उमस भरी गर्मी से मिलेगी राहत, 8 डिग्री तक लुढ़केगा पारा; तूफान का अलर्ट

नई दिल्ली

देश के अलग-अलग राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अगले 2-3 दिनों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में दस्तक देने की संभावना है। इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में 28 मई से आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 60-80 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्रवाती तूफान भी आ सकता है।

आईएमडी के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू और रात में उमस वाली गर्मी का प्रकोप रहेगा। हालांकि, इसके बाद राहत मिल सकती है। 28 और 29 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में धूल भरी आंधी चलने की आशंका है। इस दौरान 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। अलग-अलग हिस्सों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी है। इसके बाद तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।

बिहार में आंधी-तूफान का अलर्ट
27 से 30 मई के दौरान बिहार में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। 27 और 29 मई को बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। सबसे गंभीर चेतावनी 29 मई के लिए है। इस दिन 80 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी और तूफान आने की आशंका है।

दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। 28-29 मई को इन राज्यों में मौसम पूरी तरह पलट जाएगा। दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में ओलावृष्टि के साथ 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की संभावना है, जिससे तपती गर्मी से भारी राहत मिलेगी।

पहाड़ों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर लू चलेगी। गरज-चमक के साथ अलग-अलग जगहों पर बारिश होगी। 28 और 29 मई को इन तीनों पहाड़ी राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 70 किमी/घंटे रहने की संभावना है। आईएमडी ने इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

कैसा रहेगा बंगाल का मौसम
पश्चिम बंगाल में 27 से 29 मई के दौरान 50 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान की संभावना है। 27 मई को भारी बारिश हो सकती है। वहीं, झारखंड में अगले 7 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। 27 से 29 मई के बीच यहां 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने की संभावना है। 27 मई को यहां लू का भी असर रहेगा।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम
मध्य प्रदेश में 27 मई को भीषण लू की स्थिति रहेगी। 28 से 30 मई के बीच 40-50 किमी/घंटे की तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू होगी, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। छत्तीसगढ़ में 27 और 28 मई को लू चलने के बाद 27 से 30 मई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ेंगी, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।

होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, जयशंकर की कूटनीति लाई बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली
ईरान में होर्मुज संकट के बीच एक ऐसी खबर आई है, जो भारत को खुश करने वाली है. दरअसल ईरान में हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को आखिरकार रिहा कर दिया गया है. ये भारत सरकार की ओर से लगातार हो रही कूटनीतिक कोशिशों के बाद मिली सफलता है. एक लंबी वार्ता और प्रक्रिया के बाद इन नाविकों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी है. भारतीय शिपिंग प्राधिकरण के मुताबिक ये नाविक एमवी हार्बर फीनिक्स नाम के तेल टैंकर पर तैनात थे। 

आपको बता दें कि ये मामला जुलाई, 2025 का है, जिसमें ईरान के जास्क पोर्ट के पास इस जहाज को रोके जाने के बाद नाविकों को हिरासत में ले लिया गया था. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने बयान जारी कर कहा कि नाविकों को अब सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया गया है और उन्हें वापस भारत लाने की तैयारी की जा रही है. इस मामले कोई भी सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है और बेहद शांति से भारत सरकार ने नाविकों की वापसी सुनिश्चित की है। 

भारत-ईरान के अच्छे संबंधों का सबूत 
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं. हालांकि भारत अमेरिका और इजरायल के साथ भी करीबी रिश्ते बनाए रखता है, इसलिए ऐसे मामलों में नई दिल्ली काफी संतुलित और सावधानी भरी नीति अपनाती है. ईरानी सुरक्षा बल अक्सर खाड़ी क्षेत्र में उन जहाजों को पकड़ने का दावा करते हैं, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का शक होता है. हालांकि भारतीय नाविकों की गिरफ्तारी की सटीक वजह या जहाज से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. शिप ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक एमवी हार्बर फीनिक्स पलाऊ झंडे वाला एक ऑयल टैंकर है. भारतीय सरकार ने इस पूरे मामले में सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए शांत कूटनीति की रणनीति अपनाई. माना जा रहा है कि इसी वजह से बातचीत के जरिए नाविकों की रिहाई का रास्ता निकल पाया। 

होर्मुज पर बना हुआ है संकट 
भारत दुनिया के सबसे बड़े मर्चेंट नेवी कार्यबल वाले देशों में शामिल है. खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर हजारों भारतीय नाविक काम करते हैं. वहीं 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरता है. भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है, अपनी लगभग आधी कच्चे तेल की जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए पूरी करता है. हालांकि इस बीच भारत के कई टैंकर होर्मुज से गुजरे हैं. पिछले एक हफ्ते में भारत के लिए एलएनजी ला रहे दो जहाजों ने भी इस रास्ते को क्रॉस किया है, जिसके बाद गैस संकट का दबाव थोड़ा कम जरूर होगा। 

UNSC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा हमला, ‘हजार वार’ की नीति को किया बेनकाब

नई दिल्ली

भारत ने 2 दिन में दूसरी बार पाकिस्तान को लताड़ लगाई है। वैश्विक मंचों पर भारत को उकसाने वाली बयानबाजियों से बाज न आने वाले पाकिस्तान को भारत ने इस बार आंतकवाद के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘यूएन चार्टर के सिद्धांतों को बनाए रखने’ पर आयोजित एक खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने पाकिस्तान को एक्सपोज किया। राजदूत हरीश ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने की भारी कीमत चुकानी होगी।

राजदूत हरीश ने पाकिस्तान के असली चेहरे को UNSC में बेनकाब किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के गंभीर परिणाम होते हैं। अस्तित्व में आने के बाद से ही पाकिस्तान लगातार आतंकवाद, उग्रवाद, हिंसक कट्टरपंथ और भारत-विरोधी बयानबाजी कर रहा है। पाकिस्तान दुष्ट ताकतों को पालने और उनका इस्तेमाल करने में जुटा हुआ है।”

क्या बोला भारत?
भारतीय राजदूत पाकिस्तान की सेना की कुख्यात डॉक्ट्रिन ‘ब्लीडिंग इंडिया बाय अ थाउजेंड कट्स’ यानी भारत को लहूलुहान करने जैसी नीति को भी संयुक्त राष्ट्र के सामने लेकर आए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई युद्ध शुरू कर, बेवजह आक्रामकता दिखाकर और आतंकवाद फैलाकर संप्रभुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन किया है। ऐसे में पाकिस्तान का UN चार्टर के प्रति प्रतिबद्धता जताना पूरी तरह खोखला और पाखंड है।

राजदूत हरीश ने याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत ने शुरुआत से ही पाकिस्तान के सीमा पार आक्रमण को झेला है। पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। भारत ने यह भी बता दिया कि उसके पास इस आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

जम्मू कश्मीर के जिक्र पर भी भारत ने सुनाया
गौरतलब है कि भारत ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे का जिक्र करने को लेकर मंगलवार को भी पाक और चीन को सुनाया था। दरअसल पाकिस्तान और चीन के बीच बीजिंग में हुई एक बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया था। इसमें कश्मीर का जिक्र कर कहा गया था कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के मुताबिक सुलझाया जाना चाहिए। इसके बाद भारत ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी भी तीसरे देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, “हम चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के अनुचित बयान को सिरे से खारिज करते हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं, थे और हमेशा रहेंगे। किसी भी अन्य देश के पास इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।” वहीं भारत ने CPEC प्रोजेक्ट को लेकर भी अपनी आपत्ति दोहराई। भारत ने कहा कि इस कॉरिडोर का कुछ हिस्सा भारत की संप्रभु धरती (PoK) से होकर गुजरता है और भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर चोट करने वाले और पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध बनाने वाले किसी भी देश के ऐसे कदम का कड़ा विरोध करता है।

राजौरी के जंगलों में आतंकियों की घेराबंदी, पांचवें दिन भी जारी ‘ऑपरेशन शेरावाली’

राजौरी 
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन लगातार पांचवें दिन भी जारी है. डोरीमल और गम्भीर मोगला के घने जंगलों में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीमें आतंकियों की तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के दो बड़े कमांडर छिपे हो सकते हैं, जिन्हें पकड़ने या मार गिराने के लिए सुरक्षाबलों ने घेराबंदी और कड़ी कर दी है। 

सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के खिलाफ मल्टी ग्रिड ऑपरेशन चलाया जा रहा है. ऑपरेशन में पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है. साथ ही ड्रोन, हाईटेक सर्विलांस सिस्टम और आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि आतंकियों को भागने का मौका न मिले.
दरअसल शनिवार को यहां उस समय मुठभेड़ शुरू हो गई थी, जब जंगल में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक फायरिंग कर दी. इसके बाद सेना और पुलिस ने जवाबी कार्रवाई शुरू की और पूरे इलाके को घेर लिया गया. खुफिया एजेंसियों को पहले ही इन जंगलों में 2 से 3 आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया गया। 

नागरोटा स्थित सेना की व्हाइट नाइट कोर ने भी ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए इसे ‘ऑपरेशन शेरुवाली’ नाम दिया है. माना जा रहा है कि आतंकी अभी भी जंगल के भीतर किसी दुर्गम इलाके में छिपे हुए हैं। 

राजौरी की पीर पंजाल रेंज का यह इलाका आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. यहां घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और सीमित रास्ते सुरक्षाबलों के लिए मुश्किलें बढ़ाते हैं. यही वजह है कि ऑपरेशन बेहद सावधानी और रणनीति के साथ चलाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के इलाकों में भी चौकसी बढ़ा दी है. जगह-जगह नाके लगाए गए हैं और वाहनों व पैदल आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है । 

स्थानीय लोग भी सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं. फिलहाल इस ऑपरेशन में किसी जवान या नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन सुरक्षाबल आतंकियों को किसी भी हाल में बच निकलने का मौका नहीं देना चाहते। 

केरल में ED का बड़ा एक्शन, पूर्व CM विजयन और बेटी के ठिकानों पर छापेमारी

तिरुवनन्तपुरम
 केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ ईडी की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने बुधवार सुबह सुबह चीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पिनाराई विजयन के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई चल रही जांच के तहत की गई। इसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं और धनशोधन के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। बता दें कि केरल में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत लगभग 10 जगहों पर तलाशी ली गई। Pइनमें राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में विजयन का किराए का आवास भी शामिल था।

जानें क्या है मामला
बता दें कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन से जुड़ी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) वित्तीय लेनदेन मामले में केरल हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच को जारी रखने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति टीआर रवि ने कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड और उसके चार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें ईडी की जांच और ईसीआईआर को चुनौती दी गई थी। हालांकि यह मामला सीधे तौर पर पी. विजयन से जुड़ा नहीं है, लेकिन तब यह बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था। जब आरोप लगे कि सीएमआरएल ने एक्सलोगिक सोलूशन्स को संदिग्ध भुगतान किए थे। यह कंपनी उनकी बेटी वीणा थाइकांडियिल की बताई जाती है।

लगे थे ये आरोप
आरोपों के अनुसार, सीएमआरएल ने बिना किसी वास्तविक सेवा के वीणा के कंपनी को हर महीने भुगतान किया था, जिसके बाद केरल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया था। विपक्ष ने बार-बार विजयन और उनके परिवार पर सवाल उठाए थे। सीएमआरएल और उसके अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ईडी की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, इसलिए ईडी को जांच का अधिकार नहीं है।

कोर्ट के फैसले के बाद जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता मिला
याचिकाकर्ताओं में सीएमआरएल के प्रबंध निदेशक एस.एन. ससीधरन कर्था, सीएफओ के.एस. सुरेश कुमार, सीनियर मैनेजर एन.सी. चंद्रशेखरन और सीनियर अधिकारी अनु रैचल कुरुविला शामिल थे। इससे पहले सुनवाई के दौरान कुछ अधिकारियों ने ईडी पर पूछताछ के दौरान अवैध हिरासत का आरोप लगाया था। इसके बाद जून 2024 में हाई कोर्ट ने ईडी को पूछताछ की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। विजिलेंस अदालतों और हाई कोर्ट द्वारा पहले भी इस मामले में विजिलेंस जांच की मांग खारिज की जा चुकी थी। अब मंगलवार के फैसले के बाद ईडी को इस हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।

 

राफेल पर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फेल, भारत ने बढ़ाई ताकत; एयरफोर्स बनेगी और घातक

बेंगलुरु 
 भारत ने मित्र देश फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है. इसके साथ ही अब इस सौदे को लेकर तमाम तरह की अटकलबाजियों पर फिलहाल विराम लग गया है. भारत ने फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ की ऐतिहासिक डिफेंस डील की है. अब इसको लेकर भारत ने लेटर ऑफ रिक्‍वेस्‍ट (Letter of request-LOR) को अंतिम रूप दे दिया है. अब इसे फ्रांस को भेजा जाएगा. दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी. इसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलना है. बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत भारत को राफेल का एडांस वर्जन F4 मिलेगा. यह पहले के विमानों के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस है. राफेल F4 फाइटर जेट में पहले के मुकाबले पावरफुल सेंसर और रडार सिस्‍टम लगाया गया है. इसके साथ ही राफेल F4 में कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से डेवलप ज्‍यादा घातक वेपन भी इंटीग्रेट किया जा सकेगा. पाकिस्‍तान भी चीन और तुर्की से फाइटर जेट खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक सिर्फ बतोलेबाजी ही चल रही है. किसी तरह का ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। 

भारत ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया में बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को भेजे जाने वाले लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) को अंतिम रूप दे दिया है. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज अगले कुछ हफ्तों में फ्रांस को भेजा जा सकता है. इस सौदे के तहत करीब 90 राफेल विमान भारत में ही फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation और एक भारतीय साझेदार कंपनी के सहयोग से बनाए जाएंगे, जबकि बाकी विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में भारत आएंगे. यह खरीद गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट समझौते यानी इंटरगवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) के तहत की जा रही है. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फ्रांस की ओर से LoR का जवाब मिलने के बाद भारत औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा. इसके बाद कीमत, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट को लेकर दोनों देशों के बीच विस्तृत बातचीत होगी. अंतिम मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS) से मिलने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। 

प्रस्‍ताव को 3 महीने पहले मिली थी मंजूरी
इस प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीन महीने पहले मंजूरी दी थी. अब भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अगले महीने की शुरुआत में फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं. यह दौरा प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित फ्रांस यात्रा से पहले हो रहा है, जिससे रक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है. भारतीय वायुसेना पहले से 36 राफेल विमानों का ऑपरेशन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना भी आने वाले वर्षों में 26 राफेल-M विमानों को अपने विमानवाहक पोतों (Aircraft Carrier) के लिए शामिल करने जा रही है. अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से प्रशिक्षण, रखरखाव और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी। 

क्‍यों अहम है यह डील?
इस परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल करने की योजना है. भारत विमान के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) हासिल करने पर भी जोर दे रहा है, ताकि स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे Astra Missile और BrahMos-NG को राफेल से जोड़ा जा सके. हालांकि, विमान के पूरे सोर्स कोड तक पहुंच मिलने की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक बातचीत पूरी कर सौदे पर हस्ताक्षर करना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह सौदा भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा. फिलहाल वायुसेना के पास केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्‍क्‍वाड्रन की है। 

राफेल डील जरूरी क्‍यों?
राफेल विमानों की नई खेप भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों जैसे LCA Mk1A, LCA Mk2 और Advanced Medium Combat Aircraft के पूरी तरह विकसित होने तक कमी के अंतर को भरने में मदद करेगी. AMCA के 2035 के बाद सेवा में आने की संभावना है. इस बीच भारत पांचवीं पीढ़ी के एक अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर भी विचार कर रहा है. रूस ने अपने Sukhoi Su-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव भारत को दिया है, लेकिन इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। 

चौंकाने वाली स्टडी: हिमालय तक पहुंचा प्रदूषण, गंगा के मैदान में Pollution 20% बढ़ा

नई दिल्ली
 एक स्टडी में पाया गया है कि केवल एक दशक में PM प्रदूषण 20 फीसदी ये ज्यादा बढ़ गया है। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इतना ही नहीं, मैदानों से निकलने वाला प्रदूषण अब हिमालय तक भी पहुंच रहा है।

कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट ने यह स्टडी की है, जिसे ‘एटमॉस्फेरिक एनवायरनमेंट’ जर्नल में प्रकाशित करवाया गया है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि अभी तक देश में बायोमास जलाने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

