कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की समन्वय सह निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर

मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की समन्वय सह निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में जनजाति समूहों एवं अन्य वंचित वर्गों के गरीब युवाओं, महिलाओं एवं तृतीय लिंग को संस्थागत विकास हेतु व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता के संबंध में चर्चा हुई। 
         
मुख्य सचिव ने प्रदेश के जनजाति समूहों, अन्य वंचित वर्गों एवं गरीब युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान करने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में पैन आईआईटी एलुमनीं रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रदेश के अनुसूचित जाति बाहुल्य ईलाकों में व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से वहां के रहवासियों को सशक्त बनाने एवं उनके विकास के लिए किए जा रहे कार्याे का प्रस्तुतिकरण के जरिये जानकारी दी।
        
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन और पैन आईआईटी एलुमनीं रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन के मध्य एक गैरलाभकारी संयुक्त उद्यम कंपनी गठन करने का निर्णय लिया गया है। यह संस्था अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वंचित समूदायों के गरीब युवाओं एवं महिलाओं तथा तृतीय लिंग के संस्थागत विकास हेतु व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता माध्यम से उन्हें सशक्त बनायेगा एवं उनके सर्वांगिण विकास के लिए काम करेगा। बैठक में पैन आईआईटी एलुमनीं रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातिय क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास के लिए कौशल विकास योजनाओं को लागू करने के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा। युवाओं को ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं जाएंगे। युवाओं का उनकी रूचि और बाजार की मांग के अनुसार विभिन्न ट्रेडों में आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। 
       
बैठक में बताया गया कि संस्था द्वारा केवल कौशल विकास ही नहीं बल्कि प्रशिक्षण के तुरंत बाद युवाओं को रोजगार प्रदान करना है। ताकि उनकी आमदनी में वृद्धि हो सके। इस कार्यक्रम का विशेष जोर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों, ग्रामीण युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों को मुख्य धारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। 
       
बैठक में बताया गया कि पैन आईआईटी एलुमनी रिच फॉर इंडिया फाउंडेशन झारखण्ड राज्य में शासन के साथ मिलकर कार्य किया गया है और इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में आदिवासी एवं अन्य वंचित युवाओं के शक्तिकरण की दिशा में काम कर रहा है। कल्याण गुरूकुल, कौशल कॉलेज, छत्तीसगढ़ के दूरदराज वनांचल क्षेत्रों मे स्थापित किए जाएंगे। युवाओं के प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही नियुक्ताओं से करार किया जाएगा। जिससे युवाओं को टेªनिंग पूरी होते ही पक्की नौकरी मिल सकें। संस्था द्वारा बस्तर, सरगुजा संभाग के आदिवासी बाहुल्य जिलों में प्रमुख रूप से कार्य कर रहा है। स्थानीय भवनों जैसे-आईटीआई एवं छात्रावास को आवासीय प्रशिक्षण केन्द्रों गुरूकुल में बदला जा रहा है। इन जिलों के ग्रामीण और अंदरूनी गांव से बेरोजगार युवाओं की पहचान कर उन्हें ट्रेनिंग के लिए लाया जा रहा है। इन क्षेत्रों की युवाओं की शैक्षणिक योग्याता के अनुरूप कन्ट्रक्शन, मैनुफेक्चरिंग जैसे सेक्टर में शॉट में आवासीय टेªनिंग दी जा रही है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में नर्सिंग कॉलेजों को खोलने का भी कार्य किया जा रहा है। 
       
 बैठक में आदिम जाति विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, पर्यटन एवं संस्कृति के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के संचालक श्री राजेन्द्र कुमार कटारा सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार, पैन आईआईटी एलुमनी रिच फॉर इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के स्थापना का प्रस्ताव, अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव

नई दिल्ली

 छत्तीसगढ़ को आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास, जनकल्याण और विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी थे।

मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को बताया कि नई दिल्ली और पणजी में संचालित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान देश में आयुर्वेद आधारित चिकित्सा, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इन संस्थानों ने आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है तथा बड़ी संख्या में दक्ष आयुर्वेद चिकित्सक और शोधकर्ता तैयार किए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और औषधीय संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश का बड़ा हिस्सा वनाच्छादित है, जहां अनेक दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं। जनजातीय अंचलों में पारंपरिक औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत भी मौजूद है। ऐसे में यहां अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना आयुर्वेद चिकित्सा और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि AIIA की स्थापना से प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। इससे आयुर्वेद आधारित चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संस्थान का लाभ केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के व्यापक क्षेत्र को मिलेगा। पड़ोसी राज्यों के नागरिकों को भी बेहतर आयुर्वेदिक उपचार और शोध सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा।

साय ने केंद्रीय बजट 2026 में देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना की घोषणा का उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि इनमें से एक संस्थान छत्तीसगढ़ को प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ रोजगार, अनुसंधान और ज्ञान आधारित विकास को भी नई गति देगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर सहित राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, अधोसंरचना विस्तार और जनहितकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी केंद्रीय गृह मंत्री को दी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में विकास और जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

महिला सरपंच समेत 4 जनप्रतिनिधियों का सामाजिक बहिष्कार, पीड़ितों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

बालोद.

जिले के डौंडीलोहारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत किसना में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। गांव की महिला सरपंच, उपसरपंच और दो पंचों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले छह से सात महीनों से उन्हें गांव में लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है, जिससे पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत किसना की सरपंच डोमेश्वरी यादव, उपसरपंच और दो पंचों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में बताया कि पंचायत चुनाव में पराजित हुए कुछ लोगों द्वारा लगातार उनके कामकाज में बाधा डाली जा रही है।

आरोप है कि उन्हें मनरेगा सहित अन्य शासकीय योजनाओं के कार्यों का संचालन नहीं करने दिया जा रहा, जिसके कारण गांव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गांव में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य पंचों को भी ग्रामसभा और पंचायत बैठकों में शामिल होने से रोका जा रहा है, ताकि पंचायत के आवश्यक कार्यों का संचालन न हो सके।

पंचों को मंदिर में दिलाई जा रही कसम!
सरपंच डोमेश्वरी यादव ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग पंचों को गांव के शीतला मंदिर में ले जाकर यह शपथ दिलाते हैं कि वे पंचायत की बैठकों में शामिल नहीं होंगे। इतना ही नहीं, बैठक में शामिल होने पर सामाजिक बहिष्कार और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की धमकी भी दी जाती है। इसी डर के कारण कई पंच बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के बाद बढ़ा विवाद
सरपंच डोमेश्वरी यादव ने बताया कि कुछ समय पहले उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। उन्हें चार वोटों का समर्थन मिला और वे अपने पद पर बनी रहीं। उनका आरोप है कि इसके बाद से विरोधी पक्ष के लोगों ने उनके अलावा उपसरपंच और दो पंचों का भी बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनका समर्थन किया, उन्हें भी निशाना बनाया जा रहा है।

पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
सरपंच ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत पहले भी देवरी थाने में की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के अभाव में गांव का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है और पंचायत के विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। अब सरपंच, उपसरपंच और पंचों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पंचायत के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट, 4 मजदूर घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी

रायगढ़.

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। पूंजी पथरा स्थित रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट हुआ है, जिसकी चपेट में आने से करीब 4 मजदूर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तत्काल अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

जानकारी के अनुसार, फर्निश में अधिक नमी (मॉइश्चर) जमा हो जाने के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में अमरेश कुमार, फिरोज आलम खान और रामनाथ सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा) शामिल हैं, जबकि एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि इनमें से दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करने की तैयारी है।

ब्लास्ट होने की बात से इस्पात के जीएम ने किया इनकार
रायगढ़ इस्पात के जीएम सुनील पांडा ने कहा कि बरसात के समय में फर्नेस में रॉ मैटेरियल के कारण नमी (मॉइश्चर) आ जाता है। नमी आने की वजह से जब फर्नेस हिट होता है तो कभी-कभी उसमें गैस का फॉर्मेशन हो जाता है। गैस ऊपर निकलने के कारण धुआं काफी फैल गया और आसपास मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ऊपर कार्य कर रहे कुछ मजदूरों ने घबराहट में इधर-उधर छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उन्हें चोटें आई हैं।

उन्होंने ब्लास्ट होने की बात से इनकार किया है और कहा कि यह घटना अफरा-तफरी के कारण हुई है। इस घटना में करीब चार लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद उद्योग प्रबंधन के अधिकारी अपेक्स अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मौके पर औद्योगिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस भी पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं

विशेष लेख

कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं

पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक

रायपुर 

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं।

कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं।

आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।

बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं।

पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं।

(एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

बस्तर के 30 मेधावी छात्र सीखेंगे सेमीकंडक्टर तकनीक, IIT मद्रास में मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

जगदलपुर.

बस्तर संभाग के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। पहली बार बस्तर के 30 मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल न केवल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के हाई-टेक रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगी। जानकारी के अनुसार, IIT मद्रास में 12 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट की मेरिट सूची के आधार पर पूरी होगी। इसमें चयनित 30 छात्र पहली बार हवाई यात्रा कर चेन्नई पहुंचेंगे और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक IIT मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी उत्साहित है। चयनित छात्रों को राज्यपाल की मौजूदगी में रवाना किया जाएगा। खास बात यह है कि छात्रों की हवाई यात्रा का पूरा खर्च दंतेवाड़ा जिला प्रशासन वहन करेगा, जबकि इस पहल को सफल बनाने में बस्तर कलेक्टर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में मदद करेगा। प्रशिक्षण का एक बड़ा लाभ रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आ सकता है। रायपुर में स्थापित हो रही गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित 5G और 6G डेटा ट्रांसफर टेक्नोलॉजी कंपनी में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह कार्यक्रम बस्तर के छात्रों को सीधे उभरती हुई सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उद्योग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और उद्योगों तक उनकी पहुंच भी मजबूत होगी। बस्तर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की यह संयुक्त पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।

डिटर्जेंट गोदाम की आड़ में बन रहा था गुटखा, किराएदार की तलाश में जुटी पुलिस

दुर्ग.

दुर्ग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में गुटखा और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जप्त की है। पूरा मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के कचांदुर गांव का है, जहां डिटर्जेंट पाउडर बनाने के नाम पर एक गोदाम किराए पर लेकर अवैध रूप से जर्दा युक्त गुटखा तैयार और पैकेजिंग का काम किया जा रहा था।

दरअसल सुपेला का रहने वाला मोहम्मद मुस्तफा के गोदाम को उत्तर प्रदेश उन्नाव के रहने वाले मोहम्मद शान ने करीब 20 दिन पहले किराए पर लिया था। गोदाम लेने के दौरान उसने डिटर्जेंट पाउडर निर्माण का काम करने की जानकारी दी थी, लेकिन कई दिनों तक उसका गोदाम मालिक से कोई संपर्क नहीं हुआ। किराएदार का मोबाइल फोन लगातार बंद रहने से गोदाम मालिक को संदेह हुआ, जिस पर उसने जेवरा सिरसा चौकी पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोदाम की जांच की तो जांच के दौरान वहां से 32 बड़े बोरों में तैयार गुटखा, 32 बोरों में मीठी सुपारी, गुटखा बनाने में उपयोग होने वाला रॉ मटेरियल, और पैकिंग, मिक्सिंग मशीन बरामद की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फूड सेफ्टी विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में अवैध गुटखा की पैकेजिंग और निर्माण का कार्य किया जा रहा था। फिलहाल बरामद सामग्री को फूड सेफ्टी अधिकारियों को सौंपी गयी है, और मामले में संबंधित व्यक्तियों की तलाश के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक, टाइगर रिजर्व के सुनहरे भविष्य की जगी उम्मीद

उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक, टाइगर रिजर्व के सुनहरे भविष्य की जगी उम्मीद  

कैमरा ट्रैप में लगातार कैद हो रही बाघिन, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर
 उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए ऐतिहासिक खबर सामने आई है। हाल में विभिन्न स्थानों पर लगाए गए कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की तस्वीरें और वीडियो लगातार कैद हुए हैं। वन विभाग के अनुसार बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए इस क्षेत्र तक पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी आशियाना बनाने की ओर बढ़ रही है।

संरक्षण प्रयासों का दिखने लगा सकारात्मक परिणाम

            मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघिन की उपस्थिति इन प्रयासों की सफलता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग द्वारा पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।

बेहतर आवास का मिला प्रमाण
  
         लंबे समय से बाघों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे उदंती-सीतानदी के लिए यह घटनाक्रम बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक बाघ या बाघिन का किसी वन क्षेत्र को स्थायी निवास चुनना वहां के बेहतर आवास, पर्याप्त शिकार आधार और सुरक्षित वातावरण का प्रमाण होता है। बाघिन की नियमित उपस्थिति पूरे परिदृश्य के पुनर्जीवन और संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है।

बाघों की स्थायी मौजूदगी का साक्षी बनेगा

          वन अधिकारियों के मुताबिक कैमरा ट्रैप में बाघिन स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरी दिख रही है। उसकी गतिविधियों से स्पष्ट है कि वह क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रभाव क्षेत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है। परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो यह क्षेत्र फिर से बाघों की स्थायी मौजूदगी का साक्षी बनेगा।

संरक्षण प्रयासों का मिला परिणाम  

        पिछले कुछ वर्षों में उदंती-सीतानदी में आवास सुधार और वन्यजीव संरक्षण के लिए व्यापक कार्य हुए हैं। सघन गश्त, एंटी-पोचिंग नेटवर्क को मजबूती, सैकड़ों कृत्रिम जलस्रोत-झिरियों का निर्माण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन, अतिक्रमण हटाकर वनभूमि की वापसी और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने जैसे कदम उठाए गए हैं। बाघिन की मौजूदगी को इन्हीं प्रयासों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।

निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी  

          कैमरा ट्रैप की तस्वीरों-वीडियो ने वन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में नई ऊर्जा भर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघिन के स्थायी बसने से यह रिजर्व मध्य भारत के प्रमुख बाघ आवासों में फिर अपनी पहचान बना सकता है और भविष्य में अन्य बाघों के आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा।

बाघिन की सुरक्षा और अनुकूल आवास सुनिश्चित करने प्रयास

            वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा और अनुकूल आवास सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व संरक्षण गतिविधियां और सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि यह सिर्फ एक बाघिन की मौजूदगी नहीं, बल्कि प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया और जंगलों के पुनर्जीवन की कहानी है।

CG में रिश्वत मांगना पड़ा भारी, कलेक्टर ने सहायक ग्रेड-02 कर्मचारी को किया निलंबित

कोरबा.

जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दंडाधिकारी कटघोरा के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें तहसील कार्यालय कटघोरा में नकल जारी करने के एवज में आवेदक किशन कुमार से अवैध राशि की मांग किये जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के समर्थन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई थी।

मामले की जांच और परीक्षण के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना

रायपुर,
प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।

सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला

            योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। 

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना 

       केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।

पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प

          मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी

          ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

         पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।

1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ

          योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है। 

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी

         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी  मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

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