शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश

शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश

30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे निर्देश, सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर

रायपुर
छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त निर्देश जारी किया है। विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों तथा विभागाध्यक्षों को सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव द्वारा जारी इन निर्देशों का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन स्थापित करना है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।

कारकेड वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण

निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारियों के कारकेड में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। अन्य शासकीय संसाधनों का भी संयमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

राज्य के शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे ईंधन व्यय में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।

ईंधन और वाहन व्यय में मितव्ययिता

पेट्रोल एवं डीजल पर होने वाले व्यय को न्यूनतम स्तर पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।

विदेश यात्राओं पर रोक

अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आवश्यक होने पर मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

वर्चुअल बैठकों को प्रोत्साहन

भौतिक बैठकों के स्थान पर वर्चुअल एवं ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा। निर्देशों के अनुसार भौतिक बैठकें यथासंभव माह में एक बार ही आयोजित की जाएंगी और विभागीय समीक्षा बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होंगी।

ऊर्जा संरक्षण पर विशेष ध्यान

कार्यालयीन समय के बाद सभी विद्युत उपकरण—जैसे लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर—अनिवार्य रूप से बंद किए जाएंगे। शासकीय भवनों में ऊर्जा की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।

ई-ऑफिस और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा

बैठकों में मुद्रित दस्तावेजों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों (PDF, PPT आदि) का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, कार्यालयीन पत्राचार एवं नोटशीट का संचालन अनिवार्य रूप से e-Office के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कागज और स्टेशनरी व्यय में कमी लाई जा सके।

iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए भौतिक प्रशिक्षण के स्थान पर iGOT कर्मयोगी पोर्टल का उपयोग बढ़ाया जाएगा। विभागों को अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम इस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शासन का मानना है कि इन उपायों से न केवल सरकारी खर्चों में कमी आएगी, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

पंचायतों में ‘सरपंच पति’ कल्चर पर लगाम, ग्रामीण विकास विभाग का बड़ा फैसला

रायपुर.

पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया का स्वतंत्र और प्रभावी हिस्सा बनाना है.

जारी निर्देश के अनुसार, अब ग्राम पंचायत, जनपद एवं अन्य पंचायत बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी. किसी भी रिश्तेदार, प्रतिनिधि या अन्य व्यक्ति को उनके स्थान पर बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी. आवश्यकता पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी तकनीकों का उपयोग कर उपस्थिति सत्यापित की जाएगी.
विभाग ने पंचायत बैठकों और ग्राम सभाओं की कार्रवाई को सभासार पोर्टल, निर्णय ऐप तथा अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका दर्ज हो सके.

प्रशासन का मानना है कि डिजिटल निगरानी से प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा. महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए जिले में जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम, नेतृत्व प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे. पंचायतों में प्रभावी कार्य करने वाली महिला प्रतिनिधियों की सफलता की कहानियों को सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रचारित करने की भी योजना बनाई गई है, ताकि अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिल सके. पेसा क्षेत्र की पंचायतों में ग्राम सभा से पूर्व महिला सभा आयोजित करना अनिवार्य किया गया है, वहीं सामान्य क्षेत्रों में भी महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के लिए महिला सभाओं के आयोजन के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा.

इसे पंचायतों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. विभाग ने जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व से संबंधित शिकायतों के लिए शिकायत पेटी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए जवाबदेह बनाया गया है. प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र और सक्रिय भागीदारी को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लेने कहा है, साथ ही एक सप्ताह के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने और प्रत्येक माह की 5 तारीख तक नियमित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं.

सुशासन तिहार के दौरान कोसला धाम पहुंचे Vishnu Deo Sai, माता कौशल्या मंदिर में की पूजा-अर्चना

सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे कोसला धाम

माता कौशल्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

रायपुर 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम कोसला पहुंचकर माता कौशल्या मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने माता कौशल्या एवं प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री साय के मंदिर परिसर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंदिर सेवा समिति एवं ग्रामीणों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया।  इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी भी उनके साथ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, आस्था और परंपराएं प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। हमारी सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मंदिर सेवा समिति द्वारा मुख्यमंत्री साय को माता कौशल्या मंदिर का आकर्षक छायाचित्र स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। 

मुख्यमंत्री साय के अचानक आगमन से क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन एवं स्थानीय नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे।

महानदी में अवैध खनन पर बड़ा प्रहार: नाकेबंदी के दौरान 14 ओवरलोड हाइवा जब्त

आरंग.

छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी का सीना चीरकर अवैध कमाई में जुटे रेत माफियाओं के खिलाफ रायपुर खनिज विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है. रायपुर कलेक्टर के सख्त आदेश और खनिज प्रशासन के उप संचालक राजेश मालवे के कड़े तेवरों के बाद विभाग ने आरंग-खरोरा मुख्य मार्ग पर ग्राम रानीसागर में आधी रात को बड़ी नाकेबंदी की.

इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में अवैध रेत से लदे 14 भारी-भरकम हाइवा वाहनों की जब्ती की गई. इस कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, खनिज विभाग को पिछले कुछ समय से रंग क्षेत्र से रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत तस्करी के लगातार इनपुट्स मिल रहे थे. सूचना की तस्दीक होते ही खनिज निरीक्षकों की टीम ने ग्राम रानीसागर के पास नाकेबंदी की. जैसे ही रेत से भरे हाइवा वाहनों का काफिला वहां से गुजरा, टीम ने उन्हें रोक लिया.

जब चालकों से वैध दस्तावेज, रॉयल्टी रसीद और पीटपास (परिवहन पास) की मांग की गई, तो वे सकपका गए. बिना किसी वैध कागजात के शासकीय संपदा की चोरी कर जा रहे इन सभी 14 हाइवा वाहनों को तुरंत जब्त कर लिया गया. सभी वाहनों को खरोरा थाना परिसर में सुपुर्द कर दिया गया है. इन सभी वाहन स्वामियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ खनिज अधिनियम के तहत भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

15 दिनों से ‘ऑपरेशन क्लीन’ : चौतरफा घेरे जा रहे माफिया
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है. पिछले 15 दिनों से खनिज विभाग चौबीसों घंटे एक्शन मोड में काम कर रहा है. विभाग ने रेत के इस काले कारोबार पर तीनतरफा वार किया है, जिसमें नदी के प्रतिबंधित क्षेत्रों में मशीनों की एंट्री रोकने, मुख्य और चोर रास्तों पर अचानक जांच करने और गांवों के पास बिना अनुमति जमा की गई लाखों रुपए की रेत की जांच करने जैसी कार्रवाई असरदार साबित हो रही है. इस बैक-टू-बैक एक्शन ने माफियाओं के पूरे सिंडिकेट और उनकी आर्थिक रीढ़ को तोड़कर रख दिया है. 

बेतरतीब माइनिंग से महानदी का स्वरूप बिगड़ा, ग्रामीण परेशान
रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद थे कि उन्होंने आरंग क्षेत्र में महानदी की प्राकृतिक संरचना को पूरी तरह तबाह कर दिया है. अंधाधुंध और बेतरतीब ढंग से की गई खुदाई के कारण नदी ने अपना रास्ता बदलना शुरू कर दिया है. नदी के गहरे होने से तटीय गांवों का वाटर लेवल (भूजल स्तर) तेजी से गिर रहा है. ग्रामीणों का कहना था कि भारी वाहनों के कारण सड़कें बर्बाद हो रही थीं और धूल का गुबार उड़ रहा था. प्रशासन की इस कड़क कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.

रेत माफियाओं के रसूख और टकराव की आशंका को देखते हुए इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय और मुस्तैदी से अंजाम दिया गया. इस साहसिक कार्रवाई में खनिज विभाग की पूरी टीम ने रात भर मोर्चा संभाला, जिसमें मुख्य रूप से खनिज निरीक्षक प्रवीण नेताम और प्रीति सिन्हा, सुपरवाइजर सुनील दत्त शर्मा, विभागीय टीम संतोष पवार, रूपेंद्र चंद्राकर, रिजवान खान, लीलेश्वर मानिकपुरी, राजू बर्मन (सैनिक) शामिल रहे.

अवैध कारोबारियों को बख्शा नहीं जाएगा
खनिज विभाग के उपसंचालक राजेश मालवे ने कहा कि कलेक्टर महोदय के स्पष्ट निर्देश हैं कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. महानदी के स्वरूप से खिलवाड़ और राजस्व की चोरी करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा. हमारी यह कार्रवाई आगे भी इसी तरह लगातार और पूरी आक्रामकता के साथ जारी रहेगी.

सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कोसला धाम दौरा, माता कौशल्या मंदिर में की पूजा-अर्चना

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तहत आज अचानक जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसला पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध माता कौशल्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं छत्तीसगढ़ की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री के मंदिर परिसर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंदिर सेवा समिति एवं ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक लोकनृत्य और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ. पी. चौधरी भी उनके साथ उपस्थित रहे।

मंदिर सेवा समिति की ओर से मुख्यमंत्री साय को माता कौशल्या मंदिर का आकर्षक छायाचित्र स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। साथ ही समिति के सदस्यों ने केंद्र सरकार की प्रसाद योजना में कोसला धाम को शामिल करने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और स्थानीय श्रद्धालुओं से भी आत्मीय संवाद किया। उनके अचानक आगमन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। इस अवसर पर श्रद्धालु, ग्रामीणजन उपस्थित थे।

वाहन चेकिंग के दौरान आरक्षक को कुचलने की कोशिश, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

दुर्ग.

वाहन चेकिंग के दौरान आरक्षक को वाहन से कुचलने का प्रयास करने वाले नागपुर निवासी दो आरोपियों को कुम्हारी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा कुम्हारी टोल प्लाजा के पास वाहन चेकिंग के दौरान तेज रफ्तार कार चालक द्वारा आरक्षक को कुचलने का प्रयास किया गया।

वाहन में ब्लैक फिल्म लगी होने एवं रोकने के संकेत के बावजूद आरोपी तेज गति से वाहन चलाते हुए भागने का प्रयास किए थे। पुलिस टीम ने पीछा कर सिरसा गेट के पास वाहन सहित दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों के विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा, हत्या का प्रयास एवं मोटर व्हीकल के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बताया कि यातायात पुलिस द्वारा कुम्हारी टोल प्लाजा के पास वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। वाहन चेकिंग ड्यूटी में सहायक उप निरीक्षक सुशील पांडे के साथ आरक्षक रमेश चंद्राकर की ड्यूटी रायपुर से दुर्ग मार्ग पर लगाई गई थी। चेकिंग के दौरान दोपहर लगभग 12,30 बजे वाहन एम एच 02 ए वाय 3475 तेज गति से रायपुर की ओर से दुर्ग की ओर आती हुई दिखाई दी जिसमें ब्लैक फिल्म लगी हुई थी।

आरक्षक रमेश चंद्राकर द्वारा वाहन रोकने का संकेत देने पर चालक द्वारा वाहन को और तेज गति से चलाते हुए आरक्षक के ऊपर चढ़ाने का प्रयास किया गया। स्वयं को बचाने के दौरान आरक्षक के दाहिने हाथ की उंगली में चोट आई तथा वह वाहन के सामने गिर गया। आरोपियों द्वारा वाहन सिर के ऊपर भी चढ़ाने का प्रयास किया गया किंतु आरक्षक द्वारा सतर्कता से पीछे हटकर स्वयं को सुरक्षित किया। घटना के बाद वाहन चेकिंग में लगे अन्य स्टाफ द्वारा यातायात पुलिस वाहन से उक्त कार का पीछा कर सिरसा गेट के पास वाहन को रोका। इस वाहन में दो युवक एवं दो युवतियां संदिग्ध अवस्था में मिले।

पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम रमजान एवं जाकिर मोहम्मद निवासी नागपुर बताया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 109 (1), 221, 3 (5) बीएनएस एवं धारा 184, 100 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। घटना में प्रयुक्त वाहन जब्त कर आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

22 मई को लगेगा मेगा रोजगार मेला: 2347 पदों पर युवाओं को मिलेगा नौकरी का मौका

दुर्ग.

जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, दुर्ग और छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीएसआईटी) के संयुक्त तत्वावधान में 22 मई को एक विशाल जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।

जिला रोजगार कार्यालय के उप संचालक से मिली जानकारी के अनुसार, यह आयोजन शिवाजी नगर स्थित सीएसआईटी के परिसर में होगा। इस मेले के माध्यम से क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा। इस रोजगार मेले में विभिन्न क्षेत्रों के 10 नियोजकों द्वारा कुल 2347 तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्तियां की जाएंगी। 10वीं, 12वीं पास से लेकर स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, डिप्लोमा और इंजीनियरिंग स्नातक की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी इस मेले में हिस्सा ले सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, मेडिकल क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों जैसे एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग (जीएनएम / एएनएम) और पैरामेडिकल डिप्लोमा धारकों के लिए भी बड़ी संख्या में रिक्तियां उपलब्ध हैं। इच्छुक आवेदक इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए रोजगार पंजीयन होना अनिवार्य है। रिक्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी रोजगार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या छत्तीसगढ़ रोजगार ऐप पर देखी जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी मालवीय नगर चौक स्थित जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र में सीधे संपर्क कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, अब कॉलोनियों-बाजारों में बनेंगे चार्जिंग पॉइंट; हाइवे पर हर 25 किमी पर सुविधा अनिवार्य

