धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की अधिसूचना, विकास के नए युग में प्रवेश करेगा क्षेत्र

रायपुर

जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है।

लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं

रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा।

पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच

नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र

रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

बीजेपी सरकार का दावा: सत्ता में आते ही 26 लाख आवासों को मिली मंजूरी, कांग्रेस पर योजना रोकने का आरोप

रायपुर
 छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘डबल इंजन सरकार’ के लाभों पर जोर देते हुए मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र-राज्य समन्वय की सराहना की। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “मैं छत्तीसगढ़ में डबल-इंजन सरकार के दो बड़े फायदे बताऊंगा। डबल-इंजन सरकार की वजह से छत्तीसगढ़ दोगुनी रफ्तार से तरक्की कर रहा है। राज्य को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा फायदा मिल रहा है।

26 लाख आवास का काम पूरा
अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना को पिछली कांग्रेस सरकार ने रोक दिया था, जिससे 18 लाख गरीब लोग घर से वंचित रह गए। राज्य में हमारी सरकार के आने के बाद केंद्र सरकार के सहयोग और विशेष समर्थन से प्रधानमंत्री आवास योजना को मंजूरी मिली और इस योजना के तहत 26 लाख घरों को स्वीकृति दी गई है।

पीएम मोदी को दी बधाई
पीएम मोदी द्वारा देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बनाने पर अरुण साव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद देश में राजनीति का स्वरूप और दिशा बदल गई है। राजनीति अब प्रदर्शन-आधारित हो गई है। विकास की राजनीति शुरू हो गई है। एनडीए की बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए और मजबूत हुआ है।”

कांग्रेस सरकार ने रोक दी थी योजना
2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी। इस दौरान राज्य में पीएम आवास योजना के कार्य को गति नहीं मिली थी। डेप्युटी सीएम टीएस सिंहदेव के पास इस विभाग की जिम्मेदारी थी। पीएम आवास का काम रुकने के बाद उन्होंने विभाग से इस्तीफा दे दिया था।

    छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम ने दी पीएम मोदी को बधाई
    कहा- बीजेपी सरकार में 26 लाख आवास मंजूर हुए
    कांग्रेस के कार्यकाल में राज्य में रोक दी थी योजना
    कांग्रेस के समय टीएस सिंहदेव के पास थी जिम्मेदारी

पहली कैबिनेट में हुआ कैबिनेट
छत्तीसगढ़ में 2023 में बीजेपी की सरकार बनी थी। सीएम पद की शपथ लेने के बाद छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने पहले ही मीटिंग में पीएम आवास योजना के काम को मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्य में पीएम आवास का काम शुरू हुआ। राज्य में पीएम आवास के निर्माण का काम तेजी से हो रहा है।

 

छत्तीसगढ़ में बदला मानसून का मिजाज: 50 साल में बदला ट्रेंड, अब अगस्त-सितंबर में ज्यादा बरसात

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में सुकमा और दंतेवाड़ा के किसान बारिश ज्यादा होने से परेशान है। जबकि जशपुर और बलरामपुर के किसान बारिश कम होने से चिंता में है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के किसान हर साल आसमान देखकर यही सोचते हैं कि इस बार जून साथ देगा या नहीं।

पिछले 40 से 50 साल के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उसकी चाल बदल रही है। बस्तर में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश घट रही है।

सबसे बड़ी बात यह है कि खेती की शुरुआत तय करने वाला जून अब सबसे ज्यादा अनिश्चित महीना बनता जा रहा है। ये केवल मौसम की कहानी नहीं है। इसका मतलब है कि किसान कब बुआई करेगा, तालाब में कितना पानी भरेगा, शहरों को कितना पानी मिलेगा, भूजल कितना रिचार्ज होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत कितनी बढ़ेगी।

यानी बदलता मानसून सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ मामला है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में दिख रहा है जब छत्तीसगढ़ एक और मानसून सीजन के मुहाने पर खड़ा है। इस साल भी किसानों की नजर पहली अच्छी बारिश पर टिकी है।

मौसम विभाग सामान्य मानसून की संभावना जता रहा है, लेकिन पिछले दशकों के आंकड़े बताते हैं कि अब केवल यह जानना काफी नहीं है कि कितनी बारिश होगी। असली सवाल यह है कि बारिश कब होगी और कहां होगी।

पहले पूरी तस्वीर समझिए
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लाखों किसान आज भी बारिश के भरोसे खेती करते हैं। प्रदेश में सिंचाई का दायरा बढ़ा जरूर है, लेकिन अब भी बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर टिका है।

