जंगल के बीच क्रिकेट का मैदान और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथ में बैट

जंगल के बीच क्रिकेट का मैदान और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथ में बैट

बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर 
सुकमा

सुकमा के जंगलों के बीच मैदान में युवाओं को क्रिकेट खेलते देख उप मुख्यमंत्री अरुण साव खुद को रोक न सके। उन्होंने गाड़ी रुकवाई, खिलाड़ियों के बीच मैदान में पहुंचे और क्रीज पर जाकर बैट थाम लिया। टूर्नामेंट खेल रहे कुशल गेंदबाजों की गेंदों पर कुछ करारे शॉट भी लगाए। यह बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर है।

किरंदुल से सुकमा के रास्ते का यह मुनगा गांव था जहां साव ने मैदान में बल्ला भांजा। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत कोर्रा का आश्रित गांव है यह। मैदान पर खेलने के लिए जुटे युवाओं से पता चला कि यहां 7 जून से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है जिसमें आसपास के गांवों की 16 टीमों ने भाग लिया है। मैदान के एक छोर पर खिलाड़ियों का झुंड तो दूसरे छोर पर दर्शकों का झुंड था।

उप मुख्यमंत्री साव ने कुछ गेंदे खेलने के बाद पिच पर ही खिलाड़ियों से अपने सहज-सरल अंदाज में बातचीत शुरू की, जिससे इस टूर्नामेंट की जानकारी मिली। उन्होंने खिलाड़ियों के मांगे बिना ही सभी 16 टीमों को क्रिकेट किट देने का वादा किया, जिससे वे पूरे साजो-सामान के साथ अपने खेल का आनंद ले सकें। साव से चर्चा के बीच खिलाड़ियों ने खेल मैदान की कमी की बात रखी, जिस पर उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित कर समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव इन दिनों चार दिनों के बस्तर प्रवास पर हैं। वे रोज दिनभर निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की बैठक लेकर इनकी प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के प्रगतिरत काम जल्दी कैसे पूरे हों… अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर कैसे तेजी से अंजाम तक पहुंचाएं, इन पर बैठकों में मंथन भी कर रहे हैं।

हाथी संरक्षण को मिलेगा नया बल, छत्तीसगढ़ में वन अमले को दी गई आधुनिक फोरेंसिक जांच की ट्रेनिंग

सूरजपुर/ रायपुर.

प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच एवं वन्यजीव अपराधों की पहचान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। 

“कार्यक्रम में एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति है।

रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही तथा मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वन विभाग का मानना है कि किसी हाथी की मृत्यु के पीछे बीमारी, विद्युत प्रवाह, विषप्रयोग, शिकार अथवा अन्य कारणों की सटीक पहचान किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार एवं प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जंगल में मिला मृत हाथी संभावित रूप से एक अपराध स्थल भी हो सकता है, इसलिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य एकत्रित करने तथा संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान करने की प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को यह भी सिखाया गया कि जांच के दौरान प्राप्त जैविक नमूनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रयोगशाला परीक्षणों में उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर हाथियों के शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण तथा विष विज्ञान एवं रोग परीक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कठिन परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से शव परीक्षण करने की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए आधुनिक वन्यजीव फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण के दौरान दोनों विभागों के अधिकारियों ने वन्यजीव रोगों की निगरानी, वन्यजीव अपराधों की जांच तथा संरक्षण संबंधी गतिविधियों में साझा कार्यप्रणाली विकसित करने पर बल दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी की। प्रशिक्षण में सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे छत्तीसगढ़ वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण तथा वन्यजीव संरक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत होगी।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने विभाग निरंतर क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार आधारित प्रयास कर रहा है। यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

कर्मा महोत्सव में बोले उपमुख्यमंत्री अरुण साव, ‘ईमानदारी और मेहनत ही साहू समाज की असली पहचान’

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव किरंदुल में तहसील साहू संघ द्वारा आयोजित कर्मा महोत्सव, नवीन सामाजिक भवन नामकरण एवं लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने सामाजिक पदाधिकारियों के साथ एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित भव्य तैलीय सदन का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, दंतेवाड़ा के विधायक चौतराम अटामी और किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष रुबी शैलेन्द्र सिंह भी महोत्सव में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री साव ने कर्मा महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि किरंदुल में छत्तीसगढ़ का सबसे भव्य साहू समाज का भवन बना है। इस भवन का रोज उपयोग हो, ऐसी व्यवस्था बनाएं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और मेहनत साहू समाज की ताकत और विशेषता है। हमारी इस पहचान को बनाकर रखना है।  साव ने कहा कि सभी समाजों के साथ साहू समाज का आत्मीय संबंध है। यह सभी के साथ मिलकर चलने वाला समाज है। साहू समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश में समाज के युवा अनेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। भक्त माता कर्मा के बताए मार्ग पर चलकर हमें समाज को ऊंचाईयों पर पहुंचाना है।

छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज का तेल निकालने का पुश्तैनी काम रहा है। हमारे इस पुश्तैनी व्यवसाय को पुनर्स्थापित करना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों को तेल निकालने की मशीन लगाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तेल निकालने की मशीनों पर सरकार द्वारा 35 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। समाज के लोग इसका लाभ लेकर तेल निकालने का उद्यम कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

विधायक चौतराम अटामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साहू समाज के लोग किरंदुल में सक्रियता से काम कर रहे हैं। समाज के 300 परिवार यहां रहते हैं। उन्होंने समाज की मांग पर शैक्षणिक कार्य के लिए कमरा बनाने की घोषणा की। किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष रुबी शैलेन्द्र सिंह, किरंदुल तहसील साहू समाज के अध्यक्ष टीकमचंद साहू और छत्तीसगढ़ साहू समाज के संगठन सचिव ओमप्रकाश साहू ने भी कर्मा महोत्सव को संबोधित किया।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए लालाराम साहू को समाजरत्न सम्मान दिया गया। माता कर्मा प्रांगण में दीवारों कर कलाकृति बनाने वाले कलाकार कामता राम कोर्राम को भी सम्मानित किया गया। भगवताचार्य यामिनी देवी साहू, लोक गायिका आरू साहू, पार्षद विनोद साहू और तहसील साहू समाज के संरक्षक ओम साहू सहित साहू समाज के प्रदेशभर के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

डब्बों में पेट्रोल-डीजल बेचने वालों पर कसेगा शिकंजा, छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला

दंतेवाड़ा.

पश्चिम एशिया में उपजे मौजूदा संकट और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा फैसला लिया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर) द्वारा जारी निर्देशों के तहत राज्य में पेट्रोल और डीजल की खुले में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कलेक्टर खाद्य शाखा दंतेवाड़ा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य शासन ने ईंधन की आपूर्ति और वितरण को सुचारू बनाए रखने के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की तेल कंपनियों और अन्य समानांतर कंपनियों के पेट्रोल-डीजल रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि: पेट्रोल और डीजल का विक्रय सीधे केवल उपभोक्ता के वाहन की टंकी में ही किया जाएगा। कोई भी रिटेल आउटलेट संचालक किसी भी व्यक्ति को ड्रम, केन (Jerrycan) या बोतल जैसे खुले बर्तनों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेगा। यदि कोई संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चूंकि वर्तमान में रबी सीजन की फसल कटाई का काम चल रहा है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू होने वाली हैं, ऐसे में आम जनता और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए शासन ने कुछ महत्वपूर्ण मामलों में छूट का प्रावधान भी किया है।

इन क्षेत्रों को मिलेगी नियमों से राहत:
कृषक (किसान): खेती-किसानी और ट्रैक्टर/थ्रेशर आदि के लिए किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए।
शासकीय एवं निर्माण कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित रेलवे, सड़क निर्माण और भवन निर्माण जैसे समय-सीमा में पूरे होने वाले सरकारी कार्य।
अत्यावश्यक सेवाएं: अस्पताल, मोबाइल टावर संचालन और अन्य जरूरी इमरजेंसी सेवाएं।

