इंदौर मेट्रो को मिली नई रफ्तार: 18 जून से रेडिसन चौराहा तक दौड़ेगी ट्रेन

इंदौर
इंदौर में लंबे इंतजार के बाद अब मेट्रो का सफर बढ़ेगा और यात्री भी। अभी तक मेट्रो ट्रेन सात किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन होगा। मेट्रो को हरी झंडी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर दिखाएंगे। दो माह पहले मेट्रो के कमर्शियल रन की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन संचालन अब शुरू होगा। 

एक साल के इंतजार के बाद अब मेट्रो सुपर कॉरिडोर से आगे बढ़कर रेडिसन चौराहे पर यात्रियों के साथ पहुंचेगी। इंदौर में 18 जून से सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल मेट्रो ट्रेन के किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकतम 80 रुपये तक किराया होगा।

बढ़ेगी यात्री संख्या
अभी मेट्रो जिस हिस्से में चलती है, वह आबादी क्षेत्र नहीं है। इस कारण मेट्रो को काफी कम यात्री मिलते थे, लेकिन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का संचालन होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि सुपर कॉरिडोर की आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसका ज्यादा उपयोग करेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जाने वाले यात्री भी इसका उपयोग कर सकेंगे, हालांकि उन्हें गांधी नगर से फिर ऑटो रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाकर एयरपोर्ट तक जाना होगा।गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्पीड में मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार हो चुका है।

80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन
17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 20 मिनट का समय लगेगा। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 17 किलोमीटर तक के संचालन में अधिकतम किराया 80 रुपये तक होगा। जब 30 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो ट्रैक का काम पूरा होगा, तो हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलेगी।

शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।

 

महाकाल मंदिर के ‘त्रिनेत्र’ का देशभर में डंका, AI निगरानी प्रणाली को मिलेगा ई-गवर्नेंस अवार्ड

उज्जैन
उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा घोषित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों की सूची में महाकाल मंदिर की इस अत्याधुनिक प्रणाली का चयन किया गया है।

यह सम्मान मंदिर प्रबंधन द्वारा तकनीक के माध्यम से सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।

बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बना सुरक्षा का मजबूत कवच
अक्टूबर 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 80 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं श्रावण मास, पर्व-त्योहारों, विशेष तिथियों और अवकाश के दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसी चुनौती से निपटने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम विकसित किया, जिसे ‘त्रिनेत्र’ नाम दिया गया।

AI तकनीक से हो रही हर गतिविधि की निगरानी
‘त्रिनेत्र’ प्रणाली मंदिर परिसर में स्थापित कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से भीड़ के मूवमेंट, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखती है। इससे भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक ने न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि व्यवस्थाओं को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डिजिटल नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए चयन महाकाल मंदिर में लागू डिजिटल नवाचारों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर प्रशासन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर तकनीक आधारित प्रबंधन मॉडल को भी नई पहचान दिलाने वाली है।

ऐसे काम करता है सिस्टम
    इसके तहत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और श्री महाकाल महालोक परिसर में 600 से अधिक एडवांस एआइ आधारित कैमरे लगाए गए हैं।

    सभी कैमरों को खास कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। यहां से सुरक्षाकर्मी और अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।

    यह सिस्टम श्रद्धालुओं की संख्या की सटीक जानकारी, भीड़ वाले क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों का पता लगाता है।

    सिस्टम से प्राप्त सटीक जानकारी से अधिकारी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बेहतर कदम उठा पाते हैं।

 

सिंहस्थ से पहले मिलेगी मेडिसिटी की सौगात, मध्यप्रदेश की पहली हेल्थ सिटी का काम तेज

उज्जैन 

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले मेडिकल कालेज प्रारंभ करने की तैयारी है। सरकार इसे प्रदेश की पहली मेडिसिटी के तौर पर विकसित कर रही है। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी एक मेडिसिटी बनाने की घोषणा की थी। अगला विधानसभा चुनाव 2028 के अंत में संभावित हैं, इसके पहले सरकार मेडिसिटी प्रारंभ करने की तैयारी कर रही है।

शैक्षणिक सत्र 2027-28 से मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए अगले वर्ष नेशनल मेडिकल कमीशन को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) द्वारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यहां एमबीबीएस 150 सीटें होंगी। उज्जैन के साथ मंडला और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। वर्ष 2026 में बुधनी, दमोह और छतरपुर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए डीएमई की तरफ से एनएमसी को आवेदन किया जा चुका है।

एमबीबीएस सीटें 3450 पहुंच जाएंगी
दो वर्ष में छह नए कालेज खुलने से प्रदेश में 25 शासकीय कॉलेज हो जाएंगे, जिनमें एमबीबीएस की कम से कम 3450 सीटें हो जाएंगी। इसी तरह से पीपीपी माडल सहित 13 नए निजी मेडिकल कॉलेज भी खुलने की स्थिति में हैं। इनमें 1300 सीटें होंगी।

इस प्रकार शासकीय और निजी मिलाकर 1900 सीटें बढ़ जाएंगी। अभी प्रदेश के 19 शासकीय कालेजों में एमबीबीएस की 2850 और 14 निजी कॉलेजों में 2700 सीटें मिलाकर कुल 5550 सीटें हैं। 2028 तक यह 7450 हो जाएंगी। सब कुछ योजना के अनुरूप चला तो वर्ष 2033 तक हर साल 7450 डाक्टर तैयार होने लगेंगे।

क्या-क्या सुविधा रहेगी उज्जैन की मेडिसिटी में
    एमबीबीएस की 150 सीट वाला अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज होगा। इससे संबद्ध 550 बिस्तरों का अस्पताल होगा, जिसमें सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी होंगी।

    ऐसा डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया जा रहा है जिसमें सभी पैथोलाजिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल, रेडियोडायग्नोसिस की जांचें एक जगह पर हो सकेंगी।

    एकीकृत स्वास्थ्य के अंतर्गत आयुष की पैथियों में उपचार की सुविधा और वेलनेस सेंटर बनेंगे। वेलनेस सेंटर बनाने का उद्देश्य बीमारी से बचाव (प्रिवेंशन) को लेकर है, जिसमें योग-ध्यान भी कराया जाएगा।

    मेडिसिटी के माध्यम से स्वास्थ्य पर्यटन को आकर्षित करने की योजना है।
    डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा भी रहेगी।

सीएम केयर योजना : वर्ष 2028 से मिलने लगेगा लाभ
सरकार ने इसी वर्ष सीएम केयर योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। इसके अंतर्गत पांच वर्ष में 3628 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं पर फोकस है। कैंसर में मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, आर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जानी हैं।

साथ ही सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का प्रदेशस्तरीय अस्पताल भी भोपाल या उज्जैन में बनाने पर विचार चल रहा है। बता दें, लगभग 50 प्रतिशत कॉलेजों में अभी भी यह सेवाएं मिल रही हैं, पर कुछ जगह अलग से विभाग तक नहीं हैं।

संसाधनों की बहुत अधिक कमी है। सीएम केयर में आने के बाद संबंधित कॉलेजों में अलग सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक बनेगा। अलग से बजट होगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि सुपरस्पेशियलिटी सीटें भी बढ़ जाएंगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए विगत 05 दिनों में 01 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक मूल्‍य के अवैध मादक पदार्थ सहित संपत्ति जब्‍त की हैं। इन कार्रवाइयों में गांजा, स्मैक, अफीम, एमडी ड्रग्स एवं डोडाचूरा जैसे मादक पदार्थों की बड़ी खेप जब्‍त करते हुए अनेक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

बड़वानी

जिले के वरला थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पांजरिया से 01 क्विंटल 47 किलोग्राम गांजा जब्‍त कर लगभग 32 लाख 34 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। प्रकरण में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

शिवपुरी

जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 11.53 ग्राम एवं 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार नगद तथा मोटरसाइकिल सहित लगभग 30 लाख 52 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

दतिया

जिले की बसई थाना पुलिस ने 86.85 किलोग्राम गांजा एवं कार सहित लगभग 20 लाख रूपये की संपत्ति जप्‍त कर एक तस्कर को गिरफ्तार किया।

गुना

जिले के मृगवास थाना पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 100.59 ग्राम स्मैक एवं 10 किलोग्राम से अधिक गांजा जप्त कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। तस्करी में प्रयुक्त वाहन सहित लगभग 17 लाख रूपये की संपत्ति जप्‍त की है।

दमोह

जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में 115.95 ग्राम स्मैक तथा 3 किलोग्राम गांजा जप्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्रवाइयों में लगभग 12 लाख 35 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है।

आगर मालवा

जिले के थाना बड़ौद पुलिस ने 102किलो250 ग्राम अवैध डोडाचूरा, एक कार एवं मोटरसाइकिल सहित कुल 11 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जप्त की।

रतलाम

जिले के माननखेड़ा चौकी पुलिस ने 3 किलो150ग्राम अवैध अफीम के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 6 लाख 30 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है।

इंदौर

जिले में द्वारकापुरी एवं चंदन नगर थाना पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाइयों में 4 किलो83ग्राम गांजा तथा 18.59 ग्राम एमडी ड्रग्स जप्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने लगभग 5 लाख 81 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है।

मंदसौर

जिले में पुलिस ने 1 किलोग्राम अफीम, वाहन एवं मोबाइल फोन सहित लगभग 2 लाख 50 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

हरदा

जिले में कोतवाली पुलिस ने 9.06 ग्राम एमडी पाउडर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 56 हजार रूपये की संपत्ति बरामद की है।

खंडवा

जिले में पुलिस ने 12.5 किलोग्राम गांजा एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 1 लाख 78 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

उज्जैन

जिलेकी तराना पुलिस ने 11 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है।

भोपाल

क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 2 किलो681ग्राम गांजा, मोटरसाइकिल एवं मोबाइल फोन जप्त कर लगभग 1 लाख 41 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

सीधी

जिले में थाना मड़वास पुलिस ने ऑपरेशन “प्रहार 2.0” के तहत 3.722 किलोग्राम गांजा कीमत लगभग 55 हजार रूपये जप्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई निरंतर जारी है तथा इस प्रकार के अवैध कार्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा डायल-112 को दें। 

इंदौर के डायल-112 हीरोज इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में लगी आग, संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर बिल्डिंग में फँसे लोगों की बचाई जान

भोपाल

इंदौर जिले के थाना लसूड़िया क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, साहस एवं सूझबूझ से एक बड़े हादसे को टालते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में लगी आग के दौरान बिल्डिंग में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। डायल-112 एवं फायर ब्रिगेड के संयुक्त रेस्क्यू अभियान से कई लोगों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।

05 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना लसूड़िया क्षेत्र अंतर्गत स्कीम नंबर-136 स्थित एक इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में आग लग गई है तथा कुछ लोग बिल्डिंग के अंदर फँसे हुए हैं। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल थाना लसूड़िया क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक नरेंद्र मंडेलिया, आरक्षक  राधेश्याम कुशवाहा, आरक्षक रितेश पाटीदार, पायलट  राजेश यादव एवं  पवन दांगी तत्काल मौके पर पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए त्वरित रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। जवानों ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए बिल्डिंग में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड दल के साथ समन्वय स्थापित कर आग बुझाने की कार्यवाही कराई गई। संयुक्त प्रयासों से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और एक संभावित बड़ी जनहानि को टाल दिया गया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आगजनी, दुर्घटना एवं अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में भी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। संकट की हर घड़ी में डायल-112 जवान साहस, संवेदनशीलता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की सहायता कर रहे हैं।

 

राज्य वित्त आयोग 6 जून को करेगा नर्मदापुरम का दौरा

भोपाल 

मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग 6 जून को नर्मदापुरम संभाग की समीक्षा करेगा, जिसमें संबंधित जिलों के कलेक्टर्स, नगर पालिका अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

राज्य वित्त आयोग ने शुक्रवार को मंत्रालय में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग की समीक्षा बैठक की। देश में स्थानीय स्व शासन और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्य वित्त आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोतों और बजटीय प्रबंधन को लेकर मैराथन मंथन हुआ। बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य  के.के. सिंह एवं सदस्य सचिव  वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। महत्वपूर्ण बैठक में वित्त विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आयोग के अध्यक्ष  पवैया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की दीर्घकालिक वित्तीय सुदृढ़ता के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तथ्यों और आंकड़ों का संकलन कर विस्तृत अनुशंसाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

अध्यक्ष  पवैया ने केंद्रीय और राज्य वित्त आयोगों द्वारा अनुशंसित अनुदानों के हस्तांतरण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय निकायों की लेखांकन और ऑडिट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया। बैठक में आगामी सोलहवें वित्त आयोग के लिए आवश्यक वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक व्यवस्थाओं पर भी विभागों के साथ विस्तृत चर्चा हुई, जिससे केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का राज्यों को अधिकतम लाभ मिल सके। समीक्षा में स्थानीय निकायों को प्रदान की जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति और संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत प्राप्त राशि के हस्तांतरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वाणिज्यिक कर विभाग ने बैठक में राज्य के कर राजस्व, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के प्रभाव और इसके लागू होने के बाद प्राप्त क्षतिपूर्ति का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस बात पर विचार किया गया कि जीएसटी युग में स्थानीय निकायों के राजस्व को कैसे सुदृढ़ किया जाए। इसके अलावा, संपत्ति अंतरण पर लगने वाले अतिरिक्त मुद्रांक शुल्क और अन्य कराधान प्रावधानों की भी समीक्षा की गई, जिससे निकायों की आंतरिक आय में वृद्धि की जा सके।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर पंचम, पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग से प्राप्त राशि और उसके उपयोग की स्थिति जांची गई। बैठक में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों और ग्राम स्तर पर सेवा प्रदायगी की समीक्षा हुई। आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पंच-परमेश्वर योजना के तहत बुनियादी ढांचे का विकास और ई-पंचायत व्यवस्था के जरिए होने वाले डिजिटलाइजेशन की प्रगति देखी। साथ ही, पंचायतों की आय के आंतरिक स्रोत, कर संग्रहण क्षमता और शेल्टर टैक्स से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा की गई।

आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय निकायों की केवल अनुदानों पर निर्भरता को कम कर उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिए कर संग्रहण क्षमता को सुदृढ़ करने, वित्त आयोग के अनटाइड अनुदानों के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख उपयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए सभी संबंधित विभागों से व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

 

गोंड चित्रकला को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिलेगा वैश्विक मंच : मंत्री पटेल

भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। बुधवार को डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित ‘अमेज़न ई-कारीगर’ मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह सहित विभाग एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वैश्विक पहचान और जीआई टैग पर जोर

मंत्री  पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को ‘जीआई टैग’ (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही।

आर्थिक सशक्तिकरण और कला संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम

गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र डिंडौरी के पाटनगढ़ ग्राम के कलाकारों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कार्यक्रम में “आजीविका ग्राम संगठन” पाटनगढ़ और “डॉट्स एंड डैशेज” संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है।

आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य

यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। ‘डॉट्स एंड डैशेज’ के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रूपये से बढ़कर 70 हजार रूपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल डिंडौरी जिले में कला आधारित आजीविका का एक सफल उदाहरण स्थापित करेगी।

 

स्वच्छ और स्वस्थ भारत की दिशा में बड़ी पहल: पीएमएवाई-जी के तहत अब गाँवों में बनेंगे पर्यावरण अनुकूल

भोपाल

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को भविष्योन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हरित आवास तकनीक का उपयोग करने जा रही है। इस नवाचार से स्वच्छ और स्वस्थ भारत के संकल्प को बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आवास बनाए जाएंगे, जो स्थानीय संस्कृति और भू-जलवायु परिस्थितियों के पूरी तरह अनुकूल होंगे। हरित आवासों के माध्यम से जहाँ एक ओर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आवासों के ज़रिए सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ संसाधनों की रीसाइकलिंग भी हो सकेगी।

सीएसईबी तकनीक को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण

भवन निर्माण में हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘कंप्रेस्ड स्टेबलाइज्ड अर्थ ब्लॉक्स’ के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। महात्मा गांधी ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर के साथ क्षेत्रीय केंद्रों – जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सिवनी तथा नौगाँव-में सीएसईबी ब्लॉक बनाने वाली मशीनों की स्थापना की गई है। इन संस्थानों में राजमिस्त्रियों, जनपद अधिकारियों और कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे इन ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण कर सकें। भोपाल और इंदौर के केंद्रों द्वारा उक्त ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण भी किया जा चुका है।

इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत में न्यूनतम 25 आवास सीएसईबी ब्लॉक्स से बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सीईओ जिला पंचायत और सीईओ जनपद पंचायत के साथ ही आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को इसके सफल क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। हरित आवासों के निर्माण में बांस, स्थानीय मिट्टी और अन्य संसाधनों का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे न केवल कमरे का तापमान (इनडोर थर्मल कम्फर्ट) और आर्द्रता बेहतर होंगी और गर्मी से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय सामग्री के उपयोग के चलते कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार : मंत्री टेटवाल

भोपाल 

कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गौतम टेटवाल ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार हैं। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा बन चुका है।इसके संरक्षण और सुरक्षित उपयोग में साइबर सुरक्षा की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राष्ट्र की डिजिटल सीमाओं के प्रहरी हैं।

मंत्री  टेटवाल शुक्रवार को ग्लोबल स्किल पार्क, भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

मंत्री  टेटवाल ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नवाचार को अपनाने, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और तकनीकी रूप से सशक्त मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एमपीएसईडीसी की मुख्य महाप्रबंधक सु शिवांगी जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गिरीश शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर बल दिया।

एसएसआरजीएसपी-गोप के वरिष्ठ निदेशक  नीरज सहाय ने ग्लोबल स्किल पार्क को भारत का पहला एकीकृत बहु-कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप दक्ष एवं भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में “साइबर डिफेंस फंडामेंटल्स” विषय पर विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, साइबर खतरों तथा सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को मालवेयर, रैनसमवेयर, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और इनसाइडर रिस्क जैसे प्रमुख साइबर खतरों से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर किल चेन फ्रेमवर्क के माध्यम से साइबर हमलों की प्रक्रिया और उन्हें रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई।

सत्र में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ की अवधारणा, सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, साइबर हाइजीन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट एवं पैचिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं करियर अवसरों, विशेष रूप से एसओसी एनालिस्ट जैसी उभरती भूमिकाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।

 

मध्य प्रदेश में 65 साल बाद सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव, हत्या और भ्रष्टाचार के दोषी होंगे अपात्र

भोपाल

 राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी।
परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला

परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा।

नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार

प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए।
अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम

एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।
 

वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास

वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।

 

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