टीएस सिंहदेव के बयान पर CM साय का पलटवार, बोले- जनता का भरोसा खो चुकी है कांग्रेस

रायपुर.

कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर दिए गए पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के बयान पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि ये हमारा देखने का काम नहीं है, कांग्रेस इसको देखे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कितना भी कर लें, जनता का विश्वास नहीं जीत पाएगी।

सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस देश की जनता का विश्वास खो चुकी है और लगातार सिमटती जा रही है, क्योंकि ये लोग हमेशा जनता को ठगने का काम करते हैं। इनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है, जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी वर्ष 2018 में प्रदेश की जनता ने इन्हें जनादेश दिया था, लेकिन पांच वर्षों तक इन्होंने केवल जनता को ठगने और प्रदेश को लूटने का काम किया। इसका परिणाम उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा।

अब ये लोग कुछ भी कर लें, जनता का विश्वास खो चुके हैं। वहीं, एलपीजी सिलेंडर के बढ़े दामों को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की जो स्थिति है, उससे हम सब वाकिफ हैं। पूरा विश्व इससे प्रभावित है। हम सबको इसमें सहयोग करना चाहिए और टीम भावना के साथ अपने देश के लिए खड़ा रहना चाहिए।

बिलासपुर से बेंगलुरु जाना हुआ आसान, यात्रियों के लिए चलेगी वन-वे समर स्पेशल ट्रेन

रायपुर.

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान यात्रियों को राहत देने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बिलासपुर और बेंगलुरु के बीच स्पेशल समर ट्रेन चलाने का फैसला किया है. यह ट्रेन बिलासपुर और बेंगलुरु छावनी के बीच एक फेरे के लिए संचालित की जाएगी. इससे यात्रियों को  कन्फर्म बर्थ के साथ सुगम और आरामदायक यात्रा सुविधा मिल सकेगी.

जानकारी के मुताबिक, गाड़ी संख्या 08263 बिलासपुर-बेंगलुरु छावनी समर स्पेशल 12 जून (शुक्रवार) को बिलासपुर से रवाना होगी. यह ट्रेन एक तरफा (वन-वे) सेवा के रूप में संचालित की जाएगी. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र में इस विशेष ट्रेन का ठहराव बिलासपुर, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़ और गोंदिया स्टेशनों पर दिया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा.

12 जून को बिलासपुर से होगी रवाना 
समर स्पेशल ट्रेन में कुल 18 कोच होंगे, जिनमें 2 एसएलआरडी, 6 सामान्य (जनरल) तथा 10 स्लीपर कोच शामिल हैं.  इस व्यवस्था के कारण दक्षिण भारत की ओर यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सीटें उपलब्ध हो सकेंगी. ट्रेन 12 जून को दोपहर 2 बजे बिलासपुर से रवाना होगी. इसके बाद यह भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, डोंगरगढ़ और गोंदिया होते हुए महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के विभिन्न प्रमुख स्टेशनों से गुजरते हुए दूसरे दिन रात 8 बजे बेंगलुरु छावनी स्टेशन पहुंचेगी.

सुशासन तिहार में आज सीएम साय, जन समस्या निवारण शिविर पहुंचकर परखेंगे योजनाओं की जमीनी हकीकत

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार 2026 के तहत विभिन्न जिलों का दौरा कर सकते हैं. किसी भी गांव में मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतर सकता है. इस दौरान मुख्यमंत्री जन समस्या निवारण शिविर में शामिल होकर जनता से योजनाओं का फीडबैक लेंगे. साथ ही समीक्षा बैठक भी करेंगे. इसके बाद शाम 5 बजे रायपुर के जोरा मॉल में भाग्य विधाता फिल्म देखेंगे.

मुख्यमंत्री आज गुरुवार को आयोजित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित निरीक्षण, जन समस्या निवारण शिविर एवं समीक्षा बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान वे आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था का जायजा लेने के साथ अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे।

कार्यक्रम के तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं और जनहित कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संबंध में आवश्यक निर्देश देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 5 बजे निर्धारित अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से बदल रही किसानों की तस्वीर, जशपुर के सुधीर लकड़ा बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (च्डक्क्ज्ञल्) जशपुर जिले में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की कृषि-केंद्रित नीतियों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई सुविधाएं और कृषि विशेषज्ञों का निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। इसका परिणाम यह है कि किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के किसान  सुधीर लकड़ा इस परिवर्तन की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। लगभग 3.40 हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामी  लकड़ा को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ मिला है, जिससे उनकी खेती अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बनी है। आत्मा योजना के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, कृषि यंत्रों एवं ट्रैक्टर की सुविधा तथा सौर सुजला योजना के तहत सोलर सिंचाई व्यवस्था ने उनकी खेती को नई दिशा दी है। कृषि विभाग द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक खेती की विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनकी उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें पारंपरिक धान फसल के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का उत्पादन की सलाह दी। विभाग से प्राप्त 8 किलोग्राम निःशुल्क उन्नत बीज का उपयोग कर उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की। वैज्ञानिक पद्धति, संतुलित पोषण प्रबंधन और समय-समय पर तकनीकी सलाह के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की नई पहल

