पर्यावरण संरक्षण एक युग का संकल्प; जल की हर बूंद में भविष्य की धड़कन

भोपाल 

विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म मंथन और संकल्प का अवसर है। यह वह क्षण है जब हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को पुनः स्मरण करते हुए एक ऐसे भविष्य की कल्पना करनी चाहिए, जहां जल, जंगल और जमीन सुरक्षित हों। आज आवश्यकता केवल एक दिन के संकल्प की नहीं, बल्कि आने वाले युगों तक चलने वाले जन-संकल्प की है।

पीढ़ियों से हम सुनते आए हैं. “जल ही जीवन है।” किंतु विडंबना यह है कि इस सत्य को समझने में हमें एक गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा। आज यह संकट किसी एक मोहल्ले, शहर, राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा वैश्विक प्रश्न बन चुका है। भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक जल स्रोतों को तेजी से क्षीण कर दिया है। ऐसे समय में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजना मानवता का सबसे बड़ा दायित्व बन गया है। जल संकट की गंभीरता केवल पानी की कमी तक सीमित नहीं है। भू-जल स्तर का निरंतर गिरना, नदियों का प्रदूषित होना, पारंपरिक जल स्रोतों का लुप्त होना और वर्षा जल का व्यर्थ बह जाना इस संकट के प्रमुख कारण हैं। गांवों और नगरों की जीवन रेखा रहे तालाब, बावड़ियाँ और कुएं आज उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं। दूसरी ओर कृषि और उद्योगों में भूजल के अंधाधुंध दोहन ने स्थिति को और अधिक विकट बना दिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” आशा की एक सशक्त किरण बनकर उभरा है। यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक सामाजिक आंदोलन है, जिसका मूल मंत्र है…“जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन।” इसका उद्देश्य जल संकट के मूल कारणों का समाधान करते हुए समाज को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना है।

मैंने स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर तथा गृह नगर गोटेगांव में सिंगरी नदी के पुनर्जीवन के लिये सफाई अभियान चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण का प्रयास किया है। इसी अनुभव के आधार पर मैं सदैव आह्वान करता हूं—“नदियों को नाला बनाना बंद करें।” वास्तव में नदी का उद्गम स्थल ऊर्जा का केंद्र होता है और जहां नदियों का संगम होता है, वहां जीवन की नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। इसलिए नदियों के उद्गम और उनके प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करना हमारा सामूहिक दायित्व है। मेरे आराध्य परम पूज्य  बाबा  जी की वाणी है कि संकल्प में विकल्प नहीं होता। संकल्प में विक्लप खोजने पर महानतम कार्य रुक जाते हैं।

“जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी धरती में समाहित होकर भू-जल स्तर को पुनर्जीवित कर सके। जल स्रोतों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण की प्राकृतिक प्रक्रिया मजबूत हो सके। साथ ही नदियों में प्रदूषण रोकने और गंदे नालों के प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस अभियान के परिणाम उत्साहवर्धक हैं। जल संरचनाओं की सफाई और गहरीकरण से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। अनेक ऐतिहासिक तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर जल उपलब्धता बढ़ी है। “पानी चौपाल” जैसे कार्यक्रमों ने लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की है और जल बचाने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है। कृषि क्षेत्र में भी इस अभियान ने सकारात्मक प्रभाव डाला है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो । यह न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी आधार बन रहा है। जल संकट के स्थायी समाधान के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास भी आवश्यक हैं। शहरों में अपशिष्ट जल का शोधन कर पुनः उपयोग किया जाना चाहिए। औद्योगिक प्रदूषण पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है और व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें पानी की बर्बादी रोकने की आदत विकसित करनी होगी। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।

जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व है। आज यदि हम जल को सहेजेंगे, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें अपनी प्राचीन जल संस्कृति से जोड़ते हुए वैज्ञानिक जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग देखना है।

आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जल की हर बूंद को बचाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। क्योंकि सच यही है—पानी को सहेजना ही आने वाली पीढ़ियों को बचाना है और जल का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है। भारत की भूमी और मौसम दोनों हमें संदेश दे रहे हैं 5 जून से पौधारोपण की तैयारी करें और वर्षा प्रारंभ होने पर पौधरोपण “विश्व पर्यावरण दिवस” आहवान सुफल औऱ सफल होगा।

 

भोपाल में आँधी-अँधड़ से विद्युत प्रदाय में आई बाधा को दूर करने युद्ध स्तर पर कार्रवाई जारी

भोपाल

राजधानी भोपाल में गुरुवार की शाम आये तेज आँधी-अँधड़ और वर्षा से विद्युत प्रदाय में व्यापक व्यवधान और हानि पहुँची। प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल शहर में लगभग 300 फीडर पूर्ण या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर विद्युत संरचना को गंभीर क्षति पहुँची है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी की टीम मैदान में कार्य कर रही है। सभी स्थानों पर यथाशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने युद्ध स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

ऊर्जा मंत्री  तोमर ने लिय जायजा

ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुँचकर आँधी-अँधड़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया है।

मध्यप्रदेश पुलिस की संपत्ति संबंधी अपराधों के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई

भोपाल 

प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने, अपराधियों की गिरफ्तारी तथा चोरी एवं लूट की वारदातों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं रेल पुलिस इकाइयों द्वारा विगत चार दिनों में की गई कार्रवाई में 79लाख रुपये से अधिक मूल्य की चोरी एवं लूटी गई संपत्ति बरामद करते हुए अनेक शातिर एवं अंतर्राज्यीय अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

गुना

गुना पुलिस ने संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महत्वपूर्ण मामलों का सफल खुलासा किया। कैंट थाना क्षेत्र के गोविन्द गार्डन में हुई चोरी की वारदात का मात्र 36 घंटे में पर्दाफाश कर आरोपी को गिरफ्तार किया तथा उसके कब्जे से लगभग 16 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्‍त किए गए। वहीं कोतवाली थाना पुलिस ने स्नेचिंग की घटना का केवल 6 घंटे में खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये मूल्य का मंगलसूत्र एवं वारदात में प्रयुक्त चोरी की मोटरसाइकिल जब्त की।

इंदौर

इंदौर पुलिस ने  दिगम्बर जैन नवग्रह जिनालय में हुई चोरी की घटना में फरार चल रहे तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे प्रकरण का सफल खुलासा किया। मामले में कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से अष्टधातु की मूर्तियां, चांदी का कलश, धार्मिक सामग्री, वारदात में प्रयुक्त वाहन एवं उपकरण सहित लगभग13 लाख 15 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की गई है। जांच में आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न राज्यों में चोरी, लूट एवं नकबजनी के कई प्रकरण दर्ज पाए गए हैं।

बैतूल

जिले की बोरदेही पुलिस ने बैंक से नगद राशि निकालकर लौट रहे व्यक्ति से हुई 9 लाख रुपये की लूट की सनसनीखेज वारदात का सफल खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने सुनसान मार्ग पर फरियादी की आंखों में मिर्च पाउडर फेंककर एवं चाकू की नोक पर वारदात को अंजाम दिया था।

सागर

जिले के थाना देवरी पुलिस ने चोरी के प्रकरण का निराकरण करते हुए 7 लाख 57 हजार रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण एवं 1 लाख रुपये नगद सहित लगभग8 लाख 57 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की।

खरगोन

जिले की मण्डलेश्वर पुलिस ने सिविल अस्पताल मण्डलेश्वर की नई बिल्डिंग में ऑक्सीजन पाइप, मेडिकल उपकरण, एसी यूनिट, फायर सेफ्टी उपकरण एवं अन्य सामग्री चोरी करने वाले तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने लगभग 7 लाख 80 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

सीहोर

पुलिस ने विद्युत लाइनों से तार चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 11 केव्ही लाइन के 19 गाले विद्युत तार एवं वारदात में प्रयुक्त पिकअप वाहन सहित लगभग 5 लाख 80 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

विदिशा

बासौदा शहर पुलिस ने 300 सीसीटीवी फुटेज एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से लगभग 5 लाख रूपए मूल्य के 30 ग्राम सोने एवं 150 ग्राम चांदी के आभूषण जब्‍त किए।

अशोकनगर

जिले के थाना ईसागढ़ क्षेत्र में दो मकानों में हुई चोरी की वारदात का पुलिस ने मात्र 24 घंटे में खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चोरी गए सोने-चांदी के जेवरात, नगदी एवं वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 4 लाख रुपये की संपत्ति जब्‍त की।

शिवपुरी

जिले में थाना बदरवास, रन्नौद एवं इन्दार पुलिस की संयुक्त टीमों ने सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य के घर हुई चोरी की वारदात का खुलासा कर लगभग 4 लाख रुपये की संपत्ति जब्‍त की है।

रेल पुलिस

रेल पुलिस भोपाल ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए चलती ट्रेन में महिला यात्री का पर्स झपटकर फरार हुए अंतर्राज्यीय आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2 लाख 8 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की। वहीं जीआरपी जबलपुर की चौकी पिपरिया पुलिस ने एक शातिर चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1 लाख 19 हजार रुपये का चोरी गया सामान जब्‍त किया।

प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीक, तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज, साइबर इनपुट एवं मुखबिर तंत्र की सहायता से त्वरित एवं परिणामन्‍मुखी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की इन सफलताओं से अपराधियों में कानून का भय बढ़ा है तथा आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध इसी प्रकार प्रभावी, कठोर एवं निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।

 

ग्लोबल स्किल्स पार्क में साइबर सिक्योरिटी और एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश को फ्युचर रेडी, प्रतिभा-संपन्न और प्रौद्योगिकी-संचालित राज्य बनाने के विजन को साकार करने की दिशा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सतत प्रयासरत है इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा 3 दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआरजीएसपी), भोपाल में गुरुवार को किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2025 की परिकल्पना से प्रेरित यह पहल राज्य सरकार की उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में दक्ष बनाकर उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम अग्रणी वैश्विक औद्योगिक साझेदार के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें एलएनसीटी, बंसल, ओरिएंटल, आईईएस और एआईएसईसीटी सहित प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागियों को उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्योगों की कार्यप्रणालियों और व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराया जा रहा है।

एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश शर्मा ने कहा कि संस्थान उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ एक अग्रणी कौशल विकास संस्थान के रूप में स्थापित हुआ है। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप निरंतर सीखने, नवाचार अपनाने और अपने कौशल को लगातार उन्नत करने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन साइबर सिक्योरिटी विषय पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। सत्रों में डेटा की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता, डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा, संवेदनशील सूचनाओं के संरक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जोखिमों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पहचान एवं अभिगम प्रबंधन (आईडेंटिटी एंड एक्सेस मैनेजमेंट), प्रमाणीकरण प्रणाली, पासवर्ड सुरक्षा और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और रैनसमवेयर जैसे साइबर खतरों के बारे में भी अवगत कराया गया। वास्तविक उदाहरणों और केस-स्टडी आधारित चर्चाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा चुनौतियों और उनके समाधान की व्यावहारिक समझ प्रदान की गई। इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार और साइबर सुरक्षा जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के आगामी सत्रों में साइबर सिक्योरिटी और एआई/एमएल से जुड़े उन्नत विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाते हुए मध्यप्रदेश में उद्योग-संलग्न कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

 

स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ एवं उनकी सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ फर्नीचर, उपकरण एवं मानव संसाधन (एचआर) की समय पर व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने ऐसे कार्यों के प्रस्ताव, जिनमें कार्यस्थल के अनुसार परिवर्तन अथवा कार्य में वृद्धि की आवश्यकता है, शीघ्र अग्रेषित करने के निर्देश दिए और कहा कि उनकी स्वीकृति के लिए प्राथमिकता से कार्यवाही की जाए।

आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के साथ ही फर्नीचर, उपकरणों एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं तथा मैन पावर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे संस्थानों के संचालन में किसी प्रकार की विलंब की स्थिति न बने। बैठक में बताया गया कि पीआईयू द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बीपीएचयू, सीसीएचबी, औषधालय सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के कुल 137 निर्माण कार्य वर्ष 2026-27 में किए जा रहे हैं। इनमें से 45 स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। जून माह के अंत तक 7 अतिरिक्त स्वास्थ्य संस्थानों का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। द्वितीय तिमाही में 28, तृतीय तिमाही में 33 तथा वित्तीय वर्ष के अंत तक 13 स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में पीआईयू के अधिकारी उपस्थित थे।

 

भारत सरकार के मॉडल फायर एक्ट के अनुरूप बनाये नियम : मंत्री विजयवर्गीय

भोपाल 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने मंत्रालय में प्रस्तावित मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 और मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 के प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की। मंत्री  विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन दोनों विधेयकों में आज की बैठक में दिए गए सुझावों के अनुसार आवश्यक संशोधन कर इन्हें अगले सप्ताह पुनः प्रस्तुत किया जाए।

भारत सरकार के ‘मॉडल एक्ट’ के अनुरूप हों नियम

मंत्री  विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 में भारत सरकार के ‘मॉडल एक्ट’ के नियमों के अनुसार परिवर्तन किए जाएं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश में बड़ी इमारतें, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रीज आएंगी, जिसके अनुरूप हमारे पास अत्याधुनिक उपकरण (well equipment), बेहतर तकनीक (well technology) और प्रशिक्षित मानव संसाधन होना चाहिए, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति में विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा सके।

अधिकारियों की योग्यता का निर्धारण और एग्जिट प्लान का प्रदर्शन अनिवार्य

मंत्री  विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि फायर सेफ्टी ऑफिसर और अन्य तकनीकी व्यक्तियों की शैक्षणिक योग्यता व अनुभव का स्पष्ट निर्धारण किया जाए तथा अन्य राज्यों के नियमों का भी अध्ययन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बिल्डिंगों में एग्जिट प्लान और पाइपलाइन का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘फायर टैक्स’ लेने के सुझाव पर भी चर्चा की गई।

वर्तमान संसाधनों की समीक्षा एवं आगामी प्रशिक्षण की आवश्यकता

मंत्री  विजयवर्गीय ने वर्तमान में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद में उपलब्ध फायर स्टेशन, फायर ब्रिगेड और कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन के लिए विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था करवाई जाए, जिससे अमला किसी भी आपात स्थिति में कार्य करने में पूरी तरह सक्षम हो।

कॉलोनी अधिनियम : अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई और आमजन की सुविधा का ध्यान

बैठक में मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 के प्रस्तावित प्रारूप का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इसमें कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण, विकास अनुज्ञा, नियमों के उल्लंघन और अनधिकृत, अविकसित व अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई से जुड़े नियमों पर चर्चा की गई। मंत्री  विजयवर्गीय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित किया जाए, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी भी स्थिति में आम जनता को कोई परेशानी उत्पन्न न हो।

मंत्रालय में समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार दुबे, नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे, अपर आयुक्त  कैलाश वानखेड़े सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले पद्म अवार्डी गुंदेचा और डॉ. व्यास

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मोहन से वर्ष 2012 में पद्म से सम्मानित शास्त्रीय गायक  उमाकांत गुंदेचा और वर्ष 2026 के लिए पुरातत्व विज्ञान क्षेत्र में पद्म से सम्मानित डॉ. नारायण व्यास ने सौजन्य भेंट की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट के दौरान डॉ. व्यास ने बताया कि उन्होंने पद्म डॉ. विष्णु धर वाकणकर के साथ भोपाल के निकट रायसेन जिले के प्रख्यात शैल चित्रकला स्थल भीमबैठका से संबंधित अनुसंधान के अलावा गुजरात में अहमदाबाद के पास रानी की वाव की ऐतिहासिक बावड़ी से संबंधित अनुसंधान में भी योगदान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुरातत्व क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों से संबंधित प्रकाशन भी भेंट किए। इस वर्ष प्राप्त पद्म सम्मान और प्रशस्त्रि-पत्र से भी अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुंदेचा से शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियों पर भी चर्चा की।

 

हनोदा माइनर नहर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई

रायपुर

 जल संसाधनों के संरक्षण तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले में हनोदा माइनर नहर क्षेत्र में विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जल संसाधन विभाग एवं नगर पालिक निगम रिसाली की संयुक्त टीम ने नहर क्षेत्र एवं विभागीय स्वामित्वाधीन शासकीय भूमि पर वर्षों से किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।        

हनोदा माइनर नहर डी.पी.एस. स्कूल से वी.आई.पी. नगर तक नगर पालिक निगम रिसाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। यह नहर क्षेत्र जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नहरों एवं उनसे संबद्ध शासकीय भूमि का संरक्षण जनहित से जुड़ा विषय है। इन क्षेत्रों में किए गए अतिक्रमण न केवल शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आते हैं, बल्कि नहरों के अनुरक्षण, निरीक्षण एवं मरम्मत कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करते हैं।        

प्रशासन द्वारा कार्रवाई से पूर्व संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए संयुक्त दल ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।           

अभियान के दौरान नगर पालिक निगम रिसाली एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्रवाई को सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया, जिससे नहर क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा सका।        

कार्यपालन अभियंता  आशुतोष सारश्वत ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अधीन नहरों, जल संरचनाओं, अनुरक्षण मार्गों तथा शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र की सभी नहरों एवं शासकीय परिसंपत्तियों की सतत निगरानी की जा रही है और जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां बिना किसी भेदभाव के वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।     

उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि एवं जल संरचनाएं सार्वजनिक संपत्ति हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। इन परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।          
 

जल संसाधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नहरों, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें और इनके संरक्षण में प्रशासन का सहयोग करें। सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण से ही जनहित एवं विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकती है।

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम

इंदौर में 6 जून को होगा भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम 2026
लैटिन अमेरिका एवं 15कैरिबियन देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि होंगे शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में निवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई गति देने के उद्देश्य से 6 जून को इंदौर में भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC) व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 की बैठक होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के सहयोग से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फोरम (GIBF) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम का आयोजन मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के सहयोग से रेडिसन ब्लू, इंदौर में होगा।

फोरम में लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें विभिन्न देशों के राजदूत, एक उच्चायुक्त और एक महावाणिज्यदूत शामिल होंगे। इनके साथ निवेशक, निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, व्यापार आयुक्त, एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वरिष्ठ शासकीय अधिकारी सहित 350 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। चार प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल भी इसमें सहभागिता करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा निवेश संवर्धन और वैश्विक सहभागिता को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर अधोसंरचना, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी दिशा में यह फोरम भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण साबित होगा।

मध्यप्रदेश का निर्यात प्रदर्शन भी लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य से लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र को लगभग 4,186 करोड़ रूपये का निर्यात दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक है। इस निर्यात में फार्मा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्राज़ील, मैक्सिको और चिली, राज्य के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और वैश्विक साझेदारियों को लेकर फोरम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भारत एलएसी विशेष संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं और औद्योगिक अवसरों पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा निवेश प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही व्यापार एवं निवेश के अवसरों, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग तथा सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर केंद्रित पैनल होंगे। विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चर्चा में औषधि, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल रहेंगे, जबकि सेवा क्षेत्र की चर्चा में सूचना-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फिनटेक तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

फोरम में उद्योगों और निवेशकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देने के लिए बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों को गति मिलेगी।

भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति, निवेश आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।

 

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास

भोपाल

अधिकतर उपभोक्ता बिजली का बिल ज्यादा आने पर स्मार्ट मीटरों या बिजली कंपनी को शिकायत हैं जबकि वास्तविकता यह है कि उपकरणों के ज्यादा उपयोग से बिजली का बिल ज्यादा आता है। यदि आप थोड़ी सी सावधानी बरतें तो बिल ज्यादा आने की आपकी चिंता बढ़ेगी नहीं। आप चाहें तो अपने बढ़ते बिल को नियंत्रण में रख सकते हैं। बस आपको अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। एक आंकलन के अनुसार अधिकांश शहरवासी रिमोट चलित विद्युत उपकरणों को ‘‘स्टैंडबाय’’ मोड पर छोड़़ देते हैं, जिससे उपकरण तो बंद हो जाते हैं परन्तु इनमें सतत् विद्युत प्रवाहित होती रहती है।

यदि आप रिमोट से चलने वाले उपकरणों को स्विच ऑफ नहीं करते है और रिमोट से बंद करके उपकरणों को छोड़ देते हैं तो बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे बिल बढ़ जाता है।

एक सर्वे के अनुसार 70 फीसदी लोग टी.वी. को मैन स्विच से ऑन-ऑफ न करके रिमोट से ऑन-ऑफ करते हैं। इससे टी.वी.ऑफ होने के बावजूद भी पॉवर सप्लाई चालू रहती है। इससे 21 इंच के टी.वी. में 15 वाट का करंट निरन्तर प्रवाहित होता रहता है एवं आपके मीटर को आगे बढ़ाता रहता है, जिसके कारण इन 70 फीसदी लोगों को हर महीने लगभग 200 रूपये और हर साल 1500 रूपये का अतिरिक्त भार सहना पड़ता है।

इलेक्ट्रीशियन की सलाह के अनुसार एक व्यवसायी द्वारा 1200 वॉट क्षमता के एलईडी बल्ब अपने घर में लगाने के लिए खरीद लिए गए। इसी प्रकार एलईडी ट्यूबलाईट एवं ऊर्जा दक्ष पंखे लगा लिए तो उनके घर में बिजली की 30 प्रतिशत तक बिजली बचत हुई।

बिजली विशेषज्ञों के अनुसार अब तो एल.ई.डी. जैसे उपकरण बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, उनके उपयोग से और अधिक बिजली की बचत और ज्यादा रोशनी प्राप्त हो सकती है।

हर महीने लगभग 75 रूपये की चपत

 म्यूजिक सिस्टम, टी.वी., ए.सी., कम्प्यूटर आदि स्टैंडबाय मोड पर 5 से 15 वॉट तक बिजली की खपत करते हैं। अगर महीने भर भी टी.वी. बंद रहे जब भी 15 वॉट के हिसाब से एक दिन में 0.36 यूनिट व 30 दिन में 10.8 यूनिट बिजली खर्च होती है।

कम्प्यूटर

 कम्यूटर के मॉनिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। अतः उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें।

एलईडी बल्ब

वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत हेतु अतिउत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं।

सीलिंग फैन

वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं।

फ्रिज

 फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने हेतु फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है।

एयर कंडीशनर्स (एसी)

 26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

 

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