कैसे मिलेगी खुले में ईंधन लेने की अनुमति?
विज्ञप्ति के अनुसार, शासकीय कार्यों और अत्यावश्यक सेवाओं के लिए खुले में (ड्रम या केन में) डीजल-पेट्रोल की आवश्यकता होने पर सीधे ईंधन नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM द्वारा मांग का उचित परीक्षण किया जाएगा। एसडीएम की रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित कार्यों हेतु रिटेल आउटलेट से निर्धारित मात्रा में ईंधन विक्रय की विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी 

मिशन अमृत के तहत निर्माणाधीन इंटेक-वेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का काम भी देखा 

रायपुर
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है। 

उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा।

करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।  तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम

कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसा

रायपुर, 
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है।

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।

राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।

नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के तीन वीर जवानों को मिलेगा शौर्य चक्र, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

बालोद/भानुप्रतापपुर.

छत्तीसगढ़ के तीन जवानों को आज नई दिल्ली में राष्टपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा. असम रायफल में पदस्थ जवान भोजराम साहू को मणिपुर में आंतकियों के साथ मुठभेड़ में प्रदर्शित अदम्य साहस और वीरता के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा.

वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सल अभियानों के दौरान उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख भी इस सम्मान से अलंकृत होंगे. 

आतंकियों ने पर भारी पड़े भोजराम साहू
असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू ने बताया कि 15 नवंबर, 2024 को मणिपुर के टेंगनोपाल में आतंकियों के घुसने की सूचना मिली थी. करीब 9:30 बजे आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो गई, जिसमें भोजराम साहू को एक गोली भी लगी थी. लेकिन उनका हौंसला नहीं टूटा, जवाब कार्रवाई में भोजराम ने फायरिंग नहीं रोकी. फलस्वरूप आतंकियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा. इस कार्रवाई में 3 आतंकियों की मौत हुई थी. बता दें कि भोजराम साहू, बालोद जिले के आदिवासी विकास खण्ड डौंडी के गांव ढोर्रीठेमा के रहने वाले हैं. वह असम रायफल में पदस्थ हैं.

नक्सली मोर्चे पर ‘राम-लक्ष्मण’ ने निभाई अहम भूमिका
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को आज ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया जाएगा. राजनांदगांव और बस्तर के दुर्गम जंगलों में वर्षों से नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर रहे दोनों जांबाज अफसरों ने कई सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया है. बस्तर में जहां भी उनकी तैनाती रही, वहां उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर रहकर सुरक्षा बलों का नेतृत्व किया और नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की.

नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर मिली पहचान
पुलिस महकमे में दोनों अधिकारियों को नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निरीक्षक लक्ष्मण केवट अब तक 97 नक्सलियों के खिलाफ सफल अभियानों का हिस्सा रहे हैं, जबकि निरीक्षक रामेश्वर देशमुख 56 नक्सलियों के विरुद्ध हुई कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं.

29 नक्सलियों के सफाए वाला ऐतिहासिक ऑपरेशन
दोनों अधिकारियों की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण 16 अप्रैल 2024 को देखने को मिला, जब कांकेर जिले के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के हापाटोला जंगल में सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान को अंजाम दिया. इस अभियान में 15 महिला नक्सलियों सहित कुल 29 नक्सली मारे गए थे. छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी इतिहास में इसे सबसे सफल अभियानों में से एक माना जाता है. ऑपरेशन के दौरान दोनों अधिकारियों ने स्वयं जंगल के भीतर मोर्चा संभालते हुए जवानों का नेतृत्व किया था.

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
निरीक्षक लक्ष्मण केवट को अब तक 6 राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित सीआरपीएफ और बीएसएफ के कई वीरता सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. वहीं निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को भी उनके उत्कृष्ट साहस और सेवा के लिए राष्ट्रपति द्वारा दो बार सम्मानित किया जा चुका है. अब शौर्य चक्र मिलने के साथ उनके नाम एक और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान जुड़ जाएगा. “लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन नहीं, शांति स्थापित करना है” सम्मान की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मण केवट ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और लोगों का विश्वास जीतना है.