अध्ययन से पता चला है कि थर्मल पावर प्लांट, बायोमास जलने और शहरी ठोस कचरा जलने से लगातार होने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण की स्थिति गंभीर होते जा रही है। यह गंगा के मैदान, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के 25 सालों के डेटा पर आधारित एक सैटेलाइट स्टडी है।

हिमालय तक कैसे पहुंच रहा प्रदूषण
स्टडी में बताया गया है कि मैदानों में हो उत्सर्जन हो रहा है, वह सीधे हिमालय में एरोसोल की मात्रा को प्रभावित कर रहा है। एरोसोल वातावरण में धूल, कालिख और रासायनिक बूंदों जैसे सूक्ष्म ठोस या तरल कणों के सस्पेंशन को कहते हैं।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली का प्रदूषण हिमालय की पश्चिमी और मध्य श्रेणियों तक पहुंच रहा है और बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदूषण पूर्वी हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे पता चलता है कि पहाड़ों की हवा में भी अब वायु प्रदूषण घुल चुका है।

चौंकाने वाले आंकड़े
हालांकि अध्ययन में ये पाया गया कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में पार्टिकुलेट मैटर के स्तरों में मापने योग्य सुधार देखने को मिले। लेकिन ये राज्य अभी भी अभी भी कार्बनयुक्त एयरोसोल के हॉटस्पॉट बने हुए हैं।

स्टडी से पता चला कि जो कार्बन प्रदूषण 2000–2009 के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तरी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में केंद्रित था, वह 2020–2024 तक पूरे पश्चिम बंगाल, बिहार, बांग्लादेश और असम, मेघालय और त्रिपुरा तक फैल गया।

अगर हिमालय न होता तो फिर क्या होता… 

अगर हिमालय न होता तो भारत कैसा होता? जवाब सीधा है कि उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश शीत रेगिस्तान होते। पंजाब और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति न होती और मध्य भारत में इतनी गर्मी होती कि वहां पर रहने लायक कुछ भी न होता। 

यूरेशिया टेक्टॉनिक प्लेट खिसकने से विशाल समुद्र टेथिस से हिमालय की उत्पत्ति हुई और भारत का वो भूगोल बना जिसमें आज एक अरब 33 करोड़ लोग रहते हैं।  इस विशाल टेथिस समुद्र का प्रतिनिधित्व अब केवल लेह से 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित पेंगोंग झील करती है। जो तीस प्रतिशत भारत क्षेत्र में है और बाकी का सत्तर फीसद चीन में। लाखों सालों की प्रक्रिया से जब हिमालय का निर्माण हुआ तो उससे तीन प्राकृतिक और भौगोलिक परिघटनायें हुई। जिससे भारत रहने योग्य बना। ये तीन परिघटनायें थीं-

1. मानसून बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न होता है और साउथ वेस्ट होते हुये हिमालय से टकराता है। बादल हिमालय से टकराकर लौटते हैं और जिससे उत्तरी भारत समेत राजस्थान तक जमकर बारिश होती है। इससे उत्तरी भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत को नई आक्सीजन मिलती है। जीवन खुशहाल रहता है।  इस बारिश से तमाम नदियां, जल धारायें, जंगल और भूजल रिचार्ज होते हैं। अगर हिमालय नहीं होता तो ये मानसून के बादल सीधे पश्चिमी चीन होते हुये मंगोलिया से रूस के साइबेरिया में दाखिल हो जाता। मतलब, भारत में जो जून 21 या 22 तारीख को मानसून आता है और सितंबर आखिरी तक रहता है। वो केवल भारत के ऊपर से गुजरते वक्त कुछ बारिश करता और आगे निकल जाता। जिससे मध्य भारत का भूजल रिचार्ज नहीं होता और हिमालय की नदियों में पानी कम रहता। मसलन, जिन इलाकों में नहरों के जरिये खरीफ की फसलें होती हैं। वहां कुछ नहीं होता। 