यही वजह है कि मानसून यहां सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का इंजन है। बारिश अच्छी हुई तो फसल अच्छी होगी, बाजार चलेगा, गांवों में नगदी आएगी। बारिश बिगड़ी तो असर खेत से लेकर मंडी और घर की रसोई तक दिखाई देता है।

पिछले कई दशकों के आंकड़ों का एनालिसिस बताता है कि राज्य में औसत बारिश भले बहुत ज्यादा नहीं बदली हो, लेकिन उसका पैटर्न बदल गया है। यही सबसे बड़ा संकेत है।

बस्तर भीग रहा, सरगुजा सूख रहा
एक समय था जब पूरे छत्तीसगढ़ को एक जैसी बारिश वाला राज्य माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग के कई जिलों में बारिश बढ़ने का रुझान दिखाई देता है।

सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे जिलों में लंबे समय के आंकड़े वर्षा बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। सुकमा में बारिश बढ़ने का ट्रेंड राज्य में सबसे ज्यादा पाया गया है। इसके उलट सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में बारिश घटने का रुझान दिखाई देता है।

जशपुर में गिरावट सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। यानी एक तरफ राज्य का दक्षिणी हिस्सा ज्यादा पानी की ओर बढ़ रहा है, दूसरी तरफ उत्तरी हिस्सा कम बारिश की ओर बढ़ता दिख रहा है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया गया वर्षा का आकलन और लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 50 सालों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव दर्ज किया गया है। यह बदलाव आने वाले सालों में जल प्रबंधन और खेती की रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है।

खेती की शुरुआत तय करने वाला जून सबसे ज्यादा अनिश्चित
जून के महीने में खेत तैयार होते हैं। धान की नर्सरी डाली जाती है। बुआई की योजना बनती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यही महीना सबसे ज्यादा अनिश्चित होता जा रहा है। कुछ सालों में जून में अच्छी बारिश हुई। कुछ सालों में बारिश बहुत कम रही। यानी किसान के लिए सबसे बड़ा जोखिम सीजन की शुरुआत में ही खड़ा हो जाता है।

यही वजह है कि कई बार किसान जल्दी बुआई कर देते हैं और बाद में बारिश रुक जाती है। दूसरी ओर कुछ सालों में मानसून देर से सक्रिय होता है और पूरा कृषि कैलेंडर पीछे खिसक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती कुल बारिश नहीं, बल्कि जून की अनिश्चितता होगी।

मानसून पीछे खिसक रहा है?
आंकड़ों में एक और दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है। जून और जुलाई की बारिश में गिरावट के संकेत मिलते हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है। सरल भाषा में समझें तो मानसून का वजन अब शुरुआती महीनों से हटकर बाद के महीनों की ओर जाता दिख रहा है।

पहले किसान जून और जुलाई के भरोसे खेती शुरू करते थे। अब कई बार अगस्त और सितंबर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। इस बदलाव का असर धान की फसल पर पड़ता है। शुरुआती समय में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पौध कमजोर होती है। वहीं कटाई के आसपास ज्यादा बारिश होने पर तैयार फसल को नुकसान हो सकता है।

क्या कहते हैं मौसम एक्सपर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर की डायरेक्टर गायत्री वाणी के मुताबिक, मानसून के सीजन में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त महीने में होती है। जून में बारिश को लेकर सबसे ज्यादा अनिश्चितता रहती है, क्योंकि यह पूरी तरह मानसून के प्रदेश में पहुंचने और उसकी प्रगति पर निर्भर करता है।

सबसे ज्यादा बारिश कहां, सबसे कम कहां?
छत्तीसगढ़ के अंदर भी बारिश का अंतर काफी बड़ा है। सुकमा आज भी राज्य का सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। इसके बाद बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर आते हैं।दूसरी ओर दुर्ग, बलौदाबाजार, मुंगेली, कबीरधाम और बेमेतरा अपेक्षाकृत कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।

ज्यादा बारिश भी हमेशा अच्छी खबर नहीं
आमतौर पर माना जाता है कि जहां ज्यादा बारिश होती है वहां किसानों को फायदा होता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि 4 महीने में धीरे-धीरे बारिश हो तो खेती को फायदा मिलता है। लेकिन यदि कुछ दिनों में बहुत ज्यादा पानी गिर जाए तो उसका बड़ा हिस्सा बह जाता है।

इससे खेतों में कटाव बढ़ता है। छोटी नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। गांवों का संपर्क टूटता है। फसलें जलभराव से प्रभावित होती हैं। यानी समस्या सिर्फ कम बारिश नहीं, बल्कि कम समय में ज्यादा बारिश भी है।

