वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ को मिली 16 अत्याधुनिक डायल-112 ईआरवी वाहनों को दिखाई हरी झंडी

रायगढ़

 सुरक्षा, सेवा और सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में रायगढ़ जिले को छत्तीसगढ़ डायल-112 (फेज-2 नेक्स्ट जेनरेशन) के तहत 16 अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल (ERV) की सौगात मिली है। वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने आज पुराना पुलिस लाइन, रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में इन आधुनिक आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटना, चिकित्सा आपातकाल, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सहित किसी भी संकट की स्थिति में अब रायगढ़वासियों को तेज, सुरक्षित और प्रभावी सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि “डायल-112  एक्के नम्बर, सब्बो बर” की अवधारणा के साथ यह सेवा पूरे छत्तीसगढ़ में संचालित की जा रही है। राज्यभर में 400 से अधिक आधुनिक वाहन तैनात किए गए हैं, जिनमें से रायगढ़ जिले को 16 वाहन प्रदान किए गए हैं।

कानून-व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया है। इससे पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा और कानून-व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह योजना शासन के बड़े निर्णयों का धरातल पर दिखाई देने वाला परिणाम है, जिससे पुलिस को कार्य करने में सुविधा होगी और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नए वाहन

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  शशि मोहन सिंह ने बताया कि डायल-112 योजना वर्ष 2018 से संचालित है, जिसे अब फेज-2 नेक्स्ट जेनरेशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तारित किया गया है। उन्होंने बताया कि नए ईआरवी वाहनों में PTZ कैमरा, डैश कैमरा, GPS सिस्टम, मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) और स्मार्ट मोबाइल फोन जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, जिससे घटनास्थल पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

अब एक ही नंबर पर सभी आपात सेवाएं

नई डायल-112 प्रणाली के तहत पुलिस, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपदा प्रबंधन, चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन और नेशनल हाईवे सहायता सेवाओं को एकीकृत किया गया है। रायपुर स्थित अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (C4) के माध्यम से इन सेवाओं का संचालन किया जाएगा।

कार्यक्रम में महापौर  जीवर्धन चौहान, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ  अभिजीत बबन पठारे,  सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

पेयजल की नियमित जलापूर्ति और शुद्धता की जांच जरूरी- मुख्य सचिव

रायपुर

 मुख्य सचिव  विकासशील ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में नियमित जलापूर्ति और पेयजल की शुद्धता की निरंतर जांच कराने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज यहाँ मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।
      
बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन की कार्ययोजना, पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था, आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण, जनभागीदारी, जल संरक्षण तथा सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, भू-जल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए श्जल अर्पणश् की नई पहल पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बुनियादी ढांचे के बाद अब सुचारू संचालन और मॉनिटरिंग पर जोर
      

 मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न गांवों और बसाहटों में पानी की टंकियां तथा नल लगाने का काम पूरा होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता बनाए रखना है।
ग्राम पंचायतों को नल-जल योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए गठित समितियों में महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सहयोग करने के निर्देश दिए। नल-जल योजनाओं की निरंतर और प्रभावी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीधे जिला कलेक्टरों की होगी।

वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग के कड़े निर्देश
        
 मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत गाइडलाइंस के अनुरूप पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग केवल स्वीकृत मदों में ही किया जाए। पानी की सप्लाई चौन में किसी भी प्रकार की खराबी को तुरंत सुधारने के लिए उन्होंने सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म और पीएम गति शक्ति ऐप के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग करने के निर्देश दिए।
       
इसके अलावा, उन्होंने एलडब्ल्यूई (नक्सल) प्रभावित एवं दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वीकृत योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि वर्ष 2028 की समय-सीमा से पहले छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई जाए।

सिंगल विलेज और बल्क वॉटर स्कीम की प्रगति
         
बैठक में अधिकारियों ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत रिफॉर्म प्लान की प्रगति की जानकारी दी। सिंगल विलेज स्कीम के तहत इस विकेंद्रीकृत योजना के तहत गांवों में ही उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग कर पाइपलाइन के जरिए हर घर में नल कनेक्शन दिया जाता है। राज्य के विभिन्न गांवों में ऐसी 29 हजार 90 योजनाएं बनाई गई हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों, शहरों या कई गांवों के समूहों तक भारी मात्रा में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 70 योजनाएं संचालित हैं, जिनमें पानी को दूरस्थ स्रोतों से लाकर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है।
      
पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था के तहत 1,531 गांवों के अंतर्गत आने वाले (20 परिवारों से कम वाली) करीब 920 बसाहटों और एलडब्ल्यूई क्षेत्रों के छूटे हुए परिवारों के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम जारी है।
       
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव मती शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव  अमित कटारिया, वित्त विभाग के सचिव  रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह, इसके साथ ही भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में वर्चुअली व प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।

 

छत्तीसगढ़ में छात्रों के लिए समर कैंप की तैयारी, स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

रायपुर.

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विद्यार्थियों के लिए समर कैंप आयोजित करने को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेश में बच्चों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक गतिविधियों और बहुमुखी प्रतिभा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

जारी निर्देशों के अनुसार समर कैंप का आयोजन स्कूलों या गांव-शहर के सामुदायिक स्थानों में किया जा सकेगा। कैंप का संचालन प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे तक किया जाएगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि समर कैंप में कला एवं रचनात्मक क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों को औद्योगिक संस्थान, मेडिकल कॉलेज सहित अन्य बड़े संस्थानों का भ्रमण भी कराया जा सकेगा। समर कैंप में स्कूल शिक्षकों और पालकों की सहभागिता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कैंप में चित्रकला, गायन-वादन, निबंध एवं कहानी लेखन, हस्तलिपि लेखन, नृत्य, खेलकूद और स्थानीय इतिहास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएगी। इसके अलावा जिला और स्कूल स्तर पर अन्य रचनात्मक गतिविधियों को भी शामिल किया जा सकेगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि समर कैंप पूर्णतः स्वैच्छिक रहेगा और इसके लिए अलग से कोई बजट उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनसहयोग का उपयोग करने को कहा गया है।समर कैंप के आयोजन से पहले शाला विकास समिति और पालक-शिक्षक समिति की सहमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही ग्रीष्मकालीन प्रायोजना कार्यों को शिक्षक और पालकों के सहयोग से पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने अधिकारियों और शिक्षकों से अपील की है कि वे ग्रीष्मावकाश को बच्चों के सीखने और प्रतिभा निखारने के अवसर के रूप में उपयोग करें तथा आयोजित गतिविधियों की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराएं।

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में फीस बढ़ी, अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

रायपुर 
 छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में विभिन्न मदों में ली जाने वाली फीस में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। बढ़ी हुई फीस आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। यह जानकारी विभाग ने आज पत्रकारों को दी गई। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा फीस संशोधन का प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे शासन ने स्वीकृति प्रदान करते हुए आदेश जारी कर दिया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि परीक्षा सामग्री, खेल सामग्री और विज्ञान प्रयोगशाला से जुड़ी सामग्रियों की लागत में वृद्धि को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत एक्टिविटी फीस 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए कर दी गई है। गरीब छात्र सहायता कोष 10 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए किया गया है। साइंस क्लब फीस 20 रुपए से बढ़कर 25 रुपए होगी, जबकि स्काउट गाइड फंड 50 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए कर दिया गया है। इसी प्रकार खेलकूद फीस 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए तथा साइंस प्रैक्टिकल फीस भी 50 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए कर दी गई है।

हायर सेकंडरी एक्टिविटी फीस में भी वृद्धि करते हुए इसे 50 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए किया गया है। हालांकि रेडक्रॉस फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पूर्ववत 30 रुपए ही रहेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्कूलों में आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों और गतिविधियों के संचालन में बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए फीस संशोधन का निर्णय लिया गया है। वहीं फीस वृद्धि के बाद अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।   

प्रदेश में करीब 56 हजार स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 56 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से 44 लाख से अधिक छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में संशोधित शुल्क व्यवस्था से सरकारी स्कूलों के पास बड़ी राशि उपलब्ध होगी। 