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से जिले में फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि मशीनीकरण, भंडारण क्षमता विकास तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य अनाज, दलहन एवं तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीजों और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से कृषि उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देकर मानसून पर निर्भरता कम करने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को घटाने तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

किसानों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
 
सुधीर लकड़ा बताते हैं कि योजना से प्राप्त उन्नत बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी है। बेहतर उत्पादन के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हित में संचालित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना आज जशपुर सहित प्रदेश के किसानों के लिए समृद्धि का नया माध्यम बन रही है। आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय सहयोग के माध्यम से यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन कर रही है।

जल संरक्षण का महाअभियान: मनरेगा से गांवों में बढ़ रहा जल भंडार, हरियाली और आजीविका

रायपुर

 जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक जनअभियान आकार ले रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन, हरित विकास और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संरक्षण अब केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभागीदारी से संचालित एक व्यापक सामाजिक पहल के रूप में विकसित हो रहा है।

अभियान के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें तालाब, डबरियां, चेकडैम, जल संवर्धन संरचनाएं, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, खेत तालाब और अन्य जल संरक्षण कार्य शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि में रोकना, भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को सुदृढ़ करना है।

इन कार्यों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस प्रकार जल संरक्षण का यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है।

जल संरक्षण से आजीविका का सृजन

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाज के संवेदनशील और कमजोर वर्गों की निजी भूमि पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर मिल रहे हैं।

इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। इन जल संरचनाओं को स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों की आजीविका से जोड़ने की पहल की गई है, जिससे जल संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है।

पहाड़ियों पर ट्रेंच, मैदानों में जल संचयन

प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में ढलान और पहाड़ी भूभागों पर स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तेज बहाव को रोककर उसे भूमि में समाहित होने का अवसर देती हैं। इससे मिट्टी का कटाव कम होता है, भू-जल स्तर में सुधार होता है और वृक्षारोपण को आवश्यक नमी उपलब्ध होती है। जल संरक्षण और वृक्षारोपण के इस समन्वित प्रयास से हरित आवरण में वृद्धि हो रही है तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिल रही है।

तकनीक से जल संरक्षण को नई दिशा

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की एक प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है।

भू-जल स्तर की निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का नियमित मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर जल स्तर की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

पारदर्शिता और जनभागीदारी का मॉडल

मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत और पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों की भागीदारी और निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भागीदारी से साझेदारी की ओर

जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम सभाओं, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज यह दिखा रहा है कि जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर ग्रामीण विकास का एक स्थायी और समावेशी मॉडल विकसित किया जा सकता है। यह अभियान केवल पानी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि गांवों में समृद्धि, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन की नई नींव रख रहा है।

जशपुर में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, नवाचारों से मजबूत हो रहा भू-जल संवर्धन

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर  रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जशपुर की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन, मनरेगा से रोजगार और विकास को मिली नई गति

रायपुर

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जशपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता करते हुए रोजगार की मांग दर्ज कराई तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

रोजगार दिवस के दौरान ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त करने की प्रक्रिया, जॉब कार्ड निर्माण एवं संशोधन, कार्य मांग पंजीयन, मजदूरी भुगतान प्रणाली तथा योजना के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, रोजगार सहायकों, तकनीकी सहायकों और पंचायत कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

इस दौरान आगामी कार्यों के लिए रोजगार मांग आवेदन प्राप्त किए गए तथा पात्र परिवारों के नवीन जॉब कार्ड बनाने और पुराने जॉब कार्डों के अद्यतन का कार्य भी किया गया। पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायतों और समस्याओं का त्वरित निराकरण करते हुए ग्रामीणों को योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।

जल संरक्षण कार्यों पर विशेष फोकस

रोजगार दिवस में मनरेगा के अंतर्गत संचालित जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। बताया गया कि जिले में सोक पिट, कंटूर ट्रेंच, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), नवा तरिया, आजीविका डबरी, तालाब निर्माण एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से एक ओर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भू-जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