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहन मालिकों को चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984’ में संशोधन कर शहरों और कस्बों के भीतर भी ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने का रास्ता साफ कर दिया है।

नए नियम के तहत अब कॉलोनियों, बाजारों, जिला केंद्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों पर मोबाइल टावरों की तर्ज पर चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क विकसित किया जा सकेगा। इसके साथ ही पहली बार बैटरी स्वैपिंग और इन-बिल्डिंग मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नियमों में शामिल किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होने से ईवी खरीदने वालों का भरोसा बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता कम होगी।

पार्किंग का 20% हिस्सा ईवी के लिए आरक्षित
सरकार ने स्टैंडअलोन चार्जिंग स्टेशन के लिए अलग मानक तय किए हैं। नियमों के ! मुताबिक कुल पार्किंग क्षमता के कम से कम 20% हिस्से को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आरक्षित मानते हुए चार्जिंग पॉइंट विकसित करने होंगे। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के पास भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्थान आरक्षित किया जाएगा। चार्जिंग सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और बिजली की मीटरिंग का जिम्मा सर्विस प्रोवाइडर पर होगा।

इन इलाकों में खुल सकेंगे चार्जिंग स्टेशन
संशोधित नियमों के तहत शहरी सीमा के भीतर कई नई श्रेणियों में चार्जिंग स्टेशन खोलने की अनुमति दी गई है। इनमें रिहायशी कॉलोनियां, औद्योगिक क्षेत्र, बाजार एवं कमर्शियल जोन, जिला एवं सामुदायिक केंद्र, मुख्य और प्रस्तावित सड़कें, माल परिवहन कॉम्प्लेक्स के साथ ही होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट परिसर जैसी जगहें शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि चार्जिंग सुविधा लोगों के घर और कार्यस्थल के करीब होगी तो ईवी का उपयोग तेजी से बढ़ेगा।

हर 100 किमी पर लगेंगे फास्ट चार्जिंग स्टेशन
नई नीति में दूरी के स्पष्ट मानक भी तय किए गए हैं। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दोनों ओर हर 25 किलोमीटर में एक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किया जाएगा। भारी वाहनों और लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक कारों के लिए हर 100 किलोमीटर में फास्ट चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य होंगे। स्टेशनों पर बैटरी स्वैपिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वाहन चालक मिनटों में बैटरी बदलकर आगे बढ़ सकें।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक कदम महिलाओं के नेतृत्व में संचालित होगी ‘द्वीप्ति योजना’

रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक युगांतकारी निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए महत्वाकांक्षी ‘द्वीप्ति योजना’ को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह योजना प्रदेश में न केवल नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा संपत्तियों की स्वामी, संचालक और तकनीकी प्रबंधक के रूप में नई पहचान दिलाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में महिला नेतृत्व आधारित हरित ऊर्जा क्रांति का सूत्रपात करना है।

‘सोलर दीदी’ ग्रामीण ऊर्जा परिवर्तन का चेहरा
         
योजना के तहत ग्राम स्तर पर ‘सोलर दीदी’ (ऊर्जा सखी) का एक समर्पित कैडर तैयार किया जाएगा। चयनित महिलाओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना, संचालन और तकनीकी रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षित सोलर दीदी गांव स्तर पर सोलर मिल, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई प्रणालियों और अन्य सौर संपत्तियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह पहल दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में तकनीकी खराबी की समस्या का स्थायी समाधान बनेगी, जिससे ग्रामीण अधोसंरचना हमेशा क्रियाशील रहेगी।

 कलस्टर लेवल फेडरेशन CLF बनेंगे ‘महिला ऊर्जा सहकारी समितियां’
       
 योजना के अंतर्गत क्लस्टर लेवल फेडरेशन को सशक्त बनाकर उन्हें महिला नेतृत्व वाली ऊर्जा सहकारी समितियों के रूप में रूपांतरित किया जाएगा। ये समितियां सामूहिक रूप से ऊर्जा संपत्तियों का प्रबंधन करेंगी। इन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अधिकृत विक्रेता और चौनल पार्टनर के रूप में जोड़ा जा रहा है। महासमुंद और बस्तर जिले के CLF पहले ही विक्रेता के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं। राज्य स्तर पर उपकरणों की थोक खरीद से लागत कम होगी, जबकि स्थानीय स्तर पर सोलर दीदी बिक्री और सर्विसिंग का कार्य संभालेंगी।

