रायपुर : कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

रायपुर : कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ

आकस्मिक जरूरतों के लिए अब ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होगी 

ई-कोष से एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से मिलेगा त्वरित लाभ

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन के सभागार में राज्य के शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के ब्रोशर का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शासकीय सेवकों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और सहज वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जब कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर कार्य करेंगे, तभी शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए निजी साहूकारों अथवा ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने की विवशता का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से वे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस, सुरक्षित और पारदर्शी है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त विभाग की टीम को बधाई देते हुए सभी शासकीय सेवकों से विकसित छत्तीसगढ़ और सुशासन के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने के बाद अब वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना प्रारंभ की गई है, जिससे तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के मात्र दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया है तथा 27 हजार कर्मचारी इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी तथा आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक और त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

उल्लेखनीय है कि यह सुविधा ई-कोष प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ऋण स्वीकृति एवं वितरण त्वरित रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त) ऋषभ पराशर, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

एटक और आंगनबाड़ी बहनों की जीत-विभा

एटक और आंगनबाड़ी बहनों की जीत-विभा

बिलासपुर
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 15 सौ रुपए प्रति माह तथा सहायिकाओ का मानदेय मे 750 रुपए की कटौती कर दी गई थी । इसी कटौति के ख़िलाफ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की प्रांतीय महामंत्री जो स्वयं एक कार्यकर्ता है ने 2019 में मध्य प्रदेश सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय जबलपुर में चुनौती दी न्यायालय मे पैरवी बरिष्ट अधिवक्ता अरविन्द श्रीवास्तव ने किया था । 

3 फरवरी 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 48 माह का एरियर्स 1 लाख 20 हजार रूपए प्रति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं 63 हजार रुपए 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करे। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के डबल बेंच के समक्ष अपील की । 8 जुलाई 2026  को उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने सरकार की अपील को ख़ारिज कर दिया।  और एरियर्स भुगतान को यथावत रखा गया है।फ़ैसला आने के बाद याचिकाकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की महासचिव विभा पांडेय ने भावुक होकर कहा कि 2019 में मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ पहली बार याचिका लगाई तो हज़ारों कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का समर्थन एवं आशीर्वाद हमारे साथ था अरविन्द श्रीवास्तव बरिष्ट अधिवक्ता उच्च न्यायालय जबलपुर ने प्रकरण को अध्ययन कर कहा कि ज़रूर हम जीतेंगे और वही हुआ।

विभा पांडेय ने कहा कि ग्रेच्युटी का केस भी हम जीत गये हैं और मानदेय 26 हजार रुपए प्रति माह करने का केस भी जीतेंगे और सभी बहनों का समर्थन , सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा तो हम बहनों को एक सरकारी कर्मचारी का दर्जा भी दिला कर रहेंगे ।

पंजाब के स्कूलों के लिए बारिश को लेकर नई गाइडलाइन, पानी के टैंकों की सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के आदेश

लुधियाना.

पंजाब सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है जहां मानसून का सीजन पूरी तरह से शुरू होने के बाद अब अधिकारियों की नींद टूटी है। विभाग द्वारा स्कूलों में बरसात से बचाव और प्रबंधों को लेकर अब गाइडलाइंस जारी की जा रही हैं और रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं।

दफ्तर डायरैक्टर स्कूल शिक्षा (सैकेंडरी ), पंजाब की ओर से सभी जिला शिक्षा अफसरों को पत्र जारी कर बरसात के मौसम में स्कूलों की इमारतों और विद्यार्थियों की सेहत संभाल संबंधी गाइड लाइंस जारी की गई हैं। इन निर्देशों में साफ लिखा है कि स्कूलों की छतों और पानी की पाइपों की सफाई करवाई जाए, पानी के टैंकों को साफ किया जाए और स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे लाइब्रेरी, क्लासरूम व लैब की दरारों को तुरंत ठीक करवाया जाए ताकि कीड़े-मकोड़े न पनप सकें। अध्यापकों का तर्क है कि सरकार और विभाग के आला अफसरों को बुनियादी बात समझनी चाहिए कि छतों की सफाई, दरारें भरने और पानी की टंकियां साफ करने का काम कड़कती धूप वाले महीनों यानी मार्च और अप्रैल में सही ढंग से हो सकता है। अब जब हर तरफ मूसलाधार बारिश हो रही है, तब छतों पर चढ़कर मुरम्मत करवाना और टंकियां साफ करवाना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि जानलेवा भी है। विभाग ने समय रहते बजट और संसाधन जारी नहीं किए और अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए स्कूलों को सूचियों में उलझा दिया है।

