान पहुंचाने वालों के मुंह से धर्म की बातें शोभा नहीं
केजरीवाल के धार्मिक ज्ञान पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जनवरी 2025 में रावण को लेकर विवादित और तथ्यात्मक रूप से गलत बयान देकर ‘अधर्मी’ कहलाने वाले केजरीवाल आज पंजाब में धार्मिक उपदेश दे रहे हैं। जिस व्यक्ति को रामायण की मूलभूत समझ तक नहीं है, वह आज पंजाब के लोगों को धर्म का पाठ पढ़ाने निकला है। उन्होंने कहा कि जब भी सनातन धर्म के सम्मान की बात आती है तो केजरीवाल असहज हो जाते हैं, लेकिन वोटों के लिए मंदिरों के चक्कर लगाने का दिखावा करना कभी नहीं भूलते। ढिल्लों ने सवाल किया कि दिल्ली में एक दशक तक सत्ता में रहने वाले केजरीवाल बताएं कि उन्होंने वहां किसी एक बड़े मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्था के विकास के लिए क्या किया? आज पंजाब में बड़े-बड़े दावे करने से पहले उन्हें दिल्ली की जनता को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति योगदान का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से पंजाब को नुकसान पहुंचाने वालों के मुंह से धर्म की बातें शोभा नहीं देतीं। पंजाब के लोग राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करने वालों के मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देंगे। दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद अब केजरीवाल पंजाब की धार्मिक भावनाओं के सहारे अपना डूबता राजनीतिक भविष्य बचाने की असफल कोशिश कर रहे हैं।

 

पश्चिम बंगाल राज्यसभा चुनाव: क्या ममता से 3 सीटें छीन पाएगी BJP? जानें NDA का पूरा गणित

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद अब तीन राज्यसभा पर चुनाव की बारी है. निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. ये तीनों सीटें बंगाल के सत्ता बदलने के बाद टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई हैं. अब सवाल है कि बीजेपी क्या टीएमसी के बागियों पर दांव खेलेगी या फिर अपने किसी नए चेहरों पर जताएगी भरोसा? 

ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया था. राज्यसभा सदस्यता के साथ टीएमसी को भी अलविदा कह दिया था, जिसके चलते खाली हुई तीनों राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने 24 जुलाई को मतदान कराने का फैसला किया है। 

बंगाल के बदले हुए सियासी समीकरण के बाद राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के पास 207 विधायक हैं तो टीएमसी दो गुटों में बंट चुकी है. इस लिहाज से बीजेपी तीनों राज्यसभा सीटें ममता बनर्जी के हाथों से छीन लेगी, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी को उनके ही बागियों के जरिए मात देगी या फिर नए चेहरों को सांसद भेजेगी?

बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. चुनाव आयोग के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है और 14 जुलाई तक नॉमिनेशन किए जाएंगे. इसके बाद नामांकन पत्रों की  स्क्रूटनी 15 जुलाई को होगी और 17 जुलाई नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है. इसके बाद अगर सीटों की संख्या से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो फिर 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन पांच बजे के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। 

राज्यसभा की ये तीन सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, लेकिन तीनों सीटों का कार्यकाल अलग-अलग हैं. सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था तो सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था. इस लिहाज से दो सीटें के एक साथ मतदान होंगे तो एक सीट के लिए अलग से वोटिंग होगी। 

ममता बनर्जी से तीनों सीटें छीन लेगी बीजेपी
राज्यसभा की तीनों ही सीटों पर टीएमसी का कब्जा था, लेकिन अब ममता बनर्जी के हाथों से तीनों ही राज्यसभा सीटें बीजेपी छीन लेगी. बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों में से बीजेपी के पास इस समय 207 विधायक हैं, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी महज 80 विधायक हैं, लेकिन दो गुटों में बंटे हुए हैं. टीएमसी के 80 में से 60 से 65 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं और 15 विधायक ममता बनर्जी के साथ हैं।  

राज्यसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग वोटिंग होनी, इसलिए बहुमत के आंकड़े के लिहाज से बीजेपी बिना किसी अड़चन के तीनों राज्यसभा सीटों पर कब्जा करने की स्थिति में है. यह ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि उच्च सदन में उनकी पार्टी की ताकत सीधे तौर पर कम होने जा रही है. यही नहीं टीएमसी के विधायक अगर एकजुट भी हो जाते हैं तो भी नहीं जीत पाएंगे. इसकी वजह यह है कि प्रथम वारियता के आधार पर भी बीजेपी की संख्या टीएमसी से ज्यादा हो रही है। 
 
टीएमसी के ‘बागियों’ पर दांव खेलेगी भाजपा?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिन तीन नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व से नाराज होकर राज्यसभा से इस्तीफा दिया है, क्या बीजेपी उन्हें ही राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाएगी. सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी का एक बड़ा और अनुभवी चेहरा रहे हैं तो सुस्मिता देव असम की कद्दावर महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं. माना जा रहा है कि जिस तरह से टीएमसी के नेताओं ने बीच कार्यकाल में इस्तीफा दिया है, उसके चलते माना जा रहा है कि बीजेपी बागियों पर भरोसा जता सकती है। 

सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन अधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन नहीं थामा है. ऐसे में अब सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में किसे उम्मीदवार बनाएगी. सूत्रों की माने तो सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक पर बीजेपी दांव खेल सकती है, लेकिन सुष्मिता देव को राज्यसभा के बजाय असम से लोकसभा उपचुनाव लड़ाया जा सकता है।  

बीजेपी क्या नए और युवा चेहरों को देगी मौका
बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से बीजेपी के हौसले बुलंद है. बीजेपी ने आलाकमान का एक धड़ा यह मान रहा है कि विधानसभा चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद अब पार्टी को किसी बैसाखी या बाहरी नेताओं की जरूरत नहीं है. ऐसे में बीजेपी किसी स्थानीय नेताओं को मौका दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी इस पक्ष में है कि जिन्होंने संकट के दिनों में बंगाल में भाजपा का झंडा थामे रखा, उन्हें पुरस्कृत किया जाए। 

 पार्टी उत्तर बंगाल से किसी मजबूत राजवंशी या आदिवासी चेहरे और दक्षिण बंगाल से किसी मतुआ समुदाय या सांगठनिक पृष्ठभूमि के नेता को मौका दे सकती है. इस तरह बीजेपी नए चेहरों को उतारकर 2029 के आम चुनाव के लिए राज्य में अपनी एक नई और कड़क लीडरशिप लाइन तैयार करना चाहती है. अब देखना है कि बीजेपी अपनी जीत के लिए कन्फर्म है, लेकिन किस चेहरे पर दांव खेलती है, यह देखना होगा? 

दो-तिहाई बहुमत के कितनी दूर बीजेपी
राज्यसभा की इन तीन सीटें जीतने के बाद मॉनसून सत्र के बीच में यानी जुलाई के आखिरी सप्ताह में ही उच्च सदन में बीजेपी की संख्या में इजाफा हो जाएगा. सरकार यदि मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाती है तो राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने में आसानी रहेगी. जुलाई के आखिरी सप्ताह में राज्यसभा में 245 सदस्यों के सदन में दो तिहाई बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत होगी। 

बीजेपी तीन राज्यसभा सीटें जीतने के बाद उसका आंकड़ा 117 हो जाएगा. एनजीए के पास राज्यसभा सांसदों की संख्या 145 हो जाएगी.  इस तरह दो तिहाई के लिए 17 राज्यसभा सांसदों के अतरिक्त समर्थन की जरूरत होगी. ऐसे में वाईएसआरसीपी के चार, मनोनीत सात और चार निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिल सकता है। 

राम गोपाल यादव के WhatsApp पर लगी रोक, रोज 5 हजार लोगों को भेजते थे

 लखनऊ

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव हर सुबह करीब 5 हजार लोगों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं. लेकिन अब यह सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि 31 जुलाई तक वह अपने नियमित व्हाट्सएप संदेश नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि व्हाट्सऐप ने उनके अकाउंट से संदेश भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है। 

रामगोपाल यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह प्रतिदिन सुबह लगभग पांच हजार लोगों को सुप्रभात संदेश भेजते थे और उनके अच्छे दिन की कामना करते थे. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप ने 31 जुलाई तक उनके द्वारा भेजे जाने वाले संदेशों पर रोक लगा दिया है. इसी वजह से वह इस अवधि में अपने शुभचिंतकों तक रोजाना पहुंचने वाला संदेश नहीं भेज सकेंगे। 

रामगोपाल यादव की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. कई समर्थकों ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जल्द प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने यह जानने की उत्सुकता दिखाई कि व्हाट्सऐप ने इतनी बड़ी संख्या में संदेश भेजने पर यह अस्थायी रोक क्यों लगाई। 

गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नीतियों के तहत एक साथ बड़ी संख्या में संदेश भेजने या असामान्य गतिविधि पाए जाने पर सुरक्षा कारणों से कुछ अकाउंट्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, रामगोपाल यादव के मामले में व्हाट्सएप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए प्रतिबंध का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। 

राज्यसभा चुनाव विवाद गहराया, मीनाक्षी नटराजन जाएंगी हाई कोर्ट; बोलीं- नामांकन रद्द करना साजिश

भोपाल
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में समझौता (कॉम्प्रोमाइज) हुआ है और कांग्रेस इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर करेगी।मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पार्टी की लीगल टीम इस मामले पर काम कर रही है और परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर याचिका दायर कर दी जाएगी।
भाजपा ने रची साजिश

उन्होंने कहा, “ना तो नामांकन पत्र में कोई गलती थी और ना ही हमारे किसी साथी से कोई चूक हुई। जब फार्म-16 में नोटिस के उल्लेख का कोई कॉलम ही नहीं है, तो उसके आधार पर नामांकन निरस्त करना यह साबित करता है कि यह एक षड्यंत्र था।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को हर स्तर पर लड़ेगी, क्योंकि यह मामला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि पूरी चुनाव व्यवस्था की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में नगरीय निकाय और विधानसभा चुनाव होने हैं। यदि इसी तरह नामांकन निरस्त किए जाते रहे, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

पेपर लीक और राम मंदिर चंदा मामला पर बरसीं
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि देश और प्रदेश के सामने अभी तीन बड़े गहरे संकट हैं। जिस तरह से नीट पेपर लीक हुआ, वैसे ही भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पेपर लीक हो गए। छात्र और उनके अभिभावक वर्षों का संघर्ष करते हैं लेकिन जिस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा।

इसको लेकर कांग्रेस ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम प्रारंभ किया है। इसके तहत इंदौर से भोपाल तक 14 और 15 जुलाई को साइकिल यात्रा निकाली जा रही है। 9 अगस्त को दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम कर अपनी बात जन-जन तक पहुंचाई जाएगी।

जिस तरह से हम सब के आराध्य और आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई, वह पूरे देश ने देखा‌। यह बहुत गंभीर मामला है। महाकाल की नगरी उज्जैन में भी जमीन की लूट की बात सामने आई है। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।

प्रदेश का किसान परेशान
वहीं, किसानों के साथ होने का दावा करने वाली भाजपा सरकार अक्सर किसानों के साथ धोखा करती है। ग्रीष्मकालीन मूंग का अच्छा उत्पादन हुआ है लेकिन प्रदेश में मात्र 25% ही उपज खरीदी जा रही है। किसान परेशान है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

किसानों से जुड़ा केवल यह एक मामला नहीं है। ना तो उन्हें खाद मिल रही है ना ही बीज। अमेरिका के साथ जो व्यापारिक समझौता किया गया है उसकी चोट भी सीधी सीधी किसानों पर ही है सरकार को इसको लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए।

 

बिना हेडलाइट दौड़ती रहीं सरकारी बसें! मोबाइल टॉर्च के सहारे सफर, कर्नाटक में KKRTC पर सियासी घमासान

 बेंगलुरु

कर्नाटक में सरकारी बस सेवाओं की स्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया कि कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KKRTC) की कुछ बसें हेडलाइट खराब होने के कारण रात में मोबाइल की टॉर्च के सहारे चलाई गईं. दावा किया जा रहा है, राज्य सरकार के पास फंड नहीं है, जिसके चलते इन बसों की लाइटों को ठीक नहीं करवाया गया. हालांकि इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया है। 

वहीं इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी ने एक्स पर एक पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत 4,500 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की थीं. दिसंबर 2025 में ही कन्फर्मेशन मिलने के बावजूद राज्य सरकार (@tdkarnataka) ‘लेटर ऑफ़ अवार्ड’ (LoA) तक जारी नहीं कर पाई है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है। 

बसों की खराब स्थिति पर गरमाई राजनीति
साथ ही राज्य सरकार पर ‘शक्ति’ स्कीम के तहत ₹4,573 करोड़ का रीइम्बर्समेंट बकाया है. जिससे मौजूदा बसों की मामूली मरम्मत भी नहीं हो पा रही है. फिर भी अपनी नाकामी के कारण वे 4500 मुफ़्त नई ई-बसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। 

फिलहाल बसों की खराब स्थिति और ई-बस परियोजना में कथित देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. मामले को लेकर अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, जबकि परिवहन व्यवस्था को लेकर यात्रियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। 

ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका: चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

कोलकाता
 चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने और विरोधी खेमे की ओर बढ़ने से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस पुराने मंत्रिमंडल का अध्याय लगभग समाप्त हो गया है, जिसने पिछले डेढ़ दशक तक सरकार और पार्टी संगठन, दोनों की कमान संभाली थी।

कभी ममता की सबसे भरोसेमंद टीम का हिस्सा रहे मंत्री या तो विरोधी खेमे में जा चुके हैं, पार्टी से दूरी बना चुके हैं अथवा राजनीतिक रूप से हाशिये पर हैं। चंद्रिमा का जाना ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ममता के साथ अब केवल पूर्व मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय रह गए हैं। फिरहाद हकीम, अरूप बिश्वास अरूप राय व जावेद खान समेत अधिकांश पहले ही ममता का साथ छोड़ चुके हैं। ब्रात्य बसु और शशि पांजा फिलहाल चुप हैं।

सूत्रों का कहना है कि ममता-चंद्रिमा के मजबूत रिश्ते में दरार गत 22 जून को पड़ी थी, जब न्यूटाउन के एक होटल में ऋतब्रत गुट की बैठक में चंद्रिमा के पुत्र सौरव बोस शामिल हुए थे। उस समय चंद्रिमा ने कहा था कि यह उनके बेटे का व्यक्तिगत निर्णय है।

चंद्रिमा 2009 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हुई थीं। उन्हें पहले महिला तृणमूल की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2012 में वह विधि राज्य मंत्री बनीं और बाद में स्वास्थ्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाला। 2016 में उत्तर दमदम सीट से हारने के बाद ममता ने 2017 के उपचुनाव में उन्हें कांथी दक्षिण से लड़ाकर विधानसभा पहुंचाया। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य राज्य मंत्री के साथ-साथ ई-गवर्नेंस विभाग का स्वतंत्र प्रभार भी सौंपा गया।

सत्ता गंवाने के बाद ममता ने चंद्रिमा को सुब्रत बक्सी की जगह तृणमूल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। गत शुक्रवार को ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में फिरहाद हाकिम, संदीपन साहा समेत कई नेता अस्थायी तृणमूल भवन पहुंचे और उसपर अपना नियंत्रण जताया। उस समय चंद्रिमा भी वहां मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद बिना किसी प्रतिरोध के वहां से चली गईं। इसके बाद ऋतब्रत गुट ने भवन पर ताला लगा दिया।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रिमा के बिना विरोध जताए कार्यालय छोड़ने से ममता बेहद नाराज हुईं। इस्तीफा देने के बाद चंद्रिमा ने बताया कि ममता ने फोन पर उनसे कहा, ‘तुमने पूरा भवन ही उनके हवाले कर दिया।

चंद्रिमा का कहना है कि जब विश्वास ही समाप्त हो गया तो पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं था। इसके बाद उनका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत के कक्ष में जाने ने नई अटकलों को जन्म दे दिया, हालांकि चंद्रिमा का कहना है कि उन्होंने अभी तक ऋतब्रत गुट की औपचारिक सदस्यता नहीं ली है और आगे का फैसला समय पर छोड़ दिया है।

 

यूपी चुनाव 2027 की तैयारी तेज: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सहयोगी दलों के साथ किया समन्वय मंथन

 लखनऊ
 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक में विधान सभा चुनाव 2027 में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने पर मंथन किया।

भाजपा अध्यक्ष ने संदेश दिया कि आपसी समन्वय इस स्तर तक मजबूत होना चाहिए कि हम वर्ष 2027 में प्रदेश में तीसरी बार और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएं। इस बैठक में सीटों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। नवीन ने अगली बैठक दिल्ली में करने की बात सभी सहयोगी दलों के नेताओं से कही।

सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें
रविवार को होटल ताज में भाजपा अध्यक्ष ने चारों सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें की। सबसे पहले उन्होंने रालोद के राष्ट्रीय संगठन महासचिव त्रिलोक त्यागी के साथ बैठक की।जिसमें उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव के लिए कैसे और क्या किया जाना चाहिए।

त्यागी ने जवाब दिया कि सभी सहयोगी दलों के बीच जिला स्तर तक समन्वय होना चाहिए। सम्मान मिलेगा तो सभी दल उत्साह से एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। रालोद को मानने वाले पूरे प्रदेश में हैं, और पार्टी पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

नवीन ने कहा कि भाजपा भी बेहतर समन्वय पर अधिक ध्यान दे रही है। मीडिया से बातचीत में त्यागी ने कहा कि हम 403 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे सिंबल अलग-अलग होंगे।

अपना दल (एस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंत्री आशीष पटेल के साथ बैठक में भी भाजपा अध्यक्ष ने उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव में जीत के लिए क्या किया जाए। जिस पर आशीष ने कहा कि सभी सहयोगी दल बेहतर समन्वय के साथ पूरे प्रदेश में मिलकर काम करेंगे, फिर से हमारी जीत सुनिश्चित है।

राजभर ने बताया जनजातियों का मुद्दा
भाजपा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में सुभासपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें बताया कि पार्टी ने 83 सीटों पर विधान सभा प्रभारी और सह प्रभारी बना दिए हैं। बूथ स्तर तक प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोंड, खरवार, अर्कवंशी, बंंजारा, पाल, प्रजापति जैसी ऐसी कई जातियां हैं जो राजनीतिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन इनके पास राजनीतिक नेतृत्व नहीं है। इन जातियों को राजनीतिक नेतृत्व देने का सुझाव दिया। गोंड व खरवार जातियों का एसटी सर्टिफिकेट नहीं बनाए जाने का मुद्दा उठाया।

यह भी कहा कि प्रदेश में कुछ अधिकारियों के कारण थाने, तहसील और ब्लाक स्तर पर आम लोगों के काम नहीं हो रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। इसे देखा जाना चाहिए।

राजभर ने सहयोगी दलों के बीच समन्वय बैठक कराने के साथ ही आजमगढ़, बस्ती और देवरिया में पार्टी द्वारा आयोजित किए जाने वाले बड़े कार्यक्रमों में भाजपा अध्यक्ष को आमंत्रित भी किया।

निषाद पार्टी के अध्यक्ष मंत्री डॉ. संजय निषाद ने भी सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष को बताया कि प्रदेश में निषादों की बड़ी संख्या है। निषादों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। निषाद आरक्षण परिभाषित करने का ज्ञापन भी दिया।

सभी सहयोगी दलों के नेताओं से भाजपा अध्यक्ष ने बेहतर समन्वय बनाने के साथ ही विधान सभा चुनाव में प्रचंड जीत की तैयारी में जुटने का संदेश दिया। सभी से कहा कि अगली बैठक हम लोग दिल्ली में करेंगे। बैठकों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह उपस्थित थे।

बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा सियासी मोड़, प्रशांत किशोर जन सुराज के उम्मीदवार बने

 पटना
 बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर पर होने वाले उपचुनाव में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे। रविवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी गई।

कोर कमेटी की बैठक में हुआ पीके पर फैसला
इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए जन सुराज का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया।

प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में थी, लेकिन अब पार्टी के औपचारिक एलान के साथ इस पर विराम लग गया है।

जन सुराज इसे केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत और वैकल्पिक राजनीति की परीक्षा के रूप में देख रही है।

पांच बार से लगातार जीतते रहे हैं न‍ित‍िन नवीन
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट का प्रतिनिधित्व लगातार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर हाई-प्रोफाइल बन गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर के उम्मीदवार बनने से इस सीट पर चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति, जन सुराज के जनाधार और विपक्षी राजनीति की दिशा पर भी नजर रहेगी।

तेज प्रताप की पार्टी ने भी ठोका है दावा
तेज प्रताप यादव ने इस सीट पर वीणा मानवी को जेजेडी का उम्‍मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है क‍ि महागठबंधन की ओर से पीके को समर्थन क‍िया जाएगा।

भाजपा जहां अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं जन सुराज इस चुनाव को अपने संगठन और राजनीतिक अभियान की बड़ी परीक्षा के रूप में पेश करेगी।

