Electric Two-Wheeler खरीदने वालों के लिए बड़ा अपडेट, सरकार बदल सकती है सब्सिडी नियम

नई दिल्ली

देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर मिलने वाली सब्सिडी को और बढ़ा सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के लिए अतिरिक्त फंड की डिमांड करने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल वाहनों की जगह EV टू-व्हीलर अपनाएं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि EV कंपनियों के शेयरों में भी उत्साह देखा जा रहा है।

सरकार पहले ही PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत FY2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी के लिए करीब ₹10,900 करोड़ आवंटित कर चुकी है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग के बाद इस योजना को जुलाई तक बढ़ा दिया गया था। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार इस योजना को और मजबूत बनाना चाहती है। हालांकि, अतिरिक्त फंड कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से मंत्रालय इस पर चर्चा कर रहा है कि किन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर इस सूची में सबसे ऊपर है।

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हों, ताकि तेल आयात पर दबाव कम किया जा सके। खास बात यह है कि अब EV केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं।

हाल के आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। मई के पहले आधे हिस्से में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल टू-व्हीलर बिक्री में 5.5% की गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि लोग अब पेट्रोल स्कूटर की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता देने लगे हैं। एथर (Ather Energy) के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत सिंह फोकेला ने कहा कि पहले हर घर में पेट्रोल वाहन जरूरी माना जाता था, लेकिन अब हर परिवार कम से कम एक EV रखना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि EV अब घर की दूसरी गाड़ी के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑफिस जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल स्कूटर चलाने में प्रति किलोमीटर कई रुपये खर्च होते हैं, वहीं EV स्कूटर की लागत करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ जाती है। रात में घर पर चार्जिंग कर लेना और पेट्रोल पंप की लाइन से बचना लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।

अगर सरकार सब्सिडी और बढ़ाती है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतों में और कमी आ सकती है। इससे ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), TVS iQube, बजाज चेतक (Bajaj Chetak) जैसे ब्रांड्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। भारत की EV क्रांति अब अगले बड़े चरण में प्रवेश करती दिख रही है, जहां सरकार, कंपनियां और ग्राहक तीनों मिलकर क्लीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी में हैं।

भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर, जल्द दस्तक देगा मॉनसून; कई राज्यों में बारिश के आसार

नई दिल्ली

इस समय पूरा उत्तर और मध्य भारत भीषण लू और टेम्परेचर का टॉर्चर झेल रहा है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार दिखाई नदीं दे रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले 7 दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, IMD ने इसी बीच मॉनसून पर बड़ी खुशखबरी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन में मॉनसून भारत में यानी केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके लिए अनुकूल मौसमी स्थितियां बनी हुई हैं।

मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन में कहा है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान, असम, मेघालय, लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है।
दिल्ली में पिछले 14 सालों सबसे गर्म रात

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (25 मई) को न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 5.7 डिग्री अधिक है और लगभग 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। IMD के अनुसार, इस महीने में न्यूनतम तापमान मई के महीने में इससे पूर्व आखिरी बार 26 मई, 2012 को न्यूनतम तापमान इससे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मई महीने की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब इस साल 21 मई को न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस था।
सोमवार को दिल्ली में आंधी-बरिश

आईएमडी के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है, लोदी रोड में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। वहीं, रिज में यह 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है और आयानगर में यह 32 डिग्री सेल्सियस बना रहा जो सामान्य से 5.3 डिग्री अधिक है। IMD के एक अधिकारी ने कहा, ”सफदरजंग, लोदी रोड और आयानगर में गर्म रात की स्थिति दर्ज की गई है।” IMD ने 25 मई को शाम के समय बहुत हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है, जिससे मामूली राहत मिल सकती है।
IMD का येलो अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, गर्म रात तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है। आईएमडी ने सोमवार को लू चलने की आशंका जताते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है जिसके कारण अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले 3-5 दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। IMD के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में विदर्भ के ब्रह्मपुरी में सबसे अधिक 47.1°C तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है। 24 मई तक मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से लेकर 17°N/95°E तक पहुँच चुकी है। अगले 2-3 दिनों में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं।
भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

एक तरफ जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या अधिक) दर्ज की गई है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। IMD ने केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी अगले 4-5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और आसपास के क्षेत्रों पर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है।इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है।
पंजाब-हरियाणा से लेकर पश्चिमी यूपी तक बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे कुछ राहत मिल सकती है। IMD के मुताबिक, 25 से 27 मई के दौरान उप-दहमालयी पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा 25 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इसके अलावा 28 से 30 मई के बीच, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-बिजली के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है।

इबोला वायरस को लेकर भारत में हाई अलर्ट, सरकार ने जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था। 

संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि
आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला (‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता
इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने ‘अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं। 

भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। 

देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट
भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 

कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें। 

इबोला का ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन बेहद खतरनाक
इबोला का ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे ‘इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब; कहा- पिछली गलतियों से नहीं लिया सबक

नई दिल्ली
 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले हुए नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) से कोई सबक नहीं सीखा है. साथ ही, मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कराने के लिए टेस्टिंग एजेंसी की जगह एक मज़बूत और स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की अर्जी पर केंद्र, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और सीबीआई से जवाब मांगा है। 

यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच के सामने आया. बेंच ने निर्देश दिया कि अर्जी की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा दूसरी पार्टियों को भी दी जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो नीट एग्जाम कराने के लिए जिम्मेदार है, से कहा कि वह 2024 में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के पालन पर गुरुवार तक एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे। 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि, यह दुख की बात है कि, उन्होंने (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने अपना सबक नहीं सीखा है. यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट के समझ आ चुका है. एक कमेटी, एक मॉनिटरिंग कमेटी थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें मान लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए कमेटी द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे। 

बेंच ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की वकील तन्वी दुबे के जरिए फाइल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी एक जैसे मामलों को एक साथ जोड़ रहा है.

मेडिकल बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह नीट यूजी कराने के लिए एनटीए को पुनर्गठन करने या उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली लाने का निर्देश दे. कोर्ट ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज़्यादा छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है। 

मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए एनटीए ने 3 मई को जो अंडरग्रेजुएट स्तर का नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) लिया था, उसे 12 मई को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था, जिसकी अब सीबीआई जांच कर रही है। 

मेरे लिए वोट देने वालों की हत्या हुई, शुभेंदु अधिकारी की चेतावनी से बंगाल की राजनीति गरमाई

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने चेतावनी दे दी है कि 2021 चुनाव के बाद हुए कथित हमलों की कानूनी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है। खास बात है कि 2026 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अधिकारी पहली बार रविवार को नंदीग्राम पहुंचे थे।

हमलों का रखा है रिकॉर्ड
नंदीग्राम में अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने उसके कार्यकर्ताओं पर हुए तृणमूल कांग्रेस के कथित हमलों का रिकॉर्ड रखा है। उन्होंने कहा, ‘2021 विधानसभा चुनावों के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को तोड़ा गया और कई पार्टी समर्थकों को मारा गया। सभी का हिसाब रखा गया है और सभी को कानूनी न्याय मिलेगा।’

उन्होंने कहा, ‘अगर आप चाहें, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों की ईंटें खींच लें, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना। भाजपा ऐसे कामों को बढ़ावा नहीं देती है। मुझे सब याद है और मैं किसी भी बात को नहीं छोड़ूंगा।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए वोट करने में कई लोग मारे गए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने पूरा रिकॉर्ड रखा है। भरोसा कीजिए, मैं नंदीग्राम का कर्ज चुकाऊंगा।’

नंदीग्राम से वादा
रविवार को नंदीग्राम में आयोजित रैली में, अधिकारी ने विधायक पद से अपने इस्तीफे को लेकर समर्थकों के बीच फैली चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि सीट छोड़ने से इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव कमजोर नहीं होगा। नंदीग्राम को अपना ‘घर’ और अपने राजनीतिक उत्थान की जन्मस्थली बताते हुए अधिकारी ने कहा कि 2003 से संघर्ष के दौरान बना उनका रिश्ता भवानीपुर जाने के बावजूद पहले की तरह कायम रहेगा।

अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को मामलू अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2026 में उन्होंने बनर्जी के सामने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है।

छोटे भाई को दी जिम्मेदारी
खास बात है कि सीएम अधिकारी ने नंदीग्राम की जिम्मेदारी छोटे भाई सोमेंदु अधिकारी को दी है। उन्होंने कहा, ‘फिलहाल मेरे ऊपर पूरे राज्य की ज़िम्मेदारी है। सरकार चलाने के काम के दबाव के कारण मैंने सोमेंदु अधिकारी को यह खास जिम्मेदारी सौंपी है। नंदीग्राम में पंचायत, प्रशासन और जनता की सेवा से जुड़े मामलों में पांच विधायक उनकी मदद करेंगे।’

नौतपा की शुरुआत के साथ बढ़ेगी तपिश! यूपी-हरियाणा में 48°C तक पहुंच सकता है तापमान

नई दिल्ली

आज यानी 25 मई से नौतपाक की शुरुआत हो गई है। यह 2 जून तक जारी रहेगा। यानी इन 9 दिनों में भयंकर गर्मी पड़ने वाली है। हिंदू पंचांग के मुताबिक ये ऐसे 9 दिन होते हैं जिनमें सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और ऐसे में तेज धूप के साथ ही गर्म हवाएं गर्मी को चरम पर पहुंचा देती हैं। अगर ज्योतिषीय गणना की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र लगते ही नौतपा की शुरुआत हो जाती है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं 28 से 30 मई के बीच तेज आंधी की भी चेतावनी जारी की गई है।

कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम
राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ रही है। रविवार को यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का कहना है कि 28 मई तक अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। इसके बाद बारिश से तापमान में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। वहीं 25 मई को बादल छाने की संभावना है। हालांकि गर्मी से राहत की संभावना कम ही है।

यहां भयंकर लू का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार बिहार, झारखंड और ओडिशा में मौसम करवट ले सकता है। यहां मध्यम बारिश की संभावना है। ओडिशा और झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भयंकर गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान 47 से 48 डिग्री तक जा सकता है। राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 48 डिग्री तक जाने की संभावना है।

कहां है बारिश का अनुमान
आईएमडी के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघायलय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा हवाओं की स्पीड भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है। बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

दक्षिण के राज्यों में बारिश
दक्षिण के राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और तेलंगाना में भी बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर बारिश हो सकती है।

महाराष्ट्र में 47.2 डिग्री तक पहुंचा पारा
कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ”अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।”

पश्चिमी विक्षोभ दिलाएगा राहत
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 28-29 मई को एक नए पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते राज्य के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश में, राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है, और न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक है। बांदा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक है।

असम विधानसभा में UCC बिल पेश होते ही हंगामा, आदिवासी समाज को कानून से मिली पूरी छूट

गुवाहाटी 

असम कैबिनेट की मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 पेश किया। इस बेहद अहम विधेयक पर 27 मई को चर्चा और इसे पारित किए जाने की संभावना है। हालांकि, विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि इसे प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। 

इससे पहले 13 मई को मुख्यमंत्री सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। तब सरकार ने घोषणा की थी कि 21 से 26 मई तक चलने वाले मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान यह कानून लाया जाएगा। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसे सत्र के अंतिम दिन पेश किया जाएगा।

कानून के पांच मुख्य आधार
राज्य सरकार के मुताबिक, इस विधेयक के मसौदे को असम की विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल तैयार किया गया है। यह नया कानून मुख्य रूप से नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियमित करेगा।

बहुविवाह का खात्मा: राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लगेगी।

शादी की समान उम्र: विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होना।

तलाक और निकाह का पंजीकरण: सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा।

बेटियों को बराबर का हक: पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार।

लिव-इन का कानूनी हिसाब: बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य।

यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा असम
यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड ने साल 2024 में यूसीसी लागू किया था। वह संविधान के नीति निदेशक तत्वों के तहत ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना था। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।

इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में यूसीसी लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त बनाया है और उनकी सुरक्षा बढ़ी है। सीएम धामी ने कहा था कि यूसीसी को लेकर लोगों की तमाम शंकाएं और अफवाहें खत्म हो चुकी हैं। पांच लाख से अधिक मामलों में निजता के उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में शादियां पंजीकृत हो रही हैं। महज एक साल में 4,74,447 विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं। दूसरी ओर, गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और समानता देने के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पारित किया है।

भाजपा का राष्ट्रव्यापी एजेंडा 
ये विधेयक देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने के भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्य के अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में मुर्शिदाबाद की रैली में कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू किया जाएगा। हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन में एनडीए की कुल सीटें 102 तक पहुंच गई हैं।

विपक्ष का कड़ा विरोध और सियासी सरगर्मी
सत्र की शुरुआत से ही इस विधेयक को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने पहले ही सत्र में यूसीसी लाकर जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा निभाया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और राइजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने कानून को लाने की टाइमिंग और इसके सामाजिक असर को लेकर सदन में विरोध दर्ज कराया है। 

सड़क पर नमाज को लेकर बढ़ा विवाद, मौलाना साजिद रशीदी की ‘थूक-पेशाब’ वाली दलील चर्चा में

नई दिल्ली
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने सड़क पर नमाज को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया है। रशीदी ने शिफ्ट में नमाज को जायज बताते हुए कहा कि सड़क नापाक होती है और इसलिए वहां मुसलमानों के इबादत नहीं करनी चाहिए। रशीदी ने कहा कि सड़क पर जानवर भी चलते हैं और लोग थूकते, पेशाब भी करते हैं। उन्होंने मुसलमानों को उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ पार्टियां उन्हें पिटवाना चाहती हैं।

एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में मौलाना रशीदी ने सड़क पर नमाज ना पढ़ने की सीएम योगी की हिदायत का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘योगी जी का बयान बिलकुल सही है। हमने कोरोना काल में भी नमाजे शिफ्ट में पढ़ी है। उन्हें पता है कि शिफ्ट में नमाज हो सकती है, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है। पूरे देश और प्रदेश में किसी मौलवी ने उनका खंडन नहीं किया। कोई खंडन कर रहा है तो वह कांग्रेस-सपा के लोग या उनसे जुड़े नेता। उनको पता नहीं दीन के बारे में कि नमाज शिफ्ट में भी पढ़ने का प्रावधान है।’

मौलाना साजिद रशीदी ने इस्लाम के दो सिद्धांतों का जिक्र करते हुए बताया कि क्यों सड़क पर नमाज पढ़ना जायज नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इस्लाम का बुनियादी सिद्धांत है कि नमाज नापाक जगह पर नहीं पढ़ी जा सकती है। सड़क पाक नहीं हो सकती है, कैसे पाक होगी जब उस पर लोग, जानवर चलते हैं, थूकते हैं और पेशाब भी करते हैं। सबकुछ होता है तो कैसे नमाज होगी। दूसरा सिद्धांत यह है कि वह मुसलमान नहीं हो सकता है जिससे किसी दूसरे को तकलीफ पहुंचे। अगर आप सगर जाम कर रहे हैं तो तकलीफ होती है लोगों को। एंबुलेंस फंस रही है, किसी को कहीं जाना है।’

अपराध में शामिल थे मुसलमान: रशीदी
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि कुछ समय पहले तक अधिकतर मुसलमान अपराधों में लिप्त थे, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद अब वे शिक्षा की राह पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ साल पहले तक तो मुसलमान गोली भी चलाता था, डकैत भी था। कैराना (पश्चिमी यूपी का एक इलाका) का तो पूरा क्षेत्र इसी में लगा था। 60-70 फीसदी यही करते थे। आज है कोई? अब मुसलमान ने सोच लिया है कि सही जिंदगी जीने का तरीका शिक्षा है।’ रशीदी ने कहा कि पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जो फ्री हैंड दिया था मुसलमानों को उससे कई कमियां आ गईं। उससे मुसलमानों का भला नहीं हुआ, शिक्षा से दूर हो गए। रोजगार छोड़ दिया, लूट-पाट वाली बुराइयां आ गईं। आज मुसलमान 15-20 साल से और जब से भाजपा सरकार आई है मुसलमानों ने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। चाहे गरीब मजदूर है वह भी पढ़ा रहा है।

बुलडोजर ऐक्शन पर क्या कहा
रशीदी ने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन उन लोगों के खिलाफ ही हो रहा है जो गलत काम में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा, ‘जब मैं रेप, चोरी, डकैती, बदमाशी में नहीं पकड़ा जाऊंगा तो क्यों बुलडोजर चलेगा। बुलडोजर तो उस पर चलता है ना जो गलती करता है। मुसलमानों की खैर इसी में है कि सही रास्ते पर चलें। पहले कोई मुसलमान लड़का थाने में आ गया तो नेता का फोन आता था कि इसे छोड़ दो हमारा आदमी है। वह बाहर निकल कर एक और मर्डर करता था, एक और करता था, कातिल बन जाता था। बदमाश बन जाता था, उसे पीछे से समर्थन था। आज तो सीधा एनकाउंटर है। कौन बदमाशी करेगा। अक्लमंदी इसी में है कि हवा के खिलाफ मत चलो।’ सपा से जुड़े एक सवाल पर रशीदी ने कहा कि, हमें नहीं चाहिए ऐसी पार्टी जिसका मकसद यह हो कि मुसलमान नमाज के लिए सड़क पर उतरे, उनकी पिटाई हो, मुकदमे लगे, जेल जाएं और उनके घर टूटे। अखिलेश यादव बनवा देंगे घर किसी का। आजम खान को तो बचा नहीं पाए।