इस पर रोष जताते हुए अध्यापक वर्ग ने कहा कि सरकार केवल कागजों पर आदेश जारी करना जानती है। असलियत में ग्राउंड लेवल पर न तो फॉगिंग के लिए कोई ग्रांट दी गई है और न ही लटकती तारों को ठीक करने के लिए बिजली विभाग का कोई सहयोग मिल रहा है। स्कूलों में फर्स्ट ऐड किट उपलब्ध रखने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों को खुद ही इवेकुएशन प्लान तैयार करने के निर्देश देकर अफसरों ने सारा बोझ अध्यापकों पर डाल दिया है। अध्यापकों का आरोप है कि यह पूरी कवायद सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि कल को अगर बारिश या शॉर्ट सर्किट से कोई हादसा हो जाए, तो अधिकारी यह पत्र दिखाकर कह सकें कि हमने तो पहले ही लिख दिया था।

ऐन मानसून में जानकारी देने से भी नहीं सुधरेंगे हालात 
अध्यापकों का यह भी कहना है कि यदि अब विभाग के दबाव में आकर स्कूलों द्वारा आनन-फानन में यह सारी जानकारी दे भी दी जाए, तो भी इसका इस सीजन में कोई फायदा नहीं होने वाला। अब जब मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और स्कूल परिसरों में पानी जमा होने लगा है, तब कागजों पर कमियां गिनाने या रिपोर्ट भेजने से धरातल पर स्थितियां नहीं बदलेंगी। बारिश के बीच न तो भवनों की मरम्मत संभव है और न ही जलभराव की समस्या का तुरंत कोई बड़ा समाधान निकाला जा सकता है। अध्यापकों के अनुसार, जानकारी जुटाने का यह नाटक सिर्फ फाइलों का पेट भरने के लिए किया जा रहा है, ताकि विभाग यह दिखा सके कि वह काम कर रहा है, जबकि असलियत में इस समय ऐसी रिपोर्टिंग का कोई व्यावहारिक लाभ विद्यार्थियों या अध्यापकों को नहीं मिलने वाला।

CG Police में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 64 इंस्पेक्टरों का तबादला, जारी हुई नई पोस्टिंग सूची

रायपुर.

छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला हुआ है। पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर से इस संबंध में आदेश जारी हुआ है। जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के 64 निरीक्षकों (टीआई) का तबादला किया गया है। यह आदेश पुलिस स्थापना बोर्ड के निर्णय के आधार पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने जारी किया है।

जानकारी के अनुसार, अधिकांश निरीक्षकों का तबादला नक्सल प्रभावित जिलों से मैदानी जिलों में किया गया है, जबकि कई निरीक्षकों को मैदानी क्षेत्रों से बस्तर संभाग के जिलों में पदस्थ किया गया है। यह तबादला तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से लागू रहेगा।

इस ट्रांसफर लिस्ट में बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम, धमतरी, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, सूरजपुर, कोरिया, सरगुजा, जशपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा, सक्ती, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर सहित कई जिलों के निरीक्षक शामिल हैं।

CM साय आज समोदा में देंगे 112 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, कई कार्यों का होगा लोकार्पण-शिलान्यास

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज समोदा दौरे पर रहेंगे। यहां CM साय 112 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात देंगे। 21.67 करोड़ के 67 विकास कार्यों का लोकार्पण के साथ ही 90.34 करोड़ के 29 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।

आरंग और समोदा क्षेत्र में सड़क, भवन, नगरीय विकास और ग्रामीण अधोसंरचना परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी। साथ ही नवा रायपुर के कोटरा भाठा में 18 करोड़ की लागत से बनने वाले 100 बिस्तर वाले अस्पताल का भी भूमिपूजन होगा। कार्यक्रम में डिप्टी CM अरुण साव समेत कई मंत्री मौजूद रहेंगे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। 13 से 17 जुलाई तक चलने वाले इस 5 दिवसीय सत्र में कुल 5 बैठकें होंगी। छोटा सत्र होने के बावजूद सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं, क्योंकि इस बार विधायकों ने जनता से जुड़े कुल 1,033 सवाल लगाए हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी विभिन्न विभागों से संबंधित प्रश्न पूछे हैं। इस बार सदन में नकटी जलाशय और किसानों की समस्याओं समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर घमासान देखने को मिलेगा। इसके अलावा, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए भी कई अन्य मुद्दों को उठाने की पूरी तैयारी है। देखना होगा कि 5 दिनों के सत्र में सरकार को घेरने की विपक्ष की क्या रणनीति रहती है।

