जज भी भ्रष्ट हो सकते हैं, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से मचा हड़कंप

चेन्नई

“इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज कल भी थे और आज भी हैं।” ये बातें खुद हाईकोर्ट ने कही है। सुनकर भले ही हैरत हो लेकिन मद्रास हाईकोर्ट की एक बेंच ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बातें कही हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में फैले भ्रष्टाचार पर आधारित तमिल फिल्म ‘करुप्पु’ पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया।

बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट में आर एस तमिलवेंदम नाम के वकील ने फिल्म पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि निर्देशक आरजे बालाजी के निर्देशन और सुपरस्टार सूर्या और तृषा अभिनीत फिल्म ‘करुप्पु’ में अदालतों और कानूनी व्यवस्था का बेहद आपत्तिजनक चित्रण किया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि फिल्म पूरी न्यायिक प्रणाली को बदनाम करती है।

भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं- HC
हालांकि याचिका को सिरे से खारिज करते हुए जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार हैं। HC ने कहा, “इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं। जजों के साथ ‘होली काउ’ जैसा व्यवहार करने की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट और जजों को आम आदमी की आलोचना से ऊपर नहीं माना जा सकता।”

इस दौरान हाईकोर्ट ने देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसपी भरूचा के उस बयान का भी जिक्र दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के लगभग 20 फीसदी जज भ्रष्ट हैं। वहीं HC ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के बयानों का भी जिक्र किया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाई गई छवि का पूरी तरह समर्थन नहीं करती, लेकिन सच से आंखें भी नहीं मूंद सकती। कोर्ट ने कहा, “हम न्यायिक भ्रष्टाचार के मामलों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हमारे सामने ऐसे उदाहरण आते रहे हैं। मद्रास हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए ऐसे जजों को नौकरी से बर्खास्त कर बाहर का रास्ता भी दिखाती रहती है।”

‘करुप्पु’ पर क्या है बवाल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म की कहानी ‘सेवन वेल्स’ नाम की एक काल्पनिक कोर्ट के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि उस अदालत का जज बेहद भ्रष्ट है और वह एक वकील के साथ मिलकर अदालत के कामकाज और फैसलों को अपनी उंगलियों पर नचाता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने आदेश में दर्ज किया कि उन्होंने खुद यह फिल्म देखी है और इसे बैन किया जाना सही नहीं।

याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि फिल्म में सिस्टम को बहुत खराब दिखाया गया है, हाईकोर्ट ने बेहद मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक HC ने कहा, “यह सच है कि फिल्म में सिस्टम का चित्रण काफी बढ़ा-चढ़ाकर किया गया है। लेकिन तमिल फिल्मों को बनाने का अंदाज ही यही है। हमारी फिल्मों में हीरो अकेला ही अपने एक दर्जन गुंडों को धूल चटा देता है। तमिल सिनेमा में सब कुछ मेलोड्रामैटिक होता है। इसलिए, ‘करुप्पु’ को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।”

मास्टरशेफ पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर, भावुक पोस्ट में मांगी दुआएं

मुंबई

मास्टरशेफ पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपना हेल्थ अपडेट देकर लोगों से दुआएं करने की प्रार्थना की है। पंकज के पोस्ट पर कई लोगों के कमेंट्स दिख रहे हैं जो उनके ठीक होने की विशेज भेज रह हैं। बता दें कि कुछ रोज पहले वह फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थीं। इससे जुड़ा पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला था। बता दें कि पंकज भदौरिया 2010 के मास्टरशेफ सीजन 1 की विजेता रह चुकी हैं।

कुछ दिन पहले करवाया था चेकअप
पंकज ने 17 मई को पोस्ट किया था कि उन्होंने प्रिवेंटिव चेकअप करवाया है। उन्होंने लिखा था, ‘मैं अपने फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थी। मुझे लगता है कि अगर आप 45 साल से ऊपर हैं तो आपको हर साल यह चेकअप करवाना जरूरी है, या अगर आपके पेरेंट्स 45 साल से ऊपर हैं तो इसको पढ़िए। हेल्थ सिर्फ बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि इसके शुरू होने से पहले बचाव करना भी है। रेग्युलर हेल्थ चेकअप से हेल्थ प्रॉब्लम जल्दी पता चल जाती हैं, आउटकम सही रहता है और आपको मेंटल पीस मिलती है। लक्षणों का इंतजार मत कीजिए, बाद में आपका भविष्य आपको धन्यवाद कहेगा। ‘

