सुकमा में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण बना आत्मनिर्भरता की नई राह

रायपुर
  
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास नीति के तहत एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न
      
कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम में 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों ने सिखाए वैज्ञानिक खेती के गुर
  
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) कराया गया। युवाओं को बेहद सरल तरीके से तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिसके तहत धान के पुआल (पैरा) की तैयारी और उपचार रकने के बाद मशरूम के स्पॉन (बीज) का सही उपयोग कर पॉलीबैग तैयार करना और नमी का संतुलन बनाए रखना, फसल की वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री करना शामिल था ।

कम लागत और कम समय में अधिक मुनाफा
        
कृषि विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत, कम जगह और बेहद कम समय में शुरू किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से इसे अपनाकर युवा हर महीने एक नियमित और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।

बाजार में बढ़ती मांग और सेहत के लिए फायदेमंद
       
प्रशिक्षण में मशरूम के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक अत्यंत पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी तथा कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा (लो फैट) और कम कैलोरी होने के कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।
      
इस पहल से न केवल आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि वे एक नए आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपना जीवन बिता सकेंगे।

संवेदनशील पुलिस, सुरक्षित नागरिक: डॉयल-112 की त्वरित कार्रवाई से सर्पदंश पीड़ित महिला को मिला जीवनदान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डॉयल-112 की सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर मानव जीवन की रक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया है। डॉयल-112 टीम ने सर्पदंश की शिकार एक महिला को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग एक बजे डॉयल-112 गौरेला फाल्कन-1 को ग्राम जमुनिया टोला, धनौली से एक महिला के सर्पदंश की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डॉयल-112 में तैनात आरक्षक  रामदयाल आयाम एवं चालक  गोपाल पुरी तत्काल आपातकालीन वाहन लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि ग्राम जमुनिया टोला, धनौली निवासी 55 वर्षीय मती सोनकुंवर पनिका को रात्रि में जमीन पर सोने के दौरान जहरीले सर्प ने काट लिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉयल-112 टीम ने बिना किसी विलंब के पीड़िता को परिजनों के साथ ईआरवी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से महिला की जान बच गई और वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित आपातकालीन सहायता प्रणाली केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। डॉयल-112 की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार व्यवस्था और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिल रही है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम धनौली में सर्पदंश की शिकार एक युवती को डॉयल-112 की तत्परता से समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाया गया था। लगातार दूसरी सफल कार्रवाई ने जिले में डॉयल-112 के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।

जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस ने वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे जमीन पर सोने के बजाय चारपाई या बिस्तर का उपयोग करें, रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा घर एवं आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें ताकि सर्पों के प्रवेश की संभावना कम हो। यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो झाड़-फूंक, टोने-टोटके अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तत्काल डॉयल-112 अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से डॉयल-112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी आपातकालीन सहायता शीघ्रता से पहुंच सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से न केवल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन हो रहा है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना

रायपुर

छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदेश के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन
         
श्रम विभाग के ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेब पोर्टल द्वारा पात्र विद्यार्थी और उनके अभिभावक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन जमा कर सकते हैं। अपने निकटतम विकासखंड की जनपद पंचायत में स्थित श्रम संसाधन केंद्र में जाकर या नजदीकी चॉइस सेंटर  के माध्यम से, जिला कार्यालय के श्रम पदाधिकारी के पास जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
       
आवेदन करते समय विद्यार्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार श्रमिक पंजीयन कार्ड (लेबर कार्ड), छात्र-छात्रा का मूल निवास प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। आधार कार्ड (नियमों के तहत सुरक्षित रूप से आवश्यक), कक्षा 5वीं की उत्तीर्ण अंकसूची (मार्क्सशीट), वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।

योजना की प्रमुख शर्तें और पात्रता
         
योजना का लाभ केवल उन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलेगा, जिनका श्रमिक पंजीयन आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। यह लाभ श्रमिक परिवार की प्रथम दो संतानों को ही देय होगा। विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेना अनिवार्य है।

चयन के बाद मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं
        
प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई निःशुल्क कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों में मुफ्त आवास (हॉस्टल), पौष्टिक भोजन तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चों को एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल मिल सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर के विकास को नई गति: मंत्रिपरिषद् ने OTS योजना-2026 को दी मंजूरी

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों के आबंटितियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने के साथ-साथ लंबित प्रकरणों के समाधान, रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रत्येक निर्णय विकास को गति देने और जनहित में व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने की सोच से प्रेरित है। OTS योजना-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा, लंबित प्रकरणों का निराकरण होगा और नवा रायपुर के समग्र एवं नियोजित विकास को नई गति मिलेगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, भरोसेमंद और विकासोन्मुख वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। OTS योजना-2026 ऐसे आबंटितियों के लिए एक सकारात्मक अवसर है, जो अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी, अनावश्यक न्यायालयीन विवाद कम होंगे, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय नवा रायपुर को देश के अग्रणी नियोजित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

योजना के अंतर्गत जो आबंटी परियोजना का विकास करने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें आबंटित भूमि समर्पित कर अनुबंध से बाहर होने का विकल्प भी मिलेगा। इससे अनावश्यक न्यायालयीन विवादों में कमी आएगी तथा भूमि का प्रभावी एवं शीघ्र उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

योजना लागू होने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में प्राप्त आवेदनों पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न भू-उपयोगों के अंतर्गत बड़ी संख्या में लंबित प्रकरण इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगे।

एनआरडीए के अनुसार, योजना के अंतर्गत भूमि प्रीमियम में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी तथा किसी भी भूमि का सेटलमेंट वर्तमान रिजर्व प्रीमियम मूल्य से कम पर नहीं किया जाएगा। इससे प्राधिकरण को कोई वित्तीय हानि नहीं होगी, जबकि पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में लगभग 61.96 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।

