केरल पहुंचा मानसून, छत्तीसगढ़ को अभी करना होगा इंतजार; 3 दिन तक आंधी-बारिश का अलर्ट

रायपुर 

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 4 जून को केरल में दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री तीन दिन देरी से हुई। छत्तीसगढ़ में फिलहाल मानसून नहीं पहुंचा है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रायपुर और राजनांदगांव प्रदेश के सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ।

प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान केवल हल्की बारिश दर्ज की गई। छोटेडोंगर, मैनपाट और अंबिकापुर में 10-10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई।

अगले 24 घंटे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक आज (शुक्रवार) प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। यही स्थिति अगले दो दिनों तक भी बनी रह सकती है।

रायपुर में धूलभरी आंधी और बारिश के संकेत
रायपुर में बादल छाए रहने, गरज-चमक, बारिश और धूलभरी आंधी की संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है मानसूनी एक्टिविटी
हालांकि अभी छत्तीसगढ़ में मानसून की सीधी एंट्री नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में मानसून की तेज प्रगति को देखते हुए प्रदेश में अगले एक सप्ताह के दौरान प्री-मानसून गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

भारतमाला घोटाले में बड़ा खुलासा: 56 लाख की जमीन पर मिला 9.83 करोड़ मुआवजा, कारोबारी गांधी गिरफ्तार

रायपुर 

भारतमाला हाईवे भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाला में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है और जय प्रकास गांधी को गिरफ्तार किया है. आरोपी को 3 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है. जय प्रकाश छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अभनपुर का निवासी हैं। 

ED ने यह जांच छत्तीसगढ़ ACB/EOW द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है। 

हाईवे क्षेत्र में आने वाली भूमि को छोटे क्षेत्रों में किया विभाजित
जांच में सामने आया कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ लोक सेवकों के साथ मिलकर अधिसूचित हाईवे क्षेत्र में आने वाली भूमि को जानबूझकर 500 वर्ग मीटर से कम आकार के छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित किया. आरोप है कि यह कदम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया था। 

ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत 3 जून को गिरफ्तार किया।मामले में करोड़ों रुपए के मुआवजा घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है। वहीं, कारोबारी पर आरोप है कि उसने 56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ का मुआवजा लिया और घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच
ईडी की जांच छत्तीसगढ़ ACB/EOW की दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है।

अफसरों के साथ मिलकर रची साजिश
जांच एजेंसी के मुताबिक जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ अफसरों के साथ मिलकर साजिश रची।

आरोप है कि हाईवे अलाइनमेंट में आने वाली भूमि को खरीदने के बाद उसे 500 वर्गमीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि एनएचएआई से अधिक दर पर मुआवजा मिल सके।

9 करोड़ 83 लाख हासिल किया
ईडी के मुताबिक इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने करीब 9 करोड़ 83 लाख रुपए का मुआवजा हासिल किया।

जबकि नियमों के अनुसार उन्हें केवल 56 लाख 76 हजार रुपए ही मिलने थे। जांच में सामने आया है कि इस तरह लगभग 9 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध आय अर्जित की गई।

शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किए पैसे
जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से मिले पैसे को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ईडी ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत जब्त किए गए थे।

गिरफ्तार आरोपी को विशेष पीएमएलए न्यायालय रायपुर में पेश किया गया, जहां से ईडी को तीन दिन की रिमांड मिली है। एजेंसी अब इस मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जानिए कैसे हुआ घोटाला ?
भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।

शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।

9.27 करोड़ रुपए की अर्जित की अवैध आय
ED के अनुसार इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने लगभग 9.83 करोड़ रुपए का मुआवजा प्राप्त किया, जबकि वैध रूप से देय राशि केवल 56.76 लाख रुपए थी. इस प्रकार लगभग 9.27 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित की गई.

जांच में यह भी पता चला है कि इस अवैध धन को शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश की गई. इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ED ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए थे। 

कोर्ट ने आरोपी को 3 दिन की हिरासत में भेजा
गिरफ्तार आरोपी जय प्रकाश गांधी को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे तीन दिन की ED हिरासत में भेज दिया. ED ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इस साजिश में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों तथा लोक सेवकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 

केरल पहुंचा मानसून, छत्तीसगढ़ को अभी करना होगा इंतजार; 3 दिन तक आंधी-बारिश का अलर्ट

रायपुर 

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 4 जून को केरल में दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री तीन दिन देरी से हुई। छत्तीसगढ़ में फिलहाल मानसून नहीं पहुंचा है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रायपुर और राजनांदगांव प्रदेश के सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ।

प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान केवल हल्की बारिश दर्ज की गई। छोटेडोंगर, मैनपाट और अंबिकापुर में 10-10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई।

अगले 24 घंटे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक आज (शुक्रवार) प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। यही स्थिति अगले दो दिनों तक भी बनी रह सकती है।