पानी की टंकी से लेकर तालाब तक असर
यह बदलाव रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी मायने रखता है। यदि बारिश का वितरण बिगड़ता है तो भूजल रिचार्ज प्रभावित होता है। इससे हैंडपंप, बोरवेल और छोटे जल स्रोत प्रभावित होते हैं।

गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। दूसरी ओर भारी बारिश वाले दिनों की संख्या बढ़ती है तो शहरी जलभराव की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। यानी बदलते मानसून का असर गांव और शहर दोनों पर पड़ता है।

ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार से स्वास्थ्य सेवाएं हुई सुदृढ़ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की।  उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।      

मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।                

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।              

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।  जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।                    

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

मुहर्रम में DJ और म्यूजिक पर रोक, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी; उल्लंघन पर ₹50 हजार जुर्माना

रायपुर
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि इस्लामिक पर्वों को केवल इस्लामिक शिक्षा के अनुसार की आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए वफ्फ बोर्ड ने मस्जिद कमेटियों, दरगाह कमेटियों और आयोजकों के लिए लेजर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि सभी कार्यक्रम इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार ही आयोजित किए जाएं।

इस्लामिक एडवाइजरी जारी
एडवाइजरी में मुहर्रम और दूसरे इस्लामिक धार्मिक आयोजनों से पहले किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एजवाइजरी में वक्फ बोर्ड ने डीजे म्यूजिक, बैंड-बाजा, डांस प्रोग्राम, आतिशबाजी और पारंपरिक “शेर” परफॉर्मेंस जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि ऐसी गतिविधियां शरीयत के नियमों के मुताबिक नहीं हैं।

जुर्माने का भी प्रावधान
एडवाइज़री में चेतावनी दी गई है कि जो कमेटियां इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें कमेटी को भंग करने और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

सादगी से मनाएं त्योहार
वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे मुहर्रम को इबादत, सादगी, अनुशासन और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनाएं।

    छत्तीसगढ़ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी
    सादगी से साथ त्योहार मनाएं मुस्लिम समाज
    डीजे बजाना शरीयत के नियमों के खिलाफ
    उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना

बकरीद में की थी अपील
इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बकरीद को लेकर भी अपील की थी। बकरीद के दौरान वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कुर्बानी खुले में नहीं करना चाहिए। कुर्बानी बंद जगह पर होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि खुले में खून नहीं बहाना चाहिए। दूसरे धर्म के लोगों को सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे का उदाहरण पेश करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: बीमा कंपनी की याचिका खारिज, राइस मिल को 43.30 लाख देने का आदेश

 दुर्ग
 बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों के निपटारे में की जाने वाली मनमानी और कटौती पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को पूरी तरह से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, उपभोक्ता किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल की काउंटर अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 11 मार्च 2024 से आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा।

बिना ठोस कानूनी आधार के कम किया दावा
प्रकरण के अनुसार, दुर्ग ब्लॉक के समोदा में स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल ने अपनी मिल में स्थापित बूलर कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। एक अक्टूबर 2023 को यह मशीन अचानक खराब हो गई, जिसकी सूचना मिल प्रबंधन ने तुरंत बीमा कंपनी को दी। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, उपभोक्ता के 45 लाख 58 हजार 340 रुपये के वास्तविक दावे को घटाकर मात्र 20 लाख 55 हजार रुपये कर दिया।

जिला आयोग ने ग्राहक के पक्ष मे सुनाया आदेश
बीमा कंपनी के निर्णय के खिलाफ राइस मिल के संचालक कृष्णा अग्रवाल ने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग में न्याय की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला आयोग ने 28 जुलाई 2025 को बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश को चुनौती देते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। वहीं, पीड़ित उपभोक्ता ने भी काउंटर अपील दायर कर पूरे नुकसान की भरपाई की मांग की। राज्य आयोग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद माना कि कंपनी ने दावे को अनुचित तरीके से कम किया था और रिपेयर बिल के आधार पर पूरा भुगतान करने का फैसला सुनाया।

IRDAI से करेंगे शिकायत
उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर खारिज करने के बढ़ते मामलों को लेकर भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भी औपचारिक शिकायत भेजी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके।

 

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार

सिर्फ एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं तीन जिंदगियां

एमसीबी

रक्तदान को महादान कहा जाता है और यह केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस ( World Blood Donor Day) मनाया जाता है। यह दिवस उन लाखों स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। साथ ही यह दिवस सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी संदेश देता है।

