चौपाल में मुख्यमंत्री ने सुनी जनता की बात, विकास कार्यों की दी सौगात

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री  साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।        

35 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म : सपेरा बस्ती में साकार हो रहा पक्के घरों का सपना

रायपुर

 सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित ग्राम भीखमपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने सपेरा बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय ने वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे सवरा (सपेरा) जनजाति के परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री  साय ने निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन करते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से कच्चे घरों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रहने की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री  साय ने दिव्यांग हितग्राही रमाबाई सिदार को बैसाखी प्रदान कर उनकी सहायता की तथा बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री की सहजता और अपनत्व से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

उल्लेखनीय है कि भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में 68 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, सीसी रोड तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25 आवास, वर्ष 2025-26 में 14 आवास तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 14 आवास स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 10 अन्य पात्र परिवारों को आवास प्लस 2.0 सर्वे में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कदम का पौधा तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने बरगद का पौधा रोपित किया। परिसर में कुल पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।

जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।

महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने भिखमपुरा के पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित  पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ पी चौधरी  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

तकनीकी नवाचार से सशक्त हो रहा पर्यावरण संरक्षण

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

तकनीकी नवाचार से सशक्त हो रहा पर्यावरण संरक्षण

ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल

विज्ञान, तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से आकार ले रहा है स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य

प्रकृति का संरक्षण: वर्तमान की आवश्यकता, भविष्य की जिम्मेदारी

रायपुर,
धरती केवल हमारे रहने का स्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरे-भरे वन और समृद्ध जैव विविधता ही मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी अंततः मानव जीवन के लिए ही खतरा बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जो समृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखे।

         मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इसी संतुलित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा रही है। राज्य में पर्यावरणीय शासन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

पर्यावरण संरक्षण में तकनीकी क्रांति:  ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली

         21वीं सदी में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन और संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपकरण बन चुकी है। पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम इसी परिवर्तन का प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन था, जहाँ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान में समय लगता था, वहाँ अब अत्याधुनिक सेंसरों से लैस ड्रोन कुछ ही मिनटों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

ड्रोन तकनीक के माध्यम से- 

         ड्रोन तकनीक के माध्यम से PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की निगरानी, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे गैसीय प्रदूषकों का विश्लेषण, औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऊँचाई पर निगरानी, नदियों एवं जलाशयों की जल गुणवत्ता का परीक्षण, अवैध अपशिष्ट निस्तारण की पहचान तथा प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की सटीक मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण स्रोतों की शीघ्र पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है।

स्मार्ट पर्यावरणीय शासन की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़

           पर्यावरणीय चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ तकनीक आधारित पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता दी है।

24 घंटे वायु गुणवत्ता पर निगरानी

          राज्य में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) का विस्तार किया जा रहा है। यह प्रणाली चौबीसों घंटे वायु की गुणवत्ता का विश्लेषण कर वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव हो रहा है तथा नागरिकों को भी वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्राप्त हो रही है।

उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण को मिली नई मजबूती

          औद्योगिक विकास राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार है, लेकिन यह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लागू किया गया है। यह प्रणाली उद्योगों के उत्सर्जन की निरंतर निगरानी करती है और किसी भी मानक उल्लंघन की स्थिति में तत्काल जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।

GPS ट्रैकिंग से खतरनाक अपशिष्टों पर नियंत्रण

         औद्योगिक अपशिष्टों का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने खतरनाक अपशिष्टों के परिवहन एवं निपटान की निगरानी के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था से अपशिष्ट के उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे अवैध डंपिंग और पर्यावरणीय क्षति की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।

अत्याधुनिक पर्यावरण प्रयोगशालाएँ : वैज्ञानिक निर्णयों का आधार

         सटीक आंकड़े और वैज्ञानिक विश्लेषण किसी भी प्रभावी पर्यावरणीय नीति की आधारशिला होते हैं। राज्य में स्थापित अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण प्रयोगशाला वायु, जल, मिट्टी और अपशिष्ट नमूनों का उच्च स्तरीय परीक्षण कर रही है। इसके अतिरिक्त मोबाइल पर्यावरण प्रयोगशालाएँ भी आकस्मिक निरीक्षण और त्वरित परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से प्रदूषण की घटनाओं का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सकती है।

पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों के बीच संतुलन

        प्रदेश सरकार ने पर्यावरणीय मानकों से समझौता किए बिना उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया है।स्थापना अनुमति (CTE) और संचालन अनुमति (CTO) की प्रक्रियाओं को समयबद्ध एवं डिजिटल बनाया गया है। अनेक श्रेणियों में स्व-प्रमाणन आधारित नवीनीकरण की सुविधा प्रदान कर उद्योगों को राहत दी गई है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

जनभागीदारी: हरित भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति

          पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। यह तब सफल होगा जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी को समझे और निभाए। इसी उद्देश्य से राज्य में ईको-क्लब कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम तथा जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना का विकास भविष्य के हरित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

भविष्य की दृष्टि 2030ः हरित विकास का रोडमैप

           आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय शासन पूरी तरह डेटा-आधारित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित होगा। “भविष्य की दृष्टि 2030” के अंतर्गत राज्य में स्मार्ट मॉनिटरिंग, डिजिटल पर्यावरणीय प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण की उन्नत प्रणालियाँ तथा जनसहभागिता आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। यह दृष्टिकोण केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और उच्च जीवन गुणवत्ता उपलब्ध कराने का व्यापक प्रयास है।

