CM साय बोले- PM मोदी ने रचा नया इतिहास, लोकतांत्रिक सफर में दर्ज हुई बड़ी उपलब्धि

रायपुर 
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की जनता से लगातार प्राप्त जनादेश के आधार पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रहित के प्रति उनके समर्पित नेतृत्व का प्रमाण है।

नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प साकार हुआ है और भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हुआ है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण से राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा मिली, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया तथा आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई और सशक्त सैन्य अभियानों ने विश्व के समक्ष नए भारत के सामर्थ्य और आत्मविश्वास को स्थापित किया है।

साथ ही, उन्होंने संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए भारतीय जनता पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज वे विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में अग्रणी हैं और उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

उन्होंने कहा कि हम एक पारदर्शी और सुशासन पर आधारित सरकार चलाना चाहते हैं, और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हमने राज्य में ‘सुशासन और कन्वर्जेंस विभाग’ भी बनाया है और इसी पहल के तहत आज हम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नीति आयोग की बैठकों का एजेंडा तय होता है और उसी के अनुसार चर्चा होगी। जहां तक ​​बस्तर की बात है, नक्सलवाद के कारण यह इलाका लगभग 40 से 50 वर्षों तक पिछड़ा रहा। सरकार ने इसके विकास में तेजी लाने के लिए पहले ही काम शुरू कर दिया है और इसकी तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।

सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। अब प्रदेशवासी टोल-फ्री नंबर 1076, मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें, सुझाव और समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी ट्रैकिंग, निगरानी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो मामले की पुनः समीक्षा का भी प्रावधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास से जुड़े सुझाव भी नागरिक सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। सुशासन का मूल उद्देश्य जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।

सुशासन को प्राथमिकता
विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। जनता को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से राज्य में “सुशासन एवं कन्वर्जेंस विभाग” का गठन किया गया है और सीएम हेल्पलाइन 1076 उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

बस्तर विकास के लिए तैयार हो रहा रोडमैप
नीति आयोग की बैठकों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित एजेंडे के अनुसार विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। बस्तर क्षेत्र के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार से पांच दशकों तक विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए पहले से ही कई योजनाओं पर कार्य कर रही है तथा क्षेत्र की तीव्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक बदलाव: गृह सचिव रमेश कुमार को सहकारिता एवं रजिस्ट्रार विभाग के आयुक्त की जिम्मेदारी

रायपुर.

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने आखिरकार सहकारिता विभाग की सबसे अहम कुर्सी पर नियुक्ति कर दी है। आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां का पद पिछले 10 दिनों से खाली पड़ा था। 31 मई को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी महादेव कांवरे के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था।

खाली पद के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहे थे। सहकारी समितियों से जुड़े कई मामलों में निर्णय की गति धीमी पड़ गई थी। अब सरकार ने इस इंतजार को खत्म करते हुए आईएएस रमेश कुमार शर्मा को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी है।

कांवरे की वापसी की चर्चा, फैसला नहीं
महादेव कांवरे के रिटायरमेंट के साथ ही उनकी वापसी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कांवरे ने संविदा नियुक्ति के लिए शासन को आवेदन भी दिया था। मंत्रालय के गलियारों में यह चर्चा थी कि सरकार अनुभव का हवाला देकर उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दे सकती है। कई दिनों तक इसी संभावना पर अटकलें चलती रहीं। लेकिन सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी। आवेदन पर न हां हुई, न ना। आखिरकार इंतजार बढ़ता गया और विभाग बिना मुखिया के चलता रहा।

सरकार ने रमेश शर्मा पर लगाया दांव
लंबे इंतजार के बाद सरकार ने नया फैसला लिया। 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रमेश कुमार शर्मा को आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। नियुक्ति राज्यपाल के नाम से जारी आदेश के जरिए की गई है। आदेश डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ है। इससे साफ संकेत है कि सरकार ने फिलहाल संविदा नियुक्ति के बजाय नियमित प्रशासनिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

गृह विभाग के हैं सचिव
रमेश शर्मा फिलहाल गृह विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। अब उन्हें सहकारिता विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इसका मतलब यह है कि सरकार ने एक बार फिर भरोसा अनुभवी और सक्रिय अधिकारियों पर जताया है। सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई है जब विभाग कई अहम योजनाओं और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।

