छत्तीसगढ़ बने देश का प्रमुख पर्यटन गंतव्य, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दें विशेष ध्यान : राजेश अग्रवाल

रायपुर

 छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई गति देने के उद्देश्य से आज मंत्रालय में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों विभागों द्वारा संचालित योजनाओं, विकास परियोजनाओं, अधोसंरचना निर्माण, प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन को पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, पर्यटन अधोसंरचना विकास, प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, विभाग की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही संस्कृति विभाग द्वारा संचालित सांस्कृतिक संरक्षण, लोककला एवं लोक कलाकारों के संवर्धन, सांस्कृतिक आयोजनों, पुरातात्विक एवं धरोहर संरक्षण तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी संस्कृति विभाग के संचालक डॉक्टर संजय कन्नौजे द्वारा दी गई। संस्कृति विभाग की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

प्रस्तुतीकरण के उपरांत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दोनों विभागों के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं एवं विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जिससे प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा मिल सके।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक आस्था केंद्रों और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध राज्य है। इन सभी विशेषताओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों के साथ-साथ प्रदेश की लोककलाओं, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक धरोहरों को भी व्यापक पहचान दिलाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं।

उन्होंने पर्यटकों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने, पर्यटन अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नए पर्यटन स्थलों के योजनाबद्ध विकास पर विशेष जोर दिया। साथ ही संस्कृति विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पारंपरिक कला रूपों के संवर्धन, संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा सांस्कृतिक आयोजनों को और अधिक प्रभावी एवं जनभागीदारी आधारित बनाया जाए, जिससे नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी कार्यों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जा सकता है।

बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की अवर सचिव श्रीमती रुचि शर्मा, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

श्रम मंत्री की बैठक में बड़ा फैसला- असंगठित श्रमिकों के लिए बनेंगी नई योजनाएं

रायपुर

छत्तीसगढ़ के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा दायरे का विस्तार करने और उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें श्रमिकों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

ई-रिक्शा सहायता योजना का अनुदान दोगुना किया गया

बैठक में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके तहत ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत वर्तमान में दी जा रही 50 हजार रुपये की अनुदान राशि को बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रमिक आसानी से अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकेंगे      

डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों (गिग वर्कर्स), चरवाहों और मेधावी बच्चों के लिए बनेंगी नई योजनाएं असंगठित क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों को सुरक्षा देने के लिए मंडल ने अपने दायरे का विस्तार किया है।  डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों को अब मंडल के दायरे में शामिल करते हुए उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजना तैयार की जाएगी। चरवाहों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक पृथक (अलग) योजना बनाई जाएगी। असंगठित कर्मकारों के प्रतिभावान व मेधावी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी। श्रमिकों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवर देने के लिए एक व्यापक बीमा योजना तैयार करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

*शत-प्रतिशत ई-केवाईसी (e-KYC) और आधार आधारित पंजीयन के निर्देश      

मंत्री लखनलाल देवांगन ने पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से ई-केवाईसी और आधार आधारित पंजीयन किया जाए, ताकि योजनाओं का सीधा और वास्तविक लाभ केवल पात्र श्रमिकों को ही मिल सके। उन्होंने पाम्पलेट और चित्रमय बुकलेट के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा हितग्राहियों के आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के भी निर्देश दिए।

इस महत्वपूर्ण प्रथम बैठक में मंडल के सदस्य एवं विधायक चैतराम अटामी, विधायक सुशांत शुक्ला, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, अपर श्रमायुक्त एवं नोडल अधिकारी एस.एल. जांगड़े, श्रम विभाग के उप सचिव विपुल गुप्ता सहित वित्त विभाग एवं भारतीय जीवन बीमा निगम के महाप्रबंधक तथा उप श्रमायुक्त व प्रभारी अधिकारी एस.एस. पैकरा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

43 शिक्षकों से करोड़ों की लोन ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप और चेकबुक बरामद

कोंडागांव.

जिले के फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार अब तक इस गिरोह ने 43 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि कुछ पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग अब भी सामने नहीं आए हैं। उनका दावा है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं।

शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उन्हें और उनके साथियों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसी तरह बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं केशकाल क्षेत्र के देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी करोड़ों रुपये की ठगी की रिपोर्ट पुलिस को दी। इन शिकायतों के आधार पर फरसगांव और केशकाल थानों में कुल चार अलग-अलग अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

