5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री साय

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।

इस योजना के तहत इस साल 4,95,965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10,000 रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के ‘न्याय और सुशासन’ की गूंज होगी। ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि ‘अंत्योदय’ की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

राष्ट्रीय OBC आयोग की अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पहुंचीं, CM साय और राज्यपाल से करेंगी अहम मुलाकात

रायपुर.

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति आज अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे पर राजधानी रायपुर पहुंचीं। पदभार ग्रहण करने के बाद प्रदेश के इस पहले आधिकारिक दौरे के मुख्य उद्देश्यों को बताया।

साध्वी निरंजन ज्योति ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ में आयोजित मछुआरा समाज के एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यहां आई हैं। इसके साथ ही वे प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारों, उनकी स्थिति और उनके हक को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगी।

OBC आरक्षण को लेकर कही बड़ी बात
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लागू 14% और तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा पारित किए गए 27% आरक्षण विधेयक के सवाल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्यपाल के साथ मेरी उच्च स्तरीय बैठक होनी है, जिसमें प्रदेश की विभिन्न समस्याओं और ओबीसी समाज के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यदि राज्य सरकार इस संबंध में आयोग से कोई सिफारिश करती है, तो आयोग के माध्यम से भारत सरकार को उचित सिफारिश और प्रस्ताव भेजा जाएगा।

CM साय आज चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के केंद्रीय अधिवेशन में करेंगे शिरकत

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रविवार काे रायपुर और धमतरी जिले में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री निवास, रायपुर से धमतरी के लिए रवाना होंगे।
धमतरी पहुंचकर वे दोपहर करीब 1:30 बजे क्षेत्रीय चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के केंद्रीय अधिवेशन में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय क्षेत्रीय चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री रायपुर लौट आएंगे। इसके बाद शाम 4 बजे वे बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुवारा संघ के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम के बाद शाम 5:15 बजे तक मुख्यमंत्री निवास लौटने का कार्यक्रम है।

साध्वी निरंजन ज्योति आज आएंगी रायपुर
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति 7 जून को रायपुर के एक दिवसीय आधिकारिक प्रवास पर रहेंगी. साध्वी निरंजन ज्योति रविवार को नई दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगी. वे राज्य अतिथिगृह रायपुर में पिछड़ा समाज के प्रतिनिधिमंडल से भेंट करेंगी. वे रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात करेंगी. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष दोपहर दो बजे बूढ़ापारा स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में पिछड़ा वर्ग संगठन के सामाजिक प्रगति चिंतन सम्मेलन में शामिल होंगी.

दुग्ध उत्पादन से बढ़ रही किसानों की आय, पशुधन विकास विभाग कर रहा प्रोत्साहित

रायपुर.

प्रदेश के ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ा गया है। जिले में करीब 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।

पशुधन विकास विभाग क जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है।

देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है। यहां जिले में किसानों को दुग्ध विपणन का कार्य में दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। पहले 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित है, वहीं शासन की सहकारिता से समृद्धि की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालक किसानों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।

जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (छक्क्ठ) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।

खनिज उड़नदस्ता दल का बड़ा एक्शन 15 संदिग्ध स्थानों पर छापा, अवैध खनन-परिवहन में लगे 14 वाहन जब्त

रायपुर

 प्रदेश में गौण खनिजों के अवैध दोहन को रोकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में कोरबा जिले के कलेक्टर  कुणाल दुदावत के कड़े निर्देश और उप संचालक (खनि प्रशासन) के मार्गदर्शन में आज जिले में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इसके लिए गठित दो विशेष खनिज उड़नदस्ता दलों ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक दबिश देकर अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की है।

15 इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी, ये वाहन हुए जब्त
         
उड़नदस्ता दलों ने कोरबा जिले के कुल 15 संदिग्ध क्षेत्रों में सघन निरीक्षण किया। इनमें सीतामढ़ी, कपाटमुडा, सुराकछार, नरईबोध, रैंकी, कुदुरमाल, बरमपुर, बांकीमोंगरा, सुमेधा, कुमगरी, घनाकछार, कटघोरा, कछार, दर्री और धवईपुर शामिल हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन कर अवैध उत्खनन एवं परिवहन करते पाए जाने पर कुल 14 वाहनों/मशीनों को रंगे हाथों जब्त किया गया, जिनमें 01 चैन माउंटेन (पोकलेन मशीन), 09 ट्रैक्टर, 02 हाइवा, 02 टीपर शामिल हैं।

विभिन्न थानों की अभिरक्षा में सौंपे गए वाहन
           
जब्त किए गए सभी वाहनों को नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई के लिए क्षेत्र के विभिन्न थानों और चौकियों की सुरक्षात्मक अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। कुसमुंडा थाना, हरदीबाजार थाना, दर्री थाना, बांकीमोंगरा थाना और खनिज जांच नाका, उरगा वाहनों को नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों के तहत होगी सख्त कार्रवाई
            
खनिज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पकड़े गए सभी आरोपियों और वाहन स्वामियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों तथा अन्य प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के तहत कड़े मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

अभियान का मुख्य उद्देश्य 
        

अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण, भू-माफियाओं के हौसले पस्त करना है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना, पर्यावरण की रक्षा करना है। शासकीय राजस्व (रॉयल्टी) की चोरी को शत-प्रतिशत रोकना।

खनिज विभाग की खुली चेतावनी
       
जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ यह विशेष अभियान आगे भी बिना रुके लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का 7 जून को एक दिवसीय रायपुर प्रवास

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का 7 जून को  एक दिवसीय रायपुर प्रवास

रायपुर
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री, भारत सरकार) के अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति जी 07 जून 2026 को रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक दिवसीय आधिकारिक प्रवास पर रहेंगी।

           राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के दौरे में सहयोग हेतु श्री राजेन्द्र कुमार निषाद (निजी सचिव मो.-8756342092), एवं श्री रितिक विश्वकर्मा (मो. 7266050609)  कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष के  साथ रहेंगे।

          अध्यक्ष-राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग साध्वी निरंजन ज्योति जी 07 जून 2026 को नई दिल्ली से सुबह 06:30 बजे प्रस्थान कर सुबह 08:15 बजे रायपुर पहुंचेंगी l वे राज्य अतिथिगृह, रायपुर 07 जून 2026 को सुबह 09:30 बजे पिछड़े समाज के प्रतिनिधि मंण्डल से भेंट करेंगी।
10:30 बजे माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ से शिष्टाचार भेंट करने के बाद दोपहर 12 बजे माननीय राज्यपाल (छत्तीसगढ़) से शिष्टाचार भेंट करेंगी l 

          राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष 7 जून 14:00 बजे श्री बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बुढ़ापारा, रायपुर  में पिछड़ा वर्ग संगठन के  सामाजिक प्रगति चिन्तन सम्मेलन में  शामिल होंगी l वे अपरान्ह 3 बजे राजकीय अतिथि गृह रायपुर में पिछड़ा वर्ग के कल्याणकारी योजनाओं पर समीक्षा बैठक लेंगी, जिनमें मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन
 माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग अयोग, प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्गविकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
शामिल होंगे l राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष 7 जून को ही शाम को 6:40 बजे रायपुर से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी l

किसान बनकर पहुंचे कृषि अधिकारी, खाद की कालाबाजारी का किया खुलासा

रायपुर

 किसानों को किफायती और उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं।  इसी क्रम में किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के लिए रायगढ़ जिला प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा जिलेभर में खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में लैलूंगा विकासखंड में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग ने खाद की कालाबाजारी का भंडाफोड़ किया।
          
उप संचालक कृषि स्वयं किसान बनकर एक खाद दुकान पर पहुंचे और खाद खरीदने का प्रयास किया। जांच के दौरान पता चला कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) खाद, जिसकी वास्तविक कीमत लगभग 750 रुपये प्रति बोरी है, उसे किसानों को 1800 रुपये प्रति बोरी में बेचा जा रहा था। इस तरह किसानों से प्रति बोरी एक हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी।

गोदाम सील, खाद बिक्री पर 10 दिन का प्रतिबंध
         
शिकायत सही पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लैलूंगा स्थित मां दुर्गा ट्रेडर्स के गोदाम को सील कर दिया। मौके से 74 बोरी खाद जब्त की गई। साथ ही दुकान में खाद विक्रय पर 10 दिनों का प्रतिबंध लगाया गया है। संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है।

किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
          
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन में किसानों को निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य वसूली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिलेभर में खाद वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी मजबूरी का कोई अनुचित लाभ न उठा सके।

आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान
          
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों के भंडारण एवं विक्रय की नियमित जांच की जाएगी। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने या कृत्रिम अभाव पैदा करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में उर्वरक निरीक्षक  पवन उरांव, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी  फुलेश्वर पैकरा सहित कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों से सहयोग की अपील
         
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक मूल्य वसूली की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई की जा सके। यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा और पारदर्शी खाद वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई क्रांतिः रायगढ़ बना अग्रणी जिला

रायपुर

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में हरित विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया पर्याय बन चुकी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक जागरूकता अभियानों के फलस्वरूप प्रदेश में सौर ऊर्जा को लेकर भारी उत्साह है। इस महा-अभियान में रायगढ़ जिला उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर पूरे प्रदेश में अग्रणी बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले में अब तक 2,705 परिवारों के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र (Solar Rooftop) सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ये परिवार पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर हो गए हैं।

 रायगढ़ जिले की उपलब्धियां
          
रायगढ़ जिले में स्थापित 2,705 सोलर संयंत्रों की कुल क्षमता 11,504 किलोवाट से अधिक है। इनसे प्रतिदिन लगभग 46 हजार यूनिट तथा प्रतिमाह करीब 13.80 लाख यूनिट हरित बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे उपभोक्ताओं की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी कम हो रही है।

बढ़ता जनविश्वास         

योजना के तहत अब तक कुल 6,701 आवेदन प्राप्त हुए हैं। केवल मई माह में ही 912 नए आवेदन मिले, जिनमें से 411 घरों में सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। जिले में हर हफ्ते औसतन 228 नए आवेदन आ रहे हैं और 100 से अधिक घरों में नियमित रूप से सोलर पैनल स्थापित किए जा रहे हैं।

 भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत         

गर्मी के इस मौसम में जब एयर कंडीशनर और कूलर के चलने से बिजली की मांग और बिल दोनों बढ़ जाते हैं, तब यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। योजना से जुड़े परिवार अपनी जरूरत की अधिकांश बिजली खुद बना रहे हैं, जिससे उनका मासिक बिजली का खर्च (बिल) नगण्य हो गया है।

सब्सिडी और बिजली उत्पादन का गणित

विद्युत विभाग के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ को न्यूनतम कर दिया गया है। पात्र हितग्राहियों को 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। सोलर प्लांट लगाने के लिए बैंकों के माध्यम से आसान लोन की व्यवस्था भी है।

क्षमता और उत्पादन

 1 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट सेे प्रतिमाह लगभग 120 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार 2 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट से प्रतिमाह लगभग 240 यूनिट बिजली उत्पादन और 3 किलोवाट के सोलर संयत्र प्लांट से प्रतिमाह लगभग 360 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। 

आवेदन की प्रक्रिया हुई बेहद सरल और पारदर्शी

        प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को पूरी तरह ऑनलाइन और बिचौलियों से मुक्त रखा गया है। इच्छुक नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर पोर्टल (PM Surya Ghar Portal)  या मोबाइल ऐप,  CSPDCL की विभागीय डिजिटल सेवा से या टोल-फ्री नंबररू उपभोक्ता 1912 पर कॉल करके सहायता ले सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत उपभोक्ता अपनी मर्जी से अधिकृत वेंडर चुन सकते हैं। सौर ऊर्जा का यह बढ़ता कारवां न केवल रायगढ़ बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और हरित भविष्य की ओर ले जा रहा है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीनी धरातल पर सच कर रही है।

रेत माफियाओं पर प्रशासन का सख्त प्रहार अवैध उत्खनन में लगी पोकलेन मशीन जब्त, प्रदेशभर में निगरानी तेज

रायपुर

 रेत माफियाओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में प्रशासन का रुख बेहद सख्त हो गया है। अवैध उत्खनन, परिवहन और राजस्व की चोरी पर  अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग द्वारा लगातार ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़े डूमरपाली में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग ने मौके से एक चौन माउंटेड पोकलेन मशीन को जब्त कर सील कर दिया है।

 शिकायत पर त्वरित एक्शनः मौके पर पकड़ाया अवैध खनन
           
खनिज विभाग के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के बड़े डूमरपाली निवासी यशवंत डडसेना द्वारा नदी क्षेत्र में पोकलेन मशीन लगाकर अवैध रूप से रेत निकालने और उसके परिवहन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायत की सत्यता जांचने के लिए खनि निरीक्षक और खनिज उड़नदस्ता दल ने संयुक्त रूप से औचक छापा मारा। मौके पर अवैध खनन में संलिप्त पोकलेन मशीन को जब्त किया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे ग्राम सरपंच की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया।

कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज
          
प्रशासन ने पर्यावरण और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले वाहन मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नियम 71, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 एवं 23(क) की इन धाराओं के तहत वाहन मालिक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

आधुनिक तकनीक और उड़नदस्ता दलों से प्रदेशव्यापी निगरानी
          
खनिज विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।  खनजिों के अवैध उत्खनन, परिवहन और राजस्व की चोरी को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा अब आधुनिक तकनीक, स्थानीय खुफिया इनपुट और मुस्तैद उड़नदस्ता दलों का सहारा लिया जा रहा है।

 पर्यावरण संरक्षण और राजस्व की सुरक्षा सर्वाेपरि
        
अधिकारियों ने बताया कि अनियंत्रित और अवैध रेत उत्खनन से न केवल नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है, बल्कि भूजल स्तर गिरने से पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई खनिज संपदा की रक्षा के साथ-साथ प्रकृति और सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश में कहीं भी खनिजों के अवैध दोहन, परिवहन या भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में यह जांच अभियान और अधिक आक्रामक और प्रभावी ढंग से जारी रहेगा।

जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य : सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी

जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य :  सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी

जिन हाथों में कभी हथियार थे, अब वे बनाएंगे गरीबों के आशियाने

सोड़ी हूंगी और पदम रैनू जैसे युवाओं के जीवन में लौटी उम्मीद, हुनर ने दिया सम्मान से जीने का नया आधार

सुकमा में पुनर्वास की अनूठी पहल बनी राष्ट्रीय मिसाल, 280 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता

रायपुर,
बस्तर की पहचान लंबे समय तक संघर्ष, भय और नक्सल हिंसा के साये से जुड़ी रही है। सुकमा जैसे जिले के घने जंगलों में ऐसी कई पीढ़ियां बड़ी हुईं, जिन्होंने विकास से ज्यादा बंदूक की आवाज सुनी, स्कूल से ज्यादा भय देखा और सपनों से ज्यादा संघर्षों का सामना किया। लेकिन आज उसी सुकमा से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आ रही है, जो केवल बदलाव की नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास की कहानी है।
यह कहानी उन युवाओं की है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे अपने हाथों में निर्माण के औजार लेकर समाज के विकास में भागीदार बनने की तैयारी कर रहे हैं। यह कहानी उन बेटियों की है, जिन्होंने जंगलों की अनिश्चित जिंदगी छोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है। यह कहानी उस प्रशासनिक संवेदनशीलता की है, जिसने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को केवल मुख्यधारा में लौटने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का नया आधार भी दिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयासों से 25 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। यह प्रशिक्षण केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं, बल्कि जिंदगी को नए सिरे से गढ़ने का अवसर बन गया है।