छत्तीसगढ़ बना कृषि सुधारों का राष्ट्रीय मॉडल: मंत्री नेताम

रायपुर

 कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 19 मई को आयोजित राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ को कृषि नवाचार, किसान कल्याण और टिकाऊ खेती के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण समृद्धि को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने तिलहन मिशन के तहत पूर्वोत्तर पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ द्वारा लक्ष्य पूरा करने में पहले स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी।   

 मंत्री  नेताम ने बताया कि राज्य में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो देश में धान के लिए सबसे पारदर्शी और ऐतिहासिक समर्थन व्यवस्था मानी जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने 437 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी कर किसानों के खातों में लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का सीधा भुगतान किया है।

भूमिहीन मजदूरों से लेकर डिजिटल खेती तक, छत्तीसगढ़ का व्यापक कृषि विजन

सम्मेलन में मंत्री  नेताम ने कहा कि राज्य सरकार केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत 5 लाख से अधिक परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ तेजी से बागवानी और वैकल्पिक खेती के केंद्र के रूप में उभर रहा है। बस्तर में कॉफी, अनासपाती और जशपुर में चाय की खेती आदिवासी क्षेत्रों में नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही हैं।

कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने जोनल कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में 128 हाईटेक नर्सरी, 71 कोल्ड स्टोरेज, 63 पैकहाउस और 428 सोलर ड्रायर विकसित किए गए हैं। ऑयल पाम, बांस मिशन, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन विस्तार तथा कृषि वानिकी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 4.89 लाख किसानों को 854 करोड़ रुपये से अधिक की दावा राशि वितरित की गई है।  परदेशी ने कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में एआई, ड्रोन तकनीक और एकीकृत किसान पोर्टलों के माध्यम से कृषि व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने की छत्तीसगढ़ की सराहना

राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीस्टेक पोर्टल, दलहन-तिलहन विस्तार, पीएम आशा योजना, प्राकृतिक खेती और तिलहन मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना की। उन्होंने पूर्वाेत्तर एवं पूर्वी भारत के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बीच तिलहन मिशन में लक्ष्य प्राप्ति पर छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान हासिल करने के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर 5 राज्यों के कृषि मंत्री सहित छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं विभागीय सचिव  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि  राहुल देव, संचालक उद्यानिकी  लोकेश चन्द्राकर और संयुक्त संचालक कृषि  गयाराम उपस्थित थे।

PM आवास योजना की राशि लेकर नहीं बनाए घर, 455 हितग्राहियों को प्रशासन का नोटिस

तखतपुर/रायपुर.

प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर वर्षों तक मकान निर्माण नहीं करने वाले हितग्राहियों पर अब नगर पालिका प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. योजना की पहली किस्त हड़पकर बैठे 455 हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने या सरकारी राशि वापस जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है.

आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-22 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सैकड़ों हितग्राहियों को मकान निर्माण के लिए लगभग 55 से 56 हजार रुपये की प्रथम किस्त जारी की गई थी. लेकिन चार से पांच साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने न तो मकान निर्माण शुरू किया और न ही राशि लौटाई. इस कारण योजना की करोड़ों रुपये की राशि फंस गई है.

नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक ऐसे 455 हितग्राहियों के पास करीब ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि अटकी हुई है. अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस मिलते ही एक हितग्राही ने पूरी राशि वापस जमा कर दी, जबकि दो अन्य ने किस्तों में राशि लौटाने की अनुमति मांगी है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरेश सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिन हितग्राहियों ने शासन की राशि लेने के बाद भी आवास निर्माण नहीं किया है, उनके खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी. 24 घंटे के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं करने अथवा राशि वापस नहीं करने पर एसडीएम कोर्ट में रिकवरी प्रकरण दर्ज किया जाएगा और संबंधित लोगों पर एफआईआर भी कराई जाएगी.

रायपुर के बाद दुर्ग-बिलासपुर में भी लागू हो सकती है कमिश्नर प्रणाली, डिप्टी CM विजय शर्मा के संकेत

दुर्ग.

छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की.

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया.

कमिश्नरेट प्रणाली क्या है
कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है.

रायपुर के बाद दो बड़े शहर
राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है.

पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार
गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

शहर को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने पर जोर, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने गिनाए विकास कार्य

शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने लगातार किए जा रहे कार्य : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

वित्त मंत्री ने रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास

सामुदायिक भवन, बाल उद्यान और नाली निर्माण से बढ़ेंगी नागरिक सुविधाएं

अधोसंरचना विकास, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर

रायपुर
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नगर पालिक निगम रायगढ़ क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि रायगढ़ शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास में अधोसंरचना विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सुविधाओं और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण

वित्त मंत्री चौधरी ने नगर निगम के वार्ड क्रमांक 28 में विधायक निधि से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन सामाजिक गतिविधियों, बैठकों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे भवन समाज के लोगों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराते हैं और सामाजिक समन्वय को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साहू समाज के छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

श्रीराम कॉलोनी में बाल उद्यान का जीर्णोद्धार

वार्ड क्रमांक 21, श्रीराम कॉलोनी में अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से लगभग 46 लाख रुपये की लागत से बाल उद्यान जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत लैंडस्केपिंग, पौधरोपण, मुख्य द्वार, बाउंड्रीवाल, विद्युतीकरण, बच्चों के खेल उपकरण, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस उद्यान के विकसित होने से बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा तथा शहर के हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी।

नाली निर्माण से सुदृढ़ होगी जल निकासी व्यवस्था

रायगढ़ स्टेडियम के पीछे से श्रीराम कॉलोनी मोड़ तक लगभग 37.88 लाख रुपये की लागत से 580 मीटर लंबी नाली निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इस निर्माण से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के दौरान होने वाली समस्याओं में कमी आएगी।

चौधरी ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

रायगढ़ में तेजी से आगे बढ़ रहे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, पुल, केलो नदी तट विकास, तालाब सौंदर्यीकरण, उद्यान निर्माण और ऑक्सीजन जोन जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। इतवारी बाजार क्षेत्र को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिलेगा।

उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन नालंदा परिसर युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आधुनिक अध्ययन केंद्र बनेगा, जहां पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

बिजली बिल समाधान एवं सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में राहत मिल रही है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की।

उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी की जानकारी भी दी और नागरिकों से योजना से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

जनगणना में गलत जानकारी देना पड़ेगा भारी, मकान नंबर मिटाने पर भी लगेगा जुर्माना

दुर्ग.

आगामी जनगणना के सुचारू संचालन के लिए प्रगणकों और नागरिकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस जारी की हैं। जिसके अनुसार सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति मकान पर लिखे नंबर को मिटाया या नुकसान पहुंचाता है तो उस पर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की अधिसूचना के परिपालन में जिला प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी की गई है. इसमें बड़ी बात यह है कि सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, स्थानीय सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए किसी भी महिला को उसके पति/ मृत पति का नाम या किसी भी नागरिक को अपने परिवार के सदस्यों का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। नागरिकों को अपने घरों में प्रगणकों को युक्तियुक्त प्रवेश देने और मकानों पर जनगणना के लिए आवश्यक नंबर या चिन्ह लगाने की अनुमति देनी होगी। प्रगणकों को भी नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और घरेलू रूढ़ियों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए है।

प्रगणकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे वैधानिक सीमा में रहकर केवल केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में निर्दिष्ट और निर्धारित प्रश्नों को ही पूछें तथा नागरिकों से अनावश्यक या अतिरिक्त पूछताछ न करें। साथ ही, अपने कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या इंकार करने पर प्रगणकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है, उत्तर देने से इनकार करता है, या मकानों पर लिखे गए नंबरों को मिटाता / नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर 1,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

जनगणना कार्य में बाधा डालने या कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश करने पर 1,000 रु. जुर्माने के साथ अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल का भी प्रावधान है। जनता के भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में प्राप्त किये गए आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
ज्ञात हो कि जनगणना के आंकड़ों का प्राथमिक उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सटीक नीति निर्धारण, लोक प्रशासन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन व आरक्षण के लिए किया जाता है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में सही जानकारी देकर सहयोग करने की अपील की है।

आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह

विशेष लेख

आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह

रायपुर
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है।
राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं।

प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है।

छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं।

• डॉ. दानेश्वरी संभाकर
• उप संचालक (जनसंपर्क)

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