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन चलाना नहीं है, बल्कि इलाके में शांति स्थापित कर लोगों का विश्वास लौटाना है. हमने अनेक सफल अभियान चलाए हैं, लेकिन सबसे बड़ी सफलता क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करना है.” वर्तमान में लक्ष्मण केवट पाखंजूर में पदस्थ हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख भानुप्रतापपुर थाना प्रभारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों तक जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा और शांति के लिए कार्य करने वाले इन दोनों अधिकारियों को मिलने वाला शौर्य चक्र न केवल उनकी बहादुरी का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए भी गौरव का क्षण है. 

छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण : SP निखिल राखेचा
इस गौरवपूर्ण पल को लेकर पुलिस अधिक्षक निखिल आकाश राखेचा ने कहा कि कांकेर पुलिस के साथ पूरे छत्तीसगढ़ की पुलिस के लिए गौरव का विषय है कि कांकेर जिले के दो निरीक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है. आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह प्रेरणा स्रोत भी रहेगा कि कांकेर जैसे जिले में रहकर लोग इस तरह के उत्कृष्ट कार्यों को अंजाम दे सकते हैं.

बुजुर्गों को मिला अपनापन और सम्मान का नया ठिकाना, अंबिकापुर में शुरू हुआ ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर

बुजुर्गों को मिला अपनापन और सम्मान का नया ठिकाना, अंबिकापुर में शुरू हुआ ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो

योग, स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की मिलेगी सुविधा

रायपुर,
वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्ण, सुरक्षित एवं आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सरगुजा जिले में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थापित ‘सियान गुड़ी’ (वरिष्ठ नागरिक डे-केयर सेंटर) का शुभारंभ सोमवार को वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति में किया।

इस अवसर पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुखद जीवन को ध्यान में रखते हुए सियान गुड़ी की स्थापना की गई है, जहां उन्हें आवश्यक सुविधाओं के साथ आत्मीय और सकारात्मक वातावरण मिलेगा।

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त जीवनशैली के कारण कई बार बुजुर्ग स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में सियान गुड़ी उनके लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संरक्षण और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र में योग एवं प्राणायाम, फिजियोथेरेपी, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, पारिवारिक परामर्श, सांस्कृतिक गतिविधियां, इंडोर गेम्स, स्वल्पाहार और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 25 सीटर क्षमता वाले इस डे-केयर सेंटर का संचालन सप्ताह में छह दिन प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा।

शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैरम और लूडो खेलकर आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर बुजुर्गों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा व्हीलचेयर और छड़ी का वितरण भी किया गया। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मनेंद्रगढ़ रोड में स्थापित इस केंद्र का संचालन समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अनामिका वेलफेयर सोसायटी, अंबिकापुर द्वारा किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक यहां दिनभर स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का लाभ उठा सकेंगे।

कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि , कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मर्दापाल अंचल को 4.06 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मर्दापाल अंचल की 23 ग्राम पंचायतों में 4 करोड़ 6 लाख 67 हजार रूपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर इन बुनियादी विकास कार्यों का विधि-विधान से भूमिपूजन किया।

इन स्वीकृत विकास कार्यों में मुख्य रूप से सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, रंगमंच और अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय ग्रामीणों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई गति प्राप्त होगी।