2. हर साल जनवरी और फरवरी माह में उत्तरी ध्रुव से साइबेरिया होते हुये बर्फीली हवायें मंगोलिया पहुंचती हैं और वहां से चीन के शिंझियांग और तिब्बत होते हुये भारत में दाखिल होती। जिससे साइबेरिया, मंगोलिया और चीन के शिनझिंगया, गिनगाई, गानसू और तिब्बत की तरह हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शीत मरूस्थल होते। लेकिन हिमालय होते हुये ये चीन से लौट जाती है। जिस कारण चीन का गोबी मरूस्थल का निर्माण हुआ और आज वो पर्यावरण के हिसाब से शून्य है। 

3. मानसून के अलावा पश्चमी, मध्य और उत्तर भारत में बारिश का एक मुख्य जरिया भू-मध्य सागर से उठने वाले पिश्चमी विक्षोभ का है। जो हर साल अपने साथ यूरोप के नीचे से भू-मध्य सागर से वाष्पीकरण कर बादल विकसित करता है और फिर ये बादल पाकिस्तान से होते हुये हिमालय से टकराते हैं। जिससे जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर को छोड़ (पोस्ट मानसून) भारत में बारिश होती है और हिमालय और इससे लगते कैचमेंट एरिया में बर्फबारी होती है। ग्लेशियर बनते हैं और फिर 12 महीने गंगा, यमुना, ब्रहमापुत्र सरीखी बड़ी नदियों में पानी रहता है। तापमान गर्मी से ठंडा हो जाता है। 

कुल मिलाकर हिमालय का हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। इसलिये इसे थर्ड पोल या तीसरा ध्रुव भी कहते हैं। एक प्रमाणिक तथ्य ये भी है कि हिमालय की अगर पूरी बर्फ भी पिघल जाये तो भी हिमालय से निकलने वाली कोई भी नदी नहीं सूखेगी। इसके पीछे मौसम विज्ञान केंद्र का शोध है। असल में, हिमालय के ग्लेशियर नदियों को 12 महीने  पानी नही देते। मसलन, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च में ग्लेश्यिर पूरी तरह से फ्रीज होते हैं। तापमान -20 डिग्री तक हो जाता है। तो ऐसे में फिर गंगा, यमुना, सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में पानी कहां से आता है? मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह बताते हैं कि ये पानी मानसून में विभिन्न जंगलों में स्टोर हुये पानी के जरिये नदियों तक पहुंचता है। उसी तरह से जैसे मध्य भारत में नर्मदा और गोदावरी में 12 महीने पानी रहता है और इन दोनों नदियों में  ग्लेशियर से पानी बिल्कुल भी नहीं आता। मैंने उनसे पूछा कि फिर अगर हिमालय की पूरी बर्फ पिघल जाये तो  क्या होगा? वो बताते हैं फिर होगा ये कि हिमालय क्षेत्र में जबरदस्त गर्मी पड़ेगी और यहां रहना मुश्किल होगा। इसलिये हिमालय को सही संरक्षण की जरूरत है। सबसे पहले इसे पॉलीथिन से बचाना होगा। क्योंकि ये ही एक ऐसा प्रदूषण है, जो हिमालय के लिये दीमक है।  इसके लिये जागरूक ही सबसे महत्पवूर्ण जरिया है। 

जल्दी-जल्दी भागो…, अवैध बांग्लादेशियों को लेकर CM शुभेंदु का तीखा बयान

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों को लेकर एक्शन मोड में आ गई हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा कि जल्दी-जल्दी भागो. हम इन्हें जेल में रखकर इन्हें खिलाना नहीं चाहते हैं. हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिए? हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने को कह दिया है। 

इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया था. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के निर्देश जारी किए थे। 

शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गई थी. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है। 

क्या है बंगाल की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति?
बंगाल में बीजेपी सरकार की नई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे हैं. उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है। 

उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे। 

बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है। 

HP के बाद Bharat Gas ने भी शुरू की पुरानी सुविधा, अब आसानी से मिलेगा LPG सिलेंडर

नई दिल्ली

 वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत गैस ने अपने ग्राहकों को अच्छी खबर दी है। एक बार फिर से कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी शुरू हो गई है। भारत गैस ने युद्ध के शुरू होने के बाद गैस की किल्लत के बीच यह सुविधा कई स्थानों पर बंद कर दी थी। खासगावं ग्रामीण इलाकों में। बता दें, इससे पहले एचपी ने भी एलपीजी सिलेंडर की बंद पड़ी होम डिलीवरी की सुविधा को फिर से शुरू कर दिया था।

