गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल

NQAS मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएं

रायपुर
बीजापुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल अब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए बाह्य मूल्यांकन में स्वास्थ्य केंद्र ने सफलतापूर्वक सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
दो दिनों तक हुआ विस्तृत मूल्यांकन
03 और 04 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने PHC चेरपाल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान सामान्य प्रशासन, ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला, लेबर रूम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।
सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निभाई जिम्मेदारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के नेतृत्व में पूरी स्वास्थ्य टीम ने मूल्यांकन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों तथा अन्य कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए मूल्यांकन दल को सभी आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराए।
गुणवत्ता सुधार की दिशा में मजबूत पहल
स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन दल द्वारा दिए गए सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। इन सुझावों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर इलाज
PHC चेरपाल की यह उपलब्धि केवल एक मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा। बेहतर व्यवस्थाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। इससे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा।
गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ता बीजापुर
PHC चेरपाल की सफलता यह साबित करती है कि समर्पित टीमवर्क, बेहतर प्रबंधन और निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह उपलब्धि बीजापुर जिले में गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

विकास का नया सेतुः जब पिनगुंडा नाला पर बनी पुलिया ने बदली ओरछा की तकदीर

​रायपुर

अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में जब मानसून दस्तक देता था, तो वह अपने साथ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए दुश्वारियों का दौर भी लेकर आता था। हर साल बारिश के चार महीने यहाँ के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते थे। लेकिन इस साल तस्वीर जुदा है। नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में पिनगुंडा नाला पर बनी नई बॉक्स पुलिया ने विकास की एक नई इबारत लिख दी है। यह पुलिया सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खुशहाली और कनेक्टिविटी का एक नया ‘लाइफलाइन’ बन चुकी है।

​संकट का सबब था पिनगुंडा नाला

​पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला सालों से नारायणपुर और ओरछा के बीच एक अभेद्य दीवार बना हुआ था। मानसून के आते ही नाला उफान पर आ जाता, जिससे तहसील मुख्यालय ओरछा सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता था। उफनते नाले के कारण एम्बुलेंस नहीं आ पाती थी और गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे। नदी-नाले पार करने के जोखिम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई हफ्तों बाधित रहती थी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती थी और स्थानीय ग्रामीणों की कृषि उपज मंडियों तक नहीं पहुँच पाती थी।

258 लाख रुपए की लागत से मिला स्थायी समाधान

​ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बुनियादी समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए शासन द्वारा यहाँ एक सुदृढ़ पुलिया निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। इस आधुनिक बॉक्स ब्रिज के बन जाने से बारिश के दिनों में भी नारायणपुर से ओरछा तक का मार्ग पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित हो गया है। घंटों का इंतजार और मीलों लंबा वैकल्पिक सफर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है।

​बदलाव की बयार: बहुआयामी लाभ  ​

इस एकल परियोजना ने ओरछा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षित और सुगम मार्ग मिलने से ग्रामीणों के ईंधन और कीमती समय, दोनों की बचत हो रही है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ अब बिना किसी रुकावट के सीधे गांवों तक पहुँच रही हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी आसान हुआ है। इसके साथ ही कृषि उपजों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन आसान होने से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिली है।

स्थानीय ​ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल नहीं, हमारा बेहतर भविष्य है। यह निर्माण उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। सालों से हम इस नाले के सामने बेबस थे। बीमारों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ता था। अब इस पुलिया के बनने से हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा डर दूर हो गया है। यह पुल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य का रास्ता है।

हासमुंद में उफनते नाले में फंसे 14 मजदूरों का सेना ने किया सफल रेस्क्यू

महासमुंद

जिले में देर रात से जारी मूसलाधार बारिश का असर अब जनजीवन पर दिखाई देने लगा है। खल्लारी थाना क्षेत्र के ग्राम जोगीडीपा में बगनाई नाला उफान पर आने से पुल निर्माण कार्य में लगे 14 मजदूर चारों ओर से पानी में घिर गए। जलस्तर अचानक बढ़ने से मजदूरों का बाहरी संपर्क पूरी तरह टूट गया और वे घंटों तक खेत में बनी अस्थायी झोपड़ी में फंसे रहे। सूचना मिलने पर नगर सेना की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर किए गए इस अभियान से बड़ा हादसा टल गया।
लगातार बारिश से बढ़ा जलस्तर

जानकारी के अनुसार, जोगीडीपा गांव में बगनाई नाला पर पुल निर्माण का कार्य चल रहा है। निर्माण एजेंसी के 14 मजदूर कार्यस्थल के पास खेत में बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे। शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश के कारण बगनाई नाला तेजी से उफान पर आ गया। देखते ही देखते झोपड़ी के चारों ओर पानी भर गया और तेज बहाव के कारण मजदूर वहां से बाहर नहीं निकल सके।

डायल 112 की सूचना पर शुरू हुआ रेस्क्यू

बताया गया कि प्रशासन ने बाढ़ आपदा नियंत्रण के लिए जिला और तहसील स्तर पर टीमों का गठन कर संपर्क नंबर जारी किए थे, लेकिन सार्वजनिक किया गया केंद्रीय संपर्क नंबर बंद मिला। वहीं, तहसील स्तर पर जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, वे रात के समय मौजूद नहीं थे। ऐसे में फंसे मजदूरों ने अपने ठेकेदार से संपर्क किया। ठेकेदार ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद नगर सेना की टीम बिना देर किए घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
रस्सियों और सुरक्षा उपकरणों से बचाए गए मजदूर

नगर सेना की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा उपकरणों और रस्सियों की मदद से एक-एक कर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरे अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरती गई, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में 10 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। राहत की बात यह रही कि किसी भी मजदूर को गंभीर चोट नहीं आई।
प्रशासन ने जारी की सतर्कता की अपील

लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के कई नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में जोखिम नहीं लेने की अपील की है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल स्थानीय प्रशासन या पुलिस को देने को कहा गया है।

सभी विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश

प्रशासन ने संबंधित विभागों को लगातार सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित हादसे को समय रहते टाला जा सके।

 

आईएफसी नर्सरी बनी किसानों की उम्मीद

रायपुर

गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरता

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जनपद पंचायत धमतरी द्वारा संचालित आईएफसी परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र (नर्सरी इकाई) आज किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय स्रोत बन चुकी है। इस पहल ने न केवल किसानों को समय पर स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए हैं, बल्कि वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है।

पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे उपलब्ध नहीं होने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी की स्थापना के बाद यह स्थिति बदली है। अब स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।

नर्सरी इकाई में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार पौधों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों एवं क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों के किसानों तक किया जाता है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसानों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नर्सरी का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर प्राप्त हुआ है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन जैसे कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

वर्तमान चरण में नर्सरी इकाई द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया गया है, जिससे ₹1,15,150 की आय अर्जित हुई। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन, उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता के पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन एवं आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।

यह उल्लेखनीय पहल कलेक्टर  अबिनाश  मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका)  अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सु वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक  प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।

  आईएफसी नर्सरी इकाई यह सिद्ध कर रही है कि यदि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग का प्रभावी समन्वय हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री

रायपुर

 विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

दूसरे दिन आयोजित ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ  सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सदस्य  शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘अमृत प्रयास’, ‘बनयान रिवोल्यूशन’ और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है।

‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया।

‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। 

चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।

दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण

रायपुर

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।   

वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है। 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।

इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

लोककला की अमर स्वर-सरिता को राजकीय सम्मान: पद्म विभूषण तीजन बाई को अश्रुपूरित विदाई

रायपुर

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।

डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्म, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।

राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया।

डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 112 करोड़ से अधिक के कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद  बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे। 

 साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17,  कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।

डॉ. तीजन बाई के सम्मान में गनियारी के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का होगा नामकरण – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

रायपुर

स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से किया जाएगा।
      
शिक्षा मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।
     
मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र, पंचक्की से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह को ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम में प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की के अनंत स्व-सहायता समूह को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सहकार प्रेरणा पुरस्कार एवं लाभांश राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह समूह वन विभाग के अंतर्गत संचालित वन धन विकास केंद्र से जुड़ा है।

अनंत स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं सामूहिक रूप से च्यवनप्राश सहित विभिन्न औषधीय उत्पादों का निर्माण करती हैं। समूह द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग सहित अन्य संस्थानों एवं उपभोक्ताओं को की जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान समूह ने लगभग 36 लाख रुपये के उत्पादों का विक्रय कर महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने देश में श्सहकार से समृद्धिश् के लक्ष्य को नई गति दी है। राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इसके लिए अब तक 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

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