OTS योजना-2026 के क्रियान्वयन से नवा रायपुर में रुकी हुई विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, निवेशकों का विश्वास और सुदृढ़ होगा, मुकदमेबाजी में कमी आएगी तथा भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। यह निर्णय नवा रायपुर के नियोजित, संतुलित और तीव्र शहरी विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खातों में पहुंचने लगी बोनस राशि

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू हो गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के संग्राहकों के बैंक खातों में 17 करोड़ 43 लाख रुपये ऑनलाइन अंतरित किए जा रहे हैं।

58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस

वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने बताया कि जिला यूनियन की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिला यूनियन की 59 समितियों के माध्यम से 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसके लिए 46,840 संग्राहकों को कुल 17.43 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
जिला यूनियन की प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस मिला है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है।

ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

वन विभाग द्वारा बोनस राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनी है तथा संग्राहकों को समय पर राशि मिल रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों ने बताया कि इस बोनस राशि से वे खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। समय पर मिली आर्थिक सहायता से न केवल संग्राहकों को राहत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

सेवा सेतु’ केंद्र से 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, समय पर हुआ छात्रा का कॉलेज प्रवेश

रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्य शासन की डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह पोर्टल शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले से एक सुखद मामला सामने आया है, जहां सेवा सेतु केंद्र की तत्परता से मात्र 24 घंटे के भीतर एक छात्रा का आय प्रमाण पत्र बन गया और उसका कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो सका।

अंतिम तिथि पास होने से चिंतित था परिवार
            
राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी  तोरण लाल अपनी पुत्री निकिता के उच्च शिक्षा (कॉलेज) में प्रवेश को लेकर काफी चिंतित थे। कॉलेज में दाखिले के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य था और प्रवेश की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी थी। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की आशंका से पूरा परिवार परेशान था।

ऑनलाइन आवेदन के बाद 24 घंटे में समाधान
       
इसी दौरान तोरण लाल को डोंगरगांव में स्थित ‘सेवा सेतु केंद्र’ की जानकारी मिली। वे तुरंत आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे। केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को उनका ऑनलाइन आवेदन दर्ज किया। डिजिटल प्रक्रिया के त्वरित निराकरण (Fast-track Processing) के चलते मात्र 24 घंटे के भीतर ही आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके चलते निकिता का कॉलेज में प्रवेश बिना किसी बाधा के समय-सीमा के भीतर हो गया।

समय और धन दोनों की हो रही बचत          

अपनी खुशी साझा करते हुए हितग्राही तोरण लाल ने कहा, “पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए विभिन्न दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल व्यवस्था से हमारा काम बेहद सरल और कम समय में हो गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित हुआ है।”

घर बैठे मिल रहीं 400 से अधिक सेवाएं

‘सेवा सेतु पोर्टल’ के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से उठा रहे हैं। यह व्यवस्था आम जनता को समयबद्ध सेवाएं देने के साथ-साथ उनके समय और धन की बड़ी बचत कर रही है, जिसके लिए नागरिकों ने राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

छत्तीसगढ़ की इकलौती छात्रा, महासमुंद की बेटी का कमाल

रायपुर
 
महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन ‘शक्तिसैट’ (ShaktiSat) के लिए ‘नेशनल फाइनलिस्ट’ के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।

देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं
           
इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद ‘केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट’ का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।

108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह
       
‘मिशन शक्तिसैट’ एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।

इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को हरिकोटा से लॉन्चिंग
         
विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।

नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन
     
यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मती केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई
     
 इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

रायपुर

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच
        
समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता
       
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।

कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
        
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
        
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, सचिव  भीम सिंह, सचिव  धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक  तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम  अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से हो रही सशक्त – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से सशक्त हो रही है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह परियोजना राज्य के रेल नेटवर्क को और अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से रायपुर में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख रेल, औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति प्रदान करेगी।

डिजिटल सुशासन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी

रायपुर

 शासन की महत्वाकांक्षी श्सेवा सेतुश् पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन की मजबूत मिसाल बन रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोगों को अब शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। आय, जाति, निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक प्रमाण-पत्र अब सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रहे हैं।

डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया होने के कारण अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी
        
बीजापुर जिले के ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर की निवासी अंकिता ओयम को भी सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से समय पर विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने तहसील कार्यालय उसूर स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका शीघ्र निराकरण किया गया और उन्हें समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण सेवा सेतु केन्द्र की मैनेजर श्रीमती मंजुलता दुर्गम एवं श्री शंकर मोडियम द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होने के कारण अंकिता को किसी प्रकार की अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी।

सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधाजनक
      
अंकिता बताती हैं कि पहले विवाह पंजीयन जैसे कार्यों के लिए कई बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन करना आसान रहा और निर्धारित समय के भीतर उन्हें प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी बिना किसी परेशानी के पूरे हो सके। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधा है। इससे शासकीय सेवाएं घर के नजदीक, पारदर्शी और समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ा है।

डिजिटल प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने प्रभावी
        
राज्य शासन द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति, स्थानीय निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

हितग्राही की प्रतिक्रिया
        
अंकिता ओयम, ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर निवासी ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र में विवाह पंजीयन की पूरी प्रक्रिया बहुत आसान रही। मुझे समय पर प्रमाण-पत्र मिल गया, जिससे मेरे सभी जरूरी काम बिना किसी परेशानी के पूरे हो गए। इसके लिए मैं शासन-प्रशासन और सेवा सेतु केन्द्र की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद देती हूँ।

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