ऐसे फंसाए जाते थे शिक्षक
जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। गिरोह पहले शिक्षकों से संपर्क करता और कम समय में कई बैंकों से बड़ी राशि का पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता। इसके बाद बैंक कर्मचारियों और लोन एजेंटों के माध्यम से अलग-अलग बैंकों में लोन आवेदन करवाए जाते। लोन स्वीकृत होने के बाद शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि दी जाती, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम आरोपियों और उनके सहयोगियों के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। आरोपी पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि दो से तीन वर्षों के भीतर पूरा लोन, ब्याज और एचआरए सहित चुका दिया जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो जाते थे और पूरा कर्ज शिक्षकों के सिर पर छोड़ देते थे।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों से कराया लोन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। कई शिक्षकों के पते में बदलाव कर नकली आधार कार्ड बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया।

तीन महीने चली तकनीकी और वित्तीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (आईपीएस) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और आरोपियों के बैंक खातों का विस्तृत विश्लेषण किया। मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। लगातार तीन महीने तक अलग-अलग जिलों में दबिश देने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार –

  • शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
  • दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
  • विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
  • श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
  • अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)

जब्त किए गए सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, बैंक चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर समेत अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच जारी है।

अन्य जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने बैंकिंग प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार एक बैंक से लिया गया लोन क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL/Loan Database) में अपडेट होने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लग जाता है। इसी अंतराल का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों के नाम पर दो से तीन दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी बैंकों के बीच रियल-टाइम क्रेडिट वेरिफिकेशन और लोन हिस्ट्री की तत्काल जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि एक ही व्यक्ति को कम समय में कई बैंकों से समानांतर लोन मिलने की संभावना समाप्त हो सके।

छत्तीसगढ़ में नशे में धुत मिले हेडमास्टर, स्कूल के बाहर गाली-गलौज का वीडियो वायरल

सूरजपुर.

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां एक प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचे। उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला रामानुजनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम शाल्ही के खोरखोरीपारा प्राथमिक स्कूल का है। यहां पदस्थ हेडमास्टर हरिनंदन सिंह स्कूल के समय में शराब के नशे में इतने धुत थे कि वे खुद को संभाल भी नहीं पा रहे थे। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हेडमास्टर नशे की हालत में जमीन पर लेटे हुए हैं और लगातार गाली-गलौज कर रहे हैं। फिलहाल अब देखना होगा कि विभाग इस पर क्या एक्शन लेता है।

छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, GPM कलेक्टर संतोष देवांगन हटाए गए, 5 IAS अधिकारियों के प्रभार बदले

रायपुर.

छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस फेरबदल में सबसे बड़ी गाज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन पर गिरी है, जिन्हें महज दो महीने पहले ही जिले की कमान सौंपी गई थी।

सरकार ने उन्हें कलेक्टर पद से हटाते हुए मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनाती दी है। उनकी जगह अब तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक विजय दयाराम के. को जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। महानदी भवन से जारी सामान्य प्रशासन विभाग के इस आदेश में कुल 5 IAS अधिकारियों के प्रभार में तब्दीली की गई है। हेमंत रमेश नंदनवार (IAS 2020) को महासमुंद जिला पंचायत के सीईओ पद से हटाकर अब संचालक, तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के प्रबंध संचालक (MD) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

सुमित अग्रवाल (IAS 2021) दुर्ग नगर निगम के कमिश्नर को अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) बनाया गया है। वे इस पद से रिमिजियस एक्का (IAS 2011) को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करेंगे। अनुपमा आनंद (IAS 2023) सरायपाली (महासमुंद) की एसडीएम को प्रमोट करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत, महासमुंद के पद पर पदस्थ किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रैंकिंग में बस्तर का जलवा, बोधघाट थाना बना छत्तीसगढ़ का नंबर-1

रायपुर.

बस्तर जिले के बोधघाट पुलिस थाने ने पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय की एनुअल पुलिस स्टेशन रैंकिंग-2025 में प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाना बनने का गौरव हासिल किया है। अपराध नियंत्रण, एनडीपीएस मामलों में प्रभावी कार्रवाई, कम्युनिटी पुलिसिंग, पुलिस स्टेशन प्रबंधन, इनोवेशन और एक्सीलेंस इन पुलिसिंग जैसे प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर यह सम्मान मिला है।

बस्तर पुलिस के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी थाने को पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वश्रेष्ठ पुलिस स्टेशन का राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। बस्तर आइजी बद्री नारायण मीणा ने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी लीलाधर राठौड़ के नेतृत्व में किए गए कार्यों और वर्तमान थाना प्रभारी तामेश्वर चौहान सहित पूरे स्टाफ की टीमवर्क ने यह उपलब्धि दिलाई है। यह बस्तर पुलिस की जन-केंद्रित, पेशेवर और परिणाम आधारित कार्यशैली की पहचान है।

कई मानकों पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यह सम्मान कम अपराध दर, केस सुलझाने की गति, सामुदायिक पुलिसिंग, बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक सेवाओं के आधार पर प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य पुलिसिंग में सुधार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में, पूर्व में राज्य के अन्य थानों, जैसे रायपुर के सिविल लाइंस या अन्य प्रमुख थानों को भी उनकी कार्यक्षमता के आधार पर जिला या संभाग स्तर पर सराहा गया है, किंतु राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेस्ट पुलिस स्टेशन’ का यह खिताब बोधघाट के लिए ऐतिहासिक है।

छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए नया नियम, एक हेक्टेयर भूमि पर लगाने होंगे 2,500 पौधे

रायपुर.

प्रदेश में उद्योगों को अपने प्रत्येक हेक्टेयर क्षेत्र में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाने होंगे। साथ ही त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधारोपण को बढ़ावा देकर सघन ग्रीन बेल्ट विकसित करने और परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत हिस्से को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करना अनिवार्य होगा।

राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल ने मानसून 2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों में पौधारोपण अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं। मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों के पौधारोपण कार्यक्रमों की प्रगति, संरक्षण, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी जीवित रहने की दर सुनिश्चित करना भी उद्योगों की जिम्मेदारी है।

बरगद, पीपल, नीम, आम जैसी प्रजातियों का करें उपयोग
बैठक में उद्योगों को बरगद, पीपल, नीम, आम सहित स्थानीय एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के अधिकाधिक पौधे लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही परिसर के भीतर और बाहर दोनों स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण करने पर जोर दिया गया। पर्यावरणीय निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को आनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे चालू रखने और प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए गए।

छत्तीसगढ़ में 41 प्रतिशत वन आवरण
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की ‘स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन आवरण में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। राज्य में सघन वनों (Very Dense Forests) का क्षेत्र तुलनात्मक रूप से स्थिर है, किंतु मध्यम और खुले वनों के घनत्व में मानवीय हस्तक्षेप, खनन और औद्योगिक विस्तार के कारण प्रभाव पड़ा है। राज्य का कुल वनावरण भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 41 प्रतिशत है। वर्तमान में सरकार द्वारा ‘सघन वृक्षारोपण’ और ‘नगर वन’ जैसी योजनाओं से घटते वन घनत्व को संतुलित करने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

‘जिसे कभी देखा नहीं, उसने मुझे पिता बना लिया’, राजनांदगांव में एक वोट से जीते पार्षद पर नया विवाद

खैरागढ़.

राजनांदगांव जिले के नगर पंचायत घुमका के वार्ड क्रमांक-14 से महज एक वोट से चुनाव जीतने वाले पार्षद संतोष गंधर्व की पहचान और जाति प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। खैरागढ़ जिले के ग्राम सिरसाही निवासी जगन्नाथ गंधर्व ने ठेलकाडीह थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि संतोष उनका पुत्र नहीं है।

इसके बावजूद कथित रूप से उनका नाम पिता के रूप में दर्ज कर दस्तावेज तैयार कराए गए और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा गया। दूसरी ओर, संतोष गंधर्व ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बचपन से लेकर आज तक उनके सभी सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में जगन्नाथ गंधर्व का ही नाम पिता के रूप में दर्ज है और चुनाव हारने वाले लोग राजनीतिक साजिश के तहत विवाद खड़ा कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता का दावा
शिकायतकर्ता जगन्नाथ गंधर्व के मुताबिक, उन्हें पूरे मामले की जानकारी तब मिली, जब घुमका से कुछ लोग उनके गांव सिरसाही पहुंचे और पूछा कि क्या संतोष उनका बेटा है। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम से जुड़े पुराने स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर दस्तावेज निकाले गए और उन्हीं का उपयोग जाति प्रमाण पत्र बनवाने में किया गया। उनका दावा है कि उन्होंने कभी संतोष को अपना पुत्र नहीं माना और न ही वे उसे जानते हैं। उन्होंने पुलिस से जन्म रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर, स्कूल दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र और अन्य अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

चुनाव जीतने के बाद विवाद खड़ा होना राजनीतिक साजिश का हिस्सा- पार्षद
वहीं संतोष गंधर्व का कहना है कि उनकी मां और जगन्नाथ गंधर्व का विवाह हुआ था, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। उनके अनुसार, परिवार में तीन भाई और दो बहन हैं तथा बचपन से आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड सहित सभी दस्तावेजों में जगन्नाथ गंधर्व का नाम ही पिता के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कोई फर्जी दस्तावेज नहीं बनवाया और यदि रिकॉर्ड गलत होता तो वर्षों पहले ही उस पर आपत्ति उठ जाती। अब चुनाव जीतने के बाद विवाद खड़ा होना राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्कूल से दस्तावेज गलत जानकारी देकर हासिल किए गए, जबकि संतोष का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर चुनाव लड़ने की जानकारी दी थी और पहचान के लिए आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि ठेलकाडीह पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग दिया है।

