कोपरा जलाशयः छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल बना पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

रायपुर

छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल कोपरा जलाशय आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय वास्तविक रूप में साकार कर रहा है।
       
सुबह के शांत वातावरण में प्रवासी पक्षियों की मधुर आवाजें और जलाशय के आसपास आजीविका से जुड़े ग्रामीणों की गतिविधियां प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कोपरा जलाशय वर्षों से क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण कार्यों को मिली नई गति

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीव सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कई अभियान प्रदेश में संचालित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव कोपरा जलाशय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

स्थानीय समुदाय निभा रहे अहम भूमिका

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय यह संदेश देता है कि जब शासन और समाज मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तब पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होता है।

प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय

कोपरा जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हर वर्ष विभिन्न देशों और राज्यों से आने वाले पक्षी यहां भोजन और विश्राम प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही यह जलाशय जलीय जीवों, मछलियों, वनस्पतियों और अनेक सूक्ष्म जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। इसी विशेषता के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है।

स्वच्छता, वृक्षारोपण और बायो-फेंसिंग पर विशेष जोर

स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षी संरक्षण और बायो-फेंसिंग जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्रभूमियां प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। वे बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कोपरा जलाशय का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।

सतत विकास का बन रहा राष्ट्रीय मॉडल

कोपरा जलाशय आज यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला रामसर स्थल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सहभागिता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
         
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और इसके वैश्विक महत्व पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य के नागरिकों और संरक्षण टीम की सराहना करते हुए अपना संदेश दिया है। 
          
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।

झोपड़ी से NQAS तक, सुकमा के मिनपा हेल्थ सेंटर ने रचा नया इतिहास

रायपुर
 अत्यंत सुदूर, पहुंचविहीन एवं संवेदनशील क्षेत्र सुकमा जिले का मिनपा स्वास्थ्य केंद्र आज सेवा, संघर्ष और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है। जो स्वास्थ्य सेवाएं वर्ष 2022 में सीमित संसाधनों और झोपड़ीनुमा अस्थायी व्यवस्था से प्रारंभ हुई थीं, वही आज राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) मूल्यांकन तक पहुंचकर एक नई उपलब्धि दर्ज कर रही हैं।

उस समय क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार गांव-गांव पहुंचकर हेल्थ कैंप संचालित किए और उपचार के साथ-साथ जनमानस में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का वातावरण तैयार किया।

मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर सहित मैदानी स्वास्थ्य अमले की सतत मेहनत एवं जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ। वर्षों की इसी निरंतर मेहनत और सेवा भावना का परिणाम है कि दिनांक 15 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक (NQAS) मूल्यांकन दल द्वारा मिनपा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण एवं मूल्यांकन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। मिनपा की यह यात्रा केवल एक अस्पताल के विकास की कहानी नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी जनसेवा के संकल्प को जीवंत रखने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।

 

ग्राम कुशहा की चौपाल में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के तहत कोरिया जिले के सोनहत ब्लॉक के ग्राम कुशहा में आकस्मिक प्रवास के दौरान ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। आम और पीपल के पेड़ों की छांव में आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थानीय फल तेंदू, सतालू, चार और लीची का स्वाद लिया तथा ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की सराहना की।

मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों से बिजली, पानी, शिक्षा, राशन, आवास और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में सुशासन तिहार के अंतर्गत क्लस्टरवार जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां अधिकारियों द्वारा समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव नहीं है, उनका निराकरण एक माह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।

ग्रामीणों ने पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए तथा जल्द ही मोबाइल टॉवर स्थापना की दिशा में पहल करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर एवं स्टाफ की उपलब्धता, प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना तथा राशन वितरण व्यवस्था की जानकारी भी ग्रामीणों से प्राप्त की। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें समय पर राशन और तेंदूपत्ता बिक्री का पारिश्रमिक मिल रहा है।

चौपाल में ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क एवं पुलिया निर्माण तथा गांव में हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों के समाधान का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर विधायक  भईया लाल राजवाड़े, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर मती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक  रवि कुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

