इलेक्ट्रिक कार में सफर करेंगे CM मोहन यादव, गाड़ी नंबर में छिपा खास संदेश बना चर्चा का विषय

भोपाल 

 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से सफर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा की गई पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील पर अमल करते हुए सीएम मोहन यादव ने इलेक्ट्रिक कार में सफर करने का फैसला लिया है। सीएम के फैसले के बाद अब उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल कर लिया गया है और ऐसा बताया जा रहा है कि शाम को पहली बार सीएम मोहन यादव इलेक्ट्रिक कार में सफर कर सकते हैं।

सीएम के काफिले में शामिल हुई इलेक्ट्रिक कार
सीएम मोहन यादव के द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत करने का फैसला लिए जाने के बाद उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। सीएम के काफिले के लिए नई इलेक्ट्रिक कार महिंद्रा XEV 9e खरीदी गई है, जो कि एक बार की चार्जिंग में करीब 500 किलोमीटर की रेंज देती है। सीएम मोहन यादव आज शाम को पहली बार सीएम हाउस से स्टेट हैंगर जाते वक्त इस इलेक्ट्रिक कार की सवारी कर सकते हैं।

कार के नंबर में छिपा है बड़ा संदेश
सीएम मोहन यादव के काफिले में जो इलेक्ट्रिक कार शामिल की गई है उसका नंबर MP 02VB 2047 है। सीएम हाउस से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार के नंबर में भी एक बड़ा संदेश छिपा है। कार के नंबर में विकसित भारत का संदेश है, V का मतलब विकसित और B का मतलब भारत है। 2047 नंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दर्शाता है।

मोदी के संदेश पर मोहन का अमल..अब EV पर होंगे सवार
मध्य प्रदेश के डॉ मोहन यादव बीजेपी शासित राज्यों के उन मुख्यमंत्रियों में से हैं, जिन्होंने पीएम की अपील का अमल सबसे पहले किया. वे मध्य प्रदेश के इकलौते मुख्यमंत्री होंगे, जो अब इलेक्ट्रिकल व्हीकल से सफर करेंगे. सीएम आज से ही इस पर अमल करेंगे. जानकारी के मुताबिक . बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेयी का कहना है कि “मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की ये पहल अनुकरणीय है और मिसाल बनेगी। 

मोहन यादव ईवी कार में चलेंगे
जिस तरह से उन्होंने पहले काफिले को सीमित किया और अब ईवी वाहन से चलने का निर्णय लिया है. निश्चित तौर पर पार्टी के भीतर ही नहीं बाकी समाज में भी ईंधन बचाने के साथ पर्यावरण को बचाने का जो संकल्प है, उससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी। 

ईवी कार में दर्ज विकसित भारत और 2047
इस ईवी कार का नंबर भी बेहद खास है. एमपी 03 सीरीज की इस कार का जो नंबर है, वो वी बी 2047 है. वीबी (VB) के मायने हैं विकसित भारत. जो 2047 का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तय किया है. मोहन यादव प्रदेश के इस लिहाज से पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन की सवारी का निर्णय लिया. हालांकि भारत के अन्य राज्यों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन शामिल कर लिए थे. इसी तरह से मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं। 

13 गाड़ियों से अब केवल पांच गाड़ियों का काफिला
मोहन यादव ने इससे पहले अपने काफिले की गाड़ियों को कम किया था. उनके काफिले में 13 गाड़ियां थी, जिन्हें कम करके 8 किया गया और फिर सीमित करके पांच गाड़ियों का काफिला ही बचा. कारकेड कम करने के बाद बीती दिल्ली यात्रा में सीएम डॉ मोहन यादव ने आम आदमी की तरह मेट्रो में यात्रा की थी. अब उसमें भी मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिलक वाहन से यात्रा करने का निर्णय लिया. सभी उच्च तकनीक से लैस महिन्द्रा कंपनी से बनी इस कार के फीचर हैं, एक बार की चार्जिंग में ये औसत 500 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय कर लेती है। 

