मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्लासरूम और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए तय होगी प्राथमिकता
 
रायपुर
मुख्य सचिव वि
कासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी में छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वार्षिक कार्य योजना और बजट वर्ष 2026-27 का प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से समग्र शिक्षा अंतर्गत स्वीकृत नवीन कार्यों का युक्तियुक्तकरण उपरांत स्थल परिवर्तन एवं विविध बिन्दुओं के प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत अनुमोदित किये गये। स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत विविध निर्माण कार्यों को शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराये जाने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

            बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने 2026-27 के वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट प्लान को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंनें शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया।  मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बजट प्लान में केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि लर्निंग आउटकम सुधारने वाले नवाचारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए स्कूलों में संसाधन, शिक्षक और तकनीक तीनों मजबूत करने होंगे।  

छात्रों के ड्राप आउट को राकने करें प्रयास

            मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में छात्रों के ड्राप आउट की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाये। माध्यमिक-उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब स्थापित होंगी। सभी स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था होगी।  ड्रॉपआउट रोकथाम कक्षा 1, 8 और 10 में ड्रॉपआउट दर शून्य करने के लिए विशेष ट्रैकिंग सिस्टम बनेगा। शाला त्यागी बच्चों को मुख्यधारा में लाने हेतु ब्रिज कोर्स चलेंगे।

शिक्षक प्रशिक्षण

           राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसार सभी शिक्षकों का फेज-वाइज प्रशिक्षण दिया जाये। गणित-विज्ञान-अंग्रेजी के लिए विशेष मास्टर ट्रेनर पूल तैयार होगा। बुनियादी सुविधा जरूरत वाले स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, बालिका शौचालय, पेयजल, बिजली और बाउंड्रीवॉल के काम प्राथमिकता से होंगे।  

समावेशी शिक्षा

         दिव्यांग बच्चों के लिए संसाधन कक्ष, थेरेपी यूनिट और विशेष टीएलएम का प्रावधान बजट में रखा जाएगा।  कौशल विकासरू कक्षा 9 से 12 तक वोकेशनल एजुकेशन को मजबूत किया जाएगा। कृषि, आईटी, हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे ट्रेड में स्थानीय जरूरत के अनुसार कोर्स चलेंगे।

नीट यूजी में प्रवेश प्राप्त करने हेतु प्रदेश के संगठित क्षेत्र के बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई

जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

          वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

         बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

         विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

         यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

        वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तेंदूपत्ता अग्निकांड पर बड़ा एक्शन, बीजापुर के DFO हटाए गए

रायपुर.

बीजापुर जिले में हुए तेंदूपत्ता अग्निकांड को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत की कमाई को नुकसान पहुंचाने वाली इस गंभीर घटना पर मंत्री कश्यप ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बीजापुर के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय रायपुर में संबद्ध किया गया है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन में अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया डीएफओ नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई को शासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वनवासियों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन मंत्री कश्यप ने दो टूक कहा कि तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं, हजारों आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है।

उनकी मेहनत और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री कश्यप ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, समयबद्ध और तथ्यात्मक होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

अनुभवी अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
नवनियुक्त डीएफओ जाधव सागर रामचंद्र वर्तमान में राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। दंतेवाड़ा जिले में उनके प्रभावी कार्य और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए शासन ने बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है।

10 करोड़ से अधिक नुकसान का प्रारंभिक अनुमान
उल्लेखनीय है कि 25 मई 2026 को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में भीषण आग लगने से विभिन्न समितियों का संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 10 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। वास्तविक नुकसान का विस्तृत भौतिक सत्यापन वर्तमान में जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत
शासन ने घटना के कारणों, गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों के पालन, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तथा संभावित वित्तीय क्षति सहित सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वन संपदा की सुरक्षा और आदिवासी हितों की रक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी

वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई

जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

          वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

         बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

         विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

         यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

        वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

डी-लिस्टिंग पर छिड़ी सियासी बहस, UD मिंज ने किया विरोध; अरविंद नेताम बोले- होकर रहेगी

रायपुर.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम के मंच पर डी-लिस्टिंग की मांग के बाद छत्तीसगढ़ में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. अन्य धर्म अपना चुके लोगों को एसटी सूची से बाहर करने की मांग की जा रही है. इस बहस में एक और समर्थन तो दूसरी तरफ खुलकर विरोध भी किया जा रहा है. 

