अब न्याय होगा ऑनलाइन: छत्तीसगढ़ की राजस्व ई-कोर्ट परियोजना बनी डिजिटल सुशासन की नई मिसाल

  • अब न्याय होगा ऑनलाइन: छत्तीसगढ़ की राजस्व ई-कोर्ट परियोजना बनी डिजिटल सुशासन की नई मिसाल
  • डिजिटल क्रांति से बदल रही है राजस्व न्याय व्यवस्था

विशेष लेख

                 भारत तेजी से डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ रहा है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने राजस्व प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और आमजन के लिए सहज बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई “राजस्व ई-कोर्ट परियोजना” अब केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल, त्वरित और भरोसेमंद बनाने वाला प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है।

        वर्षों तक राजस्व मामलों में आम लोगों को तहसील, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फौती प्रकरण, खाता सुधार या भूमि विवाद जैसे मामलों में पेशी की तारीख जानने, आदेश की प्रति लेने या केस की स्थिति समझने में समय, धन और ऊर्जा तीनों की भारी खपत होती थी। कई बार बिचौलियों और भ्रष्टाचार का सामना भी करना पड़ता था। लेकिन अब वही पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ चुकी है।

        छत्तीसगढ़ की ई-कोर्ट परियोजना ने राजस्व न्यायालयों की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलकर उसे “पेपरलेस”, “स्मार्ट” और “जनकेंद्रित” बना दिया है। नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर और राजस्व मंडल तक की न्यायिक प्रक्रिया अब ऑनलाइन संचालित हो रही है। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

ई-कोर्ट व्यवस्था एक प्रभावी समाधान-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

        मुख्यमंत्री  ने राजस्व ई-कोर्ट परियोजना को सुशासन और डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जनता के लिए सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

       राजस्व मामलों में वर्षों से चली आ रही जटिलताओं को समाप्त करने के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। अब नागरिकों को छोटी-छोटी जानकारियों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार न्याय प्रक्रिया को लोगों के मोबाइल तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

         उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ने से भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका स्वतः समाप्त होगी तथा आम लोगों का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, “ई-गवर्नेंस केवल तकनीक नहीं, बल्कि जनता को सम्मानपूर्वक और समयबद्ध सेवाएं देने का माध्यम है।

पारदर्शिता और जवाबदेही की नई व्यवस्था

      ई-कोर्ट प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आवेदन प्राप्त होते ही उसका ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है और तत्काल डिजिटल पावती जारी होती है। इससे आवेदक को यह भरोसा मिल जाता है कि उसका आवेदन रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है और अब उसे किसी कर्मचारी या दलाल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।

       इसके बाद की पूरी प्रक्रिया—जैसे नोटिस जारी करना, इश्तहार प्रकाशित करना, पक्षकारों को सूचना भेजना, सुनवाई की तारीख तय करना और अंतिम आदेश पारित करना सभी ऑनलाइन दर्ज होते हैं।प्रत्येक कार्रवाई डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहती है, जिससे किसी भी स्तर पर हेरफेर की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।

         ई-कोर्ट पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे यह देख सकते हैं कि उनके मामले में पिछली तारीख पर क्या कार्यवाही हुई, अगली पेशी कब है और आदेश जारी हुआ है या नहीं। इससे न्यायालयों के बाहर लगने वाली भीड़ और अनावश्यक भागदौड़ में उल्लेखनीय कमी आई है।

किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए बड़ी राहत

        राजस्व मामलों का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भू-स्वामियों पर पड़ता है। पहले किसानों को एक छोटी सी जानकारी के लिए भी पूरे दिन का समय निकालकर तहसील मुख्यालय जाना पड़ता था। कई बार केवल अगली तारीख जानने में ही मजदूरी और किराए का नुकसान हो जाता था।

अब ई-कोर्ट व्यवस्था ने यह परेशानी काफी हद तक समाप्त कर दी है। किसान अपने गांव के लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या मोबाइल फोन के माध्यम से ही अपने प्रकरण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिल रही है।

       डिजिटल न्याय व्यवस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के प्रति विश्वास को भी बढ़ाया है। जब लोगों को अपने आवेदन की ऑनलाइन पावती और हर कार्रवाई की जानकारी समय पर मिलने लगती है, तो पारदर्शिता स्वतः स्थापित होती है।

विवादित जमीनों की जानकारी अब सार्वजनिक

       ई-कोर्ट परियोजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विचाराधीन भूमि विवादों की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। इससे जमीन खरीदने वाले लोग पहले ही जांच कर सकते हैं कि संबंधित खसरा नंबर पर कोई विवाद या न्यायालयीन प्रकरण लंबित तो नहीं है।
       यह व्यवस्था फर्जीवाड़े, अवैध बिक्री और धोखाधड़ी रोकने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। पहले कई लोग विवादित भूमि खरीदकर वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर काटते रहते थे, लेकिन अब पारदर्शी ऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण ऐसी घटनाओं में कमी आई है।

तकनीक के सहारे मजबूत हुआ प्रशासन

      राजस्व ई-कोर्ट प्रणाली के सफल संचालन के लिए प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में कंप्यूटर, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे न्यायालयों के कार्य निष्पादन की गति बढ़ी है और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हुई है।
       डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित सर्वर में संग्रहीत होने से अब फाइलों के गुम होने, फटने या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसी समस्याएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं। प्रशासनिक निगरानी भी आसान हुई है क्योंकि उच्च अधिकारी किसी भी न्यायालय की कार्यवाही ऑनलाइन मॉनिटर कर सकते हैं।

“मोबाइल में कोर्ट” की दिशा में बड़ा कदम

      छत्तीसगढ़ की यह पहल वास्तव में “मोबाइल में कोर्ट” की अवधारणा को साकार करती दिखाई देती है। अब नागरिकों को केवल जानकारी लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। आदेश की कॉपी डाउनलोड करने से लेकर केस की स्थिति जानने तक अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
     ई-कोर्ट व्यवस्था ने यह साबित किया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और तकनीक का सही समन्वय हो, तो शासन को वास्तव में जनसुलभ बनाया जा सकता है। यह पहल “ई-गवर्नेंस” को “स्मार्ट गवर्नेंस” में बदलने का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

सुशासन की दिशा में प्रभावी पहल

      छत्तीसगढ़ सरकार की राजस्व ई-कोर्ट परियोजना केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि आम जनता को न्याय व्यवस्था से सीधे जोड़ने का अभिनव प्रयास है। इसने प्रशासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम की है तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और भरोसेमंद बनाया है।
     डिजिटल इंडिया के इस दौर में छत्तीसगढ़ की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। यह परियोजना दर्शाती है कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधाएं बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि शासन को अधिक उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
      राजस्व न्यायालयों की यह डिजिटल यात्रा वास्तव में “गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” के सपने को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।जहां न्याय, पारदर्शिता और सुविधा अब लोगों की उंगलियों पर उपलब्ध है।

विष्णु प्रसाद वर्मा
                सहायक संचालक

अवैध रेत उत्खनन पर राज्यपाल रमेन डेका सख्त

अवैध रेत उत्खनन पर राज्यपाल रमेन डेका सख्त

बोलेः नदियों के अस्तित्व से खिलवाड़ मंजूर नहीं

रायपुर 
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेश की नदियों और बड़े नालों में हो रहे अवैध व बेतरतीब रेत उत्खनन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पर्यावरण और जल संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस पर तत्काल व प्रभावी रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि रेत राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण के लिए एक अनिवार्य खनिज है, परंतु इसके अनियंत्रित और अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँच रही है।

        लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस संवेदनशील विषय पर विस्तृत चर्चा की और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में रेत खनन पूरी तरह से वैज्ञानिक, सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि विकास की रफ्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक आदर्श संतुलन बना रहे।

