रायपुर में जनगणना का पहला चरण पूरा, 33 सवालों के जरिए जुटाई गई जानकारी

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में 30 मई को जनगणना के पहले चरण का समापन हो गया है। अधिकारियों के अनुसार रायपुर जिले में प्रगणकों ने 100 प्रतिशत से भी अधिक घरों तक पहुंचकर मकान सूचीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। जिन घरों तक पहुंच नहीं हो सकी, उनका डेटा अगले चरण में शामिल किया जाएगा।

प्रगणकों ने घर-घर जाकर जानकारी एकत्र की और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे सर्वर में दर्ज किया। इससे जिले में जनगणना कार्य सफलतापूर्वक पूरा माना जा रहा है। जनगणना के दौरान 1 मई से 30 मई तक प्रगणकों ने घर-घर जाकर 33 प्रकार के सवालों के आधार पर जानकारी एकत्र की और उसे सीधे सर्वर में दर्ज किया। इससे पहले 16 से 30 अप्रैल तक लोगों द्वारा स्वयं ऑनलाइन स्व-गणना भी की गई थी। इस प्रक्रिया में नागरिकों की बुनियादी जानकारी, आवासीय स्थिति और अन्य आवश्यक विवरण शामिल किए गए। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा को तुरंत अपडेट किया गया, जिससे जनगणना कार्य को गति और पारदर्शिता मिली।

खाली घरों तक कई बार पहुंचे प्रगणक
अधिकारियों ने बताया कि जिन घरों में लोग उपलब्ध नहीं थे, वहां प्रगणक तीन से चार बार पहुंचे। इसके बाद भी यदि जानकारी नहीं मिल सकी, तो उन घरों को “बंद” दर्ज कर सिस्टम में अपडेट कर दिया गया। इसके बावजूद प्रयास किया गया कि अधिकतम घरों का सही डेटा संग्रहित हो सके और किसी भी परिवार की जानकारी छूट न जाए। यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न की गई।

2027 में होगा दूसरा चरण, जुटाई जाएगी व्यक्तिगत जानकारी
जनगणना का अगला चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे शिक्षा, भाषा, व्यवसाय और जाति संबंधी डेटा एकत्र किया जाएगा। इससे सरकार को योजनाएं बनाने में अधिक सटीक और रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा। इस चरण में विस्तृत सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिससे विकास योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

रायपुर में बनाए गए 3939 ब्लॉक, मजबूत व्यवस्था के साथ हुआ सर्वे
जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए रायपुर जिले को 3939 ब्लॉकों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक प्रगणक को 180 से 200 घरों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके साथ ही हर छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति भी की गई थी। इस व्यवस्था से सर्वे कार्य की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित की गई तथा पूरे अभियान को समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।

CM साय आज दुर्ग-बेमेतरा दौरे पर, सुशासन तिहार में सुनेंगे जनता की समस्याएं

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रविवार काे दुर्ग और बेमेतरा जिले के महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे। वे सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास में मन की बात कार्यक्रम का श्रवण करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे दुर्ग पहुंचकर सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री यहां आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में पहल करेंगे। साथ ही करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर क्षेत्र को नई विकास सौगात देंगे। दोपहर 3 बजे वे सुशासन तिहार के तहत अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा भी लेंगे। शाम 6 बजे मुख्यमंत्री बेमेतरा जिला पहुंचेंगे, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम में शामिल होकर नवदंपतियों को आशीर्वाद देंगे। इसके साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण कर जिले के विकास को नई गति प्रदान करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री रात 9 बजे रायपुर लौटेंगे।

खाद गोदाम में बड़ी चोरी, 68 बोरी DAP लेकर फरार हुए बदमाश; डॉग स्क्वाड के साथ जांच में जुटी पुलिस

बालोद.

मानसून अभी पहुंचा नहीं है, लेकिन किसान अपनी तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में खेतों को तैयार करने के लिए जरूरी खाद की किल्लत को देखते हुए चोर गोदाम से खाद की बोरियां चोरी करने लगे हैं.

बालोद जिला स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुसुमकसा के ग्राम चिपरा के खाद बीज गोदाम से चोरों ने 68 बोरी नवरत्ना कम्पनी का डीएपी चोरी करके ले गए. चोरी की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची डौंडीलोहारा पुलिस जांच में जुटी गई है. घटना स्थल पर डॉग स्क्वायड की टीम की मदद से चोरों को खोजने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अब तक पुलिस को कोई सुराग हाथ नही लग पाए है. गौरतलब है कि इस खाद गोदाम से 15 मई 2024 में भी 35 बोरी डीएपी, 12 बोरी पोटाश, 7 बोरी यूरिया, 8 बोरी सुपरफास्फेट की चोरी हुई थी, लेकिन उस मामले में आज तक पुलिस चोरों को पकड़ नहीं पाई है. 

सुशासन तिहार बना आजीविका संवर्धन का आधार, मत्स्य पालक भरत निषाद को मिली ₹1 लाख की सहायता

रायपुर 

सुशासन शिविरों के माध्यम से शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर के पात्र व्यक्तियों तक लगातार पहुंचाया जा रहा है। ये शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रहे हैं। इसी कड़ी में, जनपद पंचायत धमधा के ग्राम मलपुरी कला निवासी  भरत निषाद के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।  निषाद लंबे समय से मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वे अपने इस पैतृक व्यवसाय के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए विगत कुछ समय से वित्तीय सहायता की आवश्यकता महसूस कर रहे थे। जब वे विगत दिन मलपुरी कला गांव में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में पहुंचे तब विभाग द्वारा उनकी मांग एवं पात्रता का परीक्षण कर त्वरित कार्यवाही की गई। इसके फलस्वरूप, मत्स्य पालन विभाग द्वारा योजना के अंतर्गत उन्हें आजीविका संवर्धन हेतु ₹1 लाख की वित्तीय सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। चेक प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही भरत निषाद ने बताया कि इस आजीविका अनुदान राशि से वे मत्स्य पालन हेतु आवश्यक संसाधनों का विस्तार करेंगे। उन्होंने कहा कि यह वित्तीय सहयोग उनके व्यवसाय को सुदृढ़ करने के साथ-साथ परिवार के आर्थिक स्तर को उन्नत बनाने और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। हितग्राही ने इस त्वरित एवं पारदर्शी प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया।  निषाद की यह कहानी इस तथ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जिला प्रशासन के ये सुशासन शिविर धरातल पर लक्षित समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में निरंतर सफल हो रहे हैं।

निगम के 06 वार्डो में होंगे 01 करोड़ 08 लाख रू. के नये विकास कार्य

रायपुर

 नगर पालिक निगम कोरबा के सर्वमंगला नगर जोनांतर्गत वार्ड क्र. 61, 64 तथा दर्री जोनांतर्गत वार्ड क्र. 52, 53, 54 एवं 58 में 01 करोड़ 08 लाख रूपये के नये विकास कार्य कराये जायेंगे, आज प्रदेश के उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य तथा महापौर मती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में आयोजित पृथक-पृथक भूमिपूजन कार्यक्रमों के दौरान इन सभी विकास कार्यो का भूमिपूजन उनके करकमलों से किया गया। 
    
नगर पालिक निगम केारबा द्वारा सर्वमंगलानगर जोनांतर्गत वार्ड क्र. 61 बरमपुर बीच बस्ती ट्रांसफार्मर के पास से नदी तक 20 लाख रूपये की लागत से नाली एवं कलवर्ट का निर्माण कार्य, वार्ड क्र. 61 बरमपुर में चैतु मंझवार के खेत के पास से नदी तक 20 लाख रूपये की लागत से नाली एवं कलवर्ट निर्माण तथा वार्ड क्र. 64 इमलीछापर स्थित रामनगर कंचन कंवर के घर से राजेश सोनवानी घर होते हुये नदी तक 11 लाख 50 हजार रूपये की लागत से सी.सी. रोड का निर्माण कार्य कराया जाना हैं। इसी प्रकार निगम के दर्री जोनांतर्गत वार्ड क्र. 52 शारदा चैक गोपाल तिवारी घर से राजकुमार कबाड़ी घर, चित्रा साहू गली शंभू घर से रामानुज घर एवं सतनाम चैक गली में 20 लाख रूपये की लागत से सी.सी. रोड का निर्माण कार्य कराया जाना हैं, वहीं वार्ड क्र. 53 में ही पावर सिटी कालोनी के पास 06 लाख रूपये की लागत से सांस्कृतिक मंच का निर्माण, वार्ड क्र. 54 डुमरमुड़ा बस्ती में ठाकुर देव स्थल के पास 03 लाख रूपये की लागत से शेड का निर्माण, वार्ड क्र. 54 में स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल गोपालपुर में 05 लाख रूपये की लागत से किचन शेड निर्माण व अन्य विस्तार कार्य के साथ-साथ वार्ड क्र. 58 सरदार वल्लभभाई पटेलनगर प्रतीक्षा बस स्टैण्ड के समीप 22 लाख 55 हजार रूपये की लागत से वेंडिंग जोन का निर्माण किया जाना हैं। आज उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत के द्वारा इन सभी विकास कार्यो का विधिवत भूमिपूजन किया गया, उन्होने पूजा अर्चना की, शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया तथा कार्यो को प्रारंभ कराया। 

राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु प्रतिबद्ध है राज्य सरकार 

 इस अवसर पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का पूरा आशीर्वाद विकास हेतु प्राप्त हो रहा हैं तथा राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, एक ओर जहाॅं विकास को तेज गति व दिशा दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर केन्द्र व राज्य सरकार की दर्जनों जनकल्याणकारी  योजनाओं से आमलोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा रहा है। उन्होने कहा कि हमारा मानना है कि छत्तीसगढ़ राज्य को हमारी ही सरकार ने बनाया था, और अब हमारी ही सरकार छत्तीसगढ़ को संवार रही है। उद्योग मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश का तेजी से विकास हो रहा है, देश के कोने-कोने में फोरलेन -सिक्सलेन सड़कें बन रही है तथा हर क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है, वहीं गरीब कल्याण की दर्जनों योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जा रही है, इधर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में विगत सवा दो वर्ष के दौरान पूर्व में किये गये सभी वायदों को राज्य सरकार पूरा कर रही है, प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना अंतर्गत 1000 रूपये प्रतिमाह उनके खाते में भेजा जा रहा है, 3100 प्रति क्विटल धान की खरीदी, बकाया बोनस का भुगतान, तेदूपत्ता मानक बोरे की दर में वृद्धि, 26 लाख पी.एम.आवासगृहों की स्वीकृति, रामलला दर्शन योजना अंतर्गत भगवान राम के दर्शन लाभ दिलाने सहित दर्जनों योजनाएं संचालित हो रही है।  

हमारी ट्रिपल इंजन की सरकार कर रही तेजी के साथ विकास 

 महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुये अपने उद्बोधन में कहा कि आप सब के आशीर्वाद से केन्द्र में, राज्य में तथा कोरबा नगर निगम में हमारी सरकार बनी है तथा यह ट्रिपल इंजन की सरकार जिले, प्रदेश व देश का तेजी से विकास कर रही है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का सपना था कि हर व्यक्ति के पास उनका अपना स्वयं का पक्का मकान हों, वे झोपड़ी में न रहें, आज  मोदी का यह सपना पूरा हो रहा है तथा हर व्यक्ति के पास अपना स्वयं का पक्का मकान होने जा रहा है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य का साय-साय विकास हो रहा है, विकास कार्यो हेतु फण्ड की कोई कमी नहीं हो रही है, जहाॅं तक कोरबा नगर निगम के विकास का प्रश्न है, तो उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन लगातार यहाॅं के विकास कार्येा हेतु फण्ड की व्यवस्था करा रहे हैं, इसी का परिणाम हैं कि विगत सवा दो वर्ष के दौरान कोरबा नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न मदों के अंतर्गत 01 हजार करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये जा चुके हैं। 

उद्योग मंत्री व महापौर ने मेरे वार्ड में कराये 07 करोड़ रू. के कार्य

 इस अवसर पर पूर्व पार्षद एवं वर्तमान पार्षद के प्रतिनिधि  माधव जायसवाल ने अपने उद्बोधन  मे कहा कि मेरे वार्ड क्र. 61 में उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत के द्वारा अल्पकाल में ही 07 करोड़ रूपये के विकास कार्य कराये जा चुके हैं, जिसके लिये मैं उद्योग मंत्री  देवांगन एवं महापौर मती राजपूत को धन्यवाद देता हूॅं, आभार व्यक्त करता हूॅ। उन्हेाने कहा कि अभी करोड़ों रूपये के विकास कार्य और किये जाने हैं, जिनकी स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इसी प्रकार पार्षद मती आरती सिंह ने भी सभा को संबोधित किया तथा लगातार विकास कार्य कराये जाने हेतु उद्योग मंत्री  देवांगन व महापौर मती राजपूत के प्रति आभार व्यक्त किया। 
    
कार्यक्रम के दौरान  पार्षद नरेन्द्र देवांगन, भानुमति जायसवाल, आरती सिंह, राधा महंत, सरोज शांडिल्य, मुकुंद सिंह कंवर, फिरतराम साहू, सुखविंदर कौर, रामाधार पटेल, प्रेमकुमार साहू, सर्वमंगला मण्डल  अध्यक्ष मनीष मिश्रा, दर्री मण्डल अध्यक्ष मनोज लहरे, माधव जायसवाल, ईश्वर साहू, नरेन्द्र पाटनवार, रामेश्वर वैष्णव, माखन यादव, देवकी साहू, सुरेन्द्र राजवाडे़, राहुल वास, मोनू बरेठ, अनिल यादव, मनोज राजपूत, जोन कमिश्नर लीलाधर पटेल, सहायक अभियंता रमेश सूर्यवंशी, यशवंत जोगी, प्रमोद जगत, नोहर सिंह गोस्वामी, रमाबाई, प्रेमाबाई आदि के साथ काफी संख्या में आमनागरिकगण उपस्थित थे।

सहकारिता विभाग में सम्मान समारोह आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने दी शुभकामनाएं

रायपुर

आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ श्री महादेव कावरे (आईएएस) के सेवानिवृत्त होने पर आज नवा रायपुर में भावभीनी विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ एवं अपेक्स बैंक एम्प्लाइज यूनियन द्वारा आयोजित इस समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व तथा जनहितकारी कार्यों को स्मरण करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी।

बीजापुर जिले के मूल निवासी श्री महादेव कावरे की प्रारंभिक शिक्षा बीजापुर में हुई। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों से की और रक्षा, रेलवे तथा राज्य प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। वे एसडीएम, एनआरडीए महाप्रबंधक, बेमेतरा एवं जशपुर के कलेक्टर तथा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

इसके अलावा उन्होंने सचिव आवास एवं पर्यावरण, सचिव आबकारी, गृह विभाग तथा संचालक कोष एवं लेखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं देकर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सहकारिता विभाग में उनके कार्यकाल को पारदर्शिता, नवाचार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा।

सम्मान समारोह में सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त एवं अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री कावरे के प्रशासनिक योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं सफल भविष्य की कामना की।

छत्तीसगढ़ का स्मार्ट पंजीयन मॉडल बना सुशासन की नई पहचान

रायपुर

छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।

कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही प्रक्रिया केवल 15 से 20 मिनट में पूरी हो रही है। इससे नागरिकों के समय, धन और ऊर्जा तीनों की बड़ी बचत हो रही है।

राज्य सरकार ने अगले एक वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी 119 पंजीयन कार्यालयों को स्मार्ट एवं विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले चरण में नवा रायपुर सीबीडी बिल्डिंग, बेबीलॉन टॉवर रायपुर, राम बिजनेस पार्क, सड्डू, कलेक्ट्रेट परिसर रायगढ़, दुर्ग, बिलासपुर, कुनकुरी, अभनपुर तथा तिल्दा सहित 10 प्रमुख कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है।

इन नए स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में अब नागरिकों को वेटिंग लाउंज, वातानुकूलित सुविधा, स्वच्छ एवं व्यवस्थित परिसर, निःशुल्क वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, हेल्प डेस्क तथा प्री-प्रेजेंटेशन काउंटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे पंजीयन कार्यालय अब किसी आधुनिक सेवा केंद्र की तरह दिखाई देने लगे हैं।

रायगढ़ के लाभार्थी  आशीष अग्रवाल ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि, पहले यहां आने पर निराशा महसूस होती थी, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल गया है। बैठने की अच्छी व्यवस्था है, एसी लगा है, ठंडे पानी की सुविधा है और पूरा वातावरण बेहतर हो गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

डिजिटल तकनीक के उपयोग से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। टोकन सिस्टम लागू होने से भीड़ और अव्यवस्था कम हुई है, वहीं बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से अतिरिक्त खर्च पर रोक लगी है। अब नागरिकों को व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, कैशलेस भुगतान, खसरा नंबर के माध्यम से संपत्ति की ऑनलाइन जानकारी तथा डिजीलॉकर जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं, जिससे दस्तावेज तुरंत और सुरक्षित रूप से उपलब्ध हो रहे हैं।

यह पूरी व्यवस्था तेजी से पेपरलेस और डिजिटल मॉडल की ओर बढ़ रही है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के विजन को धरातल पर उतारने का प्रभावी उदाहरण बन गया है।

छत्तीसगढ़ आज पुराने, जटिल और फाइलों के बोझ वाले सिस्टम को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक डिजिटल प्रशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य का यह स्मार्ट पंजीयन मॉडल न केवल प्रदेश में सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।

महिलाओं और गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान

शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।

वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर

रायपुर

 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उद्यमों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप 

12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन शासन की वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय तथा संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर

समूह को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इससे समूह की विश्वसनीयता बढ़ी और नए बाजारों के द्वार खुले।

38.90 लाख रूपए का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे सदस्यों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा
जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम है।

हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपए वार्षिक

इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य समूहों के लिए प्रेरणा

हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह सफलता आज पूरे प्रदेश और देश के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई

पितृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DNA टेस्ट को बताया न्याय के लिए जरूरी

महासमुंद.

महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पलसापाली से जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका समाधान किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायहित में वैज्ञानिक जांच आवश्यक हो जाती है।

यह मामला कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। विवाद उस युवक द्वारा दायर दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें उसने स्वयं को संबंधित व्यक्ति का पुत्र बताते हुए संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया था। युवक की माता का कहना था कि वर्ष 1999 में दोनों के बीच संबंध बने थे, जिसके बाद युवक का जन्म हुआ। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति लगातार पितृत्व से इंकार करता रहा। मामले में पहले भरण-पोषण को लेकर भी कई कानूनी कार्यवाहियां हुई थीं। निचली अदालतों और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पितृत्व का स्पष्ट निर्धारण डीएनए परीक्षण के बिना संभव नहीं है। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए सैंपल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से कहा गया कि लगातार पितृत्व से इंकार किए जाने के कारण सच्चाई सामने लाने का एकमात्र प्रभावी माध्यम डीएनए परीक्षण ही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डीएनए परीक्षण सामान्य रूप से आदेशित नहीं किया जाता, लेकिन जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका उत्तर किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायालय वैज्ञानिक जांच का आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जो विवाद का अंतिम समाधान दे सके। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर कभी सामने नहीं आया, तो संबंधित युवक अपने वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों से वंचित हो सकता है।

निजता के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं होता और न्यायहित में उसका संतुलन दूसरे पक्ष के अधिकारों के साथ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के हितों का संतुलन डीएनए परीक्षण के पक्ष में जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अपील खारिज करते हुए संबंधित दीवानी न्यायालय को डीएनए परीक्षण की तिथि निर्धारित कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से अभिनव श्रीवास्तव व स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल की पुत्री अधिवक्ता बरखा अग्रवाल ने पैरवी की। 

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