‘चिरायु’ दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति

रायपुर

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित ‘चिरायु’ दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

जन्म से थी गंभीर समस्या

माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।

स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान

आरबीएसके के ‘चिरायु’ दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।

निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी

25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास

आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का ‘चिरायु’ दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

सरकार गांव, गरीब और किसानों की तरक्की के लिए प्रतिबद्ध-मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर

 राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों के चहुंमुखी विकास और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। इसी कड़ी में आज  बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम पंचायत झोंका में विकास कार्यों की बड़ी सौगात मिली। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने यहाँ विभिन्न जनकल्याणकारी और विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर क्षेत्र के विकास को और गति देने के लिए 27 लाख रुपये से अधिक की नई विकास योजनाओं की घोषणा भी की।
     
 ​ग्राम झोंका में आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्व मंत्री वर्मा ने महामाया मंदिर सामुदायिक भवन, केश डबरी प्रवेश द्वार, पचरी निर्माण, महतारी सदन, मुक्तिधाम शेड, तालाब गहरीकरण तथा रंगमंच भवन सहित विभिन्न अधोसंरचना कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने कुर्मी पारा में नवनिर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण कर उसे आम जनता को समर्पित किया।

​गांवों के चहुँमुखी विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
      
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांव, गरीब और किसानों की तरक्की के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना हमारी प्राथमिकता है ताकि ग्रामीणों का जीवन स्तर और बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में राशि की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

​इन महत्वपूर्ण कार्यों की हुई घोषणा
   ​
ग्रामीणों की पुरजोर मांग और क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए राजस्व मंत्री ने कार्यक्रम के मंच से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं,जिसमे ​प्राथमिक शाला में सुलभ शौचालय निर्माण हेतु 2 लाख रुपये,​ छापड़ तालाब के गहरीकरण के लिए 10 लाख रुपये,​ मुक्तिधाम में शेड निर्माण के लिए 7 लाख रुपये,​ तालाबों में पचरी निर्माण के लिए 3 लाख रुपये और ​सामुदायिक भवन एवं ज्योति कक्ष निर्माण हेतु 5 लाख रुपये देने का ऐलान किया। इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए उन्होंने जागृति महिला मंडल को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की भी सहर्ष घोषणा की।
​    ​
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, बलौदाबाजार जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा ग्राम पंचायत झोंका के सरपंच हरीराम धुव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की

रायपुर

 लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग द्वारा किए जा रहे विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुव्यवस्थित, तेज और प्रभावी बनाने के साथ ही कार्यों में आधुनिक तकनीकों व उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने को कहा। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में अधिकारियों को भवनों, सड़कों और पुलों के विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ सामग्रियों के उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा खरीदी गई सामग्री के जीएसटी बिल अनिवार्य रूप से जमा कराने को कहा। उन्होंने शासकीय भवनों में स्थापित सभी विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का समग्र ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे परिसंपत्तियों के रखरखाव और प्रबंधन में पारदर्शिता तथा दक्षता आएगी।

विभागीय सचिव ने मरम्मत, रखरखाव तथा विभिन्न आयोजनों से संबंधित बिलों के भुगतान नियमित रूप से एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-ऑफिस के माध्यम से भुगतान की कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने चालू जुलाई माह में 30 जून 2026 तक के सभी लंबित बिलों के भुगतान करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने प्रमुख अभियंता को कार्यपालन अभियंताओं के लिए आवश्यक बजट आबंटन जारी करने को कहा।

बंसल ने बैठक में यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन कार्यों के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने शहरों के बीच की सड़कों पर स्थापित स्ट्रीट लाइटों के संचालन, संधारण एवं मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों को सौंपने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शासकीय भवनों के हैंडओवर के समय ही वहां स्थापित लिफ्टों के संचालन, संधारण और मरम्मत की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। 

उन्होंने विभिन्न शासकीय आयोजनों एवं कार्यक्रमों में लगने वाली व्यवस्थाओं के लिए ठेकेदारों एवं वेंडर्स से रेट-कॉन्ट्रैक्ट व रेट-इम्पैनलमेंट करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अन्य राज्यों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें लागू करने को कहा। 

बंसल ने विद्युत एवं यांत्रिकी ठेकेदारों के साथ भी बैठक कर कार्यों में आने वाली समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में सुदृढ़ता एवं तेजी लाने के लिए उनसे सुझाव भी मांगे। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता टी.आर. कुंजाम और जी.एस. मंडावी, अधीक्षण अभियंता सुरेश भूपल और एन.के. लाल सहित सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा उप संभागों के अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध

रायपुर

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। बता दें कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।   

वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है। 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।

इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

देवभूमि और छत्तीसगढ़ के बीच बढ़ा वैचारिक सेतु:मुख्यमंत्री धामी से मिले छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधि

​रायपुर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निवास (देहरादून) में आज छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से एक अत्यंत गरिमामय और सौजन्य भेंट हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम और अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और उत्तराखंड के बहुआयामी विकास, सांस्कृतिक धरोहर तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी।

​’विकास भी, विरासत भी’: क्षेत्रीय प्राधिकरणों से संवर रहा है उत्तराखंड

​मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नैनीताल, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विकास प्राधिकरणों का गठन कर उनके विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों का संतुलित सामाजिक, आर्थिक और नैसर्गिक विकास करना है, ताकि यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।

 उत्तराखंड के ​मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड ऋषियों, मुनियों और संतों की पावन तपोस्थली है। इस देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को संभालना हम सभी का परम दायित्व है। उन्होंने नैसर्गिक संपदा (प्राकृतिक संसाधनों) के संरक्षण पर विशेष बल दिया, ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण संजोकर रखा जा सके।

​लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने में छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका अनुकरणीय

​संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने सीएम साय की मंशानुरूप इस महत्वपूर्ण भ्रमण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और संयुक्त सचिव सह आयुक्त जनसंपर्क रजत बंसल को विशेष रूप से बधाई दी।

धामी ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने और पत्रकार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य रहा है। अधिकारियों के कुशल नेतृत्व में ऐसे अंतर्राज्यीय भ्रमणों से दोनों राज्यों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक नया आयाम मिलता है।

​अगले वर्ष हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष आमंत्रण

 ​भेंट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के मीडिया दल को अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ के लिए सस्नेह आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री धामी ने एक बड़ा दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि कुंभ के पावन अवसर पर देश के सभी राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों को एक-एक अवसर दिया जाना चाहिए।

​मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस पहल से देश भर की मीडिया देवभूमि की पावन तपोभूमि, आध्यात्मिक ऊर्जा और वहां की विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देख सकेगी और इन अद्भुत अनुभवों को अपने-अपने राज्यों की जनता तक पहुँचा सकेगी।

​एक अनूठा संगम

छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, खनिज व नैसर्गिक संपदा और उत्तराखंड की हिमालयी दिव्यता व आध्यात्मिक चेतना के बीच हुआ यह संवाद आने वाले समय में अंतर्राज्यीय समन्वय और राष्ट्रीय एकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरेगा।

इस भ्रमण दल में मुख्यमंत्री धामी से मिलने वालों में दुर्ग,​रायपुर,​कोरबा,​जगदलपुर,​बिलासपुर,​राजनांदगांव,​कोरिया और ​धमतरी जिले के मीडिया प्रतिनिधी और छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय के अधिकारियों के साथ उत्तराखंड के सूचना एवं जनसंपर्क के निदेशक बंशीधर तिवारी,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव पांडे,संयुक्त संचालक के.एस. चौहान सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खरीफ-2026 एवं संभावित अल्प वर्षा की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो।

मुख्यमंत्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित ‘सचेत’, ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके।

वीबी-जी राम जी योजना बनेगी जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार

बैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे एक ओर ग्रामीणों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो और दूसरी ओर प्रदेश की जल सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाने वाले बुलेटिनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान तैयार किया जाए, ताकि यह जानकारी किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचे। साथ ही सोशल मीडिया एवं पारंपरिक मीडिया के माध्यम से भी इनका व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि संचालक राहुल देव, विकसित भारत वीबी – जीरामजी योजना के आयुक्त तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ श्रीमती गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध: राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने आज बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के बलौदाबाजार विकासखंड के ग्राम पंचायत देवरी के ग्रामीणों को बड़ी सौगात देते हुए 44 लाख रुपये की लागत वाले तीन महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। मंत्री वर्मा ने कहा कि सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आज गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण अंचलों में खुशहाली और समृद्धि का एक नया दौर दिखाई दे रहा है।
 

राजस्व मंत्री ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्राम देवरी में 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित चेक डैम  का लोकार्पण किया गया।  इसी प्रकार   महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए 16 लाख रुपये की लागत से बने भव्य ‘महतारी सदन’ भवन का उद्घाटन तथा सामुदायिक आयोजनों की सुविधा के लिए 8 लाख रुपये की लागत से बनने वाले शेड निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई।

​हर गांव तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ
  ​ 
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों के समग्र और चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नवनिर्मित चेक डैम से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे हमारे किसान भाईयों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं दूसरी ओर महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन, कौशल विकास और सामुदायिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
    ​  
इस विकास उत्सव के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभापति  सहित स्थानीय सरपंच, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि तथा प्रबुद्ध ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

राज्यपाल डेका से सर्वाेदय शांति पदयात्रा के संतों ने की सौजन्य भेंट

रायपुर

राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में जैन मुनि राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र महाराज के नेतृत्व में संचालित सर्वाेदय शांति पदयात्रा से जुड़े संतों ने सौजन्य भेंट की।

इस अवसर पर राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ आगमन पर संतों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि संत समाज के विचार और जीवन मूल्य समाज में शांति, सद्भाव, नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सर्वाेदय शांति पदयात्रा को सामाजिक समरसता, अहिंसा और विश्व बंधुत्व का प्रेरक अभियान बताते हुए इसकी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि यह पदयात्रा नेपाल से प्रारंभ होकर लगभग 1,600 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए छत्तीसगढ़ पहुंची है। यात्रा का उद्देश्य शांति, सद्भाव, अहिंसा और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।

इस अवसर पर श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रमण संघ, रायपुर के अध्यक्ष अशोक पटवा, कार्यकारिणी अध्यक्ष विनय पटवा सहित संघ के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

बंदूक छोड़ विकास की राह चुनी, शासकीय योजनाओं ने बदली मड़कम भीमा की जिंदगी

रायपुर

सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली के निवासी मड़कम भीमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से आज वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना पक्का घर

मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक घर में रह रहा है। इस योजना ने उनके जीवन में स्थिरता और भविष्य के प्रति नया विश्वास पैदा किया।

मनरेगा से मिला रोजगार, बढ़ी आत्मनिर्भरता

मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में मेहनत से काम किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा।

नई सोच के साथ बदली जिंदगी

आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। वे मानते हैं कि शासकीय योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है। अब वे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना रहे हैं।

दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

मड़कम भीमा की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युवाओं को संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाने से जीवन में नई शुरुआत संभव है। शासन समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।

एआई तकनीक से हाथी-मानव संघर्ष पर लगी लगाम, सुरक्षित हुए गांव और वन्यजीव

रायपुर

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित ‘एलीफेंट अलर्ट सिस्टम’ हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।

पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं

इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।

तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल

वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।

दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu