बस्तर मॉडल बना देश में मिसाल: डिजिटल गवर्नेंस और ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी ने बदली सुशासन की तस्वीर

​रायपुर. 
प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी ‘फौती नामांतरण’ (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है। ​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा ‘सक्रिय मॉडल’ (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य  जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है।

‘सक्रिय अभियान’: एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच
​आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस ‘रिएक्टिव’ (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर ‘प्रोएक्टिव’ (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा। ​इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है।

​प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब ‘त्रिमूर्ति’ ने संभाला मोर्चा
​इस ‘प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल’ की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी। ​इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की ‘त्रिमूर्ति’ ने इस अभियान को संभाला।

डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीयक’ के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से ‘विलम्ब पंजीयन’ की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए। तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल ‘भुइयां’ पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला ‘वंश वृक्ष’ तैयार किया। पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के ‘वंश वृक्ष’ का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई।

बस्तर की तहसीलों में सुशासन का ‘सेचुरेशन’
​जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं।

​बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत ‘सेचुरेशन’ (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं।

​प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है।

​भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है।

​अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं।

​बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं।

​इस अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नीतियां संवेदनशील और परिणाम-मूलक (Result-Oriented) हों, तो सबसे कठिन सुधार भी संभव हैं। प्रथम चरण 04 वर्ष के लंबित मामले की इस अभूर्वपूर्व सफलता के बाद, बस्तर जिला प्रशासन अब इसके आगामी चरण की ओर कदम बढ़ा चुका है, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत सेचुरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है। ​बस्तर का यह ‘प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल’ राज्य के उन सभी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जहां राजस्व सुधारों को अमली जामा पहनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

रायपुर में डॉक्टरों का कैंडल मार्च, स्टाइपेंड बढ़ाने और आउटसोर्सिंग के विरोध में प्रदर्शन

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों ने भाग लिया।

डॉक्टरों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बगैर पंजीयन दूसरे राज्य से आउटसोर्सिंग का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—

  •     इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि।
  •     राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।
  •     छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकार और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  •     मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में बाहरी राज्यों से बिना पंजीयन प्रवेश का विरोध।
  • लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप

कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के रोजगार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का भी सवाल है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेश के युवा चिकित्सकों में असंतोष और चिंता को और बढ़ा दिया है।

डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी
प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। यह संघर्ष पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

JDA और CGDF का संयुक्त बयान
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और स्थानीय युवाओं के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक संशोधन

रायपुर.
छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के सभी जिलों के लिए मुख्य अतिथियों का नामांकन पूर्व में किया गया था। विभाग द्वारा आज जारी संशोधित आदेश के अनुसार चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। राज्य के शेष जिलों में पूर्व आदेशानुसार नामांकित मुख्य अतिथि यथावत रहेंगे।

संशोधित आदेश के अनुसार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह को नामांकित किया गया है। इसी प्रकार बेमेतरा जिले में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा तथा बीजापुर जिले में विधायक श्री नीलकंठ टेकाम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों का आयोजन मुख्य अतिथियों के परामर्श तथा चिकित्सा शिक्षा (आयुष) विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

महासमुंद जेल से रायपुर लाया गया दुष्कर्म आरोपी नरेंद्र शास्त्री, चावल देखकर भविष्य बताने का करता था दावा

रायपुर.

दुष्कर्म के आरोप में महासमुंद सेंट्रल जेल में कैद ‘चावल वाले बाबा’ के नाम से मशहूर आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री को गोपनीय तरीके से रायपुर लाया गया. सूमो गाड़ी में सवार आरोपी बाबा को पहले रायपुर केंद्रीय जेल में लाया गया है, जहां से उन्हें उपचार के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नरेंद्र नयन शास्त्री को महासमुंद जेल से सूमो गाड़ी नंबर CG 02 5072 में रायपुर लाया गया . इस दौरान फालो गाड़ी के तौर पर CG 03 A 0715 साथ में चल रही थी. शास्त्री को सोनोग्राफी के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा, और रिपोर्ट आने के बाद उन्हें वापस महासमुंद जेल ले जाया जाएगा. बता दें कि महासमुंद जिले के बागबाहरा थाना में एक महिला ने चर्चित कथावाचक एवं ज्योतिषाचार्य आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री के खिलाफ दुष्कर्म की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों को सही पाते हुए बागबाहरा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं 376(2)(ज), 376(2)(एन) और 376(2)(एम) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री को रायपुर जिले के सिलयारी से गिरफ्तार किया था.

बताया जा रहा है महासमुंद केंद्रीय जेल में भर्ती रहने के दौरान बाबा की तबीयत बिगड़ी है, जिसके बाद महासमुंद पुलिस की की एक विशेष टीम बाबा की सामाजिक व सार्वजनिक पहचान को देखते हुए बेहद सतर्कता के साथ रायपुर केंद्रीय जेल में लेकर पहुंची है, जहां कागजी कार्रवाई को पूरा करने के बाद उपचार के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा.

आश्रम में उमड़ती थी भारी भीड़
गिरफ्तार आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री मूल रूप से रायपुर जिले के सिलयारी क्षेत्र का रहने वाला है. वह लंबे समय से अपनी कथावाचन और ज्योतिष विधा को लेकर सुर्खियों में रहा है. आम जनता और श्रद्धालुओं के बीच उसकी पहचान ‘चावल देखकर भविष्य बताने वाले बाबा’ के रूप में रही है, जिसके चलते उसके आश्रम और कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी.

आज जारी होगी पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त, किसानों के खाते में आएंगे ₹2000

रायपुर.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के अंतर्गत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की दिशा में आज 20 जून 2026 को 23वीं किस्त जारी की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से दोपहर 3.45 बजे देशभर के पात्र किसानों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से राशि हस्तांतरित करेंगे।

मुख्यमंत्री के साथ मंत्री बनेंगे चिंतन शिविर 3.0 का हिस्सा
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार शासन-प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। जुलाई के पहले सप्ताह में नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में चिंतन शिविर 3.0 का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ प्रदेश के सभी मंत्री हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन, नीति निर्माण, जनसेवा, तकनीक और विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ मंत्रियों को प्रशिक्षण देंगे।

23 जून को होगी साय कैबिनेट की बैठक, धान बुआई और खाद-बीज की उपलब्धता पर रहेगा फोकस

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 23 जून को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में मानसून की देरी को देखते हुए खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

धान समेत अन्य फसलों की बुआई की स्थिति, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियों पर भी मंत्रिमंडल मंथन करेगा। बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों और संशोधित नियमों को मंजूरी मिल सकती है।

वहीं, शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के थोक तबादलों के लिए नई स्थानांतरण नीति पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

जशपुर दौरे पर रहेंगे CM साय, जैविक खेती कार्यशाला और जनकल्याण शिविर में करेंगे शिरकत

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। CM साय सुबह करीब 11:30 बजे बगिया से कुनकुरी के पण्डरीपानी पहुंचेंगे। यहां वे जैविक खेती कार्यशाला, जनकल्याणकारी शिविर और भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

इसके बाद दोपहर ढाई बजे वे बेमताटोली जाएंगे, जहां उत्कल ब्राह्मण समाज सेवा समिति के सामाजिक भवन का भूमिपूजन करेंगे। दोपहर बाद CM साय गिनाबहार में निर्माणाधीन MCH, BPHU, चराईडांड में निर्माणाधीन 220 बिस्तर अस्पताल, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग कॉलेज, सलियाटोली में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे।

सलियाटोली में पौने तीन बजे आयोजित ‘PM किसान उत्सव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, वे करीब 5:30 बजे अंबिकापुर के लिए रवाना हो जाएंगे।

कट की घड़ी में सहारा बना प्रशासन

रायपुर

प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को राज्य आपदा मोचन निधि के तहत तत्काल अनुग्रह राशि और राहत सामग्री प्रदान की जाती है। जनहानि, गंभीर चोट, और घर या संपत्ति के नुकसान की स्थिति में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार सुकमा जिले में हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की घटना के बाद जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाई। प्राकृतिक आपदा की सूचना मिलते ही कलेक्टर  अमित कुमार के निर्देशन में प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए गए।

प्रभावित परिवारों तक पहुंची त्वरित राहत
          
राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत आपदा प्रभावित नागरिकों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिले के 474 प्रभावित हितग्राहियों को कुल 69 लाख 32 हजार 700 रुपये की राहत राशि वितरित की गई। सबसे अधिक प्रभावित तोंगपाल क्षेत्र के परिवारों को प्राथमिकता देते हुए लगभग 36 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई, जिससे संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली।

पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा रहा प्रशासन
          
आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया। जनहानि और पशुधन हानि से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी जरूरतमंद परिवार राहत और सहायता से वंचित न रहे। प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया गया कि संकट की इस घड़ी में शासन और प्रशासन उनके साथ खड़ा है।

क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण की दिशा में पहल
         
आंधी-तूफान से जिले में 1,407 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन द्वारा क्षति का सर्वेक्षण कर पुनर्निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके साथ ही लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों के सुधार और बहाली के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

तेजी से सामान्य हो रहा जनजीवन
          
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, सतत निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण के कारण प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें। सुकमा जिला प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि आपदा की कठिन घड़ी में संवेदनशील शासन और त्वरित राहत व्यवस्था लोगों के लिए भरोसे और संबल का मजबूत आधार बन सकती है।

छत्तीसगढ़ में हैवानियत की हद पार, पत्नी पर अमानवीय अत्याचार करने वाला आरोपी पति गिरफ्तार

अंबिकापुर

कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र में चरित्र शंका को लेकर पत्नी के साथ अमानवीय क्रूरता करने वाले आरोपी पति जितेंद्र सारथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मूलतः सूरजपुर जिले के ग्राम रुनियाडीह का रहने वाला है।

पुलिस ने पहले बीएनएस की धारा 115(2), 351(2) और 85 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, लेकिन हैवानियत का वीडियो सामने आने और पीड़िता को बच्चे से पेशाब कराने व खुद का पेशाब पिलाने की पुष्टि के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ा। इसके बाद प्रकरण में धारा-123 भी जोड़ दी गई। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान है।

वीडियो क्लिप सामने आने के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई

पटना थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इस बीच आरोपी द्वारा बनाई गई क्रूरता की वीडियो क्लिप सामने आ गई। वीडियो में पीड़िता के साथ हुई हैवानियत साफ दिख रही थी। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। मोबाइल भी जब्त किया गया है।
क्या है पूरा मामला

20 वर्ष पहले प्रेम विवाह करने वाले दंपती के चार बच्चे हैं। पिछले 11 महीने से चरित्र शंका को लेकर विवाद चल रहा था। पति उसे छोड़कर बाहर चला गया था। पीड़िता मायके में रह रही थी। आर्थिक कठिनाइयों में साथ देने वाले व्यक्ति के घर बीते 14 जून को गई थी। आरोपी जितेंद्र सारथी, चारों बच्चों को लेकर वहां पहुंचा।

आरोप है कि आरोपी ने बच्चों के सामने ही पत्नी के कपड़े फाड़कर मारपीट की। आधे बाल काट दिए। सिर पर ग्रीस-मोबिल ऑयल डालकर मुंडन कर दिया। चेहरे और शरीर पर कालिख पोती। इसके बाद एक बच्चे से महिला के ऊपर पेशाब कराया और खुद का पेशाब भी गिलास में लेकर बलपूर्वक पिलाया।

पूरी वारदात का वीडियो बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। लगातार गाली-गलौज कर पत्नी को मर जाने के लिए दुष्प्रेरित किया। पीड़िता के मायके पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

 

छत्तीसगढ़ में हो रहा है तय मानकों के अनुसार लगाए जा रहे है विद्युत स्मार्ट मीटर

रायपुर

स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत पूरे देश में लागू की गई राष्ट्रीय पहल है। इसी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित मानकों के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार इस केंद्रीय योजना का क्रियान्वयन करते हुए विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में स्मार्ट मीटरिंग योजना लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी लाना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है।

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू करने का निर्णय  पूर्ववर्ती सरकार वर्ष 2022 में लिया गया था। परियोजना के लिए टेंडर जारी होने और कार्यादेश दिए जाने के बाद फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों और कार्यादेशों के आधार पर ही परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 40 लाख मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं मिल रही हैं। बिजली की खपत का आंकड़ा हर 30 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज होने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक होती है।

इसके अलावा स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत सहित अन्य तकनीकी आंकड़े वास्तविक समय में प्राप्त होते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव अथवा आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है। इसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के रूप में मिलता है।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना और उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।

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