प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आई रेल सुविधाओं के विकास में अभूतपूर्व गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 

छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास अब केवल नई रेल लाइनों के निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय संतुलित विकास का सबसे सशक्त आधार बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पिछले ढाई वर्षों में रेलवे अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। रिकॉर्ड बजटीय निवेश, नई रेल लाइनों का निर्माण, मल्टी-ट्रैकिंग, दोहरीकरण, आधुनिक स्टेशन, शत-प्रतिशत विद्युतीकरण तथा दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक रेल संपर्क के विस्तार ने छत्तीसगढ़ को देश के रेलवे मानचित्र पर अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है। वर्तमान में प्रदेश में ₹51 हजार करोड़ से अधिक लागत की रेल परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, जो राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा रेलवे निवेश है और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत आधारशिला बन रहा है।

रेलवे क्षेत्र में हुआ रिकॉर्ड निवेश इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्ष 2014 से पहले छत्तीसगढ़ को रेल परियोजनाओं के लिए औसतन लगभग ₹300 करोड़ का वार्षिक बजट प्राप्त होता था, जबकि वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर ₹7,470 करोड़ तक पहुंच गया है। अर्थात एक दशक में रेलवे बजट में लगभग 24 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। यह केवल बजट में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रति केंद्र सरकार की विकास प्राथमिकताओं और राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता का परिचायक है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व   में डबल इंजन सरकार ने छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास को अभूतपूर्व गति दी है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव की पहल पर जिस तेजी से नई रेल परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है और उन पर कार्य प्रारंभ हुआ है, उसने प्रदेश के विकास की दिशा ही बदल दी है। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य और मध्य भारत का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। रेलवे विकास से उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे। दूरस्थ वनांचलों तक रेल पहुंचने से विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ना है। बस्तर, सरगुजा, जशपुर और अन्य दूरस्थ अंचलों में रेलवे पहुंचने से  विकास का दायरा और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि रेलवे अब केवल यात्रियों और माल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन बन चुकी है। विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप हम छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी रेल एवं लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के इस विज़न को साकार करने की दिशा में प्रदेश में अनेक महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रेल नेटवर्क के विस्तार में भी छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 1853 से 2014 तक लगभग 161 वर्षों में जहां राज्य में करीब 1,100 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क विकसित हुआ था, वहीं अब छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क 2,200 रूट किलोमीटर से अधिक करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक, शत-प्रतिशत रेल विद्युतीकरण, अत्याधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था तथा मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं ने रेलवे परिचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और ऊर्जा दक्ष बनाया है।

बस्तर अंचल में रावघाट रेल परियोजना विकास की नई धुरी बनकर उभरी है। दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक 77 किलोमीटर रेलखंड पर यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से हजारों ग्रामीण पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। परियोजना के अगले चरण में तुमापाल (ताहोकी) से कोसरोण्डा तक पुल-पुलियों का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है तथा रेल लाइन बिछाने का कार्य तेजी से चल रहा है। कोसरोण्डा से रावघाट तक रेलवे अधोसंरचना का निर्माण भी अंतिम चरण में है। परियोजना पूर्ण होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ जाएंगी, जिससे उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिलेगी। वहीं कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल खरसिया-नवा रायपुर-परमालकसा रेल कॉरिडोर को ₹8,741 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है। 278 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग का प्रभावी विकल्प बनेगा। इससे प्रदेश की लॉजिस्टिक्स लागत में प्रतिवर्ष लगभग ₹2,520 करोड़ की कमी आने का अनुमान है, अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता विकसित होगी तथा उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल लाइन, कोरबा-अंबिकापुर, गढ़चिरौली-बीजापुर-बचेली, रावघाट-जगदलपुर, अंबिकापुर-बरवाडीह, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा, गेवरा-पेंड्रा, खरसिया-धरमजयगढ़ तथा बिलासपुर-झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन जैसी परियोजनाएं प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को नई दिशा दे रही हैं। विशेष रूप से धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर जिले को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।

यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों का लगभग ₹1,680 करोड़ की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है। आधुनिक स्टेशन, वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस, मेमू सेवाओं का विस्तार तथा रायपुर में विकसित की जा रही आधुनिक रेल परिचालन सुविधाएं प्रदेश की रेलवे व्यवस्था को नई पहचान दे रही हैं।

ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को भी 755 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। इससे एसईसीएल और एमसीएल की खदानों से कोयले के परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश के ताप विद्युत संयंत्रों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही यात्री और मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुव्यवस्थित होगा।

रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को हाल ही में स्वीकृति प्रदान की गई है।इस परियोजना से रायपुर में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि रेलवे के क्षेत्र में हो रहा अभूतपूर्व निवेश आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, व्यापार और आधुनिक अधोसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। बस्तर से सरगुजा तक सुदृढ़ होती रेल कनेक्टिविटी विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।