अनियंत्रित खनन से पर्यावरण और भू-जल स्तर को खतरा

          राज्यपाल ने अवैध उत्खनन से होने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि अंधाधुंध खुदाई के कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। नदी के तल में अत्यधिक गहराई तक खुदाई होने से उनकी जलधारण क्षमता घट रही है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर भू-जल स्तर पर पड़ रहा है। नदी तटों के तीव्र कटाव की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जलस्रोत सूख रहे हैं और जलीय जैव विविधता के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नदियों व बड़े नालों की जल क्षमता को बनाए रखने तथा भू-जल स्तर में सुधार के लिए अब दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।

आई आई टी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराया जाएगा वैज्ञानिक सर्वे

          भविष्य की कार्ययोजना पर बात करते हुए राज्यपाल डेका ने निर्देश दिए कि रेत खनन से प्रभावित क्षेत्रों का गहन वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। इसके लिए आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि खनन के सटीक आकलन, तकनीकी अध्ययन और सर्वे के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी) जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग लिया जा सकता है।

पारदर्शी व्यवस्था और कड़ी निगरानी के निर्देश

         राज्यपाल ने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए रेत बेहद जरूरी है, लेकिन इसका दोहन निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने खनिज विभाग को निर्देशित किया कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाए। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संपूर्ण खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की

रायपुर
राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील ने सौजन्य भेंट की। भेंट के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्याे की प्रगति से राज्यपाल को अवगत कराया।

बीज उत्पादन योजना के लिए 10 से 24 तक होंगे पंजीयन, किसान रखें जरूरी दस्तावेज तैयार

जांजगीर-चांपा.

खरीफ वर्ष 2026 में कृषकों के प्रक्षेत्र पर उत्पादन कार्यक्रम के तहत फसल पंजीयन किया जाना है. बीज उत्पादन कार्यक्रम का आयोजन 10 जून से 24 जून तक जांजगीर-चांपा एवं सक्ती जिले के सभी विकास खंडों में आयोजित की जाएगी.

उप प्रबंधक व बीज प्रबंधक नम्रता तिवारी ने बताया कि बीज उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत पंजीयन कार्य विकासखंड बम्हनीडीह में 10 जून को, अकलतरा विकासखंड में 11 जून को, पामगढ़ विकासखंड में 12 जून को, बलौदा विकासखंड में 15 व 16 जून को, नवागढ़ विकासखंड में 17 व 18 जून को प्रातः 10 बजे से सायं 05.30 बजे तक बीज उत्पादन कार्यक्रम आयोजन कर पंजीयन कार्य किया जाएगा. सक्ती जिले अंतर्गत विकासखंड सक्ती में 19 जून को, डभरा ब्लाक में 22 जून को जैजैपुर ब्लाक में 23 जून को एवं मालखरौदा में 24 जून को प्रातः 10 बजे से सायं 5.30 बजे तक बीज उत्पादन कार्यक्रम आयोजन कर पंजीयन कार्य किया जाएगा. कृषकों को पंजीयन हेतु किसान आईडी एग्रीटेक क्रमांक, पासपोर्ट साईज 1 नवीन कलर फोटो, बी-1 एवं खसरा की नकल संबंधित पटवारी से सत्यापित कराकर एवं आधार कार्ड, पैन कार्ड, चालू मोबाईल नम्बर तथा बैंक पास बुक की छायाप्रति पंजीयन के समय एक प्रति के साथ पंजीयन कार्यवाही कराना होगा.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार सतर्क

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार सतर्क

प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी

वैश्विक परिस्थितियों के बीच खाद उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम

नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक

रायपुर
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को समय पर खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड तथा जिला प्रशासन के समन्वय से पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

राज्य सरकार ने वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावनाओं को देखते हुए अग्रिम तैयारी की है। उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण, समयबद्ध परिवहन और किसानों तक सुगम वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों, कृषि अधिकारियों, सहकारिता विभाग तथा मार्कफेड को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए सतत निगरानी की जा रही है।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है। जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयास से केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य  आबंटित हुआ हजिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश के गोदामों एवं समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।

कृषि विभाग के संचालक राहुल देव ने बताया कि किसानों को पर्याप्त खाद्य मिले इसके लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि जून 2026 अंतर्गत 1 जून 2026 की स्थिति में रेक प्वाइंट तिल्दा, जिला रायपुर में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, रेक प्वाइंट बेलसोंडा महासमुंद 1316 मीट्रिक टन यूरिया इसी प्रकार रेक प्वाइंट खरसिया, जिला रायगढ़ 2646 मीट्रिक टन यूरिया और रेक प्वाइंट जिला बालोद में 1319 मीट्रिक टन यूरिया, इस तरह कुल 6600 मीट्रिक टन यूरिया की खेप आने वाली हैं। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। 

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गरियाबंद जिले में वर्तमान में 17,818 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक तथा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसी प्रकार खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की मुकुरमुडा समिति में खरीफ सीजन के लिए 362 मीट्रिक टन उर्वरकों का अग्रिम भंडारण किया गया है। किसानों को गांवों के निकट ही खाद उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था भी की गई है। वहीं मुंगेली जिले में यूरिया वितरण के दौरान तकनीकी प्रक्रिया के कारण उत्पन्न हुई अस्थायी स्थिति का तत्काल समाधान कर प्रशासन एवं कृषि विभाग की निगरानी में किसानों को व्यवस्थित रूप से खाद उपलब्ध कराया गया। बस्तर जिले में खरीफ 2026 हेतु उर्वरक भंडारण एवं वितरण का कुल लक्ष्य 46,050 मीट्रिक टन निर्धारित है, जिसके विरुद्ध वर्तमान में सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं के पास 18,341 मीट्रिक टन तथा मार्कफेड एवं थोक विक्रेताओं के पास 11,378 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इस प्रकार जिले में कुल 29,719 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 64 प्रतिशत है।

रायपुर जिले में यूरिया की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन है, जबकि संग्रहण केंद्रों से कुल 10,732 मीट्रिक टन यूरिया भंडारित किया गया है। इसी प्रकार डी.ए.पी. की समितियों में वर्तमान उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन है, जबकि कुल भंडारित मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है।  किसानों की सुविधा और सुचारू वितरण व्यवस्था के लिए भूमि की उपलब्धता के आधार पर यूरिया के वितरण की किश्तें भी निर्धारित की गई हैं। इसके तहत ढाई एकड़ तक की भूमि वाले सीमांत कृषकों को निर्धारित यूरिया की मात्रा एकमुश्त प्रदाय की जाएगी। ढाई एकड़ से पांच एकड़ तक की भूमि वाले लघु कृषकों को उर्वरक का उठाव दो किश्तों में करने की सुविधा होगी, जबकि पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े कृषकों को यूरिया का प्रदाय तीन किश्तों में सुगमतापूर्वक सुनिश्चित किया जाएगा।

राजनांदगांव जिले में खरीफ वर्ष 2026 हेतु 68690 मेट्रीक टन का लक्ष्य रखा गया है, जिले में अद्यतन सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर 42997 मेट्रीक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें 17559 मेट्रिक टन यूरिया, 4271 मेट्रिक टन डीएपी, 10578 मेट्रिक टन एनपीके, 3471 मेट्रिक टन एमओपी एवं 7119 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध हैं, जो गतवर्ष इसी अवधि की तुलना से 43ः अधिक हैं। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है, जिले में 10874 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं, जिसमें 7193 मेट्रिक टन यूरिया, 1807 मेट्रिक टन डीएपी, 4669 मेट्रिक टन एनपीके, 1322 मेट्रिक टन एमओपी एवं 2214 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है तथा जिले में उर्वरकों की कमी नहीं हैं।

कोरिया जिले में सभी उर्वरकों को मिलाकर कुल 12,150 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 6,196 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। लक्ष्य की तुलना में लगभग 5,530 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण शेष है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी समितियों में खाद भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। खरीफ 2026 के लिए बिलासपुरं जले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

जिला कोरबा में 1 अप्रैल से 31 मई 2026 तक कुल 2101.85 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया गया है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में सर्वाधिक 1165.85 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया। इसके अलावा 310.85 मीट्रिक टन डीएपी, 67.75 मीट्रिक टन एमओपी, 437.70 मीट्रिक टन एसएसपी तथा 119.70 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक किसानों को उपलब्ध कराया गया। अप्रैल माह में कुल 191.51 मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किया गया, जबकि मई माह में वितरण बढ़कर 1910.34 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

धमतरी जिले में वर्तमान स्थिति के अनुसार कुल 19,358 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया गया है, जिसमें से 4,318 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों को वितरण किया जा चुका है। वितरण उपरांत विभिन्न उर्वरकों का कुल 15,040 मीट्रिक टन भण्डार उपलब्ध है, जिससे किसानों की आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। उपलब्ध भण्डारण में यूरिया 8,017 मीट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) 3,005 मीट्रिक टन, पोटाश 1,084 मीट्रिक टन, डीएपी 2,169 मीट्रिक टन तथा एनपीके 5,083 मीट्रिक टन शामिल है। वर्तमान तक यूरिया 1,902 मीट्रिक टन, एसएसपी 588 मीट्रिक टन, पोटाश 216 मीट्रिक टन, डीएपी 572 मीट्रिक टन एवं एनपीके 1,040 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सभी जिलों में सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण कर किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरण किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक एवं प्रभावी उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को इनके लाभों की जानकारी दी जा रही है, ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए कृषि लागत में कमी और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक है तथा किसानों को उनकी आवश्यकता और सहमति के आधार पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और भविष्य की संभावित आपूर्ति चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र को तैयार करना है।कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में उर्वरक वितरण एवं भंडारण में अनियमितता पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित समिति प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है तथा विभागीय जांच भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए उर्वरकों की उपलब्धता, परिवहन, भंडारण और वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक किसान को समय पर आवश्यक खाद एवं कृषि आदान उपलब्ध हो और खेती-किसानी का कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सके। प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने तथा कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

बिलासपुर में खाद माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में पकड़ा गया अवैध स्टॉक

बिलासपुर.

बिलासपुर जिले में खाद की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन का एक्शन जारी है. कार्रवाई के दौरान मल्हार और सेन्दरी में छापेमारी की. इस दौरान बड़ी मात्रा में छिपाकर रखा गया खाद्द जब्त किया गया. कार्रवाई के दौरान मल्हार स्थित अग्रवाल खाद भंडार से यूरिया, एनपीके और एसएसपी खाद बरामद की गई, जबकि सेन्दरी के बंसल फर्टिलाइजर में छिपाकर रखी गई खाद भी जब्त की गई.

जांच में अवैध भंडारण पाए जाने पर संबंधित गोदामों को सील कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस कार्रवाई के बाद से खाद कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है.

प्रशासन ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए शनिवार और रविवार को भी सहकारी समितियां खुली रखने का निर्णय लिया है. खरीफ सीजन के लिए जिले को 68,950 मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य मिला है. अधिकारियों के अनुसार जिले में यूरिया, डीएपी, पोटाश, एनपीके और एसएसपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.

​पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया वैज्ञानिक दृष्टिकोण: केरलापाल के कालेंद्र कुमेटी बने किसानों के रोल मॉडल

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​नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से बचा रहे हैं जमीन की उर्वरता, विविधीकरण से बदली किस्मत


रायपुर

    ​छत्तीसगढ़ के दूरदराज के गांवों में अब आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की बयार बहने लगी है। इसकी जीती-जागती मिसाल पेश की है, ग्राम केरलापाल के प्रगतिशील किसान कालेंद्र कुमेटी ने। कभी पारंपरिक खेती के कारण आर्थिक तंगी और बढ़ती लागत से जूझने वाले कालेंद्र आज अपनी मेहनत, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

​संघर्ष से सफलता तक का सफर

     ​कुछ वर्ष पहले तक कालेंद्र कुमेटी भी अन्य किसानों की तरह पारंपरिक ढर्रे पर खेती कर रहे थे। लागत लगातार बढ़ रही थी और उत्पादन उस अनुपात में बेहद कम हो रहा था, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल था। लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने लीक से हटकर कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों की बारीकियों को समझा।

​नैनो टेक्नोलॉजी और समन्वित कृषि पर फोकस

    ​कालेंद्र की सफलता का सबसे बड़ा राज रासायनिक खादों का अनियंत्रित उपयोग बंद कर वैज्ञानिक विकल्पों को चुनना रहा। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के लिए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग सबसे बेहतर है। इससे न केवल फसलों को भरपूर पोषण मिलता है, बल्कि जमीन की प्राकृतिक उर्वरकता (उपजाऊ क्षमता) भी नष्ट नहीं होती।
      ​इसके अलावा, उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ (समन्वित कृषि) को अपनाया। धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वे अब सब्जियों, फलदार पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी (Horticulture) भी कर रहे हैं।

​जल संरक्षण और मिट्टी परीक्षण को दी प्राथमिकता

    ​कालेंद्र अपने खेतों में पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपक सिंचाई) का उपयोग कर रहे हैं। इससे पानी की भारी बचत हो रही है और पौधों को जरूरत के अनुसार ही नमी मिल रही है। वे नियमित रूप से अपने खेतों का मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) करवाते हैं, ताकि जमीन में जिस पोषक तत्व की कमी हो, केवल वही खाद दी जा सके।

​गांव में आया सकारात्मक बदलाव

     ​कालेंद्र की इस सफलता ने ग्राम केरलापाल की सूरत बदल दी है। उनसे प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी अब आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं। कालेंद्र खुद आगे बढ़कर अपने अनुभव और ज्ञान को साथी किसानों के साथ साझा करते हैं। ​कालेंद्र कुमेटी ने कहा कि अगर खेती को पारंपरिक ढर्रे के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नई तकनीक और सीखने की इच्छाशक्ति के साथ किया जाए, तो यह घाटे का सौदा नहीं बल्कि बेहद लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।
    ​कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी कालेंद्र के इस जज्बे और दूरदर्शिता की सराहना की है, जो आज छत्तीसगढ़ के समृद्ध किसान की एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।

गिधौरी के लक्ष्मी पेट्रोलियम में समान्य रूप से हो रहा है पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति

गिधौरी के लक्ष्मी पेट्रोलियम में समान्य रूप से हो रहा है 
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति

टैंकर अनलोडिंग के दौरान कुछ घंटों के लिए लगी थी वाहनों की कतार
वर्तमान में स्थिति पूरी तरह सामान्य

      रायपुर, 
 बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिधौरी स्थित लक्ष्मी पेट्रोलियम में समान्य रूप से डीजल की आपूर्ति हो रही है। टैंकर अनलोडिंग के दौरान कुछ घंटों के लिए वाहनों की कतार लगी थी वर्तमान में पेट्रोल पंप पर पेट्रोल एवं डीजल का वितरण पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।

    बलौदाबाजार-भाटापारा जिला से प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्ष्मी पेट्रोल पंप के प्रबंधक श्री हेमंत पटेल से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि 22 मई 2026 को ईंधन टैंकर के अनलोडिंग कार्य के दौरान कुछ घंटों के लिए वितरण प्रभावित हुआ था, जिसके कारण पेट्रोल पंप पर वाहनों की कतार लग गई थी। हालांकि टैंकर से ईंधन उतारने की प्रक्रिया पूर्ण होते ही वितरण कार्य पुनः प्रारंभ कर दिया गया और कुछ ही घंटों में सभी उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध करा दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में लक्ष्मी पेट्रोलियम सहित क्षेत्र के अन्य पेट्रोल पंपों पर भी पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है तथा मांग के अनुरूप नियमित आपूर्ति की जा रही है। किसी प्रकार की कमी अथवा संकट की स्थिति नहीं है। एक जून को खाद्य निरीक्षक द्वारा लक्ष्मी पेट्रोलियम, गिधौरी का स्थल निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पेट्रोल पंप पर पेट्रोल एवं डीजल का वितरण सुचारू रूप से जारी है तथा उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। पंप प्रबंधन और कर्मचारियों द्वारा सामान्य रूप से ईंधन वितरण किया जा रहा है।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति नियमित एवं पर्याप्त है। समाचार में वर्णित स्थिति टैंकर अनलोडिंग के दौरान उत्पन्न हुई अस्थायी परिस्थिति थी, जो शीघ्र ही सामान्य हो गई थी। वर्तमान में जिले में कहीं भी ईंधन संकट जैसी स्थिति नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर सामान्य रूप से वितरण कार्य संचालित हो रहा है।

बलरामपुर जिले में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता

बलरामपुर जिले में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता

गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सामान्य 
नागरिकों को नहीं हो रही कोई परेशानी

रायपुर
बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। फ्यूल-गैस जैसी कोई इमरजेंसी नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि जिले में निर्बाध रूप से इंधन की आपूर्ति हो रही है, किसी भी नागरिक को कोई परेशानी नहीं हो रही है। जिले में किसी भी प्रकार की ईंधन या गैस की किल्लत नहीं है तथा उपभोक्ताओं को नियमित रूप से आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

जिला प्रशासन खाद्य शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में संचालित सभी गैस एजेंसियों के पास घरेलू एवं व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को नियमानुसार नियमित वितरण किया जा रहा है और कहीं भी आपूर्ति बाधित नहीं हुई है।

इसी प्रकार भारतीय तेल निगम (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) एवं भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) सहित विभिन्न तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। मुख्य डिपो से ईंधन के टैंकर लगातार जिले में पहुंच रहे हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था निर्बाध रूप से संचालित हो रही है।

जिला प्रशासन ने बताया कि जिले के किसी भी क्षेत्र में गैस एजेंसियों अथवा पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी, लंबी कतारें या आपूर्ति संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। आम नागरिक, वाहन चालक, किसान एवं अन्य उपभोक्ता सामान्य दिनों की तरह अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर प्राप्त कर रहे हैं। जिला प्रशासन एवं खाद्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकृत स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में पहुंचे 12 करोड़, हजारों परिवारों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बीजापुर.

तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. जिले में संग्रहण सीजन 2026 के तहत 40 हजार से अधिक संग्राहकों ने तेन्दूपत्ता संग्रहित किया. इसके बदले करीब 36 करोड़ रुपये पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना है. पहले चरण में 12 हजार से अधिक संग्राहकों के खातों में 12 करोड़ रुपये ऑनलाइन भेजे गए हैं.

मानसून से पहले भुगतान मिलने से खेती-किसानी की तैयारियों को बल मिलेगा. ग्रामीण परिवार इस राशि का उपयोग कृषि कार्यों और घरेलू जरूरतों में करते हैं. गुडमा, कुटरू, तोयनार और बरदेला समेत कई समितियों के संग्राहकों को भुगतान मिल चुका है. शेष समितियों में सत्यापन और ऑनलाइन प्रविष्टि का काम जारी है. सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया है. सीधे बैंक खातों में राशि पहुंचने से पारदर्शिता भी बढ़ी है. तेन्दूपत्ता आज भी बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है. इस भुगतान से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है.

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