नहीं मिला स्टेज का अपडेट
पंकज भदौरिया को किस स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है, अभी इससे जुड़ी जानकारी नहीं मिल पाई है। उनके इंस्टापेज पर कई सारे कमेंट्स दिख रहे हैं। मास्टरशेफ गुरकीरत ने लिखा है, बहुत सारा प्यार, अच्छी वाइब्स और हीलिंग एनर्जी भेज रहा हूं। उनकी फॉलोअर ने लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। एक फैन ने लंबा नोट लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। आप वॉरियर हैं और मैंने आपकी जर्नी देखी है। आप यह युद्ध जीतेंगी। आज के समय में अगर अच्छा डॉक्टर और परिवार का साथ मिले तो कैंसर को हराना मुश्किल नहीं है। मैं भी स्टेज 3 कैंसर सर्वाइवर हूं और 5 साल हो गए हैं। बहादुरी से लड़िए आप जल्दी ठीक होंगी।

टीचर से शेफ बनी थीं पंकज
पंकज भदौरिया साल 2010 में मास्टरशेफ की विनर थीं। उन्होंने कुकिंग के लिए पैशन के चलते अपना 16 साल पुराना टीचिंग करियर छोड़ दिया था। पंकज लखनऊ में इंग्लिश की टीचर थीं। पंकज दिल्ली से हैं। पंकज भदौरिया के इंस्टाग्राम पेज पर 2.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इस पर वह लोगों के साथ रेसिपीज और किचन टिप्स साझा करती रहती हैं। लखनऊ में पंकज की कुलिनरी अकैडमी भी है।

केदारनाथ यात्रा 2026 ने बनाया रिकॉर्ड, 35 दिनों में पहुंचे 9 लाख श्रद्धालु

हरिद्वार

वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. हर रोज करीब 30,000 लोग केदारनाथ पहुंच रहे हैं. ऐसे में अगर आप भारी भीड़, लंबे जाम और 16 किलोमीटर की थका देने वाली पैदल चढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो हवाई सफर (By Flight/Air) आपके लिए सबसे बेस्ट और आरामदायक विकल्प है. आइए जानते हैं दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ धाम तक के हवाई सफर के दोनों बड़े विकल्प, रूट और खर्च का पूरा ब्योरा।

दिल्ली से देहरादून (फ्लाइट द्वारा)
आपकी हवाई यात्रा देश की राजधानी से शुरू होगी.  दिल्ली से उत्तराखंड के लिए सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं।

फ्लाइट रूट: दिल्ली (DEL) से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED).

समय: मात्र 50 मिनट से 1 घंटे 10 मिनट.
खर्च: एडवांस बुकिंग पर आने-जाने (राउंड ट्रिप) का किराया लगभग ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति आता है।

देहरादून से आगे केदारनाथ के लिए हवाई विकल्प
देहरादून पहुंचने के बाद आपके पास बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:

 बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा
देहरादून एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप सड़क मार्ग से सीधे नीचे दिए गए प्रमुख बेस कैंप हेलीपैड पर पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं:

प्रमुख लोकेशंस: गुप्तकाशी (Guptkashi), सिरसी (Sirsi) और फाटा (Phata).

समय: हेलीपैड से मंदिर तक का सफर महज 10 से 15 मिनट का होता है।

खर्च: आने-जाने का कुल किराया (Return Ticket) लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति के बीच होता है (यह आपके द्वारा चुने गए हेलीपैड पर निर्भर करता है).

जरूरी नोट: हेलीकॉप्टर टिकटों में होने वाली धोखाधड़ी से बचें.  इसकी बुकिंग सिर्फ और सिर्फ IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही कराना सही रहता है.

विकल्प 2: देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा
अगर आप बिना किसी कतार और बिना किसी झंझट के प्रीमियम सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सर्विस ले सकते हैं।

रूट प्लान: प्राइवेट चार्टर सेवा प्रदाता सीधे देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं. इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) या फिर सिर्फ केदारनाथ और बद्रीनाथ (दो धाम) का कस्टमाइज्ड ट्रिप भी बुक कर सकते हैं।

केदारनाथ के मुख्य आकर्षण: क्या देखें?
हवाई सफर से उतरते ही आप सीधे बाबा के धाम पहुंचेंगे, जहां आपको इन मुख्य स्थलों के दर्शन जरूर करने चाहिए:

ऐतिहासिक मंदिर व भीम शिला: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भव्य मंदिर.  इसके ठीक पीछे स्थित भीम शिला ने 2013 की भीषण बाढ़ के पानी को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर की रक्षा की थी।

आदि शंकराचार्य समाधि: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे स्थित, जहां महान संत आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था।

भैरव नाथ मंदिर: मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.  इन्हें केदारनाथ का रक्षक माना जाता है, जो सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं.

