उरला की फैक्ट्री दुर्घटना के बाद सख्त कार्रवाई, मृतक श्रमिकों के कंपनी प्रबंधन द्वारा परिजनों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति

रायपुर

कल ग्राम बेन्द्री, उरला औद्योगिक क्षेत्र के पास, थाना उरला, जिला रायपुर स्थित मेसर्स 3-डी इनोवेशन कारखाने में एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना घटित हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार कारखाने के फेरो एलॉयज डिवीजन में संचालित फर्नेस में लांसिंग कार्य के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर में अचानक भीषण विस्फोट होने से कार्यरत तीन श्रमिकों श्री अरुण पाण्डेय, श्री लाल सिंह एवं श्री कमल सिंह की दुःखद मृत्यु हो गई।
    
दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा तत्काल घटनास्थल पहुँचकर दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान घटनास्थल का विस्तृत परीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य लिए गए, फोटोग्राफ एवं विडियोग्राफ लिए गए तथा कारखाना प्रबंधन एवं श्रमिकों से प्रारंभिक पूछताछ कर दुर्घटना के कारणों की जांच प्रारंभ की गई।
    
प्रारंभिक जांच के आधार पर एवं श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020 की धारा 38(1)(ए) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कारखाना परिसर में संचालित समस्त प्रकार की विनिर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस संबंध में कारखाने के अधिभोगी एवं प्रबंधक को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।
    
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रतिबंधात्मक आदेश की अवधि में कारखाने में नियोजित सभी श्रमिकों को नियमानुसार देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित समय पर सुनिश्चित किया जाए। विभाग के प्रयासो से कारखाना प्रबंधन द्वारा प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिजनों को 30 – 30 लाख रूपए की तत्काल आर्थिक सहायता राशि देने की सहमति दी गयी।
    
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन के सभागार में राज्य के शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के ब्रोशर का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शासकीय सेवकों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और सहज वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जब कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर कार्य करेंगे, तभी शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए निजी साहूकारों अथवा ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने की विवशता का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से वे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस, सुरक्षित और पारदर्शी है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त विभाग की टीम को बधाई देते हुए सभी शासकीय सेवकों से विकसित छत्तीसगढ़ और सुशासन के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने के बाद अब वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना प्रारंभ की गई है, जिससे तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के मात्र दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया है तथा 27 हजार कर्मचारी इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक  कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी तथा आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक और त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

उल्लेखनीय है कि यह सुविधा ई-कोष प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ऋण स्वीकृति एवं वितरण त्वरित रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव  विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव  चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त)  ऋषभ पराशर, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष  चंद्रकांत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री आवास 2.0 लैंड टॉक्स फोर्स की बैठक सम्पन्न

रायपुर

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास 2.0 भूमि टॉक्स फोर्स की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय प्रोजेक्ट के लिए भूमि के सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों को प्रधानमंत्री आवास 2.0 के लिए हितग्राही की पहचान कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। उन्होंने आबादी भूमि पर रहने वाले पात्र हितग्राहियों को ढूंढकर सत्यापन करना एवं उन्हें आवास उपलब्ध कराने के लिए समूचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। 
              
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नगरीय निकायों मेें वर्तमान और भविष्य की आवासीय आवश्यकता का आंकलन कर कार्ययोजना बनाने कहा है। जिससे समय पर हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराये जा सकें। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनांतर्गत हितग्राहियों की पहचान कर आवश्यकतानुसार आवास बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में नगरीय एवं प्रशासन विकास विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा बूस्ट, सरकार लाएगी एकीकृत एप

रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाने का फैसला लिया है। मंत्रालय में सचिव सह-परिवहन आयुक्त एस प्रकाश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में परिवहन विभाग, सभी आरटीओ/डीटीओ, ऊर्जा विभाग, एचपीसीएल, बीपीसीएल,  एलओसीएल, जिओ -बीपी, ईवी निर्माता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।  
          
अभी अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग एप हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। सरकार अब राज्य स्तर पर एकीकृत प्लेटफॉर्म/एप बनाएगी। भारत सरकार भी यूनिवर्सल ईवी चार्जिंग एप ला रही है। चिप्स के जरिए ऊर्जा विभाग पहले ही पायलट एप पर काम कर रहा है। केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन लगाने पर वित्तीय सहायता और छत्तीसगढ़ ईवी नीति-2022 के प्रोत्साहनों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी जिलों के आरटीओ/डीटीओ को अपने क्षेत्र में चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह चिन्हित करने और एनओसी  की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए।
          
एचपीसीएल, बीपीसीएल,  एलओसीएल, जिओ -बीपी के निर्माताओं ने राज्य में लगे और प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी दी और आगे विस्तार की योजना बताया। सचिव सह-परिवहन आयुक्त ने कहा कि ईवी चार्जिंग का मजबूत नेटवर्क बनाना और लोगों को समय पर जानकारी देना जरूरी है। इससे हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण कम होगा। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्यभर में आसान और सुलभ चार्जिंग सुविधा देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को ईवी अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान की घोषणा

रायपुर

 छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, साधना और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की प्रेरणा एवं मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनके जन्मस्थल गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम में मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु मती वेणु देशमुख को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर मती वेणु देशमुख ने श्रद्धांजलि समारोह के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरी लोककला परंपरा का सम्मान है।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वर कभी मौन नहीं होते। वे समय की सीमाओं को लांघकर युगों तक जनमानस की चेतना में गूंजते रहते हैं। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का स्वर छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का अमर नाद है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकगौरव से सदैव जोड़ता रहेगा। वे केवल एक महान लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सजीव पहचान थीं। राज्य को उन पर सदैव गर्व रहेगा और उनकी अमर लोकधुने हमारी    सांस्कृतिक चेतना में अनवरत गूंजती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा तीजन बाई की स्मृति में की गई घोषणाएं इसी संकल्प का विस्तार हैं।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री  राजेश अग्रवाल, संस्कृति विभाग के सचिव  एस. भारतीदासन तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वर्गीय तीजन बाई के जीवन और कला यात्रा पर आधारित विशेष ब्रोशर का विमोचन किया। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संस्कृति विभाग द्वारा उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने भावुक होकर देखा।

सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार पुष्पा निषाद के पंडवानी गायन से हुई। इसके बाद स्वर्गीय तीजन बाई की शिष्याएं तरूणा साहू और आराध्या साहू तथा दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में प्रभावशाली पंडवानी प्रस्तुति देकर अपनी गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए।  दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में पंडवानी गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्वर्गीय तीजन बाई से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कला साधना को याद किया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर कलाकारों ने स्वर्गीय तीजन बाई को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने तथा उनके नाम पर पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी राज्य सरकार के समक्ष रखी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्रकार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष  सलीम राज, यूसीसी सदस्य  मोहन पवार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

साहित्य जगत से डॉ. पी.सी. लाल यादव,  परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी तथा कला जगत से पद्म ममता चंद्राकर, पद्म भारती बंधु, पद्म उषा बारले, पद्म राधेश्याम बारले, मीर अली मीर, निर्मला ठाकुर, मोक्षदा चंद्राकर,  सुनील सोनी, किरण शर्मा, कविता वासनिक, राकेश तिवारी, सरस्वती बारले, वंदना बारले, दुर्गा साहू, इतिहासकार आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रीय, चेतन देवांगन, रत्ना पांडे तथा सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। मंच का संचालन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा तथा  अरुण निर्मलकर ने किया।
समारोह के अंत में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने अपने स्वर से केवल पंडवानी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी लोककला, उनकी परंपरा और उनके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। आज यहां उपस्थित प्रत्येक कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी की सहभागिता उनके प्रति सामूहिक सम्मान का प्रतीक है। संस्कृति विभाग और राज्य सरकार इस अमूल्य विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। महान कलाकार भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी कला, उनकी साधना और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव समाज की चेतना में जीवित रहती है। स्वर्गीय पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का अमर स्वर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और छत्तीसगढ़ की लोकधारा में अनवरत गूंजता रहेगा।

छत्तीसगढ़ राज्य शूटिंग मीट 11 जुलाई से, प्रदेशभर के निशानेबाज दिखाएंगे दम

रायपुर.

25वीं छत्तीसगढ़ राज्य शूटिंग मीट का आयोजन छत्तीसगढ़ प्रदेश राइफल एसोसिएशन (CGPRA) की ओर से 11 जुलाई से माना कैंप शूटिंग रेंज में होगा. राज्य शूटिंग मीट में 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर राइफल एवं पिस्टल स्पर्धाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनमें प्रदेशभर के निशानेबाज विभिन्न श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे.

यह प्रतियोगिता पहले 8 जुलाई से प्रस्तावित थी, लेकिन क्षेत्र में भारी वर्षा और मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए स्थगित करते हुए नई तारीख तय की गई है, जिससे सभी प्रतिभागियों और अधिकारियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित की जा सके. प्रतिभागी निशानेबाजों के लिए 12 जुलाई को एक प्रशिक्षण एवं अभ्यास सत्र आयोजित किया जाएगा. प्रशिक्षण सत्र के तुरंत बाद प्रतियोगिता मैच शुरू होंगे. एसोसिएशन संशोधित कार्यक्रम के तहत उत्साहपूर्ण भागीदारी और चैंपियनशिप के सफल आयोजन की आशा करता है.

स.डी.जी. 2.0 और ‘बस्तर अंजोर’ से विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की उपस्थिति में राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. राज्य एवं जिला संकेतक फ्रेमवर्क 2.0 तथा मेटाडेटा हैंडबुक का भी विमोचन किया गया। साथ ही बस्तर संभाग के समावेशी, अभिसरण आधारित और मापनीय विकास के लिए तैयार की गई अभिनव पहल ‘बस्तर अंजोर’ की भी शुरुआत की गई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सटीक डेटा और परिणाम आधारित मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है। एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क शासन को साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय तथा योजनाओं की नियमित निगरानी के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल विकास योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। एस.डी.जी. 2.0 के माध्यम से विकास की प्रगति को अधिक पारदर्शी, मापनीय और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

नए एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क के अंतर्गत राज्य स्तर पर संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इससे विकास कार्यों की अधिक व्यापक, सटीक और वैज्ञानिक निगरानी संभव होगी। मेटाडेटा हैंडबुक में प्रत्येक संकेतक की गणना पद्धति एवं रिपोर्टिंग प्रणाली को मानकीकृत किया गया है, जिससे पूरे राज्य में डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने ‘बस्तर अंजोर’ की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह अभिसरण (कन्वर्जेंस) आधारित विकास मॉडल है, जिसे बस्तर संभाग को देश का सर्वाधिक विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने के संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि ‘बस्तर अंजोर’ के 3+4 मॉडल के अंतर्गत जिला स्तर की तीन प्रमुख पहल – नियद नेल्लानार 2.0, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर – का अभिसरण चार प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास फ्रेमवर्क – एस.डी.जी. 2030, विकसित छत्तीसगढ़ @2047, आकांक्षी जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम से किया गया है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त संसाधनों के बिना बेहतर समन्वय के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में ठोस एवं मापनीय परिणाम प्राप्त करना है।

 ‘बस्तर अंजोर’ अंत्योदय से सर्वोदय की भावना पर आधारित एक दूरदर्शी पहल है, जो बस्तर को समावेशी, सतत एवं परिणामोन्मुख विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने रेलवे ओवर-ब्रिज एवं रेलवे अंडर-ब्रिज कार्यों की समीक्षा की

रायपुर

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने विभाग के सेतु परिक्षेत्र और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश में रेलवे ओवर-ब्रिज (ROB) और रेलवे अंडर-ब्रिज (RUB) के निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आज हुई बैठक में रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज के कार्यों में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को बेहतर समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों की बाधाओं को तत्परता से दूर कर अप्रारंभ कार्यों को जल्दी शुरू करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के प्रधान मुख्य अभियंता अवनीश कुमार पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
 
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में विभागीय और रेलवे के अधिकारियों को आपसी समन्वय को और मजबूत करते हुए निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें शीघ्र पूरा करने को कहा, ताकि लोगों को जाम और रेलवे फाटकों पर होने वाली असुविधा से राहत मिल सके। इससे माल परिवहन भी अधिक सुगम और तेज होगा। 

विभागीय सचिव ने नए आरओबी और आरयूबी के कार्यों को जल्द शुरू करने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर बाधाओं का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों से अतिक्रमण हटाने, भूमि व्यपवर्तन, नामांतरण तथा भू-अर्जन जैसी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रगतिरत परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश में आवागमन को अधिक सुरक्षित, सुगम, सुव्यवस्थित और तेज बनाना राज्य शासन की प्राथमिकता में है। 

बंसल ने कार्यस्थलों पर यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित परियोजनाओं के प्राक्कलन तथा ड्राइंग-डिजाइन तैयार करने के लिए जहां भी लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण की जरूरत हो, वहां तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करने को कहा।

उन्होंने रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने नियमित और कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को हर तीन महीने में बैठक कर कार्यों की प्रगति का आकलन करने और लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी, अधीक्षण अभियंता डी.के. माहेश्वरी, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के मुख्य अभियंता मनोज कुमार सिंह, सीपीएम-बिलासपुर राजीव कुमार और सीपीएम-रायपुर तत्वदर्शी साहू भी बैठक में मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला: 7 आरोपियों को कोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत

बिलासपुर.

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने धमतरी जिले की वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े 18 साल पुराने मामले में सात आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी है.

जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बैंच ने कहा कि इसी मामले में समान आरोपों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी जमानत का लाभ दिया जाना उचित है. कोर्ट ने सात अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है.

क्या था शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला ?
दरअसल, वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 172 पदों पर भर्ती प्रक्रिया हुई थी. आरोप है कि चयन समिति के सदस्यों और अन्य आरोपियों ने साजिश के तहत कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर अंक बढ़ाकर उन्हें चयनित करा दिया, इसके चलते पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली और वे बाहर हो गए. इस संबंध में वर्ष 2011 में पुलिस थाना मगरलोड में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(9)(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया था.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत कई समितियों और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद हुई थी. करीब 5,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी अलग-अलग स्तर पर जांच के बाद अंतिम चयन सूची बनाई गई थी. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, पुलिस ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं ने किसी आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था. फर्जीवाड़ा की शिकायत, किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से कई वर्ष बाद की गई और इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

हाई कोर्ट ने सातों याचिकाकर्ताओं को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ताओं को शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा किया जाए. हाई कोर्ट ने यह भी शर्त लगाई है, सभी आरोपी जांच में सहयोग करेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे, ट्रायल में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे और भविष्य में इसी तरह का कोई अपराध नहीं करेंगे. साथ ही उन्हें 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार अथवा शिकायतकर्ता जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे.

छत्तीसगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन, यातायात नियम तोड़ने पर 62 वाहन चालकों के चालान

बीजापुर.

सड़क सुरक्षा को लेकर बीजापुर पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया। विशेष जांच अभियान के दौरान यातायात नियमों का पालन नहीं करने वाले 62 वाहन चालकों के चालान काटे गए, जिनसे कुल ₹27,200 का समन शुल्क वसूला गया।

बता दें कि यह विशेष अभियान पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई डीएसपी एवं यातायात नोडल अधिकारी विनीत साहू के नेतृत्व में की गई। अभियान के दौरान यातायात प्रभारी केशव ठाकुर, सहायक उप निरीक्षक विजय मंडावी सहित यातायात शाखा के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए चालान जारी किए गए। पुलिस ने कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया।

इस दौरान वाहन चालकों और आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा के महत्व और यातायात नियमों की जानकारी दी गई। लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने तथा अन्य यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करने की शपथ भी दिलाई गई। बीजापुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन कर न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह के विशेष जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

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