स्टेट कैपिटल रीजन में राजनांदगांव का शामिल होना बड़ी उपलब्धि- डॉ. रमन सिंह

रायपुर

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन में राजनांदगांव जिले को शामिल किया जाना इस क्षेत्र के समेकित और योजनाबद्ध विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, इससे क्षेत्रीय प्रगति और व्यापार को एक नया आयाम मिलेगा। वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने चेम्बर ऑफ कॉमर्स की टीम को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी देश या राज्य को आगे बढ़ाने में अर्थव्यवस्था और उद्यमिता की सबसे बड़ी भूमिका होती है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

         
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज राजनांदगांव के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के जिला स्तरीय व्यापारी महाअधिवेशन का गरिमापूर्ण शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री  ओपी चौधरी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

राजनांदगांव के विकास को मिलेगी नई गति
        
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने वित्त मंत्री  ओपी चौधरी की दृढ़ इच्छाशक्ति और कार्यक्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को एक नई दिशा मिली है।

भविष्य की तकनीकों और नए अवसरों पर ध्यान दें व्यापारी
       

वित्त मंत्री ने आर्थिक उदारीकरण और जीएसटी के फायदे को रेखांकित करते हुए कहा कि एक देश-एक कर व्यवस्था से व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और पारदर्शी हुई हैं। उन्होंने उद्यमियों से शासन की औद्योगिक नीति का लाभ उठाने और भविष्य के उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन एनर्जी, बायोफ्यूल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश की भविष्य में व्यापक संभावनाएं हैं। औद्योगिक सब्सिडी के लिए उद्योगों के लंबित लगभग 200 करोड़ रुपये की सब्सिडी के भुगतान हेतु सरकार ने 468 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया है। उद्योग आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में श्जॉब पार्कश् की शुरुआत की गई है।

व्यापारी-उद्यमी सम्मानित 
           
कार्यक्रम में समाज सेवा और व्यापार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए  नंदलाल राठी,  टीकमदास साहू, मती हीना बेन रायचा,  शेखर बोथरा,  उन्नति पंजवानी और गुरबचन कौर सावलानी को व्यापारी-उद्यमी सम्मान से नवाजा गया।
          
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, पूर्व सांसद  अभिषेक सिंह, चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष  सतीश थोरानी, समाजसेवी  खूबचंद पारख, चेम्बर ऑफ कॉमर्स राजनांदगांव के अध्यक्ष  कमलेश बैद,  ज्ञानचंद बाफना और  अरुण डुलानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में  पद्म फूलबासन यादव सहित बड़ी संख्या में प्रदेश के प्रतिष्ठित व्यापारी, उद्योगपति एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

सौम्य मुख्यमंत्री साय का सख्त रूख

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सुशासन तिहार के दौरान आज सूरजपुर, कोरिया और एमसीबी जिले का औचक दौरा कर शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का मुआयाना किया। इस दौरान शिविर में वह ग्रामीणों आत्मीयता से मिले एवं धैर्य से उनकी समस्याएं सुनीं। 
    
मुख्यमंत्री ने उक्त तीनों जिलों में सुशासन तिहार का जायजा लेने के बाद चिरमिरी में जिलों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने बैठक में उक्त तीनों जिलों के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या और स्कूली परीक्षा परिणाम की स्थिति को लेकर एक ओर जहां गहरी नाराजगी जतायी, वहीं कोरिया जिले में किसानों को खाद वितरण में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर सहायक आयुक्त एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सख्त रूख से सभी लोग सकते में आ गए।
    
मुख्यमंत्री  साय का सूरजपुर जिले के ग्राम रामपुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों से अपनत्वभाव से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना, तेन्दूपत्ता संग्राहक श्रमिक महिलाओं को अपने हाथों से चरण पादुका पहनाना, बच्चों का अन्नप्रासन और उनका नामकरण करना, एक ओर जहां उनके सौम्य व्यक्तित्व का परिचायक है, वहीं दूसरी ओर शासकीय कामकाज में लापरवाही के मामले में अधिकारियों पर नाराजगी और निलंबन की कार्यवाही सख्त प्रशासनिक व्यवस्था का स्पष्ट संकेत है। 
    