रुद्र मेडिटेशन केव (मोदी गुफा): मंदिर परिसर से 2 किमी दूर बनी एक भूमिगत गुफा, जहां साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 घंटे ध्यान लगाया था.

8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को बड़ा झटका? भारी सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर

नई दिल्ली

8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हर तरफ यही चर्चा है कि इस बार सैलरी में कितना बड़ा इजाफा होगा और क्या कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगें पूरी होंगी। लेकिन, अब जो संकेत सामने आ रहे हैं, उनसे लग रहा है कि सरकार बहुत बड़ा वेतन बढ़ोतरी पैकेज देने के बजाय मिडिल पाथ यानी संतुलित रास्ता अपना सकती है। आसान शब्दों में कहें तो कर्मचारियों को अच्छी बढ़ोतरी तो मिल सकती है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक बहुत बड़ा धमाका शायद न हो। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दरअसल, कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। यूनियनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाया जाए। फिटमेंट फैक्टर वही गणितीय फॉर्मूला होता है, जिससे कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। उदाहरण के लिए 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

अगर इस बार 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। लेकिन, एक्सपर्ट और कुछ यूनियन नेताओं का मानना है कि सरकार इतनी बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी देने से बच सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश पर बढ़ता वित्तीय बोझ है।

सरकार को सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी ही नहीं बढ़ानी होती, बल्कि उसके साथ पेंशन, भत्ते और रिटायरमेंट से जुड़े खर्च भी तेजी से बढ़ जाते हैं। इसके अलावा केंद्र के फैसले का असर राज्यों पर भी पड़ता है, क्योंकि ज्यादातर राज्य सरकारें भी बाद में अपने कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करती हैं। ऐसे में अगर बहुत बड़ा फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया, तो सरकारी खजाने पर लाखों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

महंगाई और बढ़ती जीवनशैली की लागत को देखते हुए कर्मचारी संगठन वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में घर खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च काफी बढ़ गया है। ऐसे में मौजूदा वेतन संरचना कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही।

हालांकि, सरकार आर्थिक संतुलन को भी नजरअंदाज नहीं कर सकती। यही वजह है कि अब यह माना जा रहा है कि सरकार बहुत बड़ा वेतन विस्फोट करने के बजाय एक मॉडरेट यानी संतुलित वेतन संशोधन का रास्ता चुन सकती है। मतलब कर्मचारियों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सभी मांगें पूरी होना मुश्किल दिख रहा है।

8वां वेतन आयोग करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रभावित करेगा। इसलिए, इसकी हर छोटी अपडेट पर लोगों की नजर बनी हुई है। अब सभी को इंतजार है कि आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों में क्या प्रस्ताव देता है और सरकार उस पर कितना अमल करती है।

ब्रह्मोस की तैनाती से बढ़ा दबाव, तीन तरफ से रणनीतिक घेराबंदी के बीच बढ़ी हलचल

नई दिल्ली

भारत की एक कूटनीतिक चाल से इस्‍लामिक NATO के खलीफ तुर्की का दम घुटने लगना है. तुर्की ने जिस तरह से आतंकवादियों के पनाहगार पाकिस्‍तान का साथ दे रहा है, उससे भारत को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने और उसे बदलने पर मजबूर होना पड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की एक्‍सपर्ट पाकिस्‍तान में मौजूद थे. इससे भारत की चिंता और भी बढ़ गई. इसके बाद तुर्की को उसके ही आंगन में घेरने की कवायद शुरू कर दी गई. अब इसका असर दिखने लगा है. तुर्की की बौखलाहट बढ़ गई है. दरअसल, भारत ने भूमध्‍य सागर में अपनी डिफेंस डिप्‍लोमेसी को रफ्तार के साथ धार देना भी शुरू कर दिया है. अभी तो बस शुरुआत भर है, लेकिन उससे ही इस्‍लामिक NATO के इस खलीफा का दम निकलने लगा है. भारत तुर्की के तीन पड़ोसी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को लगातार नई ऊंचाई दे रहा है. इन तीनों देशों ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की खरीद में दिलचस्‍पी भी दिखाई है. ब्रह्मोस का नाम सुनकर ही तुर्की में घबराहट है. तुर्की की मीडिया में इस बात की ड‍िमांड भी बढ़ गई है कि इससे पहले कि ग्रीस की हाथों में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल और मॉडर्न वेपन सिस्‍टम पहुंचे, उसपर अटैक कर देना चाहिए।

