किम जोंग उन मरे तो अपने आप होगा न्यूक्लियर अटैक! उत्तर कोरिया ने बदला संविधान

नई दिल्ली

उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या विदेशी हमले में देश की कमांड व्यवस्था नष्ट हो जाती है, तो सेना को ऑटोमैटिक परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा. इसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी.

दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने यह जानकारी दी है. यह बदलाव ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद किया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके कई सलाहकार मारे गए थे.

नया संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है?
उत्तर कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक 22 मार्च को प्योंगयांग में हुई थी. इसी में यह संशोधन पास किया गया.नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (NIS) ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि अब न्यूक्लियर फोर्सेस पर नियंत्रण अगर दुश्मन के हमले से खतरे में पड़ जाए तो ऑटोमैटिक और तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा.

नए नियम के मुताबिक, किम जोंग उन के कमांड सिस्टम को खतरा होने पर कोई इंतजार नहीं होगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने आप हो जाएगा. इससे पहले यह नीति मौखिक रूप से हो सकती थी, लेकिन अब इसे संविधान में लिखित रूप से मजबूत कर दिया गया है.

ईरान की घटना क्यों बनी वजह?
ईरान पर हालिया हमलों ने उत्तर कोरिया को बड़ा सबक दिया. अमेरिका और इजरायल ने जिस तेजी से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया, उसे देखकर किम जोंग उन और उनकी सरकार डर गई. प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव ने कहा कि ईरान घटना उत्तर कोरिया के लिए वेक-अप कॉल साबित हुई.

उन्होंने देख लिया कि नेतृत्व को एक साथ खत्म करने वाले हमले कितने प्रभावी हो सकते हैं. उत्तर कोरिया अब ऐसी स्थिति से बचना चाहता है. अगर किम या उनकी कमांड टीम मारी जाती है तो देश का परमाणु जवाब अपने आप एक्टिव हो जाएगा.

किम की हत्या करना कितना मुश्किल है?
किम जोंग उन अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं. वे हमेशा भारी सुरक्षा घेरे में रहते हैं. वे हवाई यात्रा से बचते हैं. ज्यादातर बख्तरबंद ट्रेन से सफर करते हैं. उत्तर कोरिया की सीमाएं पूरी तरह बंद हैं. विदेशी लोग बहुत कम आते हैं. उनकी निगरानी सख्ती से की जाती है.

ईरान में इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ट्रैफिक कैमरों को हैक करके नेताओं की लोकेशन पता की थी, लेकिन प्योंगयांग में सीसीटीवी और इंटरनेट की व्यवस्था बहुत सीमित है. इसलिए वहां ऐसी जानकारी हासिल करना बेहद कठिन है. फिर भी उत्तर कोरिया सैटेलाइट तकनीक और अन्य खुफिया खतरे से चिंतित है.

दक्षिण कोरिया की सीमा पर नया खतरा
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई आर्टिलरी तैनात करने की घोषणा की है. किम जोंग उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया जहां नई 155 मिलीमीटर की सेल्फ-प्रोपेल्ड गन का परीक्षण हुआ.

यह तोप लगभग 60 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है. इससे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और आसपास के महत्वपूर्ण इलाके इसके दायरे में आ जाएंगे. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह नया हथियार उनकी जमीनी सेना को बड़ी ताकत देगा.

उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं. 1950-53 का युद्ध केवल संघर्षविराम पर खत्म हुआ था. शांति संधि नहीं हुई. हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने एकीकरण की पुरानी बातों को अपने संविधान से हटा दिया है. दक्षिण कोरिया को मुख्य दुश्मन बताता है. दक्षिण कोरिया की शांति पहल के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी आक्रामक नीति जारी रखे हुए है. परमाणु हथियारों को लेकर नया प्रावधान पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है.

दुनिया के लिए क्या मतलब?
यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपने नेता की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को कितनी अहमियत देता है. अगर किम पर हमला होता है तो परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की सेना नेतृत्व के प्रति वफादार है. किसी भी हमले को अस्तित्व का खतरा मानकर जवाबी कार्रवाई करेगी.

  यह घटनाक्रम पूर्वी एशिया में सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना रहा है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों इस विकास पर नजर रखे हुए हैं. यह संवैधानिक बदलाव उत्तर कोरिया की ‘अगर मैं मरा तो सब कुछ नष्ट’ वाली नीति को और मजबूत करता है. दुनिया के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है.