मुख्यमंत्री ने  साय ने समीक्षा बैठक के दौरान उक्त तीनों जिलों में पेयजल की समस्या के मामले में कलेक्टरों को हर-हाल में संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पेयजल की कमी है, वहां टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाना, कलेक्टरों की जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी तरह की कोताही पर कलेक्टर सीधे जिम्मेदार माने जायेंगे। मुख्यमंत्री ने तीनों जिलों के शालेय परीक्षा परिणाम की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जतायी और कलेक्टरों को आगामी शिक्षा सत्र के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाने के साथ ही स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि परीक्षा परिणाम में अपेक्षित सुधार हो सके। 
    
मुख्यमंत्री ने बैठक में कलेक्टरों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए कार्ययोजना बनाने के साथ ही उसका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात से पूर्व सभी पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई और उनका क्लोरिनेशन अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि दूषित पेयजल की वजह से होने वाली बीमारियों की रोकथाम हो सके। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के  निर्माण कार्य को पूरी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी और हितग्राही के परेशान होने की शिकायत मिली तो, इसके लिए भी कलेक्टरों को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। 

मुख्यमंत्री  साय ने उक्त तीनों जिलों के अधिकारियों की वर्चुअल समीक्षा बैठक चिरमिरी स्थित एसईसीएल के तानसेन भवन से ली। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक  भईया लाल राजवाड़े, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क  रजत बंसल सहित तीनों जिलों के कलेक्टर, एसपी, डीएफओ, सीईओ जिला पंचायत सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।

​बिजली की कड़क ने छीने थे पैर, ‘सुशासन’ ने दी आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

​रायपुर     

जब शासन संवेदनशील हो और नीतियां जन-सरोकार से जुड़ी हों, तो आपदा से हारा इंसान भी दोबारा सम्मान से सिर उठाकर जीने की ताकत पा लेता है। धमतरी जिले के ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित समाधान शिविर इसका जीवंत उदाहरण बना। आकाशीय बिजली की एक गड़गड़ाहट ने ग्राम पीपरछेड़ी निवासी शिवचरण कंवर की जिंदगी को मानो एक पल में थाम दिया था। वर्ष 2022 में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना में शिवचरण ने अपने दोनों पैरों की सक्रियता खो दी। जो हाथ कभी कड़ी मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, वे अचानक दूसरों के सहारे के मोहताज हो गए। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति और शारीरिक असमर्थता ने शिवचरण को गहरे अवसाद में धकेल दिया था। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के ‘सुशासन तिहार’ ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया है।

समाधान शिविर से मिला नया जीवन
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ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित राज्य शासन के ‘समाधान शिविर’ में शिवचरण की इस लाचारी को बेहद संवेदनशीलता से सुना गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवचरण को तुरंत मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान की।
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बैटरी चलित इस ट्राईसाइकिल की चाबी जैसे ही शिवचरण के हाथों में आई, उनके चेहरे पर खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया। भावुक होते हुए शिवचरण ने कहा कि आकाशीय बिजली ने मुझसे मेरे पैर छीन लिए थे, मुझे लगता था कि अब मैं जिंदगी भर एक कमरे में कैद रह जाऊंगा। लेकिन आज इस मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल ने मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। अब मैं बिना किसी सहारे के अपने काम खुद कर सकूंगा और समाज में आत्मनिर्भर होकर घूम सकूंगा।

त्रिवेणी संगम: राशन,सम्मान और महतारी वंदन का साथ
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शिवचरण के परिवार के लिए यह समाधान शिविर केवल एक ट्राईसाइकिल मिलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं ने भी उनके घर के चूल्हे को बुझने से बचाया है। ​शिवचरण के जीवन को सुरक्षित करने के लिए शासन की तीन बड़ी योजनाओं ने सुरक्षा कवच का काम किया है। ​मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल,​नया राशन कार्ड और ​महतारी वंदन योजना के तहत शिवचरण की पत्नी को हर महीने नियमित रूप से मिल रही 1000 रुपये की सहायता राशि, जिससे परिवार को मजबूत आर्थिक संबल मिलेगा।

मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार

कागजों से निकलकर जिंदगी बदलती योजनाएं
 
​इस संवेदनशीलता के लिए शिवचरण और उनके पूरे परिवार ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और जिला प्रशासन धमतरी के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार सचमुच गरीबों और दिव्यांगों की तकलीफ को समझती है।
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​पीपरछेड़ी का यह समाधान शिविर केवल सरकारी फाइलों के निपटारे का माध्यम नहीं था, बल्कि यह इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब सरकार प्रतिबद्धता के साथ जनता के द्वार पहुंचती है, तो योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं। वे सीधे जरूरतमंदों के जीवन में सम्मान, स्वावलंबन और नई उम्मीद का सवेरा लेकर आती हैं। शिवचरण की यह कहानी छत्तीसगढ़ शासन के ‘अंत्योदय’ के संकल्प को पूरी तरह चरितार्थ करती है।

खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के लिए स्थापित हुआ “खनन सूचना केंद्र”

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज संसाधनों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार ठोस कदम उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश में खनन गतिविधियों की प्रभावी निगरानी, नागरिकों से सीधा संवाद तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “खनन सूचना केंद्र (Mining Information Center)” की स्थापना की गई है।

प्रदेश में खनिजों से संबंधित गतिविधियों, शिकायतों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम एवं प्रभावी बनाने के लिए संचालनालय, भूविज्ञान एवं खनिकर्म द्वारा टोल फ्री नंबर 1800-233-2140 जारी किया गया है। इस माध्यम से आम नागरिक अवैध खनन, अवैध परिवहन, खनिज संबंधी अनियमितताओं अथवा अन्य शिकायतों की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे, जिससे समयबद्ध कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की “जीरो टॉलरेंस” नीति के अनुरूप स्थापित यह सूचना केंद्र पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगा। अब खनन गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों और सूचनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र उपलब्ध होगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

खनन सूचना केंद्र का संचालन कार्यालयीन समयानुसार प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक किया जाएगा। प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित समन्वय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त संचालक (खनिज प्रशासन) स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि खनिज संपदा का संरक्षण, पारदर्शी उपयोग, राजस्व संवर्धन तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जनसहभागिता और तकनीकी समन्वय के माध्यम से ही संभव है। “खनन सूचना केंद्र” इस दिशा में शासन की जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण जनहितकारी पहल है।

सरकार गांव, गरीब और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित-मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार-2026’ के अंतर्गत आज धमतरी जिले में विकासखंड स्तरीय समाधान शिविरों का भव्य आयोजन किया गया। इस महाअभियान के तहत कुरूद विकासखंड के ग्राम चोरभट्टी में नौवां और धमतरी विकासखंड के ग्राम पीपरछेड़ी में दसवां समाधान शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ग्राम पीपरछेड़ी में आयोजित विशाल क्लस्टर शिविर में प्रदेश के राजस्व, आपदा प्रबंधन मंत्री  टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। 
     
शिविर को संबोधित करते हुए मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पूरी तरह से गांव, गरीब और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की प्रथम कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं और आवास प्लस योजना की पात्रता में ढील देकर अधिक से अधिक जरूरतमंदों को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, समय पर बोनस वितरण, महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को मिल रहे आर्थिक संबल और रामलला दर्शन व मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जिक्र करते हुए ग्रामीणों से इन योजनाओं का खुलकर लाभ उठाने की अपील की।
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पीपरछेड़ी क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली पीपरछेड़ी, डाही, अंगारा, हंकारा, सेमरा डी, सेंचुवा, बिजनापुरी, बोड़रा, पुरी, धौराभाठा, लिमतरा, गागरा, सांकरा, सम्बलपुर, सेहराडबरी, भोथली, कंडेल, नवागांव, बिरेतरा, छाती और शंकरदाह सहित कुल 22 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने इस शिविर में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।        
    
शिविर के दौरान ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं, मांगों और शिकायतों से जुड़े कुल 3,021 आवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें से 164 संवेदनशील मामलों का विभागीय अधिकारियों द्वारा मौके पर ही त्वरित निराकरण कर आम जनता को बड़ी राहत दी गई। शेष आवेदनों को भी समय-सीमा के भीतर निराकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। 

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल 40 समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और इन शिविरों के माध्यम से शासन की लगभग 120 प्रकार की आवश्यक सेवाएं सीधे ग्रामीणों के घर-द्वार तक पहुंचाई जा रही हैं।