रायपुर में धूलभरी आंधी और बारिश के संकेत
रायपुर में बादल छाए रहने, गरज-चमक, बारिश और धूलभरी आंधी की संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है मानसूनी एक्टिविटी
हालांकि अभी छत्तीसगढ़ में मानसून की सीधी एंट्री नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में मानसून की तेज प्रगति को देखते हुए प्रदेश में अगले एक सप्ताह के दौरान प्री-मानसून गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

मुख्यमंत्री 5 जून को पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित

मुख्यमंत्री 5 जून को पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 छात्रों का होगा सम्मान

रायपुर
 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ

          योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन  क्रय करने हेतु 1  लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है। 

पात्रता एवं नियम

         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।

फ्लाई-ऐश और औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग से बन रहीं पर्यावरण-अनुकूल सड़कें

रायपुर

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आधुनिक सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। प्रकृति, वन्य जीव और आधुनिकता के बीच बेहतरीन संतुलन स्थापित करने का यह अनूठा मॉडल विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर पर्यावरण-अनुकूल सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग से राजमार्गों का निर्माण

राजमार्ग निर्माण में थर्मल पावर प्लांट की फ्लाई-ऐश (राख) का उपयोग करके एनएचएआई ने पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है, जिसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ की बिजली परियोजनाओं से निकलने वाले कचरे को खपाने में काम आ रहा है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न परियोजनाओं में वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश को सड़क निर्माण में खपाया गया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया जा चुका है। इतना ही नहीं, स्टील उद्योग के अपशिष्ट यानी स्लैग, अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों को रिसायकल कर वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 2691 मीट्रिक टन सामग्रियों का उपयोग करके ग्रीन-हाइवे की परिकल्पना को साकार किया गया है।

जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के प्रयास

सड़क निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण और भूजल संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर सुधर सके। छत्तीसगढ़ के राजमार्गों के आस-पास के ग्रामीण अंचलों सहित देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 13 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार और निर्माण किया गया है। वर्षा जल संचयन को गति देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या को वर्ष 2024-25 में 14 से बढ़ाकर अगले ही वर्ष 105 कर दिया गया। निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में पीने योग्य साफ पानी की बर्बादी रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त 323 किलोलीटर शोधित जल का उपयोग किया गया, जो जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

संवेदनशील वनों में इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर

वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में अत्याधुनिक इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के संवेदनशील क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक सुरंग इसका नायाब उदाहरण है। इस निर्माण से वाहनों का आवागमन भूमिगत होगा और जंगल के शांत माहौल पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। इस क्षेत्र में विशेष ध्वनि-अवरोधक (साउंड बैरियर्स) लगाए जा रहे हैं, ताकि वन्य जीव और पक्षी वाहनों के शोर से विचलित न हों। साथ ही, पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए सड़क के ऊपर मंकी-कैनोपी और हाथियों व अन्य वन्य जीवों के बेरोकटोक विचरण के लिए विशेष एलिफेंट-पास एवं एनिमल-अंडर विकसित किए जा रहे हैं।

बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क से स्थानीय समृद्धि

हाइवे को एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल मार्गों के किनारों पर एनएचएआई द्वारा कई अनोखे प्रयोग किए जा रहे हैं। सड़कों के किनारे विशेष बी-कॉरिडोर (मधुमक्खी गलियारा) विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास के खेतों में प्राकृतिक परागण बढ़ेगा और स्थानीय किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं, बंजर और खाली पड़ी जमीनों पर मेडिसीन पार्क (औषधि वन) तैयार कर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे हजारों औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, एनएचएआई ने “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण कर हरित राजमार्ग का एक नया कीर्तिमान रचा है।

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री साय

रायपुर 
 
शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।

राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाएं विशेष अभियान

मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखें विशेष निगरानी

मुख्यमंत्री  साय ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

जनभागीदारी से सफल हो रहा सुशासन तिहार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं प्रदेश  में  आयोजित समाधान शिविरों में शामिल होकर आम नागरिकों से सीधे संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनता का शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार बनेगा।

बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, सांसद मती कमलेश जांगड़े, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला,  दिलीप डहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, विशेष सचिव  रजत बंसल, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग तथा पांचों जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पाली के ग्राम पंचायत मुड़ापार में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन 238 आवेदनों का हुआ त्वरित निराकरण

रायपुर 

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आमजनो की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से जिला कोरबा के पाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत मुड़ापार में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन कटघोरा विधायक   प्रेमचंद पटेल के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष जिला पंचायत निकिता मुकेश जायसवाल, जनपद अध्यक्ष मती पूर्णिमा शोभा जगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी  उपस्थित रहे।

शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा ग्रामीणों को स्टॉल के माध्यम से योजनाओं की जानकारी एवं विभागीय योजनाओं से लाभ प्रदान किया गया।  जिसमें जनपद पंचायत पाली  अंतर्गत एक हितग्राहियों को राशन कार्ड, एक हितग्राही को पेंशन स्वीकृति आदेश, 03 दिव्यांग हितग्राही को श्रवण यंत्र एवं 01 हितग्राही को वाकिंग स्टीक प्रदान किया गया। साथ ही नन्हें शिशुओं को अन्नप्राशन भी कराया गया।

शिविर में  विभिन्न विभाग अंतर्गत मांग व शिकायत से सम्बंधित कुल 1065 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 238 आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया।  शेष आवेंदनो का परीक्षण कर शीघ्रता से निराकरण किया जाएगा।  इस शिविर में क्लस्टर अंतर्गत शामिल सभी ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

शिविर   को संबोधित करते हुए विधायक  प्रेमचंद ने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य शासन की मंशा के अनुरूप योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने तथा ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिला एवं खंड स्तरीय अधिकारी शिविरों में उपस्थित होकर अपने विभागों से संबंधित योजनाओं की जानकारी देते हैं, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके। उन्होंने  ग्रामीणों से अपील की कि अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन स्तर में सुधार करें।

मुख्य सचिव का वीडियो कांफ्रेंस में शामिल केबिनेट सचिव ने राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों एवं योजनाओं के एक्शन प्लान को लेकर किया विमर्श

रायपुर

भारत सरकार के केबिनेट सचिव डॉ. टी.व्ही.सोमनाथन ने आज नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारें मिलकर राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करें। कान्फ्रेंस में शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा, अपार आई डी, आंगनबाड़ियों के मैनेजमेंट, आरोग्य मंदिर, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी लाईवलीहुड मिशन, पीएम जनमन, पेंशन स्कीम सहित भारत सरकार की अन्य महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं कार्यक्रम का राज्यों में संचालन तथा क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। 
          
वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान आगामी दिनों में होने वाली नीति आयोग की नेशनल कॉन्फ्रेंस, एनटीए द्वारा ली जाने वाली रि-नीट परीक्षा में जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील नवा रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। सीएस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ में लाईवलीहुड मिशन, आकांक्षी जिला एवं नियद नेल्लानार योजना में किए गए कार्यों का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के सचिवों और सभी राज्यों के मुख्य सचिव एवं राज्यों के विभिन्न विभागों के सचिव भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श् विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब का किया निरीक्षण

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज बिलासपुर प्रवास के दौरान मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी और बिलासपुर को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, महापौर मती पूजा विधानी, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, विशेष सचिव  रजत बंसल, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी सीजीपीएससी, यूपीएससी, नीट, जेईई, एसएससी, बैंकिंग, व्यापम तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। इन विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि पर 120 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एजुकेशन हब विकसित किया जा रहा है।

परियोजना के अंतर्गत नालंदा डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी, 300-300 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास, आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। एक ही परिसर में अध्ययन, आवास और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उत्कृष्ट वातावरण प्रदान करेगी। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिसर में 48 बड़े रेंटल हॉल का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे नगर निगम के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आय का स्रोत विकसित होगा। पीपीपी मॉडल पर विकसित की जा रही इस परियोजना का संचालन वित्तीय दृष्टि से भी आत्मनिर्भर होगा तथा नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं आएगा।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार युवाओं को बेहतर संसाधन, आधुनिक अधोसंरचना और प्रतिस्पर्धी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब केवल एक भवन परियोजना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को नई दिशा देने वाला ज्ञान केंद्र है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि परियोजना पूर्ण होने के बाद बिलासपुर की पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी केंद्र के रूप में स्थापित होगी। यह एजुकेशन हब हजारों विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगा।

 

विश्व पर्यावरण पर राज्यपाल ने दिया जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बढ़ते पर्यावरणीय संकट और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए प्रत्येक नागरिक को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। राज्यपाल ने कहा कि जल और जंगल एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि पानी रहेगा तो पेड़-पौधे सुरक्षित रहेंगे और यदि पेड़ रहेंगे तो जल स्रोतों का संरक्षण संभव होगा। 
         
राज्यपाल ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य में योगदान है। वृक्ष पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने, वर्षा चक्र को मजबूत करने और भूजल स्तर को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
        
राज्यपाल ने कहा कि देश और दुनिया के अनेक क्षेत्रों में जल स्रोत लगातार घट रहे हैं। भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है। वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग, तालाबों और जल स्रोतों का संरक्षण तथा वृक्षारोपण जैसे प्रयास सामूहिक रूप से किए जाएं तो आने वाले वर्षों में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

लोक भवन और नया रायपुर स्थित निर्माणाधीन लोक भवन में करेंगे वृक्षारोपण
         

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका लोक भवन तथा नया रायपुर स्थित निर्माणाधीन लोक भवन परिसर में वृक्षारोपण करेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक अभियान का स्वरूप दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाएं, जल बचाएं और प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। 

लोक भवन के कर्मचारियों को पौधे भेंट 
        
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर राज्यपाल श्री डेका ने लोक भवन के कर्मचारियों को  पौधे  भेंट किए तथा उन्हें अपने घरों एवं आसपास पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर लोक भवन के सभी कर्मचारियों के लिए  निशुल्क पौधों के वितरण की  व्यवस्था की गई है।

 

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