जंगलों की खामोशी से निर्माण स्थलों की रौनक तक

इन युवाओं का अतीत संघर्षों से भरा रहा है। जंगलों में बिताए वर्षों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीना सिखाया, लेकिन भविष्य के सपने देखने का अवसर नहीं दिया। आज जब वे प्रशिक्षण केंद्र में ईंट जोड़ना, दीवार खड़ी करना और मकान बनाना सीख रहे हैं, तब वे केवल भवन निर्माण नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी टूटी हुई उम्मीदों को भी फिर से जोड़ रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, माप-जोख, चिनाई, प्लास्टर और भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। आने वाले समय में यही युवा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ अब किसी गरीब परिवार के सपनों का घर खड़ा करेंगे।

सोड़ी हूंगी : अब जिंदगी में डर नहीं, सपनों की जगह है

कोंटा क्षेत्र के अरलमपल्ली गांव की रहने वाली सोड़ी हूंगी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिनके जीवन ने यह साबित किया है कि अवसर मिले तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, बदलाव संभव है।
हूंगी बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब जीवन में हर दिन अनिश्चितता थी। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा, सम्मान और सीखने का अवसर दिया। आज वे राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रही हैं और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं।

उनकी आंखों में आत्मविश्वास झलकता है जब वे कहती हैं, अब हम किसी पर बोझ नहीं रहेंगे। अपने हाथों की मेहनत से कमाएंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। हूंगी जैसी कई महिलाओं के लिए यह प्रशिक्षण केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्र पहचान का माध्यम बन गया है।

’पदम रैनू: ‘सरकार ने हमें भटकने से बचाया’

जगरगुंडा के मंडीमरका गांव के निवासी ’पदम रैनू’ की कहानी भी उतनी ही भावुक और प्रेरणादायक है। जंगलों में बीते वर्षों को याद करते हुए वे कहते हैं कि वहां जीवन केवल संघर्ष और अनिश्चितता का पर्याय था। न रहने का ठिकाना, न भविष्य की कोई गारंटी। हर दिन नई चिंता होती थी। लेकिन आज हमें रहने की सुविधा मिली है, सीखने का अवसर मिला है और सबसे बड़ी बात यह कि सम्मान मिला है। सरकार ने हमें भटकने से बचाया और जीने का नया रास्ता दिखाया। पदम की यह बात केवल उनकी व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं की आवाज है, जिनके जीवन में पुनर्वास योजनाओं ने नया विश्वास पैदा किया है।

एक पहल जिसने बदल दी दो तस्वीरें

जिला प्रशासन की यह पहल केवल आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास तक सीमित नहीं है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के विकास पर भी दिखाई दे रहा है। सुकमा के अनेक दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय से कुशल राजमिस्त्रियों की कमी महसूस की जाती रही है। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होती थी। अब प्रशिक्षित युवा न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता बना रहे हैं, बल्कि जिले के विकास कार्यों को भी नई गति देने वाले हैं। इस प्रकार एक ही पहल ने दो बड़े लक्ष्य साध लिए हैं, एक ओर युवाओं को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिला, दूसरी ओर विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन प्राप्त हुआ।

280 से अधिक युवाओं की जिंदगी में आया बदलाव

कलेक्टर अमित कुमार बताते हैं कि आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि व्यक्ति को समाज का जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने की यात्रा है। इसी सोच के साथ अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रशासन का लक्ष्य है कि पुनर्वासित युवाओं को ऐसा कौशल मिले, जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। यही कारण है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बदलते बस्तर की नई पहचान

आज सुकमा की यह कहानी केवल सरकारी योजना की सफलता नहीं है। यह उस विश्वास की जीत है, जो कहता है कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए। यह उस संवेदनशील शासन व्यवस्था की कहानी है, जिसने भटके हुए युवाओं में भी संभावनाएं देखीं। यह उस बदलते बस्तर की कहानी है, जहां अब विकास की चर्चा होती है, रोजगार की बात होती है और सपनों को सच करने की कोशिश होती है।

कभी जिन पगडंडियों पर भय चलता था, आज वहां उम्मीद चल रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में ईंट, गारा और भविष्य के सपने हैं। और यही तस्वीर बताती है कि सुकमा में केवल लोगों का पुनर्वास नहीं हो रहा, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण हो रहा हैकृजहां विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता स्थायी शांति की मजबूत नींव बन रहे हैं।

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