हितग्राहियों को बांटी गई खुशियां: कृषि यंत्र से लेकर ट्राईसाइकिल तक का वितरण
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इस आयोजन के दौरान विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से हितग्राहियों को सीधे लाभान्वित भी किया गया। मंच से अतिथियों द्वारा किसानों को किसान किताबें और कृषि स्प्रे यंत्र सौंपे गए, वहीं मत्स्य विभाग की ओर से मछुआरों को आईसबॉक्स व मछली जाल प्रदान किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सुपोषण किट, बैंक पासबुक और किशोरी बालिकाओं को स्वच्छता किट बांटी गई। इसी तरह श्रम विभाग द्वारा सहायता राशि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीपी मशीनें, समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल व वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और जनपद पंचायत द्वारा सात नवीन राशन कार्डों का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र परिवारों को उनके नए पक्के मकान की चाबियां सौंपकर गृह प्रवेश भी कराया गया, जिससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी जनता को जागरूक करते हुए शासन की इस अनूठी पहल की सराहना की और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया।
       
इस अवसर पर उनके साथ विधायक  ओंकार साहू, पूर्व विधायक मती रंजना साहू, महापौर  रामू रोहरा, कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक  सूरज सिंह परिहार सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण उपस्थित रहे।

सबसे दूर, सबसे पहले: नारायणपुर के 262 आदिवासी गाँवों में पहुँचेगा विकास

​रायपुर

छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय परिवारों के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए नारायणपुर जिले में “सबसे दूर, सबसे पहले” की अनूठी थीम पर ‘जनजाति गरिमा उत्सव’ जन भागीदारी अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों को पूरी तरह संतृप्त (Saturated) करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर ने अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के कड़े निर्देश दिए।
       
​कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान का मुख्य ध्येय शासन की हर एक कल्याणकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके लिए ज़िला प्रशासन और नोडल अधिकारियों की टीम सीधे जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेगी।

तीन बड़े अभियानों का त्रिवेणी संगम: गाँव-गाँव शिविर

     
 ​इस अभियान के तहत जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। जिले के सभी 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों में विशेष जन भागीदारी शिविर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत 255 गाँवों को कवर किया जाएगा, जहाँ ‘आदि सेवा केंद्रों’ के माध्यम से जनसुनवाई होगी और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जाएगा। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 204 गाँवों में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित कर सीधे शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएँ
    
​18 मई से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान गाँवों में ही एकीकृत शिविरों का आयोजन हो रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल कैंप,पात्रता के अनुसार ​ऑन-द-स्पॉट जनकल्याणकारी योजनाओं के फॉर्म भरना और मौके पर ही लाभान्वित करना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे।
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सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी से ही जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है। यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।”

जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील
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कलेक्टर ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक ग्रामीणों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से वंचित न रहे।

सुरक्षित छत्तीसगढ़ की ओर कदमः ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ के आधुनिक वाहनों को हरी झंडी

रायपु

आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजनांदगांव में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

आधुनिक तकनीक से और मजबूत होगी पुलिस व्यवस्था
          
वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं का आधुनिकीकरण नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। “एक नंबर, अनेक माध्यम, त्वरित सहायता” की सोच पर आधारित डायल-112 सेवा प्रदेशवासियों को किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और मदद उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इन आधुनिक तकनीक-आधारित वाहनों से पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी और कानून व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

वाहनों का वर्गीकरण और उनकी खासियतें
          
‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के विस्तार के तहत कुल 22 आधुनिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया गया है, जिनका वर्गीकरण इस प्रकार है। डायल-112 वाहन  18 (त्वरित आपातकालीन रिस्पॉन्स के लिए), हाईवे पेट्रोलिंग वाहन के लिए  03 (राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और सुरक्षा की निगरानी के लिए), फॉरेंसिक वाहन 01 (घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए) ये सभी वाहन नवीनतम जीपीएस (ळच्ै), उन्नत संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं। इससे कंट्रोल रूम को रियल-टाइम लोकेशन मिलेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूचना पर पुलिस बल बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच सकेगा।

जनता को मिलेगा त्वरित लाभ
           
इन नए हाई-टेक वाहनों के सड़कों पर उतरने से न केवल आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद आपातकालीन चिकित्सा व सुरक्षा सहायता मिल सकेगी। स्थानीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी स्लोगन एक्के नम्बर, सब्बो बर के साथ इस सेवा को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इन वाहनों के संचालन से कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित एवं बेहतर आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी।

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