क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2004 से विश्व रक्तदाता दिवस मनाने की शुरुआत की। 14 जून का दिन ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ( Karl Landsteiner) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चुना गया है। उन्होंने (ABO Blood Group System ) रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी, जिसने रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

रक्त का कोई विकल्प नहीं
आज तक रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त जीवनरक्षक साबित होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही किसी जरूरतमंद के लिए आशा की किरण बनते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त की एक यूनिट कम से कम तीन लोगों की जान बचा सकती है। रक्तदान के बाद रक्त को विभिन्न घटकोंकृरेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में विभाजित कर अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है।

कौन कर सकता है रक्तदान?
सामान्यतः 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 से 50 किलोग्राम या उससे अधिक हो तथा हीमोग्लोबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो, रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व चिकित्सकीय जांच और परामर्श लिया जाता है, जिससे दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

रक्तदान से जुड़े भ्रम और सच्चाई
समाज में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रक्तदान से कमजोरी आती है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की पूर्ति कर लेता है। नियमित रक्तदान स्वास्थ्य परीक्षण का भी एक अवसर प्रदान करता है।

रक्त समूहों की समझ भी है जरूरी
रक्तदान और रक्त प्राप्ति रक्त समूहों पर निर्भर करती है। सही रक्त समूह मिलने पर ही मरीज का सुरक्षित उपचार संभव होता है।

O $ :  सबसे सामान्य रक्त समूह
देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी का रक्त समूह  O $ माना जाता है। O $  रक्त समूह वाले व्यक्ति  O $‚ A $‚ B $ और  AB $   समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि वे केवल  O $  और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

O & : यूनिवर्सल डोनर
O & रक्त समूह को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है क्योंकि इस समूह का रक्त लगभग सभी रक्त समूहों के मरीजों को दिया जा सकता है। हालांकि  O&  समूह के व्यक्ति केवल  O &  रक्त ही प्राप्त कर सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में इस रक्त समूह का विशेष महत्व होता है।

AB $ : यूनिवर्सल रिसीवर
AB $ रक्त समूह वाले लोग किसी भी रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। इसी कारण इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहा जाता है। हालांकि वे केवल  AB $  समूह के लोगों को ही रक्तदान कर सकते हैं।

A $ रक्त समूह
A $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  A $ और  AB $  रक्त समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। वहीं वे  A $] A  &] O $ और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

A  & रक्त समूह
A & रक्त समूह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। इस समूह के लोग  A $] A  &] AB $  और  AB & रक्त समूह को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  A& और  A& समूह से ही प्राप्त कर सकते हैं।

B $ रक्त समूह
B $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $ और  AB $ समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे  B $] B &] O $ और  O &   समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

B &रक्त समूह
B &रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $] B &] AB $ और  AB & समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  B & और  O & समूह से प्राप्त कर सकते हैं।

AB & : दुर्लभ रक्त समूह
AB & भारत में अपेक्षाकृत दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल है। इस समूह के लोग  AB $ और  AB & को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि रक्त  AB &] A  &] B & और  O &  समूह से प्राप्त कर सकते हैं।

युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
देश में रक्त की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता न केवल रक्त भंडार को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश भी प्रसारित करती है।

रक्तदान: महादान
रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। किसी अनजान व्यक्ति को जीवनदान देने का सुख और संतोष अमूल्य होता है। एक छोटा-सा प्रयास किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है और किसी मरीज को नया जीवन दे सकता है।

निष्कर्ष
विश्व रक्तदाता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि रक्त की आवश्यकता किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है। अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीजों की जिंदगी स्वैच्छिक रक्तदाताओं पर निर्भर रहती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान का संकल्प लेना चाहिए। रक्तदान कर हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

संदेश
“रक्तदान करें, जीवन बचाएं। आपकी एक यूनिट रक्त किसी के लिए नई उम्मीद, नई खुशियां और नया जीवन बन सकती है।“

विशेष: लेख – लोकेश्वर सिंह

 

 

रायपुर : अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर : पक्की सड़कें, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और हर आय वर्ग के लिए आवास

रायपुर : अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर : पक्की सड़कें, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और हर आय वर्ग के लिए आवास

अटल विहार योजना से 184 परिवारों को मिला आशियाना

75.39 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है सुनियोजित आवासीय परिसर

रायपुर,

घर केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि वह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव होता है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना ने कोरबा जिले के सैकड़ों परिवारों के लिए इस सपने को साकार कर दिखाया है। अपने घर का सपना संजोए अनेक परिवार आज कोरबा नगरीय क्षेत्र के झगरहा में विकसित अटल विहार कॉलोनी में आत्मविश्वास और संतोष के साथ जीवन बिता रहे हैं। यह आवासीय परिसर आज इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी बनता है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा 75 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से 19 एकड़ में यह आवासीय परियोजना विकसित की गई है। विभिन्न आय वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां कुल 335 स्वतंत्र आवासों एवं फ्लैट भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसमें 50 एच.आई.जी., 18 सीनियर एम.आई.जी., 32 जूनियर एम.आई.जी., 75 एल.आई.जी. तथा 160 ई.डब्ल्यू.एस. आवासों सहित प्रकोष्ठ भवन का निर्माण शामिल है।

परियोजना के अंतर्गत अब तक 305 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और उनका चरणबद्ध हस्तांतरण किया जा रहा है। वर्तमान में 22 एच.आई.जी. तथा 5 सीनियर एम.आई.जी. भवनों का हस्तांतरण भी जारी है। यह उपलब्धि केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

अटल विहार कॉलोनी में अब तक 184 आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं, जहां परिवार पिछले तीन वर्षों से शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में निवास कर रहे हैं। पक्की सड़कें, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नियोजित आवासीय परिसर और सामुदायिक वातावरण ने यहां के निवासियों को एक नई जीवन शैली प्रदान की है। जिन परिवारों के लिए स्थायी आवास कभी एक चुनौती था, उनके लिए अटल विहार आज आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन का पर्याय बन चुका है।

वर्तमान में कॉलोनी में एक व्यवसायिक भू-खण्ड, 4 एच.आई.जी. भवन तथा 103 ई.डब्ल्यू.एस. फ्लैट भवन क्रय के लिए उपलब्ध हैं, जिससे और अधिक परिवार अपने घर के सपने को वास्तविकता में बदल सकते हैं।

झगरहा स्थित अटल विहार कॉलोनी न केवल आवास निर्माण की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, बल्कि यह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की प्रतिबद्धता का सजीव उदाहरण भी है। यहां बसते परिवार इस बात के साक्षी हैं कि गुणवत्तापूर्ण आवास किस प्रकार जीवन की दिशा और दशा दोनों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जांजगीर चांपा जिले को देंगे विभिन्न विकास कार्यों की सौगात

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जांजगीर चांपा जिले को देंगे विभिन्न विकास कार्यों की सौगात

सत्य निज नाम सत्संग सम्मेलन में होंगे शामिल

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 जून को जांजगीर चांपा जिले के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा जिले में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय सत्य निज नाम बोध संस्थान पोड़ी (राछा) में आयोजित सत्य निज नाम सत्संग सम्मलेन में भी शामिल होंगे।

केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि जिले के प्रभारी एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विशिष्ट अतिथि छ.ग. विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद जांजगीर-चांपा श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक जांजगीर-चांपा ब्यास कश्यप, विधायक अकलतरा राघवेन्द्र कुमार सिंह, विधायक पामगढ़ श्रीमती शेषराज हरबंश, विधायक जैजैपुर बालेश्वर साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, अध्यक्ष छ.ग. खनिज विकास निगम सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता आनंद मिरी, उपाध्यक्ष जिला पंचायत गगन जयपुरिया, अध्यक्ष जनपद पंचायत नवागढ़ श्रीमती कांता कश्यप, ग्राम पंचायत पोड़ी सरपंच श्रीमती सरोजनी आशिकर होंगे। 

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल

सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा था स्थानीय उत्पाद, बाजार में बढ़ी सुगंधित पारंपरिक चावल की मांग

रायपुर,

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना जरिया

         गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए।

कलेक्टर की मौजूदगी में 7 हजार की सीधी खरीदी

        जिले में पहुंचे इन ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की विशेष उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल की खरीदी की। इस खरीदी की कुल कीमत 7 हजार रुपये रही। रायपुर से आए ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्पाद की तारीफ किए जाने के बाद ही उनकी रुचि इस चावल के प्रति जगी थी और वे खुद इसकी सुगंध और स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी इस चावल की खरीदी जारी रखने की बात कही।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है मजबूती

        इस मौके पर तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति रंग ला रही है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके लिए बाजार के नए रास्ते खुल रहे हैं।

कृषि समृद्धि का नया प्रतीक बना विष्णु भोग

       अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला विष्णु भोग चावल अब सिर्फ एक स्थानीय फसल नहीं, बल्कि जिले की कृषि समृद्धि और महिला उद्यमिता का एक सफल ब्रांड बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं।

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