ईरान की चेतावनी से बढ़ा तनाव, होर्मुज स्ट्रेट में हालात गंभीर

नई दिल्ली

 ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों या कमर्शियल जहाजों पर कोई भी और हमला इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर जोरदार हमला करने की वजह बनेगा।

यह चेतावनी फारस की खाड़ी में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच दी गई है। एक्स पर जारी एक बयान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना कमान ने कहा, “चेतावनी! ईरान के तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता का नतीजा, इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों में से किसी एक और दुश्मन के जहाजों पर जोरदार हमले के रूप में सामने आएगा।”

अमेरिका पर हमला करने के लिए मिसाइलें और ड्रोन लॉक
इसके तुरंत बाद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि ईरानी मिसाइलें और ड्रोन पहले से ही इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। पोस्ट में कहा गया, “IRGC एयरोस्पेस फोर्स की मिसाइलों और ड्रोनों ने इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन के हमलावर जहाजों को लॉक कर लिया है। हम फायर करने के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।”

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने दी चेतावनी
यह चेतावनी तब आई है जब एक दिन पहले ही यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने कहा था कि अमेरिकी नौसेना बलों ने ओमान की खाड़ी में ईरान के खिलाफ चल रहे नाकाबंदी अभियानों के तहत ईरान के झंडे वाले दो तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया।

CENTCOM के अनुसार, खाली टैंकरों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोक दिया गया। CENTCOM ने बताया कि 13 अप्रैल से अब तक अमेरिकी बलों ने ईरान के चार जहाजों को निष्क्रिय किया है और नाकाबंदी के इस दौर में 58 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला है।

ये ताजा घटनाक्रम इस हफ्ते की शुरुआत में होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी नौसेना बलों और ईरानी संपत्तियों के बीच हुई गोलीबारी के बाद सामने आए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की कि होर्मुज से गुजरते समय अमेरिकी नौसेना के तीन विध्वंसक जहाजों पर हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने कहा कि ये जहाज सफलतापूर्वक वहां से गुजर गए।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की हल्की पनडुब्बियों की तैनाती, बढ़ा तनाव

तेहरान

 ईरान ने अपनी हल्की पनडुब्बियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात करने का फैसला लिया है। फारस खाड़ी की डॉल्फिन कहे जाने वाली ये पनडुब्बियां दुश्मन के जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बना सकती हैं। ईरान की ओर से यह ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बलों में इस हफ्ते गोलाबारी के बाद होर्मुज के आसपास भारी तनातनी है। ऐसे में ईरान की ओर से पनडुब्बियों की तैनाती समुद्र में चल रहे टकराव को और ज्यादा बढ़ा सकती है।

ईरान नेवी के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी की ओर से रविवार को ऐलान किया गया है कि स्वदेशी रूप से निर्मित हल्की पनडुब्बियां ‘फारसी खाड़ी की डॉल्फिन’ को होर्मुज जलडमरूमध्य में उतार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि खतरों, क्षमताओं और ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर इन सबमरीन को तैनात और विस्तारित किया जा रहा हैं।

अलर्ट पर रहती हैं ये पनडुब्बी
भारत में ईरान के दूतावास के एक्स अकाउंट पर बताया गया है कि फारसी खाड़ी की डॉल्फिन हर समय अलर्ट पर रहती हैं और कार्रवाई के लिए तैयार रहती हैं। ये हल्की पनडुब्बियां होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जलक्षेत्र में समुद्र तल पर लंबे समय तक विश्राम (बॉटम रेस्ट) कर सकती हैं। इससे यह दुश्मन जहाजों पर नजर रख पाती हैं।

ईरानी नेवी की ओर से बताया गया है कि उसकी ये पनडुब्बियां ना सिर्फ दुश्मन जहाजों को ट्रैक करती हैं बल्कि साथ ही जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकती हैं। दुश्मन के जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करना इन पनडुब्बियों की क्षमता का ही एक अहम हिस्सा है, जो समुद्र में इनकी ताकत बढ़ाता है।

पानी के नीचे कर रहीं गश्त
बयान में कहा गया है कि ईरान की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘डेना’ डिस्ट्रॉयर पर मारे गए लोगों को समर्पित एक ऑपरेशन के दौरान ये पनडुब्बियां पानी की सतह पर आईं। कई सैन्य-गठन अभ्यास करने के बाद वे अपने मिशन को जारी रखने के लिए फिर से पानी के नीचे चली गईं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का अहम समुद्री रूट है। खाड़ी देशों से दुनिया के बड़े हिस्से में इसी रास्ते से तेल-गैस पहुंचता है। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने यहां यातायात रोक दिया है। अमेरिका ने भी इसे ब्लॉक करते हुए दुनिया के जहाजों को इससे ना गुजरने देने का ऐलान कर दिया है। इसके चलते यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है।

एनर्जी सप्लाई पर संकट
ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई को संकट में डाल दिया है। खाड़ी देशों के होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर तेल-गैस की कीमत पर हो रहा है। इसका सीधा असर साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्से के साथ-साथ अमेरिकी बाजार पर भी हुआ है। भारत में भी इसका प्रभाव देखा गया है।

 

हमने किसी को टक्कर मार दी”, डेनवर एयरपोर्ट हादसे का खौफनाक ऑडियो आया सामने

नई दिल्ली

अमेरिका के डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सुरक्षा बाड़ फांदकर रनवे पर पहुंचे एक अज्ञात व्यक्ति की विमान से टकराकर मौत हो गई। फ्रंटियर एयरलाइंस की फ्लाइट 4345 से हुई यह टक्कर के बाद विमान के इंजन में आग लग गई।

इस घटना के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का ऑडियो सामने आया है, जिसमें पायलट की घबराहट और यात्रियों द्वारा बयां किएक गए मंजर दिखाई दे रहे हैं।

कब की है घटना?
एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात व्यक्ति ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार रात लगभग 11:19 बजे हुई घटना से ठीक पहले एक बाड़ फांदकर सक्रिय रनवे क्षेत्र में प्रवेश करके हवाई अड्डे की सुरक्षा का उल्लंघन किया था। फ्रंटियर एयरलाइंस का विमान उस व्यक्ति से टकराने के समय चल रहा था।

ऑडियो आया सामने
एटीसी ऑडियो में, फ्रंटियर फ्लाइट 4345 के पायलट को कंट्रोल टावर को यह सूचित करते हुए सुना जा सकता है कि विमान एक व्यक्ति से टकराने के बाद रनवे पर रुक गया था और उसके एक इंजन में आग लग गई थी।

फ्रंटियर विमान 4345 के पायलट ने कहा, हमने अभी-अभी किसी को टक्कर मारी दी है… हमारे इंजन में आग लग गई है। हम रनवे पर रुक रहे हैं

रनवे पर बिखरे मिले शरीर के अंग
डेनवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्रंटियर फ्लाइट 4345 द्वारा रनवे पर दौड़ रहे एक व्यक्ति को टक्कर मारने के बाद के भयावह क्षणों को एयर ट्रैफिक कंट्रोल के चौंकाने वाले ऑडियो में कैद किया गया है। बताया जाता है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि शरीर के अंग रनवे पर बिखरे पड़े मिले

ऑडियो रिकॉर्डिंग में एयरपोर्ट के एक कर्मचारी ने कहा, “रनवे पर मुझे कुछ अंग मिले हैं। मेरा मानना है कि विमान ने किसी व्यक्ति को टक्कर मारी है। रनवे पर मानव अवशेष दिखाई दे रहे हैं।”

फ्लाइटअवेयर के अनुसार , दुर्घटना के समय विमान लगभग 149 मील प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वह व्यक्ति आंशिक रूप से विमान के इंजनों में से एक में खिंच गया था।

संयुक्त राज्य अमेरिका में H-1B वीजा पर बड़ा बदलाव, वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव

नई दिल्ली

 अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी श्रम विभाग ने एच1बी वीजा धारकों के न्यूनतम वेतन में 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है।

प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और उनके वेतन हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, ताकि विदेशी कामगार कम वेतन पर उनकी जगह न ले सकें।

श्रम विभाग के अनुसार, मौजूदा वेतन स्तर लगभग 20 साल पहले तय किए गए थे, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। नए प्रस्ताव ‘इम्प्रू¨वग वेज प्रोटेक्शन’ के तहत एंट्री-लेवल से लेकर अनुभवी पेशेवरों तक, सभी चार श्रेणियों के वेतन में वृद्धि की जाएगी। जहां पहले एंट्री-लेवल (लेवल-1) के लिए न्यूनतम वेतन 73,279 डालर था, उसे बढ़ाकर 97,746 डालर करने का प्रस्ताव है।

इसी तरह, सबसे अनुभवी पेशेवरों (लेवल-4) का वेतन 1,44,202 डालर से बढ़कर 1,75,464 डालर हो सकता है। यह बदलाव न केवल एच1बी बल्कि एच1बी1, ई-3 और प्रोग्राम इलेक्ट्रानिक रिव्यू मैनेजमेंट (पीईआरएम) जैसे प्रोग्राम्स पर भी लागू होगा।