सस्ती ऊर्जा हेतु अभिनव भुगतान मॉडल
         
ग्रामीण उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ‘द्वीप्ति योजना’ में ‘पे-पर-यूज़’ (Pay-per-Use) और ‘पे-एज़-यू-गो’ (Pay-as-you-go) मॉडल अपनाए गए हैं। इसके तहत उपभोक्ताओं को केवल उपयोग की गई ऊर्जा का ही भुगतान करना होगा। महिला ऊर्जा उद्यमों की आर्थिक मजबूती के लिए शासन ने पंचायतों के रखरखाव अनुबंधों में 25 प्रतिशत कार्य विशेष रूप से इन समितियों के लिए आरक्षित रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

‘बिहान’ नेटवर्क और तकनीकी समन्वय
          

योजना का प्रारूप ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया  के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है। इसका व्यापक क्रियान्वयन राज्य के प्रसिद्ध ‘बिहान’ नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इसमें प्रदेश के लगभग 2.7 लाख स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी होगी। यह मॉडल न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका और नेतृत्व के नए द्वार खोलेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ छत्तीसगढ़ को महिला नेतृत्व आधारित ‘हरित विकास मॉडल’ (Green Development Model) के रूप में राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाने वाली दूरदर्शी पहल साबित होगी।
                
 “छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हमारी मातृशक्ति का योगदान सदैव अनुकरणीय रहा है। ‘द्वीप्ति योजना’ के माध्यम से हम राज्य की ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘उपभोक्ता’ से ‘स्वामी’ और ‘प्रबंधक’ बनाने जा रहे हैं। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘नेट जीरो’ और ‘हरित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ की एक बड़ी भागीदारी है।
                 
हमारी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर गांव ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बने और इस बदलाव का नेतृत्व हमारी ‘सोलर दीदियाँ’ करें। जब ग्रामीण महिलाएं आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों का प्रबंधन खुद संभालेंगी, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास को एक स्थायी और स्वच्छ आधार मिलेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ विकसित छत्तीसगढ़ की ओर हमारा एक और मजबूत कदम है।”

वाटरशेड योजना बनी किसान छबी लाल की समृद्धि का आधार

 

रायपु

 प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत संचालित वाटरशेड विकास परियोजनाओं ने छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में कई किसानों की किस्मत बदल दी है। ये परियोजनाएं जो वर्षा जल संरक्षण और भूमि की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, छोटे और सीमांत किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग बन गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित वाटरशेड विकास योजना आज अनेक परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। धमतरी जिले के बेलौदी (विकासखंड-मगरलोड) निवासी एक छोटे से कृषक श्री छबी लाल इस योजना के सफल क्रियान्वयन की एक जीवंत और प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं।

पारंपरिक खेती से आधुनिक सब्जी उत्पादन तक का सफर

पूर्व में श्री छबी लाल सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भरता और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण उनकी आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहती थी।
वाटरशेड योजना के अंतर्गत आजीविका मद से प्राप्त सहयोग और कृषि विशेषज्ञों के तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने अपनी लगभग 1.5 एकड़ भूमि में सब्जी उत्पादन का एक सफल और उन्नत मॉडल विकसित किया। 

बदलाव की शुरुआत
     
आज वे अपने खेत में निम्नलिखित फसलों की सफल खेती कर रहे हैं, जिनमें सब्जियाँ बरबट्टी, भिंडी, करेला, भाटा (बैंगन) और गिल्की शामिल हैं। जल संरक्षण, नमी संरक्षण और बहुफसली चक्र का समावेश किया है।

आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर जीवन स्तर
         

योजना के तहत मिली प्रोत्साहन राशि और जल प्रबंधन के कार्यों से खेत की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। श्री छबी लाल अब स्थानीय बाजारों में ताजी सब्जियों की निरंतर आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और जीवन स्तर में व्यापक सुधार आया है।

भारत सरकार के सचिव ने थपथपाई पीठ
        
हाल ही में धमतरी प्रवास के दौरान भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (भूमि संसाधन विभाग) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने स्वयं श्री छबी लाल के प्रक्षेत्र (खेत) का अवलोकन किया। वाटरशेड योजना केवल जल एवं भूमि संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।
      
 किसान छबी लाल की यह सफलता साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सही तकनीकी मार्गदर्शन और किसान की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण विकास की एक नई और सुनहरी तस्वीर गढ़ी जा सकती है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu