गरियाबंद जिला जेल के 200 मीटर दायरे में ड्रोन उड़ाने पर रोक, प्रशासन ने जारी किया आदेश

गरियाबंद.

बंदियों की सुरक्षा को खतरा देखते हुए गरियाबंद जिला प्रशासन ने जिला जेल के 200 मीटर की परिधि को ‘नो ड्रोन फ्लाई जोन’ घोषित किया है. कलेक्टर भगवान सिंह उइके के धारा 188 लागू करने के साथ ही अब कोई भी जिला जेल के इर्द-गिर्द ड्रोन नहीं उड़ा सकता है. जिला प्रशासन ने बंदियों की सुरक्षा, संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था के लिहाज से यह आदेश जारी किया है.

अंबिकापुर की केंद्रीय जेल के ऊपर भी नहीं उड़ेंगे ड्रोन
अंबिकापुर. केंद्रीय जेल अंबिकापुर की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने जेल परिसर के आसपास 100 मीटर के दायरे को रेड जोन घोषित कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अजीत वसंत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार केंद्रीय जेल की मुख्य परिधि से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के ड्रोन, गुब्बारे या अन्य हवाई उपकरणों के उड़ान संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही इस क्षेत्र में हवाई फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति भी नहीं होगी।

प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने की आशंका के चलते फैसला
प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर कुछ असामाजिक तत्व ड्रोन के माध्यम से जेल परिसर तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर सकते है। इसी आशंका को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है, ताकि जेल की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक न हो।

उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
जिला प्रशासन के इस फैसले को केंद्रीय जेल अंबिकापुर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यकतानुसार कड़े निर्णय लिए जाएंगे।

शाला प्रवेश उत्सव को जनआंदोलन बनाने आगे आएं जनप्रतिनिधि : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

शाला प्रवेश उत्सव को जनआंदोलन बनाने आगे आएं जनप्रतिनिधि : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री ने लिखा पत्र

16 से 27 जून तक चलेगा शाला प्रवेश उत्सव अभियान

“कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे” अभियान की सफलता के लिए जनसहभागिता का किया आह्वान

रायपुर 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर 16 जून से 27 जून 2026 तक आयोजित होने वाले “शाला प्रवेश उत्सव” में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त आधार है तथा यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में प्रदेश के समस्त विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े सभी लोगों को नवीन शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि नए शैक्षणिक सत्र के साथ प्रदेशभर में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बालक-बालिका का विद्यालय में प्रवेश तथा नियमित अध्ययन सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष, महापौर तथा नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे अपने क्षेत्र के किसी विद्यालय में सुविधानुसार उपस्थित होकर अभियान में सहभागी बनें तथा ऐसे बच्चों की पहचान और नामांकन के लिए प्रेरित करें, जो अभी तक विद्यालय से नहीं जुड़े हैं अथवा बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सहभागिता इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम विद्यालयों के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षण वातावरण विकसित किया जा रहा है तथा वर्ष 2026 से 150 विवेकानंद विद्यालयों की स्थापना कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मानक स्थापित किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शासकीय विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक-संपन्न और छात्र-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है। विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, गणवेश तथा बालिकाओं के लिए सरस्वती साइकिल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग और व्यापक जनभागीदारी से शाला प्रवेश उत्सव को सफल बनाते हुए प्रदेश के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा का अधिकार पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।

आज से बंद हुए CG के टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य, पर्यटकों की एंट्री पर रोक

रायपुर.

मानसून सीजन को देखते हुए सोमवार से छत्तीसगढ़ के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं. ये सभी संरक्षित वन क्षेत्र अब 1 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. वन विभाग के अनुसार, जंगलों के दरवाजे पर्यटकों के लिए 2 अक्टूबर से दोबारा खोले जाएंगे.

हर साल बारिश के मौसम में करीब तीन महीने के लिए इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है. बारिश के दौरान जंगलों में प्रतिकूल परिस्थितियां बनने और वन्य प्राणियों के प्रजननकाल को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जाता है. इससे वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाती है.

जनसेवा ही प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च उद्देश्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनसेवा ही प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च उद्देश्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का करें निर्वहन : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने की मुलाकात

बस्तर से सरगुजा तक के अनुभव साझा कर प्रशिक्षु अधिकारियों ने बताया छत्तीसगढ़ को अद्भुत प्रदेश

रायपुर 
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनकी सफलता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि  कि प्रशासनिक सेवा जनसेवा का सबसे प्रभावी माध्यम है और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के निर्णय हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, इसलिए प्रत्येक निर्णय में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझें। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग समाज और आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है। यहां के लोग सरल, सहज, मेहनती और आत्मीय स्वभाव के हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों, तेजी से विकसित हो रही कनेक्टिविटी, पर्यटन की संभावनाओं, नक्सल उन्मूलन की सफलता तथा राज्य के विकास की यात्रा से अवगत कराया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय परंपराओं और विकास के नए अवसरों पर भी अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों को कहा कि ईमानदारी, निष्ठा और जनहित की भावना से लिया गया प्रत्येक निर्णय प्रदेश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बस्तर संभाग के सुकमा और बीजापुर जिलों सहित सरगुजा संभाग के जशपुर, सरगुजा और कोरिया जिलों का भ्रमण करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जनजीवन, संस्कृति, विकास गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया तथा मां दंतेश्वरी के दर्शन भी किए।

अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विविधताओं, सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मीयता से भरपूर प्रदेश है। यहां के लोगों के स्नेह, जनजातीय परंपराओं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की संभावनाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से जनहित में कार्य करना उनके लिए गौरव और जिम्मेदारी दोनों है।

मुलाकात के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशासनिक सेवा की तैयारी से जुड़े अनुभव, चुनौतियां और प्रेरणादायक प्रसंग भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्हें निरंतर सीखते रहने, जमीनी स्तर से जुड़े रहने तथा मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर कार्य करने की प्रेरणा दी।

उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी गोकुल आर. के., वी. यशवंत नायक एवं ईशांत जायसवाल वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। तीनों अधिकारियों को छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ है। जिला प्रशिक्षण पर रवाना होने से पूर्व उन्होंने मुख्यमंत्री से भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक एवं अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, संचालक टी.सी. महावर तथा संयुक्त संचालक प्रणव सिंह उपस्थित थे।

समर वेकेशन खत्म, आज से CG हाईकोर्ट में शुरू होगी नियमित सुनवाई

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का समर वेकेशन समाप्त हो गया है. सोमवार से हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू होगी. हाईकोर्ट प्रशासन ने 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह की कॉज लिस्ट भी जारी कर दी है. ईंधन की बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को वाहन साझा (व्हीकल शेयरिंग) कर कार्यालय आने की सलाह दी है.

समर वेकेशन के दौरान लागू की गई वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है. अब सभी अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय पहुंचकर कार्य करेंगे.

वाहन शेयर करने की सलाह
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना अभी भी जरूरी है। न्यायिक अधिकारियों से कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर ही सरकारी वाहनों का उपयोग करें। हाईकोर्ट में 18 मई से प्रारंभ हुआ ग्रीष्मकालीन अवकाश अब समाप्त हो गया है।

वाहन साझा करने की सलाह
हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो, वे अपने सरकारी वाहनों का उपयोग अन्य अधिकारियों के साथ साझा करें। इससे ईंधन की बचत होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

18 मई से था ग्रीष्मकालीन अवकाश
हाईकोर्ट में 18 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हुआ था। इस दौरान जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए वेकेशन बेंचों का गठन किया गया था। प्रत्येक सप्ताह डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच में निर्धारित दिनों पर सुनवाई जारी रही।

जारी हुई नई कॉज लिस्ट
हाईकोर्ट प्रशासन ने 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह की कॉज लिस्ट भी जारी कर दी है। नियमित कामकाज शुरू होने के साथ ही लंबित मामलों की सुनवाई फिर से सामान्य तरीके से की जाएगी।

वर्क फ्रॉम होम खत्म, कोर्ट में होगी सीधी पैरवी
हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था भी समाप्त कर दी है। अब अधिवक्ता पहले की तरह कोर्ट रूम में उपस्थित होकर अपने मामलों की पैरवी करेंगे। हालांकि, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा पूर्व की तरह उपलब्ध रहेगी, जिससे जरूरत पड़ने पर वर्चुअल भी सुनवाई में शामिल हुआ जा सकेगा।

बस्तर देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर के आर्थिक विकास और लघु वनोपजों के समुचित उपयोग के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक का विमोचन

रायपुर 
नक्सलवाद का दंश झेलते-झेलते बस्तर चार दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब नक्सलवाद की समाप्ति के साथ केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाओं सहित सभी आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पूर्व ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण किए हैं। उनके नेतृत्व में देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली सफलता भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया।

उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और उत्साह का संचार करता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में माओवाद के विरुद्ध सामूहिक संकल्प विकसित हुआ। सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा, आम जनता खुलकर माओवाद के विरोध में सामने आई और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। इस संघर्ष में लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर आए थे, जहां उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव रंजन प्रसाद और सुरचना नायडू ने यह पुस्तक ऐसे समय में लिखी है, जब माओवाद की समाप्ति हो चुकी है। इस दृष्टि से यह पुस्तक और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। समय के साथ स्मृतियां धुंधली हो जाती हैं और घाव भरने लगते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि माओवाद के कठिन दौर और उससे मुक्ति के संघर्ष को दस्तावेज़ी रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख सकें।

उन्होंने कहा कि जब भावी पीढ़ियां इस विषय पर लिखी पुस्तकों को पढ़ेंगी, तब उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि माओवाद से मुक्ति के लिए समाज और सुरक्षा बलों ने कितना कठिन संघर्ष किया तथा कितने जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह पुस्तक उन्हें यह भी बताएगी कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और लोगों का विश्वास केवल संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही जीता जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि लेखकों ने अत्यंत गंभीर और व्यापक शोध किया है। उन्होंने बस्तर समाज के विभिन्न वर्गों, आत्मसमर्पित नक्सलियों तथा नक्सलवाद को निकट से देखने और झेलने वाले लोगों से संवाद कर महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन किया है। पुस्तक यह उजागर करती है कि किस प्रकार माओवादी नेतृत्व ने अपने कैडर का विस्तार किया और अनेक परिवारों पर संगठन में सदस्य भेजने का दबाव बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखकों ने अपने शोध में जिन पूर्व नक्सलियों से बातचीत की, उनमें लगभग 80 प्रतिशत लोग अशिक्षित या केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षित पाए गए। जिस आयु में उनके हाथों में कलम होनी चाहिए थी, उस आयु में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा से वंचित रखा, उन्हें परिवार और समाज से दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर पर पहले भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें माओवाद का वास्तविक चेहरा उजागर करने के साथ-साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का भी प्रभावी चित्रण किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब बस्तर के नवनिर्माण का समय है। राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए शासकीय योजनाओं का लाभ सैचुरेशन मोड में लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जहां पहले सुरक्षा कैंप स्थापित थे, वहां अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं, जो शासकीय सेवाओं, कौशल विकास और उद्यमिता के केंद्र बनेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से अगले तीन वर्षों में इस आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। सहकारिता के माध्यम से बस्तर को अग्रणी संभाग बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जनजातीय परिवारों को गाय अथवा भैंस उपलब्ध कराकर कृषि के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उन्हें बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए बस्तर में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है तथा अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से यहां की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने पुस्तक के लेखक राजीव रंजन प्रसाद और सुरचना नायडू को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक को बताया वर्षों की मेहनत का परिणाम

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक वर्षों की मेहनत और गहन अध्ययन का परिणाम है। यह पुस्तक किसी वातानुकूलित कक्ष में बैठकर नहीं लिखी गई, बल्कि बस्तर के दूरस्थ जंगलों तक पहुंचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर और जमीनी वास्तविकताओं को समझकर तैयार की गई है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा – माओवाद पेट से नहीं, दिमाग से आया था

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक आवश्यकता से नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था। इसका उद्देश्य बंदूक की नली के बल पर सत्ता स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

इस दौरान उन्होंने बाबा नागार्जुन की कविता का उल्लेख भी किया। शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद बस्तर में मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। देवगुड़ियों में पूजा-पाठ पुनः प्रारंभ हो गया है।  राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है तथा इसके लिए पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने भी पुस्तक के लेखक राजीव रंजन प्रसाद एवं सुरचना नायडू को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में साहित्य, मीडिया, समाज सेवा एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

खाद कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, 1500 बोरी जब्त; दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

धमतरी.

धमतरी जिले में खरीफ सीजन से पहले खाद की कालाबाजारी पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में कृषि विभाग की टीम विभिन्न उर्वरक विक्रय केंद्रों में जांच के लिए पहुंची. निरीक्षण के दौरान मगरलोड विकासखंड के करेली छोटी स्थित वंदना खाद भंडार में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बिक्री और कम्प्यूटराइज्ड बिल नहीं देने की शिकायत सही पाई गई.

अनियमितता की पुष्टि होने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठान का उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिया. साथ ही दुकान में रखी 859 बोरी रासायनिक उर्वरक भी जब्त कर ली गई. मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है.

अन्य प्रतिष्ठानों पर भी हुई कार्रवाई
नगरी विकासखंड के बेलरगांव स्थित पवार ट्रेडर्स से 600 बोरी और जय किसान ट्रेडर्स से 100 बोरी जैविक खाद जब्त की गई. दोनों प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. कुरूद विकासखंड के चण्डी ट्रेडर्स और किसान ट्रेडर्स में POS मशीन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाए जाने के साथ ही मूल्य सूची और उपलब्ध स्टॉक की जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई थी. इस गंभीर अनियमितता पर दोनों प्रतिष्ठानों के उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं.

कृषि विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से कालाबाजारी करने वाले प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया है. वहीं प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक खरीदते समय अनिवार्य रूप से पक्का बिल लें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें.

बस्तर के 3 गांवों में शिक्षा का नया सवेरा, आजादी के बाद पहली बार खुलेंगे स्कूल

दंतेवाड़ा.

मलगिर क्षेत्र के बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल गांवों में आजादी के बाद पहली बार स्कूल शुरू होने जा रहे हैं. इन गांवों के 65 बच्चे पहली बार औपचारिक शिक्षा से जुड़ेंगे. इलाका अब तक सड़क और शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित रहा है.

शिक्षा विभाग की टीम ने गर्मी की छुट्टियों में दुर्गम रास्तों पर पैदल पहुंचकर सर्वे किया. घर-घर जाकर बच्चों की पहचान और दस्तावेज तैयार किए गए. अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया. फिलहाल ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए भवनों में कक्षाएं संचालित होंगी. भविष्य में स्थायी स्कूल भवन बनाने की योजना तैयार की जा रही है.

यह पहल दूरस्थ इलाकों में शिक्षा पहुंचाने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है. साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने का अभियान भी जारी है. पलायन और अन्य कारणों से शिक्षा से दूर हुए बच्चों की सूची तैयार की जा रही है. बस्तर के इन गांवों में अब पहली बार बच्चों के हाथों में कलम और किताब दिखाई देगी.

संत गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलकर समरस, स्वच्छ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर. 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बिलासपुर जिले के बोदरी में आयोजित संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती, शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने संत गाडगे बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके बताए सेवा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क अधोसंरचना विकास की आधारशिला है और इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे बाबा का संपूर्ण जीवन समाज सुधार, स्वच्छता और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वच्छ भारत मिशन, संत गाडगे बाबा के स्वच्छता और जनजागरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कन्नौजे रजक समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 60 लाख रुपये तथा संत गाडगे भवन निर्माण हेतु 25 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही सन्नडय कुर्मी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 60 लाख रुपये और वर्मा समाज के सामुदायिक भवन के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने धमनी-चकरभाठा मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नयन, बोदरी में एयरपोर्ट के समीप खेल मैदान उपलब्ध कराने तथा जोरा तालाब के सौंदर्यीकरण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और समाज के पदाधिकारियों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक बनाने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 2500 किलोलीटर क्षमता के पानी टंकी निर्माण का किया भूमिपूजन

रायपुर. 
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के खम्हारडीह में बहुप्रतीक्षित 2500 किलोलीटर क्षमता के पानी टंकी के निर्माण का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से करीब 20 करोड़ 93 लाख रुपए की लागत से बनने वाली इस पानी टंकी से शहर के 2500 घरों को पानी मिलेगा। इसके लिए चार वार्डों, वार्ड क्रमाकं-9, 10, 30 और 31 में 25 किमी डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन और 2 किमी राइजिंग मेन पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके निर्माण से इन चारों वार्डों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। विधायकगण सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा तथा महापौर श्रीमती मीनल चौबे भी भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराना सरकार का प्राथमिक दायित्व है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महापौर श्रीमती मीनल चौबे के नेतृत्व में रायपुर के सभी क्षेत्रों का तेजी से विकास किया जा रहा है। रायपुर को राजधानी के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। रायपुर के चारों विधायक और महापौर शहर के विकास और जनसुविधाएं बढ़ाने लगातार सक्रियता से विकास एवं निर्माण कार्य स्वीकृत करवा रहे हैं।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने खम्हारडीह में नई पानी टंकी के निर्माण का अपना वादा आज पूर्ण कर दिया है। पूर्ववर्ती सरकार ने जितना काम 5 वर्षों में नहीं किया, विष्णु देव साय की सरकार ने उससे कहीं अधिक कार्य अपने ढाई साल के कार्यकाल में कर दिखाया है। वहीं महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि आज का दिन खम्हारडीह में जल समस्या के स्थायी निदान के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसके लिए केवल राशि ही नहीं दी है, बल्कि उन्होंने यहां के लोगों को जलापूर्ति का साधन दे दिया है।  

राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, रायपुर नगर निगम में जल कार्य विभाग के अध्यक्ष संतोष सीमा साहू, जोन-3 अध्यक्ष श्रीमती साधना प्रमोद साहू, एमआईसी सदस्यगण महेन्द्र खोडियार, श्रीमती संजना संतोष हियाल, अवतार भारती बागल, अमर गिदवानी, जोन 5 जोन अध्यक्ष अम्बर अग्रवाल और रमेश सिंह ठाकुर सहित अनेक पार्षदगण भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

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