रायपुर में संसदीय स्थायी समिति की अहम बैठक, अध्यक्ष डोला सेन ने की अध्यक्षता

 रायपुर
राज्य सभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष  डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक 10 से 12 जून 2026 तक अहमदाबाद, रायपुर और भुवनेश्वर के अध्ययन दौरा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।

बैठक में “भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन” विषय पर विस्तृत चर्चा की  जा रही है।

 समिति के सदस्यों  द्वारा  व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है ।
 अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है।

कांग्रेस में बदलाव की आहट! नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज, कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में

रायपुर 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है।

वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।

छत्तीसगढ़ को 2047 तक विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाना हमारा लक्ष्य : राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा

रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल योजनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सटीक आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति से संभव होगा।

नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आयोजित स्टेट सपोर्ट मिशन (SSM), प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) एवं मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (M&E) यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  मिश्रा ने कहा कि राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ राज्य के दीर्घकालिक विकास का व्यापक रोडमैप है, जिसमें आर्थिक विकास, सुशासन, सामाजिक प्रगति, निवेश संवर्धन और मानव विकास से जुड़े स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और अंजोर विजन-2047 एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का मूल उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को इन लक्ष्यों के अनुरूप क्रियान्वित करना होगा। इस दिशा में राज्य नीति आयोग के अंतर्गत गठित SSM, PIU एवं M&E इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब राज्य का लक्ष्य केवल सूचकांकों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाना है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, महिला श्रम भागीदारी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाना हमारी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग के साथ कार्य कर रही विशेषज्ञ टीमों को विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर KPI आधारित समीक्षा, नीति विश्लेषण, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा साक्ष्य आधारित सुझावों के माध्यम से विकास की गति को और तेज करना होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से नवाचार, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का आह्वान किया।

उपाध्यक्ष  मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और राज्य नीति आयोग के संयुक्त प्रयासों से अंजोर विजन-2047 के लक्ष्य निर्धारित समयावधि में प्राप्त किए जा सकेंगे तथा छत्तीसगढ़ समावेशी, सतत और विकसित राज्य के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जब छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हुआ। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसमें बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की बात कही गई थी।  मिश्रा ने कहा कि बस्तर संभाग राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और ‘‘बस्तर अंजोर’’ पहल के तहत सात प्रमुख नवाचारों के माध्यम से क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को मूर्त रूप दिया जाएगा। इससे बस्तर विकास, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

इस दौरान राज्य नीति आयोग के सदस्य सचिव  आशीष कुमार भट्ट, सदस्य डॉ के सुब्रह्मण्यम सहित यूएनडीपी के विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे।

शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

रायपुर

छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
            
अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार  महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।
           
जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय  बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर  हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक  एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर  विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर  रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।
         
स्कूल शिक्षा  गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।

मोदी सरकार के 12 वर्ष आदिवासी उत्थान और नक्सलमुक्ति का स्वर्णकाल- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई दिल्ली

 प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्ष देश के जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और विकास के लिए स्वर्णकाल साबित हुए हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के कारण छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय समुदाय अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बस्तर में ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे अभियानों के माध्यम से योजनाओं का सैचुरेशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो या धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, इन पहलों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि देश को पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति के रूप में मती द्रौपदी मुर्मु का नेतृत्व करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।

 साय ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के दूरस्थ इलाकों तक पहली बार बिजली, सड़क, पेयजल और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं बस्तर में सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी चुनौतियां दूर हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। नवा रायपुर में ट्राइबल म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने दुनिया के सामने बदलते, मुस्कुराते और हिंसा-मुक्त बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत की है।

उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, लघु वनोपज की रिकॉर्ड खरीदी, किसानों को धान, दलहन और तिलहन का बेहतर मूल्य तथा कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ 45 लाख जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

बस्तर में तेंदूपत्ता खरीदी का नया रिकॉर्ड, फिर भी 50 हजार संग्राहकों ने नहीं किया संग्रहण कार्य

जगदलपुर.

बस्तर संभाग में इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए हैं। वन विभाग ने दावा किया है कि जगदलपुर सर्किल के चार जिलों में 1 लाख 74 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदा गया है, जिससे करीब 96 करोड़ रुपये की राशि संग्राहकों तक पहुंची है। हालांकि इन दावों के बीच कई ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जो तेंदूपत्ता कारोबार की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 1 लाख 75 हजार संग्राहक पंजीकृत हैं, लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में केवल 1 लाख 25 हजार लोग ही शामिल हुए। यानी करीब 50 हजार पंजीकृत संग्राहकों ने इस बार तेंदूपत्ता तोड़ने का काम नहीं किया। इतनी बड़ी संख्या में संग्राहकों के प्रक्रिया से बाहर रहने के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी, मौसम और संग्रहण से जुड़ी अन्य चुनौतियों को इसकी एक वजह माना जा रहा है।

वन विभाग ने भी माना है कि बेमौसम बारिश का असर संग्रहण पर पड़ा। बारिश के कारण 60 से 70 गांवों में तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहता तो खरीदी और संग्रहण का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता था। इसके अलावा 1702 फड़ों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1600 फड़ों में ही संग्रहण कार्य हो पाया, जिससे कई इलाकों में व्यवस्था संबंधी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं।

अवैध कारोबार ने भी बढ़ाई प्रशासन की चिंता
इस बीच तेंदूपत्ता के अवैध कारोबार ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुकमा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में वन विभाग ने 12 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर लाखों रुपये मूल्य का तेंदूपत्ता जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेंदूपत्ता को अवैध रूप से ओडिशा और तेलंगाना की ओर खपाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि तेंदूपत्ता व्यापार में तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

बस्तर में तेंदूपत्ता ग्रामीण और वन आश्रित परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड खरीदी और करोड़ों रुपये के भुगतान के दावों के बावजूद आधे लाख संग्राहकों का प्रक्रिया से बाहर रहना, मौसम की मार से प्रभावित गांवों की संख्या और तस्करी की घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। जानकारों का मानना है कि केवल रिकॉर्ड आंकड़े सफलता की पूरी तस्वीर नहीं बताते, बल्कि यह भी जरूरी है कि संग्रहण से जुड़े सभी हितग्राहियों की भागीदारी सुनिश्चित हो और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग और सरकार इन चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है, ताकि तेंदूपत्ता कारोबार का लाभ वास्तव में अधिक से अधिक वनवासी परिवारों तक पहुंच सके और रिकॉर्ड खरीदी के दावों के साथ जमीनी स्तर पर भी सफलता दिखाई दे।

सहूलियत, सम्मान और सेहत… हर घर नल से बदली जिंदगी

रायपुर   
               
रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।
                  
उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।
                  
जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था। 
                  
जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।
                  
जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है। 
                   
रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।
                   
जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।
                   
जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।

सिलयारी दुष्कर्म मामले पर बाल आयोग सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर तलब की रिपोर्ट

रायपुर
 
रायपुर जिले के धरसींवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिलयारी में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के कथित अपहरण एवं दुष्कर्म प्रकरण को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान में लिया है। आयोग को इस मामले की जानकारी 04 जून 2026 को सोशल मीडिया एवं समाचार पोर्टल में प्रकाशित खबरों के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसके आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में बालिका द्वारा अपराध से इंकार किए जाने के कारण प्रकरण को खारिज करने की तैयारी की जा रही थी, किंतु बाद में वायरल वीडियो-ऑडियो एवं पुनः जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा विवेचना में कथित लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया। मामला नाबालिग सुरक्षा, पुलिस विवेचना की गुणवत्ता एवं बाल अधिकारों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी, रायपुर को पीड़ित बालिका का कथन दर्ज कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा बालिका को उसके अभिभावकों सहित 15 जून 2026 को आयोग के समक्ष उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण में पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की भी समीक्षा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, चार वरिष्ठ IFS अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

रायपुर.

छत्तीसगढ़ सरकार ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चार भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। जारी आदेश के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं मूल्यांकन) कोलेन्द्र कुमार को वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

वन विभाग में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत ओपी यादव को प्रभारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण) तथा सह-मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के पद पर पदस्थ किया गया है। वर्ष 2001 बैच की वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी शालिनी रैना को मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे वर्तमान में वन मुख्यालय में प्रशासन, समन्वय तथा राजपत्रित-अराजपत्रित कार्मिकों से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।

इसके अलावा माधेश्वर डी. को प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास एवं योजना, बजट, लेखा एवं लेखा परीक्षण) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे वर्तमान में वन्यजीव प्रबंधन एवं योजना, राज्य जैव विविधता बोर्ड तथा राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण से जुड़े विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं।

CG के पटाखा गोदाम में भीषण आग, लगातार धमाकों से दहला पूरा इलाका

कोरबा.

जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित एक पटाखा गोदाम में बुधवार को भीषण आग लग गई। आग लगते ही गोदाम में रखे पटाखों में लगातार विस्फोट होने लगे, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना के दौरान आसमान में धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दिया।

जानकारी के अनुसार, रामपुर स्थित शर्मा पटाखा गोदाम में अचानक आग भड़क उठी। आग की लपटें देखते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गोदाम में रखे पटाखों के फटने से लगातार तेज धमाके सुनाई देते रहे, जिससे आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।
घटना की सूचना मिलते ही कटघोरा नगर पालिका की फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।

हालांकि आग की भयावहता को देखते हुए अन्य क्षेत्रों से भी अतिरिक्त दमकल वाहनों को बुलाया जा रहा है। मौके पर पुलिस बल भी तैनात है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके को घेरकर लोगों को दूर रखा जा रहा है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है। समाचार लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली थी, हालांकि आग से हुए नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है।

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