रायपुर में बादलों का डेरा, कल से मानसून पकड़ेगा रफ्तार; बारिश के आसार बढ़े

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में कुछ इलाकों में बादल बरस रहे हैं, तो कहीं भीषण गर्मी का दौर जारी है. रायपुर में बारिश नहीं हो रही है. आज से आषाढ़ मास शुरू हो रहा है, जिससे लोगों को बारिश की उम्मीदें हैं. राजधानी में मंगलवार सुबह से ही आसमान में बादल नजर आ रहे हैं.

मौसम विभाग ने एक जुलाई से पूरे प्रदेश में वर्षा की गतिविधि में वृद्धि होने की संभावना जताई है. मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में सभी संभागों में कुछ जगहों पर देर रात से मध्यम वर्षा हुई. आंकड़ों के अनुसार सक्ती, कोंटा, नानगुर, भोपालपटनम, तोकापाल, तिल्दा, मुंगेली में 3-3 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. वहीं मर्रीबंगला देवरी, नारायणपुर, जगरगुंडा, जगदलपुर में 2-2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. हरदीबाजार, मनोरा, चंद्रपुर, नवागढ़, पेंड्रा, छुरिया, खरसिया, खैरागढ़, भोथिया, गंगालूर में 1-1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. मौसम विज्ञानी के अनुसार समुद्र तल पर मौसमी द्रोणिका पंजाब से हरियाणा और उत्तरप्रदेश से होते हुए बिहार तक स्थित है.

एक चक्रवाती परिसंचरण उत्तरी तेलंगाना और आस-पास के इलाकों में बना हुआ है और अब यह समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. एक पूर्व पश्चिम द्रोणिका पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार, अधो हिमालय पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम से होते हुए मणिपुर तक 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इनके प्रभाव से प्रदेश में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षाहोने की संभावना है. एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात और भारीवर्षा की चेतावनी दी गई है.

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
रायपुर में आज बादल छाए रह सकते हैं. मौसम विभाग ने तेज हवाएं और बारिश की संभावनाएं जताई है. मंगलवार को अधितकम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है.

हाथी प्रभावित क्षेत्र में 33 केवी लाइन विस्तार पर हाईकोर्ट सख्त, सरकारों और बिजली कंपनी से मांगा जवाब

बिलासपुर.

रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में नियम और मानकों का उल्लंघन कर 33 केवी लाइन विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया, जबकि निजी कंपनी को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी है। जवाब मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि निजी कंपनी की ओर से जवाब पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उस जवाब पर भी प्रत्युत्तर सबमिट करने की छूट दी। जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को तय की गई है।

वन स्वीकृति के बिना किए जाने का दावा
याचिका में बताया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं तथा 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी नियमों की अनदेखी की गई। याचिका में दावा किया गया है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण कार्य के दौरान सीएसपीडीसीएल के नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं खंभों का उपयोग करते हुए निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी ले जाई गई, जिससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके।

आरोपों के अनुसार, परियोजना प्रबंधन ने पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य संरचनाओं के लिए वन विभाग तथा जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। इससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया संबंधी पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

पूर्व में खारिज हुई थी याचिका
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता ने पहले भी इसी मुद्दे पर याचिका दायर की थी। उस याचिका में सुरक्षा राशि जमा करने से छूट की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने छूट संबंधी आवेदन खारिज करते हुए 7 मई 2026 को याचिका निरस्त कर दी थी। हालांकि अदालत ने नियमों के अनुसार सुरक्षा राशि जमा कर नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने नई जनहित याचिका प्रस्तुत की।

CM साय आज सरगुजा-रायगढ़ दौरे पर, रामगढ़ महोत्सव में करेंगे शिरकत

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सरगुजा और रायगढ़ के दौरे पर रहेंगे. सुबह 11 बजे वे मुख्यमंत्री निवास में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक लेंगे. इसके बाद सरगुजा जिले के उदयपुर के लिए रवाना होंगे और दोपहर 12:50 बजे झिरमिति स्टेडियम हेलीपैड पहुंचेंगे.

दोपहर 1 बजे वे 50 वर्षों की गौरवशाली परंपरा वाले रामगढ़ महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे. भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी आस्था के इस आयोजन में मुख्यमंत्री सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगे. कार्यक्रम के बाद दोपहर 2:30 बजे रायगढ़ के लिए रवाना होंगे और शाम 5 बजे रायगढ़ से वापस रायपुर लौटेंगे.

‘सहयोग केंद्र’ में आज मंत्री श्यामबिहारी सुनेंगे समस्याएं
​रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश कार्यालय में सहयग केंद्र जारी है. आज मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल मंगलवार 30 जून को सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे. वह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के माध्यम से आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करेंगे.

रायपुर : केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने राष्ट्रीय सम्मेलन में की छत्तीसगढ़ के मटेरियल बैंक मॉडल की सराहना

रायपुर : केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने राष्ट्रीय सम्मेलन में की छत्तीसगढ़ के मटेरियल बैंक मॉडल की सराहना

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में डीलर दीदी मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान

आरसेटी और कौशल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की भी हुई प्रशंसा

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की अभिनव पहल मटेरियल बैंक मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत विकसित इस मॉडल की प्रशंसा करते हुए इसे ग्रामीण आवास निर्माण को गति देने वाला प्रभावी नवाचार बताया। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने किया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने राष्ट्रीय सम्मेलन में की छत्तीसगढ़ के मटेरियल बैंक मॉडल की सराहना

         छत्तीसगढ़ में विकसित मटेरियल बैंक मॉडल का संचालन स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा “डीलर दीदी” के रूप में किया जा रहा है। इसके माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को निर्माण सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे आवास निर्माण कार्य अधिक सुगम, तेज और किफायती हुआ है।

         इस पहल से स्व सहायता समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और 10,000 से अधिक दीदियां लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। इस मॉडल को महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

         केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए आरसेटी तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आरसेटी के माध्यम से पिछले वित्तीय वर्ष में देश में सर्वाधिक राज मिस्त्री प्रशिक्षण दिया गया है ।उन्होंने इन प्रयासों को अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक बताया।

       उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास, कौशल उन्नयन, स्वरोजगार संवर्धन और गरीब परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह सराहना प्रदेश के जनकल्याणकारी कार्यों, नवाचारों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है तथा इससे राज्य को ग्रामीण विकास के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।

रायपुर : आषाढ़ के प्रथम दिवस पर दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का हुआ भव्य शुभारंभ

रायपुर : आषाढ़ के प्रथम दिवस पर दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का हुआ भव्य शुभारंभ

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया उद्घाटन

रामगढ़ सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक धरोहर है : मंत्री अग्रवाल

समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि

रायपुर,

आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा अंचल की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत के प्रतीक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का शुभारंभ सोमवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया। पारंपरिक गरिमा, सांस्कृतिक उल्लास और ऐतिहासिक चेतना से ओतप्रोत इस आयोजन में लोक संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व और पर्यटन का अद्भुत समागम देखने को मिला। महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर स्कूली बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, वहीं नई दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर सांसद चिंतामणि महाराज, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला एवं जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, इतिहासकार, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

मंत्री अग्रवाल ने रामगढ़ महोत्सव के 50 वर्ष पूर्ण होने पर सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान आगंतुकों को विश्व की प्राचीनतम रंगशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा, ऐतिहासिक जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला तथा अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ इन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व की विस्तृत जानकारी भी प्रदान करेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेगी।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

सांसद चिंतामणि महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि रामगढ़ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का समय यहां व्यतीत किया था। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास ने भी यहीं मेघदूतम् की रचना की थी। सीताबेंगरा, जोगीमारा, राम-जानकी मंदिर तथा हाथीपोल जैसे ऐतिहासिक स्थल विश्व पर्यटन के मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से रामगढ़ को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई जाएगी।

लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रामगढ़ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक एवं साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण है। उन्होंने इस धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रचारित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कलेक्टर अजीत वसंत ने उपस्थित अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को विशेष स्थान दिया गया है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान भविष्य में विश्वस्तर पर और अधिक सशक्त होगी तथा अधिकाधिक पर्यटक इस धरोहर से जुड़ेंगे। उन्होंने सभी आगंतुकों से महोत्सव के विभिन्न आयोजनों में सहभागिता कर सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का आनंद लेने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष राम किशुन सिंह, पूर्व सांसद कमलभान सिंह मरावी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती राधा रवि एवं श्रीमती रायमुनिया कुरियम, जनपद पंचायत अध्यक्ष आलोक सिंह, उपाध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह, पार्षद आलोक दुबे, एल्डरमैन करता राम गुप्ता, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, साहित्यकार, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