पिछले कुछ सालों में भारत ने भूमध्‍य सागर में तुर्की के तीन पड़ोसी देशों – अर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर काम करना शुरू किया है. खासकर रक्षा के क्षेत्र में तीनों देशों ने भारत के साथ संबंधों को नया आयाम देने की गंभीर कोशिश की है. तुर्की के मनमाने रवैये से परेशान अर्मेनिया के भारत के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं. अर्मेनिया को भारत से कई तरह के मॉडर्न वेपन सिस्‍टम भी मिले हैं. दूसरी तरफ, साइप्रस और ग्रीस भी भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ाने में जुटे हैं. कुछ दिनों पहले ही साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भारत के दौरे पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्‍ट्रैटजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही साइप्रस और भारत के बीच रक्षा संबंध आने वाले दिनों में और भी मजबूत होने की संभावना प्रबल हो गई है. भारत और ग्रीस के बीच भी स्‍ट्रैटजकि पार्टनरशिप को लेकर एग्रीमेंट हुआ है. एथेंस ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में अपनी दिलचस्‍पी दिखाई है।

तुर्की में बौखलाहट
इस्‍लामिक NATO के जरिये भारत की घेरेबंदी करने की साजिश कर रहा है तुर्की अब भारत की कूटनीति के सामने पस्‍त होता दिख रहा है. दरअसल, तुर्की की ग्रीस से पुरानी रंजिश रही है. अब जब यह खबर सामने आई कि ग्रीस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा है तो तुर्की की सांस उखड़ने लगी है. अंकारा में बौखलाहट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तुर्की की मीडिया में ग्रीस पर पहले ही अटैक करने की सलाह दी जाने लगी है. तुर्की के एक्‍सपर्ट और नीति-नर्माताओं को इस बात का डर है कि यदि ग्रीस के पास ब्रह्मोस मिसाइल आ गई तो रीजन में सिक्‍योरिटी कैलकुलेशन पूरी तरह से बदल जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के साथ ही पूरी दुनिया ने देखा कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने किस तरह से पाकिस्‍तान के तमाम एयर डिफेंस सिस्‍टम को भेदते हुए तबाही ट्रेलर दिखाया था।

इस वजह से ब्रह्मोस बेहद खास

    दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल: ब्रह्मोस लगभग Mach 2.8 से 3 की रफ्तार से उड़ती है, यानी आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज।

    भारत-रूस की संयुक्त परियोजना: इसे भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyenia ने मिलकर विकसित किया है।

    मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च क्षमता: ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है।

    ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक: लॉन्च के बाद इसे लगातार कंट्रोल करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।

    बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान: यह समुद्र की सतह से सिर्फ 5 से 10 मीटर ऊपर उड़ सकती है, जिससे रडार पर पकड़ना कठिन होता है।

    उच्च सटीकता के साथ हमला: ब्रह्मोस दुश्मन के ठिकानों और युद्धपोतों पर बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
    दो चरण वाला इंजन सिस्टम: पहले चरण में सॉलिड बूस्टर और दूसरे चरण में लिक्विड रैमजेट इंजन इस्तेमाल होता है, जो इसे सुपरसोनिक गति देता है।

    भारी वारहेड ले जाने की क्षमता: यह करीब 200 से 300 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है।

    दुश्मन के लिए इंटरसेप्ट करना मुश्किल: इसकी तेज गति, कम ऊंचाई वाली उड़ान और बदलते फ्लाइट पाथ इसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बनाते हैं।

    भारत का सफल रक्षा निर्यात हथियार: फिलीपींस ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना और अब कई अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

अर्मेनिया और साइप्रस को भी मिलेगा ब्रह्मोस?
तुर्की के दो और पड़ोसी देश भारत के अहम साझीदार हैं – अर्मेनिया और साइप्रस. इन दोनों देशों ने भी नई दिल्‍ली के साथ अपने संबंधों को स्‍ट्रैटजिक लेवल पर अपग्रेड किया है. अर्मेनिया पहले से ही भारतीय हथ‍ियारों का बड़ा खरीदार बना हुआ है. वहीं, साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स कुछ दिनों पहले ही भारत की यात्रा पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने डिफेंस सेक्‍टर में साझीदारी को लेकर सहमति जताई है. ग्रीस और अर्मेनिया की तरह ही साइप्रस ने भी भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदने की चाहत दिखाई है. उम्‍मीद है कि आने वाले दिनों, महीनों या कुछ वर्षों में ग्रीस, अर्मेनिया और साइप्रस के पास ब्रह्मोस मिसाइल होगी. इस तरह तुर्की तीन तरफ से यानी पूरब, पश्चिम और दक्षिण तीन दिशाओं से ब्रह्मोस मिसाइल की नोक पर होगा. और इसी बात से तुर्की में खलबली मची हुई है. तुर्की के एनालिस्‍ट और वहां की मीडिया पहले ही ग्रीस पर अटैक करने की बात करने लगे हैं।

 

केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी, मौसम विभाग ने बताई देरी की वजह

नई दिल्ली

 देशभर में बदलते मौसम के बीच मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। अंडमान सागर और श्रीलंका तक समय से पहले पहुंचने वाला मानसून भारत की मुख्य भूमि के करीब आकर ठहर गया है।

इसकी सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवाती मौसम सिस्टम और हवाओं के बदले हुए रुख को माना जा रहा है। मौसम विभाग ने पहले 26 मई के आसपास केरल में मानसून पहुंचने का अनुमान किया था, लेकिन अब इसके तीन से चार जून के बीच दस्तक देने की संभावना है।

केरल में मानसून अब 3-4 जून को पहुंचेगा

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा शुक्रवार को मानसून का दूसरा अग्रिम अनुमान जारी करेंगे, जिसके बाद स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी। मौसम विज्ञानी एवं स्काइमेट के अध्यक्ष जेपी शर्मा का कहना है कि इस बार मानसून की शुरुआत धीमी और संतुलित रह सकती है।

उनके मुताबिक अगर मानसून तीन-चार जून तक केरल पहुंच भी जाता है तो शुरुआत में इसकी रफ्तार कमजोर रहेगी और यह तेजी से उत्तर भारत की ओर आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने इसे मानसून की सॉफ्ट लैंडिंग बताया है।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुख्य कारण

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की चाल अभी पूरी तरह समुद्री हवाओं पर निर्भर है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम ने मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींच लिया है।

इससे अरब सागर से केरल की तरफ बढ़ने वाली नमी भरी दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। यही कारण है कि मानसून की प्रगति रुक गई और उत्तर की ओर बढ़ने की उसकी रफ्तार धीमी हो गई।

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अरब सागर, लक्षद्वीप एवं बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ चुका है, लेकिन केरल तट पर इसके आगमन के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। निचले स्तर की हवाएं धीरे-धीरे मजबूत हो रही हैं, मगर ऊपरी स्तर की हवाएं अभी सही दिशा में नहीं बह रहीं। इसी वजह से मानसून को आगे बढ़ने में समय लग रहा है।

श्रीलंका में भी देरी से पहुंच रहा मानसून 

श्रीलंका में मानक समय से छह दिन की देरी से आधिकारिक तौर पर मानसून पहुंच गया है। श्रीलंका पहुंचने के लगभग एक सप्ताह बाद मानसून केरल पहुंचता है। ऐसे में अब दो से चार जून के बीच केरल में मानसून के प्रवेश की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है। हालांकि केरल में अभी भारी बारिश हो रही है, लेकिन उसे प्री-मानसून की श्रेणी में रखा गया है।

एल नीनो का शुरुआती प्रभाव भी संभव

मानसून घोषित करने के लिए मौसम विभाग के तय 14 केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होना जरूरी होता है। इसके साथ हवा की गति, दिशा और बादलों की स्थिति भी तय मानकों पर खरी उतरनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और मानसून की देरी का सीधा संबंध समुद्री और वायुमंडलीय हालात पर निर्भर है। प्रशांत महासागर की स्थिति अभी धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ती दिख रही है। मौसम विभाग का कहना है कि एल-नीनो की शुरुआती छाया मानसून की गति एवं वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इसका असर शुरुआती चरण में ही माना जा रहा है।

 

