दूक छोड़ थामा वॉलीबॉल सुकमा के पुनर्वास केंद्र में गूंजा भारत माता की जय का नारा

रायपुर

 नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं (42 महिलाएं और 71 पुरुष) के जीवन में वास्तव में नया सवेरा आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इनके द्वारा लगाए गए भारत माता की जय के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं।

अनुशासित दिनचर्या और कौशल विकास पर जोर
        
पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी (गार्डनिंग) और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और भोजन तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखाते हैं। समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता से बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है।

अत्याधुनिक हथियारों की जगह हाथों में आई वॉलीबॉल
       
प्रशासन की इस मानवीय पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनके मनोरंजन और खेल की पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने केंद्र में खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी खेल प्रतिभा और किक देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं।

डिजिटल युग से जुड़ाव मनोरंजन के साथ मिले 5G स्मार्टफोन
         

दिनभर की रचनात्मक गतिविधियों और खेल के बाद शाम को सभी युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है। वर्तमान डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5G स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज और नई जानकारियों से सीधे जुड़ पा रहे हैं।

 पुनर्वास का एक अनुकरणीय मॉडल
         
सुकमा जिला पुनर्वास केंद्र का यह मानवीय और विकासात्मक मॉडल साबित करता है कि यदि सही दिशा, उचित संसाधन और संवेदनशीलता मिले, तो मुख्यधारा से भटके हुए युवाओं को भी परिष्कृत कर देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।

मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सीएम हेल्पलाइन (1076) के नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण संपन्न

रायपुर

सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर
        
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव  राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
        
अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया।

इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत
         
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव  मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।

नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसाल

रायपुर

पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर जब कोई किसान आधुनिक तकनीकों का हाथ थामता है, तो वह न सिर्फ अपनी तकदीर बदलता है बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज क्षेत्र में ऐसी ही एक अभिनव मिसाल बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरक (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) का लगातार उपयोग कर वे उन्नत और स्मार्ट खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

परिवहन के खर्च और मेहनत से मिली बड़ी राहत       

कृषक शैलेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक बोरी वाले खादों को दुकान से खेत तक लाने (परिवहन) तथा उनके छिड़काव में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया था। कृषि विभाग की सलाह पर जब उन्होंने नैनो तकनीक को अपनाया, तो इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले और संतोषजनक रहे। शैलेंद्र बताते हैं कि नैनो उर्वरक बाजार में पारंपरिक खाद की तुलना में बेहद कम दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती के शुरुआती खर्च में ही बड़ी बचत हो जाती है।

नैनो उर्वरक के प्रमुख व्यावहारिक लाभ        

शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जहाँ पहले भारी-भरकम बोरियों को ढोने और संभालने में किसानों का पसीना छूट जाता था, वहीं अब महज आधे लीटर की छोटी बोतलें आसानी से जेब या थैले में रखकर खेत तक ले जाई जा सकती हैं। पानी में घोलकर फसलों पर सीधे छिड़काव करने से पौधों को पोषक तत्व सीधे और सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती। इस तकनीक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है और प्रति एकड़ पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस वर्ष भी नैनो तकनीक पर ही भरोसा
        
अपनी इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर शैलेंद्र ने इस वर्ष भी अपनी फसलों में पूरी तरह से केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का ही उपयोग करने का निर्णय लिया है। लटुवा के इस जागरूक किसान की यह अनूठी पहल आज पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों को आधुनिक, कम लागत वाली और आत्मनिर्भर खेती की एक नई राह दिखा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की इस सफलता को रोल मॉडल के रूप में पेश कर अन्य ग्रामीण किसानों को नैनो तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।

सूरजपुर में ’मुस्कान समूह की महिलाओं ने बोटिंग से बदली अपनी तकदीर’

सूरजपुर/रायपुर.

छत्तीसगढ़ (या अन्य स्थानीय राज्यों) के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं ने जलाशयों/तालाबों के प्रबंधन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों का सफल संचालन कर महिला सशक्तिकरण की एक अनूठी मिसाल पेश की है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं जल स्रोतों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

सूरजपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम से निर्मित सुंदर जलाशय आज न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन चुका है। यहाँ मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बोटिंग गतिविधि की शुरुआत कर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी है।

’सामूहिक प्रयास से मिला रोजगार का नया अवसर’
समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह एवं सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में इस 10 सदस्यीय समूह ने स्थानीय पर्यटन से जुड़कर स्वरोजगार का एक शानदार अवसर तैयार किया है। जलाशय का लुत्फ उठाने आने वाले पर्यटकों के लिए यहाँ बोटिंग सुविधा शुरू की गई है, जिसकी टिकट दर 50 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित है।

’चुनौतियों को बनाया सफलता का रास्ता’
शुरुआती दौर में इन ग्रामीण महिलाओं के सामने संसाधनों की कमी, तकनीकी ज्ञान का अभाव और संचालन संबंधी कई बड़ी चुनौतियां थीं। इसके बावजूद, समूह की एकजुटता, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने इन बाधाओं को अवसरों में बदल दिया। महिलाओं ने किसी बाहरी मदद पर निर्भर रहने के बजाय, बोटिंग का संचालन, पर्यटकों की सुरक्षा और पूरे परिसर का प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं संभालते हुए अपने इस कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है।

’आर्थिक मजबूती और बढ़ता आत्मविश्वास’
इस सराहनीय पहल के माध्यम से समूह अब तक 74 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर चुका है। इससे न केवल समूह से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज ये महिलाएं न केवल अपने परिवार के भरण-पोषण में हाथ बंटा रही हैं, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

’महिला उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण’
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह गौरवशाली उपलब्धि स्पष्ट करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर, उचित सहयोग और एक मंच मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का नया अध्याय लिख सकती हैं। पिलखा जलाशय में संचालित यह बोटिंग गतिविधि आज ग्रामीण महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण है, जो स्थानीय पर्यटन को भी एक नई पहचान दे रही है।

रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान

रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान

सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।

कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

’नैनो उर्वरकों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा-कृषक छेदीलाल’

रायपुर.

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है।

ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं।

’आधुनिक खेती से समृद्ध हो रहे कृषक छेदीलाल’
पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक श्री छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। श्री उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे।

’नैनो उर्वरकों के चमत्कारी परिणाम’
कृषक उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है।
’मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार’
उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार, पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत

मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार, पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत

रायपुर 
कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।

यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।

शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।

आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद

खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद

रासायनिक खाद छोड़ जैविक खेती की ओर बढ़े, अन्य किसानों से भी की जैविक खेती अपनाने की अपील

रायपुर 
खेती में रासायनिक खादों के बेहिसाब प्रयोग से मिट्टी की कम होती उपजाऊ क्षमता के बीच सरगुजा जिले में अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लब्जी, नावापारा के एक प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने एक नई और सकारात्मक राह चुनी है। 6 एकड़ कृषि भूमि के मालिक धनेश्वर अब रासायनिक खादों का मोह छोड़कर पूरी तरह से जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा चुके हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन ने दिखाई सही राह
धनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि वे पहले अपनी खेती में केवल रासायनिक खादों का ही प्रयोग करते थे, जिससे हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और जमीन की उपजाऊ शक्ति लगातार कम हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क किया और अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराया। परीक्षण रिपोर्ट में मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए ’नील हरित शैवाल’ (Blue-Green Algae) से खेती करने की तकनीकी सलाह दी।

टैंक बनाकर शुरू किया नील हरित शैवाल का उत्पादन
कृषि विभाग के मार्गदर्शन पर अमल करते हुए धनेश्वर जी ने नवाचार किया और अपने घर के बाड़ी में ही एक टैंक का निर्माण कर नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस टैंक से लगभग 25 किलो नील हरित शैवाल का उत्पादन प्राप्त होगा। इसे खेतों में डालने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी और जमीन की सेहत में सुधार आएगा।

भविष्य और स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती है जरूरी
जैविक खेती के दूरगामी फायदों का उल्लेख करते हुए धनेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह कदम केवल वर्तमान फसल को बचाने के लिए नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए भी है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से जमीन उपजाऊ बनती है और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरने से फसल उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी और शुद्ध व पौष्टिक आहार मिलेगा।

अन्य किसानों से की अपील
पर्यावरण और खेत बचाओ अभियान की इस मुहिम में जुटे धनेश्वर प्रसाद का मानना है कि जैविक खेती को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के अन्य कृषक बंधुओं से भी अपील की है कि वे भी रासायनिक खेती का त्याग कर जैविक खेती को अपनाएं और अपनी खेती, मिट्टी और आने वाली पीढ़ी को बचाएं।

बिलासपुर में खाद की कोई कमी नहीं, समितियों और विक्रेताओं के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

बिलासपुर.

खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर बिलासपुर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है। उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को परेशानी न हो।

कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।

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