मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम

इंदौर में 6 जून को होगा भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम 2026
लैटिन अमेरिका एवं 15कैरिबियन देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि होंगे शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में निवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई गति देने के उद्देश्य से 6 जून को इंदौर में भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC) व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 की बैठक होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के सहयोग से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फोरम (GIBF) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम का आयोजन मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के सहयोग से रेडिसन ब्लू, इंदौर में होगा।

फोरम में लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें विभिन्न देशों के राजदूत, एक उच्चायुक्त और एक महावाणिज्यदूत शामिल होंगे। इनके साथ निवेशक, निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, व्यापार आयुक्त, एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वरिष्ठ शासकीय अधिकारी सहित 350 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। चार प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल भी इसमें सहभागिता करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा निवेश संवर्धन और वैश्विक सहभागिता को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर अधोसंरचना, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी दिशा में यह फोरम भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण साबित होगा।

मध्यप्रदेश का निर्यात प्रदर्शन भी लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य से लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र को लगभग 4,186 करोड़ रूपये का निर्यात दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक है। इस निर्यात में फार्मा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्राज़ील, मैक्सिको और चिली, राज्य के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और वैश्विक साझेदारियों को लेकर फोरम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भारत एलएसी विशेष संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं और औद्योगिक अवसरों पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा निवेश प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही व्यापार एवं निवेश के अवसरों, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग तथा सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर केंद्रित पैनल होंगे। विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चर्चा में औषधि, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल रहेंगे, जबकि सेवा क्षेत्र की चर्चा में सूचना-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फिनटेक तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

फोरम में उद्योगों और निवेशकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देने के लिए बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों को गति मिलेगी।

भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति, निवेश आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।

 

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास

भोपाल

अधिकतर उपभोक्ता बिजली का बिल ज्यादा आने पर स्मार्ट मीटरों या बिजली कंपनी को शिकायत हैं जबकि वास्तविकता यह है कि उपकरणों के ज्यादा उपयोग से बिजली का बिल ज्यादा आता है। यदि आप थोड़ी सी सावधानी बरतें तो बिल ज्यादा आने की आपकी चिंता बढ़ेगी नहीं। आप चाहें तो अपने बढ़ते बिल को नियंत्रण में रख सकते हैं। बस आपको अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। एक आंकलन के अनुसार अधिकांश शहरवासी रिमोट चलित विद्युत उपकरणों को ‘‘स्टैंडबाय’’ मोड पर छोड़़ देते हैं, जिससे उपकरण तो बंद हो जाते हैं परन्तु इनमें सतत् विद्युत प्रवाहित होती रहती है।

यदि आप रिमोट से चलने वाले उपकरणों को स्विच ऑफ नहीं करते है और रिमोट से बंद करके उपकरणों को छोड़ देते हैं तो बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे बिल बढ़ जाता है।

एक सर्वे के अनुसार 70 फीसदी लोग टी.वी. को मैन स्विच से ऑन-ऑफ न करके रिमोट से ऑन-ऑफ करते हैं। इससे टी.वी.ऑफ होने के बावजूद भी पॉवर सप्लाई चालू रहती है। इससे 21 इंच के टी.वी. में 15 वाट का करंट निरन्तर प्रवाहित होता रहता है एवं आपके मीटर को आगे बढ़ाता रहता है, जिसके कारण इन 70 फीसदी लोगों को हर महीने लगभग 200 रूपये और हर साल 1500 रूपये का अतिरिक्त भार सहना पड़ता है।

इलेक्ट्रीशियन की सलाह के अनुसार एक व्यवसायी द्वारा 1200 वॉट क्षमता के एलईडी बल्ब अपने घर में लगाने के लिए खरीद लिए गए। इसी प्रकार एलईडी ट्यूबलाईट एवं ऊर्जा दक्ष पंखे लगा लिए तो उनके घर में बिजली की 30 प्रतिशत तक बिजली बचत हुई।

बिजली विशेषज्ञों के अनुसार अब तो एल.ई.डी. जैसे उपकरण बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, उनके उपयोग से और अधिक बिजली की बचत और ज्यादा रोशनी प्राप्त हो सकती है।

हर महीने लगभग 75 रूपये की चपत

 म्यूजिक सिस्टम, टी.वी., ए.सी., कम्प्यूटर आदि स्टैंडबाय मोड पर 5 से 15 वॉट तक बिजली की खपत करते हैं। अगर महीने भर भी टी.वी. बंद रहे जब भी 15 वॉट के हिसाब से एक दिन में 0.36 यूनिट व 30 दिन में 10.8 यूनिट बिजली खर्च होती है।

कम्प्यूटर

 कम्यूटर के मॉनिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। अतः उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें।

एलईडी बल्ब

वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत हेतु अतिउत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं।

सीलिंग फैन

वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं।

फ्रिज

 फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने हेतु फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है।

एयर कंडीशनर्स (एसी)

 26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

 

सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को दें सघनता : राज्यपाल पटेल

सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को दें सघनता : राज्यपाल पटेल

प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में सिकल सेल की जानकारी दें
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग की समीक्षा

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा की 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग को विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में सिकल सेल उन्मूलन गतिविधियों को सघनता के साथ संचालित करने के निर्देश दिये है। उन्होने कहा कि स्क्रीनिंग, उपचार, कार्ड और दवा वितरण प्रयासों के साथ ही रोग की जागरूकता के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने चाहिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के संकल्प को पूरा करने तक हमें थकना और रूकना नहीं है। इसलिए उन्मूलन और उपचार की नियमितता की जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में विशेष निगरानी की जाना जरूरी है। राज्यपाल पटेल गुरुवार को लोक भवन में लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष विभाग के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में माता और बच्चों को सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण और उपचार से संबंधित जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिये है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर जिलेवार चर्चा की। राज्यपाल पटेल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल स्क्रीनिंग, दवा और कार्ड वितरण आदि की विस्तार से जिलेवार जानकारी दी गई। आयुष विभाग द्वारा भी जिलेवार दवाई वितरण, परामर्श, उपचार और रोगियों से सतत संवाद के द्वारा उपचार गतिविधियों की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने आयुष विभाग को सिकल सेल उपचार प्रयासों का रोगियों से फीडबैक प्राप्त करने के निर्देश दिए।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि राज्य सरकार, सिकल सेल उन्मूलन के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन के राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों में अग्रणी है। यह संबंधित विभागों द्वारा सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सही दिशा में सार्थक कार्यों का परिणाम है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन कार्यों और गतिविधियों की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अमले को बधाई दी। राज्यपाल को अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल ने विश्व सिकल सेल दिवस पर खंडवा जिले में प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में अवगत कराया।

बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोक भवन के अधिकारी मौजूद थे। 

 

बेटियों के टूटने नहीं दिए ख्वाब: मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का संबल

बेटियों के टूटने नहीं दिए ख्वाब: मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का संबल

भोपाल

अगर सरकार से यह मदद न मिलती, तो गरीबी के आगे मेरे घुटने टिक जाते और मेरी पढ़ाई हमेशा के लिए बंद हो जाती। आज मैं कॉलेज जा रही हूँ, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे सिर पर ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ का हाथ है।”

यह भावुक कर देने वाले शब्द मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रतिभा बुरेडिया के हैं। यह महज एक बच्ची की जुबानी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ की सफलता की वह जीवंत कहानी है, जो आज प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी में रोशनी बिखेर रही है।

आर्थिक तंगहाली और मजबूरियों के अंधेरे को चीरकर अपनी किस्मत खुद लिखने वाली दो बेटियों-प्रतिभा बुरेडिया और ओशीन खान की दास्तान आज राष्ट्रीय पटल पर उन सभी परिवारों के लिए एक मिसाल है, जो तंगहाली के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं।

मजदूर की बेटियों को मिला हौसलों का आसमान

अशोकनगर के वार्ड क्रमांक 21 की रहने वाली प्रतिभा के पिता राजेंद्र रजक मजदूरी करते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले इस परिवार के लिए दो वक्त की रोटी के साथ बच्चों को पढ़ाना एक बड़े पहाड़ जैसा था। प्रतिभा बताती हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थीं, तो घर की माली हालत देखकर उन्हें लगा कि अब पढ़ाई का सफर यहीं थम जाएगा।

ठीक ऐसी ही कहानी वार्ड क्रमांक 18 की ओशीन खान की भी है। मध्यमवर्गीय मजदूर परिवार से आने वाली ओशीन के पिता अमजद खान पर पूरे परिवार और बच्चों की शिक्षा का भारी बोझ था। लेकिन, दोनों ही बेटियों के सपनों के आड़े गरीबी नहीं आ सकी, क्योंकि बचपन में ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उनका पंजीयन लाड़ली लक्ष्मी योजना में हो चुका था।

कदम-कदम पर मिली आर्थिक सुरक्षा की गारंटी

योजना के तहत इन बेटियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर मोड़ पर वित्तीय सहारा मिला। प्रतिभा को कक्षा 6वीं में ₹2,000 की राशि, कक्षा 9वीं में ₹4,000, कक्षा 11वीं में ₹6,000 और कक्षा 12वीं (वर्ष 2025) में ₹6,000 की छात्रवृत्ति मिली।

इस वित्तीय सहायता के दम पर दोनों बेटियों ने साल 2025 में न सिर्फ 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की, बल्कि कॉलेज की दहलीज पर भी कदम रख दिया। वर्तमान में प्रतिभा को कॉलेज के प्रथम वर्ष के लिए ₹12,500 की किश्त मिल चुकी है, वहीं ओशीन को स्नातक स्तर पर दो किश्तों में कुल ₹25,000 की सहायता मिल रही है।

₹1.43 लाख की वित्तीय सुरक्षा: बाल विवाह पर लगाम, शिक्षा को उड़ान

मध्यप्रदेश सरकार की यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु पूरा होने तक कुल 1,43,000 रूपये की वित्तीय सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। बेटियों के जन्म के प्रति रूढ़िवादी समाज की सोच को बदलकर उसे प्रोत्साहित करना। बालिकाओं की शिक्षा को बिना किसी बाधा के उच्च स्तर तक ले जाना। बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना (क्योंकि योजना का लाभ तभी मिलता है जब बेटी की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में न हुई हो)।

मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

आज जब ये बेटियाँ हाथ में कॉलेज की किताबें लेकर आगे बढ़ रही हैं, तो उनके चेहरों पर एक नया आत्मविश्वास है। प्रतिभा और ओशीन कहती हैं, “यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बेटियों को बोझ समझने वाली सोच को इस योजना ने जड़ से खत्म कर दिया है। हम माननीय मुख्यमंत्री जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने हमारे सपनों को मरने नहीं दिया।”

मध्यप्रदेश से निकलकर आ रही ये सफलता की कहानियाँ इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि अगर सरकारें संवेदनशील हों और नीतियां जमीन पर सही ढंग से लागू हों, तो देश की कोई भी ‘लाड़ली’ अपनी उड़ान भरने से वंचित नहीं रह सकती।

 

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध, नदियों से असंबद्ध छोटे तालाबों को छूट

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध, नदियों से असंबद्ध छोटे तालाबों को छूट

नदियों और उससे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

भोपाल 

मध्यप्रदेश में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को ‘बंद ऋतु’ (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इन दो महीने की अवधि में प्रदेश की समस्त नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। गुरुवार को संचालनालय मत्स्योद्योग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस अवधि में यदि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से मत्स्याखेट या परिवहन करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिबंध से ऐसे छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका किसी भी नदी से कोई संबंध नहीं है और जिन्हें ‘निर्दिष्ट जल’ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं लाया गया है, उन पर यह नियम लागू नहीं होंगे। इन निजी या स्थानीय छोटे तालाबों में सामान्य दिनों की तरह मत्स्य पालन और आखेट किया जा सकेगा। मछुआ समुदाय को समय रहते जानकारी मिलने से मछुआरे अनजाने में होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकेंगे और नियमों का पालन कर प्राकृतिक रूप से मत्स्य बीज उत्पादन में सहयोग कर सकेंगे।

 

शिवराज सिंह चौहान ने दिखाई मिसाल, दो मंत्रियों संग कार पूलिंग कर पहुंचे कैबिनेट बैठक में

भोपाल
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब-तब अपने अलग अंदाज और बातचीत को लेकर सुर्खियों में छाए रहते हैं। उनका एक और वीडियो सामने आया जिसमें वे दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ कार पूलिंग करते नजर आए। यह मामला इसलिए चर्चा में आ गया, क्योंकि काफिला कम करने को लेकर तो खबरें खूब सामने आएं, लेकिन सेंट्रल मिनिस्टर्स द्वारा कार पूलिंग का संभवत: यह पहला मामला है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोलियम की बचत को लेकर की गई अपील के बाद नेताओं, अधिकारियों और मंत्रियों के काफिला कम करने को लेकर वीडियो सामने आ रहे हैं। बुधवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों संग सफर करते दिखे। शिवराज सिंह ने बताया कि पेट्रोल-डीजल बचाने केंद्रीय मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल और जी. किशन रेड्डी के साथ पूलिंग कर रहे हैं। एक ही कार से तीनों मंत्री कैबिनेट बैठक में शामिल होने पहुंचे।

शिवराज सिंह चौहान मीडिया को बताया कि आज मैं, पाटिल जी और किशन जी कार पूलिंग करके जा रहे हैं। हमारे पीएम ने देश का आह्वान किया है। उनकी अपील के बाद पेट्रोल—डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। हम लोग तो उनके मंत्रिमंडल में सहयोगी हैं। इसलिए हमने सोचा कि हम लोग भी कार पूल करके जाएं। शिवराज ने बताया कि आज हम तीनों कार पूलिंग कर जा रहे है। 

चौहान ने क्या बताया?
इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की अनावश्यक खपत कम करने की अपील की है, जिसे देशभर में सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि तीनों मंत्री कैबिनेट सहयोगी हैं, इसलिए उन्होंने भी कारपूलिंग के माध्यम से इस अभियान में अपना योगदान देने का फैसला किया।

चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच दूरदर्शी है और मौजूदा समय में तेल, डीजल व पेट्रोल के अनावश्यक उपयोग को कम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से भी ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। 

सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, सभी को पेट्रोल-डीजल बचाने की दिशा में काम करना चाहिए। जितना संभव हो सके, सभी को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। इससे लोगों में सकारात्मक संदेश भी जाएगा।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज सी.आर. पाटिल, जी. किशन रेड्डी और मैं कार पूलिंग करके जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश का आह्वान किया है और उनके आह्वान पर अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है और उस पर अमल कर रहा है. हम तो मंत्रिमंडल के सहयोगी हैं. हमने भी सोचा कि कार पूलिंग करके हम लोग यात्रा करें. आज की परिस्थितियों में ये आवश्यक है कि हम अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करें. जितना संभव है सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। 

मध्यप्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों की प्रक्रिया शुरू, 3 से 8 जून तक होंगे आवेदन

मध्यप्रदेश में शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन 3 से 8 जून तक

e-HRMS पोर्टल पर होगी प्रक्रिया

भोपाल 

राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्थानांतरण आवेदनों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन 3 जून से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक स्थानांतरण के लिए अधिकतम 15 कार्यालयों/संस्थाओं का चयन कर सकेंगे। आवेदन में दर्शाए गए कारणों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनका आकार अधिकतम 2 एमबी निर्धारित किया गया है। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा।

विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आवेदन में गलत जानकारी देने या सत्यापन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी एवं सत्यापन अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्तियां अस्थायी (टेंटेटिव) होंगी और समय-समय पर अपडेट की जा सकेंगी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण केवल उनके विषय की रिक्तियों पर ही किए जाएंगे। वहीं प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं किए जाएंगे।

जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जून 2026 तक e-HRMS पोर्टल पर सभी रिक्त पदों की सही जानकारी दर्ज एवं सत्यापित करें। रिक्तियों की एंट्री और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख, डीडीओ एवं ऑफिस एडमिन की होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन करने मात्र से स्थानांतरण का अधिकार सुनिश्चित नहीं होगा। आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा और इस संबंध में शासन का निर्णय अंतिम माना जाएगा। यह आदेश प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर लागू होगा।

 

दुष्कर्म के आरोप में डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप

मुरैना
मुरैना में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ एक युवती की शिकायत पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर को गिरफ्तार पर लिया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में शादी से इंकार कर दिया। 

जानकारी के अनुसार, मुरैना की रहने वाली 32 वर्षीय युवती ने सिविल लाइन थाना पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर पदस्थ थे। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और बाद में मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ।

ये आरोप भी गंभीर
पीड़िता का आरोप है कि अधिकारी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में कहा गया है कि 30 मार्च 2025 को उसे घुमाने के बहाने मुरैना रेस्ट हाउस के पीछे ले जाकर दुष्कर्म किया गया। इसके बाद सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी कई बार उसका शोषण किया गया। युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी अधिकारी ने शादी के बदले पांच करोड़ रुपये नकद और एक माह के लिए युवती को किसी अन्य व्यक्ति के साथ भेजने जैसी आपत्तिजनक मांग की थी। शिकायत में मोबाइल फोन में मौजूद कुछ वीडियो और अन्य साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है।

जान से मारने की धमकी भी दी
पीड़िता के अनुसार, जब उसने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने शादी से साफ इंकार कर दिया और शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मरवाने की धमकी दी। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी डिप्टी कलेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।

आज कोर्ट में करेंगे पेश
सिविल लाइन थाना प्रभारी उदय भान यादव ने मीडिया को बताया कि एक महिला ने गलत काम करने के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। उसने बताया कि आरोपी डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर ने शादी का झांसा देकर कई बार गलत काम किया गया। माहौर को बुधवार रात में गिरफ्तार कर लिया गया है। गुरुवार को मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश करेंगे। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद माहौर का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। इसके चलते सुबह करीब 4 बजे उनका इलाज कराया गया, अब हालत ठीक है। 

नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

नगरीय निकायों एवं पंचायतों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने- काटने के लिये पहली बार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

8317 आवेदकों ने किया ऑनलाइन आवेदन

भोपाल

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि प्रदेश में पहली बार नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को नाम जोड़ने, कटवाने और नाम संशोधन के लिये ऑनलाइन सुविधा दी गयी। इस सुविधा का लाभ लेते हुए कुल 8317 आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इनमें से नगरीय निकायों में 1496 और पंचायतों में 6848 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए।

नगरीय निकायों में 675 ऑनलाइन आवेदन नाम जोड़ने, 770 नाम कटवाने और 24 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। वहीं त्रि-स्तरीय पंचायतों में 1701 आवेदन नाम जुड़वाने, 4960 नाम कटवाने और 187 आवेदन नाम में संशोधन के लिये प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

 

ट्विशा केस में नया मोड़, आरोपी पति समर्थ सिंह अस्पताल में भर्ती; मेडिकल वार्ड में कड़ी सुरक्षा

भोपाल 

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में हैं। जेल में पहले दिन गिरिबाला सिंह ज्यादातर खामोश रहीं। उन्होंने पीने को साफ पानी मांगा। इधर समर्थ सिंह को इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। उसके पैर में चोट है जिसका इलाज चल रहा है। वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब भोपाल पुलिस की कथित लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआइ ने लिगेचर से संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं।

गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया

जेल सूत्रों के अनुसार ट्विशा केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जिला जज गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया। वे जेल में आम कैदियों की तरह रहीं। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को मंगलवार शाम को यहां लाया गया था। अपनी बैरक में गिरिबाला सिंह ने कढ़ी-पकौड़े और रोटियां खाईं।

पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं
जेल अधिकारियों के अनुसार गिरिबाला सिंह पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं। उन्होंने साफ पानी की मांग भी की।

विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा
एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस की संवेदनशीलता को देखते हुए गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अलग- अलग रखा गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार शाम दोनों को जेल लाने के बाद से ही उन्हें विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सामान्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया
न्यायिक हिरासत में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में रखा गया है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पैर में चोट लग गई थी जिसके कारण खंड-बी स्थित मेडिकल वार्ड में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है। समर्थ सिंह, कड़ी निगरानी में है। उन्हें भी आम बंदियों के समान नाश्ते के रूप में सुबह दलिया और नमकीन के साथ चाय भी दी गई।

14 दिन की न्यायिक हिरासत
जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने यह फैसला दिया. इससे पहले 29 जून को कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था. आज यानी 2 जून को दोनों की रिमांड खत्म हो रही थी। 

27 मई को हुई थी गिरिबाला की गिरफ्तारी

सीबीआई ने गुरुवार (27 मई) को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी गुरुवार (27 मई) को तब हुई, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. समर्थ सिंह को 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद, लगभग एक सप्ताह तक लापता रहने के बाद, भोपाल पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 

समर्थ सिंह को सबसे पहले 23 मई को भोपाल में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में पेश किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 29 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई ने आगे की पूछताछ के लिए समर्थ की हिरासत की मांग की थी. कोर्ट के आदेश के बाद वह 16 जून तक हिरासत में रहेंगे। 

कथित तौर पर ट्विशा शर्मा अपने ससुराल कटारा हिल्स में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. बाद में उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच की मांग उठी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ को कथित अपराध स्थल पर ले गई और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की. सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर पर कई घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की और सबूत इकट्ठा किए, साथ ही समर्थ से 12 मई की रात की घटनाओं के बारे में पूछताछ भी की। 

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