दुर्ग में युवती की मौत पर बड़ा एक्शन, सिविल सर्जन समेत 9 कर्मचारियों को जारी हुआ नोटिस

दुर्ग.

जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में सिविल सर्जन सहित 9 कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें 3 डॉक्टर, 3 नर्स तथा 2 लैब टेक्नीशियन शामिल है।

दरअसल, दीपिका की मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित की थी। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल किए गए। जांच टीम के दोनों सदस्य चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी-बारी से बयान लिए। इसके अलावा मृतिका के परिजनों के भी बयान दर्ज किए। सभी के बयान पूरा होने के बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया और रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर ही नोटिस जारी किया गया है। इन्हें दो दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है।

परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में कोई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। यही वजह है कि ब्लड बैंक के 2 टेक्नीशियन को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, जिन तीन चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उनमें डॉ. शमी, डॉ. तृप्ति तथा डॉ. निखिल अग्रवाल शामिल है। दीपिका के भर्ती के समय कैजुवल्टी में मौजूद नर्स पर लापरवाही बरतने आरोप लगा था। इस वजह से 3 नर्स से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। पूरे मामले में ठीक ढंग से व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर सिविल सर्जन डॉ. आशीषन को भी नोटिस थमाया गया है।

खरीफ सीजन 2026: किसानों के लिए पर्याप्त खाद का इंतजाम, जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क

बिलासपुर.

खरीफ सीजन 2026 में किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए जिला प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है. प्रशासन ने बताया कि किसानों को खाद की कमी नहीं होगी, 49,772 टन से अधिक उर्वरक का भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत अधिक है.

खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक करीब 64.98 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है. प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में उर्वरक उपलब्धता में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस वर्ष अब तक 26,131.71 टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 56.6 प्रतिशत अधिक है. भंडारित उर्वरक का 58.33 प्रतिशत हिस्सा किसानों तक पहुंच चुका है.

सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से लगातार खाद वितरण किया जा रहा है. हालांकि कई किसान अभी भी पर्याप्त खाद नहीं मिलने की आशंका जताते हुए खेती और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता व्यक्त कर रहे हैं.

NEET UG Re-Exam 2026: बिलासपुर में तैयारियां तेज, कलेक्टर-SSP ने अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक

बिलासपुर.

नीट यूजी-2026 की 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारियों को लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी ने समीक्षा बैठक की. बैठक में परीक्षा केंद्राध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया. जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी.

प्रशासन ने परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. मानसून को देखते हुए अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए सभी केंद्रों पर वाटरप्रूफ शेड बनाए जाएंगे. प्रवेश द्वारों और परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर भी बारिश से बचाव की व्यवस्था रहेगी.

इसके अलावा जल निकासी, वैकल्पिक बिजली व्यवस्था और आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी रहेगी तथा प्रश्नपत्र और OMR शीट की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे. किसी भी संवेदनशील गतिविधि पर नजर रखने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा.

नो यूरिया से आसान हुई खेती, किसान गुलाबचंद राठौर को मिल रहे बेहतर परिणाम

रायपुर

राज्य शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक सुविधाजनक, किफायती और लाभकारी बना रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान  गुलाबचंद राठौर भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं तथा अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
         
गुलाबचंद राठौर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया का उपयोग किया था, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया का परिवहन, भंडारण एवं उपयोग कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसकी छोटी शीशी को किसान आसानी से खेत तक ले जा सकते हैं, जिससे समय, श्रम और परिवहन व्यय में उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास में सहायता मिलती है।
       
उर्वरकों की उपलब्धता से किसानों को मिल रही सुविधा  राठौर ने बताया कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए सेवा सहकारी समिति में शासन के मानकों के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्हें भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया एवं डीएपी खाद सहजता से प्राप्त हुआ है, जिससे कृषि कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे खेती-किसानी के कार्य सुचारु रूप से संपादित किए जा सकते हैं।

कम लागत में अधिक लाभ का माध्यम बन रहा नैनो यूरिया
        
किसान  गुलाबचंद राठौर का मानना है कि नैनो यूरिया खेती की लागत को नियंत्रित करने, उर्वरक प्रबंधन को सरल बनाने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कृषि को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

अन्य किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
         
राठौर ने जिले एवं प्रदेश के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों तथा नैनो उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और नवाचारों को अपनाने से कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
     
राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और समृद्ध बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बदली तस्वीर, ग्रामीणों को मिली आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा

रायपुर

 बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अतिसंवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वर्षों तक विकास से दूर रहे मयूरीपारा तक अब सड़क पहुंचने से लोगों को बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है।

16 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ रहा दूरस्थ क्षेत्र
         
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बैल से मयूरीपारा तक 16 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में अब तक 13 किलोमीटर मिट्टीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही मुरूमीकरण और छह पुलियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य जून माह में पूरा कर लिया जाएगा।

दुर्गम रास्तों से मिल रही राहत
        
 ग्राम बैल की सरपंच मती जुग्गी अठामी ने बताया कि लंबे समय तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए घने जंगलों से होकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था। अब सड़क निर्माण से हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोगों को बड़ी राहत मिली है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार
      
सड़क बनने से स्कूली बच्चों का आवागमन आसान हुआ है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिल रही है।

विकास और समृद्धि की नई उम्मीद
         
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

रंग, रचनात्मकता और संस्कृति का महोत्सव बना ‘आकार-2026’

रायपुर

छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और आधुनिक रचनात्मकता के अद्भुत संगम का प्रतीक बना संस्कृति विभाग का बहुप्रतीक्षित कला प्रशिक्षण शिविर “आकार-2026” रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतिभागियों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हो गया। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर, रायपुर में आयोजित इस 16 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई दिशा दी।

समापन समारोह में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद  बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा उप संचालक  प्रताप चंद्र पारख सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, प्रशिक्षु एवं अभिभावक उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए उन्होंने “आकार” प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से यह पहल प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि इसकी लोकप्रियता को देखते हुए ऐसे आयोजन प्रदेश के सभी संभागों में आयोजित किए जाने चाहिए। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आभूषणों, हस्तशिल्प के लिए स्थायी विक्रय केंद्र भी विकसित किए जाने चाहिए, जिससे कलाकारों को आर्थिक लाभ मिल सके और लोग छत्तीसगढ़ के आभूषण और हस्तशिल्प को देख और खरीद सकंे।

 अग्रवाल ने बच्चों को मिट्टी और प्रकृति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “जिस दिन बच्चे मिट्टी से जुड़ना और मिट्टी से सृजन करना सीख जाएंगे, उनका जीवन आनंद और संवेदनशीलता से भर जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, कला और लोक परंपराओं की जानकारी देना समय की आवश्यकता है।”

कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि “आकार केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित एवं संवर्धित करने का एक सशक्त माध्यम है। वर्ष 2004 से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम युवाओं में सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।”  उन्होंने बताया कि अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क को 200 रुपये से घटाकर मात्र 100 रुपये किया गया। साथ ही दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों के लिए विशेष रियायत भी प्रदान की गई, जिससे समाज के सभी वर्गों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सके।

“आकार-2026” ने इस वर्ष पारंपरिक लोक कलाओं और आधुनिक तकनीक के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण किया। जहां एक ओर प्रतिभागियों ने टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, भरथरी गायन और कथक जैसी विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कला की नवीनतम तकनीकों से भी परिचित कराया गया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि  बृजमोहन अग्रवाल ने सभी कला गुरुओं एवं प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने प्रशिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया।

समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन तथा लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों की ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कला गुरुओं ने प्रशिक्षण प्रदान किया। एआई आर्ट का प्रशिक्षण  वल्कल्पति जेस्सी, क्ले एवं टेक्सचर आर्ट सु अलका हनवत, पेंटिंग  राकेश पुजारी, बोनसाई कला  अनिल वर्मा, भरथरी गायन  प्रांजल सिंह, कथक नृत्य  चिरंजीव हलधर, मंडला एवं मांडना आर्ट मती कविता यादव, रजवार भित्ति चित्र कला मती प्रतिमा डहरवाल, जूट एवं गोदना शिल्प मती कल्पना यादव, पारंपरिक गहना निर्माण एवं वुडन ट्राइबल आर्ट डॉ. शुभ्रा मिश्रा, लोकनृत्य एवं लोकसंगीत  तेजराम साहू, हस्तकढ़ाई एवं शिल्प डिजाइनिंग प्रेमलता सिंह, टेराकोटा  विमल फुटान, लिप्पन आर्ट एवं पचवाई कला निधि अग्रवाल, वाद्य यंत्र  रिखी क्षत्रीय तथा क्रोशिया कला का प्रशिक्षण सीमा रायजादा ने दिया।

“आकार-2026” ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है। 1281 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और लोक संस्कृति से सराबोर प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को रंग, रचनात्मकता और परंपरा के सच्चे महाकुंभ में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का एक सफल प्रयास भी सिद्ध हुआ।

प्रगतिशील किसान पुरेंद्र कुमार यादव ने अपनाई आधुनिक तकनीक, धान की खेती में मिले उत्साहजनक परिणाम

रायपुर

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग किसानों की आय और उत्पादकता में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। दुर्ग जिले के ग्राम डूंडेरा के प्रगतिशील किसान  पुरेंद्र कुमार यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने धान की खेती में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर न केवल उत्पादन में सुधार हासिल किया, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।

पौधों की वृद्धि और उत्पादन की गुणवत्ता में हुए सकारात्मक सुधार
         
यादव ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी फसल में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप फसल को संतुलित एवं प्रभावी पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल अधिक स्वस्थ और मजबूत दिखाई दी, जिसका सीधा लाभ उपज पर भी पड़ा।

नैनो डीएपी और यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती
        
उन्होंने बताया कि पारंपरिक बोरा बंद उर्वरकों की तुलना में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक और किफायती साबित हुआ। अत्यंत कम मात्रा में उपयोग किए जाने वाले इन उर्वरकों से फसल को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से प्राप्त हुए, जिससे उर्वरक लागत में कमी आई। साथ ही परिवहन, भंडारण और श्रम संबंधी खर्चों में भी बचत हुई।

नैनो उर्वरक खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण
        
धान की फसल में अपेक्षा से बेहतर परिणाम मिलने पर  यादव बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि नैनो उर्वरक खेती को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे अन्य किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने और खेती में नवाचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे
         

पुरेंद्र कुमार यादव कहते हैं, “नैनो डीएपी और नैनो यूरिया आने वाले समय में किसानों के लिए भरोसेमंद साथी साबित होंगे। इससे खेती की लागत कम होती है, फसल को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। मैं सभी किसान भाइयों से आग्रह करता हूं कि वे भी इन उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर इसके लाभ प्राप्त करें।”

किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ
        
उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। जिले में बढ़ते उपयोग के साथ किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। यह पहल खेती को पर्यावरण अनुकूल, संसाधन-संरक्षण आधारित और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

तकनीक, प्रशिक्षण और सख्त निगरानी से सड़क हादसों पर लगाम की तैयारी

रायपुर

छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए तकनीक आधारित निगरानी, बेहतर चालक प्रशिक्षण, वाहनों की वैज्ञानिक फिटनेस जांच और यातायात नियमों के प्रभावी पालन पर सरकार ने विशेष जोर दिया है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विधायक  अनुज शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
         
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक वाहन फिटनेस केंद्रों, ई-ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, एएनपीआर कैमरों और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम का विस्तार किया जा रहा है। जनवरी से मई 2026 तक 31 हजार 604 वाहनों की फिटनेस जांच की गई, जबकि 61 हजार से अधिक चालान तकनीकी निगरानी तंत्र के माध्यम से जारी किए गए।
        
उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जवाबदेही है। दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क इंजीनियरिंग, प्रभावी प्रवर्तन और जन-जागरूकता के समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने दुर्घटना संभावित स्थलों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने तथा जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
      
 उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से यातायात नियमों के पालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही युवाओं और विद्यार्थियों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
        
परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, जन-जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने तथा सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी का अभियान बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
        
बैठक में जानकारी दी गई कि रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ सहित विभिन्न जिलों में संचालित आधुनिक फिटनेस केंद्रों में जनवरी से मई 2026 के दौरान 31 हजार 604 वाहनों की फिटनेस जांच की गई है।
          
सुरक्षित और कुशल ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए कई जिलों में ई-ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक संचालित किए जा रहे हैं, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में आठ नए जिलों में इनके निर्माण की प्रक्रिया जारी है। बिलासपुर और जगदलपुर में क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र तथा 14 जिलों में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
       
प्र. देश में यातायात नियमों के प्रभावी पालन के लिए 174 एएनपीआर कैमरे और सात लिडार आधारित स्पीड कैमरे स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से जनवरी से मई 2026 तक 61 हजार से अधिक चालान जारी किए गए। वहीं सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक 2 लाख 68 हजार 316 वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जा चुके हैं।        

नवा रायपुर स्थित आईडीटीआर में वाहन चालकों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में 15 हजार 779 तथा वर्ष 2026 में अप्रैल तक 4 हजार 64 वाहन चालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

यातायात नियमों के उल्लंघन पर जनवरी से अप्रैल 2026 तक 2.86 लाख वाहनों से 62.21 करोड़ रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। गंभीर उल्लंघनों के मामलों में वर्ष 2025-26 के दौरान 7 हजार 434 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किए गए हैं।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने विभिन्न आवासीय कॉलोनियों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक

रायपुर

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओपी चौधरी ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न आवासीय कॉलोनियों एवं हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में रायपुर क्षेत्र की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपनी-अपनी कॉलोनियों से संबंधित समस्याओं, आवश्यकताओं एवं सुझावों से मंत्री के समक्ष अवगत कराया।

मंत्री  ओपी चौधरी ने सभी प्रतिनिधियों की समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक परीक्षण कर व्यवहारिक एवं विधिसम्मत समाधान की दिशा में कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहतर शहरी अधोसंरचना, पारदर्शी प्रशासन एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए शासन प्रतिबद्ध है तथा आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों की समस्याओं के निराकरण को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।

मंत्री  चौधरी ने आवास विभाग, नगरीय निकायों, रेरा, बिल्डर संगठनों तथा रहवासी कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित समय-समय  पर स्टेकहोल्डर मीटिंग आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि विभिन्न पक्षों के बीच सतत संवाद स्थापित हो तथा समस्याओं का समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं, अधोसंरचना विकास, सड़क, जल निकासी, सार्वजनिक सुविधाओं तथा अन्य स्थानीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री  चौधरी ने कहा कि शासन और नागरिकों के बीच निरंतर संवाद से समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है तथा जनसहभागिता से शहरी विकास को नई गति मिलेगी।

बैठक के दौरान आवासीय समितियों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि संभवतः छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार आवास एवं पर्यावरण मंत्री द्वारा आवासीय सोसायटियों के प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का प्रत्यक्ष संवाद आयोजित किया गया है। उन्होंने इसे राज्य ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक अनुकरणीय पहल बताया।

बैठक में प्रतिनिधियों ने रियल एस्टेट परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, रेरा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित परियोजनाओं के हस्तांतरण तथा संस्थागत सुधारों से जुड़े विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। साथ ही आवासीय समितियों को सशक्त बनाने, “आवास मितान” डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने, सलाहकार समिति गठित करने तथा बड़े आवासीय परिसरों में मतदान सुविधाओं के विस्तार जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में नगर तथा ग्राम निवेश आयुक्त  अवनीश शरण सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही पार्थिव पैसिफिक, कुबेर सोसायटी, सिटी ऑफ ड्रीम्स, आनंदम वर्ल्ड सिटी, पाम बेलाजियो, साई वाटिका, अविनाश सनसिटी, मारुति लाइफस्टाइल, अविनाश सिग्नेचर होम्स, रालास एन्क्लेव, क्रेस्ट ग्रीन्स, सिंगापुर सिटी, सैफायर ग्रीन्स, लास विस्टास, जैनम हाइट्स, पार्थिवी प्रोविंस, बरसाना एन्क्लेव, गैलेक्सी आईलैंड, सृष्टि पैलाजो एवं क्रॉसविंड्स सहित विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली 1076 की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा शिकायतों के निराकरण तंत्र का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और नागरिकों को बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।

इस अवसर पर कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव   पी. दयानंद, सुशासन एवं अभिशरण विभाग के सचिव  राहुल भगत, विशेष सचिव  रजत बंसल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी मंत्रियों ने हेल्पलाइन संचालन व्यवस्था, शिकायत प्रबंधन प्रणाली तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन सेंटर में पहुंचकर शिकायतों के पंजीयन, उनकी निगरानी एवं समाधान की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा करते हुए शिकायतों के त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन पर कॉलर  पूनाराम ठाकरे से की बात

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज सीएम हेल्पलाइन सेंटर के शुभारंभ के अवसर पर सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन पर कॉल करने वाले कॉलर  पूना राम ठाकरे से खुद बात की और उनका नाम, निवास तथा समस्या की जानकारी ली । मुख्यमंत्री को  ठाकरे ने बताया कि वे रायपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था जिसके संबंध में शिकायत दर्ज कराने उन्होंने हेल्पलाइन में कॉल किया है। मुख्यमंत्री ने कॉल पर  ठाकरे को आश्वस्त किया कि जल्द ही उनकी समस्या का निराकरण हो जाएगा।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  साय एवं अन्य मंत्रियों ने हेल्पलाइन के माध्यम से जुड़े हितग्राहियों से बातचीत भी की। उन्होंने नागरिकों की समस्याओं और सुझावों को सुना तथा संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण का आश्वासन दिया। हितग्राहियों ने भी अपनी समस्याओं को सीधे शासन तक पहुंचाने के लिए इस व्यवस्था की सराहना की।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के सभी विभागों को एकीकृत रूप से जोड़ने वाली व्यवस्था है। इसमें 1,200 से अधिक शिकायत श्रेणियां तथा लगभग 8,000 अधिकारियों को चार प्रशासनिक स्तरों पर मैप किया गया है। ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बहु-स्तरीय एस्केलेशन प्रणाली के माध्यम से शिकायतों के समाधान की सतत निगरानी की जाती है।

मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन संचालन में कार्यरत युवाओं से भी संवाद किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान बताया गया कि इस व्यवस्था के संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध एमआईएस डैशबोर्ड, शिकायत विश्लेषण प्रणाली तथा विभिन्न विभागों के प्रदर्शन मूल्यांकन संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुशासन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनकर उनका समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा तथा प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

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