तकनीक और प्रकृति के समन्वय से बनेगा सुरक्षित भविष्य

         विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि पृथ्वी की सुरक्षा केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।छत्तीसगढ़ में ड्रोन आधारित निगरानी, CAAQMS, CEMS, GPS ट्रैकिंग, आधुनिक प्रयोगशालाएँ और जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम पर्यावरणीय शासन को नई दिशा दे रहे हैं। ये पहलें न केवल प्रदूषण नियंत्रण को अधिक प्रभावी बना रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, सुरक्षित जल और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने की मजबूत नींव भी तैयार कर रही हैं।

        प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने का यह प्रयास ही छत्तीसगढ़ को हरित विकास की नई पहचान दे रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर यही संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है – एक ऐसा प्रदेश, जहाँ विकास की गति भी बनी रहे और पर्यावरण की शुद्धता भी।

* धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक जनसंपर्क

•  सुनील त्रिपाठी
    सहायक संचालक, जनसंपर्क

 

राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)

राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न

रायपुर
मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है।

          मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई। 

          बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।

          अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।

जांजगीर-चांपा पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 80 पुलिसकर्मियों के तबादले

जांजगीर-चांपा.

जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार कुल 80 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षकों का स्थानांतरण किया गया है।

स्थानांतरण आदेश के तहत ऐसे पुलिस कर्मचारियों का प्राथमिकता से तबादला किया गया है, जो तीन वर्ष अथवा उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ थे। इस कदम का उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता, दक्षता एवं प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है।

यातायात शाखा के कर्मचारियों की थानों में हुई पदस्थापना
पुलिस अधीक्षक ने यातायात शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को विभिन्न थानों में पदस्थ किया है। इससे थाना स्तर पर पुलिस बल की उपलब्धता बढ़ेगी तथा कानून- व्यवस्था संबंधी कार्यों में और अधिक मजबूती आएगी। वहीं थाना चौकी में पदस्थ कर्मचारियों को यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है।

करही में पुलिस सहायता के लिए अलग से व्यवस्था
ग्राम करही में 05 जून को पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम करही में पृथक रूप से पुलिस कर्मचारियों की पदस्थापना की गई है। इससे क्षेत्र के नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता एवं सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वन भूमि पर अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई, प्रशासन ने 34 मकानों पर चलाया बुलडोजर

बलरामपुर.

जिले में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर वन भूमि पर बने 34 अवैध मकानों को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की इस कार्रवाई को वन भूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, वन भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थी। प्रशासन द्वारा पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर 34 मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति रही।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बरसों का सपना हुआ साकार, अब भविष्य को लेकर नहीं कोई चिंता; जीवन में आई नई उम्मीद

बरसों का सपना हुआ पूरा

अब मन में भविष्य की चिंता नहीं, आशा, संतोष और आत्मसम्मान

रायपुर
 एक सुरक्षित
और पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। यह सपना केवल चार दीवारों का नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भी होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की श्रीमती कुंती जगने के मन में भी वर्षों से खुद के पक्के घर का सपना पल रहा था, जो अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 से साकार हो गया है।

श्रीमती कुंती जगने मजदूर हैं। उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करते हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में घर बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी थी। कई वर्षों तक उनका परिवार किराये के मकान में रहा, जहां उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

बरसात में मकान की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार की चिंता और परेशानी बढ़ जाती थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ता था। गर्मियों में कमरा इतना गर्म हो जाता था कि आराम से रहना और सोना भी मुश्किल हो जाता था। इन परिस्थितियों के बीच उनका परिवार हमेशा एक ऐसे घर का सपना देखता था, जहां वे सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह सकें।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आवास की स्वीकृति के साथ कुंती के खुद के आशियाने के सपने को पंख मिला। दुर्ग नगर निगम के सहयोग और योजना से मिली राशि से आवास निर्माण का काम शुरू हुआ और उनके बरसों पुराने सपने को नई उड़ान मिली। मकान पूर्ण होते ही कुंती का सपना हकीकत में बदल गया।

आज कुंती अपने परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुखपूर्वक रह रही हैं। खुद का घर, सुरक्षित वातावरण और स्थायित्व के अहसास ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। मन में हमेशा रहने वाली भविष्य की चिंता की जगह अब आशा, संतोष और आत्मसम्मान ने ले ली है।

कुंती कहती हैं, “यह केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों से बना मकान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और सपनों का साकार रूप है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्का घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित किया है।“

कुंती के सपने का हकीकत में बदलना प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय निकायों द्वारा उसका प्रभावी क्रियान्वयन गरीब परिवारों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने कुंती की ही तरह अनेक परिवारों के खुद के पक्के घर के सपने को साकार कर बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया है।

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ रही उत्पादन क्षमता, मिट्टी की सेहत को भी मिल रहा संरक्षण

रायपुर
छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफल कदम बढ़ा रहे हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण और मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण में भी मदद मिल रही है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी अधिक सुविधा होती है।

सरगुजा जिले के प्रगतिशील किसान श्री सत्यम कुमार ने पिछले तीन वर्षों से अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके अनुभव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। धान, गेहूं, सब्जियों और बाड़ी फसलों सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में इन उर्वरकों का सफल उपयोग किया जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसल को आवश्यक पोषण समय पर उपलब्ध होता है। यही कारण है कि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।

नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी माना जा रहा है। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इससे टिकाऊ एवं संतुलित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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