गृह विभाग में भी शुरू हुई नई चर्चा
रमेश शर्मा को नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही गृह विभाग में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह कौन संभालेगा। फिलहाल सरकार ने गृह विभाग में किसी नई पदस्थापना का आदेश जारी नहीं किया है। ऐसे में विभाग के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना बढ़ गई है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि गृह विभाग में पहले से सचिव के रूप में कार्यरत हिमशिखर गुप्ता को अतिरिक्त दायित्व दिया जा सकता है।

हिमशिखर गुप्ता के बढ़ सकते हैं अधिकार
हिमशिखर गुप्ता इस समय गृह और श्रम विभाग दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यदि रमेश शर्मा के हिस्से का काम भी उन्हें सौंपा जाता है तो उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। हालांकि इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है। अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। लेकिन मंत्रालय में चर्चा तेज है कि गृह विभाग के कामकाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह सबसे आसान विकल्प हो सकता है।

संविदा पर सस्पेंस, सरकार का संकेत साफ
पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा संदेश भी दिया है। महादेव कांवरे के संविदा आवेदन पर सरकार ने अब तक निर्णय नहीं लिया है। दूसरी तरफ उनकी कुर्सी पर नए अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि फिलहाल सरकार संविदा विस्तार के रास्ते पर आगे बढ़ती नहीं दिख रही। हालांकि आवेदन पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। लेकिन सहकारिता विभाग की कुर्सी पर रमेश शर्मा की ताजपोशी ने साफ कर दिया है कि सरकार अब इंतजार के बजाय व्यवस्था आगे बढ़ाने के मूड में है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार

नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत ₹2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ₹2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है।

पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में ₹3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में ₹1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत ₹22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में ₹22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है।

मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत ₹4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए ₹35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में ₹39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ₹2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए ₹7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु ₹2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए ₹2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक ₹10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में ₹4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से ₹17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना के माध्यम से 17 आईटीआई संस्थानों का उन्नयन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से 31.37 लाख ग्रामीण परिवारों को 2.88 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। समूहों को ₹1,661 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत 10.42 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर नई पहचान बना रही हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल भारत निधि (DBN) के माध्यम से राज्य के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,247 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं तथा 577 नए टावरों को स्वीकृति दी गई है, जिससे हजारों गांव डिजिटल सेवाओं से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण और विद्युत अधोसंरचना विकास के लिए लगभग ₹2,808 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत राज्य में 64 हजार से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा 46,649 परिवारों को ₹362 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खेल, उद्योग, ग्रामोद्योग, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण तथा डिजिटल प्रशासन के क्षेत्रों में भी केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने छत्तीसगढ़ को विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में पर्यटन, संस्कृति और खेल अधोसंरचना के क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ₹94.23 करोड़ की लागत से जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर सहित जनजातीय अंचलों में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। प्रसाद योजना के तहत ₹48.43 करोड़ की लागत से डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर क्षेत्र का विकास किया गया है। वहीं नवा रायपुर में ₹147.66 करोड़ की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। खेलो इंडिया योजना के तहत राज्य के आठ जिलों में खेल अधोसंरचना विकास के लिए ₹48 करोड़ तथा बहतराई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए ₹5 करोड़ की सहायता दी गई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी और इसके लिए मिली ₹17 करोड़ की सहायता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री ने ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प, रेशम और पारंपरिक कला के संरक्षण में केंद्र सरकार के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रायपुर में ₹200 करोड़ की लागत से प्रस्तावित पीएम एकता मॉल राज्य के हस्तशिल्प, हथकरघा और ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएगा। राष्ट्रीय हाथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 4,694 बुनकरों को लाभान्वित किया गया है, जबकि हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत 2,400 शिल्पियों के सशक्तिकरण हेतु विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रेशम विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों कृषकों और महिला हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।
पत्र में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में हुए नवाचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, स्वामित्व योजना, एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी पहलों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिकोन्मुख बनाया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया है। पिछले एक वर्ष में दो लाख से अधिक प्रकरणों का स्वतः नामांतरण किया गया है तथा 32 लाख से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने सामाजिक न्याय, उद्यानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, परिवहन सुरक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में प्राप्त केंद्रीय सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति पुनः आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान, अटल वयो अभ्युदय योजना, सुगम्य भारत अभियान, बायोटेक इंक्यूबेशन सेंटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च तथा महिला सुरक्षा हेतु स्थापित निर्भया कमांड सेंटर जैसी पहलों ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है।

 मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत मे उल्लेखित किया कि छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की ओर से वे प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और विश्वास जताते हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सहयोग भविष्य में भी इसी प्रकार प्राप्त होता रहेगा।

नई शाला में ज्वाइनिंग नहीं देने पर शिक्षक पदच्युत, स्कूल मर्जर आदेश की अवहेलना पड़ी भारी

भिलाई.