PNG यूजर्स के लिए राहत, LPG कनेक्शन सरेंडर करने की नहीं होगी जरूरत

नई दिल्ली

शहर बदलते हैं, तो सामान तो पैक हो जाता है, लेकिन रसोई की गैस वाली मुसीबत कई लोगों के लिए ‘गले की हड्डी’ बन जाती थी. अक्सर लोग पीएनजी यानी पाइप वाली गैस लेने से कतराते थे, क्योंकि डर यही रहता था कि अगर कल को कहीं और शिफ्ट होना पड़ा, तो फिर से नए कनेक्शन के चक्कर में कौन धक्के खाएगा. अब दिल्ली सरकार और केंद्र के नए आदेश के बाद इस मामले में भी राहत मिल रही है. दरअसल, सरकार ने एलपीजी नियमों में गजब के बदलाव किए हैं, जिसके बाद अब आपका पुराना कनेक्शन ‘डेड’ नहीं होगा, बल्कि उसे ‘पॉज’ माना जाएगा।

अगर आपके घर में भी नया पीएनजी कनेक्शन लगा है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. HPCL ने ग्राहकों को बताया है कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन एक्टिव हो चुका है, उनके पास अब 2 रास्ते हैं. या तो वे पीएनजी लगने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करके हमेशा के लिए खत्म कर दें, या फिर एक खास ट्रांसफर वाउचर ले लें. इस ट्रांसफर वाउचर का फायदा यह है कि अगर आप भविष्य में किसी ऐसे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की पाइपलाइन मौजूद नहीं है, तो आप इसी वाउचर की मदद से अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन फिर से चालू करवा सकते हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूशन को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सरकार इस दिशा में काफी तेजी से कदम उठा रही है. HPCL ने कहा है कि ये नई गाइडलाइंस 25 मई 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं. नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बदले हुए नियम के बारे में खुद को अपडेट रखें और बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से गैस सप्लाई का लाभ उठाने के लिए इन नए नियमों का पालन करें. यह पूरा फैसला असल में सरकार के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस अमेंडमेंट ऑर्डर 2026 के तहत लिया गया है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने नोटिफाई किया है।

इस समय इस तरह के कड़े और सूझबूझ वाले नियमों की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर गैस और ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. मध्य पूर्व में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे भारी तनाव और संकट की वजह से दुनिया भर में गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत की स्थिति बन गई है, जिससे कच्चे माल और गैस के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत की एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर हमारे देश की घरेलू गैस सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

कैसे मिलेगी गैस की सुविधा
नियम ये है कि पीएनजी लगवाने के 30 दिनों के भीतर आपको अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन बंद करने की अर्जी देनी होगी, लेकिन इसका फायदा ‘ट्रांसफर वाउचर’ में है. अगर आप कल किसी ऐसे शहर या इलाके में शिफ्ट होते हैं, जहां पाइप वाली गैस नहीं है, तो बस ये वाउचर दिखाइए और अपना सिलेंडर वाला कनेक्शन फिर से चालू करवा लीजिए. यानी कि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेपरवर्क की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

किसके लिए है ये काम की खबर?
खासकर उन लोगों के लिए जो काम के सिलसिले में शहर-दर-शहर भटकते हैं, या फिर वो छात्र जो रेंट पर रहते हैं. अब आप बेफिक्र होकर पीएनजी अपनाएं, क्योंकि सुरक्षा और सुविधा के बीच अब आपको किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सरकार का यह कदम वाकई में आम आदमी की ‘किचन लाइफ’ को बहुत सहूलियत देने वाला है।

कुल मिलाकर, यह नियम उन लोगों के लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं है जो बार-बार घर बदलते हैं. अब ‘ट्रांसफर वाउचर’ के जरिए आपकी गैस की गाड़ी कभी नहीं रुकेगी. बस अपने पेपर संभाल कर रखिए और बेफिक्र होकर अपनी रसोई को स्मार्ट बनाइए।

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज संकट के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार के लिए अपने घरेलू संसाधनों का सही और सटीक इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है. यही वजह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह नया संशोधन उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है जिनकी नौकरियां ट्रांसफरेबल हैं या जो अक्सर घर बदलते रहते हैं. सरकार ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले छात्रों को भविष्य में कोई दिक्कत न हो. मान लीजिए आज आप किसी ऐसे फ्लैट में रह रहे हैं जहां पीएनजी लगी है, लेकिन कल को किसी कारण से आपको किसी ऐसी जगह जाना पड़े जहां अभी पाइपलाइन नहीं बिछी है, तो आपके पास मौजूद ट्रांसफर वाउचर सिस्टम ही आपके काम आएगा।

