NDPS केस में रिश्वतखोरी का आरोप, दो एसआई निलंबित, दुर्ग SSP की कार्रवाई से मचा हड़कंप

दुर्ग.

जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग करने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है।

निलंबित अधिकारियों में पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ एसआई तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

महिला को छोड़ने के बदले मांगे थे 50 हजार रुपए
जानकारी के अनुसार पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में एसआई तुलसीराम साहू ने रज्जी कौर नामक महिला को 5.80 ग्राम चिट्टा (मादक पदार्थ) के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि महिला को छोड़ने के एवज में उसकी बेटी से 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। महिला की बेटी जसबीर का आरोप है कि उसने पहली बार में 20 हजार रुपए देने की बात स्वीकार की थी और राशि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। इसी दौरान हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड हो गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई
ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में ऑडियो को गंभीर मानते हुए एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसआई तुलसीराम साहू और उनके सहयोगी बताए जा रहे खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू को निलंबित कर दिया। दुर्ग शहर एएसपी सुखनंद राठौर ने बताया कि पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग का ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। शुरुआती जांच में वायरल ऑडियो के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय नियमों के विपरीत आचरण पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।

साइबर क्राइम कर्मियों पर भी लगाए आरोप
आरोपी महिला की बेटी जसबीर ने यह भी आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़े कुछ लोगों ने भी उससे 2 लाख रुपए की मांग की थी। उसने दावा किया कि एसआई के साथ हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। जसबीर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब्ती, गिरफ्तारी और पूछताछ से जुड़े सभी स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उसका आरोप है कि बरामद किए गए चिट्टे की मात्रा वास्तविक मात्रा से अधिक दर्शाई गई है।

तीन दिन में सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक प्रशांत पैकरा को तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

विश्व पर्यावरण दिवस 2026

हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

रायपुर, 
  प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।

प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है।

हरियाली से समृद्धि की ओर

छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है।

शहरों को मिल रही हरित पहचान

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं।

जल संरक्षण बना जनआंदोलन

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है।

नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है।

इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल

पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे।

धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

•  डॉ. दानेश्वरी संभाकर
    उपसंचालक, जनसंपर्क

 

सरगुजा के सुशासन तिहार शिविर में 1210 आवेदन पहुंचे, 50 हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम बेलदगी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्लस्टर की 20 ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए अपनी मांगों एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।

ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं
शिविर में लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने सहभागिता करते हुए ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने आमजन की मांगों, समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित कर आवेदकों को सूचना देने के निर्देश दिए। विधायक श्री मिंज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं खुलकर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

जनहित के मुद्दों पर दिया गया विशेष जोर
जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार के अंतर्गत 15 से 25 गांवों के समूहों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाएगा तथा आवश्यक प्रकरण शासन स्तर पर भेजे जाएंगे। उन्होंने राजस्व विभाग को शिकायतों के निराकरण में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने की अपील की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने जल संरक्षण, तालाब गहरीकरण, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को जलकर संग्रहण करने की सलाह दी।

1210 आवेदन प्राप्त, 50 हितग्राही लाभान्वित
शिविर में कुल 1210 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1151 मांग संबंधी तथा 59 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। शिविर में लगभग 26 विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। आधार कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मुक्त सरगुजा अभियान के तहत स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीबी स्क्रीनिंग की गई। वहीं, बिहान बाजार के माध्यम से स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन कर ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मोनिका पैकरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष शशिकला सिंह, उपाध्यक्ष कामेश्वर राजवाड़े, जनपद सदस्यगण, सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, एसडीएम रामराज सिंह, जनपद पंचायत सीईओ, जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

पिच्चेकट्टा जलाशय के कार्यों के लिए 4.85 करोड़ रुपए स्वीकृत

रायपुर
 छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कांकेर जिले के विकासखण्ड-भानुप्रतापपुर के पिच्चेकट्टा जलाशय के जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यो के पूर्ण हाने पर क्षेत्र के किसानों को कुल 364 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। योजना के निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर, 3 नगर पंचायत BJP तो 2 पर कांग्रेस का कब्जा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में 1 जून को संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकायों के आम और उपचुनावों के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में जारी मतगणना के बीच कई सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं। प्रदेशभर में नगर पंचायत अध्यक्ष, पार्षद, जनपद सदस्य, सरपंच और पंच समेत कुल 1310 रिक्त पदों के लिए मतदान कराया था।

नगरीय निकाय चुनाव के तहत पांच नगर पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए तीन सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस ने दो नगर पंचायतों में जीत दर्ज की है। इस चुनाव में नवगठित नगर पंचायतों घुमका, बम्हनीडीह, शिवानंदनपुर और पलारी के परिणामों पर विशेष नजर रही। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

सहसपुर लोहारा में भाजपा की सरिता मिश्रा विजयी
कवर्धा जिले की सहसपुर लोहारा नगर पंचायत में केवल अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया था। यहां भाजपा की महिला प्रत्याशी सरिता संतोष मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 754 वोटों से पराजित कर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया।

घुमका नगर पंचायत में कांग्रेस की फूलमती वर्मा की जीत
राजनांदगांव जिले की नवगठित घुमका नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी फूलमती वर्मा ने अध्यक्ष पद का चुनाव 85 मतों से जीत लिया। वहींं, 11 वार्डों में भाजपा, 3 वार्डों में कांग्रेस और 1 वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।

बम्हनीडीह नगर पंचायत में BJP का दबदबा
जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी रमेश डडसेना ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। वार्ड परिणामों में भी भाजपा का दबदबा देखने को मिला। वहींं, 11 वार्डों में भाजपा, 3 वार्डों में कांग्रेस और 1 वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।

शिवानंदनपुर में BJP समर्थित अध्यक्ष निर्वाचित
सूरजपुर जिले की शिवानंदनपुर नगर पंचायत में BJP के प्रत्याशी रितेश जायसवाल अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने में सफल रहे। वार्ड चुनावों में यहां भी मुकाबला कांटे का रहा। कुल 15 वार्डों में से 8 वार्डों में कांग्रेस और 7 वार्डों में भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए।

पलारी नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत
बालोद जिले की नवगठित पलारी नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी यानेश कुमार ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने इस नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। वार्ड चुनाव परिणामों में भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। यहां 9 वार्डों में कांग्रेस, 5 वार्डों में भाजपा के प्रत्याशी विजयी हुए हैं, जबकि 1 वार्ड में दोनों प्रत्याशियों को बराबर मत मिले हैं। इस वार्ड के विजेता का फैसला अब टॉस के जरिए किया जाएगा।

अन्य वार्डों में हुए उपचुनाव के नतीजे
बस्तर जिले के जगदलपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-1 इंदिरा वार्ड में हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी ने जीत हासिल कर नए पार्षद के रूप में निर्वाचित हुए। यह सीट पूर्व पार्षद अब्दुल रशीद के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया था।

बिलासपुर के संजय गांधी नगर वार्ड में कांग्रेस का कब्जा
बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-29 संजय गांधी नगर (तारबाहर) में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी शेख आज़म ने भाजपा उम्मीदवार वी. मधुसूदन राव को पराजित कर पार्षद पद पर कब्जा जमाया।

जशपुर नगर पालिका के दो वार्डों में भाजपा की जीत
जशपुर नगर पालिका में हुए उपचुनाव में भाजपा ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड क्रमांक-8 से भाजपा प्रत्याशी प्रेमलता साहू विजयी रहीं, जबकि वार्ड क्रमांक-14 से भाजपा उम्मीदवार प्रिया सिंह ने जीत हासिल की।

मई में जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम
राज्य निर्वाचन आयोग ने मई में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 1 जून को मतदान कराया गया, जबकि आज यानी 4 जून को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार पूरे चुनावी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी।

पंचायतों में भी कई महत्वपूर्ण पदों का फैसला
पंचायत चुनाव में 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए मतदान कराया गया था। कई जगहों पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और ग्रामीण नेतृत्व को लेकर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसका परिणाम आज सामने आएगा।

मतदान में दिखा था जबरदस्त उत्साह
1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। नगरीय निकाय चुनाव में 31,928 मतदाताओं में से 27,006 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत चुनाव में 1,02,797 मतदाताओं में से 79,968 लोगों ने वोट डाले और 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। मतदान के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में 96 और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया था।

पद्मजागेश्वर यादव का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श — मंत्री टंक राम वर्मा

पद्मजागेश्वर यादव का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श — मंत्री टंक राम वर्मा

बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति

​रायपुर

    राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मजागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मजागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया।

​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा 
    
     मुलाकात के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मजागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मजागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।

​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष

     ​गौरतलब है कि पद्मजागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति

      ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
     ​मंत्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

​NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा

​NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा

रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

नई पुस्तक ‘मानचित्र निर्माण के सिद्धांत’,पद्मजागेश्वर यादव भी रहे साक्षी

​रायपुर

    राजस्व एवं  उच्च शिक्षा मंत्री माननीय टंक राम वर्मा ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अद्यतन पाठ्यक्रम पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पुस्तक ‘मानचित्र निर्माण के सिद्धांत’ का विमोचन किया। उच्च शिक्षा एवं भूगोल के विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली इस बेहद उपयोगी पुस्तक का लेखन प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल द्वारा किया गया है।
    ​विमोचन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने दोनों विद्वान लेखकों को उनके इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों को मानचित्र कला (Cartography) जैसी महत्वपूर्ण विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझने में अत्यंत सहायक और उपयोगी सिद्ध होगी।
      उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और मातृभाषा व सरल भाषा में ऐसी उच्च स्तरीय अकादमिक पुस्तकों का आना एक सराहनीय कदम है।

​युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा: पद्मजागेश्वर यादव

   ​इस अवसर पर उपस्थित प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मसे सम्मानित जागेश्वर यादव  ने भी इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए दोनों लेखकों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लेखकों के भगीरथ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में किए गए ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को एक नई, सकारात्मक और प्रगतिशील दिशा प्रदान करते हैं।
    ​पुस्तक के लेखक डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल ने इस अवसर पर बताया कि इस पुस्तक को विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP) के मापदंडों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भूगोल और मानचित्रण के जटिल व तकनीकी सिद्धांतों को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में आधुनिक मानचित्र निर्माण की तकनीकों,अक्षांश-देशांतर के व्यावहारिक उपयोग और भौगोलिक आंकड़ों के सटीक प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

जिला अस्पताल में खून न मिलने से मरीज की मौत, जांच टीम ने डॉक्टरों और स्टाफ से की पूछताछ

दुर्ग.

जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान सोमवार को हुई मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल है।

दोनों बुधवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। शाम 5.30 बजे तक उन्होंने घटना के सभी पहलुओं जांचा परखा। सिविल सर्जन के कक्ष में मामले में कथित रूप से जिम्मेदार चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी बारी से बयान लिए। यानी करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई। सभी से बयान लेने के बाद जांच टीम द्वारा रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर कांग्रेस ने जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन आशीषन मिंज को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मामले में दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में हुई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। मामले में ब्लड बैंक के अधिकारियों ने चौंकाने वाली बात सामने रखी है कि जब परिजनों को ब्लड के लिए कहा गया, तो महिला मेडिसिन वार्ड से ब्लड सैंपल तथा मांग पत्र भेजा जाना था। ऐसा नहीं किया गया। केवल आवेदन लेकर ब्लड बैंक भेज दिया गया।

वहीं दूसरी ओर लाइफ़ सेविंग की स्थिति निर्मित होती है, तो बिना डोनेटर के ब्लड उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार सिकलिन मरीजों को भी बिना देरी किए ब्लड दिया जाता है। ऐसा लगता है कि दीपिका के मामले में ब्लड इंतजाम करने के इस तरह के प्रयास ही नहीं किए गए। परिजनों की शिकायत पर जांच कमेटी मृतक दीपिका की माता नीमा बाई गाड़ा पति मन्नू राम गाड़ा का निवास एचएचसीएल कॉलोनी, वार्ड नं. 17 स्टेशन मड़ोदा भिलाई है। दीपिका की तबीयत खराब होने पर उसे 30 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 1 जून को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही पर रखने का आरोप लगाया। कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई, जिसे संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने जांच करने समिति बैठाई ।

कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट :
जांच टीम के सदस्य अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि दीपिका की मौत के मामले को लेकर अलग-अलग विभागों के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। इसके बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी, अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पर फोकस

किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी

अंतराष्ट्रीय बाजार में सुगंधित चावल की है बड़ी डिमांड

कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में  इंडियन राईस एक्सपोर्ट फेडरेशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक, पायलट प्रोजेक्ट पर बनी सहमति

    रायपुर,
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे। 

    बैठक में कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

    बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।

    बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत

पानी, रोजगार और समृद्धि का संगम: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से बदल रहे गांव

*मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार, 57 प्रतिशत महिलाएं *

 1610 करोड़ रुपये से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण

रायपुर,
जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

        अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों से जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह संगम छत्तीसगढ़ को सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दे रहा है।

जल संरक्षण से आजीविका का सृजन

       राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई अभिनव पहलें शुरू की हैं। वर्तमान में  समाज के संवेदनशील एवं कमजोर वर्गो की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

नवा तरिया-आय के जरिया’ के अंतर्गत विकसित हो रहे 624 सामुदायिक तालाब
     इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इन जल संरचनाओं से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम भी बन रहा है।

1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
       इसके साथ साथ अन्य जल सरंक्षण, संवर्धन कार्य भी व्यापक सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे है। प्रधान मंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा अपने खर्च पर स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है । 

तकनीक से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

        ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप के माध्यम से स्थल चयन तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है।

जलदूत प्रणाली से भू-जल स्तर की हो रही नियमित निगरानी
      भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर का लेखन कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी और समुदाय आधारित बन सके।

पारदर्शिता का अभिनव मॉडल

        मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश ने तकनीक आधारित नवाचारों को अपनाया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजना में पारदर्शिता एवं जनविश्वास को और सुदृढ़ किया गया है।

जनभागीदारी से “भागीदारी से साझेदारी “(Participation to Partnership) की ओर

         अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्राम सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है।

जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार का अभिनव मॉडल
       छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की अवधारणा को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और अभिसरण का यह मॉडल राज्य को भागीदारी से साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है।

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