राज्य के 7 जिलों में लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए एकीकृत आजीविका कार्यक्रम

रायपुर

मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के 7 जिलें बस्तर, कांकेर,दंतेवाड़ा, सुकमा,बीजापुर, नारायणपुर और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में एकीकृत आजीविका कार्यक्रम के तहत यहां के ग्रामीण परिवारों की आय और जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए है। 
      
मुख्य सचिव ने कार्यक्रम के तहत प्रत्येक लक्षित परिवारों को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एकीकृत आजीविका कार्यक्रम छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वकांक्षी पहल है। इसके तहत इन जिलों के प्रत्येक लक्षित परिवारों को विविधिकृत आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इन गतिविधियों में सामान्यतः कृषि, वन, पशुपालन, गैर कृषि क्षेत्र में नए नवाचार के माध्यम से आमदनी बढ़ाने के लिए कार्य किया जाएगा। इसके लिए प्रोसेसिंग एकाईयां, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे का विकास होगा। लोगों को सहकारी समितियों से भी जोड़ा जाएगा।  

पशुपालन एवं संबद्ध गतिविधियों के अंतर्गत कुक्कुट पालन, बकरी पालन, डेयरी, सूकरपालन, मत्स्य पालन जैसे सेक्टरों से जोड़कर लोगों की आमदनी में इजाफा किया जाना है। इसी तरह से वन एवं वृक्ष के माध्यम से इमली, महुआ, चिरोंजी, काजू, बांस, कोसा रेशम, लाख, मधुमक्खी पालन के प्रमुख उत्पादों से जोड़कर परिवारों की आय एवं जीवन स्तर में बेहतर बनाया जाएगा। 
          
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विभाग  भीम सिंह सहित ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य सचिव ने सीएम हेल्पलाइन में संवेदनशीलता से काम करने के दिए निर्देश

रायपुर

मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में सीएम हेल्पलाइन के संबंध में अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन के जरिये प्राप्त होने वाले शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश हैं।        

मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों केा निर्देश दिए है कि सीएम हेल्पलाइन 9 जून 2026 से प्रारंभ की जा रही है। सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को सीएम हेल्पलाइन के क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु पत्र जारी किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से आमजनों की शिकायतों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में हो यह सुनिश्चित होना चाहिए। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।           

मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव  राहुल भगत ने सीएम हेल्पलाइन के तहत आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली के संबंध में प्रस्तुतिकरण के जरिये विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन हेतु विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता पूर्ण शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1 से एल-4 स्तर के अधिकारियों तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने नागरिकों से उनकी शिकायतों के संबंधों में उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में सीएम हेल्पलाइन लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे तौर पर दर्ज करा सकेंगे।       

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋर्चा शर्मा, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव मती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख  सचिव मती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव  पी.दयानंद, कौशल विकास एवं तकनीकी विभाग के सचिव  बसवराजु एस., सामान्य प्रशासन, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव  रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव  एस.प्रकाश, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैंसर अब्दुल हक, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर और वित्त विभाग की विशेष सचिव मती शीतल शाश्वत वर्मा सहित मंत्रालय में पदस्थ विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ

रायपुर 

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी,  जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सु चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है।

कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

कुनकुरी में बनेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी, अटल विहार योजना के तहत 97 आवासों का निर्माण

रायपुर 

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के अंतर्गत एक आधुनिक आवासीय परियोजना विकसित की जा रही है। यह परियोजना क्षेत्र में सुव्यवस्थित एवं योजनाबद्ध आवासीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथा कुनकुरी क्षेत्र की पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी होगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करने तथा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी उद्देश्य के अनुरूप मंडल द्वारा इस परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास एवं कुनकुरी वासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही जशपुर में आने वाले दिनों में शीघ्र ही अटल विहार योजना बालाछापर, पत्थलगॉव एवं अटल आवास योजना महुआ टोली, कंदोरा पर भी आवासीय योजनाए प्रारंभ की जाएगी। ज्ञात हो कि इससे पूर्व कुनकुरी में कोई व्यवस्थित कॉलोनी मण्डल अथवा प्राईवेट बिल्डर्स द्वारा विकसित नही किया गया है।
आवास मंत्री एवं जिला जशपुर के प्रभारी मंत्री  ओ. पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर यह आवासीय परियोजना ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी, जिला जशपुर में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशाकीय स्वीकृति दी गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवासों का निर्माण किया जाएगा।जिसमे EWS एवं LIG  श्रेणी के 91 मकान निर्मित किये जाएंगे।

अटल विहार योजना हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को  1/- रुपयें प्रति वर्गफीट के हिसाब से भूमि आबंटित की गई है तथा ई.डब्ल्यू.एस. अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रुपयें 80,000/- एवं एल.आई.जी. के पात्र हितग्राहियों को रुपयें 40,000/- का अनुदान दिया जाता है। 
 अनुराग सिंह देव अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा बताया गया कि विकसित की जा रही यह कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलोनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, स्वच्छ एवं हरित वातावरण, समुचित जल निकासी व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक नियोजित आवासीय परिसर के रूप में विकसित होने के कारण यह परियोजना नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की संभावना रखती है।

परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-43) से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान शहर से सटा हुआ होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण संस्थानों के निकट भी है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, शासकीय कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण शासकीय भवनों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के समीप शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को गति मिलने के साथ-साथ भविष्य में भूमि का विकास एवं मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी प्रबल हैं, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है

यह परियोजना क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है।

नैनो यूरिया से खेती में बढ़ा मुनाफा, मिट्टी की सेहत भी हो रही बेहतर

नैनो यूरिया से खेती में बढ़ा मुनाफा, मिट्टी की सेहत भी हो रही बेहतर

धान, गेहूं और सब्जियों की खेती में किसानों को मिल रहे सकारात्मक परिणाम

रायपुर
 छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत उर्वरकों के उपयोग से खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रही है। राज्य के किसान अब पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ नवाचार को अपनाते हुए उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में सफल प्रयास कर रहे हैं। नैनो यूरिया का बढ़ता उपयोग इसी परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में किसान नैनो यूरिया के उपयोग से सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराता है, जिससे फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। साथ ही इसके उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में लागत में कमी आती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम बड़ादमाली के प्रगतिशील किसान श्री कपूर सिंह ने अपनी लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया का सफल उपयोग कर अच्छे परिणाम प्राप्त किए हैं। धान, गेहूं एवं विभिन्न सब्जी फसलों में इसके प्रयोग से उन्हें बेहतर फसल विकास और लागत में कमी का अनुभव हुआ है। उनका मानना है कि समय पर और वैज्ञानिक तरीके से किए गए छिड़काव से फसलों को अधिक लाभ मिलता है।

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि नैनो यूरिया का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है। इसके अलावा मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी यह तकनीक सहायक सिद्ध हो रही है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं।

नैनो यूरिया के सफल उपयोग से प्रेरित किसान अब आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम हो रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता को भी मजबूती मिल रही है।

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती -वन मंत्री केदार कश्यप

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती -वन मंत्री केदार कश्यप

वन मंत्री ने किया राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

विशेषज्ञ देंगे वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण

रायपुर
छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने निवास कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय भी साथ में थे। इस कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए।

संरक्षण प्रयासों से बढ़ी हाथियों की संख्या

           वन मंत्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

मानव-हाथी संघर्ष कम करना सरकार की प्राथमिकता

            कश्यप ने बताया कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार जनभागीदारी, सतत निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

           वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति पर कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं।

विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन और संरक्षण का प्रशिक्षण

         कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में छत्तीसगढ़ बन रहा मॉडल राज्य

        वन मंत्री कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है।

विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का किया आभार व्यक्त

       वन मंत्री ने सभी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने का आह्वान किया।

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान

एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक

रायपुर
विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है।

जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान

         वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी

        मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर

      कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा

         वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल रमेन डेका

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल रमेन डेका

समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां

रायपुर
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।

राज्यपाल डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। जिस प्रकार वे राज्यपाल के रूप में प्रदेश की जनता के हितों के प्रति उत्तरदायी हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए और मरीज का हित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सक की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी अवसर है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधियां और सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है।

प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नया रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है, जिसमें 5 हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था होगी। यह परियोजना प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसके अतिरिक्त रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पतालों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हों, ताकि उन्हें उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है, जिससे लंबे समय तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तरवासियों के सहयोग से नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे, वहां अब ‘सेवा डेरा’ विकसित कर लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं तथा ‘अग्रणी बस्तर योजना’ के तहत अधिकारी गांवों में रुककर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा का सर्वोत्तम अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली के राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं दीक्षांत समारोह के अभिभाषक डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठातागण, प्राध्यापक, विद्यार्थी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

एनएमडीसी की परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न

एनएमडीसी की परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न

रायपुर,
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने एनएमडीसी परिक्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए है।

          बैठक में एनएमडीसी सीएसआर मद के अंतर्गत बस्तर संभाग के 6 जिले दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर से प्राप्त 49 करोड़ 95 लाख 65 हजार रुपए की प्रस्तुत कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सीएसआर मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु नवीन कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कार्यों में पोषण आहार, स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना, सांस्कृतिक एवं अन्य निर्माण कार्यों को स्वीकृत किया गया। इसमें बस्तर जिले के 29, कोण्डागांव के 18, नारायणपुर के 14, दंतेवाड़ा के 17, बीजापुर के 86, सुकमा के 106 कार्य शामिल है।

           बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री एवं खनिज विकास विभाग के सचिव पी.दयानंद, एनएमडीसी के सीएमडी सहित खनिज विभाग के अन्य अधिकारी एवं दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर जिले के कलेक्टर शामिल हुए।

बिहान योजना से मिली नई पहचान, लटोरी की महिलाएं हस्तशिल्प के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर

बिहान योजना से मिली नई पहचान, लटोरी की महिलाएं हस्तशिल्प के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर

इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्माण से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर

रायपुर,
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लटोरी की स्व-सहायता समूह की महिलाएं इस पहल का सफल उदाहरण बनकर उभरी हैं। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बल पर यहां की महिलाओं ने हस्तशिल्प आधारित स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है।

बिहान योजना के तहत महामाया एवं रेखा स्व-सहायता समूह की 20 महिलाओं को छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा तीन माह का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने प्राकृतिक संसाधनों से आकर्षक एवं उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की तकनीक सीखी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं अब डलिया, टोकरी, सजावटी गुलदस्ते, पूजा ट्रे तथा फ्रूट बास्केट जैसे इको-फ्रेंडली उत्पाद तैयार कर रही हैं।

इन हस्तनिर्मित उत्पादों को स्थानीय बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है। बढ़ती मांग के कारण समूह की महिलाओं की आय में भी वृद्धि हो रही है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वरोजगार के इस माध्यम ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का अवसर भी प्रदान किया है।

रेखा स्व-सहायता समूह की सदस्या श्रीमती कौशल्या राजवाड़े बताती हैं कि पहले उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। बिहान योजना से जुड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह की सभी महिलाएं मिलकर अपने हस्तशिल्प व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिले और उनके गांव की पहचान भी बने।

महिलाओं ने उन्हें प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने की यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण को गति दे रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। आज लटोरी की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।

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