देर-सवेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी : नेताम
छत्तीसगढ़ से इस मांग का वनवासी सुरक्षा मंच के बैनर तले पूर्व मंत्री गणेशराम भगत और सांसद भोजराम नाग नेतृत्व कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम भी कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से वह नहीं जा पाए. उन्होंने डी-लिस्टिंग को लेकर कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर तैयारी की गई है और समाज की भावनाओं के अनुरूप यह मांग लगातार मजबूत हो रही है. देर-सबेर डी-लिस्टिंग होकर रहेगी. धर्मांतरण के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में कड़े कानून की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं. अरविन्द नेताम ने कहा कि यह एक संवेदनशील विषय है, जो धीरे-धीरे राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा.

डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध
जशपुर में डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध का माहौल है. पूर्व संसदीय सचिव यूडी मिंज और गीता उरांव के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया. यूडी मिंज का कहना है कि डी-लिस्टिंग की मांग संविधान की भावना के विपरीत है और इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. धर्म परिवर्तन के बाद भी आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान खत्म नहीं होती है. जशपुर जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है और समाज की पहचान उसके सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी हुई है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस सरकार के दौरान रौतिया समेत अन्य समाजों को आदिवासी वर्ग में शामिल करने के लिए टीआरआई के माध्यम से प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था.

क्यो होती है डी-लिस्टिंग ?
आसान भाषा में डी-लिस्टिंग यानी लिस्ट से बाहर करना. आदिवासियों की इस मांग के सन्दर्भ में डीलिस्टिंग का मतलब, किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है.

क्या है संविधान का अनुच्छेद 342?  
केंद्र सरकार से आदिवासी नेता संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करने की मांग कर रहे हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 (article 342) राष्ट्रपति को राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद उस विशिष्ट राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जनजाति (एसटी) माने जाने वाली जनजातियों या आदिवासी समुदायों को अधिसूचित करने का अधिकार देता है.

छत्तीसगढ़ में निवेश को मिलेगा बढ़ावा, भूमि उपयोग और भवन अनुमति प्रणाली होगी पूरी तरह डिजिटल

रायपुर.

भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों का दायरा अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. अब केंद्र सरकार का फोकस शहरी नियोजन (Urban Planning), भूमि उपयोग (Land Use) और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर है.

इसी दिशा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को महत्वपूर्ण सुधार लागू करने की सिफारिश की गई है. इन सुधारों का उद्देश्य शहरों को अधिक लचीला, निवेश-तैयार और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियां और आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल औद्योगिक नीति या कर छूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोई राज्य निवेशकों को कितनी तेज, पारदर्शी और सरल स्वीकृति प्रणाली उपलब्ध कराता है. इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य के निवेश वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

“जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर
कैबिनेट सचिवालय ने राज्यों को “डिमांड-ड्रिवन भूमि उपयोग प्रणाली” (Demand-Driven Land Use System) अपनाने की सलाह दी है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” अर्थात “जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमति प्राप्त है” के सिद्धांत पर आधारित है. इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि अन्य सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी. इस व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल और लंबी प्रक्रियाएं कम होंगी तथा निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी. त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. त्रिपुरा ने वर्ष 2025 में “Negative List of Industries” लागू कर इस मॉडल को व्यवहार में उतार दिया है.

Flexible Zoning और Mixed Land Use को मिल रहा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन और निर्माण स्वीकृति प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा “Flexible Zoning Framework” को बढ़ावा देते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) को प्रोत्साहित किया जा रहा है. संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन एवं ब्लू श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड एवं ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा. उद्योगों का वर्गीकरण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी गई है. इसके लिए अधिकतम FAR 2.0 तथा 70 प्रतिशत भू-आच्छादन की अनुमति होगी. यह व्यवस्था “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने के साथ उद्योग आधारित किफायती आवास परियोजनाओं को गति देगी. इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध हो सकेंगे, परिवहन लागत कम होगी तथा शहरों में अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी.