इस प्रस्ताव ने उद्योग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन में इस भारी बढ़ोतरी से छोटी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं, खासकर फ्रेशर्स को नियुक्त करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस प्रस्ताव पर 26 मई तक आम जनता की राय मांगी गई है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

गौरतलब है कि 2020 में भी ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे बदलाव की कोशिश की थी, जिसे कानूनी चुनौतियों के कारण रोकना पड़ा था। हाल ही में, सितंबर 2025 में एक राष्ट्रपति आदेश के जरिये एच1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डालर का शुल्क भी लगाया गया था। अब वेतन वृद्धि का यह नया प्रस्ताव विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका की राह को और भी चुनौतीपूर्ण बनाने वाला साबित हो सकता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़ा खुलासा: कनाडा में हथियार तस्करी के आरोप में पाकिस्तानी नागरिक समेत 3 गिरफ्तार

नई दिल्ली

संयुक्त राज्य अमेरिका से कनाडा में 89 हथियार की तस्करी के प्रयास में एक पाकिस्तानी नागरिक सहित तीन लोगों पर अमेरिका में आरोप तय किए गए हैं। इन बरामद हथियारों में से कम से कम 17 हथियार चोरी के बताए जा रहे हैं।

दक्षिणी न्यूयॉर्क जिले के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारियां गुरुवार को स्टेट रूट 90 पर न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस द्वारा की गई एक वाहन चेकिंग के दौरान हुईं। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान वाहन में सवार लोगों के असंगत और गोलमोल जवाबों से पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद वाहन की तलाशी ली गई।

अधिकारियों ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया, जिसमें कार की पिछली सीट के नीचे छिपाए गए कई अतिरिक्त हथियार भी शामिल थे।

फर्जी दस्तावेज वाले आरोपियों की पहचान
आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय कनाडाई नागरिक मलिक ब्रोमफील्ड, 25 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक फैजान अली और 22 वर्षीय कमाल सलमान के रूप में हुई है। तीनों को बाद में व्हाइट प्लेन्स में संघीय मजिस्ट्रेट जज के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।

अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि फैजान अली के पास किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया एक एक्सपायर पाकिस्तानी राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट मौजूद था।

15 साल तक की हो सकती है जेल
आरोपियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें अमेरिका से हथियारों की तस्करी, हथियारों का बिना लाइसेंस व्यापार, चोरी के हथियारों का अंतरराज्यीय परिवहन और आग्नेयास्त्रों को अवैध रूप से अपने पास रखना शामिल है। इसके अलावा, मलिक ब्रोमफील्ड पर एक विदेशी नागरिक द्वारा अवैध रूप से हथियार रखने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया है।

अभियोजकों के अनुसार, इन आरोपों के तहत 5 से 15 साल तक की अधिकतम वैधानिक जेल की सजा का प्रावधान है, हालांकि अंतिम सजा का निर्धारण अदालत द्वारा किया जाएगा।

इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक घोषणा अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन, एफबीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर इन चार्ज जेम्स सी. बार्नकल जूनियर और एटीएफ (ATF) के स्पेशल एजेंट इन चार्ज ब्रायन डिगिरोलामो ने की।

क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी अटॉर्नी क्लेटन ने कहा कि जैसा कि आरोप है, प्रतिवादियों को देश से बाहर तस्करी करने के लिए 80 से अधिक बंदूकों को ले जाते हुए पकड़ा गया है, जिनमें शॉर्ट-बैरल राइफलें और चोरी के हथियार शामिल हैं।

वहीं, बार्नकल ने कहा कि दो विदेशी नागरिकों सहित इन आरोपियों ने कथित तौर पर हथियारों को कनाडा ले जाने का प्रयास करके सार्वजनिक सुरक्षा को भारी खतरे में डाला है। डिगिरोलामो ने अवैध हथियारों की तस्करी से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी कड़ी चेतावनी दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस जांच में एनवाईएसपी ट्रूप एफ कम्युनिटी स्टेबिलाइजेशन यूनिट, एफबीआई की न्यूयॉर्क हडसन वैली सेफ स्ट्रीट्स टास्क फोर्स और शराब, तंबाकू, आग्नेयास्त्र व विस्फोटक ब्यूरो का संयुक्त प्रयास शामिल था।

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