यह नया नियम असल में केंद्र सरकार के ‘एक घर, एक गैस कनेक्शन’ वाले बड़े अभियान का एक अहम हिस्सा है. सरकार का मुख्य उद्देश्य डुप्लिकेट एलपीजी कनेक्शनों के इस्तेमाल पर लगाम लगाना, सब्सिडी का फायदा सीधे सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और होर्मुज संकट जैसी वैश्विक दिक्कतों के बीच एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी बाजारों में से एक है, जहां एचपीसीएल, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले और मार्केट रेट वाले सिलेंडरों की डिलीवरी करती हैं, इसलिए इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और व्यवस्थित करना बेहद जरूरी हो गया था।

8वें वेतन आयोग से पहले पेंशन पर बड़ा फैसला संभव, OPS विकल्प पर बढ़ी चर्चा

 नई दिल्‍ली

देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर बैठक चल रही है. इस बीच, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन स्‍ट्रक्‍चर को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रिटायरमेंट सिस्‍टम के तहत सरकारी कर्मचारियों को अपनी पेंशन विकल्‍प चुनने में ज्‍यादा लचीलापन देने के संबंध में चर्चा चल रही है।

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी संघ के एक सदस्य ने बताया कि अगर बातचीत सकारात्मक तौर पर जारी रहती है, तो अगले दो से चार महीनों के भीतर प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

अपनी पसंद की पेंशन सेलेक्‍ट करने का विकल्‍प
पेंशन में लचीलेपन और कर्मचारियों की पसंद को लेकर पॉजिटिव बातचीत हो रही है. कर्मचारी रिटायरमेंट बेनिफिट्स के संबंध में ज्‍यादा क्लियरटी और सुरक्षा चाहते हैं. अगर बातचीत सही रहती है और प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो आगे कर्मचारियों को अपनी पसंद का पेंशन मिल सकता है।

पुराने पेंशन बहाली की मांग
यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि चल रहे 8वें वेतन आयोग के परामर्शों के दौरान NPS वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन संबंधी चिंताएं सबसे बड़े मुद्दों में से एक के रूप में उभरी हैं. इनमें से ज्‍यादातर कर्मचारी पुराने पेंशन बहाली को लेकर आयोग से मांग कर रहे हैं।

अभी NPS के जरिए मिलता है पेंशन
अभी 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती किए गए ज्‍यादातर केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्‍टम के तहत आते हैं, जो कंट्रीब्‍यूशन बेस्‍ड है और मार्केट के प्रदर्शन पर रिटर्न मिलता है. NPS के तहत कर्मचारी अपने सैलरी का एक हिस्‍सा पेंशन में योगदान देता है, जबकि सरकार भी अलग से योगदान देती है।

इसके बाद, मार्केट रिटर्न और जमा फंड पर निर्भर करता है कि आपको कितना पेंशन मिलेगा. जबकि पुरानी पेंशन योजना (OPS) अंतिम प्राप्त वेतन और महंगाई भत्ता (DA) से जुड़ी गारंटीकृत पेंशन देती थी।

यूपीएस का भी है विकल्‍प
हाल ही में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) शुरू की है, जो कंट्रीब्‍यूश्‍न बेस्‍ड पेशन को कुछ तय पेंशन सुरक्षा देती है. चर्चाओं में शामिल कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, नए प्रस्‍ताव से कर्मचारियों को पेंशन सिस्‍टम के भीतर अलग-अलग पेंशन विकल्‍पों में से चुनने की अनुमति मिल सकती है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा आश्वासन, बोले- किसी भी छात्र की शिकायत लंबित नहीं रहेगी

नई दिल्ली

CBSE की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और छात्रों के हित में बनाई गई है. उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन कर छात्रों को भरोसेमंद और निष्पक्ष परिणाम देने की कोशिश की गई है. CBSE OSM में गड़बड़ियों पर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत अनसुलझी नहीं रहेगी।

40 करोड़ पेज स्कैन:पहली बार हुआ इतना बड़ा डिजिटल मूल्यांकन
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी. इन परीक्षाओं में लगभग 98 लाख आंसर शीट्स को सुरक्षित रखा गया. हर आंसर शीट औसतन 40 पन्नों की थी यानी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए.उन्होंने कहा कि CBSE ने पहली बार OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए मूल्यांकन किया जो दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज और संस्थानों में तेजी से अपनाई जा रही आधुनिक प्रणाली है।

छात्रों के लिए फायदेमंद
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक OSM पूरी तरह स्टूडेंट फ्रेंडली सिस्टम है. इससे छात्रों को अपने अंकों की जानकारी पारदर्शी तरीके से मिलती है और मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बढ़ता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

आंकड़े खुद बता रहे हैं छात्रों का भरोसा
बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक कुल 18.57 लाख पंजीकृत छात्रों में से केवल 4.06 लाख छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया.OSM के तहत कुल 98.66 लाख आंसर बुक्स स्कैन की गईं, जबकि 11.38 लाख आंसर बुक्स ही देखने के लिए मांगी गईं. इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं।

अफवाहों से निपटने के लिए CBSE की सख्त रणनीति
OSM एक तकनीक आधारित सुधार है इसलिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अफवाहों से बचने के लिए मजबूत कम्युनिकेशन रणनीति अपनाई.CBSE ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स @cbseindia29 के जरिए लगातार जानकारी दी, ताकि गलत या भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जा सके और सिस्टम की संरचना व सुरक्षा उपायों को समझाया जा सके।

केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील
बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर छात्रों, अभिभावकों और मीडिया से अपील की है कि वे असत्यापित और सनसनीखेज सोशल मीडिया दावों से बचें और केवल CBSE वेबसाइट पर जारी आधिकारिक सर्कुलर पर ही भरोसा करें. इस पूरे माहौल में कई छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल सामने आए हैं और उन्होंने OSM के जरिए हुई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं.CBSE ने साफ किया है कि बोर्ड ने न तो कोई लिखित आदेश जारी किया है और न ही किसी पर दबाव डाला गया है कि वे इस प्रक्रिया के समर्थन में बयान दें।

केरल में लेट हुआ मॉनसून, जानिए दिल्ली-UP में कब तक होगी बारिश की एंट्री

नईदिल्ली

मॉनसून कहां है और कब तक दस्तक देगा। भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में यही सवाल जारी है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले संभावनाएं जताई थीं कि 26 मई के आसपास मॉनसून केरल में एंट्री कर सकता है। हालांकि, अब दो दिन गुजर चुके है और बारिश भी जारी है, लेकिन मॉनसून का ऐलान अब तक विभाग ने नहीं किया है।

विभाग ने यह भी कहा था कि राज्य में इसकी दस्तक में चार दिन की जल्दी या देरी हो सकती है। पिछले साल मॉनसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी थी।

क्यों मॉनसून को हुई देरी
केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन संभावनाएं जताई जा रही थीं कि बारिश समय से पहले दस्तक दे सकती हैं। माना जा रहा है कि देरी की वजह मॉनसूनी हवाओं का कमजोर होना है। एक और वजह केरल तट के पास लगातार बारिश नहीं होना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।

खबरें हैं कि मॉनसूनी हवाओं के कमजोर होने की वजह बंगाल की खाड़ी पर बन रहा चक्रवात है। इसके चलते मॉनसून में देरी हो रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि मॉनसून की रफ्तार में आई सुस्ती ज्यादा चिंता की बात नहीं है।

अभी कहां हैं मॉनसून
मौसम विभाग के गुरुवार को बताया है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने को लेकर स्थिति अनुकूल बनी हुईं हैं। अगले 2-3 दिनों में मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ सकता है।

भारत में 70 फीसदी से अधिक सालाना बारिश मॉनसून के महीनों में होती है। इसके मद्देनजर इस मौसम को कृषि, पेयजल आपूर्ति, पनबिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन और भूजल पुनर्भरण के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

दिल्ली कब तक पहुंचेगा मॉनसून
संभावनाएं जताई जा रही हैं कि मॉनसून 1 जून तक केरल और तमिलनाडु पहुंच सकता है। इन राज्यों में मॉनसून के पहुंचने की सामान्य तारीख है। वहीं, भीषण गर्मी का सामना कर रही राजधानी दिल्ली को मॉनसून की बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। यहां मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 30 जून है। इसके अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों में 25 जून, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 15 जून है।

यहां हो सकती है बारिश
IMD का पूर्वानुमान है कि पश्चि
म और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 से 31 मई तक बारिश के आसार हैं। वहीं, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड में 28 से 30 मई, हिमाचल प्रदेश में 28 और 29 मई को बारिश हो सकती है। बिहार में 28, 29 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 28 मई, ओडिशा में 29 और 30 को बारिश के आसार हैं।

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