रायपुर : तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप

621 समितियों के 7.14 लाख से अधिक संग्राहकों को मिलेगा 162.32 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक

11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए का संग्रहण पारिश्रमिक पहले ही मिल चुका है

रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने 7.14 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का वितरण किया है। राज्य में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को 4,000 रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है, जिससे संग्राहक परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिल रहा है।  तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर 5,500  रुपए प्रति मानक बोरा होने से संग्राहक परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

             वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों और आदिवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल से जुड़े प्रत्येक श्रमिक को उसके श्रम का उचित सम्मान मिले और पारिश्रमिक समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचे।

वर्ष 2023 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण शुरू

            वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि विगत 3 जुलाई को सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत प्रदेश की 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े 7,14,446 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। भुगतान की प्रक्रिया तेजी से जारी है और शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।

संग्रहण पारिश्रमिक का समय पर ऑनलाइन भुगतान

               वन मंत्री ने बताया कि सरकार ने संग्रहण सत्र 2026 में भी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। प्रदेश के लगभग 11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए की संग्रहण पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे लाखों वनवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।

पारदर्शी और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था

              केदार कश्यप ने कहा कि तेन्दूपत्ता प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए राज्य सरकार संग्रहण से लेकर भुगतान तक पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बना रही है, ताकि संग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

वनवासियों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता

              वन मंत्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराना इसी सोच का परिणाम है। आने वाले समय में भी सरकार वनवासियों के हितों की रक्षा, उनकी आय में वृद्धि तथा वन आधारित आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

CG Cabinet Decisions: साय कैबिनेट के 11 बड़े फैसले, कारोबार होगा आसान, निजी विश्वविद्यालयों के नए नियम समेत कई अहम मंजूरियां

रायपुर
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास, निवेश, शिक्षा, कर व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने कारोबार को आसान बनाने, निवेश आकर्षित करने, निजी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाने, बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और किरायेदारी कानून में बदलाव जैसे कई अहम निर्णय लिए।

कैबिनेट ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जाने वाली बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए मौजूदा त्रिपक्षीय समझौते की जगह भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) व्यवस्था लागू करने को मंजूरी दी। इससे एनटीपीसी समेत अन्य केंद्रीय कंपनियों से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी और राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

बैठक में बस्तर फाइटर्स के भर्ती एवं सेवा नियम-2026 में संशोधन को मंजूरी दी गई। साथ ही निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं संचालन संबंधी कानून में संशोधन कर ‘विन्यास निधि’ के स्थान पर ‘रक्षित निधि’ का प्रावधान किया गया है। इससे छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी और विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं यूजीसी मानकों के अनुरूप विकसित की जा सकेंगी।

VAT संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (VAT) संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। इसके तहत वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त किया जाएगा और लंबित मामलों का निपटारा अब राजस्व मंडल करेगा। वहीं जीएसटी संशोधन विधेयक-2026 के जरिए कर व्यवस्था को सरल बनाने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने और उद्योगों को राहत देने का निर्णय लिया गया।

    औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए नया संशोधन विधेयक मंजूर
    देश का पहला Ease of Doing Business विधेयक लाने की तैयारी
    NRDA की One Time Settlement (OTS)-2026 योजना को मंजूरी
    जल प्रदूषण नियंत्रण कानून-2024 को राज्य में लागू करने का प्रस्ताव
    किरायेदारी कानून में संशोधन, मकान किराये पर देने को मिलेगा बढ़ावा
    राजनांदगांव में 2000 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम बनेगा

राज्य में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक-2026 को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति दी। यह कानून लागू होने पर छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा। इसमें डीम्ड परमिशन, स्व-प्रमाणीकरण, थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन और रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में नया कारोबार शुरू करना होगा आसान
साय कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस विधायक को मंजूरी दी गई है. इसके लागू होने के बाद उद्योग और व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया आसान, डिजिटल और समयबद्ध होगी. इसमें कई तरह की अनावश्यक मंजूरी और प्रक्रियाओं को कम करने का प्रावधान है. इसके साथ ही कैबिनेट की बैठक में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन कानून में बदलाव को मंजूरी दी गई है. जिससे राज्य में नए उद्योग लगाने और निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा. साथ ही कैबिनेट ने जीएसटी कानून में बदलाव को मंजूरी दी है. इसका मकसद टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना और कारोबारी खासकर निर्यातकों को रिफंड मिलने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। 

इसके अलावा 13 जुलाई से शुरू होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर भी कैबिनेट की बैठक में चर्चा की गई. चर्चा के बाद छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने कई अहम विधायकों के प्रावधानों को मंजूरी दी. बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी मंत्रियों को अपने-अपने विभागों के प्रश्नों के सही और उचित उत्तर तैयार करने के निर्देश भी दिए. साथ ही पूरी तैयारी के साथ विधानसभा में विपक्ष के सवालों के जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं। 

मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण ‘NRDA’ की वन टाइम सेटलमेंट (OTS)-2026 योजना को भी मंजूरी दी। इससे भूखंड आवंटित लोगों को ब्याज और अधिभार में राहत मिलेगी तथा लंबित परियोजनाओं को पूरा करने और भूमि के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा कैबिनेट ने जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण संशोधन अधिनियम-2024 को राज्य में लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम-2011 में संशोधन कर मकान मालिक और किरायेदारों के अधिकारों को स्पष्ट करने तथा किरायेदारी विवादों के त्वरित समाधान का रास्ता तैयार किया गया।

बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राजनांदगांव में 2000 सीटों की क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि आवंटित करने की स्वीकृति भी दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

1.    मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए वर्तमान त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement) के स्थान पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (Direct Debit Mandate-DDM) व्यवस्था लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 

इस निर्णय से एनटीपीसी सहित अन्य सीपीएसयू से विद्युत आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी तथा भुगतान सुरक्षा की व्यवस्था आरबीआई के वर्तमान प्रावधानों के अनुरूप हो सकेगी। राज्य शासन पर इससे कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि वितरण कंपनी द्वारा भुगतान की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी तथा आवश्यक होने पर पहले लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

2.    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स), फाइटर आरक्षक सेवा (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति दी गई है। 

3.    मंत्रिपरिषद् द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की अनुशंसाओं के अनुरूप निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन बनाया गया है। 

इसके तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान लागू करने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इसमें आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं को यूजीसी एवं सक्षम नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। 

4.    मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने के साथ ही उससे संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। 

जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी द्वितीय अपीलों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना भी हो चुकी है। ऐसे में पृथक वाणिज्यिक कर अधिकरण की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस संशोधन के बाद अधिकरण में लंबित प्रकरणों का स्थानांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा, जिससे अपीलों के निराकरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी हो सकेगी।

5.    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। इससे  कर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, करदाताओं को सुविधा मिलेगी साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

6.    मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को तैयार करने में अन्य अग्रणी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का भी अध्ययन किया गया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

7.    मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल एवं समयबद्ध बनाना है। इस तरह का विधेयक लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा। 

इसके अंतर्गत डीम्ड परमिशन (Deemed Permission), स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification), तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party Verification), जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) तथा दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इससे निवेशकों के लिए अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी, कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी तथा राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी। 

8.    मंत्रिपरिषद् ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों पर देय ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने हेतु वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी दी है। 

इस योजना से पात्र आबंटितियों को निर्धारित शर्तों के तहत बकाया देयों के नियमितीकरण, परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने में मदद मिलेगी, जो विकास करने के इच्छुक है उनको अवसर मिलेगा और जो इच्छुक नहीं है, वे समय पर आबंटित भूमि को सरेंडर कर सकेंगे। इस निर्णय से मुकदमेबाजी में कमी आएगी, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। 

9.    मंत्रिपरिषद् ने जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में अंगीकार करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 

भारत सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन का उद्देश्य पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन पर आर्थिक दंड का प्रावधान तथा दंड निर्धारण एवं अपील की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है। इस निर्णय से राज्य में पर्यावरणीय नियमन को सरल बनाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

10.    मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा देना और किरायेदारी से जुड़े विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस संशोधन में भवन स्वामी और किरायेदार के अधिकार व दायित्व स्पष्ट किए गए है, साथ ही संपत्ति प्रबंधक, किराया प्राप्ति, अधिकरण के अध्यक्ष की पदावधि और न्यायालय शुल्क से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए है। यह संशोधन भारत सरकार के आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के अनुरूप है।

11.    मंत्रिपरिषद् द्वारा राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

विधानसभा मानसून सत्र में BJP का बड़ा गेमप्लान! रणनीति जान विपक्ष भी रहेगा सतर्क

रायपुर
विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने मंत्रियों और विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बार सदन में केवल उपस्थिति दर्ज कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर सदस्य को तथ्यों, आंकड़ों और अपने विधानसभा क्षेत्र की पूरी जानकारी के साथ तैयार रहना होगा।