एक वोट की जीत के बाद बढ़ा विवाद
संतोष गंधर्व वार्ड क्रमांक-14 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में केवल एक वोट के अंतर से चुनाव जीते थे। उनका आरोप है कि चुनाव में हार का सामना करने वाले लोग अब इस मामले को राजनीतिक रंग देकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पुलिस के साथ-साथ अन्य वैधानिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग
फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। एक ओर शिकायतकर्ता स्वयं को संतोष का पिता मानने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संतोष का दावा है कि बचपन से सभी सरकारी दस्तावेजों में वही उनके पिता के रूप में दर्ज हैं। ऐसे में अब पुलिस जांच, जन्म संबंधी रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर, पुराने स्कूल अभिलेख, जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और चुनाव में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला फर्जी पहचान और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का है या फिर चुनावी जीत के बाद उभरा एक पुराना पारिवारिक विवाद। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

डुमरतराई थोक बाजार फेस -2 का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर : परिसर में स्थापित होगी 15 फिट ऊंची प्रतिमा

रायपुर 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के डुमरतराई में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित नवीन थोक बाजार फेस-2 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि परिसर का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर किया जाएगा तथा यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर उनकी 15 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की मजबूत नींव रखी। उनके नाम पर इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का नामकरण राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और रोजगार एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना विकसित होती है, वहां आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, नए निवेश आकर्षित होते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। डुमरतराई का यह आधुनिक थोक बाजार रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापार को नई गति देगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था तथा आधुनिक व्यापारिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ को भी समान महत्व दे रही है। व्यापार, उद्योग और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अनेक सुधार लागू किए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की अधोसंरचना विकास परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा अपनाई गई नई कार्यसंस्कृति और कुशल प्रबंधन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति देंगे।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में व्यापारिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में डुमरतराई में आधुनिक थोक बाजार की जो परिकल्पना की गई थी, वह आज साकार हुई है। इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम होगी।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि नवीन थोक बाजार मंडल की गुणवत्ता, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना प्रदेश में व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि डुमरतराई थोक बाजार का विकास दो चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए। द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिली है।

बस्तर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, माओवादी कैंप ध्वस्त, हथियार और विस्फोटक बरामद

खरियार रोड/रायपुर.

ओडिशा के नुआपड़ा जिले के पाटदर्हा संरक्षित वन में जवानों ने एक माओवादी कैंप ध्वस्त कर हथियार, विस्फोटक और अन्य सामान बरामद किया है। एसपी अमृतपाल सिंह व सीआरपीएफ-19वीं बटालियन के कमाडेंट दिलीपमणि त्रिपाठी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों बलों के संयुक्त अभियान में यह सफलता मिली है।

संयुक्त टीम की बम डिस्पोजल टीम बोडेन थानाक्षेत्र के पाटदर्हा संरक्षित वन के बारपट डोंगर के घने जंगलों और पहाड़ी इलाके में तलाशी पर निकली थी। इस दौरान जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाकर रखा हुआ सामान बरामद किया। अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह एक पुराना कैंप रहा होगा।

एके-47 के कारतूस, दो देसी बंदूकें जब्त
जवानों ने कैंप से दो देसी बंदूक, एक देसी कार्बाइन और मैगजीन, एके-47 की 29 नग गोलियां, एसएलआर की 54 नग गोलियां, दो टिफिन बम, एक खाली टिफिन करियर, आठ नग जिलेटिन स्टिक, एक मल्टीमीटर, एक 12 वोल्ट की बैटरी, डेढ़ किलो बारूद, यूरिया, वायर, सोलर प्लेट, चार्जर, डेटोनेटर, माओवादी साहित्य, वर्दी, बर्तन, मेडिकल किट आदि सामान बरामद किए।

माओवादियों से मुक्त हुआ जिला
केंद्रीय गृह मंत्री ने 31 मार्च 2026 तक जिले को माओवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया था, जिसे पूरा किया जा चुका है। छिटपुट नेटवर्क को खत्म करने और डंप बरामद करने लगातार सर्च और एरिए डामिनेशन अभियान चलाए जा रहे हैं।

एरिया डोमिनेशन के जरिए डंप खोज रहे सुरक्षा बल
हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। इससे सफलता भी मिली है। ‘एरिया डोमिनेशन’ के जरिए दुर्गम इलाकों में प्रवेश कर माओवादियों के पुराने डंप खोजे जा रहे हैं। खुफिया सूचनाओं पर आधारित ये सटीक ऑपरेशन माओवादी विचारधारा के प्रभाव को तेजी से कम कर रहे हैं। विशेषकर गृह मंत्रालय के निर्धारित लक्ष्यों के तहत, सुरक्षा बलों का बेहतर समन्वय और अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग नक्सलियों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने में निर्णायक साबित हो रहा है।

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