युक्तियुक्तकरण से प्रभावित 4 सहायक शिक्षक एलबी को नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई की है। उन्हें तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर दिया गया है। इसके पहले उन्हें निलंबित किया गया था।

दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय छ.ग. द्वारा युक्तियुक्तकरण के पश्चात नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। इस निर्देश के परिपालन में चार सहायक शिक्षकों पर गाज गिरी है। इन सहायक शिक्षकों में नारायण दास जोशी, जानेश्वर कुमार ठाकुर, प्रदीप देशमुख तथा लक्ष्मी नारायण चंद्राकर शामिल है। बताया जा रहा है कि इन्हें नई पदांकित शाला में ज्वाइनिंग के लिए 5 बार अवसर प्रदान किया गया था। बावजूद इन्होंने ज्वाइनिंग नहीं दी। लिहाजा इन पर कार्रवाई की गई।

युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जिले के बड़ी संख्या शिक्षक प्रभावित हुए। अधिकाश शिक्षक कोर्ट का शरण लिए। इसके चलते जिला, संभाग तथा राज्य स्तर पर ऐसे प्रकरणों की सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कई शिक्षकों के प्रकरण को मान्य किया गया। इसी आस में चार सहायक शिक्षक भी अपने स्तर पर प्रयासरत रहे कि उनका भी प्रकरण मान्य हो । मगर दांव उल्टा पड़ गया। उनसे नौकरी छीनने की नौबत आ गई।

जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर (छ.ग.) के पत्र क्रमांक/ युक्ति./ 2026/ 139 नवा रायपुर, दिनांक 28.05.2026 के द्वारा प्राप्त निर्देश के परिपालन में छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-10 के उपनियम (नौ) के तहत इन सभी 4 सहायक शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से पदच्युत (डिसमिसल) किए जाने का आदेश जारी किया है।

छत्तीसगढ़ की ‘सुपर गर्ल’ चारू पांडेय का कमाल, SSC से बैंक-रेलवे तक 19 सरकारी नौकरियों में सफलता

रायपुर 
किसी ने क्या खूब कहा है कि “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”. इस पंक्ति को छत्तीसगढ़ की एक होनहार बेटी चारू पांडे ने अपने जुनून से सच साबित कर दिया है. महज 23 साल की उम्र में चारू ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों एस्पिरेंट्स देखते हैं. उन्होंने SSC, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस समेत कुल 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी। 

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही रणनीति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
चारू पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिल्दा-नेवरा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से मैथमेटिक्स में बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू कर दी थी. चारू फिलहाल चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी उपलब्धियों की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है। 

किन परीक्षाओं में हासिल की सफलता
चारू ने SSC की कई प्रमुख परीक्षाएं जैसे SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD और SSC CPO को पास किया है. इसके अलावा उन्होंने IBPS PO, IBPS Clerk, SBI PO और SBI Clerk जैसी बैंकिंग परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की. रेलवे भर्ती बोर्ड की NTPC और ग्रुप-D परीक्षाएं भी उन्होंने पास कीं. वहीं पुलिस सेवाओं में दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर और ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता का परचम लहराया. इसके अलावा CG NHM सहित कई दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। 

असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
चारू का सफर आसान नहीं था. शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. कई परीक्षाओं में चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और लगातार सुधार किया. चारू का मानना है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है. यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। 

सफलता का मंत्र क्या है?
चारू बताती हैं कि उनकी तैयारी का आधार सब्जेक्ट वाइज रणनीति, रेग्युलर मॉक टेस्ट और लगातार सेल्फ-इवैल्यूएशन रहा. वह हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों को एनालाइज करती थीं और अगली परीक्षा में उन्हें सुधारने की कोशिश करती थीं. उनका कहना है कि अगर छात्र लक्ष्य तय करें, समय को सही से मैनेज करें और लगातार मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है। 

चारू पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां मायने नहीं रखतीं. छोटे शहर की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए उम्मीद, संघर्ष और सफलता का प्रतीक बन चुकी है. उनकी उपलब्धि न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 

डंकुनी–सूरत कॉरिडोर का असर: दुर्ग के 25 गांवों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगी रोक

दुर्ग.

जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ( डंकुनी – सूरत) परियोजना के निर्माण हेतु तहसील दुर्ग एवं पाटन के ग्रामों की भूमि पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध संबंधी आदेश में संशोधन किया गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में जारी आदेश की कंडिका-4 में उल्लेखित ग्रामों के स्थान पर संशोधित ग्रामों की सूची प्रभावशील होगी।

संशोधित आदेश के तहत दुर्ग तहसील के ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई एवं डुमरडीह, पाटन तहसील के ग्राम परेवाडीह, पहडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह एवं बटंग तथा भिलाई-3 तहसील के ग्राम सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा एवं उरला सहित कुल 25 ग्रामों को आदेश में शामिल किया गया है।

इन ग्रामों की निजी भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी- बिक्री पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा तथा परियोजना के पारदर्शी एवं सुचारू क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। आदेश की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत प्रभावी रहेंगी।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका

रायपुर, 
 राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति तथा वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

           राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर देते हुए संबंधित समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने तथा उनके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

          राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास सुविधा, विद्यालयीन अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े विषयों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

पॉलीटेक्निक एडमिशन 2026: कल से शुरू होगी ऑनलाइन काउंसलिंग, 16 जून को आएगी मेरिट लिस्ट

दुर्ग.

प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी पॉलीटेक्निक कॉलेजों के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, सीडीडीएम/ आईडी, एमओएम / एचएमसीटी और लैटरल एंट्री) में प्रवेश के लिए राज्य- स्तरीय ऑनलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

जारी शेड्यूल के अनुसार, प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन 11 जून (पूर्वान्ह 10 बजे ) से 15 जून (रात्रि 11.59 बजे तक होगा। इसके ठीक बाद 16 जून को मेरिट सूची जारी होगी, जिस पर 17 जून तक दावा-आपत्ति की जा सकेगी। दावा-आपत्ति के निराकरण के पश्चात प्रथम चरण का सीट आवंटन 19 जून को किया जाएगा, जिसके तहत चयनित छात्रों को 20 से 24 जून के बीच आवंटित संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश लेना होगा।

यदि प्रथम चरण के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं. तो द्वितीय चरण की काउंसलिंग 26 से 30 जून तक चलेगी, जिसका आबंटन 3 जुलाई और प्रवेश प्रक्रिया 4 से 9 जुलाई तक पूरी की जाएगी। इसके बाद भी सीटें खाली रहने की स्थिति में 11 से 16 जुलाई तक संस्था स्तर ( कॉलेज लेवल) की काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन पंजीयन खोला जाएगा। इसके तहत छात्रों को 18 जुलाई को पूर्वान्ह 10.00 बजे संबंधित कॉलेज में दस्तावेज सत्यापन और आबंटन हेतु उपस्थित होना अनिवार्य होगा, जिसके पश्चात संस्था द्वारा आबंटित सीटों पर प्रवेश की कार्यवाही इसी दिन दोपहर 1 बजे से शुरू कर दी जाएगी।

काउंसलिंग से जुड़ी इस पूरी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्रों की सुविधा के लिए रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों में भी सभी सुविधा केंद्र और संबंधित कॉलेज खुले रहेंगे। इस संबंध में विस्तृत जानकारी व नियमों के लिए अभ्यर्थी विभागीय काउंसलिंग पोर्टल अवलोकन कर सकते हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अभ्यर्थी संचालनालय के हेल्पलाइन नंबर 0771-2221376 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वैवाहिक वर्षगांठ पर दी बधाई

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वैवाहिक वर्षगांठ पर दी बधाई

रायपुर 
 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह को उनकी 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी । मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. रमन सिंह एवं श्रीमती वीणा सिंह के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय दाम्पत्य जीवन की मंगलकामना की है।

पेड़ों की सुरक्षा और संवर्धन पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता – राज्यपाल डेका

पेड़ों की सुरक्षा और संवर्धन पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता – राज्यपाल डेका

रायपुर
राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त सम्बित मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त  मणिवासगन एस तथा रायपुर वन मंडल के डीएफओ लोकनाथ पटेल ने मुलाकात की । इस दौरान राज्यपाल ने शहर और नया रायपुर में लगाए गए वृक्षों के संरक्षण एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया है।

         राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही वृक्षों की कटाई की अनुमति दी जाए। राज्यपाल ने शहर में बड़े वृक्षों के पास से ट्री गार्ड हटाने तथा जहां वृक्षारोपण किया गया है, वहां पेड़ों के चारों ओर बने कंक्रीट ढांचे को हटाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेड़ों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में पानी और हवा पहुंचना जरूरी है, तभी उनका समुचित विकास हो सकेगा।

         राज्यपाल डेका ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे हैं। वृक्षारोपण के बाद उनकी देखभाल पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, जो भी पौधे लगाए जाएं, उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। राज्यपाल ने अधिकारियों से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने को कहा है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu