कैलिफोर्निया के केमिकल प्लांट में रिसाव, 40,000 लोगों को तुरंत खाली कराया गया

नई दिल्ली

 कैलिफोर्निया में एक केमिकल फैक्ट्री के खराब वाल्व ने लाखों जिंदगियों और छह शहरों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। ऑरेंज काउंटी की इस फैक्ट्री से मिथाइल मेथाक्रायलेट नाम के बेहद खतरनाक और आग पकड़ने वाले केमिकल का रिसाव हो रहा है।

खराबी इतनी बड़ी है कि रिसाव को पूरी तरह बंद करना नामुमकिन हो चुका है। अब डर इस बात का है कि अत्यधिक दबाव या गर्मी के कारण यह स्टोरेज टैंक कभी भी फट सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए लगभग 40,000 लोगों को फौरन अपने घर खाली करने का सख्त आदेश जारी किया है।

प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां
फायर अथॉरिटी के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस वक्त वे दो सबसे बुरे हालातों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। पहला खतरा यह है कि टैंक का ढांचा पूरी तरह ढह जाए, जिससे आसपास के पार्किंग एरिया में 6,000 से 7,000 गैलन जहरीला केमिकल फैल जाएगा।

दूसरा और सबसे भयानक खतरा यह है कि कड़कती गर्मी के चलते टैंक के अंदर का तापमान और दबाव बढ़ जाए, जिससे उसमें जोरदार धमाका हो जाए। अगर ऐसा ब्लास्ट होता है, तो पास में ही मौजूद ईंधन और अन्य रसायनों के टैंक भी आग की चपेट में आ जाएंगे, जिससे यह हादसा एक बड़ी तबाही में बदल सकता है।

पर्यावरण और इंसानी सेहत पर मंडराता खतरा
इस जहरीले लिक्विड को पर्यावरण में तबाही मचाने से रोकने के लिए बचाव दल युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। केमिकल को स्थानीय नालियों, नदियों या समंदर में बहने से रोकने के लिए रेत की बोरियों की मजबूत दीवारें बनाई गई हैं।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तापमान बढ़ने पर इस केमिकल से निकलने वाली भाप हवा को पूरी तरह जहरीला बना देगी। इसके संपर्क में आने से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ, आंखों में चुभन और तेज जलन, उल्टी आने जैसा महसूस होना और असहनीय सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

15% आबादी ने घर छोड़ने से किया इनकार
यह पूरी घटना लॉस एंजिल्स से करीब 38 मील दूर गॉर्डन ग्रोव शहर में हुई है। यह इलाका मशहूर डिज़नीलैंड थीम पार्क के काफी करीब है। राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने फिलहाल डिज़नीलैंड को इस खतरे के दायरे से बाहर बताया है।

इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच पुलिस के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। आदेश के बावजूद इलाके के करीब 15 फीसदी लोगों ने अपने आशियाने को छोड़ने से साफ मना कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षित निकाले गए लोगों के ठहरने के लिए दो बड़े शेल्टर होम तैयार किए हैं और लोगों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें और इस सरकारी आदेश का पूरी गंभीरता से पालन करें।

कीव पर रूस का बड़ा हमला: 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों की बौछार, 4 की मौत

 नई दिल्ली

 यूक्रेन की राजधानी कीव में रविवार रात विनाशकारी हमले देखने को मिले, जब रूस ने ड्रोन और मिसाइलों की भारी बौछार कर दी।

यह हमला हाल के हफ्तों में कीव पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। हमले के बाद शहर के कई हिस्सों में आग, धमाकों और धुएं का भयावह मंजर देखने को मिला।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक क्रूज मिसाइल को कीव के मध्य हिस्से में गिरते देखा जा सकता है। मिसाइल के टकराते ही जोरदार विस्फोट होता है। धमाकों की आवाज रातभर कीव में गूंजती रही।

600 ड्रोन और 90 मिसाइलों से कीव पर हमला
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने इस हमले में करीब 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कई हथियार अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे।

समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, हमले में राजधानी कीव समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। कीव के लुकियानिव्स्का मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक बिजनेस सेंटर और बाजार पूरी तरह तबाह हो गए।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि एक छोटा कैफे, जिसे रूसी हमलों के बाद छह बार दोबारा बनाया और खोला गया था, इस हमले में फिर से नष्ट हो गया।

चार लोगों की मौत, दर्जनों घायल
यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें, स्कूल, बाजार और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हो गए।

हमले के दौरान दहशत में लोग मेट्रो स्टेशनों और भूमिगत बंकरों की ओर भागते नजर आए। रातभर सायरन बजते रहे और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह हमला किसी सैन्य लक्ष्य पर नहीं बल्कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया।

एंड्री सिबिहा ने बताया कि कीव के अलावा चेर्कासी, खार्किव, क्रोपिवनित्स्की, ओडेसा, पोल्टावा, सूमी और झितोमिर क्षेत्रों पर भी हमले किए गए।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने इस बार ‘ओरेशनिक’ नामक शक्तिशाली हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया।

क्या है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल?
‘ओरेशनिक’ रूस की नई हाइपरसोनिक मिसाइल मानी जा रही है। यह ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से उड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल जमीन के कई मंजिल नीचे बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम है।

रूस ने पहली बार नवंबर 2024 में यूक्रेन के ड्नीप्रो शहर पर इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इसके बाद जनवरी में पश्चिमी यूक्रेन के लवीव क्षेत्र में भी इसके उपयोग की खबरें सामने आई थीं।
    
‘यूक्रेन के हमलों के जवाब में किया अटैक’
रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि उसने ओरेशनिक समेत कई मिसाइल प्रणालियों का उपयोग कर यूक्रेन के सैन्य कमांड सेंटर, एयरबेस और सैन्य उद्योग से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। हालांकि रूस ने इन ठिकानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।

मॉस्को ने कहा कि यह हमला रूस-नियंत्रित इलाकों पर यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और अधिक खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है।

हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हथियार युद्ध को और विनाशकारी बना सकते हैं, क्योंकि इन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद मुश्किल होता है।

चीन की कोयला खदान दुर्घटना पर भारत का संवेदना संदेश, बीजिंग ने जताया आभार

नई दिल्ली

 चीन ने अपने शांक्सी प्रांत में हुए भीषण कोयला खदान हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम कई लोगों की जान जा चुकी है और दो लोग अभी भी लापता हैं।

भारत में चीन के राजदूत जू फेईहोंग ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी के पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है।

भारत का समर्थन हमारे लिए महत्वपूर्ण
चीनी राजदूत जू फेईहोंग ने पीएम मोदी के संदेश के लिए उनका धन्यवाद करते हुए एक्स पर लिखा कि शांक्सी प्रांत में खदान दुर्घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवेदना संदेश के लिए हम उनकी सराहना करते हैं।

इस कठिन समय में भारत के लोगों की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। हमारी संवेदनाएं पीड़ितों, लापता लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम बचाव और राहत कार्यों में हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवेदना संदेश
इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को इस हादसे पर अपना शोक संदेश भेजा था। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान दुर्घटना में लोगों की मौत से दुखी हूं।

भारत के लोगों की ओर से, राष्ट्रपति शी चिनफिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस दुखद घड़ी में शक्ति प्रदान करे। मैं शेष सभी लापता व्यक्तियों के शीघ्र और सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना करता हूं।

शुक्रवार शाम को हुआ था भयानक विस्फोट
चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह गैस विस्फोट शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 7:29 बजे किनयुआन काउंटी की लियुशेनयु कोयला खदान में हुआ था। शनिवार को अधिकारियों ने पुष्टि की कि हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य लापता हैं।

इस घटना में घायल कुल 128 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से दो की हालत बेहद नाजुक और दो की गंभीर बनी हुई है

कंपनी की लापरवाही आई सामने
घटना की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि खदान के भीतर जहरीली और हानिकारक गैसें लंबे समय तक सुरक्षित सीमा से अधिक बनी हुई थीं, जिससे दोबारा आपदा होने की आशंका बढ़ गई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि खदान का संचालन करने वाली कंपनी द्वारा कानूनों का गंभीर उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई है।

सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, किनयुआन का प्रशासन संभालने वाले चांगझी शहर के मेयर चेन शियांगयांग ने बताया कि कंपनी के जिम्मेदार लोगों को नियंत्रण में ले लिया गया है। इसके साथ ही, व्यापक सुरक्षा जांच पूरी होने तक कंपनी की कोयला खदानों में उत्पादन पूरी तरह से रोक दिया गया है।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दिए सख्त जांच के आदेश
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों को बचाने और घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए चौतरफा प्रयास करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने विस्फोट के कारणों की गहन जांच करने और कानून के अनुसार जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

जांच टीम ने कहा है कि वे दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाएंगे, स्थानीय अधिकारियों, उद्योग रेगुलेटर्स और संबंधित कंपनी की जिम्मेदारियों की जांच करेंगे और प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त सजा सुनिश्चित करेंगे।

रक्षा से व्यापार तक मजबूत हुई दोस्ती, जयशंकर-रूबियो वार्ता में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा

 नई दिल्ली

 अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा पेश की, साथ ही इमिग्रेशन सुधारों और वीजा से जुड़ी चिंताओं पर पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए।

प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद हैदराबाद हाउस में बोलते हुए रूबियो ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच का रिश्ता अब पारंपरिक कूटनीति से कहीं आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा, “एक रणनीतिक साझेदारी एक बहुत ही अलग चीज होती है

रूबियो ने बताया कब होती है रणनीतिक साझेदारी?
रूबियो ने कहा, “एक रणनीतिक साझेदारी तब होती है, जब दो देशों के तौर पर आपके हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और आप उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिलकर रणनीतिक रूप से काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जिन मुद्दों पर हम भारत के साथ मिलकर काम करते हैं, उनकी सूची और उनका व्यापक दायरा इस बात को उजागर करता है कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है बल्कि दुनिया भर में हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।” यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रूबियो के भारत के चार-दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के ठीक एक दिन बाद हुई।

रूबियो ने देश में अपने पहले दिन को शानदार बताया और बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका केवल सहयोगी ही नहीं हैं, बल्कि रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और आतंकवाद-रोधी प्रयासों जैसे क्षेत्रों में साझा हितों वाले रणनीतिक सहयोगी हैं।

इस बातचीत में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे।

वीजा बदलावों और इमिग्रेशन सुधारों पर क्या बोले रूबियो?
J1, F1 और H-1B वीजा नीतियों में हाल के बदलावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं का जवाब देते हुए रूबियो ने कहा कि ये सुधार यूएस इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े बदलाव का हिस्सा थे और सिर्फ भारत के लिए नहीं थे।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं उस योगदान को स्वीकार करता हूं जो भारतीयों ने यूएस अर्थव्यवस्था में दिया है। भारतीय कंपनियों ने यूएस अर्थव्यवस्था में 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। हम चाहते हैं कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ता रहे… अभी जो बदलाव हो रहे हैं या संयुक्त राज्य अमेरिका में हमारी प्रवासन प्रणाली का जो आधुनिकीकरण हो रहा है, वह सिर्फ भारत के लिए नहीं है। यह वैश्विक है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है।”

रूबियो ने आगे कहा, “हम आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में हमें प्रवासन संकट का सामना करना पड़ा है। यह भारत की वजह से नहीं है, बल्कि मोटे तौर पर पिछले कुछ सालों में 20 मिलियन से ज्यादा लोग अवैध रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में घुस आए हैं और हमें इस चुनौती से निपटना पड़ा है…एक देश के तौर पर आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है।”

रूबियो ने आगे कहा कि यूएस आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे ज्यादा स्वागत करने वाला देश बना हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि चल रहे सुधारों की वजह से बदलाव के इस दौर में कुछ दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

भारत-विरोधी नफरत और नस्लभेदी टिप्पणियों पर रूबियो
अमेरिका में ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ की गई नस्लभेदी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर रूबियो ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका एक सबको साथ लेकर चलने वाला देश बना हुआ है

उन्होंने कहा, “मैं उन टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लूंगा। मुझे यकीन है कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर टिप्पणियां की हैं, क्योंकि दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं। मुझे यकीन है कि यहां भी बेवकूफ लोग हैं। यूनाइटेड स्टेट्स में भी बेवकूफ लोग हैं जो हर समय बेवकूफी भरी टिप्पणियां करते रहते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एक बहुत ही मेहमाननवाज देश है। हमारा देश उन लोगों से समृद्ध हुआ है जो दुनिया भर से हमारे देश में आते हैं।”

रूबियो ने अमेरिकी समाज में प्रवासियों के योगदान की ओर भी इशारा किया और बताया कि उनके अपने माता-पिता 1956 में क्यूबा से यूनाइटेड स्टेट्स आए थे।

रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जयशंकर ने क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयशंकर ने दोनों देशों के बीच रक्षा और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने हाल ही में अपने 10 साल के प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते को रिन्यू किया है और एक व्यापक ‘अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस’ रोडमैप पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा, “जहां तक रक्षा और सुरक्षा सहयोग की बात है आप सभी जानते हैं कि 10 साल के प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते को हाल ही में रिन्यू किया गया था। एक व्यापक ‘अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस’ रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए गए। हमने रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण और हाल के संघर्षों से सीखे गए सबक को ध्यान में रखने के महत्व पर चर्चा की।”

व्यापार वार्ताओं पर जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्ष एक अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दे रहे हैं, जो अंततः एक व्यापक द्विपक्षीय सौदे का रास्ता खोल सकता है। इसकी परिकल्पना पहली बार फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान की गई थी।

रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला, हाइपरसोनिक ओरेश्निक समेत 4 मिसाइलों का इस्तेमाल

नई दिल्ली

रविवार को रूस ने यूक्रेन पर रात भर हमले किए, जिसमें हाइपरसोनिक ओरेश्निक समेत चार तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। मॉस्को ने इसे रूस के अंदर नागरिक ठिकानों पर कीव के हमलों का बदला बताया।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसियों के अनुसार, इन हमलों में ओरेश्निक, इस्कंदर, किंझल और जिरकॉन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इंटरफैक्स ने रूसी रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि इन हमलों यूक्रेन के सैन्य कमांड केंद्र, हवाई अड्डे और यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाया गया।

यूक्रेन भी की हमलों की पुष्टि
मॉस्को ने दावा किया कि सभी हमले सफल रहे। रॉयटर्स युद्ध के मैदान से मिली इन रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने कीव पर रात भर किए गए बड़े हमले के दौरान हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया।

600 ड्रोन और 90 मिसाइलों से हमला
टेलीग्राम पर एक पोस्ट में जेलेंस्की ने बताया कि यह मिसाइल कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा शहर में गिरी। हालांकि इसका असली निशाना क्या था यह तुरंत साफ नहीं हो पाया। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, कीव पर रात भर चले इस हमले में 600 ड्रोन और 90 हवाई, समुद्री और जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

खबरों के मुताबिक, यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट कर दिया या उन्हें जाम कर दिया, जबकि लगभग 19 मिसाइलें अपने निशाने तक नहीं पहुंच पाईं।

यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि रूस के अस्त्रखान इलाके में मौजूद कास्पुतिन यार साइट से एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की गई। यह साइट ओरेश्निक मिसाइल के लॉन्च पैड के तौर पर जानी जाती है।

हमलों में दो लोगों की मौत
वायु सेना ने आधिकारिक तौर पर इस मिसाइल के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की, लेकिन इससे पहले उसने इसके संभावित लॉन्च को लेकर चेतावनी दी थी। स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 56 अन्य घायल हो गए।

कीव के मध्य इलाके में सरकारी इमारतों के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि कई जिलों में 40 जगहों पर नुकसान की खबरें मिलीं। इनमें रिहायशी इमारतें, स्कूल, सुपरमार्केट और गोदाम शामिल हैं।

कीव की रहने वाली 55 वर्षीय स्वितलाना ओनोफ्रीचुक ने कहा, “यह एक भयानक रात थी। पूरे युद्ध के दौरान ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।” इस हमले में स्वितलाना के काम करने की जगह को भी नुकसान पहुंचा था।

यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस ने बताया कि कीव के शेवचेंको जिले में एक पांच-मंजिला रिहायशी इमारत पर हमला होने के बाद उसमें आग लग गई, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। मेयर विटाली क्लित्स्को ने बताया कि एक स्कूल की इमारत को भी नुकसान पहुंचा, जबकि उस समय उसके अंदर आम नागरिक पनाह लिए हुए थे।

 

समझौते की सुगबुगाहट पर ट्रंप तैयार, शहबाज शरीफ ने जमकर लगाया ‘मक्खन’

नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाया जा सकता है और इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और इसके अंतिम पहलुओं तथा विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिसकी जल्द घोषणा की जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि उनके साथ फोन पर अच्छी चर्चा हुई है।

क्या बोले शहबाज शरीफ
शहबाज शरीफ ने कहा, डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किए,एजिप्ट, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान के साथ फोन पर बात की है। पाकिस्तान की ओर से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फोन पर बात की और इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप के अथक प्रयास को सराहा है। इस चर्चा में मध्य एशिया में शांति के प्रसायसों को लेकर सकारात्मक बातचीत की गई है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान अगले चरण की वार्ता के लिए प्रयास करता रहेगा।

होर्मुज से हटाई जाएँगी
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन का मसौदा साझा किया है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए वैध समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा तथा ईरान वहां बिछाई गयी बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा, ताकि जहाजों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को तेल की स्वतंत्र बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ रियायतें देगा।रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ईरान जितनी जल्दी होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाकर जहाजरानी बहाल करेगा, उतनी ही जल्दी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। एक्सियोस ने बताया कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में ईरान की ओर से कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने का प्रावधान मिल है।

स्थिति के जानकार दो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करने और परमाणु सामग्री छोड़ने को लेकर रियायतों के दायरे पर ‘मौखिक आश्वासन’ दिये हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल अगले 60 दिनों तक वहीं बने रहेंगे और यदि तेहरान अंतिम रूप से समझौता स्वीकार कर लेता है तो क्षेत्र से हट जाएंगे। एक्सियोस ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने की स्थिति में अमेरिका 60 दिनों के भीतर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में हिज्बुल्ला और इजरायल के बीच सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है।

ईरान-अमेरिका तनाव में शांति डील की चर्चा तेज, 5 शर्तों पर अटका समझौता

नई दिल्ली  

ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अब संभावित पीस डील की रूपरेखा सामने आने लगी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने दावा किया है कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पांच बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन पर समझौते की कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान में शांति समझौते पर बातचीत लगभग तय हो गई है और इसका जल्द ही ऐलान किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के संवर्धित यूरेनियम का है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे. यही यूरेनियम लंबे समय से पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अहम माना जाता है.

दूसरी बड़ी शर्त ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी को चालू रखे, जबकि बाकी गतिविधियों पर रोक लगे. इसके अलावा अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध में हुए नुकसान की कोई भरपाई या मुआवजा नहीं देगा.

क्या ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड?
फार्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने से इनकार कर दिया है. वहीं अलग-अलग मोर्चों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में एक अहम सुरक्षा क्लॉज भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान या उसके सहयोगी गुटों पर हमला नहीं करेंगे. इसके बदले ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई प्रीएम्प्टिव यानी पहले हमला नहीं करेगा.

हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने खुलकर पुष्टि की है.

जंग खत्म करने के लिए ईरान की भी रखी पांच शर्तें
ईरान ने भी इससे पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपनी पांच शर्तें रखी थीं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस करना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल था.

अमेरिका-ईरान जंग की टाइमलाइन
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिन तक संघर्ष चला. बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई ड्राफ्ट प्रस्ताव एक्सचेंज हुए.

F-1/OPT छात्रों के लिए नया सवाल: क्या वीजा इरादा अब ग्रीन कार्ड में बाधा बनेगा?

नई दिल्ली

 अमेरिका की US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक नई पॉलिसी मेमो की घोषणा की है, जिसके तहत देश में ग्रीन कार्ड चाहने वाले विदेशियों को अब अमेरिका की बजाय अपने देश से ही आवेदन करना होगा।

इस घोषणा में, USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, “यह पॉलिसी हमारे इमिग्रेशन सिस्टम को वैसे काम करने देती है, जैसा कि कानून का मकसद है, न कि इसमें मौजूद कमियों का फायदा उठाने को बढ़ावा देती है।”

उन्होंने कहा कि जब विदेशी अपने देश से आवेदन करते हैं, तो उन लोगों को ढूंढने और निकालने की जरूरत कम हो जाती है, जो रेजिडेंसी (रहने की अनुमति) न मिलने पर छिपकर अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से रहने लगते हैं।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, “छात्र, अस्थायी कर्मचारी या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले गैर-प्रवासी थोड़े समय के लिए और किसी खास मकसद से अमेरिका आते हैं। सिस्टम यही है कि जब उनका दौरा खत्म हो जाए तो वे वापस चले जाएं। उनका यह दौरा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं बनना चाहिए।”

USCIS के नए मेमो का आपकी वर्कफोर्स के लिए क्या मतलब है?
21 मई, 2026 को USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे ग्रीन कार्ड आवेदनों की समीक्षा करते समय अधिक सख्त मानक लागू करें, जो USA के भीतर रहकर रहकर अप्लाई किए गए हैं।

अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि U.S. में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना एक राहत का एक ‘असाधारण’ रूप है और इसे वीजा जारी करने की ‘नियमित कांसुलर प्रक्रिया’ की जगह लेने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था।

इस मेमो का मतलब है कि अमेरिका में काम करने वाले वो विदेशी नागरिक अपने वीजा का मकसद पूरा होने के बाद USA छोड़ देंगे, जिनके पास F-1 OPT/STEM OPT वीजा है। इस तरह का वीजा’नॉन-डुअल इंटेंट’ (दोहरे इरादे वाला नहीं) माना जाता है।

वहीं, वे लोग जिन्हें वीजा से छूट (जैसे, ESTA) मिली हुई है, उन्हें U.S. के बाहर किसी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ के लिए आवेदन करना होगा।

ऐसा उन्हें तभी नहीं करना होगा, जब वे कोई ‘असाधारण परिस्थिति’ दिखा सकें। हालांकि, इस मेमो में ‘असाधारण परिस्थिति’ को परिभाषित नहीं किया गया है।

Memo में क्या कहा गया है?
USCIS के पास हमेशा से ग्रीन कार्ड के आवेदन को अस्वीकार करने का कानूनी अधिकार रहा है, भले ही आवेदक सभी शर्तों को पूरा करता हो। यानी यह अधिकार ‘विवेक’ (discretion) पर आधारित होता है।

यह मेमो इस बात की पुष्टि करता है कि इस अधिकार का प्रयोग अब और भी अधिक सोच-समझकर और सख्ती से किया जाना चाहिए।

अधिकारियों को मूल्यांकन करने के लिए नकारात्मक कारकों की सूची
आप्रवासन कानूनों का उल्लंघन, या किसी भी आप्रवासन दर्जे (status) की शर्तों का उल्लंघन
 किसी भी सरकारी एजेंसी के साथ धोखाधड़ी या झूठी गवाही के वर्तमान या पिछले मामले
देश में प्रवेश करने के बाद किया गया कोई भी ऐसा आचरण, जो उस वीजा के मूल उद्देश्य के अनुरूप न हों
शुरुआत में की गई उम्मीद के अनुसार देश छोड़कर न जाना। मेमो में इसे “इस विश्लेषण के लिए अत्यंत प्रासंगिक” बताया गया है।

इन कारकों को सख्त बनाने के लिए, मेमो ने एक बहुत ऊंचा मानक (high bar) तय किया है। आवेदकों को ‘असामान्य या असाधारण’ कारकों को दिखाना होगा, जिसमें पारिवारिक संबंध और नैतिक चरित्र शामिल हैं।

इसका अर्थ यह है कि सकारात्मक कारक इतने मजबूत होने चाहिए कि वे इस तथ्य पर भारी पड़ सकें कि आवेदक ने विदेश से आवेदन करने के बजाय U.S. में ही रुककर आवेदन करने का विकल्प चुना।

मेमो के लहजे को देखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि USCIS इस नियम को काफी सख्ती से लागू करेगा। आपकी वर्कफोर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

कर्मचारी से ज्यादा HR को करना होगा काम  
HR और मोबिलिटी टीमों के लिए इसका मतलब ये हुआ कि ग्रीन कार्ड फाइलिंग में आपके कर्मचारियों से ज्यादा आपको मेहनत की जरूरत होगी। इसके लिए इमिग्रेशन वकीलों को पहले से ही ऐसी फाइलें तैयार करनी चाहिए, जो आवेदक के U.S. से जुड़ाव, उनके नियमों के पालन के रिकॉर्ड और उनके मामले को आगे क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? इन बातों को दस्तावेजों में दर्ज करती हों।

हालांकि जांच-पड़ताल का स्तर बदल गया है। अब फाइलिंग को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। वकीलों को अब हर I-485 आवेदन के लिए एक मजबूत तर्क देना होगा कि इस व्यक्ति को U.S. से बाहर जाने के बजाय, U.S. के अंदर से ही अपने ग्रीन कार्ड के लिए
आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए?

जिन लोगों के पास’नॉन-डुअल इंटेंट’ वीजा है, उन्हें ज्यादा डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी। मेमो में अधिकारियों से कुछ बातों पर विचार करने को कहा गया है, जिनमें पारिवारिक जुड़ाव, इमिग्रेशन की स्थिति और इतिहास, आवेदक का नैतिक चरित्र शामिल हैं। इनमें से हर बात को सबूतों के साथ साबित करना होगा।

H-1B और L-1 कर्मचारी
इसका मतलब है कि भले ही H-1B और L-1 कर्मचारी लंबे समय से U.S. के भीतर अपनी स्थिति में बदलाव (adjustment of status) के लिए आवेदन कर पा रहे हैं, लेकिन अब वे यह नहीं मान सकते कि यह रास्ता अपने आप और सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही पूरा हो जाएगा।

अधिकारियों को ऐसे ठोस तर्क चाहिए, जिनसे यह साबित हो सके कि आवेदक U.S. में अपनी स्थिति में बदलाव के हकदार क्यों हैं। इन तर्कों में टैक्स का इतिहास, पारिवारिक परिस्थितियां, करियर में प्रगति, और U.S. में उनकी जड़ों से जुड़े अन्य सबूत शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण से समझिए
एक F-1 OPT कर्मचारी कंप्यूटर साइंस में PhD पूरी करता है, एक टेक कंपनी में अपना STEM OPT पूरा करता है और यह तर्क देते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है कि उसका काम ‘राष्ट्रीय हित’ में है।

मेरिट के आधार पर यह एक मजबूत मामला है, सिवाय इसके कि सालों पहले उसने एक दूतावास अधिकारी से कहा था कि उसकी योजना अपने देश वापस लौटने की है।

इस मेमो के तहत, अधिकारी अब यह पूछ सकते हैं कि उन्होंने असल में U.S. में ही रुकने का फ़ैसला कब किया और वे इस बात को उनके ग्रीन कार्ड आवेदन पर फैसला लेते समय ध्यान में रख सकते हैं।

हो सकता है कि उनका आवेदन पूरी तरह से रद न हो, लेकिन उन्हें अपने इस बदले हुए फ़ैसले के बारे में सीधे तौर पर सफाई देनी होगी और यह बताना होगा कि वे U.S. के भीतर ही अपनी स्थिति में बदलाव के लिए आवेदन क्यों कर रहे हैं?

EB-2 और EB-3 बैकलॉग मामले
वह कर्मचारी, जो EB-2 या EB-3 जो शायद एक दशक या उससे ज्यादा समय से ग्रीन वीजा की कतार में हैं। उनके लिए इस मेमो का ज़ोर ‘इक्विटीज’ (न्यायसंगत आधार) पर है।

ये ऐसे संकेत हैं कि आवेदक ने U.S. में अपना जीवन बसा लिया है और यह बात उनके पक्ष में काम करती है। U.S. के साथ गहरे और सकारात्मक संबंध, लंबे समय का रोज़गार इतिहास, यहीं पले-बढ़े बच्चे, संबंधित इमिग्रेशन कानूनों का लगातार पालन और ऐसे जीवनसाथी जिनका करियर U.S. में पहले से ही स्थापित है।

ये सभी इस बात के सबूत हो सकते हैं कि इस व्यक्ति को U.S. के भीतर से ही आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? हालांकि, इन सबूतों का दस्तावेज़ीकरण (documentation) बहुत मजबूत होना चाहिए।

B-1, B-2, और ESTA यात्री
B-1, B-2, या ESTA वीजा पर आने वाले यात्रियों को इस मेमो के तहत सबसे ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जब उन्होंने आवेदन किया था, तो उन्होंने एक कांसुलर अधिकारी को बताया था कि वे एक छोटी यात्रा के लिए आ रहे हैं और उसके बाद वापस चले जाएंगे।

इसके बाद, U.S. के भीतर से ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना आवेदक के खिलाफ जा सकता है, भले ही वह किसी वैध विवाह के मामले में ही क्यों न हों।
अब अधिकारियों को एक ऐसी बात के तौर पर देखने के लिए कहा जा रहा है, जो आवेदक के खिलाफ जा सकती है।

ईरान पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- समझौता होगा या सबसे बड़ा हमला

नई दिल्ली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और संभवतः अगले एक दिन में रविवार तक यह फैसला कर लेंगे कि युद्ध फिर से शुरू करना है या नहीं। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios को बताया कि इस बात की पूरी 50/50 संभावना है कि वह कोई अच्छा समझौता कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह तबाह कर देंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मिलेंगे। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जो अभी ओहायो में हैं, संभवतः इस बैठक में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन लौटेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शांति समझौते की बारीकियों पर वार्ताकारों से चर्चा करने के लिए तेहरान में थे।

वहीं, दिल्ली में, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, “कुछ प्रगति हुई है, कुछ काम आगे बढ़ा है। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तब भी कुछ काम चल रहा है। इस बात की संभावना है कि, चाहे आज बाद में हो, कल (रविवार को), या कुछ दिनों में, हमारे पास कहने के लिए कुछ हो सकता है।” रूबियो भारत की चार-दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए और तेहरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंप देना चाहिए।

ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि वह केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेंगे जिसमें यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा भंडार के भविष्य जैसे मुद्दे शामिल हों। अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने और 30 दिनों तक और अधिक गहन बातचीत करने की प्रतिबद्धता जताने वाले एक इरादा पत्र पर बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि इन दो में से एक चीज होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा होगा।”

ट्रंप की यह टिप्पणी पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ईरान दौरे के संपन्न होने के तुरंत बाद आई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस्लामाबाद के बढ़ते प्रयासों के बीच मुनीर ने वरिष्ठ इरानी अधिकारियों के साथ गहन बैठकें की थीं। पाकिस्तान ने बाद में कहा कि इन वार्ताओं से कोई अंतिम समझौता तो नहीं हुआ है, लेकिन एक अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है।

ट्रंप ने संकेत दिया कि किसी भी अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा परमाणु भंडार के भविष्य जैसे प्रमुख मुद्दों का समाधान होना आवश्यक होगा। ये विषय वार्ताओं में सबसे कठिन बाधाओं में से बने हुए हैं। हालांकि, वार्ताओं से परिचित राजनयिकों का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका और इरान के बीच चर्चा के तहत चल रहे अंतरिम ‘आशय पत्र’ के तहत इन मुद्दों के पूरी तरह से सुलझने की संभावना कम है।

इसके बजाय, प्रस्तावित रूपरेखा सक्रिय संघर्ष को समाप्त करने और एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से आगे की वार्ताओं के लिए 30 दिनों की अवधि स्थापित करने पर केंद्रित होगी। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि दो में से एक बात होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे भीषण हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अच्छा होगा।” उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बात को लेकर चिंतित थे कि अमेरिका अंततः ईरान के लिए बहुत अधिक अनुकूल शर्तों पर सहमत हो सकता है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इजराइली नेता इस बात को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं कि यह वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ रही है।

बलूचिस्तान में बड़ा धमाका: मालगाड़ी पटरी से उतरी, 7 की मौत और कई घायल

 बलोचिस्तान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुई, जो बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार धमाका रेलवे ट्रैक पर किया गया था और निशाना उस मालगाड़ी को बनाया गया, जो क्वेटा के कैंटोनमेंट इलाके की तरफ जा रही थी.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि पास खड़ी एक ट्रेन की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो डब्बे पलट गए. रेल ट्रैक के पास खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और पास के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए. यह हादसा क्वेटा स्टेशन के चमन फाटक के पास हुआ.

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के बाद इलाके में फायरिंग की भी आवाज सुनी गई. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में यह साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और उसका धमाके से सीधा संबंध था या नहीं

सोशल मीडिया में इस घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक ट्रेन में आग लगी हुई है और धुएं का गुबार ऊपर तक उठ रहा है. आप भी देखें-

राहत बचाव के साथ-साथ जांच में जुटीं एजेंसियां
स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई, ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. बलूचिस्तान के गृह विभाग के विशेष सहायक बाबर यूसुफजई ने पत्रकारों को बताया कि धमाके की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है.

सेना और पुलिस बल मामले की छानबीन कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों ने हादसे की वजह और धमाके की वजह से हुए जानमाल के नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है.

क्यों संवेदनशील माना जाता है बलूचिस्तान?
घटना के कई घंटे बाद तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। हालांकि बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है. यहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जो प्रांत की आजादी की मांग करते रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान के इस इलाके में जाफर एक्सप्रेस नाम की ट्रेन को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है.

बलूचिस्तान पाकिस्तान का खनिज संपदा से भरपूर इलाका माना जाता है. यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का अहम मार्ग भी है. अरबों डॉलर की इस परियोजना को चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं.

सीपीईसी के लिए बातचीत करने चीन में हैं पाक पीएम
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. अपने भारी-भरकम डेलिगेशन के साथ बीजिंग की यात्रा पर निकले शरीफ चीन के साथ इस कॉरिडोर के दूसरे चरण की फंडिंग की बात करने वाले हैं. हालांकि, सुरक्षा के लिए चुनौती बने इस अशांत क्षेत्र में चीन कितना निवेश करेगा, यह जल्द ही सामने आ जाएगा.

हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने यहां का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से बात की थी. आए दिन पाकिस्तान आर्मी की ओर से इस जगह पर कंट्रोल करने के लिए ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अपनी आजादी के लिए जान को जोखिम में डालने वाले बलोच विद्रोही इसका बखूबी जवाब देते रहे हैं.

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