इन कार्यों से जल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। मनरेगा के माध्यम से जिले में विकास और आजीविका सशक्तिकरण के दोहरे उद्देश्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।

महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, युवाओं तथा कमजोर वर्गों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मनरेगा एवं आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्हें विभिन्न स्वरोजगार और रोजगारोन्मुखी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास किए गए।

जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे रोजगार दिवस का उद्देश्य प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना, योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा ग्राम स्तर पर विकास कार्यों में जनभागीदारी को मजबूत करना है। रोजगार दिवस के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी मिलने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रभावी मंच उपलब्ध हो रहा है।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर सरगुजा संभाग में ‘आकार-2026’ का आयोजन

रायपुर

 संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा “आकार-2026” पारंपरिक शिल्प एवं विविध कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 8 जून से 14 जून 2026 तक सरगुजा संभाग के उदयपुर और लखनपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रदेश की लोक कला परंपराओं से जोड़ना तथा उनमें पारंपरिक शिल्प और कला के प्रति रुचि विकसित करना है।

14 पारंपरिक कला विधाओं का दिया जाएगा प्रशिक्षण           

 संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र, चित्रकला, क्ले आर्ट, म्यूरल आर्ट, हस्तकढ़ाई, ड्राई फ्लावर आर्ट, कोरिया कला, रजवार मिट्टी चित्र, मेहंदी, मृदा शिल्प, गोदना कला और बांस शिल्प सहित कुल 14 पारंपरिक कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन विधाओं में प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों और पारंगत कला गुरुओं द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को कला के व्यावहारिक एवं तकनीकी पक्षों की जानकारी मिल सके।

प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया हो चुकी है 6 जून से प्रारंभ       

 शिविर के अंतर्गत उदयपुर में प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित होगा, जबकि लखनपुर में पीएम स्कूल परिसर में शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया 6 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित शुल्क जमा कर इसमें भाग ले सकते हैं।

विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना       

“आकार-2026” का उद्देश्य केवल पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रदेश की विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवा कलाकारों को अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे और भविष्य में स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण शिविर के लिए पंजीयन शुल्क मात्र 100 रुपये निर्धारित किया गया है। दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को शुल्क में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम 

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा उन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी में लोक कला और शिल्प परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। “आकार-2026” न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी साबित होगा।

  

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सायकल चलाकर फिट रहने और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

रायपुर

 उप मुख्यमंत्री  अरुण साव विश्व सायकल दिवस पर आज जगदलपुर में आयोजित ‘सन्डे ऑन सायकल’ (Sunday on Cycle) कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान युवाओं के साथ सायकिलिंग और जुम्बा का आनंद लिया। उन्होंने कार्यक्रम में लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने, फिट रहने व पर्यावरण को बचाने सायकल चलाने के लिए प्रेरित किया। सांसद  महेश कश्यप, महापौर  संजय पाण्डेय और कलेक्टर  आकाश छिकारा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम में खुद सायकल चलाकर पर्यावरण संरक्षण और फिट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सायकल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। नियमित सायकल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है। दैनिक जीवन में सायकल का उपयोग हमें फिट और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है।

 साव ने कहा कि सायकल पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत का भी एक सरल माध्यम है। अधिक से अधिक सायकल का उपयोग कर हम स्वच्छ वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं। सायकल हमारे लिए हर दृष्टि से उपयोगी है। हमें जितना संभव हो सके, सायकल का उपयोग करना चाहिए।

राष्ट्रीय कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता के मस्कट ‘पहाड़ी मैना’ का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में 36वीं राष्ट्रीय सब जूनियर एवं जूनियर कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता के मस्कट ‘पहाड़ी मैना’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास का सशक्त आधार हैं। प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को नई प्रेरणा देगी और राज्य की खेल पहचान को और मजबूत बनाएगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कायाकिंग-केनोईंग एसोसिएशन द्वारा भारतीय कायाकिंग-केनोईंग संघ एवं छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के संयुक्त तत्वावधान में 36वीं राष्ट्रीय सब जूनियर एवं जूनियर कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 12 से 14 जून 2026 तक नवा रायपुर स्थित सेंध लेक में आयोजित होगी।

कायाकिंग-केनोईंग एक ओलम्पिक खेल है, जिसमें छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अनेक पदक अर्जित किए हैं। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी राज्य की राजधानी में होना प्रदेश के खेल इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव  विक्रम सिसोदिया, भारतीय कायाकिंग-केनोईंग महासंघ एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कायाकिंग-केनोईंग एसोसिएशन के सहसचिव  प्रशांत सिंह रघुवंशी सहित छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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