उल्लेखनीय है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। अब सभी प्रमुख दलों की नजर इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।

तमिलनाडु में सियासी घमासान: TVK सरकार पर हॉर्स ट्रेडिंग के गंभीर आरोप

 नई दिल्ली
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है। राज्य की तीन बड़ी पार्टियों (DMK, AIADMK, BJP) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को तीनों पार्टियों के नेताओं ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के साथ अलग-अलग समय पर मुलाकात की और सत्ताधारी पार्टी के ऊपर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगाए। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर सरकारी मशीनरी के गलत उपयोग और राज्य कैबिनेट की मीटिंग में गैर अधिकृत लोगों के प्रवेश का भी आरोप लगाया।

राज्यपाल से मिलकर आए डीएमके नेता आरएस भारती ने मीडिया के सामने अपने तर्कों को रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की विजय सरकार मशीनरी का गलत उपयोग कर रही है और विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश कर रही है। इसके खिलाफ ऐक्शन होना ही चाहिए। उन्होंने कहा, “हमने गवर्नर से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात है और उन्हें तमिलनाडु में जारी हॉर्स ट्रेडिंग और सत्ता के गलत इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। दो लोग जॉन और विष्णु रेड्डी, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं है वह राज्य के मंत्रियों से ज़्यादा ताकतवर लगते हैं। वे सभी हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं। तमिलनाडु में ऐसी खराब स्थिति पैदा हो गई है। हमने पहले भी एक याचिका दी थी, लेकिन गवर्नर शहर में नहीं थे, इसलिए आज हमने मुलाकात की और इन सभी मुद्दों पर जोर दिया।

बता दें, यह पहली बार नहीं है जब राज्य की डीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री विजय के ऊपर आरोप लगाए गए हों। एक हफ्ते पहले ही स्टालिन की पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की थी।

CM थलपति विजय पर लगा विधायकों को तोड़ने का आरोप
एक हफ्ते पहले ही MDMK के नेता वाइको ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री विजय ने व्यक्तिगत रूप से भी विधायकों को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने DMK के दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने और उनके साथ जाने के लिए मनाने की कोशिश की है। इस दावे को लेकर डीएमके ने सीधे तौर पर राज्यपाल से इसकी शिकायत की। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने विधायकों को भरोसा दिलाया कि अगर वह अपनी सीट छोड़ देते हैं, तो उन्हें उपचुनाव के दौरान TVK से टिकट और आर्थिक मदद दी जाएगी।

भाजपा और AIADMK ने भी की राज्यपाल से मुलाकात
DMK के अलावा AIADMK और भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात करके राज्य में चल रही गतिविधियों पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की। दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर हॉर्स ट्रेडिंग और राज्य कैबिनेट में निजी लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने गवर्नर से संविधान के अनुच्छेद 167 का इस्तेमाल करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगने और ज़रूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया। भारतीय जनता पार्टी ने भी लगभग समान आरोप लगाते हुए जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया और विजय के खिलाफ जांच की मांग की।

राज्यपाल ने तीनों पार्टियों के नेताओं से मिलने की पुष्टि की
शनिवार को हुई इन हाई प्रोफाइल बैठकों से राज्य की राजनीति भी गर्म रही। राज्यपाल विश्वानाथ आर्लेकर ने इन पार्टियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि की। लोकभवन ने एक बयान जारी करके बताया कि डीएमके ने अपने ज्ञापन में पुलिस मशीनरी के गलत इस्तेमाल से कथित गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कस्टडी में दबाव डालने और चुने हुए प्रतिनिधियों को पाला बदलने के लिए उकसाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को पाला बदलने के लिए लालच दिया गया और सरकारी कामकाज में निजी लोगों की भागीदारी पर सवाल उठाए।

‘जॉन और विष्णु अब मुख्यमंत्री के सलाहकार’ TVK ने दिया जवाब
तीन तरफ से आए इस हमले का जवाब थलपति विजय की पार्टी ने भी जोरदार तरीके से दिया। पार्टी की तरफ से कहा गया कि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। जहां तक जॉन और विष्णु रेड्डी के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की बात है। उन दोनों को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसलिए अब वह निजी व्यक्ति नहीं रह गए बल्कि सरकारी मशीनरी का हिस्सा हैं।

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