रायपुर : रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

रायपुर : रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों की रामलीला, कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुति और कवियों की ओजस्वी रचनाओं ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

रायपुर

सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा ‘जटायु मोक्ष’ की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।

रामगढ़ महोत्सव में रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने बांधा समां

इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।

रायपुर : बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम- वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : बाल साहित्य और नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम- वन मंत्री केदार कश्यप

साहित्य और तकनीक के अभिनव समन्वय (क्यूआर कोड) की हुई सराहना

रायपुर

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साझा बाल काव्य संग्रह मोर अंगना के शोर का विमोचन किया और सभी संबंधित रचनाकारों व शिक्षकों को सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री कश्यप ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास शिक्षा, संस्कार और साहित्य के माध्यम से ही संभव है। बाल साहित्य हमारी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम करता है।

मोर अंगना के शोर साझा बाल काव्य संग्रह का हुआ विमोचन

NEP और FLN के उद्देश्यों को मिलेगी मजबूती

        मंत्री कश्यप ने पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोर अंगना के शोर केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बच्चों की कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यह अभिनव प्रयास नई शिक्षा नीति (NEP) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)उद्देश्यों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

तकनीक और साहित्य का अनूठा संगमर- क्यूआर कोड आधारित नवाचार

       इस बाल काव्य संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल तकनीकी नवाचार है। पुस्तक में प्रत्येक कविता के साथ एक क्यूआर (QR) कोड जोड़ा गया है। इस पहल की सराहना करते हुए वन मंत्री ने कहा कि इससे बच्चे केवल कविताओं को पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें सुनकर भी सीख सकेंगे। यह साहित्य और तकनीक का एक बेहतरीन समन्वय है जो शिक्षा को अधिक रोचक, सरल और समावेशी बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यह अनूठी पहल दिव्यांग बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे वे भी समान रूप से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।

राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों की भूमिका

         मंत्री कश्यप ने पुस्तक के संपादक वीरेंद्र कुमार साहू, सभी लेखकों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की दिशा और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्मोर अंगना के शोरश् छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।

         इस विमोचन एवं सम्मान समारोह में स्थानीय विधायक एवं पद्मअनुज शर्मा, अमित चिमलानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार और शिक्षक गण उपस्थित रहे।

रायपुर : विशेष लेख : नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति

रायपुर : विशेष लेख : नैनो उर्वरक- छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी में आई नई क्रांति
किसान भईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी

रायपुर

छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं।

    नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

    छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

    नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

    परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

    छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

    छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। 

    वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।

तेजबहादुर सिंह भुवाल,  सहा. जनसंपर्क अधिकारी

बस्तर IG सुन्दरराज पी को चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दी सम्मानपूर्ण विदाई, सेवाओं को किया नमन

जगदलपुर.

बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आईजी सुन्दरराज पी का सम्मान समारोह आयोजित किया. एनआईए में पदोन्नति मिलने पर चेम्बर भवन में उनका अभिनंदन किया गया. व्यापारी प्रतिनिधियों ने उनके कार्यकाल को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण बताया. उनकी सरल कार्यशैली और आम लोगों से सहज संवाद की सराहना की गई. नक्सल उन्मूलन अभियान में उनकी भूमिका को विशेष रूप से याद किया गया. चेम्बर पदाधिकारियों ने कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस की.सकारात्मक पहचान मजबूत हुई. सम्मान समारोह में अभिनंदन पत्र भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं. बड़ी संख्या में व्यापारी और चेम्बर के पदाधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. वक्ताओं ने बस्तर में उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखने की बात कही. कार्यक्रम में सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच सभी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं. सम्मान समारोह बस्तर और पुलिस प्रशासन के बेहतर समन्वय का भी प्रतीक बना. कार्यक्रम का समापन उनके सफल भविष्य की कामना के साथ हुआ.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार

घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वास

रायपुर, 
 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।
इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए।
प्रमाण पत्र मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है।
अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।

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