ग्रामवार विकास कार्यों का विवरण
ग्राम चांगे लगभग 77.96 लाख रूपए की लागत से पुलिया, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सीसी सड़क, रंगमंच और सामुदायिक भवन निर्माण। ग्राम मूलनार में लगभग 90.79 लाख रूपए की लागत से पुलिया, बाउंड्रीवाल, सीसी सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचागत विकास, ग्राम बड़ेकुरुषनार लगभग 88.14 लाख रूपए की लागत से पुलिया, रंगमंच, आहाता, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सांस्कृतिक भवन और पंचायत भवन का निर्माण, ग्राम बेचा लगभग 21.79 लाख की लागत से रंगमंच एवं माध्यमिक शाला भवन का भूमिपूजन और लोकार्पण, अन्य ग्राम पंचायतें रानापाल, कोंगेरा, मुंगवाल और चेरंग में 28 लाख रूपए तथा हथकली, मटवाल, पेरमापाल, नरिहा और आदनार में लगभग 1 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक भवन, सीसी सड़क, शाला भवन और पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया, शामिल है।

गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता- वनमंत्री
इस अवसर पर वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सुदूर गांवों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सड़क, शिक्षा, सामुदायिक अधोसंरचना और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। श्अटल डिजिटल सुविधा केंद्रोंश् के माध्यम से अब ग्रामीणों को सभी जरूरी शासकीय सेवाओं का लाभ उनके अपने गांव में ही मिल सकेगा। उन्होंने आगे जोड़ा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि सुशासन के माध्यम से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाकर हर गांव को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है।

कांग्रेस की गुटबाजी पर स्वास्थ्य मंत्री का तंज, महंत ने दिया करारा जवाब- हम सामूहिक नेतृत्व में विश्वास रखते हैं

रायपुर.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कवायद शुरू हो गई है. पद के लिए कई दावेदार हैं, कुछ मुखर हैं, तो कुछ पर्दे के पीछे गुप-चुप तरीके से अपने काम में जुटे हैं. प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल के इस अहम पद को लेकर जहां भाजपा नेता और मंत्री तंज कस रहे हैं, तो कांग्रेस नेता भी उसी तंज भरे लहजे में जवाब दे रहे हैं.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में कई और नेता शामिल होने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि पिछले 3 सालों से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का मुद्दा प्रदेश में घूम रहा है. अब यह बोरिंग चेप्टर हो चुका है. कांग्रेस को पूरे प्रदेश ने ही भुला दिया है. कांग्रेस की गतिविधियों को याद रखना, बुद्धिमानी वाला काम नहीं है. जब से मैने होश संभाला है, देख रहा कि इनमे आपसी मतभेद ही रहता है. कांग्रेस की परम्परा और संस्कार में ही गुटबाजी है. यहीं समय- समय पर उभरता है.

स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि हमारे में तो ऐसा नहीं है. वो अभी – अभी आए हैं, इनको कहाँ से पता लग गया. कांग्रेस में सब ठीक चल रहा है. उन्होंने कहा कि हम जो चार-पांच लोग अगुवाई कर रहे हैं, उनमें सब ठीक है. सामूहिक नेतृत्व में हम विश्वास करते हैं. चुनाव भी सामूहिक नेतृत्व में होगा. कांग्रेस में कुछ भी निर्णय होता है, तो सामूहिक नेतृत्व के आधार पर होता है. डॉ. महंत ने कहा कि आने वाले समय में जिन – जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, उनमें प्रदेश अध्यक्ष बदलने की पूरी संभावना है. छत्तीसगढ़ के बारे में भी चर्चा है. लेकिन जब तक राहुल गांधी का यहां दौरा और जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण नहीं हो जाता, तब तक इसकी कोई जरूरत नहीं है.

खाद-बीज को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन
चरण दास महंत ने इसके साथ खाद-बीज को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि सरकार का सब ठीक है, कहना उचित नहीं है. निचले स्तर पर समस्या अभी भी है, गांव में तकलीफ है. गांव में काम नहीं हो रहा है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप है. इसकी चिंता सबको है, लेकिन मंत्रीगणों को नहीं दिख रहा है. इसमें गंभीरतापूर्वक मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए जो आज की जरूरत है.

देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात
इंडियन एलायंस की बैठक पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि आज दिल्ली में इंडिया एलायंस की बैठक है. देश में महंगाई, डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस और खाद्य सामग्री के बढ़ते दामों पर चर्चा होगी. देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका और आगे की रणनीति पर मंथन होगा.

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