बकरीद के चलते CUET UG परीक्षा टली, 28 मई का एग्जाम अब नई तारीख पर होगा

 लखनऊ
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (यूजी) के तहत 28 मई को होने वाली परीक्षा को ईद-उल-अजहा (बकरीद) के चलते स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जानी थी। अब जल्द ही इसकी नई तिथि घोषित की जाएगी। इसकी सूचना रविवार को एनटीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है।

अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे एनटीए की अधिकारिक वेबसाइट (https://nta.ac.in) और https://cuet.nta.nic.in/) को नियमित रूप से देखते रहें।

क्यों टाली गई परीक्षा
NTA के मुताबिक, सरकार की ओर से ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए 28 मई 2026 को होने वाली CUET-UG परीक्षा की दोनों शिफ्ट्स को स्थगित कर दिया गया है। 

दोनों शिफ्ट्स प्रभावित
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि 28 मई को निर्धारित सुबह और दोपहर दोनों शिफ्ट्स की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इस दिन परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों पर यह फैसला लागू होगा. न्यूज एजेंसी ANI ने भी इस जानकारी अपने एक्स हैंडल से शेयर किया है। 

नई तारीख का इंतजार
NTA ने कहा है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें, ताकि उन्हें ताजा अपडेट मिल सके। 

क्या है CUET-UG परीक्षा
CUET-UG (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) देशभर में आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है. इसके जरिए केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों समेत 280 से ज्यादा संस्थानों में स्नातक कोर्स में दाखिला मिलता है। 

आधिकारिक नोटिस भी जारी
NTA ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया है, जिसमें 22 मई के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के मेमोरेंडम का हवाला दिया गया है. साथ ही छात्रों को हेल्पलाइन नंबर और ईमेल के जरिए सहायता लेने की सुविधा भी दी गई है.

भारतीय डॉक्टर ने रचा इतिहास! चीन से बैठकर 3000 किमी दूर हैदराबाद में की सफल सर्जरी

हैदराबाद

तकनीक और मेडिकल साइंस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है. चीन के वुहान में मौजूद भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद एक मरीज की रोबोट की मदद से सफल सर्जरी की. खास बात यह रही कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी थी, जिसमें यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लैडर तक ले जाने वाली नली) को दोबारा ब्लैडर से जोड़ा गया. यह ऑपरेशन चीन में विकसित रोबोटिक तकनीक और हाई-स्पीड 5G इंटरनेट की मदद से किया गया. पूरा ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल और हैदराबाद की मेडिकल टीम के बीच लगातार समन्वय बना रहा। 

इस उपलब्धि को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने वुहान में बैठकर हैदराबाद के मरीज की सिर्फ 90 मिनट में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। 

ऑपरेशन शुरू होने से पहले वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑनलाइन मरीज की मेडिकल रिपोर्ट्स की संयुक्त समीक्षा की. इसके बाद रोबोटिक आर्म्स की मूवमेंट को लेकर पूरी योजना तैयार की गई. हैदराबाद में मौजूद मेडिकल स्टाफ ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और ऑपरेशन थिएटर में रोबोटिक सिस्टम को तैयार किया। 

इस रोबोटिक सिस्टम में बेहद बारीक सर्जिकल उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे लगे थे, जो हैदराबाद से लाइव तस्वीरें वुहान भेज रहे थे. डॉ. गौस वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में एक कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे, जहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया। 

 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड रोबोट ले रहे थे निर्देश
रिपोर्ट के अनुसार, 5G नेटवर्क की मदद से डॉक्टर के निर्देश सिर्फ 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड के भीतर हैदराबाद पहुंच रहे थे. इतनी कम देरी की वजह से रोबोटिक आर्म्स लगभग उसी समय डॉक्टर के हाथों की हरकतों को दोहरा पा रहे थे. यही वजह रही कि हजारों किलोमीटर दूर बैठने के बावजूद सर्जरी के दौरान सटीकता और नियंत्रण बनाए रखा जा सका। 

हैदराबाद में मौजूद डॉक्टरों की टीम भी पूरे समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रही और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मदद के लिए तैयार थी.यह सर्जरी International Hepato-Pancreato-Biliary Association के चीनी चैप्टर की 10वीं कांग्रेस के दौरान दिखाई गई 26 सर्जरी में से एक थी. इनमें भारत, ब्राजील, जॉर्जिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ लाइव अंतरराष्ट्रीय रिमोट सर्जरी भी शामिल थीं। 

टोंगजी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के निदेशक चेन शियाओपिंग ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकें दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम को तेजी से बदल रही हैं। 

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