क्यों बंद हो गई थी सुविधा?
युद्ध शुरू होने के बाद एक समय पर अचानक गैस की डिमांड में इजाफा हो गया था। लोग पैनिक बुकिंग करने लगे थे। जिसके बाद डीलर्स ने होम डिलीवर की सुविधा को कई इलाकों में बंद कर दिया था। लेकिन अब नियमों में हुई सख्ती के बाद एक बार फिर से LPG सिलेंडर की उन इलाकों में होम डिलीवरी शुरू हो गई है।

एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम 
सरकार ने कालाबाजारी को रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। अब बिना ओटीपी के एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलेगा। नए नियमों के अनुसार आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पहले LPG सिलेंडर की बुकिंग करनी होगी। उसके बाद आपके मोबाइल नंबर ओटीपी आएगा। इसके बाद आप उस डीलर्स के पास जाकर या फिर सिलेंडर वाली गाड़ी को ओटीपी दिखाएंगे। वो ओटीपी को वेरीफाई करेगा। उसके बाद ही नया LPG सिलेंडर मिल पाएगा। ध्यान रहे कि आपका गैस पासबुक आपके पास होना चाहिए।

नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो गांव में रहता है वो 45 दिनों के बाद ही नए सिलेंडर की बुकिंग कर पाएंगे। वहीं, शहरों में रहने वाले लोगों के लिए सरकार ने 25 दिन का कैप लगाया है।

LPG सिलेंडर के दाम स्थिर
पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 60 रुपये बढ़ाया गया था। वहीं, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 900 से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। जिसके बाद दाम 3000 रुपये के पार पहुंच गया है।

गैस की समस्या विकट? 
भारत जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलपीजी विदेशों से आयात करता था उसके लिए मौजूदा परिस्थितियां काफी कठिन है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने की वजह से एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। देश के सामने एलपीजी संकट खड़ा हो गया है। बता दें, भारत सरकार ने एलपीजी उत्पादन को घरेलू स्तर पर बढ़ाने का निर्देश दिया है।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के संकेत तेज, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं

 नई दिल्ली

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शुरुआत में ढाई- ढाई साल की सत्ता की शर्त के साथ शुरू हुई कांग्रेस सरकार में आखिरकार तीन साल बाद बदलाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद आखिरकार सिद्दरमैया राज्य की सत्ता छोड़ राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि राज्य के मंत्रिमंडल और राज्यसभा में दूसरे सदस्यों के नामांकन में भी सिद्दरमैया की पसंद को माना जाएगा।

कांग्रेस हाई कमान की बैठक में फैसला

कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं के साथ पहले अलग-अलग और फिर एक साथ बैठक की। शुरुआत में सिद्दरमैया इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें मना लिया।

ध्यान रहे कि नेतृत्व बदलाव को लेकर पार्टी में पहले भी बैठकें होती रही थीं, लेकिन सिद्दरमैया तब राजी नहीं हुए थे और उन्हें बिना सहमत किए कांग्रेस बदलाव का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी।

वैसे भी कर्नाटक विधानसभा में सिद्दरमैया के समर्थकों की संख्या ज्यादा है। सोमवार को कर्नाटक के दोनों ही नेता अपने समर्थक विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे।

केसी वेणुगोपाल ने बताया- राज्यसभा सीटों पर हुई चर्चा

बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने हालांकि मीडिया से कहा कि आप लोग जो भी अंदाजा लगा रहे हैं, वह सिर्फ अंदाजा है, कोई सच्चाई नहीं है। आज हमने कर्नाटक की राज्यसभा सीटों और काउंसिल सीटों पर चर्चा की। उनके साथ सिद्दरमैया और शिवकुमार भी थे।

वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक की राज्यसभा और काउंसिल सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी दूसरी सीटों के साथ की जाएगी। आज हमने यही तय किया है। किसी और बात पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया अगले कुछ दिनों में इस्तीफा देंगे।

गौरतलब है कि एक जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिवकुमार का शपथग्रहण तब होगा जब सिद्दरमैया राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे।

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