दुर्ग में BSP कार्मिकों का सम्मान, 119 कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मिले पुरस्कार

भिलाई नगर.

सेल – भिलाई इस्पात संयंत्र की ऐतिहासिक नेहरू अवार्ड योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 के लिए नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह का प्रथम चरण शनिवार को आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिन संयंत्र के कुल 119 पुरस्कारों को तीन श्रेणियों-जवाहर पुरस्कार, नेहरू पुरस्कार तथा जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक प्रभारी (बीएसपी) एवं कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अजय कुमार चक्रवर्ती रहें व विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) तुषार कांत, कार्यपालक निदेशक (माइंस) कमल भास्कर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ। विनीता द्विवेदी उपस्थित रहीं। नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिवस जवाहर पुरस्कार श्रेणी में 33 अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए सम्मानित किया गया। नेहरू पुरस्कार श्रेणी में 63 कमर्चारियों को व्यक्तिगत उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार श्रेणी में 23 समूहों को उनके सामूहिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

प्रथम चरण में कुल 119 पुरस्कारों से अधिकारियों एवं कमर्चारियों को संयंत्र की प्रगति एवं उत्कृष्ट कार्य निष्पादन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में ए।के। चक्रवर्ती ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ये पुरस्कार उनके समर्पण, प्रतिबद्धता तथा संगठन की प्रगति में दिए गए उत्कृष्ट योगदान का सम्मान हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि ये पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से प्रदान किए जाते हैं, किंतु वे पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों के भी प्रतीक हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) जे एन ठाकुर ने अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए नेहरू पुरस्कार योजना की रूपरेखा एवं वर्ष 2025 के पुरस्कारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने संयंत्र की सतत प्रगति एवं उत्कृष्ट निष्पादन के लिए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री प्रियंका मीणा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) श्री निवेश विजयन ने दिया। प्रशस्ति पत्र हेतु विजेताओं के नाम का वाचन सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) मिहिर मनोहर तथा उप प्रबंधक (मानव संसाधन) समायला अंसारी ने किया। इस अवसर पर इस्पात बिरादरी के सदस्य एवं पुरस्कार विजेताओं के परिजन उपस्थित रहे।

नक्सल प्रभावित 5 लोगों और 2 सरेंडर नक्सलियों को मिलेगी सरकारी नौकरी, सरकार का बड़ा फैसला

मोहला.

मोहला–मानपुर –अंबागढ़ चौकी जिले में शासन की पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल पीड़ितों को पुनर्वास नीति का लाभ देने एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 24 जून को कार्यालय कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलवादी पुनर्वास समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में समिति के अध्यक्ष कलेक्टर तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय पी सिंह, जिला वनमंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में पात्र 5 नक्सल पीड़ितों एवं 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों कुल 7 लोगों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत शासकीय सेवा में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा 1 एक नक्सल पीड़ित परिवार को उसके जीवन यापन करने हेतु 15 लाख रुपए प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा समिति के अध्यक्ष के द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मीटिंग में सम्मिलित किया गया था जिसमें अध्यक्ष के द्वारा सभी पीड़ितों से बात कर उनकी अन्य योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं उनके आवेदन अनुसार शीघ्र लाभ प्रदाय सनिश्चित करने हेत संबंधित विभाग को आदेश किया जा गया है।

जिला पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास एवं विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत हो रहा है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। शासकीय नौकरी मिलने से लाभार्थियों को स्थायी रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले आत्म समर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी 31 मार्च 2026 को पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो चुका है।

कृषि विभाग की सख्त कार्रवाईःवैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाले उर्वरक की 11 बोरियां जब्त,

रायपुर

 किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (PROM) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं।

महासमुंद जिले के कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा और उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

 रायपुर
 राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी।

इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है।

आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण
जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा।

उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर
उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ”रूढ़िवादी प्रथाओं” द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ”अपवाद” या ”छूट” का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी।

गोवा के यूसीसी में लिंग समानता
गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता ‘सामुदायिक संपत्ति” है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है।

उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान
उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है।

सक्रिय है राज्य सरकार
    संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।

    – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

 

अंतरिक्ष की ओर बढ़े रायपुर की बेटी के कदम, गौरवान्वित हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय ShakthiSAT Mission के लिए चयनित रायपुर की प्रतिभाशाली छात्रा महिमा राजपूत को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि महज 14 वर्ष की आयु में 108 देशों के विद्यार्थियों के साथ इस प्रतिष्ठित अंतरिक्ष मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित होना न केवल महिमा की असाधारण प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिमा राजपूत ने अपनी लगन, प्रतिभा और समर्पण से अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अवसर मिलने पर वैश्विक मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।

मुख्यमंत्रीसाय ने विश्वास व्यक्त किया कि महिमा की यह प्रेरणादायी सफलता प्रदेश के लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास देगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और विज्ञान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने महिमा राजपूत को पुनः हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की तथा आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाती रहेंगी।

खेत में करंट लगने से किसान की मौत, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

रायपुर 

दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र के ग्राम चिंगरी निवासी 60 वर्षीय किसान बिरेन्द्र देशमुख की खेत में काम करने के दौरान करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, वे सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच अपने खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

दोपहर करीब 1 बजे घटना की सूचना अंडा थाना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल दुर्ग भेज दिया।

घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक अपने पीछे पत्नी अनुसुईया देशमुख, पुत्र जागेश्वर देशमुख और गावेश देशमुख सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने के बजाय अंडा स्थित बिजली विभाग कार्यालय के सामने शव रखकर करीब 4 से 5 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर डटे रहे और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि हादसा बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि जिस विद्युत पोल के पास यह घटना हुई, वह लंबे समय से झुका हुआ था। इसे लेकर करीब दो वर्ष पहले विभाग को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक, पोल झुकने के कारण बिजली के तार नीचे आ गए थे और उन्हें अस्थायी रूप से लोहे के घेरे से बांधकर रखा गया था। समय के साथ केबल में खराबी आने से लोहे के घेरे में करंट प्रवाहित होने लगा, जिसकी चपेट में आने से किसान की मौत हो गई।

ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई तथा पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारी, अंडा थाना प्रभारी श्रद्धा पाठक और तहसीलदार मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों से भी घटना को लेकर जवाब मांगा गया है।

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. बुधरी ताती ने चार दशक से अधिक समय तक बस्तर अंचल सहित वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सतत कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती जैसे व्यक्तित्व हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत, लोक संस्कृति और सेवा की परंपरा के सशक्त प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को समाज के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती के परिजन उपस्थित थे।

संभाग स्तरीय रोजगार मेले में युवाओं का बढ़ाया उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल बोले— प्रतिभा और कौशल को मिलेगा बेहतर अवसर

रायपुर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को अंबिकापुर स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित संभाग स्तरीय रोजगार मेले में सहभागिता कर क्षेत्र के युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने रोजगार के लिए पहुंचे युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता युवाओं को उनकी प्रतिभा, योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने युवाओं से निरंतर परिश्रम, कौशल विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रोजगार मेले केवल नियुक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का सशक्त मंच हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की राह और अधिक मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में कौशल और दक्षता ही सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विभिन्न विभागों के माध्यम से कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सके।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रोजगार मेले के माध्यम से चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रोजगार मेले में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्रीशर्मा ने लगाई जनचौपाल

रायपुर

कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।
       
गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
    
ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।
    
जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे “भारत माता की जय” के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेरनिलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपीआकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओहरेश मंडावी, एडीएमएएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई

रायपुर

 कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  
        
अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 
          
अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  
            
फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
          
अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

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