किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस, कृषि मंत्री नेताम ने बासमती धान मिशन की बनाई रणनीति

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।

बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

CM साय बोले- खेती हमारी संस्कृति और पहचान की नींव, ड्रोन तकनीक से बदल रही तस्वीर

रायपुर.

आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।

कृषि योजनाओं से किसानों को मिल रहा आर्थिक संबल
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है।

ड्रोन तकनीक से खेती होगी और आधुनिक
कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

जैविक खेती और नैनो उर्वरकों पर जोर
मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।
किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है।

नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें – मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

40 करोड़ की सरकारी जमीन विवाद में नया मोड़, 52 साल पुरानी रजिस्ट्री की होगी जांच

खैरागढ़.

शहर के बहुचर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और नजूल भूमि विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। करीब 85 हजार वर्गफीट जमीन और 40 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित कीमत से जुड़े इस मामले में 52 साल पुरानी रजिस्ट्री, सरकारी रिकॉर्ड और कथित प्लॉटिंग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं।

1974 की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद
सामने आए दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1974 में प्लॉट क्रमांक 114 और 115 की रजिस्ट्री अवयस्क स्मृति सिंह के नाम की गई थी। रजिस्ट्री में इन भूखंडों का उल्लेख “एडवर्ड पार्क” और “बाड़ी एडवर्ड पार्क” के रूप में दर्ज है। दस्तावेज में तत्कालीन राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह विक्रेता के रूप में दर्ज हैं, जबकि आम मुख्तियार के रूप में रविंद्र बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। क्रेता पक्ष में अवयस्क स्मृति सिंह की ओर से उनकी माता एवं संरक्षिका रश्मि देवी सिंह का नाम दर्ज है। उस समय जमीन का विक्रय मूल्य मात्र 3 हजार रुपए दर्शाया गया था। विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि रजिस्ट्री में शामिल प्रमुख नाम एक ही राजपरिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक भूमि का उल्लेख
मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी अभिलेखों को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 167, 169 और 170 में सड़क, रास्ता, घास भूमि और छोटे झाड़ का जंगल दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं नजूल मेंटेनेंस खसरे में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को “बाड़ी एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” के रूप में दर्ज बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग या पार्क की श्रेणी में थी, तो इसका भूमि उपयोग परिवर्तन कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ? अब तक इससे संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

22 हिस्सों में हुई प्लॉटिंग, 40 करोड़ से अधिक कीमत
संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 85,627 वर्गफीट भूमि विभिन्न लोगों को विक्रय किए जाने का उल्लेख है। जानकारी के मुताबिक इस जमीन को 22 हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की गई। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। यही कारण है कि मामला अब केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक महत्व की बहुमूल्य भूमि से जुड़े बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है मामला
यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक और खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य स्वर्गीय देवव्रत सिंह ने विधानसभा में क्षेत्र में चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच भी हुई थी और कई भूखंडों को अवैध प्लॉटिंग की श्रेणी में चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ मामलों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की गई थी।

छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई, बड़े मामलों में चुप्पी क्यों?
इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर सरकारी जमीन पर छोटे अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो जाता है। सड़क किनारे बनी झोपड़ियों, गुमटियों और छोटे निर्माणों पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं लगाई जाती। लेकिन अब लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, जांच प्रतिवेदन और अन्य दस्तावेज करोड़ों रुपए मूल्य की इस जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोगों का मानना है कि नियमों की सख्ती कमजोर और गरीब लोगों के लिए अलग दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गति धीमी पड़ जाती है।

भूमिस्वामी पक्ष ने रखा अपना पक्ष
भूमिस्वामी पक्ष के प्रतिनिधि रजत भार्गव ने कहा कि उनके पास वर्ष 1974 की विधिवत पंजीकृत रजिस्ट्री, सीमांकन प्रतिवेदन और राजस्व अभिलेख उपलब्ध हैं। उनके अनुसार यह भूमि वर्षों से उनकी पत्नी स्मृति भार्गव के नाम दर्ज है और समय-समय पर उसका सीमांकन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शासन या प्रशासन किसी भी प्रकार की जानकारी मांगता है तो सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। बिना सभी रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के संकेत
मामले को लेकर खैरागढ़ जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि वह कलेक्टर से चर्चा करेंगे और उपलब्ध दस्तावेजों तथा जांच प्रतिवेदन का परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

जांच पर टिकी सबकी नजर
एक तरफ 52 साल पुरानी रजिस्ट्री है तो दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का उल्लेख। एक ओर निजी स्वामित्व का दावा है, तो दूसरी ओर करोड़ों रुपए की प्लॉटिंग और सरकारी जमीन के कथित उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और शासन के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह विवाद सिर्फ जमीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और कानून के समान अनुपालन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

छत्तीसगढ़ में आज निकाय-पंचायत चुनाव परिणाम, 227 पदों की किस्मत का होगा फैसला

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों के आम एवं उप चुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से मतगणना शुरू होगी और इसके साथ ही 5 नगरीय निकाय अध्यक्ष, 71 पार्षद, 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला सामने आने लगेगा।

बता दें कि मतों की गणना प्रदेश के 13 निर्धारित मतगणना केंद्रों में की जाएगी, जहां मतगणना कार्य संपन्न कराने के लिए 395 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों, समर्थकों और राजनीतिक दलों में उत्सुकता चरम पर है। इन चुनावों को स्थानीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनमें कई नवगठित नगर पंचायतों और रिक्त पंचायत पदों के लिए जनप्रतिनिधियों का चुनाव हुआ है। चुनाव परिणाम आने के बाद संबंधित क्षेत्रों में विकास और स्थानीय प्रशासन की नई दिशा तय होगी।

मई में जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम
राज्य निर्वाचन आयोग ने मई में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 1 जून को मतदान कराया गया, जबकि आज यानी 4 जून को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार पूरे चुनावी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी।

5 अध्यक्ष और 71 पार्षद पदों पर सबकी नजर
नगरीय निकाय चुनाव में कुल 5 अध्यक्ष पद और 71 पार्षद पदों के लिए मतदान हुआ था। इनमें नवगठित नगर पंचायतों के चुनाव भी शामिल हैं। राजनांदगांव जिले की घुमका, जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह, सूरजपुर जिले की शिवानंदनपुर और बलौद जिले की पलारी नगर पंचायत के नतीजों पर विशेष नजर रहेगी। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला था।

पंचायतों में भी कई महत्वपूर्ण पदों का फैसला
पंचायत चुनाव में 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए मतदान कराया गया था। कई जगहों पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और ग्रामीण नेतृत्व को लेकर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसका परिणाम आज सामने आएगा।

मतदान में दिखा था जबरदस्त उत्साह
1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। नगरीय निकाय चुनाव में 31,928 मतदाताओं में से 27,006 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत चुनाव में 1,02,797 मतदाताओं में से 79,968 लोगों ने वोट डाले और 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। मतदान के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में 96 और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया था।

राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें
मतगणना को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में उत्सुकता चरम पर है। मतदान के बाद से ही जीत-हार को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कई सीटों पर कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में एकतरफा मुकाबले की भी चर्चा है। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हों, लेकिन इनके परिणामों को राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक ताकत के पैमाने के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में आज आने वाले नतीजों पर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।

खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता से किसानों में उत्साह

रायपुर

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों और सुशासन के परिणामस्वरूप प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियां सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं। किसानों को समय पर आवश्यक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन ने व्यापक और प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इससे किसानों को खेती की तैयारियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। बेहतर प्रबंधन और सरल प्रक्रियाओं के कारण किसान न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि आगामी फसल को लेकर भी आशान्वित और उत्साहित हैं।

फसल विविधीकरण को दे रहे हैं बढ़ावा 
          
कोरबा जिले के ग्राम झगरहा निवासी कृषक श्री रामरतन निकुंज, दादरखुर्द निवासी कृषक श्री लकेश्वर सिंह एवं श्रीमती अंजनी राठिया खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत सहकारी समिति सोनपुरी पहुंचे। यहां उन्होंने शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही कृषि आदान सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपनी आवश्यकता अनुसार खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री प्राप्त की। लगभग 5 से 7 एकड़ भूमि में खेती करने वाले ये किसान कृषि को अपनी आजीविका का प्रमुख आधार मानते हैं। धान उत्पादन के साथ-साथ वे मूंगफली एवं सब्जी की खेती कर फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता 
         

कृषकों ने बताया कि खरीफ सीजन प्रारंभ होने से पहले ही समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे उन्हें आवश्यक कृषि सामग्री के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ा। उन्होंने ढैंचा एवं मूंग बीज सहित आवश्यक उर्वरकों का उठाव किया और कहा कि समय पर कृषि आदान उपलब्ध होने से खेती की तैयारियां व्यवस्थित रूप से पूरी हो रही हैं। किसानों के अनुसार समिति में सामग्री वितरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं सुगम रही, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हुई। साथ ही हरित खाद एवं वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों का रुझान भी लगातार बढ़ रहा है।

आधुनिक तकनीकों के नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से फसल बेहतर 
         
कृषकों ने शासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने से खेती की योजना बनाना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना आसान हुआ है। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वे आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। उन्होंने बीते वर्षों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई तथा पोषक तत्वों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हुआ।

विकास कार्यों में नही होगी कोई कमी -राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर
       
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश की जनता की समस्याओं के त्वरित और मौके पर ही निराकरण के लिए ‘सुशासन तिहार’ के तहत समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को ग्राम छेरकापुर में एक विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरी शंकर अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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शिविर के दौरान राजस्व मंत्री  वर्मा ने क्षेत्र के विकास को गति देते हुए 55 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। साथ ही, विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित किए।
        
राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच सीधे पहुंचकर शासकीय योजनाओं का फीडबैक लेना और समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। हमारा प्रयास है कि युवा, गरीब, बच्चे और किसान,समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़े।

छेरकापुर और सेमरिया को मिलीं ये प्रमुख विकास सौगातें

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राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने क्षेत्र के अधोसंरचना विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सेमरिया में सीसी रोड निर्माण के लिए 30 लाख रुपये और गोड़ा सरस्वती शिशु मंदिर के विकास हेतु 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके साथ ही, छेरकापुर उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, छेरकापुर में मुक्तिधाम निर्माण और सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की।

‘विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी’ से मिल रहा सीधा लाभ

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य आम जनता की तकलीफों का जमीनी स्तर पर समाधान करना है। ‘विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी’ के तहत राज्य सरकार समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रहा है।

‘मोर गाँव मोर पानी 2.0’ और ‘हम होंगे कामयाब 2.0’ की सफलता

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कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और अभियानों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ‘मोर गाँव मोर पानी अभियान 2.0’ के तहत जल संचयन दीदियों और ग्राम पंचायतों के साझा प्रयासों से महज ढाई महीने के भीतर ढाई लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा जारी ‘हम होंगे कामयाब 2.0’ वेब पोर्टल की भी जानकारी दी, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से मिल रही हैं।

हितग्राहियों को मौके पर ही सामग्री, प्रमाण पत्र और स्पोर्ट्स किट का वितरण
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इस समाधान शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया और बड़ी संख्या में हितग्राहियों को सीधे लाभान्वित किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ ही आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल बांटी गई।
     
इसके अलावा, ‘हम होंगे कामयाब’ अभियान 2.0 के तहत युवाओं को जॉब सर्टिफिकेट सौंपे गए। खेल विभाग द्वारा स्थानीय खेल प्रतिभाओं को स्पोर्ट्स किट का वितरण किया गया और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। वहीं, राजस्व विभाग द्वारा ग्रामीणों को स्वामित्व कार्ड और डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन

रायपुर

सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन

सड़क दुर्घटनाओं में पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाना तथा साथ ही एसीटैबुलम (Acetabulum) का फ्रैक्चर होना अत्यंत गंभीर एवं जटिल चोटों में गिना जाता है। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने पर स्थायी विकलांगता, चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई तथा भविष्य में गठिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी प्रकार के एक चुनौतीपूर्ण मामले में सिम्स बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग ने सफल सर्जरी कर 40 वर्षीय अजय पटेल को नया जीवन प्रदान किया।

बिलासपुर निवासी अजय पटेल को 19 अप्रैल 2026 को बिल्हा क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार हेतु सिम्स बिलासपुर लाया गया, जहां जांच में उनकी दाहिनी पेल्विस में सेंट्रल हिप डिसलोकेशन (Right Central Hip Dislocation) के साथ एसीटैबुलम फ्रैक्चर (Acetabular Fracture) पाया गया। यह चोट अत्यंत जटिल मानी जाती है क्योंकि इसमें हिप जॉइंट अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता है तथा उसे घेरने वाली पेल्विस की हड्डी भी क्षतिग्रस्त हो जाती है।

वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर की देखरेख में मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। चोट की गंभीरता एवं भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में विशेष सर्जिकल योजना तैयार की गई।

दिनांक 28 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञ टीम द्वारा सफलतापूर्वक ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन (ORIF) विद राइट एसीटैबुलर रिपेयर एवं ओपन रिडक्शन ऑफ हिप जॉइंट की जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक सी-आर्म (C-Arm) फ्लोरोस्कोपी मशीन की सहायता से हड्डियों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन किया गया, जिससे फ्रैक्चर के टुकड़ों को शारीरिक संरचना के अनुरूप सटीक रूप से स्थापित किया जा सका। सी-आर्म तकनीक के उपयोग से इम्प्लांट की सही स्थिति सुनिश्चित की गई तथा हिप जॉइंट का पूर्ण एनाटॉमिकल रिडक्शन प्राप्त किया गया। टूटे हुए एसीटैबुलम की मरम्मत कर उसे स्थिर किया गया तथा जोड़ को पुनः उसकी सामान्य स्थिति में स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और इसके लिए उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल एवं आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।

ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही। सर्जरी के बाद मरीज को विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत रखा गया, जिससे वह धीरे-धीरे पुनः सामान्य गतिविधियों की ओर अग्रसर हो सका। चिकित्सकों के अनुसार समय पर किए गए ऑपरेशन एवं सटीक एनाटॉमिकल रिडक्शन से भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता बेहतर रहने तथा दीर्घकालिक जटिलताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है।

इस सफलता पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि सिम्स बिलासपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, सी-आर्म आधारित उन्नत ट्रॉमा सर्जरी एवं अनुभवी चिकित्सकों की संयुक्त कार्यप्रणाली के कारण जटिल से जटिल पेल्विस एवं एसीटैबुलर चोटों का सफल उपचार संभव हो रहा है। यह संस्थान की उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

सुशासन तिहार: गोपालपुर समाधान शिविर में पहुंचे प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन, 17 पंचायतों के ग्रामीणों को मिला योजनाओं का लाभ

रायपुऱ

सुशासन तिहार: गोपालपुर समाधान शिविर में पहुंचे प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन, 17 पंचायतों के ग्रामीणों को मिला योजनाओं का लाभ

सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत खैरागढ़ जिले के विकासखंड छुईखदान की ग्राम पंचायत गोपालपुर में आयोजित समाधान शिविर में वाणिज्य, उद्योग तथा श्रम एवं जिले के प्रभारी मंत्री  लखन लाल देवांगन शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण कर आवेदनों के निराकरण की समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रभारी मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब, किसान, श्रमिक और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आवास, सड़क, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में प्रारंभ की गई योजनाओं ने विकास और जनकल्याण को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, बकाया बोनस वितरण, तेंदूपत्ता संग्राहकों को बढ़ा हुआ पारिश्रमिक तथा रामलला दर्शन योजना जैसे वादों को पूरा कर रही है।

 देवांगन ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और प्रशासन को सीधे जनता तक पहुंचाना तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। शिविरों के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी और लाभ प्रदान किए जा रहे हैं तथा प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय स्वयं प्रदेशभर में भ्रमण कर जनसमस्याओं की जानकारी ले रहे हैं और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार आने वाले समय में भी जनहित और विकास के कार्यों को इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाती रहेगी।

जिला पंचायत अध्यक्ष मती प्रियंका खम्हन ताम्रकार ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष  विक्रांत सिंह ने कहा कि इस पहल से ग्रामीणों की मांगों एवं समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित हो रहा है।

कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार-2026 के तहत जिले में अब तक लगभग 22 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत से अधिक का निराकरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नवगठित जिले में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, मीडिया एवं आमजन के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो पाया है।

विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को मिला लाभ

शिविर में 17 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने भाग लिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 5 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास की चाबी प्रदान की गई। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मोमेंटो, पुस्तकें एवं गणवेश वितरित किए। कृषि विभाग ने 5 किसानों को मूंग बीज तथा उद्यानिकी विभाग ने 5 हितग्राहियों को सब्जी मिनी किट प्रदान की।

मत्स्य विभाग ने 2 हितग्राहियों को मछली जाल एवं 2 को आइस बॉक्स वितरित किए। समाज कल्याण विभाग द्वारा 4 श्रवण यंत्र एवं 10 छड़ियां प्रदान की गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 5 सुपोषण किट एवं 5 स्वच्छता किट वितरित कीं, जबकि खाद्य विभाग ने 5 हितग्राहियों को राशन कार्ड प्रदान किए। स्वास्थ्य विभाग ने 10 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त होने पर प्रशस्ति पत्र तथा 3 टीबी मरीजों को पोषण आहार प्रदान किया।

स्वास्थ्य शिविर में 142 मरीजों का उपचार

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित शिविर में कुल 142 मरीजों का उपचार किया गया। 79 लोगों की रक्तचाप एवं शुगर जांच, 26 लोगों की नेत्र जांच, 52 एक्स-रे तथा 15 मलेरिया जांच की गई। शिविर में 112 आभा आईडी, 22 आयुष्मान कार्ड एवं 3 वय वंदन कार्ड बनाए गए। एक कुपोषित बच्चे की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक परामर्श भी दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त 2 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया तथा कोई भी आवेदन लंबित नहीं रखा गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती प्रियंका खम्हन ताम्रकार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  विक्रांत सिंह, पूर्व संसदीय सचिव  कोमल जंघेल, जिला पंचायत सभापति  ललित चोपड़ा, जनपद पंचायत अध्यक्ष मती पुष्पा प्रकाश वर्मा, कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, पुलिस अधीक्षक  लक्ष्य शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रेम कुमार पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

लोकभवन में तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का आयोजन

रायपुर

राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।
           
हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
          
शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।
         
हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं  डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

साय सरकार की बड़ी पहल का असर, महिलाओं के नाम पर हुईं 70% से ज्यादा रजिस्ट्रियां

रायपुर.

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के जमीन पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली भूमि व संपत्ति की रजिस्ट्री (पंजीयन) शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने और 12 प्रतिशत उपकर (Cess) को पूरी तरह समाप्त करने के निर्णय से बड़ा बदलाव आया है।

शासन की इस बड़ी रियायत के चलते बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने की होड़ सी मच गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।

एक महीने में रजिस्ट्री मामलों में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि
जिला पंजीयक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह छूट लागू होने के बाद मात्र एक महीने के भीतर महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्रियों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 जिले के पांचों उप पंजीयक कार्यालयों में महिलाओं के नाम पर कुल 309 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। मई 2026 यह संख्या बढ़कर 445 पहुंच गई, जो अप्रैल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाती है।  

ब्लॉकवार आंकड़ों पर एक नजर (अप्रैल बनाम मई 2026)
रजिस्ट्री शुल्क में कटौती का लाभ उठाने में जिले के सभी क्षेत्र आगे रहे हैं, जिनमें शहरी इलाकों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। उप पंजीयक कार्यालय केवल बलौदाबाजार में अप्रैल 2026 में 78 और मई 2026 में बढ़कर 119 हो गया। इसी प्रकार पलारी में अप्रैल 2026 में 40  दस्तावेज बढ़कर मई 2026 में 56, सिमगा में 56 से बढ़कर 99, कसडोल में 24से बढ़कर 50 तथा भाटापारा में 111 से बढ़कर 121 दस्तावेज हो गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि महिलाओं को दी गई पंजीयन शुल्क छूट का लाभ बड़ी संख्या में परिवार उठा रहे हैं। शहरी क्षेत्र बलौदाबाजार और भाटपारा के आकड़ों में अधिक वृद्धि देखी गई है।

जिला पंजीयक विनोद कोचे ने बताया कि राज्य शासन की इस नीति का सीधा और त्वरित लाभ महिलाओं को मिल रहा है। संपत्ति खरीद की लागत काफी कम हो जाने से अब परिवार स्वेच्छा से महिलाओं के नाम पर जमीन और मकान पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, बलौदाबाजार के उप पंजीयक श्री विपुल श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल 2026 से 12 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। अकेले बलौदाबाजार कार्यालय में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 107 अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। खास बात यह है कि इससे जहां एक तरफ आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्री की संख्या बढ़ने से शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो रही है।

अब महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदना हुआ आसान
योजना की लाभार्थी नमिता साहू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर मिलने वाली इस छूट से उनके परिवार को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। पहले रजिस्ट्री में भारी-भरकम खर्च देखकर लोग कतराते थे, लेकिन अब खर्च आधा होने से यह बेहद आसान हो गया है। इससे महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि संपत्ति पर उनका कानूनी अधिकार भी मजबूत हो रहा है।

महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मार्गदर्शन में लिया गया यह फैसला प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित हो रहा है।

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