ऑनलाइन सेवाओं और Deemed Approval से निवेशकों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU – Change of Land Use) प्रक्रिया को भी सरल और डिजिटाइज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों तथा उनकी बाहरी सीमाओं से लगे निर्धारित क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त की गई है. इससे भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुमोदन स्तरों का युक्तिकरण होगा और निवेशकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो प्रणाली, सभी NOC को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने तथा निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति न मिलने पर “Deemed Approval” जैसे प्रावधानों की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना होगी आसान
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में भी युक्तिकरण किया है. संशोधित नियमों के अनुसार 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन एवं व्हाइट श्रेणी के MSME उद्योगों के लिए न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर तथा 0.1 से 0.25 हेक्टेयर तक के उद्योगों के लिए 9 मीटर निर्धारित की गई है. इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा औद्योगिक क्लस्टर विकास को गति मिलेगी. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

Third Party Inspection और Self Certification से घटेगा समय
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण स्वीकृतियों में देरी को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने निरीक्षण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 96 एवं 98 में संशोधन कर प्लींथ सर्टिफिकेट, Completion Certificate और Occupancy Certificate जारी करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है. नए प्रावधानों के तहत निरीक्षण 4 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी. निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा. इसके साथ ही तृतीय पक्ष (Third Party) एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त निरीक्षण तथा आर्किटेक्ट आधारित Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है. इससे निर्माण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, भ्रष्टाचार और प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी तथा उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को गति मिलेगी.

ALBPMS सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
राज्य सरकार ने भवन अनुमति प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब ऑनलाइन आवेदन, एकीकृत भुगतान प्रणाली, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR द्वारा स्वचालित भवन परीक्षण, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्णता की ई-सूचना तथा डिजिटल Occupancy एवं Completion Certificate जारी करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और निवेशकों को तेज एवं सरल सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही विभागीय समन्वय बेहतर होगा तथा नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

छत्तीसगढ़ को मिल सकते हैं अनेक दीर्घकालिक लाभ

  • निवेश, रोजगार, अधोसंरचना और शहरी विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
  • विशेषज्ञों के अनुसार इन सुधारों के लागू होने से छत्तीसगढ़ को अनेक दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं.
  • उद्योग स्थापना और परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया तेज होगी.
  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और निजी निवेश आकर्षित होगा.
  • औद्योगिक एवं शहरी अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी.
  • MSME और स्टार्टअप इकाइयों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी.
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
  • नियोजित शहरीकरण और आधुनिक टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा.
  • डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में निवेशक केवल प्रोत्साहनों को नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की गति, पारदर्शिता और सरलता को भी प्राथमिकता देंगे. ऐसे में शहरी नियोजन और निर्माण अनुमति प्रणाली में सुधार छत्तीसगढ़ को निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकते हैं. राज्य में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक और शहरी विस्तार को देखते हुए ये सुधार भविष्य की आवश्यकता बन चुके हैं. समय रहते इन सुधारों को लागू कर छत्तीसगढ़ आधुनिक, निवेश-अनुकूल और तेज विकास वाले शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है.

भीषण गर्मी का असर, सनबर्न के मरीज बढ़े; त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें

जगदलपुर.

बस्तर में बढ़ती गर्मी अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की त्वचा और सेहत पर असर दिखाने लगी है. 40 डिग्री के करीब पहुंचते पारे ने सनबर्न और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ा दी है. मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक हर 100 मरीजों में 10 से 15 मरीज लू और गर्मी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं. सीधी धूप में निकलने वाले लोगों की त्वचा लाल और सूखी पड़ रही है. पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के असर से त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें बढ़ रही हैं. मौसम में बादल छाने के बावजूद उमस और तपिश से राहत नहीं मिल रही. बच्चों और बुजुर्गों पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.

अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से पहले पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है. साथ ही पानी में नमक और नींबू मिलाकर पीने और सूती कपड़े पहनने को कहा गया है. बस्तर में अब गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती नजर आ रही है.

MP के 2 IPS अधिकारियों को केंद्र की बड़ी जिम्मेदारी, अनुभव का मिला बड़ा इनाम

रायपुर 
 प्रदेश के 2 IPS अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया है। नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी सौगात मिली है। इन दोनों अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल किया गया है जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी जिम्मेवारी
छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को यह अहम जिम्मेदारी मानी जा रही है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है।  2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण के केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल होने को एक बड़ा मुकाम माना जा रहा है।

आपको बता दें कि आईपीएस नीतू कमल मौजूदा समय में CBI  में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि डी श्रवण राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  दोनों अधिकारियों के अनुभव को देखते हुए केंद्र ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

गृह मंत्रालय की ओर से  जारी सूची में देश से वर्ष 2001 से 2008 बैच तक के 67 आईपीएस अधिकारियों को आईजी और डीआईजी स्तर के पदों के लिए इंपैनल किया गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को ये सौगात मिली है जो एक अहम बात मानी जा रही है।

लंबित मामलों पर बड़ा एक्शन, 24 राशन दुकानों के लाइसेंस निरस्त

दुर्ग.

जिले की 24 राशन दुकानों का संचालन लंबे समय से अटैचमेंट में चल रहा था। कोर्ट में प्रकरण लंबित होने के कारण इन दुकानों के संचालन के लिए नई समितियों का निर्धारण नहीं हो पा रहा था। कोर्ट से प्रकरणों के निराकरण के बाद इन सारी दुकानों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 16 के तहत यह कार्यवाही की गई है। निरस्त दुकान-महिला स्व सहायता समूह, संगवारी खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उप सेवा सह समिति, नवीन महिला स्व सहायता समूह, शंकरा महिला स्व सहायता समूह, जय शक्ति महिला स्व सहायता समूह, जय श्री कृष्ण महिला स्व सहायता समूह, दुर्ग सहकारी विपणन समिति, कृषक सेवा सहकारी समिति कोहका, जय सदाराम महिला स्व सहायता समूह, मां अन्नपूर्णा स्व सहायता समूह, सामुदायिक विकास समिति भिलाई, एकता महिला स्व सहायता समूह, सामुदायिक विकास समिति भिलाई, बीएसपी प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार, सहकारी उपभोक्ता भण्डार भिलाई, विन्ध्यवासिनी महिला स्व सहायता समूह, नवीन प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भण्डार, स्टील नगर महिला स्व सहायता समूह, मं जय भवानी महिला स्व सहायता समूह, इस्पात कर्मचारी कन्ज्यूमर कोआपरेटिव स्टोर्स भिलाई, सामुदायिक विकास समिति रविदास नगर भिलाई, संतोषी महिला स्व सहायता समूह, भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ केम्प 1 भिलाई और प्रेरणा महिला स्व सहायता समूह शामिल हैं।

शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन के लिए आवेदन केवल संबंधित वार्ड की स्थानीय संस्था द्वारा ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। 15 जून तक आवेदन किया जा सकता है। खाद्य नियंत्रक अनुराग सिंह भदौरिया ने बताया कि पूर्व में लंबित मामलों के निराकरण के बाद ही दुकानों के आवंटन को निरस्त किया गया है। नए का निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप आवंटन किया जाएगा।

सड़क नहीं तो हेलीकॉप्टर दो! सुकमा गांव वालों की अमित शाह से अनोखी मांग

सुकमा 
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा और छत्तीसगढ़ के दूरदराज के इलाकों में विकास ही विकास शुरू हो जाएगा। यहां नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन के लगभग 2 महीने बीत चुके हैं। अब छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एक गांव से लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक अजीब मांग कर दी है। गांव के लोगों का कहना है कि या तो हमारे लिए सड़क बनवा दें, और अगर सड़क नहीं बनवा सकते हैं तो हमारे लिए गांव में ही हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जाए।

मामला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के मारुकी गांव का है। यहां सालों से चली आ रही सड़कों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अपनी पीड़ा दिखाते हुए स्थानीय लोगों ने ये तरीका अपनाया है। गांव के लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि उनके गांव को जोड़ने वाली सड़क के प्रोजेक्ट का काम पूरा करवाया जाए। अगर वो ऐसा नहीं कर पाते हैं तो गांव के लोगों की मेडिकल इमरजेंसी के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था करवाई जाए।

क्या बोले सरपंच
इस मामले पर बात करते हुए मारुकी गांव के सरपंच ने कहा कि उनके गांव की सड़क बनवाने के लिए 10 सालों से प्रयास कर रहे हैं। सरपंच ने बताया कि गांव की सड़क बनवाने के लिए गांव के लोगों ने बताया कि सड़क बनवाने के लिए उन्होंने स्थानीय अधिकारियों, जिले के अधिकारियों और यहां तक कि कलेक्टर ऑफिस तक मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सड़क को बनाने का टेंडर 10 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है।

राशन लाने के लिए खर्च करने पड़ते हैं 100 रुपए
इस मामले पर बात करते हुए स्थानीय ने बताया कि सरकार द्वारा दिया जाने वाला राशन लाने के लिए भी उन्हें पैसे खर्च करने पड़ते हैं। लोगों का कहना है कि राशन लाने के लिए उन्हें ट्रैक्टर से जाना पड़ता है। ट्रैक्टर वाला उनसे 100 रुपए किराया ले लेता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार उन्हें फ्री में राशन दे रही है, लेकिन सड़क खराब होने की वजह से उन्हें ट्रैक्टर का किराया खर्च जाना पड़ता है। अब गांव के लोगों ने यहां सड़क बनाने के लिए अमित शाह को पत्र लिखा है।

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