भोरमदेव में इको-टूरिज्म को मिली नई पहचान, उप मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव और 6 किमी लंबे इको ट्रेल का किया शुभारंभ

रायपुर

कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य में प्रकृति संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई पहचान देते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज जंगल सफारी में वन महोत्सव और भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ लगभग 6 किलोमीटर लंबी भोरमदेव इको ट्रेल का भ्रमण कर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रोमांचक वन यात्रा का अनुभव लिया। प्राकृतिक पर्यावरण में की जाने वाली एक जिम्मेदार यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना वहां के प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों का संरक्षण करना, और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाना है।

भोरमदेव क्षेत्र अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध 
        
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव अभ्यारण्य में जंगल सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक अब जंगल के अंदर जाकर प्रकृति का करीब से आनंद ले रहे हैं। अब आज से शुरू हुई भोरमदेव इको ट्रेल भी पर्यटकों को घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों के बीच एक नया और यादगार अनुभव देगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने भोरमदेव क्षेत्र को अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला और सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। भोरमदेव में पर्यटन सुविधाओं के बढ़ने से यहां अधिक पर्यटक आएंगे। इससे होटल, वाहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी 
       
उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। अभी भी कई युवा जंगल सफारी में नेचर गाइड बनकर पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अवसर और बढ़ेंगे, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि साल भर यहां पर्यटन गतिविधियां तेजी से चलने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलेगा।  शर्मा ने कहा कि भोरमदेव का विकास तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसे अपनी धरोहर मानकर इसकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

स्वदेश दर्शन योजना से बदलेगी भोरमदेव की तस्वीर
        

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत भोरमदेव क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास के लिए 146 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, शेड, संग्रहालय, आधुनिक पार्क, पार्किंग, मेला स्थल, छेरकी महल, मड़वा महल, रामचूंआ और सरोदा बांध सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से भोरमदेव राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

6 किलोमीटर लंबी इको ट्रेल में मिलेगा प्रकृति के बीच रोमांच
       
वन विभाग द्वारा विकसित भोरमदेव इको ट्रेल लगभग 6 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। ट्रेल के दौरान पर्यटक प्राकृतिक वन, मनमोहक दृश्य, पक्षियों और तितलियों का अवलोकन, औषधीय वनस्पतियों की जानकारी तथा प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।

बैगा समुदाय के हितग्राहियों को किया सोलर लालटेन वितरण
       
वन महोत्सव के अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने करिया आमा ग्राम में 51 काला आम के पौधों का रोपण कर काला आम उपवन की स्थापना की। इसके साथ ही जिलेभर में 50 हजार सीड बॉल रोपण अभियान का शुभारंभ किया। जिले में एक लाख पौधों के वितरण अभियान की शुरुआत करते हुए ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट भी वितरित की गई। 

भोरमदेव ईको ट्रेल हर शनिवार और रविवार को होगी आयोजित
       
भोरमदेव ईको ट्रेल का संचालन करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव ईको कैंप से प्रत्येक शनिवार और रविवार को किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी  निखिल अग्रवाल ने बताया कि अनुभवी नेचर गाइड के साथ प्रतिभागियों को जंगल भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान वे पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों, पक्षियों, तितलियों, वन्यजीवों, स्थानीय भोजन, भोरमदेव मंदिर विरासत परिसर के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। ईको ट्रेल में भाग लेने के लिए 1 हजार रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया गया है। 
           
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष  विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य  भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट, डॉ वीरेन्द्र साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे जैविक उत्पाद : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे जैविक उत्पाद : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

नक्सल मुक्त गांवों की प्राकृतिक खेती बनेगी नई पहचान

एपीडा, कृषि एवं पंचायत विभाग के साथ बनी कार्ययोजना, बस्तर संभाग में होगा विशेष सर्वे और परीक्षण

रायपुर
 बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंचाने तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए, जहां आज तक किसानों ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और इनकी जैविक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।

बस्तर प्रवास के अनुभव से बनी नई पहल

        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के अपने बस्तर प्रवास के दौरान अनेक किसानों ने उन्हें जानकारी दी थी कि उन्होंने अपने खेतों में कभी भी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाए, ताकि उनके उत्पादों का विधिवत जैविक प्रमाणन कराया जा सके और उन्हें देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सके।

जैविक प्रमाणन से किसानों की आय में होगा बड़ा इजाफा

        शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद बस्तर के किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए बनेगी रणनीति

        बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी), सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का निर्माण कर उत्पादन का हर किसी को भागीदार बनाया जाएगा।

बस्तर के जिलों में जाएंगे संयुक्त दल, होगी टेस्टिंग

        उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेंगे तथा जैविक उत्पादों के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके द्वारा पूरे ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाकर बस्तर के उत्पादों को बिहान के छत्तीसकला ब्रांड द्वारा एक्सपोर्ट किया जाएगा।

जैविक प्रमाणन में ली जाएगी छूट

      उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एनपीओपी प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन सालों की अवधि की आवश्यकता को बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त वनोत्पादों को प्रमाणन की आवश्यकता ना होने से उसे भी एक्सपोर्ट रेडी करने के लिए तैयारी करने को कहा ताकि बस्तर के लोगों को वनोत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

प्रमाणन संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग

       उप मुख्यमंत्री ने जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को गति देने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रमाणन संस्थाओं की सेवाएं लेने तथा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कदम शीघ्र उठाने के निर्देश भी दिए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, सचिव धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन, एपीडा के अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का अवसर: मुख्यमंत्री साय के निर्णय का छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन ने किया स्वागत

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का अवसर: मुख्यमंत्री साय के निर्णय का छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात कर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए जताया आभार

रायपुर,
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य सरकार द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विशेष रूप से 20 विभिन्न खेलों के 156 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जाने तथा उन्हें शासकीय सेवा में लाभ का अवसर प्रदान करने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने इसे खेल प्रतिभाओं के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन, संसाधन और सम्मान मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने का निर्णय युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा देगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का गौरव निरंतर बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का सशक्त आधार हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास तथा खिलाड़ियों के हित में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डीबीटी से 626.25 करोड़ रुपये अंतरित

29 किश्तों में अब तक 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचे

‘लखपति दीदी’ सहित विभिन्न योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को मिल रही नई मजबूती

रायपुर 
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की किश्त के साथ योजना के अंतर्गत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में नारी शक्ति के सशक्तिकरण का जो व्यापक अभियान चल रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार उसी संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान माताएं और बहनें स्वयं उन्हें बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अनेक महिलाओं ने इस राशि से छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, कई ने सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया है, जबकि बड़ी संख्या में परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में इसका उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के ये अनुभव इस योजना की वास्तविक सफलता और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभाव के प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ ‘लखपति दीदी’ जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शत-प्रतिशत पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश भी दिए।

उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू की गई है। योजना के तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार जैसी गतिविधियों को भी नई मजबूती मिली है।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

रायपुर : छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

हर माह वीडियो आधारित निरीक्षण से गड्ढों, दरारों और पॉटहोल की होगी पहचान, त्वरित मरम्मत की बनेगी कार्ययोजना

रायपुर, 

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन में पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच

        समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता

        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।

कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

        इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

        इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, सचिव धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां शुरू- मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां शुरू- मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक

रायपुर
प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस समारोह हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गरिमापूर्वक मनाया जाएगा। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन की तमाम तैयारियों को लेकर अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वतंत्रता दिवस के आयोजन की तैयारियों के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउण्ड में राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन प्रातः 9 बजे से होगा।
 
स्वतंत्रता दिवस समारोह की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई। स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर शानदार परेड का आयोजन होगा। समारोह स्थल पर परेड कार्यक्रम में भाग लेने वाली टुकड़ियों के निर्धारण एवं रिहर्सल हेतु पुलिस उप महानिरीक्षक छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल द्वारा पुलिस महानिदेशक के मार्ग दर्शन में सभी आवश्यक तैयारियां एवं व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह से यातायात, पार्किंग,ट्रैफिक एवं सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम स्थल पर साफ-सफाई की व्यवस्था तथा मंच/पंडाल व्यवस्था और बैठक व्यवस्था का निर्धारण आयुक्त नगर पालिक निगम रायपुर के द्वारा की जाएगी। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले कार्यक्रमों का निर्धारण स्कूल शिक्षा विभाग तथा संस्कृति विभाग द्वारा किया जाएगा। स्कूली बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रम के रिहर्सल कार्यक्रम में सभी व्यवस्थाओं कलेक्टर रायपुर द्वारा की जायेंगी।

 इसी तरह से स्वतंत्रता दिवस समारोह के संबंध में अन्य विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिला एवं तहसील स्तर पर आयोजित किए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के निर्धारण के संबंध में शीघ्र ही निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर 7 से 15 अगस्त तक सभी शासकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग दिशा-निर्देश जारी करेगा।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, कलेक्टर रायपुर श्री गौरव कुमार सिंह, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित अन्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

माननीय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जोहार जगन्नाथ कार्यक्रम का किया पोस्टर विमोचन, छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि की कामना

माननीय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जोहार जगन्नाथ कार्यक्रम का किया पोस्टर विमोचन, छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि की कामना
 
सतीश थौरानी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स की टीम ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर व्यापारी हित एवं प्रदेश की समृद्धि के लिए मांगी मनोकामनाएँ

रायपुर 
 
भगवान जगन्नाथ की पावन भक्ति, आस्था एवं सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित “जोहार जगन्नाथ” कार्यक्रम के अंतर्गत माननीय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान जगन्नाथ से छत्तीसगढ़ प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली एवं निरंतर विकास की कामना की।
 
इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष सतीश थौरानी के नेतृत्व में चेम्बर का प्रतिनिधिमंडल ए.टी. पैलेस, कोतवाली चौक, रायपुर पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने भगवान जगन्नाथ के दिव्य दर्शन कर प्रदेश की उन्नति, व्यापारी वर्ग की निरंतर प्रगति, व्यापार में समृद्धि तथा समस्त प्रदेशवासियों के सुखद एवं मंगलमय जीवन के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की।
 
इस अवसर पर अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स के चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया, डायरेक्टर नितिन बरड़िया, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष सतीश थौरानी, कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी सहित चेम्बर के समस्त पदाधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने भगवान जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना, महाआरती एवं पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, व्यापार एवं उद्योग की निरंतर उन्नति तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
 
इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए प्रदेश के सर्वांगीण विकास एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।
 
उल्लेखनीय है कि “जोहार जगन्नाथ” कार्यक्रम के माध्यम से भगवान जगन्नाथ की भक्ति, संस्कृति एवं परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने का उद्देश्य है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन, पूजा-अर्चना एवं महाप्रसाद का लाभ प्राप्त कर अपनी मनोकामनाएँ भगवान के श्रीचरणों में अर्पित कर रहे हैं।

सफल सर्जरी से भीमे हेमला के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रायपुर

 होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) एक आम समस्या है, जिसमें बच्चे के ऊपरी होंठ या तालू के ऊतक गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं। यह दरार केवल होंठ पर हो सकती है या नाक तक जा सकती है। सर्जरी द्वारा इसे 90ः से 100ः तक ठीक किया जा सकता है।
            
बीजापुर जिले के दूरस्थ बासागुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय भीमे हेमला जन्म से होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें भोजन करने, निगलने और स्पष्ट रूप से बोलने में काफी परेशानी होती थी। यह समस्या उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती थी।
            
उपचार के लिए भीमे हेमला ने जिला अस्पताल बीजापुर में संपर्क किया। यहां कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. विभू तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत उनकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन थिएटर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक पूरी हुई।
            
सर्जरी के बाद भीमे हेमला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब उन्हें बोलने, निगलने और सामान्य रूप से भोजन करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। सफल उपचार से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रही हैं।
            
 जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर  विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सु नम्रता चौबे के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के नेतृत्व में जिला अस्पताल बीजापुर में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसका लाभ अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही जिले में मिल रहा है।
            
 जिला अस्पताल बीजापुर में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती क्षमता और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का प्रमाण है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।

हितग्राही की प्रतिक्रिया
            
भीमे हेमला, बासागुड़ा निवासी ने बताया कि वो जन्म से इस समस्या से परेशान थी। जिला अस्पताल बीजापुर में मेरा सफल इलाज हुआ। अब मैं आसानी से बोल सकता हूं और खाना खा सकती हूं। मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ सरकार एवं डॉ. विभू तिवारी, जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती से चमकी किसान की किस्मत

रायपुर

 देश और राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के बीच श्राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजनाश् छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम कचनूर से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती (प्दजमतबतवचचपदह) अपनाकर शानदार अतिरिक्त लाभ कमाया है।

खाली पड़ी जमीन का किया सटीक सदुपयोग
            
ग्राम कचनूर के प्रगतिशील किसान श्री पोटाम गणेश ने अपनी 2.20 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम के पौधे लगाए हैं। चूँकि ऑयल पाम के पौधों को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कुछ वर्षों का समय लगता है, तब तक पौधों के बीच की जमीन खाली रहती है। इस खाली भूमि का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर बीच में मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती करने का स्मार्ट फैसला लिया।

30 हजार रूपए की लागत में 70 हजार रूपए का शुद्ध मुनाफा
         
पोटाम गणेश का यह निर्णय आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हुआ। मूंगफली की इस अंतरवर्तीय फसल से उन्हें जो परिणाम मिला उससे वह उत्साहित है। कुल उत्पादन मूल्य लगभग एक लाख रुपए मिला किन्तु खेती में लागत मात्र 30 हजार रुपये लगा और शुद्ध मुनाफा 70 हजार रुपये मिला।

शुरुआती वर्षों में किसानों को संबल देती है यह तकनीक
         
अपनी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही पोटाम गणेश ने कहा, ऑयल पाम के शुरुआती वर्षों में जब तक मुख्य फसल तैयार नहीं होती, तब तक अंतरवर्तीय फसल लेने से हमारी नियमित आय बनी रहती है। इससे खेती की लागत निकालना बहुत आसान हो जाता है और आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य साथी किसानों से भी अपील की है कि वे इस आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं।

राष्ट्रीय मिशन से मिल रहा है तकनीकी मार्गदर्शन
      

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयलदृऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक सहयोग और उन्नत खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय को बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

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