नवा रायपुर में आयोजित विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों ने करीब डेढ़ घंटे तक संभावित राजनीतिक और विधानसभा की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विपक्ष के किसी भी सवाल या आरोप का जवाब सरकार की ओर से तथ्यों और प्रमाणों के साथ दिया जा सके।

पार्टी नेतृत्व ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं की प्रगति, स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान से जुड़ी अद्यतन जानकारी लेकर सदन में पहुंचें। यदि विपक्ष किसी योजना, विभाग या क्षेत्र को लेकर सवाल उठाता है तो उसका जवाब पूरी तैयारी और विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर दिया जाए।

बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। नेताओं को यह संदेश दिया गया कि सदन के भीतर और बाहर सरकार का पक्ष एक समान और स्पष्ट तरीके से रखा जाए, ताकि किसी मुद्दे पर विरोधाभासी बयान सामने न आएं। मीडिया से बातचीत के दौरान भी केवल तथ्यात्मक और प्रमाणित जानकारी साझा करने की सलाह दी गई।

सूत्रों के अनुसार, कानून-व्यवस्था, किसानों के हित, आदिवासी क्षेत्रों का विकास, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं और राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं रणनीति के केंद्र में रहीं। माना जा रहा है कि विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा, इसलिए पहले से विस्तृत तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

13 से 17 जुलाई तक प्रस्तावित मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस पहले ही कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने के संकेत दे चुकी है। ऐसे में भाजपा की कोशिश केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से सदन में प्रस्तुत करने की भी है।

इस बीच रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर बना विवाद भी मानसून सत्र में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। इस प्रकरण पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

हालांकि रणनीतिक बैठक में कुछ वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हो सके। जानकारी के अनुसार, कुछ मंत्री और विधायक पारिवारिक कार्यक्रमों तथा पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण बैठक में उपस्थित नहीं रहे।अब सबकी नजरें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां सत्ता पक्ष अपनी तैयारियों की परीक्षा देगा और विपक्ष सरकार को विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया की त्वरित पहल से आकाशीय बिजली से मृत व्यक्ति के परिजनों को मिली 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आकाशीय बिजली गिरने से मृत व्यक्ति के आश्रित को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस पहल से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है और शासन की संवेदनशील कार्यप्रणाली का एक और उदाहरण सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, आकाशीय बिजली गिरने से हुई मृत्यु के बाद मुआवजा राशि लंबित होने पर मृतक के परिजनों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन प्रस्तुत कर आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में राजस्व विभाग द्वारा प्रकरण का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने मृतक के आश्रित  संजय कुजूर, ग्राम झिक्की, तहसील बगिया, जिला जशपुर के पक्ष में 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत करने की अनुशंसा कलेक्टर जशपुर को भेजी। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की गई।आर्थिक सहायता मिलने से मृतक के परिजनों को कठिन समय में संबल मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन देने के बाद उनके मामले पर तत्काल संज्ञान लिया गया और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होने से उन्हें समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकी।

उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर राहत मिल रही है और शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने 7.14 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का वितरण किया है। राज्य में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को 4,000 रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है, जिससे संग्राहक परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिल रहा है।  तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर 5,500  रुपए प्रति मानक बोरा होने से संग्राहक परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

             
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों और आदिवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल से जुड़े प्रत्येक श्रमिक को उसके श्रम का उचित सम्मान मिले और पारिश्रमिक समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचे।

वर्ष 2023 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण शुरू
            
वन मंत्री  केदार कश्यप ने बताया कि विगत 3 जुलाई को सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत प्रदेश की 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े 7,14,446 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। भुगतान की प्रक्रिया तेजी से जारी है और शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।

संग्रहण पारिश्रमिक का समय पर ऑनलाइन भुगतान
               
वन मंत्री ने बताया कि सरकार ने संग्रहण सत्र 2026 में भी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। प्रदेश के लगभग 11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए की संग्रहण पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे लाखों वनवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।

पारदर्शी और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था
        
 केदार कश्यप ने कहा कि तेन्दूपत्ता प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए राज्य सरकार संग्रहण से लेकर भुगतान तक पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बना रही है, ताकि संग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

वनवासियों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
              
वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराना इसी सोच का परिणाम है। आने वाले समय में भी सरकार वनवासियों के हितों की रक्षा, उनकी आय में वृद्धि तथा वन आधारित आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

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