इस कार के टॉप मॉडल की कीमत करीबन 31 लाख 25 लाख है. इसमें आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इस गाड़ी में पैनोरमिक सनरूफ है, जिससे केबिन में भरपूर प्राकृतिक रोशनी आती है और यात्रियों को खुले आसमान का शानदान नजारा मिलता है. इसमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा और कई दूसरे सुरक्षा फीचर्स होते हैं. इस गाड़ी में 79 किलोवॉट की लिथियम आयन बैटरी होती है, जो 20 मिनट में 80 परसेंट तक चार्ज हो जाती है. सिर्फ 6.8 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंच जाती है। 

एक महीने में बचेगा 6 हजार लीटर डीजल
गाड़ियों की संख्या कम करने से डीजल-पेट्रोल की खपत में बड़ी कमी आएगी. स्टेट गैरेज के सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2026 में वीआईपी वाहनों में करीबन 24 हजार लीटर डीजल की खपत हुई थी, जो मई माह में घटकर 18 हजार लीटर रह गई है. इस तरह एक माह में करीबन 6 हजार लीटर डीजल की कमी आई है। 

पीएम की अपील पर सीएम मोहन यादव ने किया अमल
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील करने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस पर अमल किया है। सबसे पहले सीएम मोहन यादव ने अपने काफिले से गाड़ियों की संख्या कम कराई थी और एक गाइडलाइन भी जारी की थी। इसके साथ ही बीते दिनों सीएम मोहन यादव खुद इंदौर से उज्जैन तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बस में यात्रा कर पहुंचे थे और सादगीपूर्ण प्रशासन का संदेश दिया था। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिए केवल तीन अन्य वाहन ही उनके साथ थे। इतना ही नहीं बस में यात्रा के दौरान ही सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई विकासकार्यों और जनहित की योजनाओं पर चर्चा भी की थी।

सीहोर में अमोनिया गैस रिसाव से हड़कंप, पुलिस और NDRF ने संभाला मोर्चा

सीहोर
 दोराहा थाना क्षेत्र के सोनाकच्छ टोल प्लाजा के पास आज यानि गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. कोटा से नागपुर की ओर जा रहे अमोनिया गैस से भरे एक टैंकर में अचानक रिसाव शुरू हो गया. गैस रिसाव की खबर मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत एक्शन में आई और समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया गया. राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। 

पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत रुकवाया टैंकर
जैसे ही अमोनिया गैस के रिसाव की सूचना मिली, दोराहा थाना पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए टोल टैक्स के पास ही टैंकर को रुकवाया और तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी. जहरीली गैस के फैलाव को रोकने के लिए एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमों को तत्काल मौके पर तैनात किया गया। 

नियंत्रण में स्थिति, नहीं कोई जनहानि
मामले के बारे में एसडीओपी पूजा शर्मा ने बताया कि “गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने मोर्चा संभाल लिया था. रिसाव को पूरी तरह से बंद करने और स्थिति को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार तकनीकी प्रयास किए जा रहे हैं. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। 

बताते चलें ​अमोनिया गैस बेहद तीखी और दमघोंटू होती है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सजगता के कारण इसे आबादी क्षेत्र में फैलने से पहले ही रोक दिया गया. इस सूझबूझ भरे ऑपरेशन की वजह से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया और हाइवे पर मौजूद राहगीरों व स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली। 

इससे पहले खंडवा में हुआ था LPG गैस का रिसाव
मध्य प्रदेश में गैस रिसाव की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. इससे पहले खंडवा में 13 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के पनवेल से जबलपुर जा रहे एलपीजी वैगन में गैस रिसाव हुआ था. यहां खंडवा रेलवे स्टेशन के आउटर पर 36 एलपीजी वैगन खड़ी थी, जिसमें अचानक रिसाव होने लगा था. जानकारी मिलते ही रेलवे व डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर वैगन को आइसोलेट किया था. यहां भी वक्त रहते प्रशासन ने एक्शन नहीं लिया तो बड़ी घटना हो सकती थी। 

एमपी में प्री-मानसून की दस्तक, 39 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; 5 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी

भोपाल
 पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते देश में मौसम तेजी से बदल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार इसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा. लोगों के चिलचिलाती जलन देने वाली गर्मी से राहत मिल सकेगी. मौसम विभाग ने राजधानी भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश के 39 जिलों में तेज आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। 

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि “वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी रहने वाले हैं. प्रदेश के 39 जिलों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर और दक्षिण भारत से आ रही नमी मध्य प्रदेश के एक बड़े हिस्से में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के हालात बना रही है. ऐसे में लोगों को अगले 48 घंटों तक सावधान रहने की सलाह दी गई है. जिला प्रशासन को सतर्क रहने के साथ लोगों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे नहीं ठहरने की एडवाइजरी जारी की गई है। 

अचानक मौसम बदल रहा है
मौसम विभाग के हिसाब से इस वक्त एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव है, जिसके चलते अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आ रही है. ऐसे में दोनों सिस्टम जब आपस में मिलते हैं तो हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. कई क्षेत्रों में बिजली की कड़कड़ाहट के साथ ओले गिरने की आशंका है। 

मौसम विभाग ने नीमच, श्योपुर, मुरैना, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि के साथ 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। भोपाल में सुबह से बादल छाए हैं। कई इलाकों में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी हुई। इसके अलावा रायसेन, सीहोर और नर्मदापुरम में भी बारिश हुई।

उज्जैन, जबलपुर, सागर और रीवा संभाग के 33 जिलों में 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश और आंधी का दौर बना हुआ है। इसी कारण इस बार मानसून की दस्तक सामान्य तिथि 15 जून की बजाय 20 से 22 जून के बीच होने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट रहने की सलाह दी गई
तेजी से मौसम में आ रहे बदलाव के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बहुत परेशानियां ला सकते हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहने की सलाह दी गई है. खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका के चलते मध्य प्रदेश के किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है. अगले 48 घंटों में मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मौसम के सबसे ज्यादा आक्रामक रुख रखने की आशंका है. भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभागों में तेज हवाओं के साथ ओले गिर सकते हैं। 

40 डिग्री से ऊपर पारा…रतलाम सबसे गर्म
मध्य प्रदेश में बुधवार को आंधी-बारिश के दौर के बीच कुछ शहरों में तेज धूप भी खिली। इससे तापमान 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया। सबसे ज्यादा रतलाम में 42 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 41.8 डिग्री, राजगढ़ में 40.6 डिग्री, मलाजखंड-खंडवा में 40.5 डिग्री, खजुराहो-सागर में 40.3 डिग्री, नरसिंहपुर में 40.2 डिग्री, नौगांव, दमोह, उमरिया-मंडला में 40 डिग्री सेल्सियस रहा।

बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 39.4 डिग्री, इंदौर में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 38.9 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 39.8 डिग्री दर्ज किया गया।

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का बदला नाम, अब ‘मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ के नाम से होगी पहचान

भोपाल 

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव अब अंतिम निर्णय के लिए राज्य शासन को भेजा जाएगा। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। 

राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला
बैठक में राजा भोज के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत में राजा भोज का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय को नई पहचान देने की पहल की गई है।

राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला
प्रस्ताव में राजा भोज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का उल्लेख किया गया. प्रस्ताव में कहा गया, ‘राजा भोज की तुलना में बरकतउल्ला भोपाली के भोपाल निवासी होने से अधिक इस क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का योगदान नजर नहीं आता है’. इसी तर्क के आधार पर विश्वविद्यालय का नाम बदलने की सिफारिश की. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” किया जाना अधिक उपयुक्त होगा। 

कौन थे बरकतउल्ला भोपाली?
बता दें कि मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भोपाल में जन्मे भारत के प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में से थे. उन्होंने भारत के बाहर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक समर्थन दिलाने का प्रयास किया. इसके अलावा गदर आंदोलन से जुड़े और भारतीय क्रांतिकारियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बने. वहीं 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था। 

राजा भोज ने लिखे थे 80 ग्रंथ
राजा भोज द्वारा लगभग अस्सी ग्रंथ लिखे गए, जिनमें से 27 ग्रंथ आज भी उपलब्ध है. राजा भोज ने केवल स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, बल्कि अपनी राजधानी धारा (धार) को ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र बनाया था. उन्होंने वहां ‘भोजशाला’ (सरस्वती मंदिर) की स्थापना की, जो उस दौर का एक महान विश्वविद्यालय था. भोज शाला में उनके द्वारा स्थापित की गई वाग देवी की प्रतिमा जो आज इंग्लैंड के संग्रहालय में रखी गई है. उन्हें विद्या की आराध्य देवी सरस्वती के रूप में 1000 वर्ष तक पूजी गई। 

शासन की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कार्यपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे शासन के पास भेजा जाएगा। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

अरबी-पर्शियन विभागों का होगा पुनर्गठन
बैठक में शैक्षणिक ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। इसके तहत अरबी और पर्शियन विभागों को पुनर्गठित कर तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे अकादमिक गतिविधियों में बेहतर समन्वय और अध्ययन के नए अवसर विकसित होंगे।

बीएड कॉलेजों पर सख्ती
कार्यपरिषद की बैठक में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। करीब 30 कॉलेजों में कमियां मिलने के बाद संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों के पालन को लेकर आगे भी सख्ती जारी रहेगी।

1988 में मिला था ‘बरकतउल्लाह’ नाम
भोपाल के इस प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र की स्थापना साल 1970 में ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ के रूप में हुई थी। इसके बाद, मौलाना बरकतउल्लाह के देश की आजादी में दिए गए अद्वितीय योगदान को सम्मान देने के लिए साल 1988 में इसका नाम बदलकर ‘बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय’ किया गया था।

1854     भोपाल में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह का जन्म हुआ।
1915     काबुल (अफगानिस्तान) में बनी भारत की पहली अस्थायी सरकार में मौलाना बरकतउल्लाह प्रधानमंत्री बने।
1970     भोपाल में इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की स्थापना ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ के नाम से हुई।
1988     विश्वविद्यालय का नाम बदलकर क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया।
2026 (अब)     कार्य परिषद की बैठक में नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने का प्रस्ताव पास हुआ।

क्या है नए नाम ‘वाग्देवी भोजपाल’ का मतलब?
विश्वविद्यालय को दिया गया नया नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ इसके ऐतिहासिक और प्राचीन स्वरूप को दर्शाता है। इसमें शामिल ‘वाग्देवी’ शब्द ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का प्रतीक है। वहीं ‘भोजपाल’ शब्द भोपाल के प्राचीन इतिहास और राजा भोज के काल से सीधा संबंध जोड़ता है।

नाम परिवर्तन पर उठा विरोध का स्व
बैठक में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का विरोध भी सामने आया। कुछ सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्लाह भोपाली के योगदान का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम बरकरार रखने की बात कही। उनका तर्क था कि बरकतउल्लाह भोपाली का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए उनके नाम से जुड़े संस्थान की पहचान कायम रहनी चाहिए। कार्यपरिषद के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर राज्य शासन के निर्णय पर टिकी है, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगनी है। 

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दो साल में प्रारंभ किये प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में हुए शामिल

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली श्रीमती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना से झाबुआ के प्रेम गामड़ बने आत्मनिर्भर

भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना से झाबुआ के प्रेम गामड़ बने आत्मनिर्भर

अपना व्यवसाय शुरू कर कमा रहे हर माह लगभग 1.50 लाख रुपये

जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है

भोपाल 
सफलता की कहानी

जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। व्यक्ति यदि अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखकर निरंतर प्रयास करता रहे, तो परिस्थितियां भी उसके मार्ग की बाधा नहीं बन पातीं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झाबुआ निवासी प्रेम गामड़ पिता मंजेश गामड़ की जिन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल स्थापित की है।

स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रेम गामड़ ने निजी क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। नौकरी के माध्यम से आजीविका तो चल रही थी, लेकिन उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और कुछ नया करने का सपना था। वे ऐसा कार्य करना चाहते थे जिससे उन्हें आत्मसंतुष्टि के साथ-साथ समाज के लोगों को बेहतर सेवाएं भी प्रदान करने का अवसर मिले। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के प्रति रुचि एवं तकनीकी समझ को देखते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया, लेकिन व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

14.40 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय, अब हर माह हो रही लगभग 1.50 लाख रुपये की आय

प्रेम गामड़ ने जिला आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय में संपर्क कर”भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना” के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। निगम द्वारा उनका ऋण प्रकरण तैयार कर एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा, झाबुआ शाखा को भेजा गया।

बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण करने के बाद प्रेम गामड़ का 14.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण प्राप्त होने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस व्यवसाय प्रारंभ किया और पूरी मेहनत एवं लगन के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाया। आज उनका व्यवसाय क्षेत्र में अच्छी पहचान बना चुका है तथा वे प्रतिमाह लगभग 1.50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को रोजगार प्रदान किया है।

रोजगार की तलाश से रोजगारदाता बनने तक, प्रेम ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश

प्रेम गामड़ बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब वे स्वयं रोजगार की तलाश में भटकते थे, लेकिन आज वे अपना सफल व्यवसाय संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम एवं भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाएं युवाओं के लिए सुनहरा अवसर हैं। यदि सही जानकारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का साथ हो तो कोई भी युवा स्वरोजगार के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना सकता है। आज प्रेम गामड़ की सफलता जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहे हैं।

 

श्रमोदय आदर्श आई.टी.आई. भोपाल में श्रमिकों के बच्चों के लिए निशुल्क आवासीय प्रवेश प्रक्रिया शुरू

श्रमोदय आदर्श आई.टी.आई. भोपाल में श्रमिकों के बच्चों के लिए निशुल्क आवासीय प्रवेश प्रक्रिया शुरू

इच्छुक आवेदक 30 जून तक करें आवेदन
प्रशिक्षण अवधि के दौरान निशुल्क हॉस्टल और भोजन की सुविधा भी

भोपाल 

मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिए भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आई.टी.आई. में शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत सरकार से एनसीवीटी (NCVT) मान्यता प्राप्त इस संस्थान में प्रवेश के इच्छुक आवेदक 26 मई से 30 जून 2026 तक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इसके साथ ही 1 जून से 30 जून 2026 के मध्य चॉइस फिलिंग की सुविधा उपलब्ध रहेंगी। संस्थान में चयनित होने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान निशुल्क हॉस्टल और भोजन की सुविधा भी दी जाएगी।

इस प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए 8वीं और 10वीं पास अभ्यर्थी संस्थान में संचालित आठ अलग-अलग ट्रेडों के लिए पात्र हैं। इच्छुक उम्मीदवार अपने नजदीकी कियोस्क सेंटर के माध्यम से पंजीयन और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया आसानी से पूरी कर सकते हैं, तथा प्रवेश से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल www.dsd.mp.gov.in पर भी विजिट कर सकते हैं। इलेक्ट्रीशियन और वेल्डर ट्रेड के लिए 20-20 सीटें निर्धारित हैं। इसके अलावा टेक्नीशियन मेकाट्रोनिक्स, एडवांस सी.एन.सी. मशीनिंग टेक्नीशियन, सिविल इंजिनियर असिस्टेंट, आई.ओ.टी. (स्मार्ट सिटी), फैशन डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी और इंटीरियर डिज़ाइन एंड डेकोरेशन प्रत्येक ट्रेड में 24-24 सीटें उपलब्ध हैं।

संस्था के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने या ऑनलाइन आवेदन में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या होने पर आवेदक हेल्पलाइन नंबर 9424454453 और 9826947798 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

 

Sampada 2.0 में बड़े बदलाव, नए नियमों से रजिस्ट्री प्रक्रिया होगी आसान और सुरक्षित

भोपाल 

संपदा 2.0 पोर्टल में घर बैठे रजिस्ट्री (online registry) को सुरक्षित करने बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर वीडियो केवाईसी सॉल्यूशन को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने यूजर लाइवनेस प्रयास, नॉन इंटरएक्टिव वीडियो में डॉक्यूमेंट कैप्चर करने जैसे नियमों को बदला गया है, ताकि वास्तविक व्यक्ति ही पंजीयन में शामिल हो। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को हायर किया जा रहा है। अगले दो से तीन माह में नए बदलाव के साथ संपदा 2.0 में घर बैठे पंजीयन की सुविधा में बेहतर तरीके से नजर आएगी।

गौरतलब है कि पोर्टल (property Registry) से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन भुगतान, ई-स्टांपिंग और संपत्तियों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। इस नए सिस्टम में लॉग-इन, डिजिलॉकर एकीकरण, दस्तावेज ड्राफ्टिंग, और वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

दस्तावेज के सत्यापन और बेहतर होंगे (Sampada 2.0)

-यूजर लाइवेनेस के अधिकतम प्रयासों को तीन से घटाकर 2 कर दिया है। 

समय बचाने नॉन-इंटरैक्टिव वीडियो केवाईसी वर्क फ्लो से सीधे डॉक्यूमेंट कैप्चर (Sampada 2.0) करने के एक स्टेप को हटा दिया गया है।

– धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम यूजर की लाइव फोटो का मिलान, अपलोड किए गए दस्तावेज और डेटाबेस में मौजूद इमेज के साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर करेगा।

-चेहरे से सिस्टम दिए गए आधार दस्तावेज और रिकॉर्ड में दर्ज आधार दस्तावेज (Sampada 2.0) का मिलान कर यूजर की पहचान सुनिश्चित कर लेगा।

-नए नियमों के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और आधार नियमों का कड़ाई से पालन करने अब किसी भी यूजर के बायोमेट्रिक डेटा या चेहरे की पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।

– तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद मध्य प्रदेश के नागरिकों को जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और उंगलियों पर उपलब्ध होगी।

अधिक सुरक्षित और सरल

संपदा 2.0 (Sampada 2.0) में वीडियो ई-केवायसी (e-KYC)को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स टीम तय की जा रही है।

-स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक

उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, इंटरनल असेसमेंट 30 से बढ़कर 40 अंक होगा

भोपाल 
मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है। 

परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत
उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा।

कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा
विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।

हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान
विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी।

मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति
विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प
नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है।

विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

Indore Metro के अंडरग्राउंड रूट में चुनौती, एयरपोर्ट एरिया में ब्लास्टिंग से होगी खुदाई

इंदौर 

इंदौर में मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड हिस्से का काम फिलहाल एयरपोर्ट के समीप चल रहा है। यहां मेट्रो स्टेशन भूमिगत होगा और करीब डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ट्रैक एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। लगभग आठ माह पहले इस हिस्से में मेट्रो के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन 20 फीट की खुदाई के बाद चट्टानें मिलने के कारण अब नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है। 

बीते दो दिनों से पूरे इलाके में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम नियंत्रित ब्लास्टिंग के माध्यम से चट्टानों को तोड़कर आगे का काम कर रही है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड मेट्रो के हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

10 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक बनेगा
इंदौर में कुल 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण होना है। फिलहाल 20 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर संचालन कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। खजराना से एयरपोर्ट रोड तक 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है, हालांकि इस हिस्से में अभी तक व्यापक स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस रूट में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद बदलाव किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त अंडरग्राउंड मेट्रो रूट जोड़ा गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

15,000 करोड़ रुपये है लागत
इंदौर मेट्रो परियोजना पर कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह किलोमीटर लंबे हिस्से में मेट्रो का संचालन और परीक्षण कार्य जारी है। गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न गति स्तरों पर मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अभी तक किराए की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि अधिकतम किराया लगभग 80 रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। 

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